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Hindi/Urdu Poems

Hindi/Urdu Poems

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Kanal postlari
तुम सत्ता के मद में बैठे हुए हमको आँख दिखाते हो, हमारे सामने शीश झुकाकर हमको ही मरवाते हो। तुम कहते हो हमको हम देशद्रोही, और आतंकवादी हैं... हम वंदे मातरम् गाते हैं, तुम बंदूक चलाते हो। हम फूल तुम्हें पकड़ाते हैं, तुम लाठियाँ बरसाते हो। हम उठाते संविधान को, तुम हमसे डरते जाते हो। और तुम्हारी हकीकत इतनी-सी है... अपराधियों को संसद में बैठाकर, निर्दोषों पर आरोप लगाते हो। मीडिया को खरीदकर, दोस्तों को देश बेचते जाते हो। इंकलाब को देशद्रोह बताते हो, और शिक्षकों के सम्मान को दो कौड़ी का बताते हो। शर्म करो, अब तो सत्ताधारी, क्यों सत्ता के मद में चूर बैठे हो? लोकतंत्र के स्तंभों को तोड़कर, हमको कॉकरोच बताते हो। पर याद रखो, सत्ता का लोभ धृतराष्ट्र बनाता है, और हर युग में, कोई आए न आए, एक कृष्ण ज़रूर आता है। आज सड़कों पर लाखों कृष्ण हैं, तुम कैसे इनसे बच पाओगे? जिनके नाम से सत्ता में आए थे, अब उनसे कैसे लड़ पाओगे? #Bhagyashree #review 23 july 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

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एक रातरानी एक खामोशी… है जो शाखों पर एक अनंत चमक उसका कारण एक रातरानी एक ख़ामोशी … है जो खूबसूरती हर लम्हे में मौजूद उसका कारण एक रातरानी एक ख़ामोशी… है जो सर्द हवाओं में एक भीगी खुशबु उसका कारण एक रातरानी एक ख़ामोशी … है जो बादलों में एक सदा सी गूंज उसका कारण एक रातरानी एक खामोशी…. है जो कॅनव्हास पर अदृश्य सी छबी उसका कारण एक रातरानी एक खामोशी… है जो उसकी बातों में दिलकश दिलकशी उसका कारण एक रातरानी एक खामोशी… है जो बेसब्री इंतजार की हरपल उसका कारण एक रातरानी एक खामोशी… है जो नैनों को बैचेनी पल पल उसका कारण एक रातरानी एक खामोशी… है जो इतनी गहरी खामोशी उसका कारण एक रातरानी एक खामोशी… है जो समुद्र किनारा निःशब्द उसका कारण एक रातरानी एक खामोशी… एक रातरानी एक खामोशी हरदम रहे साथ साथ निरंतर… #anil #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मैं तुम्हारे लिय लिखना छोड भी दु तो क्या तुम पहले जैसे हो पाओगे मैं तेरा शहर छोड भी दु तो क्या तुम मुझे ढुढते हुए आओगे मैं सारी गलती अपनी मान भी लु तो क्या तुम रिश्ता पहले जैसे निभा पाओगे मेरी नादानियो के लिय क्या तुम अपनी समझदारी छोड कर आओगे.... #Sangitasalvi #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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ये आज़ादी का परवाना भगतसिंह-सा डोलेगा, मेरे लहू का कतरा-कतरा भी इंकलाब बोलेगा। #Bhagyashree #review 22 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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ज़िंदगी एक सफ़र है और हम सब मुसाफ़िर, और इस सफ़र में हमें कई और मुसाफ़िर मिलेंगे हो सकता है की कुछ के साथ हमें कुछ क़दम या कुछ दूर चलना भी पड़े, तो चलना, लेकिन जब मोड़ आये तो तुम अपने रास्ते चलना और उसे उसके रास्ते जानें देना, और अपना सफर जारी रखना, अपने रास्ते को छोड़ उसके साथ मत चल देना और न ही उसे अपने साथ चलने को कहना, क्यूंकि तुम दोनों की मंज़िल अलग होगी और रास्ते भी, एक नहीं तुम्हे इस सफ़र में न जाने कितने मुसाफ़िर मिलेंगे, लेकिन तुम किसी के लिए रुकना मत, न ही किसी के लिए अपने रास्ते को बदलना और न ही किसी के भी साथ चल देना, तुम अपना सफ़र खुद ही तय करना, किसी के ख़ातिर थमना मत, एक बात का ख़्याल रखना, कि तुम भी मुसाफ़िर और वो भी मुसाफ़िर और किसी मुसाफ़िर की ख़ातिर अपनी मंज़िल नहीं भूलते, जब कोई अपने रास्ते जा रहा हो तो बेहतर होगा की उसे जाने दो और तुम भी अपने रास्ते को मत छोड़ो, और हां एक बात का ख़ास ख़्याल रखना कि..., "मुसाफिरों से कभी दिल नहीं लगाते" ~ अनुष्का #anushka #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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Kyuu mujhe itna tadpati ho ishq kisi aur se krti ho aur mere pas apna akelapan mitati ho Tumne alfazo se to mohabbat ko meri inkar kiya Par tumhare girte aasauo ne phir kya jhoot bayan kiya Kyuu tum use chhod nhi paati ho Kyu tum mujhse aapni mohbbat chupati ho #akshay #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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7
Humari nazar jo nazar dhundhti hai, Ye dard-e-dilo ki shifa dhundhti hai. Mohabbat ki raahon mein bhatke hain aese, Ki ab har duaa bas khuda dhundhti hai. Zamane ke rishton mein dhokhe hain itne, Ki ab rooh bas ek wafa dhundhti hai #suhani #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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8
Main pehle hi zindagi se lad rahi thi. Family ka pressure, career ka confusion, paison ki tension... Physical pain, mental pain, emotional pain — har dard pehle se hi meri zindagi ka hissa tha. Phir bhi har roz tumse muskura kar baat karti thi. Tumhari har pareshani mein tumhare saath khadi rahi, jitna ho saka tumhara saath diya. Lekin maine kabhi apne dard ki shikayat tumse nahi ki. Bas jab mujhe bhi tumhare thode se saath ki zarurat thi... kisi aise insaan ki, jo bina kahe mujhe samajh leta. Lekin usi waqt tumne mera haath chhod diya. Tumne mujhe us mod par akela kar diya, jahan mujhe tumhari sabse zyada zarurat thi. Jab main andar hi andar bikharne ke itne kareeb thi, usi waqt tum mujhse door chale gaye. Shayad tumhe kabhi ehsaas bhi na ho ki us waqt mere dil aur meri zindagi par kya beet rahi thi. Actually, main weak nahi hoon... bas akeli hoon. #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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9
एक कलम, एक किताब, एक तिरंगा, एक फूल लेकर निकले थे वो, बस एक सवाल लेकर... एक जवाब की आस में... मगर, सरकार, आपने जवाब की जगह दिए अनगिनत घाव, लाठियों की मार, अनगिनत आँसू, और साथ में 'देशद्रोही' की उपाधि। सरकार, अब आप ही बताइए, क्या यही आज़ादी है? क्या यही लोकतंत्र है? अरे, सच तो यह है, सरकार, आप खुद ही देशद्रोही है.. #Bhagyashree #review 21 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
187
10
फूल सरीखे कोमल बच्चे, हाथों में फूल लिए आए थे। एक किताब संविधान की, संग अपने वे लाए थे। कुछ सवाल थे उनके मन में, जिन्हें शब्दों में पिरो लाए थे। तुम सत्ता के मद में बैठे शासक, तुमको कहाँ न्याय दिखता है? हर उठते हुए सवाल का बस कठोर जवाब ही दिखता है। जो भविष्य की बात करें, क्या उनकी आवाज़ दबा दोगे? लोकतंत्र के इस आँगन में क्या प्रश्नों को भी सज़ा दोगे? अरे, यह मत भूलो अभिमानी, सत्ता जनता से चलती है। जनता के विश्वास बिना हर कुर्सी एक दिन ढलती है। बहुत हुआ अधर्म और अन्याय, अब परिवर्तन बोलेगा। भारत के हर कोने से साहस फिर से डोलेगा। भगत सिंह के आदर्शों का हर दिल में उजियारा होगा, न्याय, समानता और आज़ादी का फिर से नया नज़ारा होगा। #Bhagyashree #review 21 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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कफ़न पर सिर रखकर सो जाऊं मैं भी सुना है उस पे नींद बड़ी गहरी आती है ऐसे हादसे मगर, कहाँ रोज-रोज होते हैं #Bhagyashree #review 8 March 2026 (काव्य शैली ~त्रिवेणी) 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
238
12
कोइ मिल ही जायेगा मुझे मेरे जैसा .... बस इस वक्त को तो गुज़र जाने दो ....!! #sangitasalvi #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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देश का अनुशासन सीमा पर तैनात है, स्वास्थ्य,अस्पताल में बीमार है।। वर्तमान,आफिसों में परेशान हैं, भविष्य,आज भी कक्षा के बाहर हैं ।। देश कि ग़रीबी,भुखमरी का शिकार हैं, राजनीति,चाटुकारों पर मेहरबान हैं।। भ्रष्टाचार को अफसरों पर गुमान है, और आम आदमी आज भी नादान है।। देशभक्ति कि बातें आजकल शांत है, बेड़ियों में बंधकर इतिहास पर नाज़ हैं।। झूठे भाषण पर तालियों की सौगात है, हकीकत की स्थिति सच में बेकार है।। देश कि शिक्षा,पैसों की मोहताज है, सुरक्षा भी आजकल गुंडों के हाथ है ।। समाजसेवा का अलग ही अंदाज है, देश के हालात आजकल नासाज़ है।। #Bhagyashree #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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दिन तो गुज़ार लेती हूँ, ऐसा-वैसा कुछ भी करके। मुर्शिद, मसला तो इन रातों का है, कमबख्त आसानी से कटती नहीं हैं। दिन की भीड़ में खुद को बहला लेती हूँ, ज़िम्मेदारियों के पीछे हर दर्द छुपा लेती हूँ। मगर जैसे ही रात अपनी चादर ओढ़ती है, तेरी यादें मेरी तन्हाई को फिर से जगा देती हैं। नींद आँखों तक तो आती है, पर पलकों पर ठहरती नहीं। तेरे ख़्यालों की हल्की-सी आहट भी, पूरी रात मुझे सोने नहीं देती। चाँद भी अब अधूरा-सा लगता है, सितारे भी ख़ामोश नज़र आते हैं। हर रात तेरा नाम लेकर शुरू होती है, और तेरी यादों पर ही ख़त्म हो जाती है। सुबह फिर मुस्कुरा देती हूँ, जैसे कुछ हुआ ही न हो। मगर मुर्शिद... मेरे चेहरे की मुस्कान से धोखा मत खाना, असली जंग तो हर रात मेरे दिल और मेरी यादों के बीच होती है। #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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दिन तो गुज़ार लेती हूँ, ऐसा-वैसा कुछ भी करके। मुर्शिद, मसला तो इन रातों का है, कमबख्त आसानी से कटती नहीं हैं। दिन की भीड़ में खुद को बहला लेती हूँ, ज़िम्मेदारियों के पीछे हर दर्द छुपा लेती हूँ। मगर जैसे ही रात अपनी चादर ओढ़ती है, तेरी यादें मेरी तन्हाई को फिर से जगा देती हैं। नींद आँखों तक तो आती है, पर पलकों पर ठहरती नहीं। तेरे ख़्यालों की हल्की-सी आहट भी, पूरी रात मुझे सोने नहीं देती। चाँद भी अब अधूरा-सा लगता है, सितारे भी ख़ामोश नज़र आते हैं। हर रात तेरा नाम लेकर शुरू होती है, और तेरी यादों पर ही ख़त्म हो जाती है। सुबह फिर मुस्कुरा देती हूँ, जैसे कुछ हुआ ही न हो। मगर मुर्शिद... मेरे चेहरे की मुस्कान से धोखा मत खाना, असली जंग तो हर रात मेरे दिल और मेरी यादों के बीच होती है। #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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जब संविधान को कदमों में रखकर सत्ताधारी शीर्ष पर चढ़ जाएँ, जब जनता के मौलिक अधिकारों को सरेआम कुचला जाए। जब मौलिक अधिकारों, मानवाधिकारों एवं वैधानिक अधिकारों को केवल किताबों में पढ़ाया जाए, तब संविधान उठाना आवश्यक है, सत्ताधारी शासकों को दुबारा संविधान पढ़ाना आवश्यक है। #Bhagyashree #review 19 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
289
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रोता हुआ छोड़ गया वो इंसान... जो हर बात पर कहता था, "रोना मत... तुम्हें मेरी कसम है।" 💔 आज वही मेरी आँखों में इतने आँसू छोड़ गया है, कभी मेरी छोटी-सी उदासी देखकर बेचैन हो जाता था, और आज... मेरी चीख़ती हुई ख़ामोशी भी उसे सुनाई नहीं देती। तुम कहते थे, "जब तक मैं हूँ, तुम्हारी आँखों में आँसू नहीं आने दूँगा।" फिर ऐसा क्या बदल गया, कि उन्हीं आँखों को उम्र भर तुम्हारे जाने के बाद ज़िंदगी तो चल रही है, मगर जीने का एहसास कहीं पीछे छूट गया है। अब हर रात तकिए पर सिर नहीं, अपना टूटा हुआ दिल रखकर सोती हूँ... और हर सुबह एक झूठी मुस्कान पहनकर दुनिया के सामने आ जाती हूँ। शायद तुम्हें कभी एहसास भी न हो, कि तुम्हारे जाने से मैंने सिर्फ़ तुम्हें नहीं खोया... मैंने खुद को भी खो दिया। तुम तो चले गए... लेकिन अपने साथ मेरी हँसी, मेरा सुकून, और मेरी पूरी दुनिया भी ले गए। काश... एक बार मुड़कर देख लेते, तो समझ जाते... कि जिसे तुम रोने से मना करते थे, आज वही तुम्हारे जाने के बाद हर रोज़ चुपचाप रोती है...! 🥀 #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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https://t.me/HindiPoetry?videochat=dec4710973013c426d
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𝑲𝒂𝒈𝒂𝒛 𝒌𝒆 𝒕𝒖𝒌𝒅𝒆 𝒃𝒊𝒌 𝒈𝒂𝒚𝒆, 𝒎𝒆𝒉𝒏𝒂𝒕 𝒃𝒊𝒌 𝒈𝒂𝒚𝒊 𝑺𝒂𝒑𝒏𝒆 𝒃𝒆𝒄𝒉 𝒅𝒊𝒚𝒆 𝒋𝒊𝒏𝒉𝒐𝒏𝒆, 𝒊𝒛𝒛𝒂𝒕 𝒃𝒊𝒌 𝒈𝒂𝒚𝒊 𝑻𝒖𝒎 𝒂𝒂𝒘𝒂𝒛 𝒃𝒂𝒏𝒆 𝒖𝒔𝒔 𝒂𝒏𝒅𝒉𝒆𝒓𝒆 𝒎𝒆𝒊𝒏 𝑺𝒐𝒏𝒂𝒎 𝒔𝒊𝒓 𝑱𝒂𝒃 𝒉𝒂𝒓 𝒖𝒎𝒆𝒆𝒅 𝒌𝒂 𝒅𝒆𝒆𝒑𝒂𝒌 𝒃𝒂𝒂𝒓-𝒃𝒂𝒂𝒓 𝒃𝒖𝒋𝒉 𝒈𝒂𝒚𝒂 𝑷𝒓𝒐𝒕𝒆𝒔𝒕 𝒏𝒂𝒉𝒊 𝒚𝒆, 𝒚𝒆 𝒋𝒖𝒏𝒐𝒐𝒏 𝒉𝒂𝒊 𝒌𝒂𝒍𝒂𝒎 𝒌𝒂 𝑲𝒊 𝒉𝒂𝒓 𝒃𝒂𝒄𝒄𝒉𝒆 𝒌𝒐 𝒖𝒔𝒌𝒂 𝒉𝒂𝒒, 𝒖𝒔𝒌𝒂 𝒊𝒎𝒕𝒊𝒉𝒂𝒏 𝒎𝒊𝒍𝒆 𝒕𝒂𝒎𝒂𝒂𝒎 𝒌𝒂 #mrpavan143 #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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She :- एक सवाल पूछूं, वो लोग जो बिछड़ जाते हैं कहानियों में कभी इत्तेफ़ाक़ से,तो कभी भाग्य से क्या वो लोग भी मिलते होंगे कभी..कहीं पर या रह जाते हैं केवल बिछड़कर He :-जब भी कोई कहानी लिखी जाती है तब ध्यान रखा जाता है कि, कहानी का अंत खुशनुमा हो.. किंतु, हर बार ऐसा ही हो जरूरी तो नहीं कुछ बार अंत दर्दभरा होता है इसलिए नहीं कि, लेखक निर्दयी या भावनाहीन है, बल्कि इसलिए कि, ये अंत ज़रुरी था,कुछ सिखाने के लिए एक नयी कहानी बनाने के लिए जैसे, सागर से मिलने के लिए, नदियों को छोड़ना पड़ता है साथ पहाड़ों को.. जैसे गुंजते रहते है वो सारे शब्द जो कभी कहें थे किसी ने ब्रह्मांड के किसी छोर से.. और मिलते हैं ब्रह्मांड के किसी छोर पर She:-जब मिलते हैं अनंत पर सभी या जीवन के किसी मोड़ पर फिर क्यों नहीं मिलते ये चंदा और सुरज कभी या तुम और मैं कभी He:- ये वक्त जो चल रहा है अभी किसी दुनिया में गुजर चुका होगा तुम और मैं बिछड़ चुके हैं अभी पर कहीं तो एक-दूजे को पाया होगा तुम कहती हो.. क्या मिलना संभव नहीं है अब, अब कैसे तुमको समझाऊं अब से हर एक जन्म में तुमको मुझसे मिलना होगा या तो कुछ पल के लिए या अनंतकाल तक साथ चलना होगा #Bhagyashree #review 29 april 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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