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Hindi/Urdu Poems

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वो गुज़री हुई मोहब्बत पास नहीं आती, उसको मेरी याद कुछ ख़ास नहीं आती। जिन्हें रास आई हो, उन्हें मुबारक हो, ये ज़िंदगी है, सबको रास नहीं आती। #Bhagyashree #review 9 july 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

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पत्थर बन गया मै,अब आईना नहीं हूं, जो दिखा सकू मै तुझको तेरी बेरुखी का चेहरा।। #review #Parveen 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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वो जो थोड़ी देर और ठहर जाते, ये दिल उम्रभर को ठहर जाता, जनाब। शायद... उनका यूँ सफ़र अधूरा छोड़कर चले जाना ही बेहतर था। #Bhagyashree #review 8 july 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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फटी धोती में सिमटा था कभी होरी का वो जीवन, पछाईं गाय की हसरत, महाजन का वो बढ़ता ऋण। धनिया की सजल आँखों में सदियों की मूक व्यथा थी, गोदान की चौखट पर दम तोड़ती इक गाथा थी। ​सदी बदली, नगर चमके, मगर वो बेबसी न घटी, खेत छूटे तो दफ़्तर के क्यूबिकल में साँस घुटी। टारगेट और डेडलाइन तले पिसती रही ये काया, कंक्रीट के इस जंगल ने बस नया फ़रेब रचाया। ​बही-खाता महाजन का अब ई.एम.आई. में बदल गया, क्रेडिट कार्ड की किस्तों में हर सपना फिसल गया। सूट-बूट के पीछे क़ैद हैं बस खोखली मुस्कानें, सुविधाओं के इस बाज़ार में गुम हो गए ठिकाने। ​तब गाय पाना सपना था, यहाँ सुकून पाना सपना है, लाखों की इस अंधी भीड़ में कोई न अब अपना है। प्रेमचंद की स्याही का वो दर्द आज भी ज़िंदा है, पगडंडी का वो आँसू, महानगर में शर्मिंदा है। #review #NaveenJoshi 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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अंबर चाहता है धरती को, ये कहानी बहुत मशहूर है मगर अंबर के बरस जाने में बूंदों का क्या कसूर है #Bhagyashree #review 5 July 2026 Metaphors:- अंबर - पुरुष धरती - प्रेमिका बूंद - पत्नी 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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इक दाग़ को मैने चांद कहा वो रौशन रौशन प्यारे थे, एक दूर कहीं एक पास मेरे दो धरती के सितारे थे।। #Parveen #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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प्यार से बात करके वो रोज़ धोखा देता रहा, लौटकर आया भी तो वही पुराना फरेब साथ लाया था। मैंने ठुकरा दिया उसे अपनी ही खुददारी की खातिर, वरना ये टूटा हुआ दिल आज भी उसी की बाहों में जाना चाहता था। #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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रातों की इन गहराइयों में, कोई अपनापन ढूंढती हूं, बिखरे हुए ख्वाबों में खुद का, वही पुराना बचपन ढूंढती हूं। जिंदगी के सफर में बस चलती जा रही हूं, हर मोड़ पर नया दर्द छुपाती जा रही हूं। जो रिश्ते थे कभी अपने, वे बेगाने हो गए, खुद को ही ढूंढते-ढूंढते न जाने कहां खो गई हूं। #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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सच के जितने भी चेहरे हैं, दिखाए जाएँ तो अच्छा रहेगा, अब इल्ज़ामों से आगे भी कुछ बताया जाए तो अच्छा रहेगा। तुम्हारी बस्ती में अदालत सजी है, हमें ऐतराज़ नहीं, बस हमारे हिस्से का सच भी सुनाया जाए तो अच्छा रहेगा। तुमने कहा हम बेवफ़ा थे—मान लिया सबने, अब वो रातें भी गिनाई जाएँ जब हम रोए थे तो अच्छा रहेगा। मेरे ख़िलाफ़ गवाही देने वाले बहुत हैं तेरे शहर में, मेरे मोहल्ले से कोई मेरा हाल बताने आए तो अच्छा रहेगा। जिन ख़तों में मैंने तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा लिखा था, वो भी अदालत में पढ़े जाएँ तो अच्छा रहेगा। तुम सिर्फ़ मेरे जाने की कहानी सुना रही हो सबको, कभी ये भी बताओ—मुझे जाने पर किसने मजबूर किया था। फ़ैसला अगर मेरे ख़िलाफ़ ही लिखना है तो लिख दो, बस मेरे आँसुओं को भी सबूत माना जाए तो अच्छा रहेगा। और जब सज़ा सुनाई जाए मेरी मोहब्बत के जुर्म में, तो आख़िरी बार मेरा नाम तुम्हारी ज़ुबान से लिया जाए तो अच्छा रहेगा। — लेखक प्रदीप रोका #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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💗✨ दीदार की आग दिल में लगती है, तब देखने को,आँखें तरसती हैं🌹 बारिश का इंतजार नहीं रहता तेरी याद में आँखें,खुद बरसती है.... #review ❤️🌷 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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घर से भागी लड़कियां सदैव से रही है समाज के लिए कलंक मगर, चूल्हे पर जलती लड़कियां सड़कों पर मरती लड़कियां हैवानों से बचती हुईं.. ये डरी-सहमीं सी लड़कियां शायद! नहीं है हिस्सा समाज का.. #Bhagyashree #review 30 june 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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उसकी गली से अब कोई रास्ता निकालना नहीं, वो कैसी है, ये किसी से पूछकर दिल जलाना नहीं। उसका नम्बर आज भी याद है मुझे लफ़्ज़-ब-लफ़्ज़, बस अपने हाथों को अब उस नम्बर तक ले जाना नहीं। कभी कोई उसका ज़िक्र छेड़े तो मुस्कुरा देता हूँ, मैंने सीख लिया है हर दर्द दुनिया को बताना नहीं। वो जिसके एक "कैसे हो?" पर रातें सँवर जाती थीं, अब उसके सामने भी पड़े तो हाल-ए-दिल सुनाना नहीं। मैंने तस्वीरें मिटा दीं, ख़त जला दिए, सब ठीक है बस जो सीने में बचा है, उसे कोई मिटाना नहीं। हाँ, एक तमन्ना अब भी कहीं साँस लेती है मुझमें, मगर उस तमन्ना का ज़िक्र ख़ुद से भी दोहराना नहीं। कभी बरसों बाद किसी मोड़ पर वो मिल जाए अगर, मेरी आँखों… तुम उस वक़्त मुझे बेवफ़ा बताना नहीं। वो ठहरकर देखे मुझे, पुराने नाम से पुकारे, कहे "इतनी जल्दी भूल गए… मैं हूँ।" और मैं सारी उम्र की मोहब्बत अपनी काँपती आवाज़ में दफ़्न करके कहूँ "माफ़ कीजिएगा… चेहरा कुछ जाना-पहचाना है, मगर… आपको पहचाना नहीं।" फिर वहाँ से गुज़र जाना है बिना पीछे देखे, क्योंकि जिसे भूलने में पूरी उम्र लगी हो ‘प्रदीप’, उसे एक मुलाक़ात में फिर से अपना बनाना नहीं। — लेखक प्रदीप रोका #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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आयी हूं फिर लौट कर,पुराने उस खुमार में, मिलेंगे क्या गुलिस्तां वही उजड़े इस बहार में।। #Parveen #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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डूबा हुआ शहर तेरा,थे अधमरे हालात थे टपका नहीं अम्बर तो ,फिर कैसी ये बरसात थी ।। #Parveen #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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बेखबर हुए कभी, बेहोशी की रवाँ चली आंधियों से आगे भी , सिसकती इक हवा चली । आंखों की नमी कभी रही कभी ठिठुर गई आया होश आंसुओं से, चिलमन को भी सुलगा चली।। #Parveen #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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🌸🪷 मोहतसिब ने जो निकाला हमें मयख़ाने से दूर तक आँख मिलाते गए पैमाने से आज तो ख़ुम ही लगा दे मिरे मुँह से साक़ी मेरी निय्यत नहीं भरती तिरे पैमाने से #review 💗💞 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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❤️💗 कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं, खामोशियों से टूट जाते हैं, कुछ लोग पास रहकर भी बहुत दूर हो जाते हैं। हम समझते रहे कि वक्त सब बदल देता है, मगर सच ये है कि वक़ बदलते ही सब बदल जाते है #review 🌸💗 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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हम भी , आप भी... हम भी , आप भी... बेरुखी भी हम भी, आप भी... सादगी भी हम भी, आप भी... शब्द भी अंगार भी हम भी, आप भी... बर्फ सा शीतल मौन भी हम भी, आप भी... चुपके से छू गई बेरुखी की हवा भी हम भी, आप भी... मन के चलचित्र पर दो बुँदे ओस की भी हम भी, आप भी... कैसे कहे दिल की कश्मकश भी हम भी, आप भी... काग़ज़ के लम्हों में बूँद बूँद बेरुखी की बरसात भी हम भी, आप भी... दिल के कोहरे में बेरूखी की बात भी हम भी, आप भी... किसी पुस्तक में अनजाने राहों के निशान भी हम भी, आप भी... संध्या में ढलने लगी एक और बेरुखी भी हम भी, आप भी... छाँव की पलकों में आभा का आभास भी हम भी, आप भी... एक अफ़साना बेरुखी का भी हम भी, आप भी... रेगिस्तान की लकीर में एक अनजान आवाज भी हम भी, आप भी... एक मुकम्मल ख़ामोशी भी हम भी, आप भी... बेरुखी के रंग में छुपी सी कहानी भी हम भी, आप भी... दिल की मुंडेर पर बैठा बेरुखी का पंछी भी हम भी, आप भी... बेरुखी निभाने का हुनर भी हम भी, आप भी... जर्द पत्तो की यादों में एक याद और भी हम भी, आप भी... मन की डाली से गिरते हैं बेरुखी के अश्क भी हम भी, आप भी... गुम जाते है जहाँ लफ्ज़ों के नादान जहाज भी हम भी, आप भी... आप भी,हम भी हम भी, आप भी... पुराने ज़ख्मों की महक भी हम भी, आप भी... चमन में खार भी, चमन में गेंदे के फूल भी हम भी, आप भी... ग़म का कोई गाव भी, बेनाम खुशियों का शहर भी हम भी, आप भी... अधूरी बातों की पूरी तमन्ना भी हम भी, आप भी... आज के लहज़े में कल की बेरुखी भी हम भी, आप भी... मन के भावों के आँगन में बेरुखी का शज़र भी हम भी, आप भी... चंद्रमा की किरणों से कौमुदी की हँसी भी हम भी, आप भी... साधारण से शब्दों का गहन अर्थ भी हम भी, आप भी... नींद की पलकों से जागे स्वप्न भी हम भी, आप भी... टिक-टिक घडी की धून में धडकन का साज भी हम भी, आप भी... वक्त की जंजीरों में इज़हार की कशिश भी हम भी, आप भी... बेबसी के लम्हों में बेवजह की बेरूखी भी हम भी, आप भी... आप भी, हम भी बातों के मखमली धागों में, एक तोहफ़ा बेरूखी का भी हम भी,आप भी... एक बेरुखी का तोहफ़ा बातों के मखमली धागों में भी हम भी ,आप भी... आप भी ,हम भी #anil #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक एहसास लिखा जाएगा, एक बदलाव लिखा जाएगा.. और तुम जो कहते हो तुम्हारे जाने से फर्क नहीं पड़ता.. तेरे जाने के बाद मेरी नज़्मों में कहर आएगा... #suhani #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक लम्हे मैं गुजर जाती है ख्वाहिशें है सारी , एक लम्हे में मानो खुदा मिल जाता है... और नसीब, नसीब की बात है मोहब्बत नसीब होना.. ऐसे ही हर प्यासे को थोड़े ही कुआँ मिल जाता है #suhani #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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