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Hindi/Urdu Poems

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"मेरी कविता" जब ज़माने ने मेरी आवाज़ को सुना नहीं, तो मैंने कलम का सहारा ले लिया... सब कुछ लिखना चाहा, मगर मेरा लिखा किसी ने पढ़ा नहीं... सोचा, लिखना छोड़ दूँ! पहले तो मैं सिर्फ़ ज़माने से अलग था, पर अब तो धीरे-धीरे... खुद से ही तन्हा होने लगा... पर फिर... एक सवाल उठा मन में— क्या मैं लिख रहा हूँ वाह-वाही और तारीफ़ के लिए? उत्तर था— नहीं! क्योंकि— कविता.. मेरी आत्मा मेरा विचार है... मेरी कविता बच्चे सी है, जिसे बस... अच्छी परवरिश देकर... मैं उसे मुकाम तक पहुँचाना चाहता हूँ! — कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

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तेरे हमशकल है ये शहर के लोग... कम्बख्त ये तेरा जहाँ है क्या.... मुझे याद नही, मै भूल गया तुझे.... फिर खुद से पूछता हूँ..इतना आसान है क्या ।। ⛱ #priya #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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"नारी: देवी, अबला या इंसान?" समाजशास्त्र-राजनीति या चाहे... अर्थशास्त्र हो, अधिकार और समान नागरिकता की बातें किस क्षेत्र में नहीं हैं? आधुनिक दौर में इंसान की परिभाषा में नया क्या है? साहित्य में भी... नारी के बारे में बहुत कुछ लिखा हैं..... एक पक्ष ने लिखा— अबला... कमज़ोर... शोषित... दबी-कुचली... हाय! नारी... तुम और तुम्हारा जीवन? मानो वह नारी, नारी न रहकर, हीन-क्षीण अवस्था में एक याचक है, जो ज़माने से... अपने काँपते हाथों से अधिकारों की याचना कर रही है। तो दूसरे पक्ष ने लिखा— नारी... तुम जग-जननी हो... तुम दुर्गा... तुम शक्ति... हो नारी! "तुम्हारे पास सब कुछ है, तुम्हें किसी की भी ज़रूरत नहीं है!" ऐसा कहकर... उसे अपने सामर्थ्य पर जीने के बजाय, आस्था और मर्यादाओं की चारदीवारी में कैद कर दिया... उसे देवी के रूप में प्रतिष्ठित कर, एक बेजान मूर्ति के रूप में ऊँचे सिंहासन पर बैठाकर... चुप और शांत रहना ही उसका धर्म बना दिया। "क्योंकि... मूर्तियाँ सवाल नहीं पूछतीं!" या फिर किसी ने... ज़माने में अधिकारों का एकमात्र दाता बनाकर, पुरुष को ही खलनायक बता, नारी का दुश्मन ठहरा कर... नए-नए संघर्षों को जन्म दे दिया। बस... सबने अतिवाद को लिखा... मगर... किसी ने भी नारी को इंसान नहीं लिखा। नहीं कहा किसी ने कि— उसके अधिकार जन्मसिद्ध हैं... न नारी याचक है, न ही पुरुष दाता。 न ही कोई ऐसी देवी, जिसे पूजनीय कहकर घर के किसी कोने में बैठा दिया जाए... वह भी सबकी तरह हाड़-मांस की बनी, ज़िंदा इंसान है! उसके पास भी दिल है, उसकी भी कुछ भावनाएँ और संवेदनाएँ हैं... उसमें... ज़माने से कंधे से कंधा मिलाकर चलने और आगे बढ़ने का जज़्बा है... ऊँचा उड़ने का हौसला है... हम सब जीवित इंसान हैं। हम सब समान हैं। सबके पास दिल और दिमाग हैं... सबके कुछ न कुछ ख़्वाब हैं। "सब कहते हैं... यह शरीर एक बार ही मिलता है... तो फिर... नारी इस ज़िंदगी को सबकी तरह ही कैसे और क्यों नहीं जी सकती? अगर... इंसानियत ही मिट गई तो "पीछे क्या बचा रहेगा?" सारे जीव तो... बस मिट्टी के पुतले हैं, सबका एक दिन नामो-निशान मिट जाएगा इस दुनिया से!" — कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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हिम्मत आ गई क्या लिखने की ? ..... हां, हां, मैं कोशिश कर रही हूं। फर्क जिस चीज से पढ़ना था, वह याद नहीं कर रही हूं। पर क्या करूं, मैं, मैं भी तो नहीं रही हूं। नफ़रत तो अब खुद से होती हैं, मैं जीकर भी, इतना अंदर से क्यों मर रही हूं। हस्ते हुए देखा हैं ना तुमने, उन छोटी छोटी चीजों में खुश होते देखा हैं ना तुमने, फिर इस ग़म मैं यूं हताश क्यों चल रही हूं। अब यह पुरानी आदत हैं भागने की, खुद को कोसने की, उन्हीं हालातों में रहने की, पर फिर भी, मैं उस परम सत्य तक क्यों नहीं पहुंच रही हूं। सत्य, वह सत्य मरने का सत्य, सत्य, इस संसार से सब मोह छोड़ देने का पथ, मैं उस राह में चलते चलते, पीछे क्यों मुड़ रही हूं। वह आवाज़, खींच रही हैं मुझे, वापस बुला रही हैं मुझे, - "रुक जा, वापस आ" मैं उस आवाज, एक आवाज के इशारे को क्यों सुन रही हूं। ..... जब जवाब मिले ना, तो नसीहत दियो लिखने की। समझी ? समझी ? आई बड़ी। #night #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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"लगा के आग शहर को ये बादशाह ने कहा, उठा है आज दिल में तमाशे का शौक बहुत। झुका कर सिर सभी शाहपरस्त बोल उठे, हुज़ूर का शौक सलामत रहे, शहर और भी बहुत हैं।" #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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"सावला सा वो, मस्तमौला सा वो, कभी खोया हुआ सा वो, तो कभी सबको हँसाता वो, समझ पाना मुश्किल है मिज़ाज उसका, हर दिल को चुराने वाला वो।" "बावला सा वो, अतरंगी सा वो, कभी शर्माया हुआ सा वो, तो कभी गहरे रौब सा वो, लिखना मुश्किल है अंदाज़ उसका, हर मुश्किल में चट्टान बन जाने वाला वो।" - Inayat Noor 🌟 #cute #love #review #Inayatnoor #Tinachoudhary 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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कविता: " दृष्टिकोण " किसी ने कहा, मृत्यु अंत है किसी ने कहा, विरह अंत है। किसी ने कहा, मरना मुश्किल है किसी ने कहा, जीना मुश्किल है। किसी ने कहा, प्रेम पीड़ा है किसी ने कहा, प्रेम स्वतंत्रता है। किसी ने कहा, जिंदगी बेरहम है किसी ने कहा, जिंदगी बड़ी हसीन है। पर जब हम सबकी जिंदगी अलग-अलग है, तो भला दृष्टिकोण एक जैसा कैसे हो? 'गम' किसी एक परेशानी का नाम तो है नहीं, सच कहूँ तो...यहाँ कोई सब कुछ पाकर भी रो जाता है, और कोई सब कुछ खोकर भी मुस्कुराता है। अजीब सिलसिला है इन इंसानी रिश्तों का, कोई बिछड़ के भी सदा पास रह जाता है, और कोई साथ रहकर भी बिछड़ा हुआ ही लगता है। - इनायत नूर 🌟 #poetry #review #philosophy #Inayatnoor #Tinachoudhary 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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" खामोश नायक " सब्र का बाँध भला कोई इतना कैसे तान सकता है? जो बार-बार अपमान सहकर भी, सबका भला चाहता है। वो जानता है कि हर शख्स उसे नीचा दिखा रहा है, फिर भी वो अपने हिस्से की शराफत निभा रहा है। बाहर से वो शांत, मुस्कुराता हुआ मूरत है, पर कोई देख नहीं पाता... वो अंदर से कितना टूटा हुआ है। - इनायत नूर 🌟 #philosophy #poetry #review #life #DeepThoughts #Inayatnoor #Tinachoudhary 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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खूबसूरती किसी चेहरे या जिस्म के लिबास में नहीं होती, यह तो मन के पावन भावों और विश्वास में होती है। यह होती है देखने वाली हमारी उस पाकीज़ा नज़र में, और घुल जाती है मिश्री बनकर हमारे हर एक लफ़्ज़ में। सुंदर स्वभाव से ही तो एक मुकम्मल इंसान बनता है, वरना महज़ रूप-रंग से कहाँ कोई महान बनता है। - इनायत नूर 🌟 #poetry #philosophy #review #InnerPeace #Inayatnoor #Tinachoudhary 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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"जमाने की धारा" यह जमाना चंबल की धारा सा है, जनाब! शांत... शीतल... और पवित्र... इसकी गहराई में कई राज़ दफन हैं... इसका तल आदर्शों और मर्यादाओं की गाद से भरा पड़ा है... बीहड़ों से होकर मदमस्त चला जा रहा है... मगर... इसकी सरपरस्ती में पलते हैं— कई डाकू, चोर-लुटेरे... और बागी... इस धारा के बहाव में... बेफिक्र तैरते रहते हैं— आदमखोर घड़ियाल... विडंबना यह है कि— यहां दबे-कुचले जाते हैं— मासूम, भोले-भाले आम लोग... और वे भी, जो आवाज उठाते हैं अन्याय के खिलाफ! लेकिन... कुछ चतुर, चालाक शिकारी... आनंद में रहते हैं। इन सबके बीच... समझौतावादी लोग, जो मूकदर्शक बनकर ज़िंदा लाश की तरह रहते हैं, बस... वही ज़िंदा रहते हैं... क्योंकि... उन्हें यह जमाना सड़ा-गला समझकर... घड़ियालों की तरह छोड़ देता है। — कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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ये दिल महफ़ूज़ है,तेरी छांव में, ये उम्र गुज़री है, तेरी याद में, मगर बेखबर है, तू इस राज़ से... ये आंखें खोई हैं, तेरी आंखों में, ये सांसें चलती हैं, तेरी जिंदगी में, मगर बेखबर है, तू इस राज़ से.... - इनायत नूर 🌟 #review #love #poetry #Inayatnoor 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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"गुरुत्वाकर्षण का बिखराव" कुछ लोग प्रेम में... शनि ग्रह की तरह, एक से अधिक चाँदनियों के आकर्षण में बंधे रहते हैं... मानो... वो यौवन रूपी गुरुत्वाकर्षण के घेरे में खड़े हैं... और... कई चाँदनियाँ उनके आसपास घूमती रहती हैं... शायद इसलिए... वो प्रेमी ज़िंदगीभर किसी एक के नहीं बन पाते... जीवन की सारी ऊर्जा यूँ ही खो देते हैं, सबके पीछे भागते-भागते... मगर... ज़ब यादों के चक्रव्यूह में फँसा मन किसी खुशी को पास आने नहीं देता... तो एक दिन दिल की धड़कन कमज़ोर पड़ जाती है... और तब.... दिल की थकी हुई धमनियों पर दर्द के छल्ले चढ़ जाते हैं... फिर अंत में... उन प्रेमियों के अधूरे प्रेम के किस्से भी समय की धूल में ठीक वैसे ही दफ़न हो जाते हैं... जैसे रेगिस्तान के अथाह रेत में खो जाती हैं नदियाँ.... — कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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वो सितारा टूट गया... उसे टूटते देख सबने बस अपनी-अपनी मन्नतें माँगीं, किसी ने भी यह जानने की कोशिश न की— आख़िर... वो क्यों टूटा? वो अंदर ही अंदर जलकर भी अंधेरे में रोशनी बिखेरता रहा, न जाने किस दर्द से गुज़र रहा था... कि क्यों वो भीतर से इतना जल रहा था? मगर... उसकी चमक अचानक कैसे फीकी पड़ गई? — कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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आदिशक्ति जब कोई औरत प्रगति की ओर बढ़ती है, अपने अधिकारों के प्रति सजग होती है... तो... कुछ दकियानूसी सोच के लोग, किसी के टूटे हुए अंश मात्र की तरह, जो ज़माने की धारा से वापस जुड़ नहीं पाए... क्षुद्र ग्रहों की तरह, अपनी ही धुरी से भटके हुए, हर बार— उसकी राह में रोड़ा बनने और उसे रोकने के इरादे से आ जाते हैं... मगर... ब्रह्मांड के निर्माण की बिग बैंग जैसी आदि शक्ति के पास आते ही, उसके आत्मविश्वास और सूर्य के समान तेज व तप के सामने, अपनी ही संकीर्ण सोच के अंधकार में जलकर खाक हो जाते हैं... — कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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रोटी और संसद एक आदमी रोटी बेलता है। एक आदमी रोटी खाता है। एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है। वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है। मैं पूछता हूँ— "यह तीसरा आदमी कौन है?" मेरे देश की संसद मौन है। ~ सुदामा पांडे ‘धूमिल’ #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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🍂🍂 आदमी मरने के बाद कुछ नहीं सोचता... आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता... कुछ नहीं सोचने और कुछ नहीं बोलने पर आदमी मर जाता है... #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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शीर्षक: एक अनजान ग्रह मैं... अनंत ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं की विशाल भीड़ में रहकर भी, इस मिल्की वे गैलेक्सी के एक सौर परिवार में एक मामूली, अनजान ग्रह-सा अकेला ही घूमता रह गया हूँ... मानो... ज़िंदगी नेपच्यून जैसी हो— नीली, शांत... तन्हा... मगर... अपने भीतर विचारों का बवंडर दफन किए, सबसे दूर... रहस्यमयी खड़ा हूँ... मुझसे— कभी कोई स्वार्थ जुड़ जाए तो... दुनिया वाले भी साथ जुड़ जाते हैं... इसलिए... कभी कोई अपना मान लेता है, तो कभी कोई पराया कर देता है... शायद... रिश्ते मात्र गुरुत्वाकर्षण के अदृश्य खिंचाव से रह गए हैं... लेकिन... जिसके टूटने से सब कुछ बिखर जाएगा... — कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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🍂🍂 सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ कितना बड़ा मज़ाक़ हुआ रौशनी के साथ शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ तेरा ख़याल, तेरी तलब तेरी आरज़ू मैं उम्र भर चला हूँ किसी रौशनी के साथ दुनिया मिरे ख़िलाफ़ खड़ी कैसे हो गई मेरी तो दुश्मनी भी नहीं थी किसी के साथ किस काम की रही ये दिखावे की ज़िंदगी वादे किए किसी से गुज़ारी किसी के साथ 🍂🍂 #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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खुद अपनी पहचान छुपाते हो, हमकों बुरे बताते हो, एक बात बता ओ नखरेबाज, क्या तुम मंदिर जाते हो? क्या तुम उस प्रभू से डरते हो? तुमने जो मांगा दे दिया तुमने जो कहा कर दिया और बात हमारी आई तो अपना मुंह मोड़ लिया.... क्या तुम मंदिर में जलाते हो दिया.. तुम हमको गलत साबित करके , चाहते हो क्या? कल्पना में खुद को अच्छा समझ कर रहते हो क्या? मैंने सीख लिया है चुप रहना एक बार गया तो बाद में न कहना संसार के दुख तो सबको ही h सहना तुम्हारी गलतफहमियां ही है तुम्हारा गहना अब अच्छे से रहना अब अच्छे से रहना #review #ankitpastor 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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🍂🍂 ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम 🍂🍂 #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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