ch
Feedback
Hindi/Urdu Poems

Hindi/Urdu Poems

前往频道在 Telegram

Hindi/Urdu Poetry Collection. Adding some stories too :D Our Groups • @HindiPoetry@WritersClub Channels: • @ThePeepTimes@WritersCafe@CopywritersDesk@WritersDirectory More: 🌐 @tgWeBot | @BigBrandTree

显示更多
5 802
订阅者
无数据24 小时
-57 天
-530 天
吸引订阅者
九月 '26
九月 '26
+6
在0个频道中
八月 '26
+110
在0个频道中
Get PRO
七月 '26
+114
在0个频道中
Get PRO
六月 '26
+53
在0个频道中
Get PRO
五月 '26
+67
在0个频道中
Get PRO
四月 '26
+79
在0个频道中
Get PRO
三月 '26
+57
在0个频道中
Get PRO
二月 '26
+71
在0个频道中
Get PRO
一月 '26
+126
在1个频道中
Get PRO
十二月 '25
+102
在1个频道中
Get PRO
十一月 '25
+78
在0个频道中
Get PRO
十月 '25
+96
在0个频道中
Get PRO
九月 '25
+94
在0个频道中
Get PRO
八月 '25
+99
在0个频道中
Get PRO
七月 '25
+82
在0个频道中
Get PRO
六月 '25
+83
在1个频道中
Get PRO
五月 '25
+111
在0个频道中
Get PRO
四月 '25
+70
在0个频道中
Get PRO
三月 '25
+89
在0个频道中
Get PRO
二月 '25
+90
在0个频道中
Get PRO
一月 '25
+131
在0个频道中
Get PRO
十二月 '24
+194
在0个频道中
Get PRO
十一月 '24
+109
在0个频道中
Get PRO
十月 '24
+150
在0个频道中
Get PRO
九月 '24
+194
在0个频道中
Get PRO
八月 '24
+193
在0个频道中
Get PRO
七月 '24
+235
在0个频道中
Get PRO
六月 '24
+199
在0个频道中
Get PRO
五月 '24
+192
在0个频道中
Get PRO
四月 '24
+185
在0个频道中
Get PRO
三月 '24
+198
在0个频道中
Get PRO
二月 '24
+193
在1个频道中
Get PRO
一月 '24
+211
在0个频道中
Get PRO
十二月 '23
+156
在0个频道中
Get PRO
十一月 '23
+134
在0个频道中
Get PRO
十月 '23
+155
在0个频道中
Get PRO
九月 '23
+177
在0个频道中
Get PRO
八月 '23
+106
在0个频道中
Get PRO
七月 '23
+113
在0个频道中
Get PRO
六月 '23
+90
在0个频道中
Get PRO
五月 '23
+108
在0个频道中
Get PRO
四月 '23
+91
在0个频道中
Get PRO
三月 '23
+100
在0个频道中
Get PRO
二月 '23
+93
在0个频道中
Get PRO
一月 '23
+120
在0个频道中
Get PRO
十二月 '22
+126
在0个频道中
Get PRO
十一月 '22
+88
在0个频道中
Get PRO
十月 '22
+85
在0个频道中
Get PRO
九月 '22
+105
在0个频道中
Get PRO
八月 '22
+100
在0个频道中
Get PRO
七月 '22
+179
在0个频道中
Get PRO
六月 '22
+76
在0个频道中
Get PRO
五月 '22
+94
在0个频道中
Get PRO
四月 '22
+91
在0个频道中
Get PRO
三月 '22
+87
在0个频道中
Get PRO
二月 '22
+66
在0个频道中
Get PRO
一月 '22
+113
在0个频道中
Get PRO
十二月 '21
+130
在0个频道中
Get PRO
十一月 '21
+130
在0个频道中
Get PRO
十月 '21
+124
在0个频道中
Get PRO
九月 '21
+176
在0个频道中
Get PRO
八月 '21
+155
在0个频道中
Get PRO
七月 '21
+179
在0个频道中
Get PRO
六月 '21
+239
在0个频道中
Get PRO
五月 '21
+325
在0个频道中
Get PRO
四月 '21
+193
在0个频道中
Get PRO
三月 '21
+261
在0个频道中
Get PRO
二月 '21
+221
在0个频道中
Get PRO
一月 '21
+305
在0个频道中
Get PRO
十二月 '20
+5 562
在0个频道中
日期
订阅者增长
提及
频道
03 九月+1
02 九月+4
01 九月+1
频道帖子
इक बे'खुदी के आलम में घर से निकल गए मुसाफ़िर थे , हर दर्द के कारवां से गुजर गए मेरे कदमों के नीचे अब जमीन भी ना रही हम उनके कदमों के  हर निशान से गुजर गए उम्रभर भटकते रहे रौशनी की तलास में इक जुगनू के लिए,आसमान से गुजर गए बरसो से मेरे होंठो पे इक नाम दफ्न थी जिक्र  जहा आया हम वहा से गुजर गए खाक में उड़ा दी मैंने अपनी सारी जिंदगी हमउम्र के लिए, हम कहा कहा से गुजर गए इस नामुराद में वस्ल के हर लम्हे गुजर गए वो दिल से गुजर गए हम जहां से गुजर गए #Parveen #review #old 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

2
सुनो आर्य, तुम्हें अपना परिचय देने की आवश्यकता नहीं है, तुम्हारा साहस ही तुम्हारा परिचय है। एवं, तुम्हारा श्रृंगार स्वयं तुम्हारा संघर्ष है। तुम्हें शब्दों में बयाँ करना मूर्खता है, आर्य। अतः, यह विराम ही मेरे समस्त शब्द एवं भाव हैं। #Bhagyashree #review 13 july 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
132
3
तुझे जीना है जिंदगी कुछ गम और भी दे, बहुत दिन हो गए अब कुछ ज़ख्म और भी दे, यूं रूठना मनाना जिंदगी,तु अब छोड़ भी दे, तुझसे शिकायतें जिंदगी मुझे और भी है, पर सच कहूं जिंदगी तुझसे हसरतें अब और भी है तुझसे रूठ कर तेरी चाहत अब और भी है 16 dec 2024 #Bhagyashree #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
124
4
Bhagya Shree Ji , आपकी कविता पढ़ी तो यूँ लगा, जैसे किसी ने ख़ामोशी को आवाज़ दे दी हो, जैसे ज़िंदगी से शिकायत करते-करते दिल ने खुद अपने ही ज़ख़्मों का पता पूछ लिया हो। आपके सवाल इतने सच्चे लगे कि उनका जवाब शब्दों से नहीं, एहसास से देना पड़ा। उसी एहसास को अपनी कलम में समेटकर आपकी कविता के जवाब में कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं आपने ज़िंदगी से सवाल किए हैं, मैंने कोशिश की है कि ज़िंदगी आपकी ओर से जवाब दे। ज़िंदगी का जवाब तू पूछता है, ऐ ज़िंदगी, तेरा मुझसे गिला क्या है, कभी मेरी ख़ामोशी में उतर , वहीं तेरा पता क्या है। मैं बेवफ़ा नहीं थी, बस तुझे मज़बूत कर रही थी, तू जिसे सज़ा समझता रहा, मैं तुझे तराश रही थी। तेरी आँखों में जो आँसू थे, मैंने गिने हैं रातों भर, तू अकेला रोया ज़रूर… मगर मैं भी कहाँ सोई थी उम्र भर। तू कहता है मुक़द्दर को अपनी मेहनत से हरा आया, किसे बताऊँ , तेरे हर क़दम पर मैंने कितना डर छुपाया। जिन्हें तू अपना समझता था, उन्हें जाते मैंने भी देखा, तेरे हिस्से का हर टूटा ख़्वाब मैंने अपने सीने में रखा। सुकून इसलिए नहीं दिया कि तू रुक न जाए कहीं, तेरे अंदर जो समंदर था, वो किनारों में सूख न जाए कहीं। और मुझसे मेरा पता पूछता है, पागल… मैं किसी शहर, किसी गली, किसी मकान में नहीं मिलती जिस रोज़ आईने में अपने थके हुए चेहरे को देखकर तू खुद से कहेगा “इतना सब खोकर भी मैं ज़िंदा हूँ…” बस उसी रोज़ समझ जाना, मैं कहीं और नहीं… तेरे अंदर ही बची हुई थी। — लेखक: प्रदीप रोका #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
151
5
वो जागती आंखों से शबनम की रात की सपने खामोशियों के बीच कुछ अधूरी बात के सपने।। थे राह भी थके से, पैरो की बेड़ियों में थी गुमसुम रहनुमाई,तेरे साथ के वो सपने।। क्या नाम दूं उस रंग का जो टूट के है बिखरे मेहंदी भी जिसपर रोई,तेरे हाथ के वो सपने।। अब तो जुबान ए उर्दू का रुख़ भी है बदला बदला नही "परवीन" तेरे जज़्बात के वो सपने।। #Parveen #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
139
6
ऐ ज़िंदगी, तू इतनी बेवफ़ा क्यों है, आजकल इतनी परेशान क्यों है। ख़फ़ा है मुझसे, तो बता ख़ता क्या है, मेरे हर सवाल पर तेरी रज़ा क्या है। जो मैं हूँ ग़म में,तो इसमें नया क्या है, आखिर आंसुओं से मेरा रिश्ता क्या है। मैंने मुकद्दर को हराया है, ज़िंदगी, ये मेरी मेहनत है, इसमें दया क्या है। कभी तो सुकून का एक लम्हा दे दे, आख़िर तुझको मुझसे गिला क्या है। मुझे ढूँढ़ना है तुझे, किस ओर जाऊँ, अब तू ही बता, आख़िर तेरा पता क्या है। #Bhagyashree #review 13 july 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
153
7
रिक्त नहीं होता है एक काग़ज़… हमेशा रिक्त नहीं होता है, वहाँ होती हैं अनगिनत ख्यालों की हलचल जो हमेशा ही अव्यक्त रह जाती है, एक पर्ण, जो सूख कर छूट चूका था शाखा से, क्या वो रिक्त था? नहीं, उसमें तो कितने ऋतुओं की यादें थीं एक नज़रं, क्या किसीने उसे कभी पढ़ा है? कितने सारे गम के मकानों का बसेरा था, फिर वो रिक्त कैसे हुआ? एक साहिल, क्यों नहीं है वो रिक्त, वो एक और क्षितिज की राह में है यहाँ -वहाँ, कहीं भी देख लो, कोई भी रिक्त नहीं होता कोई रिक्त नहीं होता है एक धूप का क्षण कभी भी रिक्त नहीं हुआ मौसम के बदलते रवानी से क्यों कि, कोई भी रिक्त नहीं होता रिक्त नहीं होता है कोई भी एक खेल, जिसमें, हार-जीत कोई मायने नहीं रखती क्यों ? नहीं रिक्त होते हैं उस खेल के मायने क्यों कि कोई कभी भी, रिक्त होता नहीं, रिक्त नहीं होता है कोई कभी भी #anil #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
190
8
यह सच है कि वह हमारा महबूब नहीं था, मगर उसके जाने का दर्द भी किसी से कम नहीं था। बड़े नाज़ से बनाया था दोस्ती का यह रिश्ता, पर कमबख्त वक्त ने इसे भी निभाना मुश्किल कर दिया। #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
199
9
ख़यालों में मिल जाते हो मुझे, हक़ीक़त में क्यों नहीं? ये कैसी चालबाज़ी है तुम्हारी, बसते मुझमें हो, पर मानते क्यों नहीं? #Bhagyashree #review 12 july 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
222
10
जब दिल भर जाता है ग़म से, तब निकल पड़ते हैं अश्रु नयनों से। किंतु, जब दिल भर जाता है खालीपन से, तब... इंसान बदल जाता है। असहनीय दर्द पर भी शांत रहता है, लगता है जैसे वो मुर्दा हो गया है। तब प्रकाश भी चुभने लगता है, इंसान खुद से ही उबने लगता है। और... धीरे-धीरे खो देता है हँसने की वजहें, रूठने के बहाने, और उम्मीद की आख़िरी डोर भी। फिर एक दिन, आँसू भी साथ छोड़ देते हैं, मर जाते हैं उसके सपने, और शून्य हो जाता है उसका दिल.. #Bhagyashree #review 11 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
258
11
ये जो पल-पल दूरियाँ बढ़ा रहे हो हमसे, इन बेरुखी के गिला-शिकवों का क्या करोगे? जो आज हर बात पर दिल दुखाते हो हमारा, कल अगर ये साँसें ही थम गईं, तो इस अधूरी नाराज़गी का क्या करोगे? #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
247
12
वो गुज़री हुई मोहब्बत पास नहीं आती, उसको मेरी याद कुछ ख़ास नहीं आती। जिन्हें रास आई हो, उन्हें मुबारक हो, ये ज़िंदगी है, सबको रास नहीं आती। #Bhagyashree #review 9 july 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
283
13
पत्थर बन गया मै,अब आईना नहीं हूं, जो दिखा सकू मै तुझको तेरी बेरुखी का चेहरा।। #review #Parveen 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
300
14
वो जो थोड़ी देर और ठहर जाते, ये दिल उम्रभर को ठहर जाता, जनाब। शायद... उनका यूँ सफ़र अधूरा छोड़कर चले जाना ही बेहतर था। #Bhagyashree #review 8 july 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
322
15
फटी धोती में सिमटा था कभी होरी का वो जीवन, पछाईं गाय की हसरत, महाजन का वो बढ़ता ऋण। धनिया की सजल आँखों में सदियों की मूक व्यथा थी, गोदान की चौखट पर दम तोड़ती इक गाथा थी। ​सदी बदली, नगर चमके, मगर वो बेबसी न घटी, खेत छूटे तो दफ़्तर के क्यूबिकल में साँस घुटी। टारगेट और डेडलाइन तले पिसती रही ये काया, कंक्रीट के इस जंगल ने बस नया फ़रेब रचाया। ​बही-खाता महाजन का अब ई.एम.आई. में बदल गया, क्रेडिट कार्ड की किस्तों में हर सपना फिसल गया। सूट-बूट के पीछे क़ैद हैं बस खोखली मुस्कानें, सुविधाओं के इस बाज़ार में गुम हो गए ठिकाने। ​तब गाय पाना सपना था, यहाँ सुकून पाना सपना है, लाखों की इस अंधी भीड़ में कोई न अब अपना है। प्रेमचंद की स्याही का वो दर्द आज भी ज़िंदा है, पगडंडी का वो आँसू, महानगर में शर्मिंदा है। #review #NaveenJoshi 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
403
16
अंबर चाहता है धरती को, ये कहानी बहुत मशहूर है मगर अंबर के बरस जाने में बूंदों का क्या कसूर है #Bhagyashree #review 5 July 2026 Metaphors:- अंबर - पुरुष धरती - प्रेमिका बूंद - पत्नी 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
381
17
इक दाग़ को मैने चांद कहा वो रौशन रौशन प्यारे थे, एक दूर कहीं एक पास मेरे दो धरती के सितारे थे।। #Parveen #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
349
18
प्यार से बात करके वो रोज़ धोखा देता रहा, लौटकर आया भी तो वही पुराना फरेब साथ लाया था। मैंने ठुकरा दिया उसे अपनी ही खुददारी की खातिर, वरना ये टूटा हुआ दिल आज भी उसी की बाहों में जाना चाहता था। #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
338
19
रातों की इन गहराइयों में, कोई अपनापन ढूंढती हूं, बिखरे हुए ख्वाबों में खुद का, वही पुराना बचपन ढूंढती हूं। जिंदगी के सफर में बस चलती जा रही हूं, हर मोड़ पर नया दर्द छुपाती जा रही हूं। जो रिश्ते थे कभी अपने, वे बेगाने हो गए, खुद को ही ढूंढते-ढूंढते न जाने कहां खो गई हूं। #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
318
20
सच के जितने भी चेहरे हैं, दिखाए जाएँ तो अच्छा रहेगा, अब इल्ज़ामों से आगे भी कुछ बताया जाए तो अच्छा रहेगा। तुम्हारी बस्ती में अदालत सजी है, हमें ऐतराज़ नहीं, बस हमारे हिस्से का सच भी सुनाया जाए तो अच्छा रहेगा। तुमने कहा हम बेवफ़ा थे—मान लिया सबने, अब वो रातें भी गिनाई जाएँ जब हम रोए थे तो अच्छा रहेगा। मेरे ख़िलाफ़ गवाही देने वाले बहुत हैं तेरे शहर में, मेरे मोहल्ले से कोई मेरा हाल बताने आए तो अच्छा रहेगा। जिन ख़तों में मैंने तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा लिखा था, वो भी अदालत में पढ़े जाएँ तो अच्छा रहेगा। तुम सिर्फ़ मेरे जाने की कहानी सुना रही हो सबको, कभी ये भी बताओ—मुझे जाने पर किसने मजबूर किया था। फ़ैसला अगर मेरे ख़िलाफ़ ही लिखना है तो लिख दो, बस मेरे आँसुओं को भी सबूत माना जाए तो अच्छा रहेगा। और जब सज़ा सुनाई जाए मेरी मोहब्बत के जुर्म में, तो आख़िरी बार मेरा नाम तुम्हारी ज़ुबान से लिया जाए तो अच्छा रहेगा। — लेखक प्रदीप रोका #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
319