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Hindi/Urdu Poems

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और फिर खामोश हो गये हम.. जिंदगी की भाग-दौड़ से थककर वैसे ये ख़ामोशी,थकान से नहीं थी ये ख़ामोशी थी, रिश्तों के बोझ से.. अपनों के धोखे से.. मतलबी यार और मतलबी संसार से वैसे,बताना भूल गयी मैं.. हम कोई आशिक,प्रेमी या दोस्त नहीं है हम केवल मैं और मेरी आत्मा है।। क्योंकि, अक्सर दुनिया से रूबरू होते समय शरीर, मन-मस्तिष्क व आत्मा पर लग जाते हैं कुछ घाव, और बन जाते हैं समय के साथ बोझ जिनसे थककर अक्सर मर जाता है इंसान या हो जाता है खामोश खैर! मुझे आज़ादी नहीं थी मरने की इसलिए मैंने चुन लिया खामोशी का पथ।। #Bhagyashree #review 8 june 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

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मैं साहिर को तुझे ले जाने दूँगा चाहती हो उसे तो मैं जाने दूँगा माना अक़ीदत है तू ख़्वाब है तू जो सब को लगता नाजायज़ भी करने दूँगा मैं प्यार हर रोज़ करूँगा मैं खुद को इमरोज़ कहूँगा मैं खुद को इमरोज़ कहूँगा #askhairwar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक नया सा शहर है इस शहर की ये सड़कें सड़कों के किनारे कोई भवन जर्जर से भवन पर लिखा है कुछ धूंधले अक्षर में शायद लिखा है शासकीय हिंदी वर्ण में और रंगा था पूरे पीले रंग में.. भवन था ऐसा जैसे कि जंगल घिरा हुआ था सिर्फ लोगों से भवन के अंदर अजब सी घूटन थी किसी जगह गाली,दया या रुदन थी हर एक गज पर कमरे पर कमरा सीढ़ियों की बौछार और फिर कमरा कमरें में बैठे कहीं पर अफ़सर थे अफसरों के बीच फिर खाली सा कमरा कमरें के अंदर फाईलों की नदियां और बैठा एक अफ़सर हठीला हाथ जोड़े,जब पहुंचा मैं अंदर अफ़सर अपने मिज़ाज में गर्म थे बोला मैं, साहब! अर्जी़ सुनो जी साहब फिर बोले कुछ कर्म भी करों जी कहा जब मैंने सारी जेबें है खाली बोलें फिर साहब,आप आगे बढ़ो जी... निकला जब कमरे से,फिर नया कमरा कमरें पर कमरा, फिर एक कमरा कमरों में चक्कर,चक्कर पर चक्कर चक्कर पर फिर पैसों का चक्कर चक्करों से बचकर मैं निकला जब दफ्तर से सुरज फंदा लगाकर हो गया था अस्तमय रात कि अंधेरी में जब बैठा मैं थककर बोला एक चपरासी बाबा जाओ अगले शहर में #Bhagyashree #review 6 june 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मेरी प्यारी बिटिया रानी, तुम्हें पता नहीं है शायद दुनिया कितनी बुराइयों से भरी हुई है, और तुम, एक प्यारी-सी परी हो मेरी। मेरी लाडली बिटिया! मैंने सिर्फ़ मेहनत की है उम्रभर, इसलिए न कभी सूरज देखा, और न ही कभी शीतल चंद्रमा। मगर तुम, देखना भोर की पहली किरण, और महसूस करना चाँदनी को, तुम फैलाना अपने पंख और उड़ जाना सतरंगी आसमान में अपनी खुशियों के साथ। हाँ, शायद ये संसार बाँधे तुम्हें संस्कारों की डोर में, शायद उस वक़्त मैं भी खामोश रहूँ, मगर तुम, अपने सपनों को साकार करना, और बनना मेरी अनकही बोली, जो शायद मैं तुमसे कह न सकूँ।. मैं रहूँ या न रहूँ एक दिन, पर मेरी दुआएँ तुम्हारे साथ चलेंगी, मेरी प्यारी बिटिया रानी, तुम्हारी हर उड़ान में मेरी मुस्कान मिलती रहेगी। #Bhagyashree #review 2 june 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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अंबर की चाहत में अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा पत्तों पर बूँदों ने बारिश का आईना बना दिया अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा किसी को प्रेम भरी बूँदों में याद आया प्रेम पहला अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा एक अनामिक प्रेमपत्र लिख रहा हैं बारिश का चहेता अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा दूर क्षितिज पर कोई दे रहा है सदा अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा बारिश की बूँदें महका रही है लफ्जों का गुलदस्ता अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा बारिश की बूँदों ने शब्दों का रंग रूप निखार दिया अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा हजार बरसाती बूँदों ने प्यार के प्रतिबिंब का चेहरा बना दिया अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा प्रेम पुस्तक की पंक्तियों में अंबर की वर्षा को अंकित किया अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा बहती बयार ने अनकही बातों को स्वर दे दिया अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा एक प्रेम तरंग बनके खिलती है मन पे एक तरंग रेशा अंबर की चाहत में जो हो रही है वर्षा हर एक लम्हें में दो बातों की कई सदिया #anil #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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👀❤️‍🩹 हजारों खूबसूरत पल आये और चले भी गए जिंदगी से। 🌹💗 एक आपका हाथ थाम कर पास बैठने का वो पल लाजवाब रहा ❤️‍🩹🌸 #review 🪷🌹 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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Nazaron mein hamesha basa ke rakhna chahte hain tumhe Kahi bewafai ki yaad na ban jana tum ​Jab bhi maangein saath tumhara taqleefon se bhar aane ko Kahi gumshuda aas na ban jana tum ​Hum tasveeron se kahi jyada apne dil mein sama ke baithe hain tumhe ​Bas chahenge ab zindagi bhar saath tumhara Kisi aur raste mat kho jana tum #hemant #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक युद्ध मेरे अंतर्मन में है एक अधर्मी मेरे भीतर है मैं कहती हूं "मेरे ईश्वर है" वो कहता है "कहां ईश्वर है " मैं दीप जलाती विश्वासों का वो हर लौ को भ्रम कहता है मैं जब भी अश्रु बहातीं हूं वो ईश्वर को दोषी कहता है दुसरो के दुःख-दर्द पर वह केवल हंसने को कहता है काम,क्रोध,मद,लोभ,अहं ईर्ष्या को वह सत्य कहता है दुष्ट-दुर्जनों की संगत को वह अतुल्य उपहार कहता है मैं थक जाती हूं जब इससे तब ईश्वर से विनती करतीं हूं मन कुरूक्षेत्र बन जाता है तब एक अंतः धर्मयुद्ध चलता है तब तब कृष्ण,गीता ज्ञान समझाते है और अधर्मी दुर्योधन बन जाता है किंतु कलयुग की इस युद्धभूमि में अक्सर दुर्योधन भी जीत जाता है अंतर्मन का यह विकराल युद्ध समस्त जगत एवं जीवन में है एक कलि मेरे भीतर है एक कलि मेरे भीतर है #Bhagyashree #review 31 may 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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🖤 बस अब एक ही ख़्वाहिश है कि मेरी दुआ क़बूल हो जाए। 🥀 🖤 तरसती ज़िन्दगी जी ली बहुत, अब बस मौत आ जाए 💔 🖤 थक गई हूँ हर रोज़ मुस्कुराने का दिखावा करते-करते, अब ये झूठी हँसी भी कहीं खो जाए। 🙂 🖤 जो दर्द बरसों से सीने में कैद है, काश वो भी मेरे साथ ही सो जाए। 😴 🖤 अब किसी से कोई शिकवा नहीं रही, बस ये दिल ख़ामोश हो जाए। 👀 🖤 जो किस्मत में लिखा है, वही मंज़ूर है मुझे, बस ये बेचैन रूह सुकून पा जाए। 🥺 🖤 बस अब एक ही ख़्वाहिश है, कि दिल को थोड़ा सुकून मिल जाए। 😇 🖤 थक गई हूँ हर दर्द को छुपाते-छुपाते, अब ये बोझ कहीं हल्का हो जाए। ❤️‍🩹 #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मैं भारतीय हूँ, भारत में रहती हूँ। भारत एक है, मगर... मैंने तीन भारत की तस्वीर देखी है। पहला भारत पूँजीवादी है, जो छीन लेता है दूसरों का हक, बिना किसी परवाह के। दूसरा भारत मध्यमवर्गीय है, और थोड़ा समाजवादी भी। वह लड़ता रहता है,.. स्वयं से, घर से, समाज से, शासन से, और प्रशासन से, अपने हक के लिए। और अंत में आता है तीसरा भारत.. जो शून्य है। इस भारत का जीवन शून्य है। इस भारत की जंग महज़ रोटी, कपड़ा और पानी तक सीमित है। और रही बात घर की... तो घर कभी देखा ही नहीं इस भारत ने। पहला भारत एक ख्वाब है। दूसरा भारत एक हक़ीक़त। और तीसरा एक प्रेत है, जिससे सरकारें भी दूर भागती हैं। #Bhagyashree #review 28 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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न्याय की हुंकार कालचक्र फिर घुमा है जनता का निद्रा टूटा है जनता के जग जाने से कितनों का सपना अधूरा है मद में डूबे नेताओं का आज नशा कुछ उतरा है भविष्य आज अस्तित्व के खातिर आ बैठा है चौसर में जिसमें पासे उसके हैं पासो के चाल भी उसके हैं शकुनी बने प्रशासन बोलो अब तुमको क्या करना है दाव पर, स्वयं को या अपने सिंहासन को लगाना है पक्षधर हुआ ,आज समय जनता का और तेरे विपरीत खड़ा निर्णय लो हे! धूर्त प्रशासन सिंहासन छोड़ भगाना है या काल के मुख में समान है वायस श्रृगाल बन नेताओं ने बेबस जनता को लूटा है लेकिन आज वही भयभीत खड़ा है क्योंकि सिंहों ने दहाड़ा है जाग जाग हां जाग ओ जनता निर्भय होकर कर हुंकार यदि निद्रा नहीं त्याग तो बिक जाएगा तेरा हिंदुस्तान आशीष कुमार ✒️ #AshishKumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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जातिवाद और आरक्षण में, हम भूल गए उस तबके को.. जिसकी जंग केवल, रोटी कपड़ा और मकान हैं।। उस तबके का सपना है, केवल एक घूंट पानी और एक रोटी.. उस तबके में रहते हैं, मै, तुम,हम सब की तरह इंसान.. सभी जाति के और सभी वर्ग के।। मेरे प्यारे देशवासियों! जाति और आरक्षण में उलझकर, मत भूल जाना अपने उन भाईयों को, और किसी भूल में मत छीन लेना, उनसे उनका हक़.. और हो सके तो उठाना एक आवाज, अपने उन भूल चुके लोगों के लिए भी।। #Bhagyashree #review 28 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एकतरफा एहसास न जाने इस दौर-ए-फरेब में ये कैसी इनायत हो गई, झूठी दुनिया के बीच एक रूह से मोहब्बत हो गई। सोचा था हर चेहरा यहाँ नकाब ओढ़े बैठा है, हर कोई किसी के दिल से खेलने को निकला है। मगर मज़ाक-मज़ाक में ही एक ऐसी सादगी मिल गई, पत्थरों की इस नगरी में जैसे कोई मूरत खिल गई। वो नादान है, मासूम है, दुनिया की चालों से परे, किसी को दर्द दे न सके, इस डर से खुद अश्क भरे। वो अपने हिस्से का गम भी छुपा कर रखती है, हर रूह को अपनी दुआओं में सजा कर रखती है। देखा नहीं कभी उसे, न कोई रूबरू मुलाकात हुई, पर उसकी बातों से ही जीने की नई शुरुआत हुई। बिना देखे ही उसे इस दिल में बसा लिया हमने, इस अनजाने से रिश्ते को अपनी पूरी कायनात बना लिया हमने। #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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वो जो बचाके चलते थे गिरेबान अपना, जब आंधियां चलीं तो अंधेरों में डूब गए।। एक हम जो सबको तुझसे बचाने आयें थे, तेरी आंखों में देखने लगे तो खुद ही डूब गए।। जिनकी आदत थी आइने-सा सच कहने की, वो लोग भी चंद सिक्कों की चमक में डूब गए।। किसको कुसूरवार ठहरायें! अपनी मौत का, हम खुद ही उतरें थे दरिया में,खुद ही डूब गए।। #Bhagyashree #review 5 may 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक दिन काम से थककर, तथा उग्र आवेश में बंधकर, मैंने कर दिया गुस्सा माँ पर और कहा.. “मैं सर्वज्ञ हूँ…” तथा निकल गया घर से बाहर।। रास्ते में चलते हुए मैंने देखा एक हताश व्यक्ति। मैं नहीं समझ पाया उसकी हताशा, ना ही उसे हँसाने का तरीका। मैंने देखा एक मुस्कुराता दृष्टिहीन, मैं नहीं जानता वो कैसे बिना किसी सहायता के रास्ते पार कर रहा था। मैंने देखा एक संत-समान बालक, मैं हतप्रभ था.. कैसे कोई इतना संसार जान सकता है बिना दुनिया से रूबरू हुए।। मैंने देखा एक वृद्ध व्यक्ति, जिसके चेहरे की झुर्रियाँ पढ़ने में तथा उन्हें समझने में मैं असमर्थ था। और अंत में, जब अपने अहं पर सिर झुकाए मैं वापस लौट आया अपने घर, तब... दरवाज़े पर मुस्कुराती हुई माँ को देख, उनकी मासूमियत व निश्चलता देखकर, मैं मुस्कुराया अपनी ही मूर्खता पर।। #Bhagyashree #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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जिंदगी आने लगी थी ढर्रे पे अपने उस ने वापस पायल का शोर मचा दिया।। #review #priya 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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वह कितना शांत रहता था बिस्तर पे लेटे, अपने नन्हे यादों को समेटे, आठो पहाड़ आभा पर मुस्कान लिए छवि में रुदन की पहचान लिए कितना व्यस्त रहता था। पर अब वो कितना कमबख्त था। जाने पूछता नजर आता हर वक्त, कुछ ढूंढता नजर आता हर वक्त जाने किस आग ने उसके अंदर अपना डेरा डाला था। लोग उसे बेवकूफ समझते थे, क्या पता उसका मिजाज का अर्थ ही सुगंध विसराना था। #Suman #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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समय-एक महायोद्धा :- एक ओजपूर्ण काव्य मत पुछ समय की गति क्या है, यह अग्नि है, यह प्रचण्ड प्रबल जो इसके संग कदम बढ़ाए, वो रचे युग नया, निर्भय सबल। यह झुकता न सिंहासन पर रुकता ना आँसु की धारा से वह चलता अपने धर्म पथ पर तरता मानो समुद्र अपने खाड़ा से। क्षण-क्षण को व्यर्थ गवाने से केवल सपने में फूल सजाने से, समय करता न प्रतिक्षा राहगीर की रोके स्याही भविष्य को गढ़ जाने से। समय नहीं केवल घड़ी की टिक-टिक यह पुरषार्थ की ज्वाला है आलस्य के तम को चीड़ उठो यह प्रथम विजय की मशाल निराला है। उठो तनिक अब कर्म न दूजा एक-एक पल में युग की शक्ति सनी हर धड़कन में विजयघोष लिखी हर साँस कहे - कर्म ही पूजा. समय न होता मित्र, न शत्रु किसीका यह न्याय का निष्पक्ष विधान' जिसने श्रम को व्रत बनाया. उसके चरण चुमे सम्मान । अंतकाल में समय का यही आदेश रूको नहीं बढ़ते जाओ जीवन क्षणभंगुर दीप सही पर उससे युग-युग तक जगमगाओ। सदैव समय से चलकर धीर-वीर बनो हर क्षण के रण (युद्ध) का मान करो, जीवन पाया है यदि मानव तो, समय का सम्मान करो।। #Suman #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक मुद्दत से जिससे नज़र ना मिले, मंज़िल है एक लेकिन हमसफ़र ना मिले।🖋️ उससे पूछो कैसे कटते हैं शब-ओ-दिन, जिसे अपने महबूब की ख़बर ना मिले।🖋️ हर आहट पर दिल यूँ ही धड़क उठता है, लगता है शायद आज उनका पैग़ाम मिले।🖋️ दुआओं में जिसे हर रोज़ माँगा हो, उसी का साथ उम्र भर ना मिले।🖋️ भीड़ में भी तन्हा-तन्हा सा रहता है वो, जिसे चाहने वाला एक नज़र ना मिले।🖋️ कुछ रिश्ते यूँ ही अधूरे रह जाते हैं, जिन्हें चाहत तो मिले, मगर मुक़द्दर ना मिले।🖋️ इश्क़ का दर्द वही शख़्स समझ सकता है, जिसे मोहब्बत तो मिले, मगर हमसफ़र ना मिले।🖋️ और आख़िर में बस इतनी-सी दुआ है रब से, किसी को चाहने वाला यूँ बेख़बर ना मिले।🖋️ #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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किसी उलझन भरी धुंध में चलना, अकेले बैठना और खुद को समझना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि अक्सर, सबको सबके हिस्से का प्यार बाँटकर हम हो जाते हैं खाली! ठीक उस खाली सड़क की तरह, जिस पर हमसे पहले भी बहुत से लोग चले थे और हमारे बाद भी, मगर, हमारे साथ... कोई नहीं।। शायद मेरे ख्याल भ्रम मात्र हों, सुबह के कोहरे की तरह... पर मेरी बात... सच्ची है! कोहरे में छुपे उन पेड़ों की तरह, जो देते हैं श्वास और आश्वासन किसी गुजरते अजनबी राहगीर को एक अच्छी और सफल यात्रा का। और पेड़ों का यही आश्वासन बना देता है अनगिनत लंबी राह को भी सरल एवं रोमांचक… बना देता है एक अद्भुत सफ़र और मिला देता है यात्री को मंज़िल से, जैसे मुझे मिली मेरी मंज़िल, और मेरी ही तरह अन्य लोगों को भी.. स्वयं में खोकर, स्वयं से मिलकर। #Bhagyashree #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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