Hindi/Urdu Poems
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विलोम शब्दों और अलंकारों से सजाकर...
प्रकृति का मानवीकरण कर,
लावण्य की अतिशयोक्ति कर,
मैं लिखूंगा प्रेम पत्र...
व्याकरण की हर कसौटी पर खरा उतरकर,
भाषा की मानक शुद्धता को आधार बनाकर,
मैं लिखूंगा प्रेम पत्र...
सांसारिकता का संधि-विच्छेद कर,
प्रेम की आवश्यकता को पन्नों पर उकेरकर,
मैं लिखूंगा प्रेम पत्र...
लिपि के विकास को छोड़कर,
भूत-भविष्य के जाल को तोड़कर,
वर्तमान का साथ लिखूंगा...
मैं लिखूंगा प्रेम पत्र...
शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि में,
भले असफल हो जाऊं...
मगर...
पतझड़ में झड़ते फूलों का
शाखाओं से प्रेम को भरपूर लिखूंगा,
मैं लिखूंगा प्रेम पत्र...
सब कुछ न सही...
जो भी लिखूंगा हृदय से लिखूंगा...
किसान का मिट्टी से लगाव सा
अपनत्व का सच लिखूंगा...
मैं लिखूंगा प्रेम पत्र...
–कुमार
#Kumar
#review
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| 2 | मानो शहद की भरी हुई
मेरी गगरि फूट जाती है
मेरा आपा खाने को आता है
सखी..जब तू रूठ जाती है ।
बादल गुजर गया हो जैसे
धरती प्यासी छोड़ कर
गुलशन बैठ गया हो जैसे
मुझसे मुँह मोड़ कर
मेले में अपना खोया हो
मेरा हाथ छोड़ कर
दर्द ने जैसे माफी मांगी
कवि का ह्रदय तोड़ कर
भीतर की बातेँ कहने को
फिर काग़ज़ कलम उठ जाती है
मेरा आपा खाने को आता है
सखी..जब तू रूठ जाती है ।
भैंस ने जैसे भरी दूध की
बाल्टी पे लात मारी हो
चाय में जैसे मक्खी कुदी
गन्ने की पोरी खारी हो
दुकानों पे भीड़ भड़ाका
लेकिन सिर्फ उधारी हो
जग ने खूब सराहा जैसे
लेकिन कानि नारी हो
जैसे कि जल्दी खूब करी पर
गाड़ी छूट जाती है
मेरा आपा खाने को आता है
सखी..जब तू रूठ जाती है ।
सुनो.. यूँ मुझसे रूठा ना कर
तेवर से मुझे कुटा ना कर
हँसी खुशी में क्या जाता है
चुप होके फिर फूटा ना कर
जैसे कि तांगा तुलसी की
गठरी लूट जाती है
जैसे कि हरि भरी किसी की
खेती सूख जाती है
जैसे कि बड़ी इमारत की
मंजिल पहली टूट जाती है
मेरा आपा खाने को आता है
सखी..जब तू रूठ जाती है ।
.......sanjay chauhan
#sanjay
#review
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| 3 | मैंने पढ़ी एक कविता...
नहीं... नहीं... अधूरी कविता...!
किसी ने पूछा..
अधूरी कैसे?
क्योंकि
मैंने तो बस वो पंक्तियाँ पढ़ी...!
जिसने लिखा था...
उसके हाल-ए-दिल को नहीं पढ़ा...!
उसकी संवेदना... उसकी रूह तक नहीं पहुँचा..
कुछ महसूस न कर...
बस... पढ़ा उन स्याही से रंगे
शब्दों के मायाजाल को...
कविता पूरी थी...
मगर मैं उसे अधूरी ही पढ़ पाया..
कवि की निगाहें ढूढ़ती रही किसी पाठक की प्रतिक्रिया को.....!!
— कुमार
#kumar
#review
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| 4 | मेरा गाँव : कुछ हक़ीक़त कुछ फ़साने....!!
नेशनल हाईवे के किनारे..
बेतरतीब ढंग से बसा हुआ मेरा छोटा सा गाँव...
टूटी-फूटी गाँव की सड़क,
जो कुछ पक्की बची है... वो बस मानसून तक...
अतिक्रमण से संकीर्ण हुई गलियां... और खेतों के रास्ते...
छोटा सा बाजार जहाँ...
मीसा की मीनार से भी ज्यादा झुके हुए दुकानों के छज्जे...
जो गली को राहगीरों के लिए नहीं समझते...
जहाँ असंरक्षित जल स्रोत, वन क्षेत्र... गोचर भूमि... और
सरकारी ढांचे... सब खड़े हैं किसी की आश में....
पशुचिकित्सा का हाल पूछो मत...!
इमारतें सब की हैं... भीतर कुछ नहीं...
हर मोड़ पर कुछ लोग बैठे,
स्कूल, कॉलेज या फिर लाइब्रेरी को जाने वालों को
कुछ न कुछ सुना देते हैं..
कोई सामने से जवाब दे भी तो..
राम-राम!
घोर कलयुग!
आजकल के नौजवानों को कुछ तहजीब नहीं...
संस्कारों वाली बात नहीं रही अब...!
मगर
उन्हें...
जो नशीले पदार्थ बेचते..
उनकी तस्करी करते..
या मदिरालयों में बैठे...
वे सब दिखाई न देते....!
"पानी में रहकर मगर से कौन बैर ले भला...!!"
कुछ...
भोले-भाले, सीधे-सादे लोग हैं कि...
जो आज भी दुनियादारी से अनजान हैं,
कंधे पर हाथ रख कोई साथ-साथ चल दे...
कोई हँसकर पास बुलाए तो..
अपना समझ लेते हैं...!!
बुरे लोगों की बुराई पर
'भगवान देख रहे हैं'...!
ऐसा कहते-कहते पीढ़ियाँ खप गईं...!
कुछ तो इतने शातिर कि
किसी को भी बेच खाएं...
सरकारी गरीब... सरकारी किसानों की भरमार है...
राजनीति में सक्रिय लोग....
ज्यादातर इसी सूची में शामिल मिलते हैं...
जमीन-जायदाद के झगड़ों से..
बस... भाई की भाई से,
पिता-पुत्र की,
पड़ोसी की पड़ोसी से
आपस में कम बनती है...
धर्म-जात के झगड़े नहीं..
बस द्वेष की 'बू' है जो
काँटों की बाड़ से आर-पार आती-जाती है..
अगर दीवारें होतीं तो शायद रोक लेतीं...
अब गिलोय नीम पर चढ़ने लगी है...
कुछ जाति विशेष के लिए...
मंदिर के कपाट बंद हैं,
उनके काम भी नियत हैं,
नाई बाल भी नहीं काटता...
और गाँव का चुनाव भी लड़ने नहीं दिया जाता,
वहाँ शिर गिने जाते हैं... चरित्र नहीं..!
समानतावादी सोच के लोग बहुत हैं...
सब खूब पढ़ें...
मगर अधिक पढ़-लिखकर आगे बढ़ें तो
उनके चरित्र पर कीचड़ उछालने वालों की कमी नहीं,
कोई हर्ज नहीं... कोई शर्म-ओ-हया नहीं...!
दहेज गाड़ियां भर-भर के ले सकते हैं..
कोई बोलता नहीं...!
लेकिन बहू नौकरी करे,
उसकी कमाई से घर चलाएं...
ये जरा समाज को अजीब लगता है...!
कन्या भ्रूण हत्या..
बाल विवाह जैसे पाप नहीं करते...
जन्म से ही पराया धन मान कर चलते हैं....
बस उसे जिंदा रखकर रोज़ दम घोंटते,
"जब तक वो लड़की होकर लड़की जैसी दिखाई न दे..!"
खुद से पहले पड़ोसी नौकरी न लग जाए,
उसकी चिंता दिन-रात सताए सबको....
सरकारी नौकरी का मतलब...
इस व्यवस्था से निकलना... या शहर चले जाना रह गया...
पढ़ने के बाद तो सब राजनीति से बहुत दूर भाग रहे...!!
हरा-भरा खुशहाल...
बड़ा ही सुकूनदायक दिखता.... गाँव का माहौल...
अब अंदर से खोखला हो रहा है...
बाकी... कागजों में तो गाँव कब का विकसित हो चुका है...!!
खेल के मैदान....
पक्का इंफ्रास्ट्रक्चर...
हर घर नल,
हर घर बिजली...
और न जाने क्या-क्या... सुख-सुविधाएं,
मानो, जैसे कोई जापान का गाँव हो....!!
अगर कोई ना बोले
तो पंच.. सरपंच..
पटवारी और ग्रामसेवक सब प्रशासनिक अधिकारी नवाबों सी ज़िंदगी जीते हैं...
बाकी और क्या कहना....
देशभक्ति के मायने... लम्बे-चौड़े भाषणों से तय होते हैं...
सच के लिए लड़ने वालो को तो देशद्रोही का तमंगा मिलता है,
और आवाज़ वो उठाए.. जिसको ज़िंदगी से प्यार नहीं...!!
- कुमार
#kumar
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 88 |
| 5 | सागर जितनी इच्छाएं मेरी,
बूंद बराबर धैर्य,
अभिलाषाओं की मृगतृष्णा में,
कण बराबर धैर्य।।
धैर्य ऐसा कि पल में बदलें,
संग संग केवल माया चलती।।
कर्म करना मुझको ना भाता,
फल की हरपल चिंता रहती।।
ये समय कितना विस्तृत है,
कर्म भी है कितना कठिन,
श्रम भी पर्वत समान ही है,
जीवन भी है कितना कठिन।।
मेरी चाह भी ग़लत नहीं है,
बिन श्रम के फल कैसे पाऊं।।
मैं तो केवल मानव ही हूं,
बिन धैर्य के मोक्ष कैसे पाऊं।।
#Bhagyashree
#review
16 March 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 99 |
| 6 | हम हर बार शांत रहे..
तो लोगों ने कमजोर समझ लिया।
किसी का कुछ बिगाड़े बिना..
यहां कौन ताकतवर मानता है...
नटराज की पेन्सिल-सा
ख़ुद घिसकर भी दूसरों की लकीरें बनाने वालों
की कौन क़द्र करता है...!!
अब लोगों को पेन जैसे लोग पसंद हैं,
जो रिफिल बदल कर भी काम चला सकें...
या फिर पसंद ना आए तो नया ले आएं...!!
#अज्ञात
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 113 |
| 7 | बारिशें सिर्फ़ मुस्कान नहीं लातीं
टपकते छप्परों से आँसू भी ले आती हैं
सिर्फ़ काग़ज़ की नावें नहीं बहातीं
गीली मिट्टी की फिसलन और
दरारों से टपकते पानी का भय भी लाती हैं
वे केवल ज़मीन को नहीं भिगोतीं
पसीज देती हैं रोज़ कमाने वालों के हृदय को
बारिशें सिर्फ़ मिट्टी की ख़ुशबू नहीं लातीं
सीलन, अँधेरा और बेघर रातें भी साथ लाती हैं।
कभी गड्ढों को भर देती हैं
तो कभी फसलों को बहा ले जाती हैं।
#khayalowaliladki
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 114 |
| 8 | सोच रहा हूँ जंग छिड़ी तो बाज़ारों का क्या होगा?
बंदूकें तो बिक जाएँगी, गुलदस्तों का क्या होगा?
आज अब्बू ने खाँस दिया तो एक अजीब ख़्याल आया,
छत के एकदम गिर जाने से दीवारों का क्या होगा?
#Jubairaliताबिश
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 110 |
| 9 | मेरे हिस्से का दिन लेकर
तू मुझको गहरी रात दे दे,
रख ले तू खुशियाँ सारी
मुझको ग़म की बरसात दे दे।
मेरी कहानी तू रख ले,
मुझको दर्द की सौगात दे दे,
खो जाएँगी ये बात पन्नों में
मुझको केवल कोरा मन दे दे।
मैं थक गया हूँ ख़्वाबों से,
तू थोड़ी सी तो राहत दे दे,
तड़पती इन यादों के बदले
मुझको थोड़ी खामोशी दे दे।
तू उड़ती रहे चिड़िया सी,
रब तुझको सारी खुशियाँ दे दे,
तेरे क़दमों में सारा जहाँ हो
रब मुझको सारे घाव दे दे।
मैं थक गया हूँ उम्मीदों में,
मुझको थोड़ा सा विराम दे दे,
तू लौटे अगर मेरी क़िस्मत में
तो मेरे जीवन को पूर्णविराम दे दे।
#bhagyashree
#review
12 March 2025
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 161 |
| 10 | ये जो दुकानें लगा रखी हैं... प्रेम की,
अब बंद भी करो...
बहुत बिक गया है... प्रेम।
ज़रा! नफ़रत को भी बिक जाने दो,
दुनिया से उसका नामों-निशान मिट जाने दो...।
जो मुखौटे लगा रखे हैं... सबने,
उनका भी सच सामने आ जाने दो...
अब बहुत हो गया,
रिश्तों का बाज़ारीकरण...
एक बार दिल से भी निभा कर देखो ...
मंजिल की तलाश में...
तबीयत से हाथ थाम कर साथ तो चलो...
क्या पता कौन-सा मोड़ आख़िरी हो...!!
- कुमार
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 165 |
| 11 | मैं, तुम्हें..
प्रेम में उपमाएँ नहीं दूँगा,
ना ही अलंकार या कोई कल्पना।
मैं तुम्हें वास्तविकता दूँगा,
और इसकी गवाही के लिए
अपनी आँखें तुम्हें दे दूँगा,
और साथ में अपना हृदय।
ताकि
तुम्हें पढ़नी न पड़े कोई किताब,
जो रची गई हो मिथ्या प्रेम में।
#Bhagyashree
#review
6 march 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 174 |
| 12 | 🌙 ख़ामोश मुस्कुराहट 🌙
मैंने एक कला सीख ली है...
जब भी किसी से बात करती हूँ,
उसे कभी पता नहीं लगने देती
कि मेरे अंदर क्या चल रहा है।
हँसकर बात करती हूँ,
ताकि कोई सोच भी न सके
कि मैं उदास हूँ... या अंदर से टूट चुकी हूँ।
मगर सच तो ये है,
ये मुस्कुराहट दिल से नहीं होती।
बात करते-करते थक जाती हूँ,
क्योंकि हर लफ़्ज़ के साथ
एक झूठी खुशी का मुखौटा भी पहनना पड़ता है।
कुछ लोग कहते हैं—
"तू बात नहीं करती, तुझे हमारी याद नहीं आती।"
काश... उन्हें कैसे समझाऊँ,
याद तो बहुत आती है,
बात भी करना चाहती हूँ...
पर अपने टूटे हुए दिल का हाल
किसी को सुनाना नहीं चाहती।
नहीं चाहती कि कोई
मेरे दर्द पर बातें बनाए।
बस इसलिए ख़ामोश रहती हूँ...
और जब कभी बात करती भी हूँ,
तो अपने दर्द को छुपाकर,
खुशी का मुखौटा पहनकर करती हूँ।
#Anjali
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 205 |
| 13 | सारे गिले सिखवें भुला कर ,
में आया हूँ मिलने उन्हीं राह तक
मैं तेरी सारी गलतियों को माफ़ कर
बस तेरे एक दीदार को आया हूं
नजर डाल ले एक बार उस खिड़की से ,
में तेरे से मिलने की चाहता में आया हूं
शायद फिर गीले सिखवे मिटाने का मौका न मिले
सज- सवार कर लाये सब मेरे को तेरी गली, शायद फिर दीदार का मौका न मिले
वादा पूरा हुआ हमारा तेरी गली से ही जनाजा रवाना हुआ हमारा
हर बार की तरह जाने से पहले तेरे से इजाजत लेने आया हूं ..
#review
#unknown
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 199 |
| 14 | जब अंधेरा हो चुका हो,
जिंदगी से मन भर चुका हो
हालातो से दिल मर चुका हो
आंखों का सब्र भी टूट चुका हो
जब
कोई अपना भी छोड़ चुका हो
ख़ामोशी से शोर घिर चुका हो
बातों का अर्थ टूट चुका हो
तु खुद में कहीं खो चुका हो
तब
रूकना,सोचना,समझना,संवरना
खुद से ही कहीं पर मिलना
वक्त और हालातो को समझना
अनगिनत अंधेरी रातों से लड़ना
ठहर कर, मंजिल की ओर बढ़ना
और जब..
जब पा लो अपनी मंजिल
तब पीछे मुड़कर देखना
क्या पाया, क्या खोया तुमने
इसका भी जरा हिसाब करना
जब बैठोगे हिसाब करने
तो पाओगे कि,
जो बेमतलब था वो छोड़ा तुमने
जो जरुरी है उसे पाया तुमने
जब ये बात जान जाओगे
सिर्फ तभी
खुदा का शुक्रिया अदा करना।।
#Bhagyashree
#review
12 march 2025
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 199 |
| 15 | "जमाना बड़ा ख़राब है "
सावधान रहना..
किसी पर भरोसा मत करना!
कितना दर्दनाक है यह कहना
उन मासूम बच्चों से..
जिनकी कोमल दुनिया में
अब तक
सिर्फ अच्छाई और करिश्मा हैं
तथा हर चेहरा एक भरोसा है
#romi
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 175 |
| 16 | "जमाना बड़ा ख़राब है "
सावधान रहना..
किसी पर भरोसा मत करना!
कितना दर्दनाक है यह कहना
उन मासूम बच्चों से..
जिनकी कोमल दुनिया में
अब तक
सिर्फ अच्छाई और करिश्मा हैं
तथा हर चेहरा एक भरोसा है
#Bhagyashree
#review
24 feb 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 182 |
| 17 | जब बात इज़हार की आएगी
या किसी उपहार की,
मैं तुम्हें कमल देना पसंद करूंगा
गुलाब या झुमकों से अलग,
या किसी खूबसूरत कविता से भी बढ़कर।
इसलिए नहीं कि
मुझे पसंद नहीं ये सब वस्तुएँ,
बल्कि इसलिए कि
मैं चाहता हूँ
तुम कमल-सी स्वच्छंद बनो,
उसके जैसी कोमल और पवित्र।
ताकि
वासना या मोह के दलदल से
ऊपर रहकर तुम कर सको प्रेम,
और
संसार की विषाक्तता से परे
सदैव खिलती रहो कमल-सी।
ताकि
किसी चंद्रमा पर निर्भर न रहकर
तुम स्वयं में प्रकाश-पुंज बन सको,
और
मिलने या बिछड़ने की आशा से परे
महकती रहो कमल-सी।
शायद
तुम्हें मेरी बातें किताबी लगती हों,
मगर सच यही है..
जब बात इज़हार की आएगी,
मैं तुम्हें कमल दूँगा,
बजाय गुलाब के।
#Bhagyashree
#review
19 feb 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 183 |
| 18 | विरह में जो गिरता है हर एक अश्रु,
वह महज़ खारा पानी नहीं,
एक पूरा का पूरा गणित है।
एक ऐसा हिसाब,
जिसमें तर्क घुटने टेक देता है,
और भावनाएं बही-खाता लेकर बैठ जाती हैं।
पलकों की ढलान से जब फिसलता है,
वह पहला कतरा,
तो वह कुछ घटाता नहीं है अस्तित्व से,
बल्कि जोड़ देता है
विरह की एक और लंबी, अनकही रात।
इस अनोखे अंकगणित में,
एक और एक मिलकर दो नहीं होते।
या तो दोनों पिघलकर एक हो जाते हैं,
या फिर टूटकर सीधे कुछ नहीं।
गालों पर बहती उस नमी की भी,
एक ज्यामिति है,
एक सूक्ष्म भूगोल है।
जो सीधे हृदय के केंद्र बिंदु से शुरू होकर,
ठोड़ी के तीव्र कोण से होती हुई,
स्मृतियों की अंतहीन रेखा बन जाती है।
अजीब है न?
जब इस दर्द को बांटने की कोशिश की जाती है,
तो यह विभाजित होने के बजाय,
दोनों तरफ गुणा हो जाता है।
यह वो समीकरण है,
जहाँ बराबर का चिन्ह कभी टिक नहीं पाता।
एक तरफ होता है असीमित समर्पण,
और दूसरी तरफ बस एक खामोश, अनसुनी
आवाज।
कोई तराजू, कोई पैमाना
इस असंतुलन को कभी तौल नहीं पाया।
–स्वस्तिक त्रिपाठी
#Swastik #review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 188 |
| 19 | लोग हैं कि मेरे बारे में क्या-क्या सोचते हैं...
एक मैं हूँ कि..... अपने बारे कुछ नहीं सोचता...!
#Kumar
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 183 |
| 20 | 🍂🍂
ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
जब हुआ ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का
मुझ को अपने दिल-ए-नाकाम पे रोना आया
🍂🍂
#unknown
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 203 |
