uk
Feedback
Hindi/Urdu Poems

Hindi/Urdu Poems

Відкрити в Telegram

Hindi/Urdu Poetry Collection. Adding some stories too :D Our Groups • @HindiPoetry@WritersClub Channels: • @ThePeepTimes@WritersCafe@CopywritersDesk@WritersDirectory More: 🌐 @tgWeBot | @BigBrandTree

Показати більше
5 803
Підписники
-224 години
-27 днів
-3830 день

Триває завантаження даних...

Залучення підписників
липень '26
липень '26
+35
в 0 каналах
червень '26
+53
в 0 каналах
Get PRO
травень '26
+67
в 0 каналах
Get PRO
квітень '26
+79
в 0 каналах
Get PRO
березень '26
+57
в 0 каналах
Get PRO
лютий '26
+71
в 0 каналах
Get PRO
січень '26
+126
в 1 каналах
Get PRO
грудень '25
+102
в 1 каналах
Get PRO
листопад '25
+78
в 0 каналах
Get PRO
жовтень '25
+96
в 0 каналах
Get PRO
вересень '25
+94
в 0 каналах
Get PRO
серпень '25
+99
в 0 каналах
Get PRO
липень '25
+82
в 0 каналах
Get PRO
червень '25
+83
в 1 каналах
Get PRO
травень '25
+111
в 0 каналах
Get PRO
квітень '25
+70
в 0 каналах
Get PRO
березень '25
+89
в 0 каналах
Get PRO
лютий '25
+90
в 0 каналах
Get PRO
січень '25
+131
в 0 каналах
Get PRO
грудень '24
+194
в 0 каналах
Get PRO
листопад '24
+109
в 0 каналах
Get PRO
жовтень '24
+150
в 0 каналах
Get PRO
вересень '24
+194
в 0 каналах
Get PRO
серпень '24
+193
в 0 каналах
Get PRO
липень '24
+235
в 0 каналах
Get PRO
червень '24
+199
в 0 каналах
Get PRO
травень '24
+192
в 0 каналах
Get PRO
квітень '24
+185
в 0 каналах
Get PRO
березень '24
+198
в 0 каналах
Get PRO
лютий '24
+193
в 1 каналах
Get PRO
січень '24
+211
в 0 каналах
Get PRO
грудень '23
+156
в 0 каналах
Get PRO
листопад '23
+134
в 0 каналах
Get PRO
жовтень '23
+155
в 0 каналах
Get PRO
вересень '23
+177
в 0 каналах
Get PRO
серпень '23
+106
в 0 каналах
Get PRO
липень '23
+113
в 0 каналах
Get PRO
червень '23
+90
в 0 каналах
Get PRO
травень '23
+108
в 0 каналах
Get PRO
квітень '23
+91
в 0 каналах
Get PRO
березень '23
+100
в 0 каналах
Get PRO
лютий '23
+93
в 0 каналах
Get PRO
січень '23
+120
в 0 каналах
Get PRO
грудень '22
+126
в 0 каналах
Get PRO
листопад '22
+88
в 0 каналах
Get PRO
жовтень '22
+85
в 0 каналах
Get PRO
вересень '22
+105
в 0 каналах
Get PRO
серпень '22
+100
в 0 каналах
Get PRO
липень '22
+179
в 0 каналах
Get PRO
червень '22
+76
в 0 каналах
Get PRO
травень '22
+94
в 0 каналах
Get PRO
квітень '22
+91
в 0 каналах
Get PRO
березень '22
+87
в 0 каналах
Get PRO
лютий '22
+66
в 0 каналах
Get PRO
січень '22
+113
в 0 каналах
Get PRO
грудень '21
+130
в 0 каналах
Get PRO
листопад '21
+130
в 0 каналах
Get PRO
жовтень '21
+124
в 0 каналах
Get PRO
вересень '21
+176
в 0 каналах
Get PRO
серпень '21
+155
в 0 каналах
Get PRO
липень '21
+179
в 0 каналах
Get PRO
червень '21
+239
в 0 каналах
Get PRO
травень '21
+325
в 0 каналах
Get PRO
квітень '21
+193
в 0 каналах
Get PRO
березень '21
+261
в 0 каналах
Get PRO
лютий '21
+221
в 0 каналах
Get PRO
січень '21
+305
в 0 каналах
Get PRO
грудень '20
+5 562
в 0 каналах
Дата
Залучення підписників
Згадування
Канали
13 липня+1
12 липня+4
11 липня0
10 липня+2
09 липня+4
08 липня+6
07 липня+2
06 липня+4
05 липня+2
04 липня+3
03 липня0
02 липня+5
01 липня+2
Дописи каналу
मुझे आज भी याद है वो दिन... ❤️ मुझे आज भी याद है वो दिन, जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा था। उस एक पल ने जैसे मेरी पूरी दुनिया बदल दी थी। और मुझे वो दिन भी याद है, जब आख़िरी बार तुमने मुझसे मेरे बनकर बात की थी। तुम्हारी आवाज़ में उस दिन एक अजीब-सा सुकून था, अपनापन था... फ़िक्र थी... ऐसा लगता था जैसे मैं सच में किसी की दुनिया हूँ। मगर शायद वक़्त को हमारा साथ मंज़ूर नहीं था। आज भी उन दोनों दिनों के बीच न जाने कितनी यादें दफ़्न हैं, जिन्हें मैं हर रोज़ भूलने की कोशिश करती हूँ, और हर रात फिर से जी लेती हूँ। तुम चले गए... मगर आज भी कोई तुम्हारा नाम ले ले, तो दिल धड़कना भूल जाता है। #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

2
सूर्यकांतत्रिपाठीनिराला' #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
83
3
उसके हाथों में वो तासीर-ए-मसीहाई थी सूखते पेड़ से भी शाख निकल आई थी कल तो मरने में सहूलत भी बहुत थी मुझको हिज्र था, रात थी, बरसात थी, तन्हाई थी ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी ~यासिर इनाम #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
106
4
तुम्हारी मम्मी ने मुझे तुम्हारे डिब्बे से काजू कतली दी, यूं तो मुझे ये मिठाई कभी पसंद नहीं थी... मगर उस दिन मैंने बस यही सोचा—कि इस पर तुम्हारा हाथ लगा है, और बस... उसी दिन से लेकर आज तक, यह मिठाई मेरी सबसे पसंदीदा मिठाई बन गई! बस... यह हमारा आखिरी दिन था, इसके बाद, मुझे नहीं पता था कि… कि तुम्हारे रास्ते अलग हो जाएंगे... और मेरे भी, मगर सुनो! मैं इन पलों को कभी खत्म नहीं होने दूँगी। ये कायनात... किसी को मिलने से, साथ रहने से तो रोक सकती है,मगर वो इस दिल को कभी नहीं हरा सकती! मैंने तुम्हें अपना ख्वाब लिखा और दिल से स्वीकार भी किया, तुमसे मिली इस दूरी को भी हंसकर अपना लिया... क्योंकि सुनो, इस 11 साल की लड़की की खुशी इसमें नहीं थी कि वो हर पल तुम्हारे साथ रहे, बल्कि इसकी खुशी तो बस इसमें थी कि तुम जहाँ रहो, हमेशा खुश रहो। वो क्या जानती थी मिलना और बिछड़ना? वो तो पगली शादी को भी... केवल तुम्हारे साथ रहने का एक जरिया मान बैठी थी। निश्चय ही जब उसकी भावना ने किसी के मुंह से यह सुन लिया, कि साथ रहने के लिए तो शादी करनी पड़ती है... तो बिना कुछ सोचे, उसने अपने उसी मासूम भोलेपन में कह दिया था—तो ये शादी सिर्फ तुमसे ही हो! मगर... इस निश्चल भावना का मोल, शायद इस दुनिया में कोई ना चुका पाए। ये बहते हुए आँसू गवाह हैं... कि उस मासूम दिल ने भला कौन सा गुनाह किया था, जिसकी सजा उसे आज भी भुगतनी पड़ रही है? मगर फिर भी... मैंने तुम पर लिखा, और वो 11 साल की लड़की जो सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी थी, उसका वो अनमोल ख्वाब... जिसमें तुम उसके हमसफर बनकर हमेशा साथ खड़े रहे, मगर... सिर्फ और सिर्फ ख्वाब में और आखिरकार...मोहब्बत तो खुदा की इबादत की तरह होती है, जो कभी कम नहीं होती,जो बस बढ़ती है... और ताउम्र बढ़ती ही चली जाती है।🌹🍃✨ ( मेरे उपन्यास - " ख्वाबों का हमसफ़र ".... से ) #review #Tinachoudhary 🌟🌟 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
166
5
क्यों चले गए... 💔 तुम्हें शायद कभी एहसास भी न हो, कि तुम्हारे जाने के बाद मुझ पर क्या बीती है। तुम्हारे लिए शायद ये एक फैसला था, मेरे लिए पूरी ज़िंदगी बदल जाने का नाम। आज भी हर सुबह तुम्हारे ख़याल से शुरू होती है, और हर रात तुम्हारी यादों में ही खत्म हो जाती है। कभी-कभी मन करता है ज़ोर से रोऊँ... चीखूँ... और तुमसे बस इतना पूछूँ— क्यों चले गए...? क्या एक बार भी मेरे बारे में नहीं सोचा था? इस रिश्ते में हम दोनों थे, फिर फैसला सिर्फ़ तुम्हारा कैसे हो गया? अगर जाना ही था, तो कम-से-कम वजह तो बता देते... मैंने तो आख़िरी पल तक इस रिश्ते को दिल से निभाया था, पर तुमने बिना कुछ कहे मुझे मेरी ही यादों के सहारे छोड़ दिया...। और सबसे ज़्यादा तकलीफ़ इस बात की है... कि अब मेरे पास ऐसा भी कोई नहीं, जिसके सामने बैठकर अपने दिल का बोझ हल्का कर सकूँ... बस चुपचाप मुस्कुरा देती हूँ, और हर दर्द ख़ुद ही सह लेती हूँ...! 🥀 #anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
177
6
परी हो तुम.... तुम्हें याद है, जब मैं पहली दफा तुमसे मिला था, तब मैंने तुम्हें कहा था, एक परी हो तुम... जो सरलता, अच्छाइयाँ, खुशियाँ, सौभाग्य और प्रेम को बाँटने तथा समझाने के लिए इस धरा पर आई है। तुम्हारी अच्छाइयों में भटककर, मैं भूल बैठा था कि एक परी हो तुम, और अपना हृदय भी तुम्हें समर्पित कर दिया। और अंत में, तुमने छोड़ दिया मुझे भी उन पत्तियों की तरह जो छोड़ देती हैं पेड़ को बसंत से मिलने की ख्वाहिश में। खैर! पत्तियाँ नादान होती हैं, उन्हें नहीं मिलता उनके हिस्से का बसंत, मगर तुम परी हो, अतः तुम्हें मिल गया एक नया बसंत, एक नया नाम- अप्सरा। और, मैं तुम्हारी दी हुई सौगात लेकर यही सोचता रहा.... कौन हो तुम? एक मृगतृष्णा, एक परी या कुछ और। अपने सारे सवालों और जवाबों से हारकर, मैं पढ़ बैठा वो सारी किताबें जिनमें लिखा था "परी".... और अंत में मैंने जाना कुछ परियाँ खुशियाँ देने नहीं आतीं, वे आती हैं बस मन को उलझाने, और एक मीठा भ्रम बनकर आखिर में खो जाने के लिए... #Bhagyashree #review 30 March 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
179
7
"नाजायज बच्चे" परेशान पिता ने जनता के अस्पताल में फोन किया "डाक्टर साहब मेरा पूरा परिवार बीमार हो गया है बड़े बेटे आंदोलन को बुखार प्रदर्शन को निमोनिया तथा घेराव को कैंसर हो गया है सबसे छोटा बेटा 'बंद' हर तीन घंटे बाद उल्टियाँ कर रहा है मेरा भतीजा हड़ताल सिंह हार्ट अटैक से मर रहा है डाक्टर साहब, प्लीज जल्दी आइए प्यारी बिटिया 'सांप्रदायिकता' बेहोश पड़ी है उसे बचाइए।" डाक्टर बोला, "आई एम सौरी मैं सिद्धांतवादी आदमी हूँ नाजायज बच्चों का इलाज नहीं करता हूँ।" रचनाकार :- हुल्लड़ मुरादाबादी #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
149
8
Shree Krishna Ji 🌸 ✨ श्याम जू के गालों पर घुँघराले बाल, देखो,पवन से लिपट कैसे रास रचाए हैं। लट मस्तक पर शेषनाग सी लहराएँ, मोर पंख में देखो, मेरे श्याम समाए हैं। पग-पग माटी उड़ाए चलते हैं श्याम, अधरों की लाली कमल सम प्यारी है। भँवरदल मोहित हो गुंजन करने लगे, पीताम्बरी श्याम जू की छवि निराली है। मंद-मंद यमुना तट पर छाई छवि मनोहारी, चंद्रमा से अधिक श्याम की उजियारी है। पायल की रुनझुन मुरली संग झूम रही, श्याम जू के वर्ण में क्षीरसागर समाए हैं। नील वर्ण, नील नयन पर प्रेम का श्रृंगार है, श्याम जू के वक्ष पर वैजयंती विराजी हैं। अर्ध्दचंद्र भाल पर चन्दन दमक रहा श्याम जू को देख-देख गोपियां हर्षाती हैं। #Bhagyashree #review 25 march 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
159
9
हुस्न के सराब से क्या बहलाओगे मुझे, मैं जिस्म के फ़रेब से खूब वाक़िफ़ हूँ #PriyankaB #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
148
10
कल रौशन थी पूरी रात, ज़हन के उजालों से, दिन ऐसे सियाह हैं, कि परछाईं भी नहीं दिखती #PriyankaB #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
146
11
अफरा-तफरी भागा-भागी उम्र खा रही है ना जाने ये जिन्दगी कहाँ जा रही है । घर को घर रखने को घर से ही बेघर होके देखा है सपनों की कितनी रोटी को तप के तौवे पे सेंका है पहाड़ों का कुआ कर दिया फिर भी चुहि मरी मिली जानें ईश्वर ने काहे हमको धरती पे फेंका है कल्पों सी लंबी सजा भोग अब नींदे आ रही है ना जाने ये जिन्दगी कहाँ जा रही है । सायद धरती पे आना जाना केवल सजा बिताना है उद्गम ये गोलोक का है या नरकों का मुहाना है उसमे भी लंबा लूप सुनो हर जन्म का आना जाना है ससुराल भवन एक कैदी का या श्मशान घाट का थाना है जब भी तर्कों पे मंथन कर्ता उथली सांसे आ रही है ना जाने ये जिन्दगी कहाँ जा रही है । दुनियां के इतने पत्थरों में कहो मैं कैसे प्रेम भरुं दिल की बात करूं दिल से और दिमागों को परे धरूं विरक्त वैरागी योगी सा कहो तो कैसे धीर धरूं थक गया मृत्यु के खेल से सही मरण को कैसे मरूं मेरा कांटा सिर्फ सळी और तेरा कांटा फाळी है तेरी कुत्ती नाम गुलाबो मेरी कुत्ती काळी है दही मानके पूरी दुनिया कपास चबा रही है ना जाने ये जिन्दगी कहाँ जा रही है । ........ sanjay chauhan #review #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
159
12
अक्सर मेरी ख्वाहिशें खुद्खुशी कर खुशियों से सवाल करती हैं- क्या मेरी दुआओं का पता ग़लत था, या मुकद्दर ने दरवाज़ा ही बंद कर लिया? मैं मुस्कुराता हूं तो लोग सुकून समझ लेते हैं पर अब उन्हें कैसे समझाऊं कुछ मुस्कुराहटें आंसुओं का घर होती हैं #Niharika #review Kuchh naya try Kiya hai...constructive criticism is welcome... 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
147
13
एक दिन, मैं कहते-कहते बहुत आगे निकल जाऊंगा, तुम्हारी सोच और कल्पना से भी परे। तब तुम्हें यकीन होगा कि मेरा कहा हर एक शब्द सच्चा था। तब… तुम भी आओगे मेरे पीछे मुझे रोकने के लिए, मेरी सच्चाई स्वीकार करने के लिए, लेकिन तब तक मैं तुम्हारी नज़रों से ओझल हो चुका होऊंगा। और जब तुम खोजोगे मुझे उस राह पर जहाँ कभी मैं चला था, तब तुम्हें एहसास होगा कि मेरे इरादे महज़ शब्द भर नहीं थे। तब तुम अपनी तन्हाइयों में पुकारोगे मेरा नाम, और याद करोगे बीता वक्त। लेकिन वक्त की इस लंबी दूरी में मैं इतना बदल चुका होऊंगा कि लौटना भी चाहूं, तो वापस नहीं लौट पाऊंगा। और उस वक्त तुम्हारे लिए सबसे नेक इंसान बन जाऊंगा मैं, तुम देख सकोगे फासला वक्त के दो पहलुओं के दरमियान। #Bhagyashree #review 21 march 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
159
14
सब लोग कृपया दो hashtag # लगाएं 1. #review 2. अपनी लिखी कविता पे अपने नाम का hashtag # लगाइये, जैसे #yourname किसी और की कविता share करते हैं और उसका नाम नहीं जानते तो #unknown लगाइए #review आपके पोस्ट को @HindiPoems में भी साझा करता है, जो कि समूह का चैनल है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आपकी रचना को अधिक पाठक मिल सकें और एक ऐसा स्थान बना रहे जहाँ केवल कविता ही साझा की जाए, न कि चर्चाएँ। #yourname बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रचना आपके द्वारा लिखी गई है। यदि आप किसी और की कविता साझा कर रहे हैं, तो उनके नाम को हैशटैग में ज़रूर लिखें या यदि लेखक का नाम ज्ञात न हो तो #unknown का उपयोग करें। इसके अलावा #yourname से यह भी आसानी होती है कि समूह/चैनल में आपकी सभी कविताएँ एक साथ खोजी जा सकें। क्यों? ताकि कोई भी व्यक्ति, यहाँ तक कि आप स्वयं भी, उस हैशटैग पर क्लिक करके आपकी पहले साझा की गई सभी कविताएँ पढ़ सके। #review shares your post in @HindiPoems too which is group's channel. This is done to ensure you get more readership and also a place where only poetry goes in and not any discussions. #yourname is important so that you claim your write-up that it's written by you. If in case you are sharing other's poetry then you must use their name in hashtag or #unknown in case you don't know who has written it. Also #yourname makes it easier to find all your poems in group/channel at once. Why? So that someone including you can click on that hashtag and read all of your previous poetry that you shared. 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
156
15
शब्दों का जादू अच्छा आदमी अरे सुना क्या? मथुरा के पेड़े बहुत अच्छे होते हैं और आगरा के पेठे के तो क्या कहने और दिल्ली की परांठे वाली गली तो वाह! और हाँ— बंगाल के रसगुल्ले भी कमाल ही होते हैं और नागपुर के संतरे भी लाजवाब और बनारस का पान तो बेहद अच्छा। और आदमी कहाँ का अच्छा होता है जी? जी आदमी तो कहीं का अच्छा नहीं होता, सब जगह के बेवकूफ़ ही हैं जी! हमें ही डालना पड़ता है— नमक, मसाला, चाशनी, तेल, पैसा, दोस्ती, प्यार, चापलूसी.... — विनायक दुबे, भोपाल #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
168
16
मुझे कुछ न आता हो... मुर्शिद...!! फिर भी... रेगिस्तान में जीना आता है। मैं बालू से महल बनाता हूँ, तानपुरे का साज सजाता हूँ, हवा की सरसराहट से धुन बनाता हूँ, बारिश को राग सुनाता हूँ। मैं वीरान होते खेतों में, सरसों के फूल खिलाता हूँ। मैं जर्जर दीवारों को, फिर रंगों से चमकाता हूँ। हृदय के सवालों के जवाब, स्वयं ही ढूंढ लेता हूँ। धैर्य नहीं है मुझमें, भविष्य के सपने नहीं संजोता हूँ। मैं जीता हूँ... मैं जीता हूँ... हर पल... हर क्षण... दुनियादारी से दूर, ख़ुद को जीता हूँ...!! — कुमार #Kumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
157
17
जब भी ज़माने को देखता हूँ, स्वयं की तुलना करता हूँ... हर बार, स्वयं को अधूरा पाता हूँ। लोग नदी से बह रहे होते हैं, मैं थार के सूखे तालाब सा कहीं पड़ा हूँ। लोग पर्वत से आसमान छू रहे हैं, मैं रेत सा हवा के झोंकों के साथ भटक रहा हूँ। लोग सागर से विशाल हैं, और मैं एक तिनके सा। सबके यार-दोस्तों की भीड़ साथ खड़ी है, मैं रेगिस्तान में अकेला खड़ा हूँ। सब लोग खुलकर बातें कर लेते हैं, मैं दूसरों के सामने स्वयं को असहज पाता हूँ। काबिलियत लोगों में भर-भरकर है, और मेरे पास... कुछ नहीं। यह सोच-सोच कर, मन मसोस कर रह जाता हूँ... — कुमार #Kumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
165
18
प्रेम जब अंतर्मन से हो रूप दिखाते दर्पण से हों, तभी वह केवल प्यार होगा, मधुवन का प्रिय उपहार होगा। तब प्रिय को लिखने हेतु शब्दों का निष्छल बहाव होगा, पंक्ति पर पंक्ति जुड़ जाएँगी, वर्ण-वर्ण में प्रिय का नाम होगा। प्रेम जब अंतर्मन से हो, रूप दिखाते दर्पण से हों... नयनों को बंद करने पर भी मन में प्रिय का आकार होगा, हृदय में प्रेम की धुन होगी, हर श्वास में प्रिय का वास होगा। तब दूरियों का अर्थ शून्य होगा, विरह भी एक वरदान होगा, तब समय की सीमा न होगी, जीवन का हर क्षण स्वीकार होगा। प्रेम जब अंतर्मन से हों, रूप दिखाते दर्पण से हों... तब प्रिय ही ईश्वर का रूप होगा, प्रेम भी अमूल्य आशीष होगा, व स्नेह ही जीवन का स्वरूप होगा, अनंत प्रेम का मधुर आभास होगा। प्रेम जब अंतर्मन से हो... #Bhagyashree #review 19 march 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
187
19
विलोम शब्दों और अलंकारों से सजाकर... प्रकृति का मानवीकरण कर, लावण्य की अतिशयोक्ति कर, मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... व्याकरण की हर कसौटी पर खरा उतरकर, भाषा की मानक शुद्धता को आधार बनाकर, मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... सांसारिकता का संधि-विच्छेद कर, प्रेम की आवश्यकता को पन्नों पर उकेरकर, मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... लिपि के विकास को छोड़कर, भूत-भविष्य के जाल को तोड़कर, वर्तमान का साथ लिखूंगा... मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि में, भले असफल हो जाऊं... मगर... पतझड़ में झड़ते फूलों का शाखाओं से प्रेम को भरपूर लिखूंगा, मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... सब कुछ न सही... जो भी लिखूंगा हृदय से लिखूंगा... किसान का मिट्टी से लगाव सा अपनत्व का सच लिखूंगा... मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... –कुमार #Kumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
186
20
मानो शहद की भरी हुई मेरी गगरि फूट जाती है मेरा आपा खाने को आता है सखी..जब तू रूठ जाती है । बादल गुजर गया हो जैसे धरती प्यासी छोड़ कर गुलशन बैठ गया हो जैसे मुझसे मुँह मोड़ कर मेले में अपना खोया हो मेरा हाथ छोड़ कर दर्द ने जैसे माफी मांगी कवि का ह्रदय तोड़ कर भीतर की बातेँ कहने को फिर काग़ज़ कलम उठ जाती है मेरा आपा खाने को आता है सखी..जब तू रूठ जाती है । भैंस ने जैसे भरी दूध की बाल्टी पे लात मारी हो चाय में जैसे मक्खी कुदी गन्ने की पोरी खारी हो दुकानों पे भीड़ भड़ाका लेकिन सिर्फ उधारी हो जग ने खूब सराहा जैसे लेकिन कानि नारी हो जैसे कि जल्दी खूब करी पर गाड़ी छूट जाती है मेरा आपा खाने को आता है सखी..जब तू रूठ जाती है । सुनो.. यूँ मुझसे रूठा ना कर तेवर से मुझे कुटा ना कर हँसी खुशी में क्या जाता है चुप होके फिर फूटा ना कर जैसे कि तांगा तुलसी की गठरी लूट जाती है जैसे कि हरि भरी किसी की खेती सूख जाती है जैसे कि बड़ी इमारत की मंजिल पहली टूट जाती है मेरा आपा खाने को आता है सखी..जब तू रूठ जाती है । .......sanjay chauhan #sanjay #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
157