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Hindi/Urdu Poems

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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,, ना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए। बशीर बद्र #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

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एक कांच का जंगल है शहर शहर जिसमें बसा है जानवर जो दिखता है इंसान जैसा पर उसमें रहता है एक हैवान ये जंगल है तिलिस्म से भरा इसमें चांद से रौशन है स्ट्रीट लाइट इसकी नसें हैं ये अनगिनत सड़कें जिनकी धड़कनें हैं भागतीं मेट्रो यहां नहीं रहती है कोई कोयल यहां रहता है शोर, लोगों का यहां नहीं बसता है आसमान यहां बसती है धूंध, फैक्ट्रियों की यहां उड़ती हुई रेत ही है समय चार दीवारी ही है सारे मौसम और सबसे जरूरी बात है कि, यहां सिर्फ फोन ही है इंसान यहां कृत्रिम पेड़ है हरियाली व बदहवास सी है जिंदगानी यहां शिकार हंस हंसकर सौंपते हैं अपना मांस शिकारी को ये कांच का जंगल सजा है बड़ी बड़ी सुसज्जित इमारतों से जिनमें उलझकर मरता है इंसान जैसे मरती है अनगिनत मकड़ियां #Bhagyashree #review 18 feb 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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अजीब हो गया है ये ज़माना, क्या कहूँ और क्या न कहूँ, सबकी आँखों के सामने है, फिर भी सब अनजान बने बैठे हैं। पहले लोग वक्त बिताने के लिए शतरंज या लूडो खेला करते थे, अब तो ये दौर बदल गया है साहब... अब लोग वक्त बिताने के लिए खेल नहीं खेलते, बल्कि सीधे इंसानों के 'दिल' से खेलते हैं। पहले आदत बनाते हैं, हर पल का हिस्सा बन जाते हैं, फिर जब खेल पूरा हो जाता है, तो किसी पुराने खिलौने की तरह, हमें अपनी दुनिया से बाहर निकाल फेंकते हैं। उन्हें क्या पता, जिस खेल को वो 'वक्त गुज़ारी' कहते हैं, उसमें किसी की रूह का, हर एक कोना टूट जाता है। #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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तुम्हारी मजबूरियां तुम्हे मुबारक.... मेरी नज़र में धोखेबाज़ हो तुम ।। #review #जौन् 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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शब्दों के खेल भी निराले हैं मेरे दोस्त कोई वाह वाही के लिये लिखता है तो कोई अपनी तनहाई के लिये लिखता है तो कोई देश में हो रही तानाशाही के लिये लिखता है #khanshab #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक मुद्दत से पुकारा नहीं तुम ने मुझे ऐसा लगता है मेरा नाम नहीं है कोई.. बस इसी बात पे उकताई हुई फिरती हूँ तुम हो मसरुफ, और मुझे काम नहीं है कोई..!! #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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यह एक ऐसा भारत है, जिसकी आत्मा आज भी अनबिकी है। पर यह भी याद रहे— कि यहाँ की मक्खियों के भी अपने भारत और पाकिस्तान हैं! जैसे अघोरियों का अपना एक भारत है, और यहाँ रोज़ चबाए जाते हैं कई सूक्ष्म-भारत— टाट की झुग्गियों में बैठे, पान की लाली थूके साधुओं द्वारा। यह देश नामी है उस 'भरत' के नाम पर, जो कभी लोहे के रथ का सम्राट था। मगर आज... किसी को परवाह नहीं, कि तुम कैसे छिटका देते हो अपनी हल्दी जैसी मानसूनी चाय— बाँस के इन जर्जर मचानों पर... ओ सदियों से सोए हुए सुनहरे, नदी किनारे बसे सर्वहारा के शहर! ओडिशा... मद्रास... और इस आधी रात के सन्नाटे में, जब ये कागज़ी कारिंदे— सज़ा खाते हैं, कलम घिसते हैं और मुरझाते-सूखते हैं! ठीक उसी वक्त, घर की स्त्रियाँ काटती हैं भिंडी, एक आँख दहेज़ के बक्से पर टिकाए, एक आँख मुंडेर पर बैठे कौवे पर गाड़े, और अपनी तीसरी आँख... उस अनंत ब्रह्मांड में खोले हुए, जो असल में शिव की— बिना पलक झपके जलती, कपूर जैसी वह दिव्य तीसरी आँख है! - अध्यात्म सिंह - #adhyatm #poem #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक कमरा,एक कहानी ये मेरी कहानी है, या यूं कह लो हमारी कहानी है मेरी कहानी शुरू होती है एक कमरे से, हां वही कमरे से, जिसमें आप, मैं और सब रहते हैं, ये कमरा महज़ एक कमरा नहीं है ये बंद डिब्बे में रखी मेरी सांसें हैं, इसकी सारी दीवारें मेरी नसें हैं और बरामदा जैसे "धड़कन" इसकी खिड़कियां जैसे कोई ख्वाब हैं वो ख्वाब जो मुझे हौसला देते हैं और दो दरवाजों के बीच की दूरी है "समझौता" वो समझौता जो मुझे हक़ीक़त बताता है इस जीवन की आपाधापी से थककर और शहर के धूल कणों से लड़कर मैं कह देती हूं हर बात आईने को, उसे ही मान लेती हूं दिल अपना रात की उदासी में आह भरते हुए आंसु बहा देती हैं ये रंगहीन दीवारें ये पंखा समेट लेता है मेरी यादें और कागज़ छुपा लेते हैं दर्द मेरा ये बिस्तर और तकिए मेरी रूह जैसे हैं हर रात मुझे समा लेते हैं खुद में और देते हैं आश्वासन एक नए दिन का एक ऐसा दिन जो महज मेरे ख्यालों में है और हर बार की तरह, एक नए दिन और नए वादे के साथ, ये कमरा हंसकर करता है मुझे विदा और रात होते ही बन जाता है मेरी दुनिया अंत में खत्म होती है मेरी कहानी, एक कमरे पर, हां उसी कमरे पर जिसमें आप, मैं और सब रहते हैं #Bhagyashree #review 17 feb 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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जब मेघों ने खोले केश, दिशि-दिशि बिखरा नील अँधेरा, बूँदों ने अविराम स्वरों में छेड़ा जीवन का इक डेरा। हर बूँद अपनी कथा लिए थी, कोई विरह, कोई अभिलाषा, कोई धरती की प्यास बनी थी, कोई अंबर की परिभाषा। जो मिट्टी में चुप समा गई, उसने अंकुर जन्म दिए थे। जो नदी बनी बहती निकली, उसने सागर-पंथ लिए थे। कोई बूँद पत्तों पर ठहरे, कोई मिट्टी में घर कर जाए। कोई बहती नदी से बोले, कोई सागर में खो जाए। देखो पर्वत मौन खड़े हैं, देखो नदियाँ गीत सुनाएँ। झुक-झुक कर फल देते वृक्ष, बिन बोले ही ज्ञान सिखाएँ। मौसम आते, मौसम जाते, रंग बदलते नभ के आँचल। फिर भी धरती हर वर्षा में रच लेती है नव संबल। मैंने पूछा-"हे वर्षा! बतला, गिरकर तुझको पीर न होती?" हँसकर बोली- ठहरो उतना, जितना पत्ते मोती का सम्मान करें.. फिर बह जाना इस जग में, ज्यों नदियाँ अवसान करें। तब से हर सावन में मुझको जीवन का यह मर्म मिला है बादल बनना सरल बहुत है, बूँद बनो, तो अर्थ खुला है... #review #khayalowaliladki 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक चेहरे के फसाने हजार, धोखे के खंजर दिल के आर पार ✍️💔 #sneh #review ✍️💖 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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11
प्रेम में जो उतरता है, वह स्वयं से भी बड़ा हो जाता है। न ताज उसे ऊँचा करता है, न कोई सिंहासन अमर बनाता है। एक सच्चा प्रेम ही पर्याप्त है— मनुष्य को मनुष्य से, और आत्मा को ईश्वर से मिलाने के लिए। #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
188
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प्रेम में होना हमेशा बेहतर रहा है कुछ और होने से, इसलिए ही कृष्ण ने चुना पहले,प्रेमी होना द्वारकाधीश या ईश्वर होने से। उन्होंने चुनी प्रेम की राह, और बनाया उसे ही अपना धर्म, सजाया मस्तक पर मोरपंख, और बन गए मनमोहन,मुरलीधर। अंततः प्रेम ने बनाया कृष्ण को संपूर्ण व सर्वश्रेष्ठ, करुणा,सौंदर्य,साहस और नीति में किया सोलह कलाओं में पारंगत। अतः प्रेम में होना सदैव से रहा है "जगत में सबसे सुंदर", और सबसे सरल रहा है.. “प्रेमी होना” कुछ और होने से। #bhagyashree #review 9 feb 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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भीड़ के इस प्रचंड शोर में भी, मैं एक ऐसी चीख हूँ, जिसे कोई सुन नहीं पाता। यह खालीपन अब सिर्फ एक अहसास नहीं, मेरी रूह का लिबास बन गया है। भारी, दमघोंटू और पूरी तरह से मेरा अपना। जब रात अपनी चादर पसारती है, तो मेरे भीतर की शून्यता एक गहरे कुएं की तरह डराने लगती है, जिसमें मैं रोज़ थोड़ा-थोड़ा गिरता हूँ, पर कभी तल तक नहीं पहुँच पाता। अतीत की स्मृतियाँ अब धुएँ के गुबार सी आँखों में चुभती हैं, मानो मेरी ही सांसें, मेरे ही वजूद से, अलग होने की ज़िद कर रही हों। मेरी यह मुस्कान अब एक बेजान मुखौटे की तरह चेहरे पर लटकती है, जिसके पीछे छुपा दर्द भी, अब थककर सो गया है। मैं उस मुसाफ़िर की तरह हूँ, जो चलते-चलते अपनी ही मंज़िल का नाम भूल चुका है, और अब बस पत्थरों पर बैठकर, अपनी परछाईं को भी धुंधला होते देख रहा है। हृदय की धड़कनें अब संगीत नहीं, एक भारी हथौड़े की तरह बजती हैं, जो याद दिलाती हैं कि मैं ज़िंदा तो हूँ, पर जीवंत नहीं। इच्छाओं का दीया अब बुझे हुए कोयले सा काला और ठंडा पड़ चुका है, यह उदासी नहीं है, यह तो मेरे अपने ही भीतर का एक महा मौन है, जहां मैं शून्य में विलीन हो रहा हूँ, या शून्य मुझमें... अब इसका अंतर भी मिट गया है। –स्वस्तिक त्रिपाठी #Swastik #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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आखों से आंसू कम अरमान ज्यादा झलक रहे हैं दुनियादारी की इस दोड़ में खुद को साबित करने की इस होड़ में उदासी कम महफ़िले ज्यादा सज रही है Written by Reena Instagram @CuriousReena #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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" एक ख्वाब " तुम पास बैठो, मैं तुम्हें एकटक निहारती जाऊँ। तुम बातें करो, मैं तुम्हें सुनती जाऊँ। तुम तनिक मुस्कुराओ, मैं तुम पर वारी जाऊँ। तुम मुझे समझाओ, मैं तुम्हें समझ जाऊँ। तुम कुछ गुनगुनाओ, मैं तुम्हारा सुर बन जाऊँ। तुम पास बैठो, मैं तुम्हें एकटक निहारती जाऊँ। #review #Tinachoudhary 🌟 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मुझे पसंद हैं मेरी मगरूर आँखें, इनका इक मयार हैं… ये हर ऐरे गैरे की तलबगार नहीं !♥️ #review #unknown 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक दिन सब ठीक हो जाएगा मिलेंगी मंजिलें, खुशनुमा माहौल हो जाएगा एक दिन सब ठीक हो जाएगा खुदको इस कदर खोया है कभी न सोचा था कि जीना मोहाल हो जाएगा मुस्कुराहट का लिबाज़ ओढ़े हैं हम नहीं तो अंदर हर ख्वाब बेहाल हो जाएगा रोज़ थोड़ा थोड़ा टूटते हैं हम इसी उम्मीद में कि एक दिन बिखरना कमाल हो जाएगा यूं चलते चलते जिंदा लाश बन गया हूं मैं और माँ को लगता है एक दिन सब ठीक हो जाएगा... #Niharika #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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कुछ बचाने के लिए, उम्र गँवाते हुए लोग, ख़र्च हो जाएँगे, ये ख़्वाब कमाते हुए लोग। — अंफ़ाल रफ़ीक़ ⏳ #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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इस फेक और पीआर वाली दुनिया में, तुम जो हो, जैसे हो, उसे बचाए हो, तो जिंदा हो तुम। #Swastik #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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अलविदा कविता एक लड़का जो नही जानता था; अलंकार, शब्द शक्तियाँ.. छंद और... कविता का व्याकरण.. उसे नहीं मालूम था... कैसे कविता के हर एक शब्द, हर एक पंक्ति को सजाया जाता हैं... कैसे लिखे जाते हैं, मनमोहक शब्द... फिर भी अपने कांपते हाथों से कलम थाम ली वो लिखना चाहता था; तुम्हारी सादगी, तुम्हारी सच्चाई... वो हर पंक्ति लिखना चाहता था बिना किसी शब्द-जाल के... खेतों में लहराते नरमे के बूटे.. चमकती हुई दीवारों को नींव बनाती पक्की ईंटें.. उन सबका राज.... खुर्दरे हाथों का हाल... मिट्टी की सोंधी खुशबू, चूल्हे में जलते हुए सपने, दम तोड़ती प्यास, लोगों की मरती आस... ज़माने की निगाहो से अदृश्य लोग उन सबके हाल को लिखना चाहता था... वो चुन-चुन कर मिट्टी के कणों को अपने अरमान लिखना चाहता था... संवेदनाओं को भरपूर लिखना चाहता था... मगर वो लिख नहीं पाया, अपनी मंजिल को पाने में असमर्थ रहा.. चंद महीनो में हार गया; अलविदा कविता... अलविदा.....!! कुमार 🖤🖤 #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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