Hindi/Urdu Poems
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मेरे हिस्से का दिन लेकर
तू मुझको गहरी रात दे दे,
रख ले तू खुशियाँ सारी
मुझको ग़म की बरसात दे दे।
मेरी कहानी तू रख ले,
मुझको दर्द की सौगात दे दे,
खो जाएँगी ये बात पन्नों में
मुझको केवल कोरा मन दे दे।
मैं थक गया हूँ ख़्वाबों से,
तू थोड़ी सी तो राहत दे दे,
तड़पती इन यादों के बदले
मुझको थोड़ी खामोशी दे दे।
तू उड़ती रहे चिड़िया सी,
रब तुझको सारी खुशियाँ दे दे,
तेरे क़दमों में सारा जहाँ हो
रब मुझको सारे घाव दे दे।
मैं थक गया हूँ उम्मीदों में,
मुझको थोड़ा सा विराम दे दे,
तू लौटे अगर मेरी क़िस्मत में
तो मेरे जीवन को पूर्णविराम दे दे।
#bhagyashree
#review
12 March 2025
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
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| 2 | ये जो दुकानें लगा रखी हैं... प्रेम की,
अब बंद भी करो...
बहुत बिक गया है... प्रेम।
ज़रा! नफ़रत को भी बिक जाने दो,
दुनिया से उसका नामों-निशान मिट जाने दो...।
जो मुखौटे लगा रखे हैं... सबने,
उनका भी सच सामने आ जाने दो...
अब बहुत हो गया,
रिश्तों का बाज़ारीकरण...
एक बार दिल से भी निभा कर देखो ...
मंजिल की तलाश में...
तबीयत से हाथ थाम कर साथ तो चलो...
क्या पता कौन-सा मोड़ आख़िरी हो...!!
- कुमार
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 37 |
| 3 | मैं, तुम्हें..
प्रेम में उपमाएँ नहीं दूँगा,
ना ही अलंकार या कोई कल्पना।
मैं तुम्हें वास्तविकता दूँगा,
और इसकी गवाही के लिए
अपनी आँखें तुम्हें दे दूँगा,
और साथ में अपना हृदय।
ताकि
तुम्हें पढ़नी न पड़े कोई किताब,
जो रची गई हो मिथ्या प्रेम में।
#Bhagyashree
#review
6 march 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
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| 4 | 🌙 ख़ामोश मुस्कुराहट 🌙
मैंने एक कला सीख ली है...
जब भी किसी से बात करती हूँ,
उसे कभी पता नहीं लगने देती
कि मेरे अंदर क्या चल रहा है।
हँसकर बात करती हूँ,
ताकि कोई सोच भी न सके
कि मैं उदास हूँ... या अंदर से टूट चुकी हूँ।
मगर सच तो ये है,
ये मुस्कुराहट दिल से नहीं होती।
बात करते-करते थक जाती हूँ,
क्योंकि हर लफ़्ज़ के साथ
एक झूठी खुशी का मुखौटा भी पहनना पड़ता है।
कुछ लोग कहते हैं—
"तू बात नहीं करती, तुझे हमारी याद नहीं आती।"
काश... उन्हें कैसे समझाऊँ,
याद तो बहुत आती है,
बात भी करना चाहती हूँ...
पर अपने टूटे हुए दिल का हाल
किसी को सुनाना नहीं चाहती।
नहीं चाहती कि कोई
मेरे दर्द पर बातें बनाए।
बस इसलिए ख़ामोश रहती हूँ...
और जब कभी बात करती भी हूँ,
तो अपने दर्द को छुपाकर,
खुशी का मुखौटा पहनकर करती हूँ।
#Anjali
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 132 |
| 5 | सारे गिले सिखवें भुला कर ,
में आया हूँ मिलने उन्हीं राह तक
मैं तेरी सारी गलतियों को माफ़ कर
बस तेरे एक दीदार को आया हूं
नजर डाल ले एक बार उस खिड़की से ,
में तेरे से मिलने की चाहता में आया हूं
शायद फिर गीले सिखवे मिटाने का मौका न मिले
सज- सवार कर लाये सब मेरे को तेरी गली, शायद फिर दीदार का मौका न मिले
वादा पूरा हुआ हमारा तेरी गली से ही जनाजा रवाना हुआ हमारा
हर बार की तरह जाने से पहले तेरे से इजाजत लेने आया हूं ..
#review
#unknown
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 150 |
| 6 | जब अंधेरा हो चुका हो,
जिंदगी से मन भर चुका हो
हालातो से दिल मर चुका हो
आंखों का सब्र भी टूट चुका हो
जब
कोई अपना भी छोड़ चुका हो
ख़ामोशी से शोर घिर चुका हो
बातों का अर्थ टूट चुका हो
तु खुद में कहीं खो चुका हो
तब
रूकना,सोचना,समझना,संवरना
खुद से ही कहीं पर मिलना
वक्त और हालातो को समझना
अनगिनत अंधेरी रातों से लड़ना
ठहर कर, मंजिल की ओर बढ़ना
और जब..
जब पा लो अपनी मंजिल
तब पीछे मुड़कर देखना
क्या पाया, क्या खोया तुमने
इसका भी जरा हिसाब करना
जब बैठोगे हिसाब करने
तो पाओगे कि,
जो बेमतलब था वो छोड़ा तुमने
जो जरुरी है उसे पाया तुमने
जब ये बात जान जाओगे
सिर्फ तभी
खुदा का शुक्रिया अदा करना।।
#Bhagyashree
#review
12 march 2025
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 155 |
| 7 | "जमाना बड़ा ख़राब है "
सावधान रहना..
किसी पर भरोसा मत करना!
कितना दर्दनाक है यह कहना
उन मासूम बच्चों से..
जिनकी कोमल दुनिया में
अब तक
सिर्फ अच्छाई और करिश्मा हैं
तथा हर चेहरा एक भरोसा है
#romi
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 135 |
| 8 | "जमाना बड़ा ख़राब है "
सावधान रहना..
किसी पर भरोसा मत करना!
कितना दर्दनाक है यह कहना
उन मासूम बच्चों से..
जिनकी कोमल दुनिया में
अब तक
सिर्फ अच्छाई और करिश्मा हैं
तथा हर चेहरा एक भरोसा है
#Bhagyashree
#review
24 feb 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 142 |
| 9 | जब बात इज़हार की आएगी
या किसी उपहार की,
मैं तुम्हें कमल देना पसंद करूंगा
गुलाब या झुमकों से अलग,
या किसी खूबसूरत कविता से भी बढ़कर।
इसलिए नहीं कि
मुझे पसंद नहीं ये सब वस्तुएँ,
बल्कि इसलिए कि
मैं चाहता हूँ
तुम कमल-सी स्वच्छंद बनो,
उसके जैसी कोमल और पवित्र।
ताकि
वासना या मोह के दलदल से
ऊपर रहकर तुम कर सको प्रेम,
और
संसार की विषाक्तता से परे
सदैव खिलती रहो कमल-सी।
ताकि
किसी चंद्रमा पर निर्भर न रहकर
तुम स्वयं में प्रकाश-पुंज बन सको,
और
मिलने या बिछड़ने की आशा से परे
महकती रहो कमल-सी।
शायद
तुम्हें मेरी बातें किताबी लगती हों,
मगर सच यही है..
जब बात इज़हार की आएगी,
मैं तुम्हें कमल दूँगा,
बजाय गुलाब के।
#Bhagyashree
#review
19 feb 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 145 |
| 10 | विरह में जो गिरता है हर एक अश्रु,
वह महज़ खारा पानी नहीं,
एक पूरा का पूरा गणित है।
एक ऐसा हिसाब,
जिसमें तर्क घुटने टेक देता है,
और भावनाएं बही-खाता लेकर बैठ जाती हैं।
पलकों की ढलान से जब फिसलता है,
वह पहला कतरा,
तो वह कुछ घटाता नहीं है अस्तित्व से,
बल्कि जोड़ देता है
विरह की एक और लंबी, अनकही रात।
इस अनोखे अंकगणित में,
एक और एक मिलकर दो नहीं होते।
या तो दोनों पिघलकर एक हो जाते हैं,
या फिर टूटकर सीधे कुछ नहीं।
गालों पर बहती उस नमी की भी,
एक ज्यामिति है,
एक सूक्ष्म भूगोल है।
जो सीधे हृदय के केंद्र बिंदु से शुरू होकर,
ठोड़ी के तीव्र कोण से होती हुई,
स्मृतियों की अंतहीन रेखा बन जाती है।
अजीब है न?
जब इस दर्द को बांटने की कोशिश की जाती है,
तो यह विभाजित होने के बजाय,
दोनों तरफ गुणा हो जाता है।
यह वो समीकरण है,
जहाँ बराबर का चिन्ह कभी टिक नहीं पाता।
एक तरफ होता है असीमित समर्पण,
और दूसरी तरफ बस एक खामोश, अनसुनी
आवाज।
कोई तराजू, कोई पैमाना
इस असंतुलन को कभी तौल नहीं पाया।
–स्वस्तिक त्रिपाठी
#Swastik #review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 151 |
| 11 | लोग हैं कि मेरे बारे में क्या-क्या सोचते हैं...
एक मैं हूँ कि..... अपने बारे कुछ नहीं सोचता...!
#Kumar
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 149 |
| 12 | 🍂🍂
ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
जब हुआ ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का
मुझ को अपने दिल-ए-नाकाम पे रोना आया
🍂🍂
#unknown
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 163 |
| 13 | उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,,
ना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।
बशीर बद्र
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 177 |
| 14 | एक कांच का जंगल है शहर
शहर जिसमें बसा है जानवर
जो दिखता है इंसान जैसा
पर उसमें रहता है एक हैवान
ये जंगल है तिलिस्म से भरा
इसमें चांद से रौशन है स्ट्रीट लाइट
इसकी नसें हैं ये अनगिनत सड़कें
जिनकी धड़कनें हैं भागतीं मेट्रो
यहां नहीं रहती है कोई कोयल
यहां रहता है शोर, लोगों का
यहां नहीं बसता है आसमान
यहां बसती है धूंध, फैक्ट्रियों की
यहां उड़ती हुई रेत ही है समय
चार दीवारी ही है सारे मौसम
और सबसे जरूरी बात है कि,
यहां सिर्फ फोन ही है इंसान
यहां कृत्रिम पेड़ है हरियाली
व बदहवास सी है जिंदगानी
यहां शिकार हंस हंसकर
सौंपते हैं अपना मांस शिकारी को
ये कांच का जंगल सजा है
बड़ी बड़ी सुसज्जित इमारतों से
जिनमें उलझकर मरता है इंसान
जैसे मरती है अनगिनत मकड़ियां
#Bhagyashree
#review
18 feb 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 212 |
| 15 | अजीब हो गया है ये ज़माना, क्या कहूँ और क्या न कहूँ,
सबकी आँखों के सामने है, फिर भी सब अनजान बने बैठे हैं।
पहले लोग वक्त बिताने के लिए शतरंज या लूडो खेला करते थे,
अब तो ये दौर बदल गया है साहब...
अब लोग वक्त बिताने के लिए खेल नहीं खेलते,
बल्कि सीधे इंसानों के 'दिल' से खेलते हैं।
पहले आदत बनाते हैं, हर पल का हिस्सा बन जाते हैं,
फिर जब खेल पूरा हो जाता है, तो किसी पुराने खिलौने की तरह,
हमें अपनी दुनिया से बाहर निकाल फेंकते हैं।
उन्हें क्या पता, जिस खेल को वो 'वक्त गुज़ारी' कहते हैं,
उसमें किसी की रूह का, हर एक कोना टूट जाता है।
#BidyaG
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 194 |
| 16 | तुम्हारी मजबूरियां तुम्हे मुबारक....
मेरी नज़र में धोखेबाज़ हो तुम ।।
#review
#जौन्
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 208 |
| 17 | शब्दों के खेल भी निराले हैं मेरे दोस्त
कोई वाह वाही के लिये लिखता है
तो कोई अपनी तनहाई के लिये लिखता है
तो कोई देश में हो रही तानाशाही के लिये लिखता है
#khanshab
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 216 |
| 18 | एक मुद्दत से पुकारा नहीं तुम ने मुझे
ऐसा लगता है मेरा नाम नहीं है कोई..
बस इसी बात पे उकताई हुई फिरती हूँ
तुम हो मसरुफ, और मुझे काम नहीं है कोई..!!
#unknown
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 233 |
| 19 | यह एक ऐसा भारत है,
जिसकी आत्मा आज भी अनबिकी है।
पर यह भी याद रहे—
कि यहाँ की मक्खियों के भी
अपने भारत और पाकिस्तान हैं!
जैसे अघोरियों का अपना एक भारत है,
और यहाँ रोज़ चबाए जाते हैं कई सूक्ष्म-भारत—
टाट की झुग्गियों में बैठे,
पान की लाली थूके साधुओं द्वारा।
यह देश नामी है उस 'भरत' के नाम पर,
जो कभी लोहे के रथ का सम्राट था।
मगर आज... किसी को परवाह नहीं,
कि तुम कैसे छिटका देते हो अपनी
हल्दी जैसी मानसूनी चाय—
बाँस के इन जर्जर मचानों पर...
ओ सदियों से सोए हुए सुनहरे,
नदी किनारे बसे सर्वहारा के शहर!
ओडिशा... मद्रास...
और इस आधी रात के सन्नाटे में,
जब ये कागज़ी कारिंदे—
सज़ा खाते हैं, कलम घिसते हैं और मुरझाते-सूखते हैं!
ठीक उसी वक्त, घर की स्त्रियाँ काटती हैं भिंडी,
एक आँख दहेज़ के बक्से पर टिकाए,
एक आँख मुंडेर पर बैठे कौवे पर गाड़े,
और अपनी तीसरी आँख...
उस अनंत ब्रह्मांड में खोले हुए,
जो असल में शिव की—
बिना पलक झपके जलती,
कपूर जैसी वह दिव्य तीसरी आँख है!
- अध्यात्म सिंह -
#adhyatm
#poem
#review
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 226 |
| 20 | एक कमरा,एक कहानी
ये मेरी कहानी है,
या यूं कह लो हमारी कहानी है
मेरी कहानी शुरू होती है एक कमरे से,
हां वही कमरे से,
जिसमें आप, मैं और सब रहते हैं,
ये कमरा महज़ एक कमरा नहीं है
ये बंद डिब्बे में रखी मेरी सांसें हैं,
इसकी सारी दीवारें मेरी नसें हैं
और बरामदा जैसे "धड़कन"
इसकी खिड़कियां जैसे कोई ख्वाब हैं
वो ख्वाब जो मुझे हौसला देते हैं
और
दो दरवाजों के बीच की दूरी है "समझौता"
वो समझौता जो मुझे हक़ीक़त बताता है
इस जीवन की आपाधापी से थककर
और शहर के धूल कणों से लड़कर
मैं कह देती हूं हर बात आईने को,
उसे ही मान लेती हूं दिल अपना
रात की उदासी में आह भरते हुए
आंसु बहा देती हैं ये रंगहीन दीवारें
ये पंखा समेट लेता है मेरी यादें
और कागज़ छुपा लेते हैं दर्द मेरा
ये बिस्तर और तकिए मेरी रूह जैसे हैं
हर रात मुझे समा लेते हैं खुद में
और देते हैं आश्वासन एक नए दिन का
एक ऐसा दिन जो महज मेरे ख्यालों में है
और हर बार की तरह,
एक नए दिन और नए वादे के साथ,
ये कमरा हंसकर करता है मुझे विदा
और रात होते ही बन जाता है मेरी दुनिया
अंत में खत्म होती है मेरी कहानी,
एक कमरे पर,
हां उसी कमरे पर
जिसमें आप, मैं और सब रहते हैं
#Bhagyashree
#review
17 feb 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
🔥 More on @tgWiz | 203 |
