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Hindi/Urdu Poems

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Дописи каналу
अक्सर मेरी ख्वाहिशें खुद्खुशी कर खुशियों से सवाल करती हैं- क्या मेरी दुआओं का पता ग़लत था, या मुकद्दर ने दरवाज़ा ही बंद कर लिया? मैं मुस्कुराता हूं तो लोग सुकून समझ लेते हैं पर अब उन्हें कैसे समझाऊं कुछ मुस्कुराहटें आंसुओं का घर होती हैं #Niharika #review Kuchh naya try Kiya hai...constructive criticism is welcome... 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

2
एक दिन, मैं कहते-कहते बहुत आगे निकल जाऊंगा, तुम्हारी सोच और कल्पना से भी परे। तब तुम्हें यकीन होगा कि मेरा कहा हर एक शब्द सच्चा था। तब… तुम भी आओगे मेरे पीछे मुझे रोकने के लिए, मेरी सच्चाई स्वीकार करने के लिए, लेकिन तब तक मैं तुम्हारी नज़रों से ओझल हो चुका होऊंगा। और जब तुम खोजोगे मुझे उस राह पर जहाँ कभी मैं चला था, तब तुम्हें एहसास होगा कि मेरे इरादे महज़ शब्द भर नहीं थे। तब तुम अपनी तन्हाइयों में पुकारोगे मेरा नाम, और याद करोगे बीता वक्त। लेकिन वक्त की इस लंबी दूरी में मैं इतना बदल चुका होऊंगा कि लौटना भी चाहूं, तो वापस नहीं लौट पाऊंगा। और उस वक्त तुम्हारे लिए सबसे नेक इंसान बन जाऊंगा मैं, तुम देख सकोगे फासला वक्त के दो पहलुओं के दरमियान। #Bhagyashree #review 21 march 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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3
सब लोग कृपया दो hashtag # लगाएं 1. #review 2. अपनी लिखी कविता पे अपने नाम का hashtag # लगाइये, जैसे #yourname किसी और की कविता share करते हैं और उसका नाम नहीं जानते तो #unknown लगाइए #review आपके पोस्ट को @HindiPoems में भी साझा करता है, जो कि समूह का चैनल है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आपकी रचना को अधिक पाठक मिल सकें और एक ऐसा स्थान बना रहे जहाँ केवल कविता ही साझा की जाए, न कि चर्चाएँ। #yourname बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रचना आपके द्वारा लिखी गई है। यदि आप किसी और की कविता साझा कर रहे हैं, तो उनके नाम को हैशटैग में ज़रूर लिखें या यदि लेखक का नाम ज्ञात न हो तो #unknown का उपयोग करें। इसके अलावा #yourname से यह भी आसानी होती है कि समूह/चैनल में आपकी सभी कविताएँ एक साथ खोजी जा सकें। क्यों? ताकि कोई भी व्यक्ति, यहाँ तक कि आप स्वयं भी, उस हैशटैग पर क्लिक करके आपकी पहले साझा की गई सभी कविताएँ पढ़ सके। #review shares your post in @HindiPoems too which is group's channel. This is done to ensure you get more readership and also a place where only poetry goes in and not any discussions. #yourname is important so that you claim your write-up that it's written by you. If in case you are sharing other's poetry then you must use their name in hashtag or #unknown in case you don't know who has written it. Also #yourname makes it easier to find all your poems in group/channel at once. Why? So that someone including you can click on that hashtag and read all of your previous poetry that you shared. 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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4
शब्दों का जादू अच्छा आदमी अरे सुना क्या? मथुरा के पेड़े बहुत अच्छे होते हैं और आगरा के पेठे के तो क्या कहने और दिल्ली की परांठे वाली गली तो वाह! और हाँ— बंगाल के रसगुल्ले भी कमाल ही होते हैं और नागपुर के संतरे भी लाजवाब और बनारस का पान तो बेहद अच्छा। और आदमी कहाँ का अच्छा होता है जी? जी आदमी तो कहीं का अच्छा नहीं होता, सब जगह के बेवकूफ़ ही हैं जी! हमें ही डालना पड़ता है— नमक, मसाला, चाशनी, तेल, पैसा, दोस्ती, प्यार, चापलूसी.... — विनायक दुबे, भोपाल #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मुझे कुछ न आता हो... मुर्शिद...!! फिर भी... रेगिस्तान में जीना आता है। मैं बालू से महल बनाता हूँ, तानपुरे का साज सजाता हूँ, हवा की सरसराहट से धुन बनाता हूँ, बारिश को राग सुनाता हूँ। मैं वीरान होते खेतों में, सरसों के फूल खिलाता हूँ। मैं जर्जर दीवारों को, फिर रंगों से चमकाता हूँ। हृदय के सवालों के जवाब, स्वयं ही ढूंढ लेता हूँ। धैर्य नहीं है मुझमें, भविष्य के सपने नहीं संजोता हूँ। मैं जीता हूँ... मैं जीता हूँ... हर पल... हर क्षण... दुनियादारी से दूर, ख़ुद को जीता हूँ...!! — कुमार #Kumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
111
6
जब भी ज़माने को देखता हूँ, स्वयं की तुलना करता हूँ... हर बार, स्वयं को अधूरा पाता हूँ। लोग नदी से बह रहे होते हैं, मैं थार के सूखे तालाब सा कहीं पड़ा हूँ। लोग पर्वत से आसमान छू रहे हैं, मैं रेत सा हवा के झोंकों के साथ भटक रहा हूँ। लोग सागर से विशाल हैं, और मैं एक तिनके सा। सबके यार-दोस्तों की भीड़ साथ खड़ी है, मैं रेगिस्तान में अकेला खड़ा हूँ। सब लोग खुलकर बातें कर लेते हैं, मैं दूसरों के सामने स्वयं को असहज पाता हूँ। काबिलियत लोगों में भर-भरकर है, और मेरे पास... कुछ नहीं। यह सोच-सोच कर, मन मसोस कर रह जाता हूँ... — कुमार #Kumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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7
प्रेम जब अंतर्मन से हो रूप दिखाते दर्पण से हों, तभी वह केवल प्यार होगा, मधुवन का प्रिय उपहार होगा। तब प्रिय को लिखने हेतु शब्दों का निष्छल बहाव होगा, पंक्ति पर पंक्ति जुड़ जाएँगी, वर्ण-वर्ण में प्रिय का नाम होगा। प्रेम जब अंतर्मन से हो, रूप दिखाते दर्पण से हों... नयनों को बंद करने पर भी मन में प्रिय का आकार होगा, हृदय में प्रेम की धुन होगी, हर श्वास में प्रिय का वास होगा। तब दूरियों का अर्थ शून्य होगा, विरह भी एक वरदान होगा, तब समय की सीमा न होगी, जीवन का हर क्षण स्वीकार होगा। प्रेम जब अंतर्मन से हों, रूप दिखाते दर्पण से हों... तब प्रिय ही ईश्वर का रूप होगा, प्रेम भी अमूल्य आशीष होगा, व स्नेह ही जीवन का स्वरूप होगा, अनंत प्रेम का मधुर आभास होगा। प्रेम जब अंतर्मन से हो... #Bhagyashree #review 19 march 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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8
विलोम शब्दों और अलंकारों से सजाकर... प्रकृति का मानवीकरण कर, लावण्य की अतिशयोक्ति कर, मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... व्याकरण की हर कसौटी पर खरा उतरकर, भाषा की मानक शुद्धता को आधार बनाकर, मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... सांसारिकता का संधि-विच्छेद कर, प्रेम की आवश्यकता को पन्नों पर उकेरकर, मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... लिपि के विकास को छोड़कर, भूत-भविष्य के जाल को तोड़कर, वर्तमान का साथ लिखूंगा... मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि में, भले असफल हो जाऊं... मगर... पतझड़ में झड़ते फूलों का शाखाओं से प्रेम को भरपूर लिखूंगा, मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... सब कुछ न सही... जो भी लिखूंगा हृदय से लिखूंगा... किसान का मिट्टी से लगाव सा अपनत्व का सच लिखूंगा... मैं लिखूंगा प्रेम पत्र... –कुमार #Kumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मानो शहद की भरी हुई मेरी गगरि फूट जाती है मेरा आपा खाने को आता है सखी..जब तू रूठ जाती है । बादल गुजर गया हो जैसे धरती प्यासी छोड़ कर गुलशन बैठ गया हो जैसे मुझसे मुँह मोड़ कर मेले में अपना खोया हो मेरा हाथ छोड़ कर दर्द ने जैसे माफी मांगी कवि का ह्रदय तोड़ कर भीतर की बातेँ कहने को फिर काग़ज़ कलम उठ जाती है मेरा आपा खाने को आता है सखी..जब तू रूठ जाती है । भैंस ने जैसे भरी दूध की बाल्टी पे लात मारी हो चाय में जैसे मक्खी कुदी गन्ने की पोरी खारी हो दुकानों पे भीड़ भड़ाका लेकिन सिर्फ उधारी हो जग ने खूब सराहा जैसे लेकिन कानि नारी हो जैसे कि जल्दी खूब करी पर गाड़ी छूट जाती है मेरा आपा खाने को आता है सखी..जब तू रूठ जाती है । सुनो.. यूँ मुझसे रूठा ना कर तेवर से मुझे कुटा ना कर हँसी खुशी में क्या जाता है चुप होके फिर फूटा ना कर जैसे कि तांगा तुलसी की गठरी लूट जाती है जैसे कि हरि भरी किसी की खेती सूख जाती है जैसे कि बड़ी इमारत की मंजिल पहली टूट जाती है मेरा आपा खाने को आता है सखी..जब तू रूठ जाती है । .......sanjay chauhan #sanjay #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मैंने पढ़ी एक कविता... नहीं... नहीं... अधूरी कविता...! किसी ने पूछा.. अधूरी कैसे? क्योंकि मैंने तो बस वो पंक्तियाँ पढ़ी...! जिसने लिखा था... उसके हाल-ए-दिल को नहीं पढ़ा...! उसकी संवेदना... उसकी रूह तक नहीं पहुँचा.. कुछ महसूस न कर... बस... पढ़ा उन स्याही से रंगे शब्दों के मायाजाल को... कविता पूरी थी... मगर मैं उसे अधूरी ही पढ़ पाया.. कवि की निगाहें ढूढ़ती रही किसी पाठक की प्रतिक्रिया को.....!! — कुमार #kumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मेरा गाँव : कुछ हक़ीक़त कुछ फ़साने....!! नेशनल हाईवे के किनारे.. बेतरतीब ढंग से बसा हुआ मेरा छोटा सा गाँव... टूटी-फूटी गाँव की सड़क, जो कुछ पक्की बची है... वो बस मानसून तक... अतिक्रमण से संकीर्ण हुई गलियां... और खेतों के रास्ते... छोटा सा बाजार जहाँ... मीसा की मीनार से भी ज्यादा झुके हुए दुकानों के छज्जे... जो गली को राहगीरों के लिए नहीं समझते... जहाँ असंरक्षित जल स्रोत, वन क्षेत्र... गोचर भूमि... और सरकारी ढांचे... सब खड़े हैं किसी की आश में.... पशुचिकित्सा का हाल पूछो मत...! इमारतें सब की हैं... भीतर कुछ नहीं... हर मोड़ पर कुछ लोग बैठे, स्कूल, कॉलेज या फिर लाइब्रेरी को जाने वालों को कुछ न कुछ सुना देते हैं.. कोई सामने से जवाब दे भी तो.. राम-राम! घोर कलयुग! आजकल के नौजवानों को कुछ तहजीब नहीं... संस्कारों वाली बात नहीं रही अब...! मगर उन्हें... जो नशीले पदार्थ बेचते.. उनकी तस्करी करते.. या मदिरालयों में बैठे... वे सब दिखाई न देते....! "पानी में रहकर मगर से कौन बैर ले भला...!!" कुछ... भोले-भाले, सीधे-सादे लोग हैं कि... जो आज भी दुनियादारी से अनजान हैं, कंधे पर हाथ रख कोई साथ-साथ चल दे... कोई हँसकर पास बुलाए तो.. अपना समझ लेते हैं...!! बुरे लोगों की बुराई पर 'भगवान देख रहे हैं'...! ऐसा कहते-कहते पीढ़ियाँ खप गईं...! कुछ तो इतने शातिर कि किसी को भी बेच खाएं... सरकारी गरीब... सरकारी किसानों की भरमार है... राजनीति में सक्रिय लोग.... ज्यादातर इसी सूची में शामिल मिलते हैं... जमीन-जायदाद के झगड़ों से.. बस... भाई की भाई से, पिता-पुत्र की, पड़ोसी की पड़ोसी से आपस में कम बनती है... धर्म-जात के झगड़े नहीं.. बस द्वेष की 'बू' है जो काँटों की बाड़ से आर-पार आती-जाती है.. अगर दीवारें होतीं तो शायद रोक लेतीं... अब गिलोय नीम पर चढ़ने लगी है... कुछ जाति विशेष के लिए... मंदिर के कपाट बंद हैं, उनके काम भी नियत हैं, नाई बाल भी नहीं काटता... और गाँव का चुनाव भी लड़ने नहीं दिया जाता, वहाँ शिर गिने जाते हैं... चरित्र नहीं..! समानतावादी सोच के लोग बहुत हैं... सब खूब पढ़ें... मगर अधिक पढ़-लिखकर आगे बढ़ें तो उनके चरित्र पर कीचड़ उछालने वालों की कमी नहीं, कोई हर्ज नहीं... कोई शर्म-ओ-हया नहीं...! दहेज गाड़ियां भर-भर के ले सकते हैं.. कोई बोलता नहीं...! लेकिन बहू नौकरी करे, उसकी कमाई से घर चलाएं... ये जरा समाज को अजीब लगता है...! कन्या भ्रूण हत्या.. बाल विवाह जैसे पाप नहीं करते... जन्म से ही पराया धन मान कर चलते हैं.... बस उसे जिंदा रखकर रोज़ दम घोंटते, "जब तक वो लड़की होकर लड़की जैसी दिखाई न दे..!" खुद से पहले पड़ोसी नौकरी न लग जाए, उसकी चिंता दिन-रात सताए सबको.... सरकारी नौकरी का मतलब... इस व्यवस्था से निकलना... या शहर चले जाना रह गया... पढ़ने के बाद तो सब राजनीति से बहुत दूर भाग रहे...!! हरा-भरा खुशहाल... बड़ा ही सुकूनदायक दिखता.... गाँव का माहौल... अब अंदर से खोखला हो रहा है... बाकी... कागजों में तो गाँव कब का विकसित हो चुका है...!! खेल के मैदान.... पक्का इंफ्रास्ट्रक्चर... हर घर नल, हर घर बिजली... और न जाने क्या-क्या... सुख-सुविधाएं, मानो, जैसे कोई जापान का गाँव हो....!! अगर कोई ना बोले तो पंच.. सरपंच.. पटवारी और ग्रामसेवक सब प्रशासनिक अधिकारी नवाबों सी ज़िंदगी जीते हैं... बाकी और क्या कहना.... देशभक्ति के मायने... लम्बे-चौड़े भाषणों से तय होते हैं... सच के लिए लड़ने वालो को तो देशद्रोही का तमंगा मिलता है, और आवाज़ वो उठाए.. जिसको ज़िंदगी से प्यार नहीं...!! - कुमार #kumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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सागर जितनी इच्छाएं मेरी, बूंद बराबर धैर्य, अभिलाषाओं की मृगतृष्णा में, कण बराबर धैर्य।। धैर्य ऐसा कि पल में बदलें, संग संग केवल माया चलती।। कर्म करना मुझको ना भाता, फल की हरपल चिंता रहती।। ये समय कितना विस्तृत है, कर्म भी है कितना कठिन, श्रम भी पर्वत समान ही है, जीवन भी है कितना कठिन।। मेरी चाह भी ग़लत नहीं है, बिन श्रम के फल कैसे पाऊं।। मैं तो केवल मानव ही हूं, बिन धैर्य के मोक्ष कैसे पाऊं।। #Bhagyashree #review 16 March 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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हम हर बार शांत रहे.. तो लोगों ने कमजोर समझ लिया। किसी का कुछ बिगाड़े बिना.. यहां कौन ताकतवर मानता है... नटराज की पेन्सिल-सा ख़ुद घिसकर भी दूसरों की लकीरें बनाने वालों की कौन क़द्र करता है...!! अब लोगों को पेन जैसे लोग पसंद हैं, जो रिफिल बदल कर भी काम चला सकें... या फिर पसंद ना आए तो नया ले आएं...!! #अज्ञात #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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बारिशें सिर्फ़ मुस्कान नहीं लातीं टपकते छप्परों से आँसू भी ले आती हैं सिर्फ़ काग़ज़ की नावें नहीं बहातीं गीली मिट्टी की फिसलन और दरारों से टपकते पानी का भय भी लाती हैं वे केवल ज़मीन को नहीं भिगोतीं पसीज देती हैं रोज़ कमाने वालों के हृदय को बारिशें सिर्फ़ मिट्टी की ख़ुशबू नहीं लातीं सीलन, अँधेरा और बेघर रातें भी साथ लाती हैं। कभी गड्ढों को भर देती हैं तो कभी फसलों को बहा ले जाती हैं। #khayalowaliladki #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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सोच रहा हूँ जंग छिड़ी तो बाज़ारों का क्या होगा? बंदूकें तो बिक जाएँगी, गुलदस्तों का क्या होगा? आज अब्बू ने खाँस दिया तो एक अजीब ख़्याल आया, छत के एकदम गिर जाने से दीवारों का क्या होगा? #Jubairaliताबिश #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मेरे हिस्से का दिन लेकर तू मुझको गहरी रात दे दे, रख ले तू खुशियाँ सारी मुझको ग़म की बरसात दे दे। मेरी कहानी तू रख ले, मुझको दर्द की सौगात दे दे, खो जाएँगी ये बात पन्नों में मुझको केवल कोरा मन दे दे। मैं थक गया हूँ ख़्वाबों से, तू थोड़ी सी तो राहत दे दे, तड़पती इन यादों के बदले मुझको थोड़ी खामोशी दे दे। तू उड़ती रहे चिड़िया सी, रब तुझको सारी खुशियाँ दे दे, तेरे क़दमों में सारा जहाँ हो रब मुझको सारे घाव दे दे। मैं थक गया हूँ उम्मीदों में, मुझको थोड़ा सा विराम दे दे, तू लौटे अगर मेरी क़िस्मत में तो मेरे जीवन को पूर्णविराम दे दे। #bhagyashree #review 12 March 2025 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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ये जो दुकानें लगा रखी हैं... प्रेम की, अब बंद भी करो... बहुत बिक गया है... प्रेम। ज़रा! नफ़रत को भी बिक जाने दो, दुनिया से उसका नामों-निशान मिट जाने दो...। जो मुखौटे लगा रखे हैं... सबने, उनका भी सच सामने आ जाने दो... अब बहुत हो गया, रिश्तों का बाज़ारीकरण... एक बार दिल से भी निभा कर देखो ... मंजिल की तलाश में... तबीयत से हाथ थाम कर साथ तो चलो... क्या पता कौन-सा मोड़ आख़िरी हो...!! - कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मैं, तुम्हें.. प्रेम में उपमाएँ नहीं दूँगा, ना ही अलंकार या कोई कल्पना। मैं तुम्हें वास्तविकता दूँगा, और इसकी गवाही के लिए अपनी आँखें तुम्हें दे दूँगा, और साथ में अपना हृदय। ताकि तुम्हें पढ़नी न पड़े कोई किताब, जो रची गई हो मिथ्या प्रेम में। #Bhagyashree #review 6 march 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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🌙 ख़ामोश मुस्कुराहट 🌙 मैंने एक कला सीख ली है... जब भी किसी से बात करती हूँ, उसे कभी पता नहीं लगने देती कि मेरे अंदर क्या चल रहा है। हँसकर बात करती हूँ, ताकि कोई सोच भी न सके कि मैं उदास हूँ... या अंदर से टूट चुकी हूँ। मगर सच तो ये है, ये मुस्कुराहट दिल से नहीं होती। बात करते-करते थक जाती हूँ, क्योंकि हर लफ़्ज़ के साथ एक झूठी खुशी का मुखौटा भी पहनना पड़ता है। कुछ लोग कहते हैं— "तू बात नहीं करती, तुझे हमारी याद नहीं आती।" काश... उन्हें कैसे समझाऊँ, याद तो बहुत आती है, बात भी करना चाहती हूँ... पर अपने टूटे हुए दिल का हाल किसी को सुनाना नहीं चाहती। नहीं चाहती कि कोई मेरे दर्द पर बातें बनाए। बस इसलिए ख़ामोश रहती हूँ... और जब कभी बात करती भी हूँ, तो अपने दर्द को छुपाकर, खुशी का मुखौटा पहनकर करती हूँ। #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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सारे गिले सिखवें भुला कर , में आया हूँ मिलने उन्हीं राह तक मैं तेरी सारी गलतियों को माफ़ कर बस तेरे एक दीदार को आया हूं नजर डाल ले एक बार उस खिड़की से , में तेरे से मिलने की चाहता में आया हूं शायद फिर गीले सिखवे मिटाने का मौका न मिले सज- सवार कर लाये सब मेरे को तेरी गली, शायद फिर दीदार का मौका न मिले वादा पूरा हुआ हमारा तेरी गली से ही जनाजा रवाना हुआ हमारा हर बार की तरह जाने से पहले तेरे से इजाजत लेने आया हूं .. #review #unknown 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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