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Hindi/Urdu Poems

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"मैं और मेरी बकवास" वो सब मेरे लिए आदरणीय जन जो मेरी बकवास को भी कविता कहते हैं... उनका हमेशा आभारी रहूँगा... बकवास है!... जानते हुए भी जो अच्छे से पढ़ लेते हैं... उन चंद पंक्तियों को... सोचता हूँ... कभी अच्छा लिखूँगा.. और मंज़िल पर पहुँच गया तो शुक्रगुजार रहूँगा उन अजनबी साथियों का.... हमेशा दिल में बसा कर रखूँगा... उनके साथ को... मगर... कभी बीच राह में मर भी गया.... मिट भी गया... ज़माने को पता तो रहेगा दुनियाभर की बकवास करने वाला... आज चला गया...! वरना कौन जानेगा कि कौन मरा है.... आज! मैं तो बस... मज़दूर हूँ ... ज़्यादा से ज़्यादा क्या लिखा है जीवन में... आराम की दिहाड़ी.... और क्या...!! मुझे भी लोग जानें... मेरी भी कुछ पहचान हो..! जिंदगी भर कस्सी-फावड़ा चलाने वाले हाथों से, इसलिए कविता लिखता हूँ.... नहीं... नहीं... बकवास...! - कुमार 🥺🙏 #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

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सितारों की महफ़िलों में भटक रहा हूँ मैं.... धूमकेतु सा जिसकी ना कोई चमक है... ना ही कोई मंज़िल... बस नितांत तन्हा.... सब की ओर देखता हूँ मगर... कोई अपना मिलता नहीं...! जो हाल-ए-दिल समझ सके... किसी से ग़र टकरा गया... एक पल में राख हो जाऊँगा... - कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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बेच दूं क्या सारी ! परेशानियों को.... मौत अच्छा दाम दे रही है... #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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उफ़! ये तुम्हारी मासूमियत... जो इक नज़र देख लो किसी की ओर, दिल का मरीज़ बना दे! ये नूरे-हुस्न को देखे बग़ैर कैसे रहे कोई... तौबा... तौबा! तुम्हारा गुस्सा क़यामत है। इससे कैसे बचे कोई... ख़ुदा ख़ैर करे तुमपर... बुरी नज़रों से हमेशा बचाए रखे। - कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मंज़िल का पता नहीं कब मिलेगी...? इन राहों में पत्थर बहुत हैं हमारे पाँवों में छाले बहुत हैं, किन-किन से बच कर चलें... हमें गीली मिट्टी की ज़रूरत बहुत है! अपने जूतों में भी तो काँटे बहुत हैं.... यहाँ अपने ही लोग दुश्मन बहुत हैं.. किन-किन से बच कर चलें... हमें गैरों की ज़रूरत बहुत है! ज़ब हम ही घायल हो जाएँगे क्या तब मिलेगी...मंजिल? जिंदगी में भाग दौड़ बहुत है, हर पल सपने मरते बहुत हैं, किन-किन से बचकर चलें.... हमें तो सुकून की ज़रूरत बहुत है....!! — कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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खिलोना समझकर जो खेलते रहे दिल से हमारे, वो क्या जानें कि टूटे हुए कांच की चुभन क्या होती है। जो बे वजह वादे करके मुकर जाते हैं हर बार, वो क्या जानें कि किसी के भरोसे की कीमत क्या होती है। #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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खोखला करती रही लगातार दीमक उसे लकड़ी भ्रम में रही की लगाव ज्यादा हैं  .. ~ साहित्य साथी ❤️‍🩹 #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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क्या आएंगे वो दिन सुहाने, जिसमें बसती थी मीठी बातें, जिसके लिए तड़पतीं है यादें, बरसती है भीगीं-भीगीं आंखें।। जिसके लिए मैं निकला था घर से, लड़कर-झगड़कर कुछ गुस्से में, क्या मिलेगी वो मंजिल भी मुझको? जो रहतीं हैं केवल मेरे सपनों में। अगर लौट भी जाऊं वापस अब मैं, तो क्या मिलेगा वहीं आंगन मुझको? जिसके लिए मैं निकला था घर से, क्या रहेगा वो भी शामिल मुझमें? छोड़ो ये है बात ख्याली.. शायद जब मैं लौटूंगा सफ़र से, सजाऊंगा सपनों को फिर से। खोकर भी कुछ यादों को, मैं... सहेज लूंगा अपने जीवन में। #Bhagyashree #review 28 june 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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शराफातों कि यहां कोई अहमियत ही नहीं किसी का कुछ ना बिगाडो तो कौन डरता है !! ~वसीम बरेवाली #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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एक अधूरी उड़ान ... उसकी आँखों में अरमान, सुनहरे ख्वाब थे.... चेहरे पर मासूमियत, दिलो-दिमाग़ में दृढ हौसला पीठ पर किताबों से भरा बैग... लेकर... वो जाती थी.... हर रोज़ स्कूल! एक रोज़... स्कूल में किसी बेशर्म, बे-हया ने बदसुलूकी की... बेखबर ज़माने में, यह ख़बर फैल गई। फिर क्या होना था? न्याय होना था! वो लड़का था.. उसका क्या होना था.. चंद बातें सुना, चंद थप्पड़ मार छोड़ दिया... मगर.. वो तो लड़की थी.. उसकी कहाँ ख़ैर थी.. उसकी आज़ादी से ही तो बैर थी... छुड़वा कर ... स्कूल उसकी.... कहा.. तुम बड़ी हो रही.... घर के काम सीखो....बस...! घरवालों को ज़माने के तानों की चिंता थी— "एक दिन ससुराल जाएगी"....!! उसे अन्नपूर्णा बना कर भी ... सिर्फ रसोई तक ही सीमित रखा.....!! क्यों... उसकी स्वावलंबी उड़ान को परम्पराओं के ख़िलाफ़ समझ लिया....??? सबके जैसे वो भी बेख़ौफ़ आसमान में उड़ना चाहती थी, मगर पिंजरे में कैद कर, उसके 'परों' को ही काट दिया....! विडंबना देखिए ... अंत में सब ....नसीब के मत्थे मढ़ दिया गया... - कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मैं अपने घर में हूं अजनबी मुझे मेरे अपने नहीं जानते, कौन ढूंढेगा खुदा तुझको इस दौर में ये लोग तो वो हैं जो खुद को नहीं जानते !! #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मुसाफ़िर कल भी थी, मुसाफ़िर आज भी हूँ, कल अपनों की तलाश में थी, आज अपनी तलाश में हूँ। वो लड़की जो हर दर्द पर भी मुस्कुरा लिया करती थी, आज उसी की ख़ामोशियों का पता पूछ रही हूँ। आईना रोज़ वही चेहरा दिखाता है मुझे, मगर मैं ख़ुद को कहीं नज़र नहीं आती हूँ। कुछ रिश्तों ने यूँ बदल दिया है मुझे, कि अब हँसते हुए भी अधूरी-सी लगती हूँ। सफ़र अभी भी जारी है मेरी ज़िंदगी का, बस फ़र्क इतना है... पहले मंज़िल अपनों तक पहुँचने की थी, अब मंज़िल ख़ुद तक लौट आने की है। 🖤 #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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जिंदगी अगर ख्वाब हुई तो मौत अगर लाजवाब हुई तो, तुम्हें लगा मैं खामोश हूं खामोशी मेरी आवाज हुई तो...!! #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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मेरे बारे में कोई राय मत बनाना ग़ालिब, मेरा वक्त भी बदलेगा तेरी राय भी...!! #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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समय गुजरता जाएगा परदे हटते जायगे परत दर परत सब खुलता जाएगा नीचे जमीं है ऊपर आसमाँ आखिर छुपकर तू बंदे कहां जाएगा.... #ankitpastor #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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"तुम्हें चाहना मेरी आदत नहीं, मेरी इबादत है, तुम्हारा नाम ही अब मेरी हर दुआ की राहत है। लोग पूछते हैं इतनी मोहब्बत क्यों है तुमसे, कैसे बताऊँ... तुम ही मेरी दुनिया, तुम ही मेरी जन्नत हे। ❤️🌹 #review #Anjali 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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"तुम्हें चाहना मेरी आदत नहीं, मेरी इबादत है, तुम्हारा नाम ही अब मेरी हर दुआ की राहत है। लोग पूछते हैं इतनी मोहब्बत क्यों है तुमसे, कैसे बताऊँ... तुम ही मेरी दुनिया, तुम ही मेरी जन्नत हो। ❤️🌹 #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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"क्या मिलेगा?" इंसाँ को इंसाँ का दुश्मन बनाकर, नई पीढ़ी में भी नफ़रती ज़हर भरकर... जात, धर्म और नस्ल में बाँटकर... हमें क्या मिलेगा: नर्क या स्वर्ग? पता नहीं! प्रकृति का शोषण: जंगल काटकर, पहाड़ तोड़कर, ज़मीन खोदकर, नदियाँ प्रदूषित कर... हमें क्या मिलेगा: नर्क या स्वर्ग? पता नहीं! मगर... आने वाली पीढ़ियों को, यह धरती नर्क के समान मिलेगी! जहाँ... अदृश्य आग से सुलगती हुई धरा पर, चारों ओर धुआँ ही धुआँ होगा: खाक हुई इंसानियत का... क्योंकि... प्रकृति अपना कभी हिसाब बकाया नहीं रखती, जैसी करनी, वैसी भरनी! — कुमार #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार भी तुम्हारा है। तुम सच को झूठ लिख दो, अख़बार भी तुम्हारा है। इस दौर में फ़रियादी जाए तो जाए कहाँ, क़ानून भी तुम्हारा है, दरबार भी तुम्हारा है।। #unknown #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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"कैसे कहूँ मैं वो सब, जो मैं सोच रही थी, सोते हुए भी तेरे ख्यालों में जाग रही थी। खुद को कहीं मैं तुझमें ढूंढ रही थी, सपनों की दुनिया में अनकही बातें कर रही थी। तेरी निगाहों की चमक में खुद को गंवा रही थी, और आखिरकार... कैसे कहूँ मैं वो सब? क्योंकि... तू मिला नहीं, तो मैं खुद को ही भूला रही थी।" - इनायत नूर 🌟 #review #love #Heartbroken #poetry #Inayatnoor #Tinachoudhary 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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