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Hindi/Urdu Poems

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🖤 बस अब एक ही ख़्वाहिश है कि मेरी दुआ क़बूल हो जाए। 🥀 🖤 तरसती ज़िन्दगी जी ली बहुत, अब बस मौत आ जाए 💔 🖤 थक गई हूँ हर रोज़ मुस्कुराने का दिखावा करते-करते, अब ये झूठी हँसी भी कहीं खो जाए। 🙂 🖤 जो दर्द बरसों से सीने में कैद है, काश वो भी मेरे साथ ही सो जाए। 😴 🖤 अब किसी से कोई शिकवा नहीं रही, बस ये दिल ख़ामोश हो जाए। 👀 🖤 जो किस्मत में लिखा है, वही मंज़ूर है मुझे, बस ये बेचैन रूह सुकून पा जाए। 🥺 🖤 बस अब एक ही ख़्वाहिश है, कि दिल को थोड़ा सुकून मिल जाए। 😇 🖤 थक गई हूँ हर दर्द को छुपाते-छुपाते, अब ये बोझ कहीं हल्का हो जाए। ❤️‍🩹 #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz

2
मैं भारतीय हूँ, भारत में रहती हूँ। भारत एक है, मगर... मैंने तीन भारत की तस्वीर देखी है। पहला भारत पूँजीवादी है, जो छीन लेता है दूसरों का हक, बिना किसी परवाह के। दूसरा भारत मध्यमवर्गीय है, और थोड़ा समाजवादी भी। वह लड़ता रहता है,.. स्वयं से, घर से, समाज से, शासन से, और प्रशासन से, अपने हक के लिए। और अंत में आता है तीसरा भारत.. जो शून्य है। इस भारत का जीवन शून्य है। इस भारत की जंग महज़ रोटी, कपड़ा और पानी तक सीमित है। और रही बात घर की... तो घर कभी देखा ही नहीं इस भारत ने। पहला भारत एक ख्वाब है। दूसरा भारत एक हक़ीक़त। और तीसरा एक प्रेत है, जिससे सरकारें भी दूर भागती हैं। #Bhagyashree #review 28 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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न्याय की हुंकार कालचक्र फिर घुमा है जनता का निद्रा टूटा है जनता के जग जाने से कितनों का सपना अधूरा है मद में डूबे नेताओं का आज नशा कुछ उतरा है भविष्य आज अस्तित्व के खातिर आ बैठा है चौसर में जिसमें पासे उसके हैं पासो के चाल भी उसके हैं शकुनी बने प्रशासन बोलो अब तुमको क्या करना है दाव पर, स्वयं को या अपने सिंहासन को लगाना है पक्षधर हुआ ,आज समय जनता का और तेरे विपरीत खड़ा निर्णय लो हे! धूर्त प्रशासन सिंहासन छोड़ भगाना है या काल के मुख में समान है वायस श्रृगाल बन नेताओं ने बेबस जनता को लूटा है लेकिन आज वही भयभीत खड़ा है क्योंकि सिंहों ने दहाड़ा है जाग जाग हां जाग ओ जनता निर्भय होकर कर हुंकार यदि निद्रा नहीं त्याग तो बिक जाएगा तेरा हिंदुस्तान आशीष कुमार ✒️ #AshishKumar #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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4
जातिवाद और आरक्षण में, हम भूल गए उस तबके को.. जिसकी जंग केवल, रोटी कपड़ा और मकान हैं।। उस तबके का सपना है, केवल एक घूंट पानी और एक रोटी.. उस तबके में रहते हैं, मै, तुम,हम सब की तरह इंसान.. सभी जाति के और सभी वर्ग के।। मेरे प्यारे देशवासियों! जाति और आरक्षण में उलझकर, मत भूल जाना अपने उन भाईयों को, और किसी भूल में मत छीन लेना, उनसे उनका हक़.. और हो सके तो उठाना एक आवाज, अपने उन भूल चुके लोगों के लिए भी।। #Bhagyashree #review 28 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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5
एकतरफा एहसास न जाने इस दौर-ए-फरेब में ये कैसी इनायत हो गई, झूठी दुनिया के बीच एक रूह से मोहब्बत हो गई। सोचा था हर चेहरा यहाँ नकाब ओढ़े बैठा है, हर कोई किसी के दिल से खेलने को निकला है। मगर मज़ाक-मज़ाक में ही एक ऐसी सादगी मिल गई, पत्थरों की इस नगरी में जैसे कोई मूरत खिल गई। वो नादान है, मासूम है, दुनिया की चालों से परे, किसी को दर्द दे न सके, इस डर से खुद अश्क भरे। वो अपने हिस्से का गम भी छुपा कर रखती है, हर रूह को अपनी दुआओं में सजा कर रखती है। देखा नहीं कभी उसे, न कोई रूबरू मुलाकात हुई, पर उसकी बातों से ही जीने की नई शुरुआत हुई। बिना देखे ही उसे इस दिल में बसा लिया हमने, इस अनजाने से रिश्ते को अपनी पूरी कायनात बना लिया हमने। #BidyaG #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
206
6
वो जो बचाके चलते थे गिरेबान अपना, जब आंधियां चलीं तो अंधेरों में डूब गए।। एक हम जो सबको तुझसे बचाने आयें थे, तेरी आंखों में देखने लगे तो खुद ही डूब गए।। जिनकी आदत थी आइने-सा सच कहने की, वो लोग भी चंद सिक्कों की चमक में डूब गए।। किसको कुसूरवार ठहरायें! अपनी मौत का, हम खुद ही उतरें थे दरिया में,खुद ही डूब गए।। #Bhagyashree #review 5 may 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
209
7
एक दिन काम से थककर, तथा उग्र आवेश में बंधकर, मैंने कर दिया गुस्सा माँ पर और कहा.. “मैं सर्वज्ञ हूँ…” तथा निकल गया घर से बाहर।। रास्ते में चलते हुए मैंने देखा एक हताश व्यक्ति। मैं नहीं समझ पाया उसकी हताशा, ना ही उसे हँसाने का तरीका। मैंने देखा एक मुस्कुराता दृष्टिहीन, मैं नहीं जानता वो कैसे बिना किसी सहायता के रास्ते पार कर रहा था। मैंने देखा एक संत-समान बालक, मैं हतप्रभ था.. कैसे कोई इतना संसार जान सकता है बिना दुनिया से रूबरू हुए।। मैंने देखा एक वृद्ध व्यक्ति, जिसके चेहरे की झुर्रियाँ पढ़ने में तथा उन्हें समझने में मैं असमर्थ था। और अंत में, जब अपने अहं पर सिर झुकाए मैं वापस लौट आया अपने घर, तब... दरवाज़े पर मुस्कुराती हुई माँ को देख, उनकी मासूमियत व निश्चलता देखकर, मैं मुस्कुराया अपनी ही मूर्खता पर।। #Bhagyashree #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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8
जिंदगी आने लगी थी ढर्रे पे अपने उस ने वापस पायल का शोर मचा दिया।। #review #priya 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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वह कितना शांत रहता था बिस्तर पे लेटे, अपने नन्हे यादों को समेटे, आठो पहाड़ आभा पर मुस्कान लिए छवि में रुदन की पहचान लिए कितना व्यस्त रहता था। पर अब वो कितना कमबख्त था। जाने पूछता नजर आता हर वक्त, कुछ ढूंढता नजर आता हर वक्त जाने किस आग ने उसके अंदर अपना डेरा डाला था। लोग उसे बेवकूफ समझते थे, क्या पता उसका मिजाज का अर्थ ही सुगंध विसराना था। #Suman #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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समय-एक महायोद्धा :- एक ओजपूर्ण काव्य मत पुछ समय की गति क्या है, यह अग्नि है, यह प्रचण्ड प्रबल जो इसके संग कदम बढ़ाए, वो रचे युग नया, निर्भय सबल। यह झुकता न सिंहासन पर रुकता ना आँसु की धारा से वह चलता अपने धर्म पथ पर तरता मानो समुद्र अपने खाड़ा से। क्षण-क्षण को व्यर्थ गवाने से केवल सपने में फूल सजाने से, समय करता न प्रतिक्षा राहगीर की रोके स्याही भविष्य को गढ़ जाने से। समय नहीं केवल घड़ी की टिक-टिक यह पुरषार्थ की ज्वाला है आलस्य के तम को चीड़ उठो यह प्रथम विजय की मशाल निराला है। उठो तनिक अब कर्म न दूजा एक-एक पल में युग की शक्ति सनी हर धड़कन में विजयघोष लिखी हर साँस कहे - कर्म ही पूजा. समय न होता मित्र, न शत्रु किसीका यह न्याय का निष्पक्ष विधान' जिसने श्रम को व्रत बनाया. उसके चरण चुमे सम्मान । अंतकाल में समय का यही आदेश रूको नहीं बढ़ते जाओ जीवन क्षणभंगुर दीप सही पर उससे युग-युग तक जगमगाओ। सदैव समय से चलकर धीर-वीर बनो हर क्षण के रण (युद्ध) का मान करो, जीवन पाया है यदि मानव तो, समय का सम्मान करो।। #Suman #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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11
एक मुद्दत से जिससे नज़र ना मिले, मंज़िल है एक लेकिन हमसफ़र ना मिले।🖋️ उससे पूछो कैसे कटते हैं शब-ओ-दिन, जिसे अपने महबूब की ख़बर ना मिले।🖋️ हर आहट पर दिल यूँ ही धड़क उठता है, लगता है शायद आज उनका पैग़ाम मिले।🖋️ दुआओं में जिसे हर रोज़ माँगा हो, उसी का साथ उम्र भर ना मिले।🖋️ भीड़ में भी तन्हा-तन्हा सा रहता है वो, जिसे चाहने वाला एक नज़र ना मिले।🖋️ कुछ रिश्ते यूँ ही अधूरे रह जाते हैं, जिन्हें चाहत तो मिले, मगर मुक़द्दर ना मिले।🖋️ इश्क़ का दर्द वही शख़्स समझ सकता है, जिसे मोहब्बत तो मिले, मगर हमसफ़र ना मिले।🖋️ और आख़िर में बस इतनी-सी दुआ है रब से, किसी को चाहने वाला यूँ बेख़बर ना मिले।🖋️ #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
247
12
किसी उलझन भरी धुंध में चलना, अकेले बैठना और खुद को समझना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि अक्सर, सबको सबके हिस्से का प्यार बाँटकर हम हो जाते हैं खाली! ठीक उस खाली सड़क की तरह, जिस पर हमसे पहले भी बहुत से लोग चले थे और हमारे बाद भी, मगर, हमारे साथ... कोई नहीं।। शायद मेरे ख्याल भ्रम मात्र हों, सुबह के कोहरे की तरह... पर मेरी बात... सच्ची है! कोहरे में छुपे उन पेड़ों की तरह, जो देते हैं श्वास और आश्वासन किसी गुजरते अजनबी राहगीर को एक अच्छी और सफल यात्रा का। और पेड़ों का यही आश्वासन बना देता है अनगिनत लंबी राह को भी सरल एवं रोमांचक… बना देता है एक अद्भुत सफ़र और मिला देता है यात्री को मंज़िल से, जैसे मुझे मिली मेरी मंज़िल, और मेरी ही तरह अन्य लोगों को भी.. स्वयं में खोकर, स्वयं से मिलकर। #Bhagyashree #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
326
13
निकला न चाँद रात भर, तारे भी तकते रह गए, महफ़िल के दिए बुझ गये, हम तन्हाई में जलते रह गए #PriyankaB #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
301
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तेरे पास हो कर भी तुझे छूने से डर रहा हूँ, दरिया किनारे प्यासा कोई पानी से डर रहा है #PriyankaB #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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माना माफी मांग ली है, दर्द ने दिल तोड़ कर, मगर ये टूटा शीशा अब, कोई सूरत दिखाए कैसे #PriyankaB #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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तुम चले गये मुझे छोडकर.... फिर भी मैं इन्तजार कर रही हु पता है कभी नही आओगे .... फिर भी मैं इन्तजार कर रही हु #sangeeta salvi #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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कहते हैं.. सबसे सुंदर होती हैं वे स्त्रियाँ जो प्रेम में होती हैं। और अद्भुत होती हैं वे स्त्रियाँ जो युद्ध करती हैं। किन्तु, अद्वितीय हैं वे स्त्रियाँ जिन्होंने युद्ध से ही प्रेम किया, और स्वयं क्रांति बन गईं। #Bhagyashree #review 24 July 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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रावण भी पूजा जाता, अगर राम हारे होते। दुश्शासन भी राजा होता, अगर कृष्ण सो रहे होते।। ये सारे जितने अधर्मी थे, सभी के सभी देव होते। सारी दुनिया उनकी होती, अगर ये देवता न लड़े होते।। सोचो, कितनी अलग ये दुनिया होती, कितने अलग पैमाने होते। जो कुछ भी सत्य कहलाता, शायद वही बहाने होते।। सत्यमेव जयते मर ही जाता, और देवों को गालियाँ देते हम। द्रौपदी दाँव पर लगाई जाती, और धृतराष्ट्र से बन जाते हम।। सोचो, कभी कुछ ऐसा होता, जो हुआ है, वो न हुआ होता। विजयी सारे पराजित होते, और पराजितों ने इतिहास लिखा होता।। ये सारे रावण आज राम कहलाते, अगर युद्ध में राम हारे होते। हर युग में कौरव शासक बनते, अगर कृष्ण बाँसुरी बजा रहे होते।। #Bhagyashree #review 29 may 2026 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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19
मेरी शायरी का आख़िरी लफ़्ज़ तू मेरी हर लिखी हुई बात तुझे छूकर गुज़रती है, मगर तुझे कभी महसूस नहीं होती। लोग समझते हैं इश्क़ में घायल हूँ मैं, पर  मैं आज भी तेरी यादों में ज़िंदा हूँ। मेरी हर शायरी तुझसे ही शुरू होती है, और हर आख़िरी लफ़्ज़ आकर तेरे नाम पर ही ठहर जाता है। हर अल्फ़ाज़ तेरी याद की ख़ामोश गवाही देता है, हर पन्ना तेरे बाद की मेरी तन्हाई बयान करता है। लोग मुझे शायरा कहते हैं. जो अल्फ़ाज़ उन्हें सिर्फ़ ग़ज़ल लगते हैं, वो मेरी हर अधूरी रात, हर टूटी हुई दुआ, और हर बार बिखरकर ख़ुद को समेट लेने की कहानी होते हैं। तू शायद कभी इन्हें पढ़े भी नहीं, शायद पढ़कर पहचान भी न पाए कि हर पंक्ति में सिर्फ़ तू ही बसा है। मेरी हर दुआ में आज भी तेरा नाम है, हर आँसू में तेरी कमी, हर ख़ामोशी में तेरी आवाज़, और हर शायरी में सिर्फ़ तू। #Anjali #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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20
ये घर अभी ठीक हो रहा है... एक बार एक आदमी एक घर में रहने आया। और वह उस घर को ठीक करने के लिए बहुत प्रयासरत रहा। पर इतने सालों से जो घर कभी किसी ने साफ नहीं किया तो उसे ठीक करने में समय तो लगना ही था। वह धीरे-धीरे करके चीज ठीक करने लगा। और बहुत सी चीज़ें ठीक भी होने लगी। एक बार उससे कुछ छोटी सी भूल हो गई। एक जगह की सफाई करनी उससे रह गई। तो कुछ लोग उसे बुरा भला कहने लगे, उसकी गलतियों के लिए उसे घर से निकालने लगे, उसे कहने लगे की सत्ता के मद में बैठा है। उसकी गलती ठीक करने का मौका भी नहीं देना चाहते थे और समय भी नहीं देना चाहते थे। और जो काम उसने सही किए थे वह तो बिल्कुल नजरअंदाज ही कर रहे थे। बल्कि जो काम उसने घर को ठीक करने के लिए किए थे उन पर तो पानी ही फेरने लगे। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर उस घर की दीवारों को ही तोड़ने लगे, सारा नया सामान लाकर जो उसने घर में सजाया था उसे भी तोड़ने लगे। और फिर कहने लगे हम तो भगत सिंह हैं, हमें तो आंदोलन करने का हक है और यह तो हमारा घर है। हमें तो बस इस इंसान को निकालना है जिसने इतना कुछ ठीक किया है। और हमने जिन्हें खुद इतने सालों से बैठा रखा था, जिन्होंने कुछ ठीक नहीं किया था, हमें वही व्यवस्था वापस चाहिए। तो आप बताइए जो बाकी सारे लोग उस घर के रहने वाले सदस्य थे, जो पहले मान रहे थे कि हां उस इंसान से गलती हुई है, और उसे अपनी गलती का सुधार करना चाहिए और उसे गलती सुधारने का समय दे रहे थे, उन्हें अब इन तथाकथित आंदोलनकारीयों का साथ देना चाहिए या नहीं? #PriyankaB #review 🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨ 🔥 More on @tgWiz
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