संस्कृत संवादः । Sanskrit Samvadah
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آرشیو پست ها
१। गजमुखाय दूर्व्वाः अर्पणीयाः।
• To Gajamukha, Durva grasses should be offered.
• गजमुख को दूब चढ़ानी चाहिए।
२। ममैकाऽपि भगिनी नास्ति।
• Even one sister of mine is not there.
• मेरी एक भी बहन नहीं है।
३। तव कान्तः कदा गच्छेद् इतः।
• When may your beloved go from here?
• तुम्हारा प्रेमी यहाँ से कब जाए?
४। अवगुण्ठनं कुरु स्नुषे।
• Daughter-in-law! Draw the veil.
• बहू! घूँघट करो।
५। तौ अकथयताम् आवां न वियोक्ष्यावह इति।
• The two of them used to say, "We two shall not be separated."
• वह दोनों कहते थे, "हम दोनों नहीं बिछड़ेंगें।"
६। भ्रातः त्वं भ्रमितः असि।
• Brother! You are confused.
• भाई! तुम भ्रम में हो।
७। करणदीपः स्वनगरं गच्छति।
• Karanadeepa goes to one's own town.
• करणदीप अपने नगर को जाता है।
८। चञ्चुना गृहीतम् अन्नं पक्षिणा।
• With the beak, the food was seized by the bird.
• पक्षी द्वारा चोंच से दाना पकड़ा गया।
९। तुलसीदासः सर्वस्वं ददौ।
• Tulsidasa gave away everything.
• तुलसीदास ने अपना सब कुछ दे दिया।
१०। विष्ठकृमिर्भविष्यसि त्वं नीच।
• Lowly one! You will become a worm of feces.
• नीच! तुम विष्ठा के कीड़े बनोगे।
@samvadah #vakyabhyas
🌿
अनाकृष्टस्य विषयैर्विद्यानां पारदृश्वनः।
तस्य धर्मरतेरासीद्वृद्धत्वं जरसा विना॥
🌞 विषयैः अनाकृष्टस्य विद्यानां पारदृश्वनः दृष्टपारस्य धर्मरतेः तस्य जरसा विना वृद्धत्वं ज्ञानवृद्धत्वम् आसीत्।
🌷 विषयों (इन्द्रिय सुखों) के द्वारा आकर्षित न होने वाले, विद्याओं के पारङ्गत, धर्म में रति वाले उनके बुढ़ापे के बिना ही वृद्धत्व (ज्ञानवृद्धत्व) था।
🌹 Of him who was not attracted by sensual objects, who had seen beyond sciences, and who was engaged in duty, there was old age (by wisdom) without the physical aging.
📍 रघुवंशम् । १।२३॥ #Subhashitam१। जयार्थं युद्धं गच्छन्ति नृपतयः।
• For victory, the kings go to war.
• जीत के लिए राजा युद्ध में जाते हैं।
२। अवश्यं तव भ्राता व्यसनी अस्ति।
• Surely, your brother has a bad habit.
• निश्चय ही तुम्हारा भाई बुरी लत वाला है।
३। कुत्र गन्तुं प्रवृत्तोऽयं ते पुत्रः।
• Where is this son of yours set out to go?
• कहाँ जाने को निकला है यह तुम्हारा बेटा?
४। सर्वं ज्ञातुम् अहं न शक्तः।
• I am not capable of knowing everything.
• सब कुछ जानने में मैं समर्थ नहीं हूँ।
५। वस्तुतः अस्याः अङ्के अपरायाः बालो वर्तते।
• In fact, in her lap is the boy of another woman.
• सचमुच इसकी गोद में दूसरी स्त्री का बच्चा है।
६। त्वं मम विवाहे विघ्नं कर्तुं नार्हसि।
• You ought not to cause an obstacle in my wedding.
• तुम मेरे ब्याह में बाधा डालने के योग्य नहीं हो।
७। पण्डितो मूढवचनैः कथं तुष्येत्।
• How would a scholar be satisfied by the words of fools?
• ज्ञानी मूर्खों की बातों से कैसे संतुष्ट होगा?
८। अस्माकं स्वामी अतिदयालुरस्ति।
• Our master is extremely compassionate.
• हमारा स्वामी बहुत दयालु है।
९। मनागपि बलं नास्ति अस्मिन्।
• There is not even a little strength in this one.
• थोड़ा सा भी बल इसमें नहीं है।
१०। किमर्थं सा मम स्वप्नेषु प्रभवति।
• Why does she appear in my dreams?
• वह मेरे सपनों में किसलिए प्रकट होती है?
@samvadah #vakyabhyas
विदुषां वयोप्रमाणं नापेक्षते किल।
किं पदम् असाधु।
🌿
उत्सृज्य साधुवृत्तं कुटिलधिया वञ्चितः परो येन।
आत्मैव मूढमतिना कृतसुकृतो वञ्चितस्तेन॥
🌞 येन मूढमतिना मूर्खेण साधुवृत्तं सदाचरणम् उत्सृज्य परित्यज्य कुटिलधिया वक्रबुद्ध्या परः अन्यः जनः वञ्चितः तेन कृतसुकृतः पुण्यकरः आत्मा एव वञ्चितः।
🌷 जिस मूर्ख के द्वारा सज्जनों के आचरण को त्यागकर कुटिल बुद्धि से दूसरा व्यक्ति ठगा गया है उसके द्वारा वास्तव में पुण्य करने वाली आत्मा (स्वयं) ही ठगी गयी।
🌹 By which fool, having abandoned the conduct of the virtuous, another person has been cheated with crooked intellect—by him, the meritorious soul (himself) has been cheated.
📍 कलाविलासः । २।६७॥ #Subhashitam@samvadah organises संलापशाला - A Sanskrit Voicechat Room
🔰 विषयः वाक्याभ्यासः
२६/०८/२०२६ ॥ IST ११:०० AM
🔴 It's recording would be shared on our channel.
📑कृपया दैववाचा चर्चार्थं दत्तेषु शब्देषु वाक्यानि वदितव्यानि इत्येतं विषयम् अभिक्रम्य आगच्छत।
https://t.me/samvadah?livestream
पूर्वचर्चाणां सङ्ग्रहः अधोदत्तः
https://archive.org/details/samlapshala_
शेफालिका वदति। एकं प्रश्नं पृच्छानि किम्। 🧐
अहम् अनुजानामि। पृच्छ। 🤨
शेफालिका पृच्छति। तव हृदयं तु समुद्रम् इव विशालम्। 🌊
अहम् अनुमन्ये। सत्यम्। 😛
शेफालिका पृच्छति। किं ननु तस्मिन् समुद्रे नानाविधमत्स्या न निवसन्ति। 🐟🐠🐡
अहम् अभिभाषे। किं ब्रवीषि। यावद् हृदये स्थूला नक्री 🐊 निवसति तावत् कुतः लघुमत्स्या आगमिष्यन्ति। 😆
#hasya @samvadah 🫢🤭
१। रणवीरो रामो भवति तस्मिन्।
• In that, Ranbir becomes Rama.
• उसमें रनबीर राम बनता है।
२। विदितम् एव सर्व्वं भवता प्रभो।
• Everything is indeed known by you, Lord!
• प्रभु! सब कुछ आपके द्वारा ज्ञात है।
३। पृष्टस्य प्रश्नस्य उत्तरं को दद्यात्।
• Who would give the answer to the asked question?
• पूछे गए प्रश्न का उत्तर कौन दे?
४। स्निह्यन्त्या मत्तो दूरं न अपक्रम।
• Do not go far from me who is loving!
• प्रेम करने वाली मुझसे दूर मत जाओ!
५। अहो कष्टं कुटुम्बपोषणम्।
• Ah, painful is the nourishment of the family!
• अहो, परिवार को पालना बड़ा कष्ट है!
६। विजित्य कृत्स्नां भूमिं ते दास्ये।
• Having conquered the entire land, I will give to you.
• पूरी धरती को जीतकर तुम्हें दूँगा।
७। अवश्यम् अस्य पिता महान् ब्राह्मणः।
• Surely, the father of this one is a great Brahmin.
• निश्चय ही इसका पिता महान् ब्राह्मण है।
८। परिहासो न कर्तव्यः ममाभिमुखम्।
• Joke should not be made in front of me.
• मेरे सामने हँसी-ठिठोली नहीं करनी चाहिए।
९। अकृतबुद्धिरसि त्वं नूनम्।
• You are of an unrefined intellect, certainly.
• तुम निश्चय ही कच्ची बुद्धि वाले हो।
१०। त्वं स्त्री नासि महिषि।
• You are not a woman, Buffalo!
• भैंस! तुम स्त्री नहीं हो।
@samvadah #vakyabhyas
🌿
करोतु नाम नीतिज्ञो व्यवसायमितस्ततः ।
फलं पुनस्तदेव स्याद्यद्विधेर्मनसि स्थितम्॥
🌞 नीतिज्ञो नीतिनिपुणः इतस्ततः व्यवसायं प्रयत्नं करोतु नाम। पुनः परन्तु फलं तत् एव स्यात् यत् विधेः विधातुः मनसि स्थितम् अस्ति।
🌷 नीति का जानकार भले ही इधर-उधर कितना भी व्यवसाय करे। परन्तु पुनः फल वही होगा जो विधाता के मन में स्थित है।
🌹 Let a man versed in strategy make initiatives here and there. But, again, the fruit will be that which is situated in the mind of destiny (the Creator).
📍 हितोपदेशः । २।१४॥ #Subhashitam