संस्कृत संवादः । Sanskrit Samvadah
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| 2 | 🌿 अद्वारेण विशन्त्येव बुद्धिमन्तो रिपोर्गृहम्।
अकृत्वा धर्षणां पूर्वं कथं युद्धं प्रवर्तते॥
🌞 पूर्वं धर्षणाम् अकृत्वा बुद्धिमन्तो रिपोः शत्रोः गृहम् अद्वारेण गवाक्षादिना विशन्त्येव तस्माद् युद्धं कथं प्रवर्तते।
🌷 पहले न ललकारकर बुद्धिमान् लोग शत्रु के घर में बिना दरवाजे के ही प्रवेश करते हैं तब युद्ध कैसे हो सकता है? (जब शत्रु सज्ज ही न हो तो बिना युद्ध के विजय सुनिश्चित है।)
🌹 Without challenging before, The wise indeed enter the dwelling of the enemy not by a gate (by a window etc.), then how can a battle happen? (The unprepared enemy ensures victory without a fight.)
📍 भारतमञ्जरी । २।७८॥ #Subhashitam | 41 |
| 3 | @samvadah f439.ogg | 42 |
| 4 | #AkashVani | 117 |
| 5 | #hasya @samvadah | 212 |
| 6 | १। तं तत्र पश्यन्तमहम् अपश्यम्।
• I had seen him looking there.
• मैंने उसे वहाँ देखते हुए देखा था।
२। त्वया पीते जले विषं सम्मिश्रितम्।
• Poison is mixed in the water drunk by you.
• तुम्हारे द्वारा पिए गए पानी में विष मिला हुआ है।
३। किं तादृशी कन्याऽपि भवति लोके।
• Does such a girl even exist in the world?
• क्या वैसी लड़की भी लोक में होती है।
४। मम उक्तम् अन्यथा न भवति वत्स।
• My spoken word does not become otherwise, child.
• मेरा कहा अन्यथा नहीं होता, बच्चे।
५। तव हृदये को वर्तते सखि।
• Who exists in your heart, female friend?
• तुम्हारे हृदय में कौन है, सखी।
६। न न अस्य लेखनं महत्त्वपूर्णम्।
• No, no, the writing of this one is important.
• नहीं नहीं, इसका लिखा जाना महत्त्वपूर्ण है।
७। माता पुनः पुनः बालकं ज्ञापयति।
• The mother informs the boy again and again.
• माता बार-बार बालक को बताती हैं।
८। एष मशको बहुः गर्व्वितः।
• This mosquito is very proud.
• यह मच्छर बहुत घमंडी है।
९। यदपि कथ्यतां परमत्र शान्तिर्वर्तते।
• Whatever may be said, but here peace exists.
• जो भी कहा जाए, परंतु यहाँ शांति है।
१०। तस्मिन् ध्वजे शिवो विराजमानः।
• On that flag, Shiva is seated.
• उस झंडे पर शिव विराजमान हैं।
@samvadah #vakyabhyas | 217 |
| 7 | 🌿 अध्वा न यदि निसङ्गपङ्कसंकुलितो भवेत्।
ततः कुतस्ते धौरेय धुर्यता व्यज्यतामियम्॥
🌞 धौरेय धुरन्धर यदि अध्वा पथः निसङ्गपङ्कसंकुलितो गाढकर्दमयुक्तः न भवेत् ततः ते इयं धुर्यता भारवहनसामर्थ्यं कुतः व्यज्यतां प्रकाश्यताम्।
🌷 धूरि को धारण करने वाले (साँढ या घोड़ा) यदि मार्ग गाढ़े कीचड़ से भरा हुआ न होता, तो तुम्हारी यह भार ढोने की क्षमता कैसे प्रकट करी जाती?
🌹 If the pathway were not full of caked-up mud, Beast of burden! (Horse/Bull), how can this endurance of yours have been manifested?
📍 सूक्तिमुक्तावली। ९२।२॥ #Subhashitam | 215 |
| 8 | پیام صوتی | 207 |
| 9 | सुन्दरकाण्डं ३१तमः सर्गः।
#samlapshala | 225 |
| 10 | गुणिन् जानीहि।
कः सन्धिः स्यादत्र। | 218 |
| 11 | #AkashVani | 208 |
| 12 | @samvadah organises संलापशाला - A Sanskrit Voicechat Room
🔰विषयः सुन्दरकाण्डं ३१तमः सर्गः
🗓१३/०६/२०२६ ॥ IST ११:०० AM
🔴 It's recording would be shared on our channel.
📑कृपया दैववाचा चर्चार्थं व्याकरणभावाभ्यां सह श्लोकः वक्तव्यः इत्येतं विषयम् अभिक्रम्य आगच्छत।
https://t.me/samvadah?livestream
पूर्वचर्चाणां सङ्ग्रहः अधोदत्तः
https://archive.org/details/samlapshala_ | 270 |
| 13 | विद्याधरो वदति। भोः अहम् एकस्यां कन्यायां स्निह्यामि। किं करवाणीति उपदिश।
अहं प्रतिभाषे। गत्वा तां ब्रूहि। किमिव भविष्यति यद् दुर्दैवे सा त्वां न वरिष्यति तावदेव खलु।
विद्याधरो गत्वा तां ब्रवीति। भोः सुनयने अहं त्वयि भृशं स्निह्यामि। किं त्वमपि मयि स्निह्यसि।
कन्या प्रतिभाषते। यदि तव एको भ्राता च कुक्कुरश्चैकः 🐕 अभविष्यतां तर्हि अहं कुक्कुरम् अवरिष्यम्। 🙂
#hasya @samvadah 🫢😂 | 265 |
| 14 | १। शक्तं चेन्माम् अपसारय।
• If it's doable, move me away.
• यदि हो सके तो मुझे हटाओ।
२। हृत्पद्मं ते विशीर्णं प्रिये।
• Your heart-lotus is withered, dear!
• तुम्हारा हृदय-कमल मुरझा गया है, प्रिये।
३। किमधुना श्रोतुं शेषम्।
• What now remains to be heard?
• अब सुनने को क्या बचा है।
४। पश्य तत्र शुकं च सारिकां च।
• See there the parrot and the Sarika bird.
• देखो वहाँ तोते और मैना को।
५। विप्राणां कर्म्म मया न कार्य्यम्।
• The work of the wise (brahmins) is not to be done by me.
• ब्राह्मणों का काम मेरे द्वारा करने योग्य नहीं है।
६। रतो यः स्त्रीषु तस्य का गतिर्भवेत्।
• The one who is engrossed in women, what would be his destiny?
• जो स्त्रियों में रमा हुआ है, उसकी क्या गति होगी।
७। मम अग्रतः वातायनं नास्ति।
• In front of me, there is no window.
• मेरे आगे कोई खिड़की नहीं है।
८। रहसि स्थितां बालिकां मा प्रपश्य।
• Do not stare at the girl situated in a secluded place.
• एकांत में स्थित लड़की को मत घूरो।
९। कर्णरोगेण पीडितः स वृद्धः।
• That old man is afflicted by an ear disease.
• वह बूढ़ा कान के रोग से पीड़ित है।
१०। सत्यं भणसि तात यद्यपि न अवगच्छामि।
• You speak the truth, Sir! though I do not understand.
• तुम सच बोलते हो जी, यद्यपि मैं समझ नहीं रहा हूँ।
@samvadah #vakyabhyas | 284 |
| 15 | मुक्तविषयः
#samlapshala | 267 |
| 16 | बालेन लता ____। | 265 |
| 17 | वर्णव्यवस्थाप्रयोचनं कर्म्मयोगमहत्त्वञ्च।
अथ वर्णव्यवस्थायाः किं प्रयोजनमिति अवगन्तुमर्हम्। प्रथमस्तु जन्मनैव वर्णव्यवस्थेति स्फुटं सत्यम्। यो जनो मनागपि शास्त्राध्ययनं कुर्यात् स जानीयाद् एव यद् जन्मनैवादिकालादेषा व्यवस्था बभूव। परन्त्वाङ्ग्लमतेन पराभूतं भारतवर्षं स्वकीयां सुपवित्रां परम्परामप्यवमन्यते। परन्तु किमर्थमेष वर्णाश्रमधर्म्मः स्थापित इति चेत् तद्धेतुः कर्मयोगः। वस्तुतः तु यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र क्रियमाणानि सर्वाणि कर्माण्येव जीवस्य बन्धनानि भवन्ति। निष्कामभावेन स्वधर्म्मं पालयन्नेव जन्तुः पापात् प्रमुच्यते। ब्राह्मणानामध्यापनं याजनं क्षत्त्रियाणां रक्षणं शासनं वैश्यानां कृषिगोरक्ष्यवाणिज्यं शूद्राणाञ्च द्विजशुश्रूषेति।
तत्र ब्राह्मणानां धर्म्मः सर्व्वदोषेभ्यो हिंसाधनतृष्णापरवश्यतादिभ्यः परिशुद्धः ततश्च ब्राह्मणाः श्रेष्ठाः कथिताः तद्वत् स्त्रीशूद्राणां धर्मं च परिचर्यां परवश्यताक्षुद्रतादिदोषैर्म्लानां निकृष्टतमामाहुः। किमनया व्याख्यया स्त्रीशूद्रादयो ब्राह्मणेभ्यः पापिष्ठा इति सिद्ध्यति। मैवम्। यथा पिता माता अग्रजो वा सदा नरात् श्रेष्ठः अपि सन्तः पापकर्म्माणो भवितुं शक्यन्ते तद्वत् ब्राह्मणोऽपि पापी स्त्रीशूद्रादयोऽपि पुण्यभागिनः भवितुमर्हन्ति। तथापि स्त्रीशूद्रादयोऽभिमानदोषनिवारणाय ब्राह्मणादीन् जातु नावमन्येरन्। पूजितस्तु निर्जीवशिलाखण्डोऽपि दैवो भवति किं पुनर्यदि ब्राह्मणो दुष्टोऽपि वा पूजितः।
परम्पराप्राप्तो यद्धर्म्मः स एव धर्म्मः। तदभावे नरः कामाचारेण कर्म्म करोति यथा वर्तमाने युगे प्रचलति। यो यदिच्छति तदेव कर्म्म स्वीकरोति। परन्तु कामः तु क्षणिको नश्वरश्च। कामस्य नाशः तु अवश्यंभावी। पूर्णे सति कामो नश्यति पुनश्च हते उत्साहेऽपि अपूर्णः कामो नश्यति एव। तस्मिन् कामे नष्टे सति कामाचरणेन स्वीकृतं कर्म भारवद्भवति। तस्मात्कर्ममार्गात्कथं मुक्तिः सम्भवेत्। कर्मयोगादन्येऽपि योगाः सन्ति परन्तु कर्मयोग इहलोके परलोके चोत्थानकारणमस्ति यत् कृत्वा पाणिनिः पाणिनिर्बभूव पृथ्वीराजश्च पृथ्वीराजः अम्बानी अम्बानी दशरथमाँझी चापि माँझी।
भगवान्स्वयमागत्य धर्मोपदेशं न करोति। स आदिदेवः शास्त्रेण विदुषा वोपदिशति। वर्तमानयुगे आत्मनैव आत्मानं बद्ध्वा जनाः तस्य धर्म्मस्य पालने अशक्ताः सन्ति। तथापि यदि किञ्चिन्मात्रं धर्मबोधः शेषोऽस्ति तर्हि तस्य पुनरुत्थानायायं प्रयासो विधीयते। यद्येकोऽपि जन उन्मीलितचक्षुर्भवेत्तर्हि तन्महापुण्यमेव। श्रीमद्भगवद्गीतायामपि यथोक्तम्।
य इदं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति।
भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः॥ | 642 |
| 18 | 🌿 वर्णानामाश्रमाणां च जन्मभूम्यनुसारिणीः।
आसन् प्रकृतयो नॄणां नीचैर्नीचोत्तमोत्तमाः॥
🌞 श्रीकृष्ण उवाच। तथा च वर्णानाम् आश्रमाणां प्रकृतयः नॄणां मनुष्याणां जन्मभूम्यनुसारिणीः जन्मयोनिवशानुगाः क्रमशः नीचैः शूद्रैः नीचोत्तमोत्तमाः वैश्यक्षत्त्रियब्राह्मणयोनयः आसन् अभवन्।
🌷 (श्रीकृष्ण ने कहा।) और वर्णाश्रमों की प्रकृतियाँ (स्वभाव) मनुष्यों के जन्मयोनि के अनुसार क्रमशः नीच (शूद्रयोनि) से नीच -उत्तम-उत्तम (वैश्य-क्षत्त्रिय-ब्राह्मण योनियाँ) हुईं।
🌹 (Shri Krishna said:) And the characteristics of the sanctums of varnas had happened in order to the birth origins of humans, from ignoble (Shudra origin) to ignoble-noble-noble (Vaishya-Kshatriya-Brahmin origins).
📍 श्रीमद्भागवतपुराणम् । ११।१७।१५॥ #Subhashitam | 288 |
| 19 | @samvadah f449.ogg | 272 |
| 20 | @samvadah f449.ogg | 1 |
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