uz
Feedback
संस्कृत संवादः । Sanskrit Samvadah

संस्कृत संवादः । Sanskrit Samvadah

Kanalga Telegram’da o‘tish

Largest Online Sanskrit Network Our Links – https://t.me/samvadah/11287 Linked group @samskrta_group News and magazines @ramdootah Super group @Ask_sanskrit Sanskrit Books @GranthaKutee

Ko'proq ko'rsatish
6 234
Obunachilar
-324 soatlar
+77 kunlar
+4930 kunlar
Postlar arxiv
१। गजमुखाय दूर्व्वाः अर्पणीयाः। • To Gajamukha, Durva grasses should be offered. • गजमुख को दूब चढ़ानी चाहिए। २। ममैकाऽपि भगिनी नास्ति। • Even one sister of mine is not there. • मेरी एक भी बहन नहीं है। ३। तव कान्तः कदा गच्छेद् इतः। • When may your beloved go from here? • तुम्हारा प्रेमी यहाँ से कब जाए? ४। अवगुण्ठनं कुरु स्नुषे। • Daughter-in-law! Draw the veil. • बहू! घूँघट करो। ५। तौ अकथयताम् आवां न वियोक्ष्यावह इति। • The two of them used to say, "We two shall not be separated." • वह दोनों कहते थे, "हम दोनों नहीं बिछड़ेंगें।" ६। भ्रातः त्वं भ्रमितः असि। • Brother! You are confused. • भाई! तुम भ्रम में हो। ७। करणदीपः स्वनगरं गच्छति।Karanadeepa goes to one's own town. • करणदीप अपने नगर को जाता है। ८। चञ्चुना गृहीतम् अन्नं पक्षिणा। • With the beak, the food was seized by the bird. • पक्षी द्वारा चोंच से दाना पकड़ा गया। ९। तुलसीदासः सर्वस्वं ददौ।Tulsidasa gave away everything. • तुलसीदास ने अपना सब कुछ दे दिया। १०। विष्ठकृमिर्भविष्यसि त्वं नीच। • Lowly one! You will become a worm of feces. • नीच! तुम विष्ठा के कीड़े बनोगे। @samvadah #vakyabhyas

किं वाक्यं शुद्धम्।
Anonymous voting

🌿 अनाकृष्टस्य विषयैर्विद्यानां पारदृश्वनः। तस्य धर्मरतेरासीद्वृद्धत्वं जरसा विना॥ 🌞 विषयैः अनाकृष्टस्य विद्यानां पारदृश्वनः दृष्टपारस्य धर्मरतेः तस्य जरसा विना वृद्धत्वं ज्ञानवृद्धत्वम् आसीत्। 🌷 विषयों (इन्द्रिय सुखों) के द्वारा आकर्षित न होने वाले, विद्याओं के पारङ्गत, धर्म में रति वाले उनके बुढ़ापे के बिना ही वृद्धत्व (ज्ञानवृद्धत्व) था। 🌹 Of him who was not attracted by sensual objects, who had seen beyond sciences, and who was engaged in duty, there was old age (by wisdom) without the physical aging. 📍 रघुवंशम् । १।२३॥ #Subhashitam

१। जयार्थं युद्धं गच्छन्ति नृपतयः। • For victory, the kings go to war. • जीत के लिए राजा युद्ध में जाते हैं। २। अवश्यं तव भ्राता व्यसनी अस्ति। • Surely, your brother has a bad habit. • निश्चय ही तुम्हारा भाई बुरी लत वाला है। ३। कुत्र गन्तुं प्रवृत्तोऽयं ते पुत्रः। • Where is this son of yours set out to go? • कहाँ जाने को निकला है यह तुम्हारा बेटा? ४। सर्वं ज्ञातुम् अहं न शक्तः। • I am not capable of knowing everything. • सब कुछ जानने में मैं समर्थ नहीं हूँ। ५। वस्तुतः अस्याः अङ्के अपरायाः बालो वर्तते। • In fact, in her lap is the boy of another woman. • सचमुच इसकी गोद में दूसरी स्त्री का बच्चा है। ६। त्वं मम विवाहे विघ्नं कर्तुं नार्हसि। • You ought not to cause an obstacle in my wedding. • तुम मेरे ब्याह में बाधा डालने के योग्य नहीं हो। ७। पण्डितो मूढवचनैः कथं तुष्येत्। • How would a scholar be satisfied by the words of fools? • ज्ञानी मूर्खों की बातों से कैसे संतुष्ट होगा? ८। अस्माकं स्वामी अतिदयालुरस्ति। • Our master is extremely compassionate. • हमारा स्वामी बहुत दयालु है। ९। मनागपि बलं नास्ति अस्मिन्। • There is not even a little strength in this one. • थोड़ा सा भी बल इसमें नहीं है। १०। किमर्थं सा मम स्वप्नेषु प्रभवति। • Why does she appear in my dreams? • वह मेरे सपनों में किसलिए प्रकट होती है? @samvadah #vakyabhyas

विदुषां वयोप्रमाणं नापेक्षते किल। किं पदम् असाधु।
Anonymous voting

🌿 उत्सृज्य साधुवृत्तं कुटिलधिया वञ्चितः परो येन। आत्मैव मूढमतिना कृतसुकृतो वञ्चितस्तेन॥ 🌞 येन मूढमतिना मूर्खेण साधुवृत्तं सदाचरणम् उत्सृज्य परित्यज्य कुटिलधिया वक्रबुद्ध्या परः अन्यः जनः वञ्चितः तेन कृतसुकृतः पुण्यकरः आत्मा एव वञ्चितः। 🌷 जिस मूर्ख के द्वारा सज्जनों के आचरण को त्यागकर कुटिल बुद्धि से दूसरा व्यक्ति ठगा गया है उसके द्वारा वास्तव में पुण्य करने वाली आत्मा (स्वयं) ही ठगी गयी। 🌹 By which fool, having abandoned the conduct of the virtuous, another person has been cheated with crooked intellect—by him, the meritorious soul (himself) has been cheated. 📍 कलाविलासः । २।६७॥ #Subhashitam

@samvadah organises संलापशाला - A Sanskrit Voicechat Room 🔰 विषयः वाक्याभ्यासः २६/०८/२०२६ ॥ IST ११:०० AM    🔴 It's recording would be shared on our channel. 📑कृपया दैववाचा चर्चार्थं दत्तेषु शब्देषु वाक्यानि वदितव्यानि इत्येतं विषयम् अभिक्रम्य आगच्छत। https://t.me/samvadah?livestream पूर्वचर्चाणां सङ्ग्रहः अधोदत्तः https://archive.org/details/samlapshala_

शेफालिका वदति। एकं प्रश्नं पृच्छानि किम्। 🧐 अहम् अनुजानामि। पृच्छ। 🤨 शेफालिका पृच्छति। तव हृदयं तु समुद्रम् इव विशालम्। 🌊 अहम् अनुमन्ये। सत्यम्। 😛 शेफालिका पृच्छति। किं ननु तस्मिन् समुद्रे नानाविधमत्स्या न निवसन्ति। 🐟🐠🐡 अहम् अभिभाषे। किं ब्रवीषि। यावद् हृदये स्थूला नक्री 🐊 निवसति तावत् कुतः लघुमत्स्या आगमिष्यन्ति। 😆 #hasya @samvadah 🫢🤭

१। रणवीरो रामो भवति तस्मिन्। • In that, Ranbir becomes Rama. • उसमें रनबीर राम बनता है। २। विदितम् एव सर्व्वं भवता प्रभो। • Everything is indeed known by you, Lord! • प्रभु! सब कुछ आपके द्वारा ज्ञात है। ३। पृष्टस्य प्रश्नस्य उत्तरं को दद्यात्। • Who would give the answer to the asked question? • पूछे गए प्रश्न का उत्तर कौन दे? ४। स्निह्यन्त्या मत्तो दूरं न अपक्रम। • Do not go far from me who is loving! • प्रेम करने वाली मुझसे दूर मत जाओ! ५। अहो कष्टं कुटुम्बपोषणम्। • Ah, painful is the nourishment of the family! • अहो, परिवार को पालना बड़ा कष्ट है! ६। विजित्य कृत्स्नां भूमिं ते दास्ये। • Having conquered the entire land, I will give to you. • पूरी धरती को जीतकर तुम्हें दूँगा। ७। अवश्यम् अस्य पिता महान् ब्राह्मणः। • Surely, the father of this one is a great Brahmin. • निश्चय ही इसका पिता महान् ब्राह्मण है। ८। परिहासो न कर्तव्यः ममाभिमुखम्। • Joke should not be made in front of me. • मेरे सामने हँसी-ठिठोली नहीं करनी चाहिए। ९। अकृतबुद्धिरसि त्वं नूनम्। • You are of an unrefined intellect, certainly. • तुम निश्चय ही कच्ची बुद्धि वाले हो। १०। त्वं स्त्री नासि महिषि। • You are not a woman, Buffalo! • भैंस! तुम स्त्री नहीं हो। @samvadah #vakyabhyas

आहिश्च नकुलश्च अनयोः समाहारः।
Anonymous voting

For Entry Pass: csl@iitb.ac.in
For Entry Pass: csl@iitb.ac.in

🌿 करोतु नाम नीतिज्ञो व्यवसायमितस्ततः । फलं पुनस्तदेव स्याद्यद्विधेर्मनसि स्थितम्॥ 🌞 नीतिज्ञो नीतिनिपुणः इतस्ततः व्यवसायं प्रयत्नं करोतु नाम। पुनः परन्तु फलं तत् एव स्यात् यत् विधेः विधातुः मनसि स्थितम् अस्ति। 🌷 नीति का जानकार भले ही इधर-उधर कितना भी व्यवसाय करे। परन्तु पुनः फल वही होगा जो विधाता के मन में स्थित है। 🌹 Let a man versed in strategy make initiatives here and there. But, again, the fruit will be that which is situated in the mind of destiny (the Creator). 📍 हितोपदेशः । २।१४॥ #Subhashitam