en
Feedback
संस्कृत संवादः । Sanskrit Samvadah

संस्कृत संवादः । Sanskrit Samvadah

Open in Telegram

Largest Online Sanskrit Network Our Links – https://t.me/samvadah/11287 Linked group @samskrta_group News and magazines @ramdootah Super group @Ask_sanskrit Sanskrit Books @GranthaKutee

Show more
6 233
Subscribers
+424 hours
+57 days
+5230 days
Posts Archive
भोजनभाण्डमार्जकः #hasya @samvadah 😁
भोजनभाण्डमार्जकः #hasya @samvadah 😁

१। कस्यचिद् गृहं प्रविश्य सा रोदिति। • Having entered someone's house, she weeps. • किसी के घर में घुसकर वह रोती है। २। स्वभार्य्यां विहाय न गन्तुमर्हसि। • Having abandoned one's own wife, you ought not to go. • अपनी पत्नी को छोड़कर तुम्हें नहीं जाना चाहिए। ३। मलयजं चन्दनं जिघ्रति वनचरः। • The forest-dweller smells the Malaya-born sandalwood. • वनवासी मलय के चंदन को सूँघता है। ४। साधुः वृश्चिकदंशं सहते। • The sage endures the sting of the scorpion. • साधु बिच्छू का डंक सहता है। ५। बहूनां जन्मनाम् अन्ते कश्चित् मां प्रपद्यते। • At the end of many births, someone takes refuge in me. • कई जन्मों के अंत में कोई मेरी शरण में आता है। ६। प्रजानाम् अपीडनम् एव राजधर्मः। • The non-tormenting of the subjects itself is the royal Dharma. • प्रजा को न सताना ही राजा का धर्म है। ७। गृहं प्रतिगच्छ बालक। • Return to the house, Boy! • घर लौट जाओ, बालक! ८। ग्रामीणोऽहं सा नागरी। • I am a villager, she is an urban woman. • मैं गाँव का हूँ, वह नगर की है। ९। किञ्चित् मन्दं वद। • Speak a little softly. • थोड़ा धीमे बोलो। १०। हरी राजनीतिं पठित्वा प्रत्याययौ।Hari, having studied politics, had returned. • हरि राजनीति पढ़कर लौटें। @samvadah #vakyabhyas

नीतिनिपुणः इत्यत्र कः समासः।
Anonymous voting

🌿 अनागतं भयं दृष्ट्वा नीतिशास्त्रविशारदः। अवसन्मूषकस्तत्र कृत्वा शतमुखं बिलम्॥ 🌞 नीतिशास्त्रविशारदः मूषकः अनागतं भावि भयं दृष्ट्वा तत्र शतमुखं बिलं कृत्वा अवसत्। 🌷 नीतिशास्त्र में निपुण चूहा, न आये हुए (भविष्य के) भय को देखकर, वहाँ सौ मुखों (रास्तों) वाला बिल बनाकर रहता था। 🌹 The mouse, skilled in the science of polity, foreseeing unarrived (future) danger, lived there having made a burrow with a hundred openings. 📍 पञ्चतन्त्रम् । २।४॥ #Subhashitam

१। गजमुखाय दूर्व्वाः अर्पणीयाः। • To Gajamukha, Durva grasses should be offered. • गजमुख को दूब चढ़ानी चाहिए। २। ममैकाऽपि भगिनी नास्ति। • Even one sister of mine is not there. • मेरी एक भी बहन नहीं है। ३। तव कान्तः कदा गच्छेद् इतः। • When may your beloved go from here? • तुम्हारा प्रेमी यहाँ से कब जाए? ४। अवगुण्ठनं कुरु स्नुषे। • Daughter-in-law! Draw the veil. • बहू! घूँघट करो। ५। तौ अकथयताम् आवां न वियोक्ष्यावह इति। • The two of them used to say, "We two shall not be separated." • वह दोनों कहते थे, "हम दोनों नहीं बिछड़ेंगें।" ६। भ्रातः त्वं भ्रमितः असि। • Brother! You are confused. • भाई! तुम भ्रम में हो। ७। करणदीपः स्वनगरं गच्छति।Karanadeepa goes to one's own town. • करणदीप अपने नगर को जाता है। ८। चञ्चुना गृहीतम् अन्नं पक्षिणा। • With the beak, the food was seized by the bird. • पक्षी द्वारा चोंच से दाना पकड़ा गया। ९। तुलसीदासः सर्वस्वं ददौ।Tulsidasa gave away everything. • तुलसीदास ने अपना सब कुछ दे दिया। १०। विष्ठकृमिर्भविष्यसि त्वं नीच। • Lowly one! You will become a worm of feces. • नीच! तुम विष्ठा के कीड़े बनोगे। @samvadah #vakyabhyas

किं वाक्यं शुद्धम्।
Anonymous voting

🌿 अनाकृष्टस्य विषयैर्विद्यानां पारदृश्वनः। तस्य धर्मरतेरासीद्वृद्धत्वं जरसा विना॥ 🌞 विषयैः अनाकृष्टस्य विद्यानां पारदृश्वनः दृष्टपारस्य धर्मरतेः तस्य जरसा विना वृद्धत्वं ज्ञानवृद्धत्वम् आसीत्। 🌷 विषयों (इन्द्रिय सुखों) के द्वारा आकर्षित न होने वाले, विद्याओं के पारङ्गत, धर्म में रति वाले उनके बुढ़ापे के बिना ही वृद्धत्व (ज्ञानवृद्धत्व) था। 🌹 Of him who was not attracted by sensual objects, who had seen beyond sciences, and who was engaged in duty, there was old age (by wisdom) without the physical aging. 📍 रघुवंशम् । १।२३॥ #Subhashitam

१। जयार्थं युद्धं गच्छन्ति नृपतयः। • For victory, the kings go to war. • जीत के लिए राजा युद्ध में जाते हैं। २। अवश्यं तव भ्राता व्यसनी अस्ति। • Surely, your brother has a bad habit. • निश्चय ही तुम्हारा भाई बुरी लत वाला है। ३। कुत्र गन्तुं प्रवृत्तोऽयं ते पुत्रः। • Where is this son of yours set out to go? • कहाँ जाने को निकला है यह तुम्हारा बेटा? ४। सर्वं ज्ञातुम् अहं न शक्तः। • I am not capable of knowing everything. • सब कुछ जानने में मैं समर्थ नहीं हूँ। ५। वस्तुतः अस्याः अङ्के अपरायाः बालो वर्तते। • In fact, in her lap is the boy of another woman. • सचमुच इसकी गोद में दूसरी स्त्री का बच्चा है। ६। त्वं मम विवाहे विघ्नं कर्तुं नार्हसि। • You ought not to cause an obstacle in my wedding. • तुम मेरे ब्याह में बाधा डालने के योग्य नहीं हो। ७। पण्डितो मूढवचनैः कथं तुष्येत्। • How would a scholar be satisfied by the words of fools? • ज्ञानी मूर्खों की बातों से कैसे संतुष्ट होगा? ८। अस्माकं स्वामी अतिदयालुरस्ति। • Our master is extremely compassionate. • हमारा स्वामी बहुत दयालु है। ९। मनागपि बलं नास्ति अस्मिन्। • There is not even a little strength in this one. • थोड़ा सा भी बल इसमें नहीं है। १०। किमर्थं सा मम स्वप्नेषु प्रभवति। • Why does she appear in my dreams? • वह मेरे सपनों में किसलिए प्रकट होती है? @samvadah #vakyabhyas

विदुषां वयोप्रमाणं नापेक्षते किल। किं पदम् असाधु।
Anonymous voting

🌿 उत्सृज्य साधुवृत्तं कुटिलधिया वञ्चितः परो येन। आत्मैव मूढमतिना कृतसुकृतो वञ्चितस्तेन॥ 🌞 येन मूढमतिना मूर्खेण साधुवृत्तं सदाचरणम् उत्सृज्य परित्यज्य कुटिलधिया वक्रबुद्ध्या परः अन्यः जनः वञ्चितः तेन कृतसुकृतः पुण्यकरः आत्मा एव वञ्चितः। 🌷 जिस मूर्ख के द्वारा सज्जनों के आचरण को त्यागकर कुटिल बुद्धि से दूसरा व्यक्ति ठगा गया है उसके द्वारा वास्तव में पुण्य करने वाली आत्मा (स्वयं) ही ठगी गयी। 🌹 By which fool, having abandoned the conduct of the virtuous, another person has been cheated with crooked intellect—by him, the meritorious soul (himself) has been cheated. 📍 कलाविलासः । २।६७॥ #Subhashitam

@samvadah organises संलापशाला - A Sanskrit Voicechat Room 🔰 विषयः वाक्याभ्यासः २६/०८/२०२६ ॥ IST ११:०० AM    🔴 It's recording would be shared on our channel. 📑कृपया दैववाचा चर्चार्थं दत्तेषु शब्देषु वाक्यानि वदितव्यानि इत्येतं विषयम् अभिक्रम्य आगच्छत। https://t.me/samvadah?livestream पूर्वचर्चाणां सङ्ग्रहः अधोदत्तः https://archive.org/details/samlapshala_