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Acharya Prashant

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Official Telegram Channel of Acharya Prashant. - YouTube: youtube.com/acharyaprashant - Facebook: https://www.facebook.com/AdvaitAcharyaPrashant

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📈 Аналітичний огляд Telegram-каналу Acharya Prashant

Канал Acharya Prashant (@withacharyaprashant) у мовному сегменті Хінді є активним учасником. На даний момент спільнота об'єднує 16 357 підписників, посідаючи 5 103 місце в категорії Релігія і духовність та 24 947 місце у регіоні Індія.

📊 Показники аудиторії та динаміка

З моменту свого створення невідомо, проект продемонстрував стрімке зростання, зібравши аудиторію у 16 357 підписників.

За останніми даними від 02 вересня, 2026, канал демонструє стабільну активність. Хоча за останні 30 днів спостерігається зміна кількості учасників на -73, а за останні 24 години на 3, загальне охоплення залишається високим.

  • Статус верифікації: Верифікований (Офіційно підтверджено Telegram)
  • Рівень залученості (ER): Середній показник залученості аудиторії становить 8.52%. Протягом перших 24 годин після публікації контент зазвичай збирає 4.07% реакцій від загальної кількості підписників.
  • Охоплення публікацій: В середньому кожен допис отримує 1 394 переглядів. Протягом першої доби публікація в середньому набирає 665 переглядів.
  • Реакції та взаємодія: Аудиторія активно підтримує контент: середня кількість реакцій на один пост – 12.
  • Тематичні інтереси: Контент зосереджений навколо ключових тем, таких як आचार्य, प्रशांत, सत्र, अप्रैल, जीवन.

📝 Опис та контентна політика

Автор описує ресурс як майданчик для висловлення суб'єктивної думки:
Official Telegram Channel of Acharya Prashant. - YouTube: youtube.com/acharyaprashant - Facebook: https://www.facebook.com/AdvaitAcharyaPrashant

Завдяки високій частоті оновлень (останні дані отримано 03 вересня, 2026), канал підтримує актуальність та високий рівень охоплення публікацій. Аналітика показує, що аудиторія активно взаємодіє з контентом, що робить його важливою точкою впливу в категорії Релігія і духовність.

16 357
Підписники
+324 години
-287 днів
-7330 днів
Архів дописів
कृष्ण से भी कामना जो भी लोग किसी धार्मिक जगह पर जाते हैं कामनाएँ लेकर के या अपने सिद्धांत, अपनी मान्यताएँ लेकर के, वो अपना और धार्मिक जगह दोनों का अपमान कर रहे हैं। वहाँ कुछ पाने नहीं जाते, वहाँ कुछ खोने जाते हैं, कुछ गँवाने जाते हैं। तड़प यह रहती है कि "मैंने जैसा अभी तक जिया है, मुझे नहीं जीना। मैं जैसा हूँ, मुझे वैसा नहीं रहना। तुम्हारे सामने खड़ा हूँ, क्या पता तुम्हें देख के मेरी भी कोई ऊर्जा जग जाए? मुझे मालूम है तुम मूर्ति से निकल कर के नहीं आओगे मेरा जीवन बदलने, पर तुम्हें देख के क्या पता कुछ जो सो रहा है मेरे भीतर, वो जग जाए।"

त्योहार हमारे सामने बार-बार क्यों आते हैं?
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जन्माष्टमी और जुआ जिन्हें जुआ खेलना ही है, वो त्योहार को भी जुआ खेलने का बहाना बना लेंगे। जिन्हें मांस खाना ही है, वो त्योहार को भी बकरा काटने का बहाना बना लेंगे। त्योहार ने नहीं कहा है कि तुम यह सब उपद्रव करो। तुम्हें करना है तो तुम कोई ना कोई तरीका निकाल लोगे कि कामना कैसे पूरी करूँ।

त्योहार हमारे सामने बार-बार क्यों आते हैं?
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मूर्ति का सही उपयोग

मूर्ति का उद्देश्य

मूर्तिपूजा का सिद्धांत

दही-हांडी

मूर्तिपूजा सही?

मूर्तिपूजा सही?

No Love Without Freedom

The Trillionaire's Masterplan: Block the Sun, Non-stop Fun. Clap. Can blocking sunlight with AI-controlled satellites really solve global warming? Acharya Prashant examines this proposed technological solution and explains why trying to control global temperatures without reducing emissions misses the real problem. Against the backdrop of the Nepal tragedy, he exposes our desire to continue consuming while expecting technology to save us from the consequences. The discussion goes deeper into climate injustice, our dependence on technological fantasies, and why self-knowledge and inner education are essential to addressing the climate crisis. Key Themes: - Solar geoengineering and climate change - Technology and carbon emissions - Consumption and the climate crisis - Nepal tragedy and climate injustice - Self-knowledge and environmentalism

श्रीकृष्ण का विराट रूप ...

श्रीकृष्ण और कंस

श्रीकृष्ण आपसे कह रहे हैं ...

Weekend With Master Goa: What happens in HIDP? 🌴🌊 Weekend With Master camps with Acharya Prashant are happening in Goa every weekend! ✨️ These camps feature HIDP (Holistic Individual Development Program) activities 🕊️ This journey of wisdom continues in Goa in September too - all sessions on holidays 🎉 👉🏻 Registration link: https://acharyaprashant.org/en/upcoming-events?cmId=m00002-allevents Friends and family can come along too 👨‍👩‍👧 📅 Dates: 12-13 September (Saturday-Sunday) 14 September (Ganesh Chaturthi) 19-20 September (Saturday-Sunday) 26-27 September (Saturday-Sunday) 📍 Venue: Goa

बच्चे के मुंह में ब्रह्मांड कहां से आ गया?

जन्माष्टमी मनाने का सुंदर तरीका यह है कि इसे श्रीकृष्ण का नहीं, अपना जन्म दिवस मानें। श्रीकृष्ण का तो कोई जन्म होता नहीं क्यो
जन्माष्टमी मनाने का सुंदर तरीका यह है कि इसे श्रीकृष्ण का नहीं, अपना जन्म दिवस मानें। श्रीकृष्ण का तो कोई जन्म होता नहीं क्योंकि श्रीकृष्ण कभी मरे ही नहीं। हम हैं जिन्हें जन्म की आवश्यकता है। कहें, "मैं जैसे साल भर जीता आ रहा हूँ, अब वैसे नहीं जिऊँगा।" आज पुनः जन्म होगा मेरा। साल भर की हबड़-दबड़ में एक दिन आपको मौका मिला है ठहरने का। यह ठहरना ही नया जन्म है। ठहरकर देखिए कि 'आप कैसे हैं'। जब आप अपनी ओर देखते हैं, आपकी आँखों के पीछे जो होता है उसे श्रीकृष्ण कहते हैं। आँखों के आगे तो आपकी बनाई मूर्तियाँ होंगी। श्रीकृष्ण आँखों के आगे कम, आँखों के पीछे ज़्यादा होते हैं। श्रीकृष्ण वो स्रोत हैं जो आपको ताकत देते हैं कि आप बिना डरे देख पाएँ। हर पर्व आपको यही बताने के लिए आता है कि रुको, उठो, बदलो, जियो। ~ आचार्य प्रशांत

कृष्ण वो देह नहीं है, जो मोर पंख धारण करती है, जो मुरली धारण करती है। वह देह नहीं है कृष्ण। कृष्ण वो बोध है, जो कालातीत है, जो जगत की उत्पत्ति के समय अभी तक तब उसका नाम कुछ और रहा होगा, पर वो भी कृष्ण ही था। अर्जुन के सामने जो कृष्ण खड़े हुए हैं, वो कृष्ण का बस एक विशेष रूप है। वो रूप तो चला जाएगा। जैसे अर्जुन की देह मरनी है, वैसे ही कृष्ण की वो विशेष देह भी मरेगी, मरी थी ना। आप जिनको कृष्ण कहते हैं, वो कृष्ण के अनंत रूपों में एक रूप है, जो अर्जुन के सामने था। तो एक चेहरे को कृष्ण मत समझ लेना। यह बात वो अर्जुन को नहीं समझा रहे, यह बात आप सब अर्जुनों को समझा रहे हैं कि तुम मुझे भी बस एक चेहरा माने बैठे हो। अरे मैं चेहरा नहीं हूं बाबा। मैं चेहरे से बहुत आगे का हूं। मेरे न जाने कितने चेहरे हो चुके हैं। हर बोधवान चेतना का चेहरा, हर प्रबुद्ध चेहरा मेरा ही चेहरा है। अर्जुन, हर वो व्यक्ति कृष्ण है, जो बोध में जी रहा है। जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का अभ्युदय होता है, अधर्म सर चढ़ के बोलता है, तब-तब मैं उस धारा से अपने आप को प्रकट करता हूं। तो प्रकट होना क्या कृष्ण का फैसला है? नहीं, नहीं, कृष्ण का नहीं है। कृष्ण तो हैं। वो प्रकट होंगे या नहीं होंगे, यह आपका फैसला, आपका चुनाव है।