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Acharya Prashant

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Official Telegram Channel of Acharya Prashant. - YouTube: youtube.com/acharyaprashant - Facebook: https://www.facebook.com/AdvaitAcharyaPrashant

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📈 نظرة تحليلية على قناة تيليجرام Acharya Prashant

تُعد قناة Acharya Prashant (@withacharyaprashant) في القطاع اللغوي الهندية لاعباً نشطاً. يضم المجتمع حالياً 16 363 مشتركاً، محتلاً المرتبة 5 083 في فئة الدين والقيم الروحية والمرتبة 24 596 في منطقة الهند.

📊 مؤشرات الجمهور والحراك

منذ تأسيسه في невідомо، حقق المشروع نمواً سريعاً وجمع 16 363 مشتركاً.

بحسب آخر البيانات بتاريخ 25 سبتمبر, 2026، تحافظ القناة على نشاط مستقر. خلال آخر 30 يوماً تغيّر عدد الأعضاء بمقدار -28، وفي آخر 24 ساعة بمقدار 9، مع بقاء الوصول العام مرتفعاً.

  • حالة التحقق: موثّقة (مؤكدة رسمياً من تيليجرام)
  • معدل التفاعل (ER): يبلغ متوسط تفاعل الجمهور 6.49‎%. وخلال أول 24 ساعة من النشر يحصد المحتوى عادةً 4.02‎% من ردود الفعل نسبةً إلى إجمالي المشتركين.
  • وصول المنشورات: يحصل كل منشور على متوسط 1 062 مشاهدة. وخلال اليوم الأول يجمع عادةً 658 مشاهدة.
  • التفاعلات والاستجابة: يتفاعل الجمهور بانتظام؛ متوسط التفاعلات لكل منشور يبلغ 11.
  • الاهتمامات الموضوعية: يركز المحتوى على مواضيع رئيسية مثل आचार्य, प्रशांत, सत्र, अप्रैल, जीवन.

📝 الوصف وسياسة المحتوى

يصف المؤلف القناة بأنها مساحة للتعبير عن الآراء الذاتية:
“Official Telegram Channel of Acharya Prashant. - YouTube: youtube.com/acharyaprashant - Facebook: https://www.facebook.com/AdvaitAcharyaPrashant”

بفضل وتيرة التحديث المرتفعة (أحدث البيانات بتاريخ 26 سبتمبر, 2026) تحافظ القناة على حداثتها ومستوى وصول مرتفع. وتُظهر التحليلات تفاعلاً نشطاً من الجمهور، ما يجعلها نقطة تأثير مهمة ضمن فئة الدين والقيم الروحية.

16 363
المشتركون
+924 ساعات
+97 أيام
-2830 أيام
أرشيف المشاركات
शादी करी है, ईमान नहीं बेचा है - शादी में कोई एहसान नहीं कर रहा, फिर समझौता किसकी शर्तों पर? - सच बोलना "बदतमीज़ी" है, तो झूठ बोलना कौन सी तमीज़ है? - शादी से पहले सिर्फ चेहरा देखा, असली स्वभाव कब देखेंगे? - शांति के नाम पर क्या हम बच्चों को गलत बात सहना सिखा रहे हैं? 🎥 यहां देखें: https://www.youtube.com/watch?v=6u_beIsui_s

शादी करी है, ईमान नहीं बेचा है शादी में कोई एहसान नहीं कर रहा, फिर समझौता किसकी शर्तों पर? सच बोलना "बदतमीज़ी" है, तो झूठ बोलना कौन सी तमीज़ है? शादी से पहले सिर्फ चेहरा देखा, असली स्वभाव कब देखेंगे? शांति के नाम पर क्या हम बच्चों को गलत बात सहना सिखा रहे हैं? 🎥 यहां देखें: https://www.youtube.com/watch?v=6u_beIsui_s

शादी करी है, ईमान नहीं बेचा है शादी में कोई एहसान नहीं कर रहा, फिर समझौता किसकी शर्तों पर? सच बोलना "बदतमीज़ी" है, तो झूठ बोलना कौन सी तमीज़ है? शादी से पहले सिर्फ चेहरा देखा, असली स्वभाव कब देखेंगे? शांति के नाम पर क्या हम बच्चों को गलत बात सहना सिखा रहे हैं? 🎥 यहां देखें: https://www.youtube.com/watch?v=6u_beIsui_s

दलित का ठप्पा माथे पर लगा है; मैं ये धर्म ही छोड़ दूँगा विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी एक श्रोता के सवालों का जवाब दे रहे हैं, जो झारखंड से हैं और हिंदू धर्म, सनातन धर्म, मनुस्मृति, और जाति-व्यवस्था पर उनकी राय जानना चाहते हैं। आचार्य जी बताते हैं कि लोक-धर्म (जैसे कि प्रचलित परंपराएं और समाज में मौजूद religious practices) में caste discrimination और exploitation देखने को मिला है, लेकिन असली सनातन धर्म ऐसा नहीं है। आचार्य जी समझाते हैं कि सनातन धर्म का आधार श्रुति (जैसे वेद और उपनिषद) है, जो किसी भी प्रकार के जातिगत भेदभाव को मान्यता नहीं देता और कहता है कि इंसान केवल चेतना है और यह मानता है कि इंसान केवल consciousness है, न कि body, caste, या किसी social identity में बंधा हुआ। आचार्य जी बताते हैं कि सनातन धर्म का उद्देश्य self-realization, consciousness को जागरूक करना और ego का त्याग करना है। आचार्य जी कहते हैं कि यदि caste और discrimination जैसी चीजें अस्वीकार्य हैं, तो ये धर्म का हिस्सा नहीं हो सकतीं। उनका सुझाव है कि Dalit समुदाय के लिए education सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि धर्म की असली समझ तभी संभव है जब व्यक्ति शिक्षित और जागरूक हो।

भला आदमी वो नहीं है, जो दूसरों की इच्छाएँ पूरी करता चलता है। भला आदमी वो है, जो दर्पण की तरह सबको उनकी इच्छाओं का सच दिखाता च
भला आदमी वो नहीं है, जो दूसरों की इच्छाएँ पूरी करता चलता है। भला आदमी वो है, जो दर्पण की तरह सबको उनकी इच्छाओं का सच दिखाता चलता है। किसी की इच्छा है कि मुझे ज़हर दे दो, तो तुम उसकी इच्छा पूर्ति के लिए ज़हर दोगे क्या? कामना न सिर्फ़ तुम्हारे अज्ञान से उठ रही है, बल्कि उसे और पुख्ता कर रही है। अच्छा है तुम्हारी कामनाएँ न पूरी हों, क्योंकि एक मूर्खतापूर्ण कामना जब पूरी होती है... तो कामना भले पूरी हो जाती है, लेकिन तुम अधूरे ही रह जाते हो। ~ आचार्य प्रशांत

भला आदमी वो नहीं है, जो दूसरों की इच्छाएँ पूरी करता चलता है। भला आदमी वो है, जो दर्पण की तरह सबको उनकी इच्छाओं का सच दिखाता च
भला आदमी वो नहीं है, जो दूसरों की इच्छाएँ पूरी करता चलता है। भला आदमी वो है, जो दर्पण की तरह सबको उनकी इच्छाओं का सच दिखाता चलता है। किसी की इच्छा है कि मुझे ज़हर दे दो, तो तुम उसकी इच्छा पूर्ति के लिए ज़हर दोगे क्या? कामना न सिर्फ़ तुम्हारे अज्ञान से उठ रही है, बल्कि उसे और पुख्ता कर रही है। अच्छा है तुम्हारी कामनाएँ न पूरी हों, क्योंकि एक मूर्खतापूर्ण कामना जब पूरी होती है... तो कामना भले पूरी हो जाती है, लेकिन तुम अधूरे ही रह जाते हो। ~ आचार्य प्रशांत

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सब प्रेमियों की एक ही निशानी है फोन पर दो-दो, चार-चार घंटे लगे रहना, आमने-सामने बैठकर एक दूसरे का भेजा चबाना, और उधर से कचरा फेंका जाए तो भी इधर से फ़ोन ना काटना, वरना बेवफ़ा कहलाने का डर - यही आजकल प्रेम की निशानी बन गई है। बेवकूफ़ी की बातें पेले जाना और सामने वाले का उन्हें झेले जाना, कहते हैं कि इसी पेलने और झेलने का नाम तो इश्क़ है। ना पेलो, ना झेलो।

"जिसे बोध नहीं, उसके लिए मदिरालय और देवालय दोनों मात्र मनोरंजन के विषय हैं।" ~ आचार्य प्रशांत

धर्म से ज़्यादा मुक्तिप्रद कुछ नहीं और धर्म से बड़ा बंधन भी कुछ नहीं समझे बिना बस कर्मकांड निभाना, क्या यही धर्म है? धर्म न तो जानने की, न समझने की इच्छा बची है, लोग बस दायित्व निभाते चले जा रहे हैं। बिना समझे पूजा पाठ करने का ही नतीजा है कि अब एक पीढ़ी कहती है, “इन चीज़ों का कोई अर्थ नहीं, इसलिए हमें ये करने ही नहीं चाहिए।” न पूजा, न प्रार्थना, न भजन कीर्तन, इस पीढ़ी को दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उन्होंने अपने माता पिता, अपने घर में यही देखा है कि बिना समझे बस रीति निभाई जा रही है। धर्म से बड़ी कोई मुक्ति नहीं, और धर्म से बड़ा कोई बंधन भी नहीं, अफ़सोस की बात है कि हमने धर्म को ही बंधन बना डाला है।

Woman, Forget That You Are a Woman Why do we say "male achiever" or "female achiever" at all? Was Marie Curie a woman scientist, or just a scientist? If your flaws hurt someone, do you fix them, or push them away? Is gender equality enough, or should gender become irrelevant?

अमीरों को देखता हूँ तो ख़ुद से नफ़रत होती है! विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत और एक छोटे शहर के व्यक्ति के बीच गहन चर्चा होती है, जिसमें money, self-esteem, और social identity जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की जाती है। व्यक्ति अपने गांव की poverty और inferiority complex के बारे में बताता है, यह महसूस करते हुए कि अमीर समाज में आने के बाद उसे खुद से नफरत होने लगी। आचार्य प्रशांत उसे समझाते हैं कि पैसे का महत्व है, लेकिन यह self-worth और पहचान का आधार नहीं हो सकता। वे बताते हैं कि असली अमीरी वह है जिसमें व्यक्ति अपने भीतर की inner fulfillment को पहचानता है, न कि बाहरी दिखावे पर निर्भर रहता है। आचार्य प्रशांत यह भी बताते हैं कि पैसे से मिली ताकत अक्सर fear और slavery का कारण बनती है।वे प्रेरित करते हैं कि व्यक्ति को अपनी जड़ों पर गर्व करना चाहिए और समाज में अपनी पहचान को मजबूत करना चाहिए। इस वीडियो में self-awareness, wisdom, और personal growth पर ज़ोर दिया गया है, जो किसी को भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

जिन्हें जीवन में वाकई कुछ नया करना हो, वो अपना माहौल जितना बदल सकते हों, बदल दें। किसने तुमसे कह दिया कि तुम किसी एक ही जगह क
जिन्हें जीवन में वाकई कुछ नया करना हो, वो अपना माहौल जितना बदल सकते हों, बदल दें। किसने तुमसे कह दिया कि तुम किसी एक ही जगह के बंधक हो इस पृथ्वी पर? तुम जहाँ रहते हो, वहाँ तुम्हें ऐसा क्या मिल रहा है कि तुम्हें वहीं पड़े रहना है? जीवन में ऊँचा स्थान मुक्ति का है, चेतना का है। भावनाएँ बहुत पीछे की बात हैं। और भारत ने यह बड़ी गलती करी है। हमारे पिछड़ेपन के बड़े से बड़े कारणों में यह एक है। यूरोप की इतनी तरक्की क्यों हुई? क्योंकि वो लोग निकल-निकलकर पूरी दुनिया पर छा गए। और एक हमारा हिंदुस्तानी मन है, जो कहता है - “हम तो अपने ही शहर में रहेंगे, नहीं निकलेंगे बाहर।” ~ आचार्य प्रशांत

"प्रेम की शर्त तो यही होती है कि बात तुम्हें भले ही कड़वी लगे पर देंगे तुम्हें वही जो उच्चतम है" ~ आचार्य प्रशांत

गुंडागर्दी हम ऐसे लोग हैं। हमें अपराधियों को पूजना है। तो जब हमें किसी को पूजना होता है तो उसके चरित्र में भी हम अपराध के छींटे डालेंगे ही डालेंगे। क्योंकि अपराध नहीं है तो हमसे पूजा ही नहीं जाएगा।

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सर, क्या आप शादी के खिलाफ़ हैं? विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी और प्रश्नकर्ता के बीच शादी और समाज के संबंध पर गहन चर्चा होती है। प्रश्नकर्ता ने आचार्य जी से पूछा कि क्या शादी एक security का बंधन नहीं है, खासकर महिलाओं के लिए। आचार्य जी ने स्पष्ट किया कि society की स्थिति और उसके नियमों को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शादी एक कर्म है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य इंसान को better बनाना होना चाहिए। आचार्य जी ने यह भी बताया कि युवा लोग शादी के निर्णय लेते समय अपनी consciousness के स्तर को नहीं समझते। वे chemical stimulation और social pressure के कारण जल्दी में निर्णय लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शादी में sex एक केंद्रीय तत्व है, और इसे समझना जरूरी है। प्रश्नकर्ता ने बताया कि उनके दोस्त आचार्य जी के विचारों को गलत समझते हैं। आचार्य जी ने कहा कि love को प्यार ही रहने देना चाहिए और किसी नाम का बंधन नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने freedom और समझदारी के महत्व पर जोर दिया, यह बताते हुए कि समझदारी के साथ freedom आती है, लेकिन लोग अक्सर इससे डरते हैं।

सर, क्या आप शादी के खिलाफ़ हैं? विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी और प्रश्नकर्ता के बीच शादी और समाज के संबंध पर गहन चर्चा होती है। प्रश्नकर्ता ने आचार्य जी से पूछा कि क्या शादी एक security का बंधन नहीं है, खासकर महिलाओं के लिए। आचार्य जी ने स्पष्ट किया कि society की स्थिति और उसके नियमों को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शादी एक कर्म है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य इंसान को better बनाना होना चाहिए। आचार्य जी ने यह भी बताया कि युवा लोग शादी के निर्णय लेते समय अपनी consciousness के स्तर को नहीं समझते। वे chemical stimulation और social pressure के कारण जल्दी में निर्णय लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शादी में sex एक केंद्रीय तत्व है, और इसे समझना जरूरी है। प्रश्नकर्ता ने बताया कि उनके दोस्त आचार्य जी के विचारों को गलत समझते हैं। आचार्य जी ने कहा कि love को प्यार ही रहने देना चाहिए और किसी नाम का बंधन नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने freedom और समझदारी के महत्व पर जोर दिया, यह बताते हुए कि समझदारी के साथ freedom आती है, लेकिन लोग अक्सर इससे डरते हैं।

इतनी सारी तो तुम शर्तें रखते हो, फिर कहते हो - “कोई मिल नहीं रही।” कोई तुमसे ज़्यादा समझदार हो तो कहोगे - “क्या जोरू का गुलाम
इतनी सारी तो तुम शर्तें रखते हो, फिर कहते हो - “कोई मिल नहीं रही।” कोई तुमसे ज़्यादा समझदार हो तो कहोगे - “क्या जोरू का गुलाम बनना है!” Sexy भी होनी चाहिए, अपनी जाति की भी हो, माँ को भी पसंद आए। कम पढ़ी-लिखी हो तो समस्या, ज़्यादा पढ़ी-लिखी हो तो भी समस्या। तुमने एक बहुत narrow range बना रखी है और चाहते हो उसमें fit बैठने वाली कोई मिल जाए। सारी समस्या तुम्हारे खोपड़े की बनाई कहानियों में है। यही कहानियाँ इंसान को इंसान से, बूढ़े को जवान से, और नर को नारी से नहीं मिलने देतीं। ये कहानियाँ हटा दो, पाओगे कि सहज ही नए-नए लोग तुम्हारे जीवन में आ रहे हैं। ~ आचार्य प्रशांत

Acharya Prashant - إحصائيات وتحليلات قناة تيليجرام @withacharyaprashant