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Official Telegram Channel of Acharya Prashant. - YouTube: youtube.com/acharyaprashant - Facebook: https://www.facebook.com/AdvaitAcharyaPrashant

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📈 تحلیل کانال تلگرام Acharya Prashant

کانال Acharya Prashant (@withacharyaprashant) در بخش زبانی هندی بازیگری فعال است. در حال حاضر جامعه شامل 16 352 مشترک است و جایگاه 5 078 را در دسته دین و مذهبی و رتبه 24 615 را در منطقه الهند دارد.

📊 شاخص‌های مخاطب و پویایی

از زمان ایجاد در невідомо، پروژه رشد سریعی داشته و 16 352 مشترک جذب کرده است.

بر اساس آخرین داده‌ها در تاریخ 24 سپتامبر, 2026، کانال فعالیت پایداری دارد. در ۳۰ روز گذشته تغییر اعضا برابر -35 و در ۲۴ ساعت گذشته برابر 3 بوده و همچنان دسترسی گسترده‌ای حفظ شده است.

  • وضعیت تأیید: تأیید شده (به صورت رسمی توسط تلگرام)
  • نرخ تعامل (ER): میانگین تعامل مخاطب 6.36% است و در ۲۴ ساعت نخست پس از انتشار، محتوا معمولاً 4.01% واکنش نسبت به کل مشترکان کسب می‌کند.
  • دسترسی پست‌ها: هر پست به طور میانگین 1 039 بازدید دریافت می‌کند. در اولین روز معمولاً 656 بازدید جمع‌آوری می‌شود.
  • واکنش‌ها و تعامل: مخاطبان به‌طور فعال حمایت می‌کنند؛ میانگین واکنش به هر پست 10 است.
  • علایق موضوعی: محتوا بر موضوعات کلیدی مانند आचार्य, प्रशांत, सत्र, अप्रैल, जीवन تمرکز دارد.

📝 توضیح و سیاست محتوایی

نویسنده این فضا را محل بیان دیدگاه‌های شخصی توصیف می‌کند:
“Official Telegram Channel of Acharya Prashant. - YouTube: youtube.com/acharyaprashant - Facebook: https://www.facebook.com/AdvaitAcharyaPrashant”

به لطف به‌روزرسانی‌های پرتکرار (آخرین داده در تاریخ 25 سپتامبر, 2026)، کانال همواره به‌روز و دارای دسترسی بالاست. تحلیل‌ها نشان می‌دهد مخاطبان به‌طور فعال با محتوا تعامل دارند و آن را به نقطه اثرگذاری مهم در دسته دین و مذهبی تبدیل کرده‌اند.

16 352
مشترکین
+324 ساعت
-37 روز
-3530 روز
آرشیو پست ها
धर्म से ज़्यादा मुक्तिप्रद कुछ नहीं और धर्म से बड़ा बंधन भी कुछ नहीं समझे बिना बस कर्मकांड निभाना, क्या यही धर्म है? धर्म न तो जानने की, न समझने की इच्छा बची है, लोग बस दायित्व निभाते चले जा रहे हैं। बिना समझे पूजा पाठ करने का ही नतीजा है कि अब एक पीढ़ी कहती है, “इन चीज़ों का कोई अर्थ नहीं, इसलिए हमें ये करने ही नहीं चाहिए।” न पूजा, न प्रार्थना, न भजन कीर्तन, इस पीढ़ी को दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उन्होंने अपने माता पिता, अपने घर में यही देखा है कि बिना समझे बस रीति निभाई जा रही है। धर्म से बड़ी कोई मुक्ति नहीं, और धर्म से बड़ा कोई बंधन भी नहीं, अफ़सोस की बात है कि हमने धर्म को ही बंधन बना डाला है।

Woman, Forget That You Are a Woman Why do we say "male achiever" or "female achiever" at all? Was Marie Curie a woman scientist, or just a scientist? If your flaws hurt someone, do you fix them, or push them away? Is gender equality enough, or should gender become irrelevant?

अमीरों को देखता हूँ तो ख़ुद से नफ़रत होती है! विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत और एक छोटे शहर के व्यक्ति के बीच गहन चर्चा होती है, जिसमें money, self-esteem, और social identity जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की जाती है। व्यक्ति अपने गांव की poverty और inferiority complex के बारे में बताता है, यह महसूस करते हुए कि अमीर समाज में आने के बाद उसे खुद से नफरत होने लगी। आचार्य प्रशांत उसे समझाते हैं कि पैसे का महत्व है, लेकिन यह self-worth और पहचान का आधार नहीं हो सकता। वे बताते हैं कि असली अमीरी वह है जिसमें व्यक्ति अपने भीतर की inner fulfillment को पहचानता है, न कि बाहरी दिखावे पर निर्भर रहता है। आचार्य प्रशांत यह भी बताते हैं कि पैसे से मिली ताकत अक्सर fear और slavery का कारण बनती है।वे प्रेरित करते हैं कि व्यक्ति को अपनी जड़ों पर गर्व करना चाहिए और समाज में अपनी पहचान को मजबूत करना चाहिए। इस वीडियो में self-awareness, wisdom, और personal growth पर ज़ोर दिया गया है, जो किसी को भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

जिन्हें जीवन में वाकई कुछ नया करना हो, वो अपना माहौल जितना बदल सकते हों, बदल दें। किसने तुमसे कह दिया कि तुम किसी एक ही जगह क
जिन्हें जीवन में वाकई कुछ नया करना हो, वो अपना माहौल जितना बदल सकते हों, बदल दें। किसने तुमसे कह दिया कि तुम किसी एक ही जगह के बंधक हो इस पृथ्वी पर? तुम जहाँ रहते हो, वहाँ तुम्हें ऐसा क्या मिल रहा है कि तुम्हें वहीं पड़े रहना है? जीवन में ऊँचा स्थान मुक्ति का है, चेतना का है। भावनाएँ बहुत पीछे की बात हैं। और भारत ने यह बड़ी गलती करी है। हमारे पिछड़ेपन के बड़े से बड़े कारणों में यह एक है। यूरोप की इतनी तरक्की क्यों हुई? क्योंकि वो लोग निकल-निकलकर पूरी दुनिया पर छा गए। और एक हमारा हिंदुस्तानी मन है, जो कहता है - “हम तो अपने ही शहर में रहेंगे, नहीं निकलेंगे बाहर।” ~ आचार्य प्रशांत

"प्रेम की शर्त तो यही होती है कि बात तुम्हें भले ही कड़वी लगे पर देंगे तुम्हें वही जो उच्चतम है" ~ आचार्य प्रशांत

गुंडागर्दी हम ऐसे लोग हैं। हमें अपराधियों को पूजना है। तो जब हमें किसी को पूजना होता है तो उसके चरित्र में भी हम अपराध के छींटे डालेंगे ही डालेंगे। क्योंकि अपराध नहीं है तो हमसे पूजा ही नहीं जाएगा।

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सर, क्या आप शादी के खिलाफ़ हैं? विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी और प्रश्नकर्ता के बीच शादी और समाज के संबंध पर गहन चर्चा होती है। प्रश्नकर्ता ने आचार्य जी से पूछा कि क्या शादी एक security का बंधन नहीं है, खासकर महिलाओं के लिए। आचार्य जी ने स्पष्ट किया कि society की स्थिति और उसके नियमों को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शादी एक कर्म है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य इंसान को better बनाना होना चाहिए। आचार्य जी ने यह भी बताया कि युवा लोग शादी के निर्णय लेते समय अपनी consciousness के स्तर को नहीं समझते। वे chemical stimulation और social pressure के कारण जल्दी में निर्णय लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शादी में sex एक केंद्रीय तत्व है, और इसे समझना जरूरी है। प्रश्नकर्ता ने बताया कि उनके दोस्त आचार्य जी के विचारों को गलत समझते हैं। आचार्य जी ने कहा कि love को प्यार ही रहने देना चाहिए और किसी नाम का बंधन नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने freedom और समझदारी के महत्व पर जोर दिया, यह बताते हुए कि समझदारी के साथ freedom आती है, लेकिन लोग अक्सर इससे डरते हैं।

सर, क्या आप शादी के खिलाफ़ हैं? विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी और प्रश्नकर्ता के बीच शादी और समाज के संबंध पर गहन चर्चा होती है। प्रश्नकर्ता ने आचार्य जी से पूछा कि क्या शादी एक security का बंधन नहीं है, खासकर महिलाओं के लिए। आचार्य जी ने स्पष्ट किया कि society की स्थिति और उसके नियमों को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शादी एक कर्म है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य इंसान को better बनाना होना चाहिए। आचार्य जी ने यह भी बताया कि युवा लोग शादी के निर्णय लेते समय अपनी consciousness के स्तर को नहीं समझते। वे chemical stimulation और social pressure के कारण जल्दी में निर्णय लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शादी में sex एक केंद्रीय तत्व है, और इसे समझना जरूरी है। प्रश्नकर्ता ने बताया कि उनके दोस्त आचार्य जी के विचारों को गलत समझते हैं। आचार्य जी ने कहा कि love को प्यार ही रहने देना चाहिए और किसी नाम का बंधन नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने freedom और समझदारी के महत्व पर जोर दिया, यह बताते हुए कि समझदारी के साथ freedom आती है, लेकिन लोग अक्सर इससे डरते हैं।

इतनी सारी तो तुम शर्तें रखते हो, फिर कहते हो - “कोई मिल नहीं रही।” कोई तुमसे ज़्यादा समझदार हो तो कहोगे - “क्या जोरू का गुलाम
इतनी सारी तो तुम शर्तें रखते हो, फिर कहते हो - “कोई मिल नहीं रही।” कोई तुमसे ज़्यादा समझदार हो तो कहोगे - “क्या जोरू का गुलाम बनना है!” Sexy भी होनी चाहिए, अपनी जाति की भी हो, माँ को भी पसंद आए। कम पढ़ी-लिखी हो तो समस्या, ज़्यादा पढ़ी-लिखी हो तो भी समस्या। तुमने एक बहुत narrow range बना रखी है और चाहते हो उसमें fit बैठने वाली कोई मिल जाए। सारी समस्या तुम्हारे खोपड़े की बनाई कहानियों में है। यही कहानियाँ इंसान को इंसान से, बूढ़े को जवान से, और नर को नारी से नहीं मिलने देतीं। ये कहानियाँ हटा दो, पाओगे कि सहज ही नए-नए लोग तुम्हारे जीवन में आ रहे हैं। ~ आचार्य प्रशांत

इतनी सारी तो तुम शर्तें रखते हो, फिर कहते हो - “कोई मिल नहीं रही।” कोई तुमसे ज़्यादा समझदार हो तो कहोगे - “क्या जोरू का गुलाम
इतनी सारी तो तुम शर्तें रखते हो, फिर कहते हो - “कोई मिल नहीं रही।” कोई तुमसे ज़्यादा समझदार हो तो कहोगे - “क्या जोरू का गुलाम बनना है!” Sexy भी होनी चाहिए, अपनी जाति की भी हो, माँ को भी पसंद आए। कम पढ़ी-लिखी हो तो समस्या, ज़्यादा पढ़ी-लिखी हो तो भी समस्या। तुमने एक बहुत narrow range बना रखी है और चाहते हो उसमें fit बैठने वाली कोई मिल जाए। सारी समस्या तुम्हारे खोपड़े की बनाई कहानियों में है। यही कहानियाँ इंसान को इंसान से, बूढ़े को जवान से, और नर को नारी से नहीं मिलने देतीं। ये कहानियाँ हटा दो, पाओगे कि सहज ही नए-नए लोग तुम्हारे जीवन में आ रहे हैं। ~ आचार्य प्रशांत

भूल हो रही है तो तत्क्षण कदम रोक दो। जो गलत जीवन जितना ज़्यादा जी गया, उसके लिए वापस लौटना उतना मुश्किल होता जाता है। इसीलिए जिस क्षण जानो कि भूल हो रही है, उसी समय वापस लौट पड़ो। जितनी देर तक अपने आप को भ्रम में निवेशित रखोगे, उतना मुश्किल होता जाएगा भ्रम से वापस लौटना। ~ आचार्य प्रशांत

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लड़की के कौमार्य को लेकर चिंता। दुनिया बिल्कुल तुम्हारे घर में, तुम्हारे व्यक्तिगत मसलों में, तुम्हारे बिस्तर में, तुम्हारे शरीर के अंदर घुस आएगी। तुम इनको कितनी अनुमति दे सकते हो? कहीं पर तो एक मर्यादा की रेखा खींचनी पड़ेगी न कि इससे ज़्यादा मत पूछना। न तुम्हारे लिए पूछना उचित है, न हमारे लिए बताना उचित है।

"समाज, संस्कृति, सरकार के प्रचार को आँखें बंद करके मान लेना भी अंधविश्वास है" ~ आचार्य प्रशांत

She Looked at Her Fear. She Found Something Else || Acharya Prashant (2025) - Are old fears still controlling your choices? - What are you actually afraid of? - Why do we carry the past into the present? - Do we seek approval because of our fears? 🎥 Watch here: https://youtu.be/jehajguSHc0?si=DkfbAuC10CTYEzqF

बेचैन युवा की भटकती जवानी - पहुँचना कहाँ है? - हम जितना पा लेते हैं, बेचैनी उतनी कम क्यों नहीं होती? - अच्छी नौकरी, अच्छा घर, फिर भी अंदर की खाली जगह भर पाती है क्या? - हमारी पसंद, हमारे सपने, क्या यह सच में हमारे अपने हैं? पूरा वीडियो देखें: https://youtu.be/qziFozohZmE?si=Bk7PBPhNCs29xxXH

Is Patriarchy Anti-Men? Patriarchy is a great bondage. Patriarchy is a state of mind. And what is it's state of mind? Patriarchy is to believe that your job in life is determined by your gender. That is patriarchy. Now, patriarchy is oppressive both ways. Men have been told that your purpose, your station, your movement, your activities, your thoughts, your emotions - everything have to be determined by your gender. And women have been told much the same thing, right? So, it's not men versus women. It's wisdom versus ignorance. Obviously, men are the ones who exploit and oppress. But if you'll go a little deeper into it, as Vedanta encourages you to, you will say, "No, it's not that men are oppressing women. There is a common enemy, and the name of that common enemy is ignorance." It is because of ignorance that men continue to be men and women continue to be women.

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Why Should I Read the Gita? It’s Outdated! Context: - In this video, Acharya Prashant explains why ancient wisdom like the Upanishads and Vedanta remain relevant even thousands of years later. While technology, society, and culture keep changing, fundamental human problems like fear, greed, attachment, and suffering remain largely the same. He explores what makes wisdom timeless, how to distinguish it from outdated beliefs and rituals, and why ancient teachings must be questioned and understood rather than blindly followed.