uk
Feedback
HISTORY PDF(JRF Academy)

HISTORY PDF(JRF Academy)

Відкрити в Telegram

Any problem @idrish_mansuri143 पोल प्रश्न के लिए क्लिक करे लिंक https://t.me/jrfacademywithidrishmansuri यूजीसी नेट टीजीटी पीजीटी असिस्टेंट प्रोफेसर आदि इतिहास परीक्षा के टेस्ट ज्वाइन करने के लिए संपर्क करे। ऑनर - इदरीस मंसूरी (MA B.ed नेट JRF इतिहास)

Показати більше
4 310
Підписники
-224 години
-57 днів
-2030 день
Залучення підписників
липень '26
липень '26
+21
в 2 каналах
червень '26
+60
в 2 каналах
Get PRO
травень '26
+78
в 2 каналах
Get PRO
квітень '26
+51
в 2 каналах
Get PRO
березень '26
+19
в 2 каналах
Get PRO
лютий '26
+41
в 2 каналах
Get PRO
січень '26
+79
в 4 каналах
Get PRO
грудень '25
+23
в 1 каналах
Get PRO
листопад '25
+38
в 0 каналах
Get PRO
жовтень '25
+54
в 3 каналах
Get PRO
вересень '25
+97
в 4 каналах
Get PRO
серпень '25
+61
в 3 каналах
Get PRO
липень '25
+72
в 4 каналах
Get PRO
червень '25
+79
в 2 каналах
Get PRO
травень '25
+58
в 1 каналах
Get PRO
квітень '25
+65
в 3 каналах
Get PRO
березень '25
+57
в 3 каналах
Get PRO
лютий '25
+86
в 3 каналах
Get PRO
січень '25
+129
в 3 каналах
Get PRO
грудень '24
+184
в 3 каналах
Get PRO
листопад '24
+141
в 3 каналах
Get PRO
жовтень '24
+173
в 6 каналах
Get PRO
вересень '24
+146
в 3 каналах
Get PRO
серпень '24
+421
в 5 каналах
Get PRO
липень '24
+579
в 3 каналах
Get PRO
червень '24
+561
в 4 каналах
Get PRO
травень '24
+608
в 6 каналах
Get PRO
квітень '24
+622
в 4 каналах
Get PRO
березень '24
+748
в 4 каналах
Get PRO
лютий '24
+641
в 3 каналах
Get PRO
січень '24
+142
в 0 каналах
Get PRO
грудень '23
+99
в 1 каналах
Get PRO
листопад '23
+17
в 1 каналах
Get PRO
жовтень '23
+18
в 1 каналах
Get PRO
вересень '23
+11
в 0 каналах
Get PRO
серпень '23
+45
в 0 каналах
Get PRO
липень '23
+22
в 0 каналах
Get PRO
червень '23
+16
в 0 каналах
Get PRO
травень '23
+31
в 0 каналах
Get PRO
квітень '23
+23
в 0 каналах
Get PRO
березень '23
+37
в 0 каналах
Get PRO
лютий '23
+37
в 0 каналах
Get PRO
січень '23
+53
в 0 каналах
Get PRO
грудень '22
+34
в 0 каналах
Get PRO
листопад '22
+94
в 0 каналах
Get PRO
жовтень '22
+27
в 0 каналах
Get PRO
вересень '22
+96
в 0 каналах
Get PRO
серпень '22
+95
в 0 каналах
Get PRO
липень '22
+126
в 0 каналах
Get PRO
червень '22
+225
в 0 каналах
Get PRO
травень '22
+93
в 0 каналах
Get PRO
квітень '22
+62
в 0 каналах
Get PRO
березень '22
+92
в 0 каналах
Get PRO
лютий '22
+236
в 0 каналах
Дата
Залучення підписників
Згадування
Канали
07 липня+2
06 липня+4
05 липня+7
04 липня+1
03 липня+3
02 липня+3
01 липня+1
Дописи каналу
Beyond_The_World_Of_Apu_The_Films_Of_Satyajit_Ray_John_W_Hood_2008.pdf30.50 MB

2
Digital Rare Book: Beyond the World of Apu The Films of Satyajit Ray -John H. Wood Published in 2008
Digital Rare Book: Beyond the World of Apu The Films of Satyajit Ray -John H. Wood Published in 2008
39
3
Jawaharlal Nehru - An Autobiography.pdf
40
4
Немає тексту...
38
5
Selections from Nehru's Discovery of India.pdf
34
6
Digital Rare Book: Selections from Nehru's Discovery of India by Francis Fanthome & Shaw © Sonia Gandhi, 1995
Digital Rare Book: Selections from Nehru's Discovery of India by Francis Fanthome & Shaw © Sonia Gandhi, 1995
35
7
Glimpses of World History -Jawaharlal Nehru.pdf
36
8
Digital Rare Book: Glimpses of World History by Jawaharlal Nehru Originally Published: 1934
Digital Rare Book: Glimpses of World History by Jawaharlal Nehru Originally Published: 1934
38
9
UP PGT FINAL.ANSWER KET WITH QUESTIONS PAPER https://t.me/Ramsing2023
108
10
UPPGT 2022 फाइनल परिणाम व कटऑफ जारी✍️ ■ Check Result- Click Here
170
11
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सर्वप्रथम मुस्लिम अध्यक्ष थे UPPSC (Pre), 1995, 2005 Uttarakhand UDA/LDA (Pre), 2007
199
12
किसने कहा था "कांग्रेस आंदोलन न तो लोगों द्वारा प्रेरित था, न ही यह उनके द्वारा सोचा या योजनाबद्ध किया गया था" 47th BPSC (Pre), 2005
196
13
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम निर्वाचित यूरोपीय अध्यक्ष था UPRO/ARO (Mains), 2013
185
14
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष सरोजिनी नायडू थीं। 2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष बदरुद्दीन तैयबजी थे।
166
15
​किसने कांग्रेस को 'सूक्ष्मदर्शीय अल्पसंख्यक जनता का प्रतिनिधि' बताते हुए उसका मज़ाक उड़ाया था UPPSC (Mains), 2012
144
16
Немає тексту...
233
17
#historymatters इतिहास की अमूल्य धरोहर: 1853 की रानी लक्ष्मीबाई की दुर्लभ पेंटिंग मिली दतिया में भारतीय इतिहास और विरासत के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण खोज है। दतिया के एक सरकारी अभिलेखागार से वर्ष 1853 की रानी लक्ष्मीबाई की एक दुर्लभ पेंटिंग प्राप्त हुई है, जिसे विशेषज्ञ अब तक की सबसे प्राचीन समकालीन चित्रकृतियों में से एक मान रहे हैं। यह पेंटिंग प्राकृतिक रंगों और वास्तविक सोने की चमक से तैयार की गई थी तथा माना जाता है कि इसे रानी के जीवनकाल में ही बनाया गया था। विशेष बात यह है कि इस चित्र में रानी लक्ष्मीबाई के साथ उनके दत्तक पुत्र दामोदर राव भी दिखाई देते हैं। इतिहासकारों के अनुसार यह चित्र किसी कल्पना पर आधारित नहीं, बल्कि रानी के सामने बैठाकर बनाया गया था, जिससे इसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता और भी बढ़ जाती है। यह दुर्लभ पेंटिंग ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत अभिलेखों के संरक्षण कार्य के दौरान सामने आई और अब इसे सुरक्षित रूप से भोपाल पुरातत्व संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। ऐसी खोजें केवल एक चित्र नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास के जीवंत प्रमाण हैं। हमारी सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और उनका अध्ययन आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। #RaniLakshmibai #IndianHistory #Datia #BhopalMuseum #Heritage #History #भारत_का_इतिहास #रानी_लक्ष्मीबाई #HistoricalDiscovery
227
18
इस संदर्भ में गोविंद पानसरे लिखते हैं कि “ छत्रपति शिवाजी महाराज के मूल पत्रों में मान्यता प्राप्त अनेक पत्र उपलब्ध हैं। इनमें से एक पत्र में शिवाजी ने स्वयं को कभी ‘गो-ब्राह्मण प्रतिपालक’ नहीं कहा है। शिवाजी के समकालीनों द्वारा शिवाजी को लिखे गए पत्र मौजूद हैं। उन पत्रों में किसी एक में भी किसी ने शिवाजी को ‘ गो-ब्राह्मण प्रतिपालक’ संबोधित नहीं किया है।.. फिर ये ‘ गो-ब्राह्मण- प्रतिपालक’ आया कहां से? ( वही, पृ.56) वे आगे उदाहरणों सहित बताते हैं कि शिवाजी के राज्य में ब्राह्मणों को विशेष सुविधा दी गई थी, ऐसा कहीं दिखाई नहीं देता। बल्कि इसके उलट एक पत्र में किसी अपराधी ब्राह्मण के बारे में शिवाजी लिखते हैं कि ब्राह्मण होने के नाते किसी रियायत की उम्मीद रखता है, लेकिन ऐसा नहीं होगा। जिस प्रकार शत्रुओं का हश्र होता है, वैसा ही परिणाम तुम्हें भी भुगतना पड़ेगा। हां यह जरूर है कि ब्राह्मणों ने शिवाजी का साम्राज्य खत्म हो इसके लिए कोटि चंडी यज्ञ किया था। यह यज्ञ औरंगजेब के मनसबदार जयसिंह की जीत के लिए किया गया था। ब्राह्मणों ने शिवाजी के राज्याभिषेक का विरोध किया था, यह जगजाहिर तथ्य है। यह किताब बताती है कि उस समय शिवाजी को ‘निम्न कुल’ का बताने वाले सिर्फ ब्राह्मण नहीं थे, बल्कि स्वयं को क्षत्रिय मानने वाले 96 कुलों के मराठा सरदार भी शिवाजी को राजा के रूप में स्वीकार नहीं करते थे। ये लोग शिवाजी को ‘निम्न कुल’ का मानते थे। इस किताब में गोविंद पानसरे जोतिराव फुले द्वारा शिवाजी के बारे में लिखे गीत ( पोवाड़ा) का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि इस पोवाड़ा में फुले शिवाजी को किसानों का अलंकार कहते हैं और गीत के समापन में उन्हें शूद्र पूत (जोतीराव फुले ने गाया, पूत शूद्रों का) कहते हैं। किताब का अंत करते हुए गोविंद पानसरे लिखते हैं कि “ सर्वसाधारण लोगों को शिवाजी ने असाधारण बनाया, तत्पश्चात इन सबों ने मिलकर बहुत बड़ा असाधारण कार्य किया।
185
19
शिवाजी का महिलाओं के प्रति सम्मान के इस रूख ने शिवाजी महाराज के राज्य में महिलाओं को पहली बार सुरक्षित बना दिया। उन्हें ताकतवरों के बलात्कार के भय से मुक्त कर दिया। लोगों में यह संदेश गया कि ऐसा राज्य भी हो सकता, ऐसा भी राजा हो सकता है, जिसके राज्य में महिलाएं ताकतवरों से सुरक्षित हों। बलात्कार या किसी के यौन हवस का शिकार होना उनकी नियति नहीं है। कोई व्यक्ति या राजा ऐसे काम तभी कर सकता है, जब उसका चरित्र महान हो, उसके उच्च आदर्श और जीवन-मूल्य हों, इन आदर्शों और जीवन-मूल्यों को व्यवहार में उतारने का माद्दा हो। सबसे बड़ी बात यह काम वही व्यक्ति या राजा कर सकता है, जो बहुत गहरे स्तर पर मानवीय हो, जिसकी इंसानियत उच्च दर्जे की हो। शिवाजी ऐसे ही थे। महिलाओं के प्रति सम्मान का उदाहरण तो केवल एक बात है, अपनी प्रजा और राज-काज के प्रति उन्होंने जो मानदंड जीवन के अन्य क्षेत्रों में कायम किए थे, वे इसकी पुष्टि करते हैं। लोक कल्याणकारी राजा के रूप में शिवाजी- शिवाजी के राज्य से पहले जिसकी लाठी उसकी भैंस जैसी स्थिति थी। प्रजा के संपत्ति, उसका घर, खेत, परिवार और बहन-बेटी के साथ कोई भी ताकतवर मनमाना कर सकता था। उसकी फसलों को नष्ट कर सकता था, उनके गांवों को तबाह कर सकता था। मेहनतकश किसान और मजदूर विपन्नता और गरिमाहीन जिंदगी जीने को विवश थे। ऐसी परिस्थिति में शिवाजी जैसा व्यक्ति सामने आता है, जिसके बारे में गोविंद पानसरे लिखते हैं कि “उस जमाने में केवल ईश्वर की कृपादृष्टि के सहारे तमाम विपत्तियां भोगने वाली प्रजा के बीच सत्यपुरुष जन्म लेता है और कठोर आदेश देता है कि “ बिना मूल्य चुकाए जनता से अन्य का एक भी दाना न लिया जाए, अगर सैनिकों के घोड़ों को दाना-पानी की आवश्यकता पड़ी, तो नगद पैसा देकर खरीदा जाना चाहिए।” ( पृ.28-29) केवल आदेश नहीं दिया जाता था, बल्कि कठोरता से उस पर अमल किया जाता था। अपने राज्य के लोगों के प्रति ऐसी अपूर्व संवेदना ही ने लोगों के दिलों में शिवाजी के प्रति अपूर्व संवेदना और निष्ठा का जन्म दिया। शिवाजी ने प्रजा के किसी भी सामान को लेने या नुकसान पहुंचाने को रोकने की पूरी व्यवस्था की। उनके पेड़, उनकी लकड़ी, उनके घास-फूस भी कोई भुगतान किए बिना और बिना उनकी इजाजत के ले नहीं सकता था। शिवाजी का अपने अधिकारियों, सैनिकों, कारिंदों और अन्य व्यवस्थापकों के लिए आदेश था कि “ आपकी जेब में पैसा है, इच्छानुसार बाजार से अन्न-धान्य, पैसे देकर खरीदिए, यदि ऐसा न किया तो प्रजा को पीड़ा पहुंचेगी, लिहाजा उन्हें लगेगा कि इससे तो मुगल ही ठीक थे।” ( पृ. 30) इस किताब में उद्योग-धंधों के विकास और विस्तार के लिए शिवाजी ने क्या किया, इसका उदाहरण सहित वर्णन है। शिवाजी का धार्मिक दृष्टिकोण- इस संदर्भ में गोविंद पानसरे लिखते हैं कि “ शिवाजी स्वयं हिंदू थे व धर्म के प्रति आस्था रखते थे। किंतु एक राजा के रूप में उन्होंने राज्य की प्रजा के बीच धर्म के आधार पर कभी भेदभाव नहीं किया। मुसलमानों का जुदा धर्म होने के बावजूद पक्षपातपूर्ण बर्ताव नहीं किया।” (पृ. 51) आगे वे लिखते हैं कि “ शिवाजी जी ने सैनिकों के लिए ऐसा कठोर आदेश जारी किया था कि .. मस्जिदों, कुरआन अथवा किसी भी स्त्री को बेइज्जत न किया जाए। यदि कोई कुरआन ग्रंथ कहीं मिल जाए, तो सम्मानपूर्वक उसे अपने मुसलमान नौकर के हवाले कर दें। कभी भी और कहीं भी कोई मुस्लिम स्त्री या हिंदू स्त्री पर तथापि उसकी सुरक्षा की खातिर उसके किसी रिश्तेदार को सौंपे जाने तक शिवाजी स्वयं उसकी फिक्र किया करते थे।” (पृ, 52) शिवाजी के सरदार और सैनिक केवल हिंदू ही नहीं थे बल्कि मुसलमान सैनिकों का भी समावेश था। छत्रपति शिवाजी महाराज को अपने राज्य की स्थापना के दौरान अनेकों लड़ाइयां लड़नी पड़ीं, ज्यादातर राजा मुस्लिम थे, तो उनके खिलाफ लड़ना ही था। लेकिन शिवाजी को मराठों के खिलाफ भी अनेक लड़ाइयां लड़नी पड़ीं। शिवाजी के धार्मिक दृष्टिकोण के बारे में वे लिखते हैं कि “ शिवाजी के कालखंड पर यदि गौर से दृष्टिपात किया जाए तो उनके विचार और नीति अनन्य असाधारण तो हैं ही, क्योंकि धर्म लोगों के जीवन पर गहरा प्रभाव दिखाई देता है, लेकिन स्वयं के धर्म की ही तरह दूसरों का धर्म भी उच्च और श्रेष्ठ है, हालांकि प्रार्थना पद्धतियां अलग-अलग होने के बावजूद उनका उद्देश्य एक ही है-यह महत्व का सिद्धांत शिवाजी ने प्रतिपादित किया। अकबर, दारा शिकोह, इब्राहिम आदिलशाह के विचार भी इससे अलग नहीं थे।” ( पृ. 55) शिवाजी ‘गो-ब्राह्मण प्रतिपालक’ थे? इस झूठ का पर्दाफाश
142
20
शिवाजी लोगों से कहने लगे और लोगों का इसका अहसास होने लगा। जमींदारों की गतिविधियों पर अंकुश लगाया गया। उन्हें कैसे बर्ताव करने चाहिए कैसे नहीं करने चाहिए इसके नियम बनाए गए।” ( पृ. 20) जन/ प्रजा हितैषी राजा के रूप में शिवाजी- गोविंद पानसरे लिखते हैं कि वीरान गांवों का शिवाजी ने नए सिरे से पुनर्वास किया। जमीन जोतने और बोने के लिए किसानों को आवश्यक बीज और उपकरण मुहैया कराया। शुरूआती चार-पांच वर्षों तक बहुत ही कम कर वसूला गया। शिवाजी ने मनमाने ढंग से किसानों से कर/महसूल और बेगारी कराने की परंपरा को खत्म कर दिया। जमीन की नपाई कराई गई। जमीनों पर महसूल निश्चित किया गया है। कोई भी उससे अधिक नहीं वसूल सकता था। अकाल के समय लगान माफ कर दिया जाता था। इस स्थिति में किसानों की राज्य द्वारा मदद की जाती थी। पाटिल, कुलकर्णी, मिरासदारों, जमींदारों और देशमुखों की मनमानी पर शिवाजी ने पाबंदी लगा दी। मनमानी के खिलाफ सख्त आदेश पारित किया गया है, कइयों को दंडित किया गया। फसल कितनी पैदा हुई है, इस आधार पर ही कर लिया जाएं, इसे उन्होंने सुनिश्चित बनाया। गोविंद पानसरे लिखते हैं कि वेतनदारों और जमींदारों के दुष्चक्र को महाराज ( शिवाजी) ने तोड़ दिया। इसका नतीजा क्या हुआ, इस संदर्भ में अपनी किताब में कॉमरेड गोविंद पानसरे लिखते हैं कि “ प्रजा सुखी और स्वतंत्र हो गई। साथ ही जनता को गुलाम बनाने वाले देशमुख और देशपांडेय नामक ग्राम अधिकारियों का रुतबा कम करके उन्होंने भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त न हों, ऐसा आदेश जारी किया गया।” ( पृ.24) स्त्रियों के सम्मान के बारे में शिवाजी महाराज का दृष्टिकोण और कदम- कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं- 1- जब एक पाटिल ने गांव के गरीब किसान की बेटी को अगवा कर उसके साथ बलात्कार किया- एक गांव में एक पाटिल ने गांव के एक किसान की बेटी को दिनदहाड़े अगवा कर लिया। उसके साथ बलात्कार किया। लड़की शर्म-हया बस आत्महत्या कर ली। सारा गांव पाटिल के डर से सब कुछ चुपचाप देखता रहा। किसी ने चूं तक नहीं की, क्योंकि यह कोई नई बात नहीं थी। यह सैकड़ों सालों से होता ही आ रहा था। पाटिलों के लिए गांव की बहु-बेटियां उसी तरह उसके इच्छानुसार इस्तेमाल की चीज थीं, जैसे गांव की कोई अन्य संपत्ति। यह जानकारी शिवाजी महाराज तक पहुंची। इस घटना का सारा गांव साक्षी था। शिवाजी महाराज के आदेश पर उस पाटिल को बांधकर पुणे लाया गया। उसके हाथ-पैर तोड़ देने की सजा सुनाई गई। इस सजा को अमल में लाया गया। उस पाटिल के हाथ-पैर तोड़ दिए गए। शिवाजी ने अपने राज्य में संदेश दिया कि आइंदा ऐसा करने वाले को ऐसी ही या इससे कठोर सजा दी जाएगी। 2- जब शिवाजी ने अपने ही सेनापति को किलेदार (किले की मुखिया) सावित्री देसाई के साथ बलात्कार की सजा आंख फोड़ने का आदेश देकर और आजीवन जेल की सजा देकर दी- 1678 में छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति सकुजी गायकवाड़ ने शिवाजी राज्य के खिलाफ संघर्ष कर रही किलेदार सावित्री देसाई के खिलाफ किले पर कब्जा करने के लिए सत्ताइस दिनों तक संघर्ष किया। वह बहादुर स्त्री सत्ताइस दिनों तक किले की रक्षा करती रही। उसने डटकर शिवाजी की सेना और सेनापति का मुकाबला किया। सत्ताइस दिनों के बाद उसे पराजय का सामना करना पड़ा। शिवाजी के सेनापति सकुजी गायकवाड़ ने किले पर कब्जा कर लिया। सेनापति जीत के उन्माद में इतना नृशंस हो गया कि उसने बदले की भावना से सावित्रीबाई के साथ बलात्कार किया। जब यह सूचना शिवाजी तक पहुंची तो वे व्यथित हो गए, वे अपार दुख और पीड़ा से भर गए। उन्होंने अपने प्रिय और बहादुर सेनापति को भी इस अपराध के लिए नहीं बख्शा। सकुजी की दोनों आंखें फोड़ने और आजीवन जेल में रखने की सजा दी गई। सजा की तालीम हुई। सकुजी ने शिवाजी के इस आदेश-निर्देश का उल्लंघन किया कि युद्ध के दौरान भी या किसी भी अवसर पर हमारे राज्य या किसी भी राज्य की किसी भी स्त्री की गरिमा-सम्मान को रौंदने की कोई कोशिश नहीं करेगा। यदि करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। शिवाजी के बारे में प्रचलित इस कहानी को तो हम सभी जानते हैं कि जब कल्याण के मुस्लिम सूबेदार को हराकर शिवाजी की सेना सूबेदार की अद्वितीय सुंदरी बहू को लेकर दरबार में हाजिर की। तो शिवाजी ने उनका गरिमामय सम्मान किया फिर शिवाजी ने आदेश दिया कि उस महिला को सम्मान और गरिमा के साथ उनके परिवार तक पहुंचा दिया जाए। शिवाजी के पहले जब कोई राजा, सम्राट और नवाब की सेना युद्ध में जाते थे, तो उनके साथ अन्य सामग्रियों के साथ नर्तकी, महिलाओं का हरम और अन्य सेनापतियों-सैनिकों की रखैल महिलाएं जाती थीं। शिवाजी ने आदेश जारी करके इस पर रोक लगा दी।
122