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JRF Academy (PDF & Documents)

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https://t.me/Ramsing2023 इतिहास लेखन | ऍम.ए | प्राचीन संस्करण | सम्पूर्ण | 22.5 MB

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🤐 सिर्फ़ बोलने पर महिलाओं को चुप कराने के लिए लोहे का मुखौटा पहनाया जाता था। 🔩 इसे Scold’s Bridle या Brank कहा जाता था। यह लोहे से बना एक ऐसा उपकरण था जिसे सिर के चारों ओर कसकर बाँधा जाता था। इसके सामने का हिस्सा मुँह के आसपास होता था और कई उदाहरणों में मुँह के भीतर धातु की एक पट्टी या जीभ को दबाने वाला हिस्सा भी लगा होता था। इसका उद्देश्य बोलना रोकना या बोलना बेहद कठिन और पीड़ादायक बना देना था। 📜 इसका इस्तेमाल ब्रिटेन के कुछ हिस्सों में मुख्यतः 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच किए जाने से जोड़ा जाता है। इसके प्रयोग के प्रमाण विशेष रूप से इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के कुछ क्षेत्रों से मिलते हैं। 👩🏻‍⚖️ इसे उन लोगों विशेषकर महिलाओं के खिलाफ़ इस्तेमाल किया जाता था जिन्हें स्थानीय समाज या अधिकारियों की नज़र में “scold” माना जाता था। “Scold” ऐसे व्यक्ति के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द था जिसे झगड़ालू, अपमानजनक, विवाद करने वाला या अत्यधिक बोलने वाला माना जाता था। ⛓️ सज़ा केवल चुप कराने तक सीमित नहीं थी। किसी महिला के बोलने, बहस करने या सामाजिक व्यवहार को “अशोभनीय” मानने पर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए भी ऐसे उपकरण का इस्तेमाल किया जा सकता था। 🏛️ यानी सज़ा का एक हिस्सा उसके शरीर को नियंत्रित करना था और दूसरा हिस्सा उसे समाज के सामने शर्मिंदा करना। इस तरह यह सामाजिक नियंत्रण का भी साधन बन जाता था। 🔒 यह उस समय की सामाजिक व्यवस्था को भी दिखाता है, जहाँ “अच्छे” और “बुरे” व्यवहार की परिभाषाएँ तय करने का अधिकार समुदाय, स्थानीय अधिकारी और पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचनाएँ अपने हाथ में रखते थे। 🪞 जब किसी स्त्री के बोलने को “उपद्रव” और उसकी असहमति को “दुर्व्यवहार” मान लिया जाता है, तब उसे चुप कराना केवल एक व्यक्ति को चुप कराना नहीं रह जाता। वह उस सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने का साधन बन जाता है जिसमें स्त्री से एक निश्चित भूमिका में रहने की अपेक्षा की जाती है। ⚙️ लेकिन इसके पीछे वह सामाजिक मान्यता भी दिखाई देती है जो सदियों से चली आ रही है, जिसमें स्त्री को स्वतंत्र मनुष्य के बजाय पुरुष के स्वार्थ और कामना पूर्ति की वस्तु की तरह देखा जाता है। 🧠 और यहीं इतिहास एक गहरा सवाल बन जाता है। जब कोई व्यक्ति दूसरे मनुष्य की आवाज़ और स्वतंत्रता को अपने स्वार्थ और कामना के अनुसार नियंत्रित करना चाहता है, तो क्या समस्या केवल उस व्यवस्था में है?
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महिलाओं के साथ इतिहास में ऐसे ऐसे भी अत्याचार होते थे (खासकर यूरोप में ), देखकर ही सिर घूम जाता है । 😖
महिलाओं के साथ इतिहास में ऐसे ऐसे भी अत्याचार होते थे (खासकर यूरोप में ), देखकर ही सिर घूम जाता है । 😖
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🔎 दामोदर धर्मानंद कोसांबी: जब एक गणितज्ञ ने सिक्कों में इतिहास पढ़ा 🪙 एक पुराने सिक्के का वजन आपको इतिहास के बारे में क्या बता सकता है? पहली नज़र में शायद कुछ खास नहीं। ✍️ लेकिन कोसांबी के लिए सिक्का केवल अतीत की वस्तु नहीं था। उसका भार, उसमें आया बदलाव और उसका सांख्यिकीय वितरण इतिहास के लिए प्रमाण बन सकता था। यहीं से उनकी बौद्धिक यात्रा की खासियत सामने आती है उन्होंने अलग-अलग विषयों में काम ही नहीं किया, बल्कि एक विषय की पद्धति को दूसरे विषय के सवालों के लिए इस्तेमाल किया। 👤 दामोदर धर्मानंद कोसांबी (1907–1966) मूलतः गणितज्ञ थे। उन्होंने गणित और गणितीय भौतिकी में शोध किया और आनुवंशिकी में Kosambi map function दिया, जो पुनर्संयोजन के आँकड़ों से जीनों के बीच आनुवंशिक दूरी के अनुमान से संबंधित है। 📊 गणित और सांख्यिकी उनके लिए इतिहास को देखने का भी एक औज़ार बन गए। जब उन्होंने प्राचीन भारतीय punch-marked coins का अध्ययन किया, तो सिक्कों को केवल देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय उनके भार को व्यवस्थित रूप से मापा और उसके सांख्यिकीय वितरण का अध्ययन किया। 🔗🔖 उनका सवाल था 🪙 क्या सिक्कों के इस्तेमाल से उनके भार में कोई नियमित परिवर्तन आता है? 📊 क्या अलग-अलग सिक्का-समूहों के आँकड़ों से उनके क्रम या काल के बारे में कुछ जाना जा सकता है? इस तरह उनका गणितीय प्रशिक्षण सीधे ऐतिहासिक प्रमाणों के विश्लेषण में उतर आया। 📜 इतिहास के प्रति उनकी दृष्टि भी इसी कारण अलग थी। उनके लिए इतिहास केवल राजाओं, युद्धों और राजवंशों का क्रम नहीं था। वे यह समझना चाहते थे कि उत्पादन, खेती, तकनीक, व्यापार और सामाजिक-आर्थिक संरचनाओं में बदलाव समाज को कैसे बदलते हैं। 📚 उनकी 1956 की पुस्तक 🖇📚📖An Introduction to the Study of Indian History इसी दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसमें साहित्यिक स्रोतों के साथ पुरातत्व, सिक्कों और सामाजिक-आर्थिक प्रमाणों को जोड़कर भारतीय इतिहास को समझने का प्रयास किया गया। 🔎 इसलिए कोसांबी को समझने का सही सवाल यह नहीं है “उन्होंने इतने सारे विषय कैसे पढ़ लिए?” बल्कि “उन्होंने अलग-अलग विषयों की पद्धतियों को एक-दूसरे के लिए उपयोगी कैसे बना दिया?” यही उनकी बौद्धिक विशिष्टता थी। एक क्षेत्र की पद्धति दूसरे क्षेत्र के प्रश्नों को देखने का औज़ार बन गई। 🧠 और यहीं से बात हमारी तरफ लौटती है। हम अक्सर अपनी पहचान को अपनी क्षमता की सीमा बना लेते हैं 🎓 “मैं तो गणित वाला हूँ।” 📖 “मुझे इतिहास से क्या लेना-देना?” 💼 “मेरा काम इससे अलग है।” धीरे-धीरे ये वाक्य हमारे घेरे बन जाते हैं और हम उन्हीं घेरों को अपनी क्षमता समझने लगते हैं। लेकिन कोसांबी की यात्रा यह नहीं कहती कि हर व्यक्ति को हर विषय का विशेषज्ञ बनना चाहिए। 💬 अब अपने बारे में सोचिए आपने “मैं ऐसा ही हूँ” कहकर कौन-सी संभावना खुद से छीन रखी है?
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डी. डी कौशांबी :: गणितज्ञ एवं इतिहासकार✅
डी. डी कौशांबी :: गणितज्ञ एवं इतिहासकार✅
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⚓ जब तर्क बदला, लेकिन शोषण नहीं 15वीं से 19वीं सदी के बीच अटलांटिक दास व्यापार में लगभग 1.25 करोड़ अफ़्रीकी लोगों को जबरन जहाज़ों पर चढ़ाया गया। इनमें से लगभग 1.07 करोड़ अमेरिका पहुँचे। इस यात्रा को Middle Passage कहा गया और लगभग 18 लाख लोगों की समुद्र में ही मृत्यु हुई। 😳😳, भूख, बीमारी, हिंसा और बेहद अमानवीय परिस्थितियाँ इसकी पहचान थीं। 📜 *लेकिन इतनी बड़ी क्रूरता केवल हथियारों से नहीं चल सकती थी।* उसे सही ठहराने के लिए तर्क भी चाहिए था। शुरुआती दौर में कुछ यूरोपीय उपनिवेशवादी और धार्मिक समर्थक अफ़्रीकी लोगों को “बुतपरस्त” या “असभ्य” बताकर उनके धर्मांतरण और “सभ्य बनाने” को दासता के औचित्य से जोड़ते थे। बाद में यह तर्क कमजोर पड़ा। फिर एक नया दावा उभरा: अफ़्रीकी मूल के लोग स्वभाव से ही श्वेत लोगों से हीन हैं। 18वीं और 19वीं सदी में ऐसे विचारों को तथाकथित “वैज्ञानिक” भाषा और नस्लीय सिद्धांतों का सहारा दिया गया। 🔎तर्क बदल गया। व्यवस्था नहीं। पहले कहा गया, “इन्हें सभ्य बनाना है।” फिर कहा गया, “ये स्वभाव से हीन हैं।” दोनों कथनों ने अलग भाषा में एक ही व्यवस्था को बचाने का काम किया। ⚡ यहीं अहंकार का एक सूक्ष्म खेल दिखाई देता है। अहंकार केवल अपने बारे में अच्छी धारणा नहीं बनाता। वह अपनी सुविधा और स्वार्थ को भी उचित ठहराने वाली कहानी बना सकता है। किसी दूसरे इंसान को सीधे इंसान की तरह देखना और उसी समय उसके शोषण से लाभ लेना एक असहज विरोधाभास है। इसलिए “वह ऐसा ही है” जैसी पहचान उस असहजता को ढँक सकती है। 🪞 क्या हम भी ऐसा नहीं करते? “वह आलसी है।” “वह मेरे लायक नहीं है।” “हमारे लोग ऐसे ही होते हैं।” “मेरे पास कोई विकल्प नहीं था।” कभी-कभी निष्कर्ष पहले तय होता है और तर्क बाद में उसके लिए जुटाया जाता है। 🌱 इतिहास का प्रश्न इसलिए केवल यह नहीं कि पुराने लोग क्या मानते थे। ❓ जब हमारी सुविधा किसी दूसरे के नुकसान पर टिकी हो, तो क्या हम उसे देखने से बचने के लिए उसके बारे में कोई कहानी बना रहे हैं? 📚 स्रोत • Encyclopaedia Britannica, The International Slave Trade https://www.britannica.com/topic/slavery-sociology/The-international-slave-trade
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🇮🇳 कूका काण्ड, मालेरकोटला 1872: जब डर दिखाना ही सज़ा बन गया ⚔️ जनवरी 1872 में पंजाब में कूका आंदोलन और ब्रिटिश शासन के बीच
🇮🇳 कूका काण्ड, मालेरकोटला 1872: जब डर दिखाना ही सज़ा बन गया ⚔️ जनवरी 1872 में पंजाब में कूका आंदोलन और ब्रिटिश शासन के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया था। कूका आंदोलन का नेतृत्व सतगुरु राम सिंह कर रहे थे। उनके अनुयायियों को नामधारी भी कहा जाता था। आंदोलन ब्रिटिश शासन के विरोध, विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और सामाजिक सुधारों से जुड़ा था। 👉 15 जनवरी 1872 को कूका समूह ने मालेरकोटला पर हमला किया। इससे पहले मालौध के किले पर भी हमला हुआ था। संघर्ष के बाद कई कूका अनुयायी गिरफ्तार कर लिए गए। फिर ब्रिटिश प्रशासन ने ऐसी कार्रवाई की, जिसने इस घटना को इतिहास का बेहद भयावह अध्याय बना दिया। 💥 17 जनवरी 1872 को 49 पकड़े गए कूका अनुयायियों को तोपों के मुँह से बाँधकर उड़ा दिया गया। अगले दिन भी कार्रवाई जारी रही। सरकारी ऐतिहासिक विवरण मालेरकोटला की इस घटना में 66 कूका शहीदों का उल्लेख करता है। 🚂 कूका आंदोलन के नेता सतगुरु राम सिंह को भी गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया गया। आज मालेरकोटला में बना कूका स्मारक इस घटना में मारे गए लोगों की स्मृति को जीवित रखता है।
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UGC NET History Quiz का Bilingual Explanation 59. गांधी के नेतृत्व वाले किस आन्दोलन को "स्वतःस्फूर्त क्रान्ति" कहा गया है? (UGC NET History Exam 2012)Which movement led by Gandhi has been called a "spontaneous revolution"? (A) चम्पारन आन्दोलन / Champaran Movement (B) असहयोग आन्दोलन / Non-Cooperation Movement (C) सविनय अवज्ञा आन्दोलन / Civil Disobedience Movement (D) भारत छोड़ो आन्दोलन / Quit India Movement उत्तर- (D)/व्याख्या: 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो प्रस्ताव स्वीकार हुआ। 9 अगस्त की सुबह आपरेशन जीरो आवर के तहत गांधी जी समेत प्रमुख नेता गिरफ्तार कर लिए गए। ऐसी स्थिति में जयप्रकाश नारायण हजारीबाग जेल से फरार होकर भूमिगत रूप से आंदोलन चलाने लगे। Answer- (D)/Explanation:Quit India resolution was accepted on 8 Aug 1942. Under Operation Zero Hour on 9 Aug morning, Gandhi and top leaders were arrested. Jayaprakash Narayan escaped Hazaribagh jail to lead the movement underground. . 61. भारतीय सिविल सेवा के लिए चुने गए प्रथम भारतीय का नाम बताइए: (UGC NET History Exam 2012)Name the first Indian selected for the Indian Civil Service: (A) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी / Surendranath Banerjee (B) आनन्दमोहन बोस / Ananda Mohan Bose (C) गुरुदास बनर्जी / Gurudas Banerjee (D) सत्येन्द्रनाथ टैगोर / Satyendranath Tagore उत्तर- (D)/व्याख्या: सत्येन्द्र नाथ टैगोर प्रथम भारतीय थे जिन्होंने इंग्लैंड जाकर ICS परीक्षा उत्तीर्ण की। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी 1871 में चुने गए थे। Answer- (D)/Explanation:Satyendranath Tagore was the first Indian to pass the ICS exam in England. Surendranath Banerjee was selected in 1871. 62. आर्य समाज आन्दोलन विश्वास करता था (UGC NET History Exam 2012)The Arya Samaj Movement believed in: (A) मूर्तिपूजा / Idol Worship (B) बहुदेववाद / Polytheism (C) एकेश्वरवाद / Monotheism (D) वैदिक कर्मकाण्ड / Vedic Rituals उत्तर- (D)/व्याख्या: स्वामी दयानन्द सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की। यह केवल वेदों को स्वतः प्रमाण मानता था, एकेश्वरवाद में विश्वास रखता था तथा 1867 में पाखण्ड खण्डिनी पताका फहराई। Answer- (D)/Explanation:Swami Dayanand Saraswati founded Arya Samaj in 1875. It accepted Vedas as ultimate authority, believed in monotheism, and raised the Pakhand Khandini Pataka in 1867. 63. सिविल अवज्ञा आंदोलन के दौरान धारासना नमक डिपो में शांतिपूर्ण सत्याग्रह के खिलाफ अंग्रेजों की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के बारे में निम्नलिखित में से किस विदेशी पत्रकार ने रिपोर्ट लिखी थी? (UGC NET History Exam 2012)Which foreign journalist reported on the brutal British action against the peaceful satyagrahis at the Dharasana Salt Depot during the Civil Disobedience Movement? (A) डोना मिलर / Dona Miller (B) सी.एफ. एंड्रयूज / C.F. Andrews (C) पाल्मर / Palmer (D) वेब मिलर / Webb Miller उत्तर- (A)/व्याख्या: धरासना में सरोजिनी नायडू, मणिलाल आदि के नेतृत्व में सत्याग्रह हुआ, जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने इस पर मार्मिक रिपोर्टिंग की। Answer- (A)/Explanation:Satyagraha at Dharasana was led by Sarojini Naidu, Manilal, etc. American journalist Webb Miller gave a poignant report on the brutal police lathi chargehtt @UGC_NET_HISTORY_JRF आज की क्विज का Explation                   धन्यवाद💐💐💐
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कालीबंगा की 'अग्निवेदिकाएं' कालीबंगा का सिटाडेल उत्तरी और दक्षिणी भागों में बंटा हुआ है और दक्षिणी हिस्से में पुरातत्त्वविदों
कालीबंगा की 'अग्निवेदिकाएं' कालीबंगा का सिटाडेल उत्तरी और दक्षिणी भागों में बंटा हुआ है और दक्षिणी हिस्से में पुरातत्त्वविदों ने पाँच या इससे भी अधिक मिट्टी के ईंटों के बने पृथक-पृथक प्लेटफार्म को चिन्हित किया है। इतिहासकार के अनुसार ये यज्ञवंदियाँ या अग्निकुण्ड थीं। इन गड्‌ढ़ों से राख, चारकोल और आयताकार मिट्टी के टुकड़े तथा टेराकोटा केक पाए गए हैं। बी.बी. लाल का मानना है कि इन भवनों में अग्निकुण्ड से जुड़े कर्मकाण्डीय पुरोहितों का निवास स्थान था। अग्निकुण्डों या अग्निवेदिकाओं को प्राप्ति बनावली, लोथल, आमरी, नागेश्वर और बगाड़ तथा हरियाणा के राखीगढ़ी से हुई है, किन्तु केवल कालीबंगा और बनावली से प्राप्त अग्निवेदिकाओं सामुदायिक महत्त्व की प्रतीत होती हैं। #UCGNETHistory PYQ HISTORY ✍️ more info.👉@UGC_NET_HISTORY_JRF  💐💐💐💐 Source- प्रोफेसर उपिंदर सिंह
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Bihar STET.pdf
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STET आवेदन के बाद ही भरा जाएगा❤️
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▪️ BPSC TRE 4 शिक्षक भर्ती ऑनलाइन आवेदन 01 सितंबर 2026 से शुरू होने वाली तिथि स्थगित......!!!
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