संस्कृत संवादः । Sanskrit Samvadah
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Дописи каналу
@samvadah organises संलापशाला - A Sanskrit Voicechat Room
🔰विषयः मुक्तविषयः
🗓२६/०६/२०२६ ॥ IST ११:०० AM
🔴 It's recording would be shared on our channel.
📑कृपया दैववाचा चर्चार्थं कश्चिदपि विषयः संस्कृतेन वदनीयः इत्येतं विषयम् अभिक्रम्य आगच्छत।
https://t.me/samvadah?livestream
पूर्वचर्चाणां सङ्ग्रहः अधोदत्तः
https://archive.org/details/samlapshala_
| 2 | #hasya @samvadah | 142 |
| 3 | १। तस्या वाक्यं श्रुत्वा स क्रोधमूर्च्छितः।
• Having heard her sentence, he became infatuated with from anger.
• उसकी बात सुनकर वह क्रोध से भर गया।
२। पङ्कजनयनं तं पश्य सखि।
• Female friend! See that lotus-eyed one.
• सखी, उस कमल-सी आँख वाले को देखो।
३। हा सुकुमारः किशोरकः सन्न्यसति।
• Alas! The tender teenager takes to renunciation.
• हाय, सुकुमार किशोर संन्यास ले रहा है।
४। किं यत् तस्य पूजनेन न प्राप्यते।
• What is it that is not obtained by his worship?
• ऐसा क्या है जो उसके पूजन से नहीं पाया जाता।
५। हनूमान् सुग्रीवम् उपदिदेश।
• Hanuman advised Sugriva.
• हनुमान् ने सुग्रीव को उपदेश दिया।
६। ज्ञात्यभिमानेन नरः पतति।
• By the pride of caste/kin, a man falls.
• जाति के अभिमान से मनुष्य गिरता है।
७। गतस्य शोकं न करोम्यहम्।
• I do not do the grief of the departed.
• बीते हुए का शोक मैं नहीं करता हूँ।
८। मम गुरुणा अहं सम्यग् अध्यापितः।
• By my Guru, I am taught well.
• मेरे गुरु द्वारा मैं भली-भाँति पढ़ाया गया हूँ।
९। लज्जितां नववधूं दृष्ट्वा वरो मन्दं हसति।
• Having seen the shy new bride, the groom smiles.
• लजाई हुई नई वधू को देखकर वर मुस्काता है।
१०। किं विश्वम्भरसिंहस्य नाम ते श्रोत्रं न आगतम्।
• Has the name of Vishvambhara Simha not come to your ear?
• क्या विश्वम्भरसिंह का नाम तुम्हारे कान में नहीं पड़ा।
@samvadah #vakyabhyas | 165 |
| 4 | युवयोः कः यवीयान् इति न जाने अहम्।
यवीयान् इत्यस्य कः अर्थः। | 161 |
| 5 | 🌿 अनन्तं बत मे वित्तं यस्य मे नास्ति किंचन।
मिथिलायां प्रदीप्तायां न मे दह्यति किंचन॥
🌞 जनक उवाच। बत हा यस्य मे वित्तम् अनन्तम् असीमम् अस्ति तस्य मे किंचन नास्ति। मिथिलायां प्रदीप्तायां दग्धायां मे किंचन न दह्यति।
🌷 जनक ने कहा। अहो! जिस मेरे जैसे के पास असीम धन है वैसे मुझको कुछ भी नहीं है। मिथिला के लहकने पर मेरा कुछ भी नहीं जलता।
🌹 Janaka Said: Oh! I, whose treasures are immense, yet I have nothing! On Mithila being ablazed, nothing of mine burns.
📍 महाभारतम् । १२।१७।१८॥ #Subhashitam | 172 |
| 6 | Голосове повідомлення | 161 |
| 7 | सूत्रपाठनम्
#samlapshala | 156 |
| 8 | record.ogg | 149 |
| 9 | @samvadah organises संलापशाला - A Sanskrit Voicechat Room
🔰 विषयः सूत्रपाठनम्
२५/०६/२०२६ ॥ IST ११:०० AM
🔴 It's recording would be shared on our channel.
📑कृपया दैववाचा चर्चार्थं कस्यचित् पाणिनीयसूत्रस्य विवरणं कर्तव्यम् इत्येतं विषयम् अभिक्रम्य आगच्छत।
https://t.me/samvadah?livestream
पूर्वचर्चाणां सङ्ग्रहः अधोदत्तः
https://archive.org/details/samlapshala_ | 233 |
| 10 | अधिवक्ता पृच्छति। किं त्वं निजं सम्पूर्णं जीवनम् अस्मिन् नगरे अवसः। 🧐
विद्याधरः प्रतिभाषते। नाधुनाप्रभृति। 😬
#hasya @samvadah 😑😒 | 244 |
| 11 | १। भार्य्या प्रभातसमये सुस्वप्नम् अवलोकितवती।
• The wife saw a good dream at morning time.
• पत्नी ने सवेरे के समय एक अच्छा सपना देखा।
२। तस्याः ननन्दा तां प्रियसमीपम् अनायि।
• Her sister-in-law brought her near the beloved.
• उसकी ननद उसे प्रिय के पास ले आई।
३। अखर्वेण गर्वेण क्षत्त्रियोऽयं विराजते।
• This Kshatriya sits with great pride.
• यह क्षत्रिय बड़े गर्व से विराजित है।
४। तस्य विदीर्णं मस्तकं दृष्ट्वा माता रोदिति।
• Having seen his split head, the mother cries.
• उसका फटा सिर देखकर माता रोती है।
५। नामोच्चारणेन पतेरायुः क्षीयते स्नुषे।
• By pronouncing the name, the husband's life diminishes, daughter-in-law!
• नाम पुकारने से पति की आयु घटती है, बहू।
६। तस्या विवाहे तस्य यमलेन सहोदरेण जातः।
• Her marriage happened with his twin brother.
• उसका ब्याह उसके जुड़वाँ भाई के साथ हुआ है।
७। वृद्धो बाबूलालो पुनः कन्याम् उद्वहति।
• The old Babulala marries a girl again.
• बूढ़ा बाबूलाल पुनः एक लड़की से ब्याह करता है।
८। कलिमलविध्वंसनाय प्रयतध्वम्।
• Make effort for the destruction of the impurities of Kali.
• कलियुग के मैल को मिटाने का जतन करो।
९। प्रतिदिनं नवं दुःखं समापतति।
• Every day a new sorrow befalls.
• हर दिन नया दुःख आ पड़ता है।
१०। तस्माद् अहं निशि निद्रां न लभे।
• Therefore I do not obtain sleep in the night.
• इस कारण मैं रात में नींद नहीं पाता।
@samvadah #vakyabhyas | 271 |
| 12 | चकारः तालौ उत्पद्यते ननु।
किं पदं दुष्टम्। | 208 |
| 13 | 🌿 अनधीत्य यथा वेदान्न विप्रः श्राद्धमर्हति।
एवमश्रुतषाड्गुण्यो न मन्त्रं श्रोतुमर्हति॥
🌞 यथा वेदान् अनधीत्य विप्रः ब्राह्मणः श्राद्धं श्रद्धान्वितान्नादिदानं न अर्हति एवम् अश्रुतषाड्गुण्यः अज्ञातषड्राजरक्षणोपायः मन्त्रं गुप्तिवादं श्रोतुं न अर्हति।
🌷 जैसे वेदों का अध्ययन किए बिना ब्राह्मण श्राद्ध (अन्नदानादि) ग्रहण करने के योग्य नहीं होता, ऐसे ही राजनीति के छह गुणों को न सुनने (जानने) वाला मन्त्रणा सुनने के योग्य नहीं होता।
🌹 Just as a Brahmin who has not studied the Vedas is not fit to receive the gifts of the death anniversary/funeral, Thus one who is not versed in the six expedients of politics does not deserve to hear of political strategies.
📍 महाभारतम् । ५।३७।२४॥ #Subhashitam | 204 |
| 14 | 🤖 कृतकप्रज्ञया शब्दितम्। उच्चारणे दोषाः स्युः। | 184 |
| 15 | वाक्याभ्यासः
#samlapshala | 193 |
| 16 | record.ogg | 209 |
| 17 | #AkashVani | 185 |
| 18 | स्वधर्मघाती पाखण्डानुगतं फलं भुङ्क्ते।
देवीभागवतपुराणस्याष्टमस्कन्धे द्वाविंशतितमाध्याये अष्टादशश्लोकादेकविंशतिश्लोकपर्यन्तमपि एतादृगेवोपदेशः प्रतिध्वनितोऽस्ति।
किञ्चिदाधुनिकं रक्षात्मकं मनो ह्येतादृशानि भौगोलिकस्थानानि न सन्तीति तर्कयन्नेतत्सर्वं पौराणिकप्रलाप इत्युक्त्वा तिरस्कुर्यात्। शाब्दिकार्थे ते सम्भवतः असत्याः न स्युः एतानि मानचित्रे कानिचिद् भौतिकस्थानानि न सन्ति। तथाप्यन्तर्निहितं सत्यमिदमेवास्ति यन्मानवेन महती मानसिकी आध्यात्मिकी च पीडा सोढव्या भवति। भवती स्वमनसोऽनुमत्या येन केनचित् प्रकारेणास्याः पीडायाः कल्पनां कर्तुं शक्नोति परन्तु स्वस्य स्वाभाविककर्तव्यत्यागस्य कार्मिकी पीडा तु वास्तवी एव तिष्ठति।
अन्ततो गत्वा चयनं भवत्या एवास्ति केवलं यात्रायां प्रवृत्तेः प्राग्गन्तव्यस्थानस्य विषये पूर्णतया जागरूका भवतु॥
#Sanskritarticles @Samvadah | 221 |
| 19 | नारीधर्मः आधुनिकता वणिङ्माया च।
यत् स्वातन्त्र्याधुनिकतोत्तमजीवनशैल्यादीनां व्याजेन महिलाभ्यः पौनःपुन्येन प्रदर्श्यते तत्तु वस्तुतः न्यूनमूल्येन श्रमिकाणां शोषणाय निगमानां काचित् चतुरा कूटनीतिरेवास्ति। यतो हि अधिकाधिकाः स्त्रियः कार्यक्षेत्रे प्रविशन्ति ततः श्रमिकाणां सङ्ख्या वर्धते येन श्रमस्य मूल्यं स्वभावादेव न्यूनायते। किञ्चैतिहासिकदृष्ट्या महिलाः पुरुषेभ्यो न्यूनं वेतनं स्वीकृतवत्यः यतो हि प्रायशः सम्पूर्णकुटुम्बस्य तासां केवलमेकस्मिन्नाये निर्भरतायाः सम्भावना न्यूना भवति।
पूर्वकाले एकः पुरुषः स्वस्यैकेनायेन गृहं क्रेतुं परिवारं पालयितुं च समर्थ आसीत् परन्तु निगमैरुभयार्जनकुटुम्बव्यवस्था साधारणीकृता येन जीवनयापनस्य गृहादीनां च व्यय उभयार्जनानुरूपं तीव्रगत्या वर्धितः। एतेन सिद्ध्यति यत् स्वातन्त्र्यमिति भ्रमेण वस्तुतः परिवाराः समयस्य संसाधनस्य च दृष्ट्या दरिद्राः कृताः।
अत्र स्पष्टं भवेद्यत् कापि महिला गृहिणी भवितुं न बाध्या। बलप्रयोगो धर्मो नास्ति जनाः स्वकीयस्वेच्छायाः प्रयोगार्थं स्वतन्त्राः भवेयुः। तथापि महिलायाश्चयनस्याधिकारस्य समर्थनमित्यस्यार्थो नायं यत् पुरुषैः अधार्मिकमार्गोत्साहनं समर्थनं वा करणीयम्। विवाहो न केवलमग्निकर्म अपि तु दाम्पत्यदायित्वस्य गम्भीराङ्गीकारस्तेषां व्रतानां पूर्णतयाऽन्वाचरणं चास्ति। यदि कोऽपि स्वकीयदाम्पत्यकर्तव्यानां समुचितनिर्वाहाय वैवाहिकबन्धनाय च समर्पयितुमनुत्सुकोऽस्ति तर्हि सः केवलं नाममात्रेणैव पतिः पत्नी वा भवति।
आदर्शा पत्नी परिवारस्याधारभूता भवति स्वबालानां प्रथमा गुरुर्भवति गृहे च शान्तेराश्रमं निर्माय समृद्धिमानयति।
प्रत्येकं जनः यथारुचि जीवितुमधिकारं धारयति परन्तु स्वेन चितस्य मार्गस्य परिणामानां पूर्णतयाऽवगमनमेव बुद्धिमत्तास्ति। प्रथमं तावद्गृहमपहाय नैगमिकवृत्तेः प्राथम्यप्रदानस्य दृश्यमानं व्यावहारिकं च परिणामं परीक्षामहे।
प्रथमं द्विधर्म्मभारः यत्र भवती बहिः पूर्णकालिककार्यं कृत्वा गृहे च गार्हस्थ्यकर्तव्यानि सम्पाद्य कर्म्मसङ्करमिव कार्यं कुर्वती आत्मानं निरन्तरं कार्यभारेण श्रान्तां क्लान्तां च द्रक्ष्यति।
द्वितीयं बालेभ्यो वियोगः यत्र भवतीमपहाय भवत्याः शिशवः धात्रीभ्यः शिशुपालनसंस्थाभ्यो वा भावात्मकरूपेणाधिकाः संलग्नाः भवेयुः येन मातृसान्निध्याभावात् तेषु क्रोधस्य व्यवहारदोषस्य च सम्भावना वर्धते।
तृतीयं मातृग्लानिः यत्र शिशोर्जन्मनः पश्चात् यदा तस्मै भवत्याः सर्वाधिकी आवश्यकता भवति तदा तत्रानुपस्थित्या भवती महतीं ग्लानिमनुभविष्यति यत्कारणान्नितान्तमुच्चवेतनप्राप्त्यनन्तरमपि वृत्तिमत्यो महिलाः स्ववृत्तेर्विमुखाः भवन्ति।
चतुर्थमनन्तं मूषकधावनं यत्र भवती निरन्तरायां नैगमिकान्धप्रतियोगितायां पतिष्यति येन स्थिरस्य सन्तोषप्रदस्य शान्तस्य च जीवनस्य निर्माणमत्यन्तं कठिनं भविष्यति।
पञ्चमं स्वातन्त्र्यमाया यत्र वास्तविकं स्वातन्त्र्यं केवलं मिथ्यास्ति यतो हि अस्मिन् संसारे सर्वे जनाः समाजेऽन्योन्याश्रिताः सन्ति नैगमिकक्षेत्रे तु भवती केवलं पत्याश्रयमुत्सृज्य स्वाम्यधिकारिण आश्रयं गृह्णाति यस्यादेशा भवत्या पालनीया एव।
षष्ठमुत्तमसमयस्य हानिः यत्र स्वपरिवारस्य स्वबालानां स्वविवाहस्य च पोषणाय भवत्याः पार्श्वे समयस्योर्जायाश्च महती न्यूनता भविष्यति।
सप्तमं पारम्परिककौशलानामुपेक्षा यत्र वृत्तेरावश्यकतानां कारणात् मूलतः पाकोत्पादनं सीवनं गृहनिर्माणं परिचर्या च इत्याद्यमूल्यगार्हस्थ्यकौशलानां सम्पादनाय समयो नशिष्यति।
अष्टमं पत्युर्बाधनं यत्र गार्हस्थ्यक्षेत्रस्य दायित्वमस्वीकृत्य भवती स्वपतिं तस्य कार्ये पूर्णतया ध्यानं दातुं बाधते येनान्ततस्तस्यायक्षमतायाः व्यावसायिकविकासस्य च सीमा भवितुमर्हति।
नवमं पारिवारिकस्वास्थ्यस्य पतनं यत्रोष्णस्य पक्वान्नस्य निर्माणाय समयाभावात् भवती भवत्याः परिवारश्च विशेषतो विकासोन्मुखाः युवाबालकाः अस्वास्थ्यकरेषु यन्त्रसाधितेषु सुलभभोज्यपदार्थेषु आश्रिताः भविष्यन्ति।
एतेषां दृश्यमानपरिणामानामग्रे अदृष्टाः परिणामा अपि सन्ति।
श्रीमद्भागवतपुराणस्य पञ्चमस्कन्धे षड्विंशतितमाध्याये पञ्चदशश्लोके कथितमस्ति।
यस्त्विह वै निजवेदपथादनापद्यपगत: पाखण्डं चोपगतस्तमसिपत्रवनं प्रवेश्य कशया प्रहरन्ति तत्र हासावितस्ततो धावमान उभयतोधारैस्तालवनासिपत्रैश्छिद्यमानसर्वाङ्गो हा हतोऽस्मीति परमया वेदनया मूर्च्छित: पदे पदे निपतति स्वधर्महा पाखण्डानुगतं फलं भुङ्क्ते।
अस्यार्थोऽस्ति यद्यदा कापि तीव्रदरिद्रता पोषकाभावश्चेत्यादिरूपापत्तिर्न भवति तदा कोऽपि स्वकीयान्निर्दिष्टवैदिकमार्गात् स्वधर्माच्च च्यवति अथवा बौद्धादिजैनधर्मादीनां पाखण्डमार्गमवलम्बते तदा यमराजस्य दूतास्तमसिपत्रवनाख्यं नरकं प्रवेश्य कशया प्रहरन्ति ततः सः तीव्रपीडातो रक्षितुमितस्ततो धावमानः सन् उभयतोधारैस्तालवनासिपत्रैश्छिन्नसर्वाङ्गः हा हतोऽस्मीति क्रन्दन् परमया वेदनया मूर्च्छितः पदे पदे निपतति एवमेव | 246 |
| 20 | @samvadah organises संलापशाला - A Sanskrit Voicechat Room
🔰 विषयः वाक्याभ्यासः
२४/०६/२०२६ ॥ IST ११:०० AM
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पूर्वचर्चाणां सङ्ग्रहः अधोदत्तः
https://archive.org/details/samlapshala_ | 273 |
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