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◾1/3 निगेटिव मार्किंग रहेगी ।।
◾ प्रश्न में 5 विकल्प मिलेंगे , जिसमें A,B,C,D, विकल्प होंगे , अगर प्रश्न नहीं करना है तो भी E विकल्प को भरना होगा , अगर ऐसा नहीं करते हैं तो 1/3 का निगेटिव मार्किंग लगेगा ।।
◾साथ ही साथ में एक छात्र एक रिजल्ट का नियम भी पहली बार लागू किया गया है...!!https://t.me/uttarpradeshSarkarijob
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🔰एकल परीक्षा पैटर्न ✔️✔️✔️
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8 सितंबर, 2026 को आईआईटी बॉम्बे के 20 साल के छात्र साहिल वाकोडे की मौत इन दिनों देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। मामले को लेकर चर्चा में आए प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई है और मामले से आहत होकर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
मिड सेमस्टर एग्जाम के दौरान साहिल को मोबाइल फोन में एआई का इस्तेमाल करके सवालों के जवाब ढूंढ़ते हुए पकड़ा गया। आरोप है कि वह चैटजीपीटी पर जवाब ढूंढ़ रहा था। साहिल को प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने ऐसा करते हुए पकड़ लिया और इसकी जानकारी संस्थान के बाकी स्टाफ को दी। इसके बाद साहिल की मौत हो गई। ऐसे में प्रोफेसर सूर्यनारायण की चर्चा हो रही है, तो आइए जानते हैं कि वह कौन हैं और उनका करियर कैसा रहा है?
प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के बारे में
प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (DESE) में शिक्षक हैं और एक दशक से ज्यादा समय से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं। उनकी एकेडमिक विशेषज्ञता में पावर सिस्टम, स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, रिन्यूएबल-एनर्जी इंटीग्रेशन, कन्वर्टर कंट्रोल और एनर्जी एफिशिएंसी शामिल हैं। आईआईटी बॉम्बे की उनकी प्रोफाइल में इन क्षेत्रों में कई रिसर्च पब्लिकेशन का जिक्र है।
डूला ने 2000 में नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया, इसके बाद 2002 में आईआईटी बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स इंजीनियरिंग में एमटेक और 2007 में आईआईटी दिल्ली से पावर सिस्टम्स में पीएचडी की। आईआईटी बॉम्बे में आने से पहले उन्होंने बेंगलुरु में पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स और हैदराबाद में मशीन 2 मशीन के साथ काम किया था।
आईआईटी बॉम्बे में डूला का करियर सिर्फ क्लासरूम में पढ़ाने और रिसर्च करने तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने हॉस्टल 6 के वार्डन और बाद में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के तौर पर भी काम किया है। वे JEE एडवांस्ड, UCEED और CEED जैसी प्रमुख परीक्षाओं के आयोजन से भी जुड़े रहे हैं।
उन्हें मिले एकेडमिक सम्मानों में 2021 में प्रो. एसपी सुखत्मे एक्सीलेंस इन टीचिंग अवॉर्ड, 2017 में आईआईटी बॉम्बे का एक्सीलेंस इन टीचिंग अवॉर्ड और 2009 में यंग फैकल्टी अवॉर्ड शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें IEEE अवॉर्ड और फेलोशिप भी मिली हैं।
उनके रिसर्च का मुख्य फोकस स्मार्ट-ग्रिड और माइक्रो-ग्रिड टेक्नोलॉजी, डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स, पावर-सिस्टम ऑपरेशन और कंट्रोल और एनर्जी एफिशिएंसी पर रहा है।
IIT बॉम्बे के डायरेक्टर ने इस्तीफ़ा दे दिया, लेकिन इस बातचीत ने एजुकेशन सिस्टम को हिलाकर रख दिया!!
छात्रा - सर, आपको पता भी नहीं है कि एक स्टूडेंट पर कितना प्रेशर होता है।
शिरीष केदारे - ठीक है, तो क्या हम आप लोगों के लिए चीटिंग को लीगल कर दें? ताकि आप पर प्रेशर न आए?
हमसे कहा जाता है कि हम उन स्टूडेंट्स के लिए पेपर बनाएँ जिनमें पढ़ने की काबिलियत है। उन स्टूडेंट्स के लिए जो 80 परसेंटाइल के साथ IIT में आए हैं।
सिर्फ़ इसलिए कि आपमें से कुछ स्टूडेंट्स 30 परसेंटाइल के साथ आए हैं,
हम दूसरे स्टूडेंट्स के लिए पेपर इतना आसान नहीं बना सकते।
छात्रा - सर, आप अभी भी बेशर्मी दिखा रहे हैं।
यह सब आपकी ही गलती थी।
शिरीष केदारे - मैं इस्तीफ़ा दे रहा हूँ क्योंकि मेरी भी कुछ गलती थी।
लेकिन आप बच्चों में से जिसने भी कभी चीटिंग की है, उसे अभी IIT छोड़ देना चाहिए।
मैं वॉचमैन से भी इस्तीफ़ा देने को कहूँगा क्योंकि वह किसी की पैंट में मोबाइल फ़ोन चेक नहीं कर पाया।
दुनिया भर के पेरेंट्स को भी अपनी पेरेंटिंग की ज़िम्मेदारियों से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए अगर वे एक पढ़ने-लिखने वाला बच्चा नहीं पाल सकते।
वह स्टूडेंट उनसे डरता था, हमसे नहीं।
आपके पेरेंट्स को शर्म आनी चाहिए कि उन्होंने आपको IIT भेजा, जबकि आप IIT का एक भी एग्ज़ाम पास करने के काबिल नहीं हैं।
सर ने सच में इस छात्रा की बोलती बंद कर दी।
उन्होंने इस्तीफ़ा तो दिया, लेकिन दुनिया को यह भी दिखा दिया कि यह एजुकेशन सिस्टम कितना खराब है।
बहुत सम्मान।
किसे ध्यान में रख करके कार्यस्थल का डिजाइन बनाना चाहिए
सुप्रिया
किसी विद्यार्थी के लिए ज्ञान प्राप्ति के लिए अध्ययन करना क्या कहलाता है सुप्रिया
