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यह विज्ञान अपनी अध्ययन सामग्री और विधियों तथा सिद्धांतो के लिए जीव विज्ञान, पारिस्थितिकी, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र और भूगोल आदि पर आश्रित है? सुप्रिया
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💥उम्र सीमा की छूट वालों को सकारात्मक अपडेट इस महीने के अन्त में आधिकारिक रूप से मिल जाएगा - DSSSB केवल इस बार 1 छूट मिलेगी बस

बिहार शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला! अब सरकारी विद्यालयों के शिक्षक कोचिंग, निजी ट्यूशन एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में पढ़ा
बिहार शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला! अब सरकारी विद्यालयों के शिक्षक कोचिंग, निजी ट्यूशन एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में पढ़ाते पाए गए तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यूपी में भी करना चाहिए, बहुत लूटखोरी मचा रखी है

💥👆👇🖍जब ध्यान बिखरता है तो ऊर्जा भी बिखरती है और जब ध्यान एक बिंदु पर ठहर जाता है, तो साधारण प्रयास भी असाधारण परिणाम देने
💥👆👇🖍जब ध्यान बिखरता है तो ऊर्जा भी बिखरती है और जब ध्यान एक बिंदु पर ठहर जाता है, तो साधारण प्रयास भी असाधारण परिणाम देने लगते हैं। - एक समय में एक लक्ष्य। - एक दिशा। - एक कदम। तो सरलता से कहे कि जो व्यक्ति हर चीज़ का पीछा करता है, वह अक्सर कुछ भी नहीं कर पाता और जो एक ही चीज़ को पूरी फोकस के साथ करता है, उसके लिए बाकी रास्ते भी स्वयं खुलने लगते हैं।

"पत्नी का करियर चुनना क्रूरता नहीं है।" — सुप्रीम कोर्ट एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए किसी पत्न
"पत्नी का करियर चुनना क्रूरता नहीं है।" — सुप्रीम कोर्ट एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए किसी पत्नी के करियर या पेशेवर महत्वाकांक्षाओं को वैवाहिक क्रूरता नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उससे पति या ससुराल पक्ष की भावनाएं आहत हुई हों। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला को अब पति के घर की मात्र एक परिशिष्ट (appendage) की तरह नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने माना कि शिक्षा, नौकरी और अपने सपनों को पूरा करने का अधिकार महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का हिस्सा है। किसी महिला का अपने करियर को प्राथमिकता देना या पेशेवर पहचान बनाना विवाह के खिलाफ नहीं माना जा सकता। यह फैसला सिर्फ एक कानूनी टिप्पणी नहीं, बल्कि बदलते भारत की उस सोच को भी दर्शाता है, जहाँ शादी के बाद भी महिलाओं के सपनों, फैसलों और महत्वाकांक्षाओं को बराबर सम्मान मिलना चाहिए। आपकी राय में, क्या आज भी करियर और शादी के बीच महिलाओं से ज्यादा समझौते की उम्मीद की जाती है?

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बेसिक शिक्षा विभाग चंदौली में ईसीसीई एजुकेटर भर्ती हेतु विज्ञापन जारी 💥 पदों की संख्या - 90 आवेदन अंतिम तिथि - 16.06.2026

🚨⚡ सोशल मीडिया पर चला रहे थे गैंग, 187 युवकों के खिलाफ मुकदमा.. "दबंगई" दिखाने वालों पर चन्दौली पुलिस का बड़ा "वज्रपात" ⚡🚨 --------------------- चन्दौली सोशल मीडिया पर प्रमुख गैंग के नाम ---------- --किशन रंगदार गैंग --मुखिया गैंग --समरेन्द्र माफिया गैंग --अहिरान विंग गैंग --अहिरान गैंग–1 --अहिरान गैंग–2 --राजपुताना गैंग --ठकुरान गैंग --डी गैंग -रामदुलार यादव गैंग -काजू गैंग -रितेश यादव गैंग -राहुल चौहान गैंग -शक्तिमान गैंग -रोहित यादव गैंग -विशाल यादव गैंग -शिवा चौहान गैंग -लाट नम्बर–2 गैंग -डी गैंग (दरोगा यादव गैंग) -रतनपुर गैंग -न्यू मशाल गैंग -मनधासी चौहान गैंग -जुलूसुट गैंग -विराट गैंग -गैंग–1081 -रूद्रा गैंग -त्रिभुवन गैंग -सत्या गैंग -------- रील्स बनाकर हथियारों का प्रदर्शन, गैंग बनाकर दबदबा कायम करना, युवाओं को गुमराह करना और सोशल मीडिया के जरिए समाज में भय व आतंक का माहौल पैदा करना अब भारी पड़ता दिख रहा है। चन्दौली पुलिस ने ऐसे तत्वों के खिलाफ 5 दिवसीय विशेष अभियान "ऑपरेशन वज्रपात" चलाकर बड़ी कार्रवाई की है। अभियान के दौरान जिले भर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय ऐसे गैंगों की पहचान की गई जो विभिन्न नामों से समूह बनाकर अपने आपराधिक प्रभाव का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। पुलिस ने बीट पुलिसकर्मियों, थाना प्रभारियों और क्षेत्राधिकारियों की मदद से ऐसे ग्रुप, पेज और गैंगों को चिन्हित किया। 📌 कार्रवाई के प्रमुख आंकड़े: 🔹 कुल चिन्हित गैंग – 64 🔹 दर्ज मुकदमे – 49 🔹 नामजद व्यक्तियों पर कार्रवाई – 187 🔹 गिरफ्तार अभियुक्त – 04 🔹 अन्य चिन्हित सदस्य – 65 पुलिस की जांच में सामने आया कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो और वीडियो पोस्ट कर खुद को "दबंग" दिखाने का प्रयास कर रहे थे। रील्स और पोस्ट के जरिए युवाओं को प्रभावित करने और भय का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही थी। 👮 एसपी आकाश पटेल ने कहा कि जनपद में अपराध और अराजकता के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति लागू है। सोशल मीडिया पर अपराध का महिमामंडन, हथियारों का प्रदर्शन और गैंग संस्कृति को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। 📞 पुलिस की जनता से अपील: यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति या समूह सोशल मीडिया के माध्यम से गैंग चलाकर भय, दबंगई या आपराधिक गतिविधियों का प्रचार-प्रसार कर रहा है तो तत्काल पुलिस को सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। 📲 शिकायत के लिए वाराणसी जोन के व्हाट्सएप बॉट नंबर 7839860411 पर भी जानकारी दी जा सकती है। सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स के लिए बनाई जा रही "दबंग छवि" अब पुलिस की नजर में है। कानून से ऊपर कोई नहीं। #OperationVajrapat #ChandauliPolice #ZeroTolerance #SocialMedia #CrimeFreeChandauli #BreakingNews

💥👆👇बेटी को सिखाएं 7 सेफ्टी रूल्स
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महादेव
महादेव

जन्म के समय कम वजन
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उत्तर प्रदेश के गोंडा से सामने आई यह तस्वीर इंसानियत को शर्मसार करने वाली और रिश्तों के खोखलेपन को उजागर करने वाली है। जरा इस 7 वर्षीय मासूम बच्चे अर्पित सिंह की बेबसी और उसके हिस्से आई किस्मत की क्रूरता को देखिए... यह मासूम अपनी मां के साथ लुधियाना से आया था। बस अड्डे पर अचानक मां की तबीयत बिगड़ी, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद अर्पित की मां ने दम तोड़ दिया। रिश्तों का अंत, संवेदनशीलता का क।त्ल मां की मौत के बाद जब रिश्तेदारों को फोन लगाया गया, तो मानवता तार-तार हो गई। न तो ननिहाल पक्ष से कोई आया और न ही ददिहाल पक्ष से। कोई भी इस अनाथ बच्चे का सहारा बनने के लिए आगे आने को तैयार नहीं हुआ। ऐसा नहीं था कि अर्पित की मां का किसी से कोई बड़ा विवाद था; लोग सिर्फ इसलिए मुंह मोड़ गए ताकि इस मासूम के पालन-पोषण और भविष्य का खर्च उन्हें न उठाना पड़े। आंसुओं से भीगी और उम्मीद से भरी आंखों से 7 साल का अर्पित घंटों तक अस्पताल के कोने में बैठकर अपनों का इंतजार करता रहा... लेकिन कोई नहीं आया, मतलब कोई भी नहीं! आखिरकार, मेडिकल कॉलेज के विशेष अनुरोध पर एक सामाजिक संगठन आगे आया और उसने अर्पित की मां का अंतिम संस्कार कराया। अपनों का धोखा और बिखरा हुआ आशियाना अर्पित के माता-पिता दो साल पहले ही अलग हो गए थे। पिता ने इस मासूम को बेसहारा छोड़ दिया और दूसरी औरत से शादी करके अपनी नई दुनिया बसा ली। मां ने भी कठिन हालातों में दूसरा विवाह किया था, लेकिन आखिरी वक्त में वह शख्स भी धोखा दे गया। सचमुच, यह दुनिया फरेब और स्वार्थ से भरी पड़ी है! इस मासूम का आखिर क्या दोष था, जो पिता ने इसे छोड़ दिया? उम्मीद की एक किरण: जिलाधिकारी की संवेदनशीलता इस पूरे अंधकार के बीच गोंडा के जिलाधिकारी (DM) महोदय सराहना के पात्र हैं, जिन्होंने देवदूत बनकर इस मासूम का हाथ थामा है। उन्होंने अर्पित की पढ़ाई-लिखाई और पूरे पालन-पोषण का जिम्मा खुद लिया है। मां के अंतिम संस्कार के बाद बच्चे को फिलहाल बाल शिशु गृह (अनाथ आश्रम) भेज दिया गया है, जहां वह जिलाधिकारी की देख-रेख में रहेगा और अपनी पढ़ाई पूरी करेगा। एक कड़वा सच... आज जो रिश्तेदार मुंह छुपाए बैठे हैं, कल को अगर यह बच्चा विपरीत परिस्थितियों से लड़कर बड़ा आदमी बन गया या इतिहास में अपना कोई बड़ा नाम कमा लिया... तो देखिएगा, यही दूर-दूर के स्वार्थी रिश्तेदार और सगे-संबंधी अपना हक जताने और रिश्ता भुनाने सबसे पहले लाइन में खड़े नजर आएंगे।

बड़े बाबू - आप तजुर्बेकार लोगों की फाइल निकालिये! लगता है उन्हीं में से किसी को लेना पड़ेगा। ये नई जनरेशन से मुझे बड़ी मायूसी हुई , आधों को तो मूँछ ही नहीं है। बाक़ी आधों के लिबास देखिए , बातें सुनिए तो सर में ख़ून चढ़ जाता है। इस देश का कुछ होने वाला नहीं है ! दिस कंट्री has no फ्यूचर!! ये डायलॉग फ़िल्म गोलमाल में उत्पल दत्त ने अपने बड़े बाबू से कहा था , वो बड़े बाबू जो नाक से बाल खेंचते रहते थे। काश उत्पल दत्त जी आज जीवित होते तो कोचरोच प्रदर्शन में केवल इन लड़कों को देखते , इनकी बातें सुनते तो यकीनन यही डायलॉग फिर से बोल ही देते! दरअसल प्रदर्शन रैली नारेबाजी आदि से ज़ियादा वायरल तो ये दो मीठे लड़के हो गए , एक का नाम उज्जवल है जो बड़े बड़े नाखून नेल पॉलिश करवा, ब्लाउज पहन, कान में झुमके डाल कर आया था। इसके ब्लाउज के पीछे जो लिखा था उसे तो इधर लिखना भी गुनाह ए अज़ीम होगा। बारहवी के ये लड़के इस वेशभूषा में घूम रहे है- भीषण गर्मी में। इन लड़के के माँ पिता पे भला क्या गुजरती होगी? क्या ये दिन देखने के लिए इन्हें पैदा किया था? जब तक अंदलोनकारी इन जैसे लौंडे रहेंगे तब तक कोई भी आंदोलन अपनी राह नहीं पकड़ सकता, अपनी मंज़िल नहीं पहुँच सकता। पब्लिक का सारा ध्यान,सारा फोकस इन छकड़ू वर्ग पे जाता है- और क्यों ना जायें। इस जानलेवा गर्मी में ऐसे नमूने देख भला किस के सर में खून ना चढ़ जाएं! धर्मेंद्र प्रधान जी से अस्तीफा मांगने से पहले इन दोनों लड़कों के बाप से अस्तीफा माँगो, बाप के पद से!

उज्जवल बेटा आज आप खूब वायरल हो गये हो।अगर यही लक्ष्य था तो आप सफल रहे। जब हम इस आयु में थे तो जरा सा पाजामा ऊंचा/नीचा होने,या पैंट की टाइट फिटिंग या बाल जरा से छोटे बड़े, या शर्ट का खुला बटन या लटकी बांह, कौन सा मुद्दा रहा होगा,जिस पर पिताजी या बड़ों की सतर्क से बच पायें, कितनी छोटी छोटी बात पर डाटे गये हम। क्या आपको वाकई कोई कुछ नहीं कहता। अभी 10+2 अर्थात कुल जमा 12 दर्जे पढ़ें हैं, माने कालेज/यूनिवर्सिटी तक पहुंचे नहीं हैं। चूंकि स्कूल में थे तो कोई स्किल भी शायद ही हासिल की हो। आखिरी बात ये है कि - रोजगार के लिए इस वेषभूषा में ना आप सरकारी दफ्तर जा पाओगे, ना कारपोरेट जगत में ऐसे सेटल होंगे, फ़ैशन से बिल्कुल बाहर लग रहे हो, शादी के लिए कोई आपके स्टाइल की लड़की भले पसंद कर ले, बाप को किसी लड़की को आपको अपनाये ना, और लड़की से बात बने ना। तो बेटे देश की दशा तो वाकई ठीक ना है, पर दशा तुम्हारी और ज्यादा बुरी है। चलो बदलाव खुद से शुरू करो। ईश्वर आपको खुश रखे। ---- सुधीर राणा, एक शिक्षक