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ᴍᴀᴋᴇ ᴀᴅᴍɪɴ @KANHA24_93 𝘀𝗼𝗺𝝴 𝘀𝞃𝗼𝗿𝝸𝞊𝘀 𝝰𝝶𝗱 𝘄𝝸𝞃𝗵𝗼𝞄𝞃 𝗴𝗼𝗼𝗱𝗯𝝲𝝴𝘀...- - ❤️‍🩹 !

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हर रोज़ विहान मे भुल जाते हैं दर्द अपना… . करके मगन खुदको कामो मे उदासी देखता नही कोई अपना… . शाम होते हि जख्म खुलने लगते है… . दिल को काँते फिरसे चुभने लगते है… . हम पर अँधेरे कुछ हावी हैं ऐसे तो… . हम ख़ुद के साए से डरने लगते हैं... . ख़ुशियों के बाज़ार में ग़म भी बिकते हैं... . और ग़म के बाज़ार तो अक्सर लगते हैं... . @Sanaya_10_13

Голосове повідомлення00:32

. खुदको साबित करे हम, कि सनाया ये हुनर तो हमे कभी आया हि नहीं कोई आ हमे गलत भी ठहरा दे और हमे सफाई देना मुनासिफ नहीं @Sanaya_10_13✨ .

. जब कोई आपको नज़र अंदाज़ करे तो बेहतर हैं आप उसे उसके हाल पर छोड़े, तब तक जब तक उसे आपको नज़र अंदाज़ करने का ऐहसान याद ना आए @Sanaya_10_13✨ .

Голосове повідомлення00:19

इश्क से इश्क का पैगाम लायी है… . चाँदनी रात दिल मे फिर एक याद लायी है… . हर बदलते लम्हे का रुख एक ऐहसास लायी है… . कानो मे एक गुँज लफ्ज़ो की लायी है… . नए लोगो से रुबरु कराने जिंदगी लायी है… . हम पसंद हो जिसे, जो पसंद हो हमे ऐसा शक्स किस्मत लायी है… . @Sanaya_10_13

Голосове повідомлення00:34

मंजिल एक है सबकी फिर भी खौफ ए मंजर ऐसा जैसे कोई खौफ मे हो क़तर ए पयासा… . चलते रहे जिस राह पर वो राह थम जानी है कब्र ए कज़ा पर मुझको… . वो जो आया पास मेरे मै था खुश उसे मिलने से गम था अपनो के बिछडने से मुझको... . ये तकदीर थी मेरी जो यहां तक लानी थी एक दुनिया थी जो बेगानी थी मुझको… . शौक से पढना है सेहरो की किताबें, दिल शिकस्त है लेकिन तेज है निगाहे मुझको… . ओढकर थी आग मुझको, बाँट रहा था सुरज धुप का साया सबको, एक अकेला शजर भी ऐसा दिखा शहर मे मुझको… . चीख रहा था देख कर राख होते मुझको, सारा शहर बुझाकर चराग सो गया भुलाकर मुझको… . वो हवा ऐसी थी जो सिसकीया गूंज उठी मेरे हमनवा की रुलाके मुझको… . @Sanaya_10_13

जिंदगी में कुछ खुशनुमा पल  बन कर आ गए वो हमारी जिंदगी में रहनुमा बन कर आ गए था खुले आसमान पर सूरज तेज चमकता हुआ और देखो ये बादल मेहमान बन कर आ गए इंतजार था जिस पल का वो इंतजार खत्म हुआ देखो ये लेकर अपने साथ बरसात आ गए पड़ी जो बूंदे मिट्टी पर रिमझिम रिमझिम कर के महेकती मिट्टी की ये फुहार ले कर आ गए बिजलियां भी कड़कने लगी हवाएं भी चलने लगी किसानों के लिए ले कर खुशी का सौगात आ गए हरियाली होगी हर एक के खेतो में अब किसानों के लिए बन कर ये भगवान आ गए @Sanaya_10_13

ना उम्मीद है ना राह है ना अपना है कोई… . इस भिड के भरे शहर मे मेरा लगता हि नही कोई… . एक दिल है जो शिशा है टुटा सा लगता है… . टुटे शिशे को रखता भी कहा है कोई… . यहा दिन भी है तन्हा, तो शाम भी निहायत से काली गहरी… . ना दिखता शिशा इस दिल का, लकिरे भी है दिखते कई… . तन्हा क्लेश हो दिल मे ऐसे हुक सा लगता है कोई… . ना आएगा दिल मे सवाल ए हयात का कोई… . बसा हो गहरा घना समंदर मेरी निगाहो मे कोई… . बिन मौसम हि बरसता है, जैसे छुपा हो सावन कोई… . क्यो आया ये दौर समझदारी का… .! काश लौटा सके दौर ए बच्चपना कोई… . @Sanaya_10_13

मैं लिखना चाहती हूँ...कुछ ऐसा, कि सुनते ही, सब स्तब्ध रह जाएँ... मानो समय ने अचानक अपनी धड़कने रोक दी हो, और ब्रह्मांड..... क
मैं लिखना चाहती हूँ...कुछ ऐसा, कि सुनते ही, सब स्तब्ध रह जाएँ... मानो समय ने अचानक अपनी धड़कने रोक दी हो, और ब्रह्मांड..... कुछ क्षणों के लिए गति शून्य में चला जाए.... मैं शब्द नहीं लिखना चाहती मैं उन स्वरों को छेड़ना चाहती हूँ जो लोगों के भीतर वर्षों से दबे भावों को..पछतावे को... और अधूरेपन को सुंदर नवपल्लवन दे। अधूरी ख्वाहिशें 🥀 @Adhuri_zindagi786 ꯭꯭⎯꯭꯭꯭ᷝ‌⎯ⷨ‌꯭꯭꯭‌͓ ꯭꯭𝐆꯭𝛂꯭𝛈𝐠꯭𝛆𝐬꯭𝛕꯭𝛆𝐫 ꯭𝐆꯭𝛊𝐫𝐥꯭💗꯭𝅃꯭꯭᳚ꀭ꯭‧₊꯭♡゙꯭꯬꯭

काश❗ हम अपनी आंखों को निकाल पाते ! उनके दीदार की हसरत ही... खत्म हो जाती !! अधूरी ख्वाहिशें 🥀 @Adhuri_zindagi786 ꯭꯭⎯꯭꯭꯭ᷝ‌⎯ⷨ‌
काश❗ हम अपनी आंखों को निकाल पाते ! उनके दीदार की हसरत ही... खत्म हो जाती !! अधूरी ख्वाहिशें 🥀 @Adhuri_zindagi786 ꯭꯭⎯꯭꯭꯭ᷝ‌⎯ⷨ‌꯭꯭꯭‌͓ ꯭꯭𝐆꯭𝛂꯭𝛈𝐠꯭𝛆𝐬꯭𝛕꯭𝛆𝐫 ꯭𝐆꯭𝛊𝐫𝐥꯭💗꯭𝅃꯭꯭᳚ꀭ꯭‧₊꯭♡゙꯭꯬꯭

ये जनाज़े रसमे रिवाजे… . ये रिश्ते लोग पैसे सब बेकाम है सनाया… . कि यहाँ तो जिस्म रुप खुशीया सब खुदा का दिया है… . क्यु मांगता है तु कुछ किसीसे… . जब तुझे जिंदगी भी दि मेरे खुदा ने है… . तुझे चाह है जिंदगी कि , मौत मिलती भी किसे मांगने से है… . देख तेरे आस पास खडे कितने तेरे अपने है… . कौन है जो अपनो मे भी छिपा गैर है… . कभी ख्वाइश ए खुदा कर तु कभी अपने अनजाने गुनाहो कि माफी मांग तु… . जीले यहा जमीं पर जी भर के… . फिर रहना भी तो है तुझे जिस्म से जुदा रहके… . जिस्म भी है एक मिट्टी का, इसे क्यु संभालना जैसे हो पारस का… . लगाव ना रख इस दुनिया से… . एक दिन इसे छोड जाना है तुझे भी खुशि से… . @Sanaya_10_13

. वक्त रहते जब कदर ना हो तो वक्त गुज़रे की गई कदर सनाया फिज़ुल होती हैं @Sanaya_10_13✨ .

मेरे सपनो को इस तरह कुचल दिया गया है… . मानो जैसे कोई कचरा फेंक दिया गया है… . वो अपनो के नाम पर गैर बसे है… . मानो जैसे फुल पर तितली के नाम पर किडे बसे है… . घर वाले भी मेरे विलुप्त रहने लगे है… . मानलो किसीने सबके कान भर दिए है… . हाथो मे मेरे मंजील कि निशां बाकी रह गई है… . अब तो जैसे वो भी रेत कि तरह छुटने लगी है… . @Sanaya_10_13

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