· "🍃 𝐔𝝶𝘀𝝴𝝴𝝶 𝐖𝞂𝗿𝗱 ✿
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यहाँ काँप जाते हैं फ़लसफ़े ये बड़ा अजीब मक़ाम है
जिसे अपना अपना ख़ुदा कहें उसे सज्दा करना हराम है
मेरी बे-रूख़ी से न हो ख़फ़ा मेरे नासेहा मुझे ये बता
जो नज़र से पीता हूँ मैं यहाँ वो शराब कैसे हराम है
जो पतिंगा लौ पे फ़िदा हुआ तो तड़प के शमा ने ये कहा
इसे मेरे दर्द से क्या ग़रज़ ये तो रौशनी का ग़ुलाम है
शब-ए-इंतिज़ार में बारहा मुझे ‘अनवर’ ऐसा गुमाँ हुआ
जिसे मौत कहता है ये जहाँ वो किसी के वादे का नाम है
अनवर मिर्जापुरी
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तेरे चाहने वालों को ये भी मालूम नहीं
तारे गिनना शौक़ नहीं बीमारी होता है
#शकील_जमाली
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मुझे नफ़रत है जुबान की हमदर्दियो से,
अगर तेरे हाथ में ख़जर है तो गले पे रख।
🔪
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हे ईश्वर इन श्राद्धपक्ष मे उन लोगो की
आत्मा को भी शान्ति दो...🐦⬛
जिनकी आत्मा,मुझे देखकर जलती है
और कुड कुड करती है.!🙈
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खुश्क आँखों में निखरता ग़म तुम्हारा है,,
माँ जानती है उसका लाड़ला इश्क़ में हारा है।। 💔
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ह्रदय....
हमारी देह का सबसे भारी अंग है,
वह कोशिकाओं से नहीं अनुभूतियों से बनता है...😊
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लाज़िम नहीं हर बार तुझे हम हों मयस्सर..,
मुमकिन है तू इस बार हमें सच में गंवा दे..!!!
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Repost from ❣__ख़याल-ए-दिल__♥️
किसी और को अपना बना के देखो उन बेवफाओ के दिल पे मरहम लगा के देखो कितनी हसीन होती है जिंदगी किसी को अपने दिल के जख्म बता के देखो...!#राधे
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जिंदगी मे किताबों और कलम कि ही तो जरुरत पडी है… .
कि अपनो से दुरी कि जरुरत हि नही पडी है… .
छोड़कर मासुमियत समझदारी कि जरुरत नही पडी है… .
इतमिनान ए उम्र छोड जिम्मेदारी कि जरुरत हि नही पडी है… .
है घरपर सबके चहेते हम, सबकी ऐतबार मे हमेशा नजर पडी है… .
हमे तो मौहब्बत करने कि जरुरत हि नही पडी है… .
@Sanaya_10_13✨
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जिसपर खुदा कि इनायत हुई हो… .
उसे दुनिया की हसरतें क्या होगी… .
जिसपर नजर हो खुदाकी… .
उसे दुनिया मे तकलिफे क्या होगी… .
जिसका मुकद्दर लिखा हो खुदा ने… .
उसे चाहत क्या होगी… .
जिसको साथ हो खुदाका… .
उसपर दुनिया मे खरौंच भी कैसे होगी… .
✨
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नाम के लोग
घर में रहते हैं मगर दिल से कहाँ साथ रहे, कितने रिश्ते यहाँ बस नाम के रिश्ते रहे। माँ ने आवाज़ दी तो लौट आया घर की ओर, वरना हम भी कहाँ अपने थे, बस दुनिया में रहे। जिसको अपना समझा, उसने ही बाज़ार किया, हम भरोसा लिए बैठे रहे, वो सौदे रहे। इश्क़ ऐसा था कि बिछड़े तो कोई शोर न था, फिर भी आँखों में कई उम्र के सदमे रहे। सच कहा हमने तो चेहरे कई बदलते गए, लोग इंसान नहीं, अपने फ़ायदे के रहे। मैंने तन्हाई से पूछा तू ही अपना है क्या? वो भी चुप थी, तो कई सवाल मेरे रहे। ज़िंदगी रोज़ हमें आईना दिखलाती रही, हम मगर ख़ुद से ही बचते हुए कितने रहे। अब किसी नाम से पहचान नहीं होती मेरी, राधे, कुछ लोग थे जो दिल में मगर ज़िंदा रहे।#राधे
