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ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜

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हर रात रहूं मैं करीब तेरे, हर सवेरा तेरे साथ हो मैं ज़िंदगी इतनी बेहतरीन चाहती हूं , तेरी बाहों में रुके सांसें मेरी , मौत भी मैं इतनी हसीन चाहती हूं।।🥺❤️

मेरे आंखें बन्द करने पर , तुम्हारे होंठ इजाज़त लेने के लिए नहीं बने हैं ....👀

पुरुष को एक ऐसी प्रेमिका की चाह होती है! जिसे सिर्फ प्रेम न चाहिए हो! जो समझे उसकी पीड़ा, कष्ठ,औऱ अवसाद को! और किसी जादूगरनी की तरह उसकी सारी पीड़ाओं को बदलकर एक चुम्बन बना दे! और फेंक के मारे माथे पर! ओर दोनों सुकून में विलीन हो जाए! 🌀🌻❣ ~Abhiwrites💗

🫰🌻

क्यों बात बढ़ा रखी है, दिल ही तो टूटा है! क्यों आग लगा रखी है,सनम ही तो रूठा है! ज़िद में नौकरी भी चली जायेगी, बेशक पेपर एक ही छूटा है! वो भी दौड़ कर आएगी,जब जानेगी लड़का अफसर बन कर लौटा है!         ~अभि🩵

कुछ ऐसे वो अपनी मोहब्बत का आगाज़ करते है, आंखों में शरारत लिए वो मुझसे दिल लगाने की बात करते है! कहते है आप यकीनन इंसान अच्छे हो, फिर ये कौन है जो आपसे दूर जाने की बात करते है! ~अभि🫰

मुझे बस इक काम आता है, ये लफ़्ज़ों को बनाने का! कभी कम बनाता हूँ कभी बहुत सारे बनाता हूँ। कभी मीठे बनाता हूँ, कभी खारे बनाता  हूँ! कभी चांद तो कभी तारे बनाता हूँ। टूटे हुए इंसानों के सहारे बनाता हूँ। जिसने जैसा देखा वैसा पाया मुझे। कभी समंदर तो कभी किनारे बनाता हूँ! कभी आग जलाता हूँ कभी अंगारे बनाता हूँ। मैं कितना भी बेरंग रहूं तेरे लिए। कभी तितली, कभी जुगुन कभी तारे बनाता हूँ। आपने कहा न मेरी आवाज़ से मैं नही मिलता। तो कभी पतझड़ तो कभी बहारें बनाता हूँ। आंखों को जिसका इंतज़ार रहे, वो खूबसूरत नजारे बनाता हूँ। ~Abhiwrites✅

ज़रा सी तबियत बिगड़ने पे उसकी , मैं , खयाल, सवाल, फिक्र, दुआ... सब करती हूं. उलझा उलझा सा रवैया है वरना, मैं लहज़े में लापरवाहियां लिए फिरती हूं।😌🎀

तेरी आज़ाद निगाहे, मेरी प्यासी खामोशी को कैसे पढेंगी! ~अभि🫰

समझदारियां छीन लेंगी चेहरे की सारी हंसी लुत्फ़ जो है..... नादानियों में ही है ।। Good morning everyone 🌸🌞

मेरी नफ़रत के हक़दार सिर्फ वो कहलाए, जिन्हें मयस्सर रहा तेरे आस पास रहना! ~अभि🫰

चाहती है वो कि मेरी बाहों में आके सारा दर्द रो ले। लेकिन मजबूर मैं, किसी के यादों के धागों से बंधा हूँ।     ~अभि🩵

थक गई मैं , इन चलती सांसो और खुली आंखों से , तू जो सहलाये माथा , तो ज़रा सो लूं मैं... ये झूठी मुस्कुराहटें धीमा जहर है, तू ज
थक गई मैं , इन चलती सांसो और खुली आंखों से , तू जो सहलाये माथा , तो ज़रा सो लूं मैं... ये झूठी मुस्कुराहटें धीमा जहर है, तू जो भरे बाहों में , तो ज़रा रो लूं मैं....🍂

उलझनों और जिम्मेदारियों ने थामे रखा हाथ मेरा , फुरसतें पुछती रही , हमे वक्त कब दोगे ....?🙂😌

Main tere itna paas aana chahata hun Ki jitni paas tere tu bhi khud nhi ...🥹🎼

मुक्कमल ना हुई जो पहली मोहब्बत तो सोचा , पहला ख़्वाब पूरा कर लूं दिल टूटा रहे ताउम्र मगर चेहरे पर रुआब पूरा कर लूं.... 😌

समंदर सी ख्वाइशें है अपनी, समंदर कभी लहरों के बिछड़ने का अफसोस नहीं मनाता! ~अभि🫰

उसे ये गुमान के मुझे मयस्सर नहीं कोई मुझे ये फितूर के दिल किस किस को दूं ... 🦋

मैं ठहरा गणित का विद्यार्थी , मग़र उसकी जुल्फों में उलझा रहता था! ~अभि🫰

समंदर को गुरुर रहा उसकी गहराई पर और मुझे उसके ठहराव से इश्क़ हो गया ...🩵