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अच्छी बातें, अच्छे विचार और अच्छे संस्कार!!आध्यात्मिक संसार!! ये हैं सफलता के मंत्र अपार!! 👉खुद से वादा 👉मेहनत ज्यादा 👉मजबूत इरादा Share channel link everywhere t.me/positivetalk

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*सकल पदारथ है जग माही ।* *कर्महीन नर पावत नाही ।।* ✍ ईश्वर ने संसार में मनुष्य को बिना किसी भेदभाव के सभी साधन और साध्य उपलब्ध कराये है । ✍ कलियुग में कर्म को प्रधान बताया गया है । ✍ कर्म को सुख-दुख, लाभ-हानि, आनंद-शोक का मूल माना गया है । ✍ निष्काम कर्मयोगी जीवन में सुख, लाभ और आनंद पाता है ।असफलता पर अपनी कमियाँ ढूंढ़कर सुधार करता है । ✍ अकर्मण्य और भाग्यवादी मनुष्य, असफल होने पर सारा दोष, भाग्य, दूसरों पर तथा समदर्शी, न्यायवादी ईश्वर पर डालता है । 🙏🙏

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Photo from Anand Satsangi
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*मन के हारे हार है, मन के जीते जीत ।* *कह कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीत ॥* ✍️ मनुष्यअपने जीवन में जय और पराजय को बहुत महत्व देता है । ✍️ परंतु वास्तव में जय और पराजय सिर्फ मन की भावनाएं/सोच हैं । ✍️ यदि व्यक्ति मन से निराश हो गया तो समझो वह हार गया और यदि उसनें मन में जीत लिया तो वह निश्चित ही विजेता बनेगा। ✍️ ठीक इसी प्रकार ईश्वर को भी मन के विश्वास से ही प्राप्त किया जा सकता हैं । ✍️ यदि ईश्वर प्राप्ति/सान्निध्य का मन को भरोसा ही नहीं तो ईश्वर का सान्निध्य/कृपा/मार्गदर्शन कैसे पाएंगे । 🙏🙏
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Photo from Anand Satsangi
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*अच्छा होना अच्छा है, लगता इसमें दाम नहीं ।* *अच्छा बनते जाने से, अच्छा कोई काम नहीं।।* ✍️ सोचकर देखें कि क्या हम सभी अच्छा बनना/बने रहना चाहते है कि नहीं ? ✍️ हम सभी अच्छे मित्र, अच्छे पड़ोसी, अच्छा मोहल्ला, अच्छा वातावरण, अच्छा शहर, अच्छा प्रदेश और अच्छा देश चाहते हैं। ✍️ हम जब भी कोई भी अच्छा काम करते हैं तो सभी से प्रशंसा या आशीर्वाद मिलते हैं और हमे इससे प्रसन्नता/सुख की अनुभूति होती है। ✍️ अच्छा बनने के लिए हमे स्वार्थ से ज्यादा परमार्थ पर ध्यान देना पड़ता है। ✍️ अगर हम संकल्पित होकर अच्छा बनना शुरू कर दें तो निश्चित रूप से हमारे भाई -बहन, मित्र, पड़ोसी, मोहल्ला, शहर आदि सभी अच्छे हो जायेंगे। 🙏🙏
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प्रेम का प्रमाण साथ है ! रिश्ता वहीं मजबूत होता है जहाँ माफ़ी बडी हो.! @positivetalk
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Photo from Anand Satsangi
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*💐💐उद्देश्य की पवित्रता 💐💐* प्राचीन समय की बात है। हिमालय की तलहटी में स्थित एक छोटे से राज्य पर राजा धर्मकेतु का शासन था। वे न्यायप्रिय और प्रजावत्सल राजा थे। उनके राज्य में सत्य और धर्म का बड़ा सम्मान था। उसी राज्य में माधव नाम का एक युवक रहता था। वह गरीब था, लेकिन उसका हृदय करुणा और सेवा भाव से भरा हुआ था। एक दिन माधव जंगल से होकर अपने गांव लौट रहा था। तभी उसने देखा कि कुछ डाकू एक वृद्ध साधु को घेरकर उनका धन छीनने का प्रयास कर रहे हैं। साधु असहाय थे और सहायता के लिए पुकार रहे थे। माधव जानता था कि वे डाकू बहुत शक्तिशाली हैं और अकेले उनका सामना करना उसके लिए आसान नहीं होगा। फिर भी उसके मन में एक ही विचार आया—"यदि मैं आज इनकी सहायता नहीं करूंगा, तो मेरा जीवन व्यर्थ है।" उसने साहस जुटाया और डाकुओं के सामने खड़ा हो गया। माधव ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। अंततः संघर्ष शुरू हो गया। डाकुओं ने माधव को बुरी तरह घायल कर दिया। उसके शरीर पर अनेक घाव हो गए और वह बेहोश होकर भूमि पर गिर पड़ा। डाकू साधु का धन लेकर भाग गए। कुछ समय बाद गांव वाले वहां पहुंचे और माधव को घायल अवस्था में देखकर उसे घर ले गए। कई दिनों तक उसका उपचार चलता रहा। लोगों ने कहा, "तुम्हें क्या मिला उस साधु की रक्षा करने से? न साधु का धन बचा और न ही तुम जीत सके।" माधव मुस्कुराया और बोला, "मैं परिणाम के लिए नहीं, अपने कर्तव्य के लिए खड़ा हुआ था। यदि मैं डरकर पीछे हट जाता, तो जीवनभर स्वयं की नजरों में गिर जाता।" यह बात धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैल गई। जब राजा धर्मकेतु को इस घटना का पता चला, तो उन्होंने माधव को राजसभा में बुलाया। राजा ने कहा, "पुत्र! लोग तुम्हें असफल समझ रहे हैं, क्योंकि तुम डाकुओं को रोक नहीं सके। लेकिन मेरी दृष्टि में तुम विजेता हो। विजय केवल परिणाम से नहीं मापी जाती, बल्कि उस उद्देश्य से मापी जाती है जिसके लिए कर्म किया जाता है।" राजा ने माधव को सम्मानित किया और राज्य की सुरक्षा सेना में महत्वपूर्ण पद दिया। उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों से कहा, "यदि किसी का उद्देश्य स्वार्थ, अहंकार या लालच हो, तो उसका सफल होना भी महान नहीं कहलाता। लेकिन यदि किसी का उद्देश्य धर्म, करुणा और परोपकार हो, तो उसका प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता, चाहे परिणाम कुछ भी हो।" उस दिन सभी को एक गहरी शिक्षा मिली। माधव ने भी समझ लिया कि सच्ची सफलता बाहरी जीत में नहीं, बल्कि अपने मन की पवित्रता में छिपी होती है। *शिक्षा:* कर्म की महानता उसके परिणाम से नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे उद्देश्य की पवित्रता से तय होती है। पवित्र उद्देश्य से किया गया प्रयास कभी निष्फल नहीं जाता, क्योंकि वह व्यक्ति के चरित्र और आत्मा को महान बना देता है। 🌹🙏🏻 *💐 *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏 @positivetalk
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🌹🌹सुप्रभात 🌹🌹
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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐तिनकों का घोंसला और बरगद की छांव💐💐* जून की वह गुनगुनी सुबह आम दिनों जैसी नहीं थी। आज फादर्स डे था। शहर के बड़े-बड़े विज्ञापनों और सोशल मीडिया पर पिताओं के सम्मान में संदेश तैर रहे थे। लेकिन शहर से दूर, राजस्थान के राजसमंद जिले के एक छोटे से गाँव में रहने वाले बूढ़े रामजी लाल के लिए यह दिन रोज़ जैसा ही था। सुबह उठकर पौधों को पानी देना, घर की टूटी मुंडेर को निहारना और अपने बेटे आकाश की राह देखना ही उनकी दिनचर्या थी। रामजी लाल जीवन भर एक साधारण सरकारी स्कूल में मामूली चपरासी रहे थे। उनके पास न तो बड़ी धन-दौलत थी और न ही समाज में कोई बड़ा पद। लेकिन उनके पास एक अमूल्य धरोहर थी—उनका आत्मसम्मान, ईमानदारी और अपने बच्चों के लिए असीम त्याग। उनका मूक संघर्ष और निस्वार्थ भावना ही उनके परिवार का असली रक्षक थी। जब आकाश छोटा था, तो स्कूल की फीस समय पर जमा हो, उसकी किताबें अधूरी न रहें और उसके सपनों को ऊंची उड़ान मिले, इसके लिए रामजी लाल ने न जाने कितनी रातें जागकर काटी थीं। वे अपनी इच्छाओं और सुविधाओं को हमेशा पीछे धकेल देते थे और परिवार की जरूरतों को प्राथमिकता देते थे। आकाश को याद था कि कैसे एक बार कड़कड़ाती ठंड में पिता ने अपने लिए नया स्वेटर नहीं खरीदा, बल्कि उन्हीं पैसों से आकाश के लिए परीक्षा की गाइड लाकर दी थी। वे कम बोलते थे, लेकिन हर परिस्थिति में ढाल बनकर खड़े रहते थे। आज आकाश शहर में एक बेहद प्रतिष्ठित पद पर पहुंच चुका था। वह बड़ा आदमी बन गया था, लेकिन इस भागदौड़ भरी जिंदगी में वह भी 'सही समय आने पर धन्यवाद कहेंगे' वाली भूल कर बैठा था। वह अक्सर सोचता कि जब बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा, तब पिता को एक आलीशान जिंदगी तोहफे में देगा। मगर वह यह भूल गया था कि पिताओं को आलीशान तोहफे नहीं, बल्कि बच्चों का थोड़ा सा वक्त और सम्मान चाहिए होता है। फादर्स डे के दिन आकाश अचानक बिना बताए गाँव पहुंचा। उसने देखा कि धूप तेज हो चुकी थी और उसके वृद्ध पिता आंगन में लगे बरगद के पौधे को सहेज रहे थे, जिसके पत्ते तेज गर्मी में झुलस रहे थे। पिता के फटे हुए जूतों और ढीली पड़ चुकी कमीज को देखकर आकाश का दिल भर आया। उसे अखबार में पढ़ी वह बात याद आ गई कि *'हम उनके इस मूक संघर्ष और असीम त्याग का कर्ज कभी नहीं चुका सकते।'* आकाश चुपके से पीछे से गया और उसने अपने पिता को कसकर गले लगा लिया। रामजी लाल चौंक गए। उन्होंने मुड़कर देखा तो बेटे की आँखों में आंसू थे। आकाश ने रुंधे गले से कहा, "बाबूजी, मैं हमेशा सही समय का इंतजार करता रहा कि जब बहुत काबिल बन जाऊंगा तब आपको शुक्रिया कहूंगा। पर आज मैं समझ गया कि आपके दिए छोटे-छोटे त्याग कितने बड़े थे। आपने खुद को मिटाकर मुझे बनाया है। मुझे माफ कर दीजिए कि मैं कभी खुलकर आपकी कद्र नहीं कर पाया।" रामजी लाल की पथराई आँखों में खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने आकाश के सिर पर हाथ फेरा और धीमी आवाज में बोले, "बेटा, पिता को कभी धन्यवाद नहीं चाहिए होता। तू बस ईमानदारी के रास्ते पर चलता रह, मेरी पूरी जिंदगी की तपस्या सफल हो जाएगी।" *कहानी से प्रेरणा:* यह कहानी हमें सिखाती है कि पिता का प्यार अक्सर जिम्मेदारियों के पीछे छुपा रहता है। वे अपने दुखों और संघर्षों का बखान नहीं करते, बल्कि हमें सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास करते हैं। जीवन में कभी भी पिता को 'थैंक यू' कहने के लिए किसी विशेष बड़े अवसर या सही समय का इंतजार न करें; क्योंकि वह सही समय अक्सर आता ही नहीं है।
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*शराफ़त और तहज़ीब की* *नकाब ओढ़कर बैठे थे..* *हवा ज़रा सी तेज क्या हुई..* *सबके किरदार बेपर्दा हो गए..!!* सुप्रभात 🙏💐
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