fa
Feedback

فریب کلاهبرداران را نخورید! تل‌متریو این کانال‌ها را شناسایی و برچسب‌گذاری می‌کند 👉 برای مشاهده برچسب، اشتراک تهیه کنید 👈

PositiveTalk

PositiveTalk

رفتن به کانال در Telegram

अच्छी बातें, अच्छे विचार और अच्छे संस्कार!!आध्यात्मिक संसार!! ये हैं सफलता के मंत्र अपार!! 👉खुद से वादा 👉मेहनत ज्यादा 👉मजबूत इरादा Share channel link everywhere t.me/positivetalk

نمایش بیشتر
1 946
مشترکین
اطلاعاتی وجود ندارد24 ساعت
-57 روز
+330 روز
جذب مشترکین
اکتبر '26
اکتبر '26
+11
در 0 کانال‌ها
سپتامبر '26
+51
در 1 کانال‌ها
Get PRO
اوت '26
+33
در 1 کانال‌ها
Get PRO
ژوئیه '26
+37
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئن '26
+50
در 1 کانال‌ها
Get PRO
مه '26
+26
در 0 کانال‌ها
Get PRO
آوریل '26
+24
در 1 کانال‌ها
Get PRO
مارس '26
+16
در 0 کانال‌ها
Get PRO
فوریه '26
+19
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژانویه '26
+26
در 0 کانال‌ها
Get PRO
دسامبر '25
+20
در 0 کانال‌ها
Get PRO
نوامبر '25
+20
در 0 کانال‌ها
Get PRO
اکتبر '25
+20
در 0 کانال‌ها
Get PRO
سپتامبر '25
+24
در 0 کانال‌ها
Get PRO
اوت '25
+27
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئیه '25
+21
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئن '25
+24
در 1 کانال‌ها
Get PRO
مه '25
+26
در 0 کانال‌ها
Get PRO
آوریل '25
+27
در 1 کانال‌ها
Get PRO
مارس '25
+27
در 4 کانال‌ها
Get PRO
فوریه '25
+22
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژانویه '25
+54
در 1 کانال‌ها
Get PRO
دسامبر '24
+96
در 0 کانال‌ها
Get PRO
نوامبر '24
+63
در 1 کانال‌ها
Get PRO
اکتبر '24
+58
در 0 کانال‌ها
Get PRO
سپتامبر '24
+97
در 1 کانال‌ها
Get PRO
اوت '24
+133
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئیه '24
+96
در 2 کانال‌ها
Get PRO
ژوئن '24
+97
در 2 کانال‌ها
Get PRO
مه '24
+122
در 0 کانال‌ها
Get PRO
آوریل '24
+110
در 1 کانال‌ها
Get PRO
مارس '24
+125
در 2 کانال‌ها
Get PRO
فوریه '24
+109
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژانویه '24
+77
در 0 کانال‌ها
Get PRO
دسامبر '23
+43
در 0 کانال‌ها
Get PRO
نوامبر '23
+4
در 0 کانال‌ها
Get PRO
اکتبر '23
+4
در 0 کانال‌ها
Get PRO
سپتامبر '23
+5
در 0 کانال‌ها
Get PRO
اوت '23
+7
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئیه '23
+11
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئن '23
+8
در 0 کانال‌ها
Get PRO
مه '23
+8
در 0 کانال‌ها
Get PRO
آوریل '23
+3
در 0 کانال‌ها
Get PRO
مارس '23
+4
در 0 کانال‌ها
Get PRO
فوریه '23
+8
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژانویه '23
+11
در 0 کانال‌ها
Get PRO
دسامبر '22
+1
در 0 کانال‌ها
Get PRO
نوامبر '22
+5
در 0 کانال‌ها
Get PRO
اکتبر '22
+6
در 0 کانال‌ها
Get PRO
سپتامبر '22
+13
در 0 کانال‌ها
Get PRO
اوت '22
+14
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئیه '22
+9
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئن '22
+17
در 0 کانال‌ها
Get PRO
مه '22
+11
در 0 کانال‌ها
Get PRO
آوریل '22
+6
در 0 کانال‌ها
Get PRO
مارس '22
+10
در 0 کانال‌ها
Get PRO
فوریه '22
+4
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژانویه '22
+9
در 0 کانال‌ها
Get PRO
دسامبر '21
+14
در 0 کانال‌ها
Get PRO
نوامبر '21
+22
در 0 کانال‌ها
Get PRO
اکتبر '21
+16
در 0 کانال‌ها
Get PRO
سپتامبر '21
+20
در 0 کانال‌ها
Get PRO
اوت '21
+14
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئیه '21
+15
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژوئن '21
+38
در 0 کانال‌ها
Get PRO
مه '21
+35
در 0 کانال‌ها
Get PRO
آوریل '21
+25
در 0 کانال‌ها
Get PRO
مارس '21
+72
در 0 کانال‌ها
Get PRO
فوریه '21
+28
در 0 کانال‌ها
Get PRO
ژانویه '21
+57
در 0 کانال‌ها
Get PRO
دسامبر '20
+2 607
در 0 کانال‌ها
تاریخ
رشد مشترکین
اشارات
کانال‌ها
08 اکتبر+1
07 اکتبر0
06 اکتبر+1
05 اکتبر+3
04 اکتبر+1
03 اکتبر+1
02 اکتبر+2
01 اکتبر+2
پست‌های کانال
Photo from Anand Satsangi
Photo from Anand Satsangi

2
Photo from Anand Satsangi
Photo from Anand Satsangi
64
3
*कुछ सहन करना सीखना* *चाहिए क्योंकि हममें भी* *ऐसी बहुत सी कमियां है* *जिन्हें दूसरे लोग सहन* *करते है* *🙏 सुप्रभात 🙏GOOD MORNING* @positivetalk
171
4
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐ईश्वर पर विश्वास💐💐* हिमालय की गोद में स्थित एक पवित्र तीर्थस्थल के समीप एक संत अपनी कुटिया में निवास करते थे। वे जन्म से ही नेत्रहीन थे। उनकी आँखों में संसार को देखने का प्रकाश भले ही नहीं था, लेकिन उनके अंतर्मन में ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का प्रकाश सदैव जलता रहता था। संत का प्रतिदिन एक नियम था। संध्या होते ही वे अपनी कुटिया से निकलते और पर्वतीय मार्गों पर भ्रमण करते हुए भगवान के नाम का स्मरण करते रहते। ऊँचे-ऊँचे पर्वत, घने वन और गहरी घाटियाँ उनके मार्ग में आतीं, लेकिन उनके कदम कभी नहीं रुकते थे। एक दिन उनके एक शिष्य ने विनम्रता से पूछा, “गुरुदेव! आप प्रतिदिन इतने दुर्गम पर्वतीय मार्गों पर अकेले भ्रमण करने निकल जाते हैं। आपको दिखाई भी नहीं देता। इन रास्तों पर गहरी खाइयाँ हैं, ऊँची चट्टानें हैं और कहीं-कहीं मार्ग भी बहुत सँकरा है। यदि चलते समय आपका पैर फिसल जाए तो क्या होगा? क्या आपको भय नहीं लगता?” संत मुस्कुराए, लेकिन उस समय उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। संध्या के समय उन्होंने शिष्य से कहा, “आज तुम मेरे साथ चलो।” दोनों पर्वतीय मार्ग पर आगे बढ़ने लगे। कुछ दूर जाने के बाद संत ने कहा, “जब हमारे सामने कोई गहरी खाई आए, तो मुझे बता देना।” दोनों आगे बढ़ते रहे। कुछ समय बाद शिष्य ने देखा कि सामने एक अत्यंत गहरी खाई थी। उसने तुरंत कहा, “गुरुदेव, सामने गहरी खाई है।” संत ने शांत स्वर में कहा, “अच्छा, तो मुझे इस खाई में धक्का दे दो।” शिष्य यह सुनकर घबरा गया। उसने हाथ जोड़कर कहा, “गुरुदेव! मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ? आप मेरे गुरु हैं। मैं तो अपने किसी शत्रु को भी जानबूझकर मृत्यु के मुख में नहीं धकेल सकता।” संत ने फिर कहा, “यह मेरी आज्ञा है। मुझे खाई में धक्का दे दो।” शिष्य की आँखों में आँसू आ गए। उसने कहा, “गुरुदेव, यदि आपकी आज्ञा न मानने से मुझे कोई दंड भी मिले, तो मैं स्वीकार कर लूँगा, लेकिन आपको खाई में नहीं धकेल सकता।” संत मंद-मंद मुस्कुराए और बोले, “वत्स! जब तुम जैसे एक साधारण मनुष्य के भीतर भी मुझे गिरने से बचाने की भावना है, तो क्या तुम्हें लगता है कि मेरा परमात्मा मुझे गिरने देगा?” शिष्य मौन हो गया। संत ने आगे कहा, “जिस परमात्मा पर मैंने अपना जीवन समर्पित कर दिया है, वह हर क्षण मेरे साथ है। वह किसी को गिरते हुए देखकर प्रसन्न नहीं होता। वह तो गिरे हुए को उठाता है, भटके हुए को मार्ग दिखाता है और निराश मनुष्य को आशा देता है।” “हमें अपने जीवन में अनेक बार ऐसी परिस्थितियाँ दिखाई देंगी, जहाँ आगे का मार्ग दिखाई नहीं देगा। कभी संकट गहरी खाई जैसा लगेगा, कभी समस्याएँ पर्वत जैसी लगेंगी। लेकिन यदि मन में ईश्वर के प्रति सच्चा विश्वास हो, तो हमें यह भरोसा रखना चाहिए कि हम अकेले नहीं हैं।” शिष्य ने गुरु के चरणों में सिर रख दिया। उस दिन उसे समझ आया कि ईश्वर पर विश्वास का अर्थ यह नहीं कि जीवन में कठिनाइयाँ कभी आएँगी ही नहीं; बल्कि इसका अर्थ है कि कठिनाइयों के बीच भी हमारा विश्वास नहीं टूटेगा। जिसके हृदय में सच्ची श्रद्धा और विश्वास है, उसके लिए अंधकार में भी ईश्वर मार्गदर्शक बन जाता है। ईश्वर हमें हर संकट से पहले नहीं बचाता, लेकिन संकट के बीच हमारा हाथ कभी नहीं छोड़ता। @positivetalk
195
5
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐जिसे बाहर खोजते रहे, वह भीतर ही विराजमान था💐💐* एक समय कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती विराजमान थे। एक दिन माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्रों—भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय—को अपने पास बुलाया। माता पार्वती ने कहा, “मेरे दोनों पुत्रों में से जो सबसे पहले पूरे संसार की परिक्रमा करके वापस आएगा, वही विजयी माना जाएगा।” यह सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर संसार की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। उनके मन में विजय का विश्वास था। भगवान गणेश ने अपने छोटे से वाहन मूषक की ओर देखा। वे जानते थे कि मूषक के लिए पूरे संसार की परिक्रमा करना अत्यंत कठिन होगा। कुछ क्षण सोचने के बाद गणेश जी माता-पिता के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती की तीन बार परिक्रमा की और उनके चरणों में प्रणाम किया। कार्तिकेय जब संसार की परिक्रमा करके लौटे तो उन्होंने देखा कि गणेश जी पहले ही विजेता घोषित हो चुके हैं। उन्होंने आश्चर्य से पूछा, “भैया गणेश ने तो संसार की परिक्रमा की ही नहीं, फिर इन्हें विजेता क्यों माना गया?” भगवान गणेश मुस्कुराए और बोले— “माता-पिता मेरे लिए सम्पूर्ण संसार हैं। जिनके भीतर संसार का सार है, उनकी परिक्रमा करना ही मेरे लिए पूरे संसार की परिक्रमा करना है।” भगवान शिव और माता पार्वती गणेश जी की बुद्धिमत्ता देखकर प्रसन्न हुए। यह कथा केवल गणेश जी की बुद्धि और श्रद्धा का उदाहरण नहीं है, बल्कि हमारे जीवन के लिए भी एक गहरा संदेश देती है। हम मनुष्य भी अक्सर सुख, शांति और ईश्वर की खोज संसार के बाहर करते रहते हैं। कोई धन में सुख खोजता है, कोई प्रसिद्धि में, कोई बड़े भवनों में, कोई यात्राओं में और कोई दूसरों की प्रशंसा में। लेकिन जब मन अशांत होता है तो ये सारी चीजें भी हमें वास्तविक शांति नहीं दे पातीं। भगवान गणेश हमें सिखाते हैं कि बुद्धि का वास्तविक उपयोग बाहर की दुनिया जीतने में नहीं, बल्कि अपने भीतर की दुनिया को समझने में है। जिस प्रकार सुगंध फूल के भीतर होती है, उसी प्रकार शांति हमारे अंतःकरण में छिपी होती है। हम मंदिरों में जाते हैं, तीर्थों पर जाते हैं, भगवान को पाने के लिए अनेक उपाय करते हैं, लेकिन अपने मन के भीतर झाँकना भूल जाते हैं। भगवान गणेश का संदेश मानो यही कहता है— “जिसे तुम संसार भर में खोज रहे हो, पहले उसे अपने भीतर खोजो। जिस शांति के लिए तुम भटक रहे हो, उसका द्वार तुम्हारे भीतर ही है।” जब मन से अहंकार कम होता है, कर्मों में पवित्रता आती है, दूसरों के प्रति प्रेम जागता है और भीतर श्रद्धा उत्पन्न होती है, तब मनुष्य को अपने भीतर ईश्वर की अनुभूति होने लगती है। इसलिए भगवान गणेश की पूजा केवल उनके स्वरूप की पूजा नहीं, बल्कि विवेक, श्रद्धा, धैर्य और आत्मज्ञान को अपने जीवन में उतारने का संकल्प भी है। गणपति बप्पा हमें ऐसी बुद्धि दें कि हम संसार को जीतने से पहले स्वयं को जीतना सीखें। @positivetalk
206
6
झांकने की सबसे बेहतरीन .... जगह दूसरो का घर नहीं.... बल्कि खुद का गिरेबान है .....!!!! @positivetalk
184
7
بدون متن...
234
8
Photo from Anand Satsangi
Photo from Anand Satsangi
251
9
मेरी बिटिया ने अपनी यूरोप यात्रा से लौट कर मुझे एक ऐसा किस्सा सुनाया जिसे सुनकर मैं देर तक सोचता रहा, और लगा कि ये सिर्फ एक किस्सा नहीं, हम सबके लिए एक आईना है। वह एम्स्टर्डम में Costco स्टोर गई थी। बाहर हल्की ठंड थी, लोग जल्दी-जल्दी अंदर-बाहर आ-जा रहे थे। गेट के पास एक छोटा बच्चा खड़ा था। मुश्किल से पाँच साल का होगा। हाथ में चिप्स के कुछ पैकेट और गले में एक छोटा-सा बोर्ड लटका था। बोर्ड पर टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा था - "स्काउट चैरिटी के लिए, सिर्फ $20 में।" लोग उसके बगल से गुजर रहे थे। किसी को जल्दी थी, कोई फोन पर था, कोई देखकर भी अनदेखा कर रहा था। लेकिन वो बच्चा... वो हार नहीं मान रहा था। वो हर आने-जाने वाले के पास अपनी छोटी-छोटी टांगों से चलकर जाता, ऊपर देखता और बड़ी मासूमियत से पूछता, "क्या आप एक पैकेट खरीदेंगे?" कोई खरीद लेता। कोई मुस्कुराकर कहता, "नहीं बेटा, थैंक यू।" मैंने सोचा, इतना छोटा बच्चा, इतनी बार 'ना' सुनकर रो देगा, उदास हो जाएगा, अपनी टीचर के पीछे छिप जाएगा। लेकिन नहीं। वो हर 'ना' के बाद मुस्कुराता, हल्के से सिर हिलाता और अगले व्यक्ति की तरफ मुड़ जाता। उसके चेहरे पर न शर्म थी, न डर, न निराशा। सिर्फ एक अजीब-सा आत्मविश्वास था। बिटिया से रहा नहीं गया। उसने एक पैकेट खरीद लिया। बच्चे की आँखें चमक उठीं। उसने उछलकर कहा, "थैंक यू सो मच!" फिर बिटिया ने प्यार से पूछा, "तुम्हें और कितने पैकेट बेचने हैं? तुम यहाँ कब तक खड़े रहोगे?" बच्चे ने जो जवाब दिया, वो बिटिया को अंदर तक हिला गया। उसने कहा, "जब तक 100 लोग मुझे NO नहीं कह देते, तब तक!" बिटिया हैरान रह गयी। उसने बगल में खड़ी टीचर की तरफ देखा। टीचर मुस्कुराईं और बोलीं, "हमारा मकसद पैकेट बेचना नहीं है। हमारा मकसद है कि ये बच्चा इस उम्र में 'ना' सुनना सीखे। 'ना' को सुनकर उसे स्वीकार करना सीखे, और फिर भी अगले इंसान से पूछने की हिम्मत रखे।" सुनकर बिटिया चुप हो गई। मैं भी चुप हो गया। हम अपने बच्चों को क्या सिखाते हैं? खूब पढ़ो, फर्स्ट आओ, कॉम्पिटिशन जीतो, सिलेक्ट हो जाओ, सबसे आगे निकलो। हम उन्हें जीतना सिखाते हैं। लेकिन हम उन्हें हारना नहीं सिखाते। हम उन्हें सफलता का रास्ता दिखाते हैं, लेकिन असफलता से गुजरने की हिम्मत नहीं देते। जबकि जिंदगी में सबसे ज्यादा जरूरत उसी हिम्मत की पड़ती है। क्योंकि जिंदगी हमेशा 'हाँ' नहीं कहेगी। कुछ एग्जाम छूट जाएंगे। कुछ इंटरव्यू क्लियर नहीं होंगे। कुछ बिजनेस फेल होंगे। कुछ रिश्ते टूटेंगे। कुछ सपने देर से पूरे होंगे। उस दिन जो 'ना' मिलेगा, वो हमें तोड़ भी सकता है और बना भी सकता है। फर्क सिर्फ इतना होगा कि हमने बचपन में 'ना' से दोस्ती की है या दुश्मनी। वो पाँच साल का बच्चा Costco के बाहर चिप्स नहीं बेच रहा था। वो हिम्मत बेच रहा था। वो 'ना' इकट्ठा कर रहा था। वो रिजेक्शन को गले लगाना सीख रहा था। वो जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा की तैयारी कर रहा था - गिरकर उठने की परीक्षा। सोचिए, अगर हमारा बच्चा 10वीं में फेल हो जाए तो हम क्या करते हैं? डांटते हैं, ताना मारते हैं, शर्मा जाते हैं। अगर वो इंटरव्यू में रिजेक्ट हो जाए तो हम कहते हैं, "तुमसे नहीं होगा।" हम अनजाने में उसे सिखा देते हैं कि 'ना' का मतलब है - तुम बेकार हो। जबकि उस टीचर ने सिखाया कि 'ना' का मतलब है - अभी नहीं, फिर कोशिश करो। दोस्तों, सफलता हमें खुशी देती है, लेकिन 'ना' को संभालना हमें जिंदगी देता है। आज से अपने बच्चों से सिर्फ ये मत पूछिए, "बेटा, जीते या हारे? कितने मार्क्स आए?" कभी-कभी ये भी पूछिए, "बेटा, आज कितनी बार 'ना' सुना? और फिर भी तुमने कोशिश की? मुझे तुम पर गर्व है।" ऐसे बच्चे मत पालिए जो सिर्फ जीतने से खुश हों। ऐसे बच्चे पालिए जो हारने से डरते न हों। क्योंकि जीतने वाले को तालियां मिलती हैं, लेकिन हारकर उठने वाले को जिंदगी मिलती है। उस नन्हे बच्चे को सलाम, जिसने 100 'ना' से हमें जिंदगी का सबसे बड़ा 'हाँ' सिखा दिया। अगर ये कहानी आपके दिल को छू गई हो, तो इसे किसी ऐसे माता-पिता तक जरूर पहुंचाएं जो आज अपने बच्चे के रिजल्ट से परेशान है। शायद उन्हें भी ये याद आ जाए... *कभी-कभी 100 ना एक हां से ज्यादा सिखा जाते हैं।* @positivetalk
268
10
*आस्था का यह अर्थ नहीं कि जो, मैं चाहता हूं ईश्वर वही करेंगे,* *बल्कि* , *आस्था का अर्थ है कि ईश्वर वही करेंगे, जो मेरे लिए सही होगा!!* 🙏 *सुप्रभात* 🙏
248
11
Photo from Anand Satsangi
Photo from Anand Satsangi
305
12
*जब तक लगता था कि मैं करता हुं तब तक संघर्ष था।* *लेकिन जब से ये मान लिया कि सब कुछ वो कराता है तब से शांति है।* 🙏 सुप्रभात 🙏 @positivetalk
334
13
Video from Anand Satsangi
Video from Anand Satsangi
327
14
بدون متن...
372
15
https://youtu.be/9woAP8meRH8
382
16
https://youtu.be/cYBDxQTjxn8?si=lDZzgLBbjsq3yooU
426
17
इस दुनिया में इंसान के अलावा... .... हर चीज़ .... बिल्कुल वैसी ही, है जैसी दिखती है...
448
18
Photo from Anand Satsangi
Photo from Anand Satsangi
461
19
Good morning
Good morning
508
20
Photo from Anand Satsangi
Photo from Anand Satsangi
483