uk
Feedback

Не попадись на ботовода! Telemetrio знаходить і позначає такі канали мітками 👉 Хочеш бачити мітку, оформляй підписку

We Support Devendra Fadnavis

We Support Devendra Fadnavis

Відкрити в Telegram

नमस्कार, राज्याचे मुख्यमंत्री, मा. देवेंद्र फडणवीस साहेबांच्या सर्व कट्टर चाहत्यांचे या ग्रुप मध्ये स्वागत.

Показати більше
737
Підписники
-124 години
Немає даних7 днів
-430 днів
Архів дописів
जैसे देवेंद्र जी ने कहा कि भारत की सभी भाषाएं हिंदी की बहने हैं । इस शब्दकोश के अंदर जहां-जहां रिक्तता थी। हिंदी में किसी चीज के लिए शब्द नहीं था । हमने स्थानीय भाषाओं के 50 हजार से ज्यादा शब्दों को हिंदी में स्वीकार कर राजभाषा को लचीली बनाया

यह तो वीर सावरकर की भूमि है। सावरकर जी को हम सब महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जानते, समाज सुधारक के रूप में जानते हैं। मगर सावरकर जी अपने समय के सबसे विद्वान भाषा शास्त्री भी थे

विनोबा भावे जी ने कहा था मैंने हिंदी का सहारा न लिया होता तो कश्मीर आसाम केरल के गांवगांव में जाकर भूदान ग्रामदान का क्रांतिपूर्ण संदेश अपनी जनता तक मैं ना पहुंचा सकता।

महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति को भी प्रणाम करना चाहता हूं। यहां मराठी का तो सम्मान है ही है। होना ही चाहिए..महाराष्ट्र से बड़ा बहुभाष प्रदेश पूरे भारत में एक भी नहीं है।

छत्रपति शिवाजी महाराज की जिन्होंने स्वराज की कल्पना की और स्वराज की कल्पना को सुस्पष्ट करने का भी काम किया। स्वराज का मतलब सिर्फ शासन तक सीमित नहीं। स्वराज, स्वधर्म और स्वभाषा यह तीनों को उन्होंने स्वराज का मुख्य अंग बनाया

मेरी मां मराठी है। लेकिन बाकी सारी भाषाएं तो मेरी मौसी है और मां का भी सम्मान है और मौसी का भी सम्मान है।"

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

अगर हम लोग देखें राष्ट्रकवि दिनकर जी रश्मिरथी जैसी उनकी कविता कि जिसमें कृष्ण और दुर्योधन का जो संवाद है और कृष्ण की चेतावनी है दो न्याय अगर तो आधा दो उसमें भी यदि बाधा हो तो दे दो केवल पांच ग्राम लखनऊ अपनी भूमि तमाम हम उसी में खुशी से खाएंगे परिजन पर हसीना उठाएंगे

आज हम देख सकते हैं दुनिया में सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषाओं में तीसरे नंबर पर हिंदी है

अगर हमारी भाषाओं का सम्मान हम नहीं करेंगे तो मुझे ऐसा लगता है कि दुनिया कभी हमारी भाषाओं का सम्मान नहीं करेगी और दुनिया में अगर हम देखेंगे तो जितने विकसित राष्ट्र हैं वो सारे विकसित राष्ट्र उनकी भाषा में बोलते हैं

बाप्पा आले घरी, सर्व चिंता दुःख गेले दूरवरी ! गणेशोत्सवाच्या सर्वांना मंगलमय शुभेच्छा !

मुझे आज भी याद है कि विश्व के पटल पर पहली बार जिस समय संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी बोली गई उसको बोलने वाले श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी थे

आज जब हम देखते हैं कि वैश्विक मंच पर कहीं पर भी हमारे प्रधानमंत्री जी जाते हैं और वहां पर हमारी हिंदी में वह जब बोलते हैं तो हमारा भी सीना चौड़ा होता है

हर राज्य में जो मातृभाषा है उस मातृभाषा को सीखना ही चाहिए। उसको अनिवार्य ही होना चाहिए क्योंकि मातृभाषा हमको जो सिखाती है वह हमें कोई और भाषा सिखा नहीं सकती

मद्रास प्रेसिडेन्सीमधून निवडून आलेल्या अय्यंगार यांनी हिंदीला देशाची राजभाषा बनवण्याचा प्रस्ताव संविधान सभेत मांडणे ही आपल्या देशाची एक उत्तम परंपरा दर्शवते

एक समय ऐसा था कि यह सम्मेलन दिल्ली के विज्ञान भवन में एक औपचारिक कार्यक्रम किया जाता था किंतु गृह मंत्री जी ने निर्णय किया कि यह कार्यक्रम अलग-अलग राज्यों में होना चाहिए और एक नई परिपाटी उन्होंने शुरू की जिसके तहत अलग-अलग राज्यों में इस कार्यक्रम को हम लोग मनाने लगे

सभी देशों ने मिलकर दिल्ली डिक्लेरेशन को स्वीकार किया और चीन ने भी पाकिस्तान के खिलाफ बने इस डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए, भारत के लिए इससे बड़ी कूटनीतिक (डिप्लोमैटिक) जीत और कोई नहीं हो सकती। लेकिन जिन्हें सिर्फ खाना ही देखना है, जिन्हें यह देखना है कि कौन से सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए और उसमें यही क्यों आया, वही क्यों आयामुझे लगता है कि यह बहुत ही संकुचित सोच है। hindi

सगळ्या देशांनी मिळून दिल्ली डिक्लेरेशन हे मान्य केलं आणि चीनने देखील पाकिस्तानच्या विरोधात असलेल्या या डिक्लेरेशनला स्वाक्षरी दिली यापेक्षा मोठं डिप्लोमॅटिक यश हे भारताकरता असू शकत नाही. पण ज्यांना जेवणच पाहायचे आहेत, ज्यांना कुठले सांस्कृतिक कार्यक्रम झाले त्यात हाच का आला तोच का आला हे पाहायचंय, मला असं वाटते ही संकुचित बुद्धी आहे.

अतिशय खुल्या मनाने सगळ्या मागण्या आम्ही मान्य केलेल्या आहेत मला असं वाटतं की गणेश पर्व सुरू असताना मुंबईमध्ये आंदोलन करणं गणेश भक्तांना त्या निमित्ताने असुविधा होणं हे कोणाच करता योग्य नाही