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देश के मजदूर वर्ग को एकजुट करने का एक प्रयास

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हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के कमाण्डर, देश के सच्चे क्रान्तिकारी सपूत, आज भी सच्ची आज़ादी और इन्साफ़ के लिए लड़ रहे
हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के कमाण्डर, देश के सच्चे क्रान्तिकारी सपूत, आज भी सच्ची आज़ादी और इन्साफ़ के लिए लड़ रहे हर नौजवान के प्रेरणास्रोत चन्द्रशेखर आज़ाद के जन्मदिवस (23 जुलाई) के अवसर पर शहादत थी हमारी इसलिए कि आज़ादी का बढ़ता हुआ सफ़ीना रुके न एक पल को मगर ये क्या, ये अँधेरा? ये कारवाँ रुका क्यों है? बढ़े चलो, कि अभी काफ़ि‍ला-ए-इंक़लाब को आगे, बहुत आगे जाना है…

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📮__📮 मोदी-शाह शासन के विरुद्ध मौजूदा छात्र-युवा आन्‍दोलन 12 साल से बेहाल जनता के धैर्य के जवाब देने की निशानी है। स्‍वत:स्‍फूर्तता से आगे बढ़कर मौजूदा जनान्‍दोलन को एक सचेतन क्रान्तिकारी जनान्‍दोलन में तब्‍दील करो! 📱 https://www.facebook.com/revolutionaryworkerspartyofindia/posts/1479956684170340 __ पिछले कुछ हफ़्तों से देश में छात्रों-युवाओं का एक आन्‍दोलन जारी है। इसका तात्‍कालिक मुद्दा निश्‍चय ही नीट पेपर लीक और एनटीए द्वारा छात्रों के भविष्‍य के साथ किया जा रहा खिलवाड़ है। लेकिन अब यह आन्‍दोलन महज़ इस मुद्दे पर जनता के रोष को प्रतिबिम्बित नहीं कर रहा है। बल्कि यह देश भर में जनता के बीच पिछले 12 वर्षों से एकत्र हो रहे असन्‍तोष और गुस्‍से की अभिव्‍यक्ति बन चुका है। पिछले 12 वर्षों में जनता जिस क़दर महँगाई, बेरोज़गारी, महँगी होती शिक्षा, परीक्षा घोटालों और सामाजिक असुरक्षा से बेहाल है, वह देश के इतिहास में अभूतपूर्व है। इस क़दर जनविरोधी सरकार आज तक भारत की जनता ने नहीं देखी है। 12 वर्षों तक उसे साम्‍प्रदायिक मसलों और आर.एस.एस. और भाजपा के फ़र्जी “राष्‍ट्रवाद” में उलझाकर रखा गया। इसके नाम पर जनता को नोटबन्‍दी और कोविड के समय योजनाविहीन तरीक़े से किये गये लॉकडॉउन के ज़हर के घूँट भी पिला दिये गये। कभी पाकिस्‍तान तो कभी चीन का नकली हौव्‍वा खड़ाकर जनता को असल मसलों से भटकाकर रखा गया, तो कभी उसे साम्‍प्रदायिक तनाव में झोंककर फँसा दिया गया। इस बीच मोदी की विदेश यात्राओं और भाजपा सरकार द्वारा विकास के झूठे प्रचारों पर जनता के अरबों-खरबों रुपये बहा दिये गये। जिस समय जनता को फ़ालतू के धार्मिक और जातिवादी मसलों में उलझाकर रखा गया, उसी बीच देश की सार्वजनिक सम्‍पत्ति और प्राकृतिक संसाधनों को अम्‍बानियों और अडाणियों को कौड़ी के दाम बेच दिया गया। जिस राम मन्दिर के मसले को हवा देकर भाजपा सत्‍ता में पहुँची उसका चन्‍दाचोरी करने में भी संघ परिवार व भाजपा के प्‍यादों और कारकूनों को कोई गुरेज़ नहीं था। इनका तो शुरू से ही यही नारा रहा है कि ‘राम नाम की लूट मची है, लूट सके तो लूट’! इसी बीच महँगाई ने आज़ादी के बाद के भारत के इतिहास के सारे कीर्तिमान तोड़ दिये। बेरोज़गारी भी पीछे नहीं रही और हालात ये पैदा हो गये कि क़रीब 30 करोड़ लोग आज बेरोज़गार या अर्द्धबेरोज़गार हैं। देश में 50 करोड़ से भी ज्‍़यादा लोग अनौपचारिक क्षेत्र में 12-12 घण्‍टे खेतों-खलिहानों, कल-कारखानों और खानों-खदानों में 8-10 हज़ार रुपये में ठेका या दिहाड़ी पर खटने को मजबूर कर दिये गये। नतीजतन, हालिया दिनों में मज़दूरों के पास भी सड़कों पर उतरने और हड़ताल करने के अलावा कोई रास्‍ता नहीं बचा। जिस तरह से आज मोदी-शाह शासन छात्रों-युवाओं का बर्बर दमन कर रहा है, उसी प्रकार हालिया दिनों में मज़दूरों व मज़दूर कार्यकर्ताओं का भी हरियाणा से लेकर उत्‍तर प्रदेश तक में बेशर्मी से संविधान व क़ानून को ताक पर रख कर दमन किया गया। ग़रीब किसानों और शहरी व ग्रामीण आम मेहनतकश आबादी को भी दाने-दाने का मोहताज बना दिया गया। दूसरी ओर, देश के धनिक वर्ग, सेठ, कम्‍पनी-मालिक, बड़े व्‍यापारी, दलाल, बिचौलिये, धनी कुलक-फार्मर व भूस्‍वामी अश्‍लीलता के सारे रिकार्ड ध्‍वस्‍त करते हुए देश की ग़रीब मेहनतकश जनता व छात्रों-युवाओं के आँसुओं के समन्‍दर के बीच अपनी ऐय्याशी और ऐश्‍वर्य की मीनारें खड़ी करते रहे। नेता-नौकरशाह और बड़े सिविल व सेना अधिकारियों के ऐशो-आराम, वेतन भत्‍तों और रंगरलियों में भी अभूतपूर्व बढ़ोत्‍तरी हुई। घपलों-घोटालों के मामले में तो भाजपा सरकार ने नये मानक स्‍थापित कर दिये। व्‍यापम घोटाले से लेकर, दिल्‍ली का स्‍वास्‍थ्‍य घोटाला, परीक्षा घोटाला, एनपीए घोटाला, राफ़ेल घोटाला और न जाने कितने अरबों-खरबों के घोटालों की फ़ेहरिस्‍त 12 सालों में इतनी लम्‍बी हो चुकी है कि उसकी लम्‍बाई किलोमीटर में ही नापी जा सकती है! लेकिन चूँकि ये धर्मध्‍वजाधारियों द्वारा किये गये “राष्‍ट्रवादी” घपले थे, इसलिए यह कहीं मसला नहीं बना! मीडिया को पूरी तरह निगलकर गोदी मीडिया में तब्‍दील कर दिया गया और उनकी दलाली की इन्‍तहाँ इस क़दर हुई कि इन गोदी चैनलों व अख़बारों के बेचारे वेतनभोगी रिपोर्टर अपने मालिकान व प्रबन्‍धन के पापों और कुकर्मों की क़ीमत जनता के हाथों आज सड़कों पर चुका रहे हैं। (पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए ऊपर दी गई लिंक पर जाएं)

अगर तुम युवा हो! ✍️ शशिप्रकाश ग़रीबों-मज़लूमों के नौजवान सपूतों! उन्‍हें कहने दो कि क्रांतियाँ मर गयीं जिनका स्‍वर्ग है इसी व
अगर तुम युवा हो! ✍️ शशिप्रकाश ग़रीबों-मज़लूमों के नौजवान सपूतों! उन्‍हें कहने दो कि क्रांतियाँ मर गयीं जिनका स्‍वर्ग है इसी व्‍यवस्‍था के भीतर तुम्‍हें तो इस नर्क से बाहर निकलने के लिए बन्‍द दरवाजों को तोड़ना ही होगा, आवाज़ उठानी ही होगी इस निजामें कोहना के खिलाफ। यदि तुम चाहते हो आज़ादी, न्‍याय, सच्‍चाई, स्‍वाभिमान और सुन्‍दरता से भरी जिन्‍दगी तो तुम्‍हें उठाना ही होगा नये इंकलाब का परचम फिर से।

बिगुल बातमी सतत होत असलेल्या पेपर लीकच्या विरोधात पुण्यात हजारो युवक रस्त्यावर – आंदोलक काय म्हणाले? #paperleak #cjp #nta #dharmendrapradhanadhan #DelhiPolice

छात्र आंदोलन के विरोध में रील बनाने के लिए आईटी सेल द्वारा ₹ बांटे जा रहे हैं। अलग-अलग सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर को एक रील के 20000 तक ऑफर किये जा रहे हैं। यह दूसरा इनफ्लुएंसर है जिसे ऑफर आया है और उसने वीडियो बनाकर डाला है। आपके हमारे टैक्स के पैसे से इकट्ठा हुआ धन हमारे ही खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। और यह पहला आंदोलन नहीं है जिसमें ऐसा किया जा रहा हो। इससे पहले भी जब भी आंदोलन हुए हैं तो उसके खिलाफ माहौल बनाने के लिए इन फासीवादियों की पूरी मशीनरी लग जाती थी।

📮__📮 छात्रों-युवाओं पर डण्डे और लाठी बरसाने वाली भाजपा सरकार शर्म करो! धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफ़ा दो! नई शिक्षा नीति 2020 रद्द करो! एनटीए को भंग करो! 📱 https://www.facebook.com/DSAWHU/posts/1419807096862549 _ दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्पर्स यूनियन (DSAWHU) भाजपा सरकार द्वारा छात्रों के साथ की गयी बर्बरता की कड़े शब्दों में भर्त्सना करती है। साथी ही, शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त धाँधली और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जारी आन्दोलन को अपना पूरा समर्थन देती है। 20 जुलाई 2026,भाजपा के असल चेहरे को उजागर करने वाला एक और दिन जो इस सरकार के आतंक के रूप में याद रखा जाएगा। दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर तक़रीबन एक महीने से छात्र-युवा अपनी बुनियादी माँगों को लेकर शान्तिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान बातचीत करने के बजाय मोदी सरकार छात्रों के आन्दोलन का बर्बर दमन करती है। पहले सोनम वांगचुक को जो पिछले 20 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे थे, उन्हें प्रदर्शन स्थल से अगवा कर लिया जाता है और इलाज़ के नाम पर अस्पताल में डिटेन करके रखा जाता है। छात्रों की माँगों को लगातार अनसुना करते हुए उन्हें प्रदर्शन ख़त्म करने के लिए डराया-धमकाया जाता है। जब छात्र अपनी बात पहुँचाने के लिए संसद मार्च करते हैं तब "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र" में लाठी, डण्डों से उनका सिर फोड़ा जाता है। बच्चों, नाबालिगों, महिलाओं को पीटा जाता है। न्यायपूर्ण और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की माँग कर रहे स्कूल-कॉलेज के बच्चों पर इस सरकार ने आँसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल करके यह साबित कर दिया है कि यह दरिन्दगी के किसी भी हद तक जा सकते हैं और इन्हें छात्रों के भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है। मोदी सरकार के राज में लोकतन्त्र के सभी पहरेदारों की असलियत भी तार-तार हो चुकी है। मुख्यधारा की मीडिया जो देश के पूँजीपतियों के हाथों में है, उन्हें आम जनता के मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है। झूठी और भ्रामक ख़बरें फैलाने के सिवा उनके पास कोई काम नहीं है। वहीं देश के न्याय और क़ानून व्यवस्था की असलियत भी जनता के सामने है। पुलिसिया दमन के ख़िलाफ़ जब कुछ लोग कोर्ट का रुख करते हैं तो कोर्ट उनकी याचिका को यह कहके ख़ारिज कर देता है की "ऐसे मसलों के लिए कोर्ट के पास समय नहीं है और इनमें न्यायालय को न घसीटा जाए।" न्यायालय का यह बयान एक बार फिर साफ़ कर देता है कि वह किनके हितों की रखवाली के लिए मौजूद है! लचर शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों के बीच व्याप्त यह असन्तोष पिछले 12 साल के मोदी राज की देन है। हालिया हुए नीट परीक्षा के पेपर लीक के बाद यह असहनीय हो गया क्योंकि कई छात्रों ने जो सालों से तैयारी करके इस परीक्षा से उम्मीद लगाये हुए थे उनकी उम्मीद पर एक ही झटके में पानी फिर गया। 20 से अधिक छात्रों ने परेशान होकर आत्महत्या कर ली, तो कई अवसाद और मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के कार्यकाल में 100 से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। नयी शिक्षा नीति 2020 आने के बाद से आम घरों से आने वाली छात्र आबादी शिक्षा से दूर हो रही है। न सिर्फ़ उच्च शिक्षा बल्कि प्राथमिक विद्यालय तक बन्द हो रहे हैं। भाजपा सरकार ने शिक्षा के बुनियादी अधिकार को निजी हाथों में सौंपने का काम धड़ल्ले से किया है और आज भी वह शिक्षा माफियाओं के हितों को बचाने के लिए ही काम कर रही है। आम घरों से आने वाले युवाओं के ऊपर लाठी बरसाकर इन्होंने एक बार फिर अपने असल चेहरे को उजागर कर दिया है। इससे पहले भी इस निज़ाम ने अलग-अलग कॉलेज, विश्वविद्यालयों के फ़ीस बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ बोलने पर, शिक्षा के साम्प्रदायिकीकरण के ख़िलाफ़ बोलने पर, शिक्षकों की भर्ती इत्यादि जैसे बुनियादी मुद्दों के लिए बोलने पर छात्रों का दमन किया है। फ़ासीवादी मोदी सरकार के राज में सच बोलना, अपनी आवाज़ उठाना, विरोध करना अपराध बना दिया गया है। वहीं अपराधियों को, भड़काऊ भाषण देने वालों को, दंगा करने वालों को खुली छूट मिल रही है। यह सरकार ग़रीब-विरोधी,अल्पसंख्यक-विरोधी, मज़दूर-विरोधी, कर्मचारी-विरोधी, महिला-विरोधी तो है ही और अब इन्होंने खुद को छात्र-युवा विरोधी भी साबित कर दिया है। इनके "अच्छे दिन" और "हिन्दू राष्ट्र" की हक़ीक़त यही है!! मगर बीते दिनों दिल्ली के संसद मार्च पर छात्रों के काफ़िले ने यह दिखा दिया कि बड़े से बड़े तानाशाह को भी आम अवाम की एकजुटता के सामने झुकना पड़ता है। पुलिस के दम पर छात्रों का बर्बर दमन कुछ और नहीं बल्कि इस सरकार के डर का परिचायक है। लाखों की संख्या में छात्र सड़कों पर हैं और "परीक्षा पर चर्चा" करने वाले प्रधानमंत्री के मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा है। (पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए ऊपर दी गई लिंक पर जाएं)

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📮______📮 शहीद भगतसिंह का ये लेख जरूर पढ़ें - पुलिस की कमीनी चालें आपको लगेगा जैसे आज की पुलिस के लिए ही लिखा है 👉 पुलिस के
📮______📮 शहीद भगतसिंह का ये लेख जरूर पढ़ें - पुलिस की कमीनी चालें आपको लगेगा जैसे आज की पुलिस के लिए ही लिखा है 👉 पुलिस के लोग किस तरह नौजवानों को फँसाने और बरगलाने का काम करते हैं, इस सम्बन्ध में यह लेख जून, 1928 ‘किरती’ में छपा था। – स. *जब कभी बड़े भारी आन्दोलन की सम्भावना होती है, उसे दबाने के लिए, अत्याचार करने का बहाना ढूँढ़ने के लिए वह अपने आदमियों को उनमें मिला देती है और वे कोई न कोई ग़लती करवा देते हैं, जिससे अत्याचार का बहाना मिल जाता है। दूर जाने की ज़रूरत नहीं, आजकल जो भी हड़तालें हुई हैं उनमें भी ऐसे आदमी छोड़े जाते हैं जो दंगा करवाने के लिए लोगों को भड़काते रहते हैं और अत्याचार का बहाना ढूँढ़ने का यत्न करते रहते हैं।* पूरा लेख इस लिंक से पढ़ा जा सकता है - https://naubhas.com/archives/943

राजा ने आदेश दिया ✍️ देवी प्रसाद मिश्र राजा ने आदेश दिया : बोलना बन्द क्योंकि लोग बोलते हैं तो राजा के विरुद्ध बोलते हैं राजा ने आदेश दिया : लिखना बन्द क्योंकि लोग लिखते हैं तो राजा के विरुद्ध लिखते हैं राजा ने आदेश दिया : चलना बन्द क्योंकि लोग चलते हैं तो राजा के विरुद्ध चलते हैं राजा ने आदेश दिया : हँसना बन्द क्योंकि लोग हँसते हैं तो राजा के विरुद्ध हँसते हैं राजा ने आदेश दिया : होना बन्द क्योंकि लोग होते हैं तो राजा के विरुद्ध होते हैं इस तरह राजा के आदेशों ने लोगों को उनकी छोटी-छोटी क्रियाओं का महत्त्व बताया

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📮____📮 हत्यारा दिन-रात अठारह घंटे काम करता है ✍️ कात्यायनी हत्यारा रो रहा है। देश नदियों में आयी बाढ़ में डूब रहा है। हत्यारा विकास की बातें कर रहा है। देश अँधेरे में ग़र्क़ होता जा रहा है, बच्चे भूख से बिलख रहे हैं और सड़कों पर बेरोज़गारों की भीड़ उमड़ रही है। हत्यारा नहा रहा है। गलियों में, सड़कों पर लहू बह रहा है। हत्यारा शान्ति-अहिंसा की बातें कर रहा है। चारो ओर फौजी बूटों की धमक गूँज रही है। हत्यारा रंग-बिरंगी राजसी पोशाकों में सज रहा है। वहशी उन्मादी भीड़ औरतों के कपड़े नोचकर उन्हें सड़कों पर निर्वस्त्र घुमा रही है। बहुत सारी जेलें और यातना गृह बनवाने , बहुत सारे लोगों को दरबदर करने , बहुत सारे जंगलों और बस्तियों को उजाड़ने, फौज-फाँटे को बहुत अधिक चाक-चौबंद करने और किले की दीवारों को मज़बूत करने जैसे बहुतेरे कामों में रोज़ाना अठारह-अठारह घंटे ख़र्च करने के बाद हत्यारा जब चैन की नींद सोता है तो प्रशिक्षित भेड़ियों के झुण्ड पहरेदारी करते हैं, कुछ सिद्ध कलावंत ड्योढ़ी पर सितार बजाते हैं और कुछ कवि-लेखक रंगारंग साहित्योत्सवों के मंच पर बिराजे मनुष्यता और सौन्दर्य के आख्यान सुनाते हैं।

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शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ़ फिर बंदूक लेकर खड़ी है मोदी सरकार की पुलिस।

Condemn the police brutality against students in Delhi

जंतर मंतर से उठी आवाज़

क़ानून की पवित्रता तभी तक रखी जा सकती है जब तक वह जनता के दिल यानी भावनाओं को प्रकट करता है। जब यह शोषणकारी समूह के हाथों में
क़ानून की पवित्रता तभी तक रखी जा सकती है जब तक वह जनता के दिल यानी भावनाओं को प्रकट करता है। जब यह शोषणकारी समूह के हाथों में एक पुर्ज़ा बन जाता है तब अपनी पवित्रता और महत्त्व खो बैठता है। न्याय प्रदान करने के लिए मूल बात यह है कि हर तरह के लाभ या हित का ख़ात्मा होना चाहिए। ज्यों ही क़ानून सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करना बन्द कर देता है त्यों ही ज़ुल्म और अन्याय को बढ़ाने का हथियार बन जाता है। ऐसे क़ानूनों को जारी रखना सामूहिक हितों पर विशेष हितों की दम्भपूर्ण ज़बरदस्ती के सिवाय कुछ नहीं है। ✍️ शहीद भगतसिंह

लोग कहते हैं आंदोलन, प्रदर्शन और जुलूस निकालने से क्‍या होता है..इससे यह सिद्ध होता है कि हम जीवित हैं, अडिग हैं और मैदान से
लोग कहते हैं आंदोलन, प्रदर्शन और जुलूस निकालने से क्‍या होता है..इससे यह सिद्ध होता है कि हम जीवित हैं, अडिग हैं और मैदान से हटे नहीं हैं। हमें हार न मानने वाले अपने स्‍वाभिमान का प्रमाण देना था। यह दिखाना है कि गोलियों और अत्‍याचारों से भयभीत होकर हम अपने लक्ष्‍य से हटनेवाले नहीं और व्‍यवस्‍था का अंत करके रहेंगे। ✍ प्रेमचंद

🎤 क्रांतिकारी गीत-संगीत 🎼 _____ इस व्‍यवस्‍था के सभी अंग-उपांग (मीडिया, कानून, जज, जेलर, अफसरशाही) कैसे अमीरों और अन्‍यायियों के पक्ष में काम करते हैं, उसी को बयां करता ये गीत सुनें। यह गीत आज के समय में तो और भी प्रासंगिक हो उठा है ➖➖➖➖➖➖➖➖ वो सब कुछ करने को तैयार / बेर्टोल्ट ब्रेष्ट कम्पोजीशन - Progressive Movement, arranged by Anushtup 🖥 व्हाट्सएप की साइज सीमा के कारण पूरा गीत यहां नहीं भेजा जा सका है। आप यूट्यूब पर पूरे गीत को इस लिंक से सुन सकते हैं https://www.youtube.com/watch?v=EvZwDmro_Gw ➖➖➖➖➖➖➖➖ वो सब कुछ करने को तैयार सभी अफसर उनके जेल और सुधार-घर उनके सभी दफ़्तर उनके कानूनी किताबें उनकी कारखाने हथियारों के पादरी प्रोफ़ेसर उनके जज और जेलर तक उनके सभी अफसर उनके अखबार, छापे थामे हमें अपना बनाने के बहाने चुप कराने के नेता और गुण्डे तक उनके एक दिन ऐसा आयेगा पैसा फिर काम न आएगा धरा हथियार रह जायेगा और ये जल्दी ही होगा ये ढाँचा बदल जायेगा ये ढाँचा बदल जायेगा ये ढाँचा बदल जायेगा बेर्टोल्ट ब्रेष्ट ('मदर' नाटक से)

📮____📮 जन्तर-मन्तर पर पेपर लीक के ख़िलाफ़ और धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफ़े को लेकर चल रहे आन्दोलन के सन्दर्भ में 'दिशा छात्र संगठन' की अपील... पेपर लीक के ख़िलाफ़ जन्तर-मन्तर पर प्रदर्शन निरन्तर जारी है। सोनम वांगचुक समेत कई कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर हैं। सोनम वांगचुक और अन्य छात्र कार्यकर्ताओं की स्थिति तेज़ी से बिगड़ती जा रही है। लेकिन फ़ासीवादी सरकार पर इसका कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है। छात्रों को अपनी जुझारू एकजुटता को व्यापक बनाने की ज़रूरत है।