"स्कूल व्याख्याता पंचनामा "
स्कूल व्याख्याता इतिहास पेपर विश्लेषण,परीक्षा स्वरूप,छात्रों और शिक्षकों के प्रयास और उनके उत्तरदायित्व पर मेरा मत
(यह कोई अंतिम और अनिवार्य निष्कर्ष नहीं है जो मुझे ठीक लगा उसे बता रहा हूं, ठीक लगे तो देख लेना अन्यथा कोई वायरल रील देख लेना)
RPSC का हालिया इतिहास का पेपर अच्छा कहा जा सकता है,बेहद अच्छा तो नहीं क्योंकि विकल्पों पर और ध्यान दिया जाता तो शायद और अच्छा बनता पर स्टूडेंट्स इसके लिए भी तैयार नहीं है (यह मैंने 2013 से शुरू करके 2026 तक की मेरी mentorship/guidance के आधार पर बोल रहा हूं)।
मैं निम्न बातों पर आपसे विमर्श करना चाहता हूं
1. विद्यार्थी की भूमिका और कर्तव्य:
A.विद्यार्थी के व्यक्तिगत कर्तव्य- सर्वप्रथम इस पूरे खेल का केंद्र विद्यार्थी होता है (95%भूमिका में है) जिसकी जिम्मेदारी है कि वह गुणवत्ता पूर्ण स्टडी मैटिरियल
तक अपनी पहुंच बनाए और उसको जुटाये। इसके लिए जमीनी स्तर पर जाकर टीचर्स,चयनित व अनुभवी विद्यार्थियों से बात -चीत करनी चाहिए (कई बार सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमकती चीजें कॉर्पोरेट हो सकती हैं) एवं विद्यार्थी ख़ुद टीचर्स की क्लासेज देखें (ऑफलाइन/ऑनलाइन ) और मार्केट की अध्ययन सामग्री देखें उसकी अन्य से तुलना करें, परीक्षा पद्धति को समझकर उपयोगी विकल्प चुनें ताकि अपनी अध्ययन सामग्री,कोचिंग और टीचर के निर्धारण में बेहतर निर्णय हो सके वरना आपकी हालत उन विद्यार्थियों की तरह हो सकती है ,जो परीक्षा में हांफ गए हैं जिनको लगता था कि वो अफ्रीका महाद्वीप रूपी विशाल अध्ययन सामग्री के साथ हैं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि फ्रांस की तरह उनका अधिंकाश क्षेत्र अनुत्पादक है न कि इंग्लैंड की तरह उत्पादक!
इसके बाद ही आप कोई उपयुक्त और परिणामी निर्णय ले सकते हैं (क्योंकि ज़्यादा पढ़ने से महत्वपूर्ण है समझ पर आधारित स्ट्रक्चर्ड अध्ययन सामग्री जो आपको ओवरआल एक समझ विकसित करने में मदद करे और परीक्षा भवन में सही ढंग से प्रश्न अटेम्प्ट करने योग्य बनाए,ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार इटली वासियों को कुस्तुनतुनिया के पतन के बाद
समृद्ध प्राचीन ग्रीको -रोमन साहित्य ने पुनर्जागरण के योग्य बनाया) इसलिए तार्किक आधार पर जांच परख कर स्वीकार करें (बुद्ध के एहिक पशिश की तरह)
B.विद्यार्थी के सार्वजनिक कर्तव्य- एक सफ़ल और असफल विद्यार्थी को चाहिए कि
नए विद्यार्थी का सही मार्गदर्शन करें जिस मार्ग को उन्होंने अपनाया उसकी कठिनाई, चुनौतियां,उपलब्धियां,मार्केट के टीचर्स,गाइड और अन्य महत्वपूर्ण उपागम जो प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से उसके मार्ग में कैसे सहायक और अवरोध बने वो बताए और उनको सही मार्ग दिखाए और व्यापक सार्वत्रिक हित की अवधारणा का साक्षी बने ।किसी सीमित भौतिक लाभ और सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि प्राप्त करने की इच्छा में अपनी उपलब्धि पर किसी अन्य को अनाधिकृत
स्वामित्व प्रदान नहीं करें यह शैक्षिक अपराध की श्रेणी में ही आता है।
पर कल्याणकारी बनो वह नौका जो तुमने काम ली वही दूसरों को देवें (उपनिषद के "प्रबुद्ध",गीता के "पुरुषोतम" और बौद्ध धर्म के "बोधिसत्व"के समान बनें)
2. शिक्षक के कर्तव्य
A. व्यक्तिगत कर्तव्य -जिस विषय को आप पढ़ा रहे हैं उसका व्यापक, सारगर्भित, तथ्यात्मक, तुलनात्मक,विश्लेषणात्मक ,
अवधारणात्मक और परीक्षापयोगी अप्रोच का ज्ञान रखना आवश्यक है क्योंकि परीक्षा पास करने में और स्टूडेंट तक उसको पहुंचाने में बड़ा फ़र्क होता है,उस ज्ञान को बिना बोरिंग क्लास के विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर, न्यूनतम क्लास में और अधिकतम परीक्षापयोगी बनाते हुए पढ़ाना या पहुँचाना होता है, और इस कार्य के लिए टीचर्स को चाहिए कि हर पार्ट की कम से कम तीन या चार बेसिक बुक पढ़े और सिविल सर्विस की अध्ययन सामग्री तक अपनी पहुंच बनाएं जिसका वर्तमान में अभाव हो गया क्योंकि अब Ras pre -mains में जनरल पेपर हो गए जबकि पहले Ras 2012 तक pre exam में भी विषय ऑप्शनल और Ras mains में दो ऑप्शनल विषय के पेपर थे और ICS में भी 2010 तक pre में एक ऑप्शनल और mains में 2 ऑप्शनल पेपर थे।
(इसलिए हमारे समय असिस्टेंट प्रोफेसर और स्कूल व्याख्याता में केवल सिविल सर्विस की तैयारी वाले ही पास होते थे) लेकिन अब सिविल सर्विस एग्जाम में mains में एक ऑप्शनल छोड़ा है बाकि ics pre से और Ras pre - mains से ऑप्शनल विषय हटा दिए हैं,
जिसके कारण शिक्षक भर्ती में ऑब्जेक्टिव एग्जाम पैटर्न में स्टूडेंट-टीचर दोनों केवल शुष्क तथ्यों से ही वास्ता रखने लगे हैं, जबकि इन भर्तियों के पेपर अब सिविल सर्विस एग्जाम के ऑप्शनल पैटर्न पर आ रहे हैं, इसलिए हर टीचर विद्यार्थी को बदलना पड़ेगा मेहनत करनी पड़ेगी (अन्यथा नेपोलियन और मुगलों की तरह हारना पड़ेगा जिन्होंने सामुद्रिक शक्ति की उपेक्षा की थी)