Dr.Ravi Fageria(VR Educators)
#assistant professor of History ( #Rank-4),2011(Govt of Raj) #JCTO (#RAS allied)Govt of Rajasthan,2010 #Science teacher at Govt of Rajasthan (2005) #PGT History at N V S (#Topper) (2004)
نمایش بیشتر📈 تحلیل کانال تلگرام Dr.Ravi Fageria(VR Educators)
کانال Dr.Ravi Fageria(VR Educators) (@rfageria21st) در بخش زبانی هندی بازیگری فعال است. در حال حاضر جامعه شامل 13 314 مشترک است و جایگاه 15 007 را در دسته آموزش و رتبه 29 922 را در منطقه الهند دارد.
📊 شاخصهای مخاطب و پویایی
از زمان ایجاد در невідомо، پروژه رشد سریعی داشته و 13 314 مشترک جذب کرده است.
بر اساس آخرین دادهها در تاریخ 03 سپتامبر, 2026، کانال فعالیت پایداری دارد. در ۳۰ روز گذشته تغییر اعضا برابر 8 و در ۲۴ ساعت گذشته برابر -2 بوده و همچنان دسترسی گستردهای حفظ شده است.
- وضعیت تأیید: تأیید نشده
- نرخ تعامل (ER): میانگین تعامل مخاطب 68.11% است و در ۲۴ ساعت نخست پس از انتشار، محتوا معمولاً 38.56% واکنش نسبت به کل مشترکان کسب میکند.
- دسترسی پستها: هر پست به طور میانگین 9 069 بازدید دریافت میکند. در اولین روز معمولاً 5 134 بازدید جمعآوری میشود.
- واکنشها و تعامل: مخاطبان بهطور فعال حمایت میکنند؛ میانگین واکنش به هر پست 127 است.
- علایق موضوعی: محتوا بر موضوعات کلیدی مانند fageria, ravi, समय, dr., परीक्षा تمرکز دارد.
📝 توضیح و سیاست محتوایی
نویسنده این فضا را محل بیان دیدگاههای شخصی توصیف میکند:
“#assistant professor of History ( #Rank-4),2011(Govt of Raj)
#JCTO (#RAS allied)Govt of Rajasthan,2010
#Science teacher at Govt of Rajasthan (2005)
#PGT History at N V S (#Topper) (2004)”
به لطف بهروزرسانیهای پرتکرار (آخرین داده در تاریخ 04 سپتامبر, 2026)، کانال همواره بهروز و دارای دسترسی بالاست. تحلیلها نشان میدهد مخاطبان بهطور فعال با محتوا تعامل دارند و آن را به نقطه اثرگذاری مهم در دسته آموزش تبدیل کردهاند.
در حال بارگیری داده...
| تاریخ | رشد مشترکین | اشارات | کانالها | |
| 04 سپتامبر | 0 | |||
| 03 سپتامبر | 0 | |||
| 02 سپتامبر | 0 | |||
| 01 سپتامبر | 0 |
| 2 | कोई भी असफलता अंतिम नहीं होती है, वह अपने पीछे अवशेषों में जीत का प्रकाश भी छोड़ती है,
बस दृष्टिकोण सही होना चाहिए,
जैसे बुझते दीपक का तात्पर्य केवल रोशनी का अंत (दृष्टि बाधा)ही नहीं है, अपितु उसमें बचने वाला काजल सकारात्मक उपलब्धि का संकेत भी है,
जो हमारी आँखों को शीतलता प्रदान करके दृष्टि को सुगम बनाने में मदद भी करता है 😍😍
बस चलते रहो प्रिय सकारात्मकता देखो
नकारात्मकता को तिरोहित कर दीजिए
Dr. Ravi fageria
associate professor of history | 4 123 |
| 3 | बधाई नीरज चंदेल,
सहायक आचार्य इतिहास में अंतिम रूप से चयन होने के बाद आपकी अनुभूति एक दार्शनिक से कम नहीं,
और हो भी क्यों नहीं इसकी तपस्या आपने की है!
इसलिए इसकी सुखद अनुभूति भी जो आपको होगी किसी और को संभव नहीं है 😍
इसके बाद आप स्व में स्थित होकर स्वस्थ हो गए हैं ❤️❤️
Dr.Ravi fageria,
associate professor of history | 7 565 |
| 4 | अमिता कुमारी
आपको सहायक आचार्य (इतिहास) में अंतिम चयन होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
Dr. Ravi fageria
Associate professor of history | 8 921 |
| 5 | प्यारे रंजीत
सहायक आचार्य इतिहास में चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं 😍
आप के चेहरे का तेज़ और सुदर्शन मुखमंडल आपको देवनाम प्रियदर्शी तुल्य प्रतीति देता है, आप ऐसे ही देदीप्यमान होते हुए अपने ज्ञान को व्रतोदश करते हुए आगे बढ़ते रहो
Dr Ravi fageria associate professor of history | 8 924 |
| 6 | بدون متن... | 6 914 |
| 7 | Nothing can be better than this, dear Ranjeet, hearty congratulations to you! | 512 |
| 8 | अंतिमा ,
मेरी प्यारी बच्ची,
तुम कॉलेज में फर्स्ट ईयर स्टूडेंट से लेकर पीजी तक जिज्ञासु अभ्यर्थी के रूप में सदैव ज्ञान हासिल करती रही,
इसके बाद सहायक आचार्य इतिहास विषय के ऑनलाइन कोर्स में जुड़ी,(हालांकि मेरी नज़र में मैंने इसे कॉलेज में पूरी तालीम दी थी इसलिए जरूरी नहीं था) और आज सहायक आचार्य इतिहास विषय में अंतिम चयन लेकर गर्वानुभूति का पल लिए हुए हैं आपको बहुत बहुत बधाई 🥇
अंतिमा पिछली बार भी साक्षात्कार तक़ पहुंची और तीन बार ras mains लिख चुकी है और दो बार IAS mains भी लिख चुकी है,
तुमने वो सब एग्जाम दिए जो मैने दिए,
मुझे गर्व है कि एक निष्ठावान अभ्यर्थी
का में मार्गदर्शक रहा हूं।
सबसे अद्भुत बात यह है कि अगर कोई सफलता हेतु ठान ले तो चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थिति क्यों नहीं हो इंसान अपनी लगन और मेहनत से मुक़ाम हासिल कर ही लेता है (अंतिमा ने कोरोना में अपने पिता को खोया पर हिम्मत नहीं हारी)
ना अंतिमा ने बीएड किया न और कोई विकल्प रखा बस (IAS, RAS, Assistant professor) के ही विकल्प रहे
आपको पुनः बधाई
Dr. Ravi fageria
Associate professor of history | 6 295 |
| 9 | शाबाश महेंद्र,
आपकी संपूर्ण राजस्थान में रैंक 2 आई इसके लिए आपको बधाई,
खुशी की बात यह है कि आप केवल शिष्य ही नहीं बल्कि मेरे ही गाँव से भी हैं,
(कॉलेज सेवा में मेरे गांव से,मेरे बाद चयनित दूसरे अभ्यर्थी भी)
इसलिए हमारे गाँव का गौरव इतिहास के पन्नों में दर्ज करने के लिए आपको बधाई और शुभकामनाएं 😍
Yours
Dr.Ravi fageria | 6 866 |
| 10 | सभी चयनित साथियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
और वंचित को ढेर सारा प्यार और आगामी भर्ती हेतु शुभकामनाएं | 7 278 |
| 11 | BF8F89F2DC3B40418905F73B0221DB99.pdf | 5 374 |
| 12 | इतिहास (सहायक आचार्य) का परिणाम आपके अनुकूल आए 👍ऐसी मेरी कामना है,
इस भर्ती में मार्गदर्शन हेतु मेरे से जुड़े सफ़ल और असफल विद्यार्थी अपनी भावनाओं को मेरे वॉट्सएप पर साझा कर सकते हैं!
बाकी परीक्षा आती जाती हैं,
ईमानदारी से किया गया कर्म सुकून देता है, यह फल एक दिन में ना सही पर एक दिन अवश्य फलीभूत होता है।
बस सही समय आने पर ही आपका मुकद्दर और ज़लाल दुनियां देखती है बाकि मेहनत करते रहो 😍
Dr. Ravi fageria
वॉट्सएप NO -9414241116 | 8 834 |
| 13 | एक शाम मस्ती के नाम 😍 | 7 506 |
| 14 | प्रिय मित्र पवन भंवरिया के साथ
थोड़े बच्चे बनकर देखते हैं,
अपने मन की बात सुनलें
ऐसा कोई मौक़ा चुनलें ।
#viralvideo
#dr_ravi_fageria
#Pawan_Bhanwariyan
https://www.instagram.com/reel/DcYouqSBf1u/?igsi=bm13aG84aDhyajdy | 39 227 |
| 15 | अब नए पैटर्न वाले questions कुछ ऐसे आजाएं तो चौंकिए नहीं
👉महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में विभिन्न यात्राओं के लिए अलग अलग किन जहाजों का उपयोग किया था?
Ans👉🏼कुछ प्रमुख जहाज निम्नलिखित हैं:
1. S.S. Clyde (एस.एस. क्लाइड) वर्ष 1888 में महात्मा गांधी जब मात्र 18-19 वर्ष की आयु में वकालत की पढ़ाई करने के लिए पहली बार इंग्लैंड गए थे, तब उन्होंने 4 सितंबर 1888 को बॉम्बे (मुंबई) से इसी जहाज से यात्रा की थी।
2. S.S. Puna (एस.एस. पूना) / S.S. Safari वर्ष: 1893 में जब गांधी जी दादा अब्दुल्ला की कंपनी के मुकदमे के सिलसिले में पहली बार दक्षिण अफ्रीका (डरबन) गए थे, तब उन्होंने इसी पानी के जहाज से ही दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की थी।
3. S.S. Kildonan Castle (एस.एस. किल्डोनैन कासल)वर्ष 1909 में दक्षिण अफ्रीका से लंदन की यात्रा के दौरान गांधी जी ने इसी जहाज पर अपनी प्रसिद्ध ऐतिहासिक पुस्तक 'हिंद स्वराज' लिखी थी।
4. S.S. Arabia (एस.एस. अरेबिया)वर्ष 1915 में दक्षिण अफ्रीका में लंबे समय तक सत्याग्रह और संघर्ष करने के बाद, जब गांधी जी हमेशा के लिए भारत लौट रहे थे, तब वे अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी के साथ इसी जहाज पर 9 जनवरी 1915 को मुंबई के अपोलो बंदरगाह पर उतरे थे।
5. S.S. Rajputana (एस.एस. राजपूताना)वर्ष 1931 में गांधी जी लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (Second Round Table Conference) में भाग लेने के लिए 29 अगस्त 1931 को बॉम्बे से इसी प्रसिद्ध जहाज पर सवार होकर गए थे। इस यात्रा के दौरान उनके साथ मदन मोहन मालवीय और सरोजिनी नायडू भी थे।
Dr.Ravi fageria associate professor | 10 323 |
| 16 | जीवन सभी को आगे बढ़ने के समुचित अवसर तो प्रदान करता है,
परंतु कोई तो सही समय पहचान कर कामयाबी में बदल लेता है,
तो कोई इनसे परेशान होकर अपना रास्ता बदल लेता है।
अब परिस्थितियों को लेकर व्यक्ति के दो नजरिये हो सकते हैं
👉 प्रथम नजरिया:
एक कामयाब व्यक्ति वक्त से शिकायत
नहीं करता है जैसे नेपोलियन ने कहा"मैं सही समय पर आया हूं नाशपाती पककर तैयार है"पहले आता तो जल्दी होता और बाद में आता तो देर हो जाती "
👉 दूसरा नज़रिया:
आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख का था
"मैं इस संसार में या तो बहुत जल्दी या बहुत देर से आया हूँ। अब मैं सहज महसूस नहीं करता; यदि मैं पहले आया होता, तो इस युग का आनंद लेता, यदि बाद में आया होता, तो इसके पुनर्निर्माण में सहायक होता; आज मुझे अपना पूरा जीवन इस जर्रे-जर्रे बिखरती हुई पुरानी व्यवस्था (राजशाही/रूढ़िवादिता) को संभालने में लगाना पड़ रहा है।"
तो उपरोक्त दोनों नजरिए यह बताते हैं
कि विषम परिस्थितियों वाला नेपोलियन महान विजेता बना वहीं अनुकूल परिस्थितियों वाला मेटरनिख ऑस्ट्रिया के पतन का कारण बना।
जो भी ,जैसी भी परिस्थिति हो उनसे शिकायत नहीं करके कुछ अलग करके दिखाना चाहिए, जो कोई नहीं कर पाया वो अगर आप करते हो तब अलग पहचाने जाओगे
इसलिए हर अच्छे बुरे समय से लड़ने के लिए प्रतिपल सज रहो 😍
और हां पढ़ना जीवन का मुख्य उद्देश्य नहीं आनंद पूर्वक जीवन जीने के कई रास्तों में से एक रास्ता मात्र है 👍👍
Dr. Ravi fageria,
associate professor of history | 10 977 |
| 17 | जीवन सभी को आगे बढ़ने के समुचित अवसर तो प्रदान करता है,
परंतु कोई तो सही समय पहचान कर कामयाबी में बदल लेता है,
तो कोई इनसे परेशान होकर अपना रास्ता बदल लेता है।
अब परिस्थितियों को लेकर व्यक्ति के दो नजरिये हो सकते हैं
👉 प्रथम नजरिया:
एक कामयाब व्यक्ति वक्त से शिकायत
नहीं करता है जैसे नेपोलियन ने कहा"मैं सही समय पर आया हूं नाशपाती पककर तैयार है"पहले आता तो जल्दी होता और बाद में आता तो देर हो जाती "
👉 दूसरा नज़रिया:
आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख का था
"मैं इस संसार में या तो बहुत जल्दी या बहुत देर से आया हूँ। अब मैं सहज महसूस नहीं करता; यदि मैं पहले आया होता, तो इस युग का आनंद लेता, यदि बाद में आया होता, तो इसके पुनर्निर्माण में सहायक होता; आज मुझे अपना पूरा जीवन इस जर्रे-जर्रे बिखरती हुई पुरानी व्यवस्था (राजशाही/रूढ़िवादिता) को संभालने में लगाना पड़ रहा है।"
तो उपरोक्त दोनों नजरिए यह बताते हैं
कि विषम परिस्थितियों वाला नेपोलियन महान विजेता बना वहीं अनुकूल परिस्थितियों वाला मेटरनिख ऑस्ट्रिया के पतन का कारण बना।
जो भी ,जैसी भी परिस्थिति हो उनसे शिकायत नहीं करके कुछ अलग करके दिखाना चाहिए, जो कोई नहीं कर पाया वो अगर आप करते हो तब अलग पहचाने जाओगे
इसलिए हर अच्छे बुरे समय से लड़ने के लिए प्रतिपल सज रहो 😍
और हां पढ़ना जीवन का मुख्य उद्देश्य नहीं आनंद पूर्वक जीवन जीने के कई रास्तों में से एक रास्ता मात्र है 👍👍
Dr. Ravi fageria,
associate professor of history | 1 |
| 18 | RAVI FAGERIA (Bodhisattva) shared a file with you
3EF757B113504408BA1A4248FA66C3E0 (1):
https://ap.wps.com/cms/docs/d/cbCaebrR2wn1aKLn?sa=601.1074
Open in APP:
https://go.wps.com/s7GAHkSZFXkE | 11 702 |
| 19 | https://youtu.be/Jw1xJ1KLvbU | 12 872 |
| 20 | जो आसान समय में मुश्किल काम करता है वही मुश्किल दौर में सफलता अपने नाम करता है,
जो पाषाण काल में लौह काल की सोच रखता है!
वह अपने बाकी साथियों से ज़्यादा सफ़लता की अप्रोच रखता है!
जिसका साहस पोरस है, उसके आगे क्या सिकंदर और क्या फारस है!
जिसकी तैयारी का विस्तार मौर्य सरीखा और रिवीजन पाटलिपुत्र तुल्य है,
उसकी सफलता का सूत्र अतुल्य है!
जिसके नोट्स में गुप्तों सा वैभव और अध्ययन में हर्ष सी उदारता है,
वही परीक्षा में कामयाबी का रथ उतारता है।
जिसकी तैयारी में प्रताप तुल्य स्वाभिमान शिवाजी जैसा स्वत्त्व और अकबर और कबीर तुल्य समन्वय है ,
उसे कहां परीक्षा का भय है।
जिसकी लक्ष्य प्राप्ति योजना में भगत सिंह सरीखा त्याग ,बोस जैसी बुद्धिमता और गांधी जैसा संघर्ष हो,
तो क्यों ना उसका उत्कर्ष हो।
जिसके मन मस्तिष्क में अपने मैटर और गुरुओं के लिए चाणक्य, अरस्तु, रामदास
अब्दुल लतीफ़ सा आदर है तो क्यों ना उसकी सफलता चंद्रगुप्त, सिकंदर, शिवाजी और अकबर हों ।
😍😍😍
Dr.Ravi fageria
Associate professor | 15 091 |
