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ऐसे ही प्राइमरी टीजीटी पीजीटी फॉर्म आएगा उसी में एग्जाम डेट मेन्शन रहेगा देख रहे हो विंडो 1 महीने टाइम दिया एग्जाम का फॉर्म के लास्ट डेट से।
और एक बात और ऐसे किसी भी व्यक्ति पर भरोसा न करें जो ये कहें की पेपर अभी नहीं होगा, भाई कंपीटिशन का दौर है हो सकता है आपको बोले पेपर अभी नहीं होगा और चुपके से अपनी तैयारी कर रहा हो🤣🤣🤣😜😜
तो सभी होशियार रहे कही ऐसा ना हो की कोई और होशियारी दिखा दे आपके साथ 😁😁🙏
😢😭😥
ना वांगचुक घायल हुआ, ना दीपके, ना दहिया, ना सौरभ
ना नेहा, ना जुनैद
ना स्वरा ,ना योगेंद्र यादव ,ना प्रशांत भूषण, ना प्रकाश राज
धार्मिक नारे लगाने वाली' औरत
ना सीता माता को गाली देने वाला कामरा
ना केजरीवाल ना सिसोदिया
कोई नहीं पीटा गया
सब एसी कमरे में बैठ कर जंतर मंतर का सीधा प्रसारण देख रहे थे
पीटे गए आम आदमी के बच्चे, नौजवान और साधारण घरों से आए पुलिसकर्मी
यही है असली क्रान्ति और यही होता आया है और आगे भी आयेगा, क्यों इनमें से एक भी नेता के बच्चे या परिवार वाले कल के प्रोस्टेट में नहीं शामिल थे, सिस्टम में सुधार तो ये भी ला सकते हैं अपने बच्चों को यहां शिक्षा न दिला कर विदेशों में शिक्षा क्यों दिलाते हैं, मेरा सवाल उन सभी राजनीतिक दलों के नेताओं, सरकारी तंत्र में काम करने वाले उच्च और निम्न सभी कर्मचारियों से सवाल है की आप अपने बच्चों को 12 वी तक की शिक्षा सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं कराते हैं, अपने परिवार का इलाज सरकारी अस्पतालों में क्यों नहीं कराते हैं, अरे जब यही नहीं करा सकते है तो सिस्टम क्या ख़ाक सुधरेगा, खुद में सुधार करें तब देखे मजाल है कोई पेपर लीक हो,
कल को धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा मिल जाता है तो क्या गारंटी है कि पेपर फिर से लीक नहीं होगा,
मांग करनी ही है तो सभी मिलकर ऐसे कड़े कानून की मांग करें जो सभी ऐसे लोगों पर लागू हो जो इस कार्य में लिप्त है सभी को समान रूप से सजा मिले चाहे मंत्री हो या कर्मचारी।
क्यों नहीं कोई नेता अभी तक ऐसे किसी कानून की मांग किया,नहीं करेगा जवाब सभी को पता है लेकिन बोलेंगे नहीं।
किसी एक को सुधारने से अच्छा है सिस्टम में सुधार हो जो की बहुत ज़रूरी भी है,
अगर खिलाफ़ है, होने दो! जान थोड़े है।
ये सब धुँआ है कोई आसमान थोड़े है।
हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है,
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है।। - राहत इन्दौरी
ये बात नई भर्ती में पदों के लिए है या पुरानी,
और GIC में होम साइंस और बाकी कुछ विषयों को जिन्हें शामिल नहीं किया गया था उनकी वैकेंसी आयेगी या नहीं
अगर मुझे कभी आंदोलन करना पड़ा, तो मैं किसी मंत्री को हटाने के लिए नहीं, बल्कि इन 2 बड़े बदलावों के लिए सड़कों पर उतरूँगी!
नेताओं और मंत्रियों को हटाने से न तो इस देश की सोच बदली है और ना ही बदलेगी। आती-जाती कोई भी सरकारें सिर्फ शासन करने और कुर्सी संभालने आती हैं। मै यहां के नेता मंत्री नहीं बल्कि पूरे शिक्षा के सिस्टम से नाखुश हूं अगर वाकई देश का भविष्य बदलना है, तो हमें व्यवस्था की जड़ पर प्रहार करना होगा।
मेरे आंदोलन के दो मुख्य स्तंभ ये होंगे...
शिक्षा में पूर्ण समानता होनी चाहिए...एक जैसी बेंच, एक जैसा भविष्य
देश में सरकारी स्कूलों का ढांचा इतना मजबूत और विश्वस्तरीय होना चाहिए कि किसी को प्राइवेट स्कूल की तरफ देखना ही न पड़े।
जितने भी बड़े प्रशासनिक अधिकारी (IAS, IPS) हैं, जितने भी नेता और मंत्री हैं, उनके बच्चे और एक आम गरीब आदमी का बच्चा—सब एक साथ, एक ही बेंच पर बैठकर शुरुआती शिक्षा सरकारी स्कूलों से लें।
जब तक बड़े लोगों के बच्चे इन स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक सरकारी स्कूलों का स्तर कभी नहीं सुधरेगा। शिक्षा के मामले में हर बच्चे को समानता का अधिकार मिलना ही चाहिए।
इलाज में पूर्ण समानता होनी चाहिए..जिंदगी पर सबका हक एक समान है।
हर व्यक्ति अपने परिवार के लिए अनमोल है, चाहे वह अमीर हो या गरीब। बीमारी कभी चेहरा देखकर नहीं आती, तो इलाज पैसे देखकर क्यों हो?
नियम यह हो देश के हर नागरिक को इलाज के मामले में समानता का अधिकार हो। अगर कोई व्यक्ति बीमार पड़ा है, तो उसकी जान बचाने के बीच में 'पैसा' कभी रोड़ा नहीं बनना चाहिए।
जो वीआईपी इलाज मंत्रियों और अफसरों को मिलता है, वही इलाज देश के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी मुफ्त और बेहतरीन मिलना चाहिए।
एक अंतिम बात...
किसी एक मंत्री को पद से हटा देने से या चिल्लाने से कुछ नहीं बदलने वाला। यह लड़ाई चेहरों की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को बदलने की है जो अमीर और गरीब के बीच की खाई को बढ़ा रही है।
मैं सत्ता बदलने के नहीं, व्यवस्था और सोच बदलने के पक्ष में हूँ!
जय हिंद, जय भारत! 🇮🇳
#RightToEducation #RightToHealth
सोशल मीडिया पर इस घटना को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
सच्चाई यह है कि शिक्षिका के पैर में इन्फेक्शन है, जिसका इलाज चल रहा है। डॉक्टर ने उन्हें गंदे पानी और कीचड़ से बचने की सलाह दी है। लेकिन नौकरी की जिम्मेदारी निभाने के लिए उन्हें रोज़ विद्यालय जाना पड़ता है।
विद्यालय के बच्चों ने अपने गुरु के प्रति सम्मान और स्नेह दिखाते हुए कीचड़ से बचाने के लिए बेंच लगाकर रास्ता बना दिया। यह बच्चों की संवेदनशीलता और संस्कार का परिचय है।
लेकिन असली सवाल यह है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी क्या एक सरकारी विद्यालय तक जाने के लिए कच्चा रास्ता भी नहीं बन सका? यदि विद्यालय प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि समय रहते मिट्टी भराई करवा देते, तो न शिक्षिका को यह परेशानी होती और न ही बच्चों को रोज़ कीचड़ से होकर विद्यालय जाना पड़ता।
बहस बच्चों के इस सम्मानजनक प्रयास पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर होनी चाहिए जिसने विद्यालय तक एक सामान्य रास्ता भी उपलब्ध नहीं कराया।
मामला कीचड़ का है, सवाल भी कीचड़ पर ही होना चाहिए।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा विभिन्न विषयों में पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश हेतु आवेदन आमंत्रित किये हैं जिसकी अंतिम तिथि 22 अगस्त 2026 है I अधिक जानकारी हेतु विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन करें I
महिलाओं को रोज नई-नई तरकीब सूझ रही है 😄😄😄😄
कभी नीला ड्रम,कभी पहाड़ी से धकेलना, कभी सिलेंडर, कभी सांप से डसवाना ,कभी फर्श में दफना कर ऊपर बाथरूम बना देना है|😄😄😄😄😄
अब तो पुरुषों का ईश्वर ही मालिक है 😄😄😄😄
सावधान रहें ,सतर्क रहें, सुरक्षित रहें|
Repost from ◆श्री क्लासेस –नई दिशा◆
💥👆👇🖍उत्तरप्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग New Syllabus Update होने लगे
उत्तर प्रदेश शिक्षासेवा चयन आयोग द्वारा आगामी परीक्षाओं हेतु नवीनतम पाठ्यक्रम - सहायक आचार्य(असिस्टेंट प्रोफेसर)-https://www.upessc.up.gov.in/Home/Syllabus_all
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के जंतर-मंतर से हटाकर हॉस्पिटल ले जाया गया.
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ट्वीट किया है कि उन्हें मारा गया है और हिरासत में ले लिया गया है.
वहीं इस ताज़ा घटनाक्रम पर दिल्ली पुलिस की ओर से भी बयान आया है.
डीसीपी नई दिल्ली ने इस मामले की जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा हैं.
