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कुदरत का ऐसा जादू, जो आपने पहले कभी नहीं देखा होगा!
क्या आप यकीन करेंगे कि बिना किसी मेटल, सोने-चांदी या केमिकल के भी इतना खूबसूरत गहना बनाया जा सकता है?
केरल के वायनाड की पनियां (Paniya) जनजाति की महिलाएं सदियों से 100% प्राकृतिक चीज़ों जैसे—रत्ती (गुंझा) के चमकदार बीजों, केतकी के सूखे पत्तों और जंगली मधुमक्खियों के मोम से यह अद्भुत इयररिंग तैयार करती आ रही हैं!
यह सिर्फ एक ज्वेलरी नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत की एक अनमोल निशानी है।
बागपत की बालूशाही और घेवर अपने पारंपरिक स्वाद से स्थानीय खानपान की परंपरा को विशिष्ट पहचान देते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जनपद–एक व्यंजन' पहल इस अनूठी मिठास को नई पहचान और व्यापक मंच प्रदान कर रही है।
सुगंध, स्वाद और समृद्ध परंपरा का संगम—राम-कटोरी, मखाना और काला नमक चावल सिद्धार्थनगर की पाक विरासत को विशिष्ट पहचान देते हैं। 'एक जनपद–एक व्यंजन' पहल इस स्थानीय स्वाद और परंपरा को नई पहचान तथा नए अवसर प्रदान कर रही है।
बदायूं की जरी-जरदोजी अपनी बारीक कारीगरी और समृद्ध शिल्प परंपरा के लिए जानी जाती है। 'एक जनपद–एक उत्पाद' पहल के माध्यम से इस पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान मिल रही है और कारीगरों को व्यापक बाजार के साथ नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
‘एक जनपद–एक उत्पाद’ योजना के माध्यम से आगरा के चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग, पेठा उद्योग तथा पत्थर एवं संगमरमर नक्काशी हस्तशिल्प को नई पहचान मिल रही है, वहीं उनसे जुड़े कारीगरों और उद्यमियों के लिए नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
अमरोहा की ढोलक अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला और मधुर ध्वनि के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखती है। 'एक जनपद–एक उत्पाद' पहल इस पारंपरिक वाद्ययंत्र को नई पहचान, व्यापक बाजार और नए अवसरों से जोड़ रही है।
जनपद बांदा का शजर पत्थर अपनी प्राकृतिक आकृतियों और अद्वितीय शिल्पकला के लिए विश्वभर में विशिष्ट पहचान रखता है। ‘एक जनपद–एक उत्पाद’ पहल इस अनूठी विरासत के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय शिल्पकारों को नए अवसर और व्यापक बाजार भी उपलब्ध करा रही है।
बस्ती का लकड़ी शिल्प अपनी उत्कृष्ट काष्ठकारी, आकर्षक नक्काशी और समृद्ध पारंपरिक शिल्पकला के लिए विशिष्ट पहचान रखता है। ‘एक जनपद–एक उत्पाद’ (ODOP) पहल इस विरासत को संरक्षित करते हुए स्थानीय कारीगरों को नए अवसर और व्यापक बाजार उपलब्ध करा रही है।
बाराबंकी के हथकरघा उत्पाद अपनी उत्कृष्ट बुनाई, पारंपरिक शिल्पकला और आकर्षक डिजाइनों के लिए विशेष पहचान रखते हैं।
‘एक जनपद–एक उत्पाद’ (ODOP) पहल इस समृद्ध हथकरघा परंपरा को संरक्षित करते हुए स्थानीय बुनकरों को व्यापक बाजार और नए अवसरों से जोड़ रही है।
गाजीपुर की जूट वॉल हैंगिंग अपनी आकर्षक हस्तशिल्प कला और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप के लिए विशेष पहचान रखती है।
‘एक जनपद–एक उत्पाद’ योजना इस पारंपरिक शिल्प को नई पहचान देते हुए स्थानीय शिल्पकारों को व्यापक बाजार और नए अवसरों से जोड़ रही है।
हमीरपुर का फुटवियर उद्योग अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला, उच्च गुणवत्ता और पारंपरिक कारीगरी के लिए विशेष पहचान रखता है। ‘एक जनपद–एक उत्पाद’ योजना स्थानीय कारीगरों को नए अवसर प्रदान करते हुए इस पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन रही है।
मेरठ की खेल सामग्री ने स्थानीय कौशल को वैश्विक पहचान दिलाई है।
''एक जनपद–एक उत्पाद' पहल के माध्यम से गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्ट निर्माण के बल पर मेरठ देश ही नहीं, बल्कि विश्व के खेल बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
महोबा का गौरा पत्थर शिल्प परंपरा, शिल्पकौशल और सृजनशीलता का अनुपम प्रतीक है।
एक जनपद–एक उत्पाद (ODOP) के माध्यम से यह विशिष्ट शिल्प स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को नई पहचान और वैश्विक बाजार में नए अवसर प्रदान कर रहा है।
पीलीभीत की बांसुरी अपनी मधुर ध्वनि और उत्कृष्ट शिल्पकला से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल तक पहुंचा रही है।
मुख्यमंत्री MYogiAdityanath जी के प्रभावी नेतृत्व में सर्पदंश से बचाव और उपचार के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की एक नई पहल की गई है। लखनऊ के कुकरैल में प्रदेश का पहला स्नेक वेनम एक्सट्रैक्शन सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिससे एंटी-वेनम के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
इस केंद्र में सांपों के जहर की विषाक्तता पर शोध और सर्पदंश से जुड़े मामलों के समाधान पर भी काम होगा। क्षेत्रीय स्तर पर एंटी-वेनम उपलब्ध होने से आसपास के जिलों को त्वरित लाभ मिलेगा और उपचार व्यवस्था और मजबूत होगी।
गोरखपुर की टेराकोटा कला यानी ‘लोकल मिट्टी से ग्लोबल पहचान’
‘एक जनपद–एक उत्पाद’ के तहत यूपी के कुशल कारीगर पारंपरिक कला को मॉडर्न डिजाइन के साथ जोड़कर ऐसे क्रिएटिव प्रोडक्ट्स तैयार कर रहे हैं, जो विरासत भी हैं और आज की पसंद भी।
एक जनपद–एक उत्पाद (ODOP) योजना के अंतर्गत कन्नौज का प्रसिद्ध इत्र अपनी पारंपरिक कला, उत्कृष्ट शिल्प और मनमोहक सुगंध से देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।
एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP) के अंतर्गत लखनऊ की प्रसिद्ध चिकनकारी को मिल रही नई पहचान।
🧵 परंपरा, हुनर और बारीक कारीगरी का अनूठा संगम।
एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP) के अंतर्गत सुलतानपुर का मूंज उत्पाद पारंपरिक हुनर और रचनात्मकता का प्रतीक है। स्थानीय कारीगरों की कुशल बुनाई से तैयार ये उत्पाद आत्मनिर्भरता को नई पहचान दे रहे हैं।
‘एक जनपद–एक उत्पाद’ 🇮🇳
परंपरा का टच, मॉडर्न लुक और मेड इन यूपी का स्वैग।
फिरोजाबाद का हुनर अब देश-दुनिया में अपनी चमक बिखेर रहा है।
