𝙏ʜᴏᴜɢʜᴛ𝙨 | 𝙇ɪғᴇ 𝙏ɪᴘ𝙨 | 𝙄ɴ𝙨ᴘɪʀᴀᴛɪᴏɴ
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𝐓𝐄𝐋𝐄𝐆𝐑𝐀𝐌 𝐍𝐎.𝟏 𝐌𝐎𝐓𝐈𝐕𝐀𝐓𝐈𝐍𝐀𝐋 𝐂𝐇𝐀𝐍𝐍𝐄𝐋 🔥 कुछ अलग , कुछ नया कुछ बेहतर , कुछ बेहतरीन सोच ऐसी , जो दुनिया बदल दे ✍️ Buy ads: https://telega.io/c/Indian_thought Contact 🆔 @Aspirant_bot #𝘼𝙡𝙡_𝙄𝙉_𝙊𝙉𝙀 ⚔️ #Motivational_dose
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पिता से भी विशाल हृदय होता है एक शिक्षक का, वह अपने पढ़ाए हर बच्चे को तरक़्क़ी करते देखना चाहता है।
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✅ @iasipsmotivation
🌺
जो लड़कियां अपने परिवार की
जिम्मेदारियों को उठाती हैं
उन लड़कियों से अधिक सुंदर
कोई अन्य स्त्री नहीं होती..!!
❤️✨
.
इस कलियुग में लोग आपको नहीं..
आपके अच्छे वक्त को अहमियत और इज्जत देते है..!! ✅
हालात का बहाना बना कर अपनी नाकामी
मत छुपाइए।
समंदर के खारे तट पर भी नारियल का पानी
मीठा ही होता है।। ✅
मां-बाप का सपना सिर्फ यही होता है कि उनका बच्चा कामयाब हो, और बच्चे की जिम्मेदारी होती है कि वह उनकी उम्मीदों को सच कर दिखाए। पढ़ाई सिर्फ अपनी नहीं, उन आंखों की रोशनी है, जो हर दिन तुम्हारे उज्ज्वल भविष्य की दुआ करती हैं।
जब तुम रातों को जागकर पढ़ते हो, तो मां तुमसे ज्यादा जागती है, और जब तुम हार मानने लगते हो, तो पिता तुमसे ज्यादा लड़ते हैं। ये सिर्फ तुम्हारी नहीं, उनकी भी परीक्षा है, क्योंकि उनकी मेहनत तुम्हारी सफलता से पूरी होती है। 🍃💫
इस पुरुष प्रधान समाज मे
एक स्त्री की पहचान उसकी आत्मनिर्भरता से है,
अन्यथा वो किसी की बेटी है, किसी की बीवी है
या फिर किसी की माँ।✍️ ❤️
कोई भी लड़की एक गरीब लड़के के साथ अपनी ज़िंदगी नहीं बिताना चाहती,
लेकिन कोई भी माँ अपने बेटे को खोना या उसे बर्बाद होते देखना नहीं चाहती।
इसलिए अपने सपनों के पीछे किसी लड़की को प्रभावित करने के लिए नहीं,
बल्कि अपनी माँ को एक बेहतर और सुरक्षित ज़िंदगी देने के लिए भागो। ❤️✅
घर पर लगातार लंबा समय बिताने और धीरे-धीरे बाहर जाने की इच्छा खो देने वाले लोग अक्सर सोचते हैं कि वे सिर्फ आराम कर रहे हैं। लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से, उनमें से कई लोग 'मेंटल रूमिनेशन' (मानसिक जुगाली या विचारों के जाल) का सामना कर रहे होते हैं।
यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ दिमाग की काम करने की गति धीमी हो जाती है, लेकिन अंदर चलने वाले विचारों की संख्या लगातार बढ़ती जाती है। इस वजह से कुछ भी करने की प्रेरणा धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म हो जाती है। इंसान का मन अतीत (past) में फंस जाता है, भविष्य की चिंताओं में खोया रहता है और खुद को अंदर ही अंदर थका देता है।
यह कोई आलस्य नहीं है, बल्कि यह आपके नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) का 'सर्वाइवल मोड' (बचाव की स्थिति) में फंस जाना है। यह स्थिति जितनी लंबी खिंचती है, सामान्य जीवन उतना ही दूर और पराया लगने लगता है। सबसे मुश्किल बात यह है कि आप किसी एक बड़े मोटिवेशन या अचानक आए जोश से इससे बाहर नहीं निकल सकते। इसकी रिकवरी (सुधार) हमेशा एक बहुत छोटे कदम से शुरू होती।
