𝙏ʜᴏᴜɢʜᴛ𝙨 | 𝙇ɪғᴇ 𝙏ɪᴘ𝙨 | 𝙄ɴ𝙨ᴘɪʀᴀᴛɪᴏɴ
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भरोसा कभी शोर मचाकर नहीं टूटता। यह बहुत खामोशी से, धीरे-धीरे छोटी-छोटी निराशाओं के साथ टूटता है।
भरोसा ही वह चीज़ है जिससे आप किसी के साथ बिना किसी डर के रह पाते हैं।
- आपको हर बात पर बहुत ज़्यादा सोचना नहीं पड़ता।
- आपको यह शक नहीं होता कि उनके बोलने का असली मतलब क्या है।
- आपको खुद को अगले धोखे या दर्द के लिए तैयार नहीं करना पड़ता।
जब रिश्ते में भरोसा होता है, तो प्यार बहुत आसान और हल्का लगता है।
- आप खुलकर सच बोल सकते हैं।
- आप अपनी कमियाँ भी सामने रख सकते हैं ।
- आपको यह डर नहीं होता कि आज आपकी जो बात है, कल वही आपके खिलाफ इस्तेमाल की जाएगी।
लेकिन जब एक बार भरोसा टूट जाता है, तो इंसान अंदर से बदल जाता है।
- आप भले ही सामने वाले को माफ़ कर दें।
- आप शायद उनके साथ ही रहें।
- आप दिल से चाहते भी हों कि सब कुछ पहले जैसा ठीक हो जाए।
लेकिन आपका दिमाग वह बातें कभी नहीं भूलता, जिसे आपका दिल भुलाकर आगे बढ़ना चाहता है।
- इसलिए अब आप हर छोटी बात पर ध्यान देने लगते हैं।
- आप शक और सवाल ज़्यादा करने लगते हैं।
- आप खुद को छुपाने लगते हैं और संभलकर चलते हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि टूटा हुआ भरोसा कभी वापस नहीं आ सकता।
लेकिन भरोसा सिर्फ "सॉरी" बोलने से दोबारा नहीं जुड़ता।
यह आपके लगातार अच्छे व्यवहार से वापस आता है:
- तब भी सच बोलने से, जब झूठ बोलकर बचना ज़्यादा आसान हो।
- तब भी सही काम करने से, जब आपको कोई देख न रहा हो।
- छोटे-छोटे वादे निभाने से।
- सामने वाले को कभी-कभार नहीं, बल्कि हमेशा सुरक्षित महसूस कराने से।
क्योंकि लोग एक समय के बाद आपकी बातों पर यकीन करना बंद कर देते हैं।
वे देखते हैं कि आपका लगातार का बर्ताव कैसा है।
और भरोसे का सबसे सीधा सच यही है:
भरोसा उन वादों से नहीं बनता जो आप किसी को खोने के डर से जल्दबाजी में करते हैं।
भरोसा इस बात से बनता है कि जब सामने वाला आप पर दोबारा यकीन कर लेता है, तो आप उसके बाद भी हमेशा वैसे ही अच्छे इंसान बने रहते हैं या नहीं।
विलम्ब से ही सही,
पर ये तथ्य समझ आ ही गया की,
औरो की प्रसन्नता में
समय व्यर्थ करने के बजाय स्वयं
के मन की और ध्यान देना है।
क्योंकी अब मुझे किसी और से नहीं,
बस स्वयं से ही मिलना हैं...🪷
पिता से भी विशाल हृदय होता है एक शिक्षक का, वह अपने पढ़ाए हर बच्चे को तरक़्क़ी करते देखना चाहता है।
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