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Geography (भूगोल)

Geography (भूगोल)

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🔹 विश्व और भारत का भूगोल 🌎 🔹 महाद्वीप, देश, राज्य और शहरों की विशेषताएँ 🗺️ 🔹 भौगोलिक घटनाएँ – जलवायु, पर्वत, नदियाँ, महासागर 🌊🏔️ अपडेट पाने के लिए चैनल से जुड़े रहें और ज्ञान बढ़ाएँ!

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भारत के 4 हॉटस्पॉट क्षेत्र
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भारत के महत्वपूर्ण चैनल/जलडमरूमध्य/रेखा/दर्रा Join 🔜@PCS_Samrat
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निम्नलिखित में से कौन सा/सही ढंग से मिलान किया गया है? 1. मनामा-बहरीन 2. अबूजा-नाइजीरिया 3. मिंस्क-बेलारूस
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लोग मृत सागर (Dead Sea) में क्यों नहीं डूबते?
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निम्नलिखित में से कौन-कौन से स्थान गुजरात राज्य में स्थित है? 1. हड़प्पा 2. लोथल 3. रंगपुर  4. बनवाली 5. भागत्राव 6. रोपड।
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Countries bordering Syria Trick: TIJIL T - Turkey I - Iraq J -Jordan I - Israel L - Lebanon #pre
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० संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas) :- • संरक्षित क्षेत्रों (Protected Areas) का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता, वन्यजीवों एवं उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना है। • भारत में संरक्षित क्षेत्रों की व्यवस्था वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत की गई है। • भारत के प्रमुख संरक्षित क्षेत्र हैं – राष्ट्रीय उद्यान (National Park), वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary), जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve), संरक्षण रिज़र्व (Conservation Reserve) एवं सामुदायिक रिज़र्व (Community Reserve)। • राष्ट्रीय उद्यान (National Park) में संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का संरक्षण किया जाता है। • राष्ट्रीय उद्यान की घोषणा राज्य सरकार द्वारा की जाती है। • राष्ट्रीय उद्यान में शिकार, चराई, लकड़ी कटाई एवं अन्य मानवीय गतिविधियाँ सामान्यतः प्रतिबंधित होती हैं। • राष्ट्रीय उद्यान में स्थानीय लोगों के अधिकार सामान्यतः समाप्त कर दिए जाते हैं। • राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं में परिवर्तन राज्य विधानमंडल की स्वीकृति से ही किया जा सकता है। • भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान – जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (1936) (पूर्व नाम – हैली राष्ट्रीय उद्यान) है। • भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान – हेमिस राष्ट्रीय उद्यान (लद्दाख) है। • उत्तर प्रदेश का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान – दुधवा राष्ट्रीय उद्यान है। • वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों एवं उनके आवास का संरक्षण करना है। • वन्यजीव अभयारण्य की घोषणा राज्य सरकार द्वारा की जाती है। • वन्यजीव अभयारण्य में सीमित मानवीय गतिविधियाँ एवं चराई की अनुमति दी जा सकती है। • वन्यजीव अभयारण्य में स्थानीय लोगों के कुछ पारंपरिक अधिकार बने रह सकते हैं। • राष्ट्रीय उद्यान की तुलना में वन्यजीव अभयारण्य में संरक्षण के नियम कम कठोर होते हैं। • जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) का उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, अनुसंधान एवं सतत विकास है। • जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र की अवधारणा यूनेस्को के "मनुष्य एवं जैवमंडल (MAB) कार्यक्रम" पर आधारित है। • जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में कोर (Core), बफ़र (Buffer) एवं संक्रमण (Transition) क्षेत्र होते हैं। • कोर क्षेत्र में मानव गतिविधियाँ पूर्णतः निषिद्ध होती हैं। • बफ़र क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षा एवं सीमित गतिविधियों की अनुमति होती है। • संक्रमण क्षेत्र में स्थानीय समुदायों द्वारा सतत विकास संबंधी गतिविधियाँ की जाती हैं। • भारत का प्रथम जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र – नीलगिरि (1986) है। • भारत का प्रथम यूनेस्को विश्व जैवमंडल नेटवर्क में शामिल जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र – नीलगिरि है। • एक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य एवं वन क्षेत्र सम्मिलित हो सकते हैं। • जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र का गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत नहीं किया जाता। • संरक्षण रिज़र्व (Conservation Reserve) की स्थापना सरकारी भूमि पर वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) एवं संरक्षित क्षेत्रों के बीच संपर्क बनाए रखने हेतु की जाती है। • सामुदायिक रिज़र्व (Community Reserve) की स्थापना स्थानीय समुदायों की सहभागिता से निजी अथवा सामुदायिक भूमि पर की जाती है। ० क्विक रिवीजन :- • भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान → जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (1936) • उत्तर प्रदेश का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान → दुधवा राष्ट्रीय उद्यान • भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान → हेमिस राष्ट्रीय उद्यान (लद्दाख) • भारत का प्रथम जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र → नीलगिरि (1986) • प्रथम यूनेस्को जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र → नीलगिरि • राष्ट्रीय उद्यान → सबसे कठोर संरक्षण • वन्यजीव अभयारण्य → सीमित मानवीय गतिविधियाँ संभव • जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र → संरक्षण + अनुसंधान + सतत विकास • कोर क्षेत्र → मानव गतिविधियाँ पूर्णतः निषिद्ध • बफ़र क्षेत्र → अनुसंधान एवं शिक्षा • संक्रमण क्षेत्र → सतत विकास एवं स्थानीय समुदाय की सहभागिता • सामुदायिक रिज़र्व → निजी/सामुदायिक भूमि पर #Prelims #PCS2026 #PYQFacts #PrelimsModeActivated_ThePCSHub
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० जैव विविधता (Biodiversity:- • जैव विविधता से तात्पर्य पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवों, उनकी प्रजातियों, आनुवंशिक विविधता तथा पारितंत्रों की विविधता से है। • 'जैव विविधता' शब्द का प्रथम प्रयोग Walter G. Rosen ने 1986 में किया था। • जैव विविधता को लोकप्रिय बनाने का श्रेय Edward O. Wilson को दिया जाता है। • जैव विविधता के तीन स्तर हैं— • आनुवंशिक विविधता • प्रजातीय विविधता • पारितंत्रीय विविधता • भारत विश्व के 17 मेगा जैव-विविधता वाले देशों में शामिल है। • भारत में विश्व की लगभग 8% ज्ञात जैव विविधता पाई जाती है। • भारत के चार जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं— • हिमालय • इंडो-बर्मा • पश्चिमी घाट एवं श्रीलंका • सुंडालैंड (निकोबार द्वीप समूह) • जैव विविधता हॉटस्पॉट की अवधारणा Norman Myers ने 1988 में दी थी। • हॉटस्पॉट बनने की दो प्रमुख शर्तें हैं— • कम-से-कम 1500 स्थानिक (Endemic) पादप प्रजातियाँ हों। • मूल प्राकृतिक वनस्पति का 70% से अधिक नष्ट हो चुका हो। • स्थानिक (Endemic) प्रजातियाँ केवल एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में ही पाई जाती हैं। • विदेशी (Exotic) प्रजातियाँ अन्य क्षेत्रों से लाई गई प्रजातियाँ होती हैं। • आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं। • की-स्टोन (Keystone) प्रजाति के विलुप्त होने से पूरा पारितंत्र प्रभावित हो सकता है। • फ्लैगशिप (Flagship) प्रजाति संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतीक के रूप में उपयोग की जाती है। उदाहरण: बाघ। • अम्ब्रेला (Umbrella) प्रजाति के संरक्षण से अनेक अन्य प्रजातियों का भी संरक्षण हो जाता है। • रेड डाटा बुक संकटग्रस्त प्रजातियों की जानकारी प्रदान करती है। • International Union for Conservation of Nature (IUCN) प्रजातियों की संरक्षण स्थिति निर्धारित करता है। • IUCN की प्रमुख श्रेणियाँ हैं— • विलुप्त (EX) • वन्य अवस्था में विलुप्त (EW) • अति संकटग्रस्त (CR) • संकटग्रस्त (EN) • असुरक्षित (VU) • संकट के निकट (NT) • कम चिंता (LC) • जैव विविधता संरक्षण दो प्रकार का होता है— • यथास्थल (In-situ) संरक्षण – राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिज़र्व। • बहिःस्थल (Ex-situ) संरक्षण – चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक, जीन बैंक। • जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) को 1992 के United Nations Conference on Environment and Development (रियो पृथ्वी सम्मेलन) में अपनाया गया। • CBD के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं— • जैव विविधता का संरक्षण। • जैव संसाधनों का सतत उपयोग। • आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त लाभों का न्यायसंगत एवं समान वितरण। ० महत्त्वपूर्ण तथ्य:- • विश्व पर्यावरण दिवस – 5 जून • अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस – 22 मई • भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान – Jim Corbett National Park (1936) • भारत का पहला बायोस्फीयर रिज़र्व – Nilgiri Biosphere Reserve (1986) • भारत में सर्वाधिक राष्ट्रीय उद्यान – Madhya Pradesh • भारत में सर्वाधिक वन क्षेत्र – Madhya Pradesh • भारत में सर्वाधिक वन प्रतिशत – Mizoram • सुन्दरवन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है। • रेड डाटा बुक संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची प्रकाशित करती है। • IUCN का मुख्यालय Gland में स्थित है। #PYQFacts #Prelims #PCS2026 #PrelimsModeActivated_ThePCsHub@ThePCSHub1
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9
० पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी की मूल अवधारणाएँ:- • पर्यावरण (Environment) – जीवों तथा उन्हें चारों ओर से घेरने वाले जैविक (Biotic) एवं अजैविक (Abiotic) घटकों का समग्र समूह है। • पारिस्थितिकी (Ecology) – जीवों एवं उनके पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंधों का अध्ययन है। • 'पारिस्थितिकी (Ecology)' शब्द का प्रतिपादन 1866 में Ernst Haeckel ने किया था। • 'पारितंत्र (Ecosystem)' शब्द 1935 में Arthur Tansley ने दिया था। • पारितंत्र (Ecosystem) जैविक एवं अजैविक घटकों तथा उनके बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं से मिलकर बना एक क्रियाशील तंत्र है। • पारितंत्र के जैविक घटक – उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक। • पारितंत्र के अजैविक घटक – जल, वायु, मिट्टी, प्रकाश, तापमान, आर्द्रता एवं खनिज। • आवास (Habitat) किसी जीव का प्राकृतिक निवास स्थान होता है। • निश (Niche) पारितंत्र में किसी जीव की भूमिका, कार्य एवं स्थान को कहते हैं। • इकोटोन (Ecotone) दो पारितंत्रों के बीच का संक्रमण क्षेत्र होता है। • एज प्रभाव (Edge Effect) इकोटोन में पाया जाता है, जिसके कारण यहाँ जैव विविधता अधिक होती है। • बायोम (Biome) समान जलवायु एवं समान वनस्पति वाला विशाल पारिस्थितिक क्षेत्र होता है। • जीवमंडल (Biosphere) पृथ्वी का वह भाग है जहाँ जीवन संभव है। • जीवमंडल का निर्माण स्थलमंडल, जलमंडल एवं वायुमंडल के परस्पर संपर्क से होता है। • उत्पादक (Producers) स्वपोषी जीव होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। उदाहरण: हरे पौधे एवं शैवाल। • उपभोक्ता (Consumers) वे जीव हैं जो भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। • अपघटक (Decomposers) मृत पौधों एवं जीवों को सरल पदार्थों में परिवर्तित करते हैं। उदाहरण: जीवाणु एवं कवक। • डिट्रिटिवोर (Detritivores) मृत जैव पदार्थों को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं। उदाहरण: केंचुआ। • खाद्य श्रृंखला (Food Chain) ऊर्जा प्रवाह का सरल एवं रैखिक मार्ग है। • खाद्य जाल (Food Web) अनेक खाद्य श्रृंखलाओं का परस्पर जुड़ा हुआ जाल है। खाद्य जाल, खाद्य श्रृंखला की अपेक्षा अधिक स्थिर होता है। • ऊर्जा का अंतिम एवं प्रमुख स्रोत सूर्य है। • ऊर्जा प्रवाह सदैव एकदिशीय (Unidirectional) होता है। • 10% नियम के अनुसार एक ट्रॉफिक स्तर से अगले ट्रॉफिक स्तर तक औसतन केवल 10% ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है। • 10% नियम का प्रतिपादन Raymond Lindeman ने किया था। • पारिस्थितिक पिरामिड (Ecological Pyramid) तीन प्रकार के होते हैं। संख्या पिरामिड, जैवभार पिरामिड एवं ऊर्जा पिरामिड। • ऊर्जा पिरामिड सदैव सीधा (Upright) होता है। ऊर्जा पिरामिड कभी भी उल्टा नहीं होता। • जलीय पारितंत्र में जैवभार पिरामिड उल्टा हो सकता है। #PCS2026 #PYQFacts #Prelims #PrelimsModeActivated_ThePCsHub@ThePCSHub1
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० जलवायु परिवर्तन (Climate Change) :- • जलवायु परिवर्तन से आशय पृथ्वी की जलवायु में होने वाले दीर्घकालिक परिवर्तनों से है। • वर्तमान जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती सांद्रता है। • प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄), नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O), जलवाष्प, ओज़ोन एवं CFCs हैं। • ग्रीनहाउस प्रभाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो पृथ्वी का औसत तापमान जीवन के अनुकूल बनाए रखती है। • ग्रीनहाउस गैसों की अत्यधिक वृद्धि से वैश्विक तापवृद्धि (Global Warming) होती है। • वैश्विक तापवृद्धि से हिमनदों का पिघलना, समुद्र-स्तर में वृद्धि, सूखा, बाढ़ एवं चरम मौसमी घटनाएँ बढ़ती हैं। • कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) किसी व्यक्ति, उद्योग, संस्था या देश द्वारा उत्सर्जित कुल ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को कहते हैं। • कार्बन सिंक (Carbon Sink) वायुमंडल से CO₂ को अवशोषित करते हैं, जैसे– वन, महासागर एवं आर्द्रभूमियाँ। • वनों की कटाई से कार्बन सिंक घटते हैं और जलवायु परिवर्तन की गति बढ़ती है। • कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit) 1 टन CO₂ अथवा उसके समतुल्य ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी का प्रमाणपत्र होता है। • कार्बन ट्रेडिंग का उद्देश्य उद्योगों को उत्सर्जन कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। • नेट ज़ीरो (Net Zero) का अर्थ है जितना उत्सर्जन हो, उतनी ही मात्रा को अवशोषित या कम करके शुद्ध उत्सर्जन शून्य करना। • नेट ज़ीरो का अर्थ शून्य उत्सर्जन नहीं, बल्कि शुद्ध उत्सर्जन शून्य होता है। • भारत ने वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। • भारत ने वर्ष 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। • पेरिस समझौता (2015) का उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से कम तथा 1.5°C तक सीमित रखने का प्रयास करना है। • UNFCCC जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अभिसमय है। ० क्विक रिवीजन :- • जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण → ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि • सबसे अधिक उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैस → कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) • सबसे प्रभावी प्राकृतिक ग्रीनहाउस गैस → जलवाष्प • कार्बन सिंक → वन, महासागर एवं आर्द्रभूमियाँ • कार्बन क्रेडिट → 1 टन CO₂ समतुल्य उत्सर्जन में कमी • नेट ज़ीरो → शुद्ध उत्सर्जन = शून्य • भारत का नेट ज़ीरो लक्ष्य → 2070 • पेरिस समझौता → 2015 • UNFCCC → 1992 #Prelims #PCS2026 #PYQFacts #PrelimsModeActivated_ThePCSHub
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11
० ओजोन परत (Ozone Layer) :- • ओजोन परत समतापमंडल (Stratosphere) में स्थित ओजोन (O₃) गैस की एक परत है। • ओजोन परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से सुरक्षा प्रदान करती है। • ओजोन परत मुख्यतः 15 से 35 किमी की ऊँचाई पर पाई जाती है। • ओजोन का रासायनिक सूत्र O₃ है। • ओजोन का निर्माण सूर्य की पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में ऑक्सीजन (O₂) से होता है। • समतापमंडल की ओजोन लाभदायक, जबकि क्षोभमंडल (Troposphere) की ओजोन हानिकारक प्रदूषक मानी जाती है। • ओजोन क्षय (Ozone Depletion) से आशय ओजोन परत की मोटाई में कमी से है। • ओजोन क्षय का प्रमुख कारण क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), हैलॉन, कार्बन टेट्राक्लोराइड एवं मिथाइल क्लोरोफॉर्म जैसी गैसें हैं। • CFCs का उपयोग रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, एयरोसोल स्प्रे एवं फोम उद्योग में किया जाता था। • ओजोन परत के क्षय से त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, प्रतिरक्षा तंत्र की कमजोरी तथा फसलों एवं समुद्री जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। • अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र (Ozone Hole) सबसे अधिक विकसित होता है। • ओजोन परत के संरक्षण हेतु मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) अपनाया गया। • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का उद्देश्य ओजोन-क्षयकारी पदार्थों (ODS) के उत्पादन एवं उपयोग को समाप्त करना है। • 16 सितंबर को प्रत्येक वर्ष विश्व ओजोन दिवस (World Ozone Day) मनाया जाता है। • भारत मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता देश है। • ओजोन परत का संरक्षण जलवायु एवं जैव विविधता की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। ० क्विक रिवीजन :- • ओजोन का सूत्र → O₃ • ओजोन परत का स्थान → समतापमंडल (15–35 किमी) • सबसे अधिक ओजोन छिद्र → अंटार्कटिका • ओजोन क्षय का प्रमुख कारण → CFCs • ओजोन संरक्षण संधि → मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) • विश्व ओजोन दिवस → 16 सितंबर • समतापमंडल की ओजोन → लाभदायक • क्षोभमंडल की ओजोन → हानिकारक प्रदूषक #Prelims #PCS2026 #PYQFacts #PrelimsModeActivated_ThePCSHub @ThePCSHub1
339
12
० भारत की जलवायु:- • मानसून का निवर्तन (Retreating Monsoon) सितंबर से उत्तर-पश्चिम भारत से प्रारंभ होकर दिसंबर के मध्य तक पूरे भारत से समाप्त हो जाता है। • लौटती मानसूनी पवनें बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर उत्तर-पूर्वी मानसून के रूप में तमिलनाडु में वर्षा कराती हैं। • तमिलनाडु में मुख्य वर्षा अक्टूबर–दिसंबर के दौरान उत्तर-पूर्वी मानसून से होती है। • AS (शुष्क ग्रीष्म मानसूनी जलवायु) – कोरोमंडल तट (तमिलनाडु) में पाई जाती है। • Amw (लघु शुष्क ऋतु वाली मानसूनी जलवायु) – गोवा के दक्षिण के पश्चिमी तट पर पाई जाती है। • Dfc (शीत आर्द्र जलवायु) – अरुणाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय भागों में पाई जाती है। • AW (उष्ण कटिबंधीय सवाना) जलवायु कर्क रेखा के दक्षिण स्थित प्रायद्वीपीय भारत में मिलती है। • BShw (अर्द्ध-शुष्क स्टेपी) जलवायु पश्चिमी राजस्थान, उत्तर-पश्चिम गुजरात एवं पंजाब के कुछ भागों में पाई जाती है। • E (ध्रुवीय) जलवायु लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मिलती है। • 50 सेमी से कम वर्षा – लद्दाख, पश्चिमी राजस्थान तथा प्रायद्वीपीय भारत के कुछ आंतरिक भागों में होती है। • 200 सेमी से अधिक वर्षा – पश्चिमी घाट, पश्चिमी तट, मेघालय एवं उप-हिमालयी क्षेत्रों में होती है। • ग्रीष्म ऋतु में उत्तर-पश्चिम भारत में 'लू' नामक गर्म एवं शुष्क हवाएँ चलती हैं। • अक्टूबर–नवंबर में बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न उष्णकटिबंधीय चक्रवात पूर्वी तट पर भारी वर्षा कराते हैं। • गोदावरी, कृष्णा, कावेरी के डेल्टाई क्षेत्र चक्रवातों से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। • कोरोमंडल तट की अधिकांश वर्षा लौटते मानसून एवं चक्रवातों से होती है। • "कार्तिक मास की ऊष्मा" (October Heat) मानसून निवर्तन के समय उच्च तापमान एवं अधिक आर्द्रता के कारण अनुभव होती है। • मानसून निवर्तन के समय उत्तर भारत शुष्क, जबकि तमिलनाडु एवं दक्षिण-पूर्वी तट वर्षायुक्त रहते हैं। • मानसून विच्छेद (Break in Monsoon) वर्षा ऋतु के दौरान कुछ दिनों या सप्ताह तक वर्षा रुक जाने की स्थिति है। • उत्तर भारत में मानसून विच्छेद का कारण ITCZ की स्थिति में परिवर्तन एवं चक्रवातों की कमी है। • राजस्थान में मानसून विच्छेद तापमान विलोमता (Temperature Inversion) के कारण होता है। • दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय तमिलनाडु तट अपेक्षाकृत शुष्क रहता है, क्योंकि यह वर्षाछाया क्षेत्र में स्थित है। • मानसून के आगमन पर वर्षा में अचानक वृद्धि को मानसून प्रस्फोट (Burst of Monsoon) कहते हैं। • पूर्वी जेट प्रवाह (Easterly Jet Stream) को मानसून प्रस्फोट का प्रमुख कारण माना जाता है। • ITCZ (अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र) विषुवतीय निम्न दाब का क्षेत्र है, जहाँ व्यापारिक पवनें अभिसरित होती हैं। • पश्चिमी विक्षोभ का उद्गम भूमध्य सागर क्षेत्र में होता है। • पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी जेट प्रवाह द्वारा भारत में प्रवेश करते हैं। • पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा तथा रात्रि तापमान में वृद्धि होती है। #PCS2026 #PYQFacts #Prelims #PrelimsModeActivated_ThePCSHub
480
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० पश्चिमी घाट:- • पश्चिमी घाट को सह्याद्रि पर्वतमाला भी कहा जाता है। • यह ताप्ती नदी के दक्षिण से प्रारंभ होकर कन्याकुमारी तक लगभग 1,600 किमी तक फैली है। • यह गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु – कुल 6 राज्यों में विस्तृत है। • पश्चिमी घाट को 2012 में UNESCO विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया। • पश्चिमी घाट की औसत ऊँचाई 900–1600 मीटर है। • अनैमुडी (Anamudi – 2695 मी.) पश्चिमी घाट तथा दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी है। • नल्लामलाई, नीलगिरि, अन्नामलाई और कार्डमम (इलायची) (उत्तर से दक्षिण) पहाड़ियाँ पश्चिमी घाट की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ हैं। • पालघाट दर्रा (Palghat Gap) पश्चिमी घाट का सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक दर्रा है, जो केरल और तमिलनाडु को जोड़ता है। • भोर घाट तथा थाल घाट महाराष्ट्र के प्रमुख दर्रे हैं। • दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा सबसे पहले पश्चिमी घाट से टकराती है। • पश्चिमी ढाल पर अधिक वर्षा तथा पूर्वी ढाल पर वृष्टि-छाया (Rain Shadow) की स्थिति बनती है। • पश्चिमी घाट में अगुम्बे अत्यधिक वर्षा वाला क्षेत्र है। • कस्तूरीरंगन समिति – पश्चिमी घाट संरक्षण हेतु। • गाडगिल समिति – पश्चिमी घाट को पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की सिफारिश। • पश्चिमी घाट में भारत की लगभग 30% पादप, 50% उभयचर, 60% सरीसृप तथा अनेक स्थानिक (Endemic) प्रजातियाँ पाई जाती हैं। • नीलगिरि तहर और सिंहपुच्छ मकाक पश्चिमी घाट की प्रमुख स्थानिक एवं संरक्षित प्रजातियाँ हैं। • नीलगिरि जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व (1986) है। #PCS2026 #PYQFacts #Prelims #PrelimsModeActivated_ThePCSHub
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world Geography pcs 2026.pdf
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🟧 विश्व के प्रमुख घास के मैदान (Quick Revision) 🟧 विश्व के प्रमुख घास के मैदान (Quick Revision) 🔳 शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान पम्पास – अर्जेंटीना एवं उरुग्वे अल्फाल्फा घास, पशुपालन व गेहूँ उत्पादन प्रेयरीज – कनाडा एवं संयुक्त राज्य अमेरिका चिनूक हवाएँ, गेहूँ की व्यापक खेती डाउन्स – ऑस्ट्रेलिया (मर्रे–डार्लिंग बेसिन) मेरीनो भेड़, बड़े स्टेशन (Sheep Stations), कंगारू वेल्ड – दक्षिण अफ्रीका अंगोरा बकरी, मेरीनो भेड़, गाय-भैंस पालन स्टेपीज – यूरोप एवं एशिया गेहूँ उत्पादन के लिए प्रसिद्ध पुस्टाज – हंगरी शीतोष्ण घास का मैदान कैन्टरबरी – न्यूज़ीलैंड पशुपालन एवं डेयरी के लिए प्रसिद्ध ग्रान चाको – अर्जेंटीना एवं पराग्वे घास का मैदान एवं वन प्रदेश, क्वेब्रेको (Quebracho) की कठोर लकड़ी 🔳 उष्णकटिबंधीय घास के मैदान सवाना – मध्य अफ्रीका (सहारा के दक्षिण) लंबी घास, वन्यजीवों की अधिकता लानोस – वेनेजुएला ओरिनोको नदी बेसिन में विस्तृत काम्पोस – दक्षिणी ब्राज़ील प्राकृतिक चरागाह सेल्वास – ब्राज़ील (अमेज़न बेसिन) ध्यान दें: सेल्वास घास का मैदान नहीं, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय सदाबहार वर्षावन (Equatorial Rainforest) है। 🎯 परीक्षा हेतु ट्रिक पम्पास → अर्जेंटीना प्रेयरीज → अमेरिका–कनाडा डाउन्स → ऑस्ट्रेलिया वेल्ड → दक्षिण अफ्रीका स्टेपीज → यूरोप–एशिया पुस्टाज → हंगरी कैन्टरबरी → न्यूज़ीलैंड सवाना → अफ्रीका लानोस → वेनेजुएला काम्पोस → ब्राज़ील सेल्वास → अमेज़न वर्षावन (घास का मैदान नहीं) ✅ https://t.me/EternalCivilAcademy
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चिल्का झील - भारत की पहली रामसर साईट सबसे बड़ी खारे पानी की झील
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🔲 आठ कोर उद्योग (Eight Core Industries) ▪️ कोयला (Coal) ▪️ कच्चा तेल (Crude Oil) ▪️ प्राकृतिक गैस (Natural Gas) ▪️ रिफाइनरी उत्पाद (Refinery Products) ▪️ उर्वरक (Fertilizers) ▪️ इस्पात (Steel) ▪️ सीमेंट (Cement) ▪️ विद्युत (Electricity) 💡 महत्वपूर्ण तथ्य (UPPCS/PCS Pre): ▪️ ये आठ कोर उद्योग भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का महत्वपूर्ण आधार हैं। ▪️ इनका संयुक्त भार (Weight) 40.27% है।
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यूरोजोन का 21वा सदस्य बना बुल्गारिया 👍✅
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भारत-वियतनाम रणनीतिक साझेदारी
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🔴 पर्यावरण से संबंधित प्रमुख प्रोटोकॉल 1️⃣ क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) 🔹 अपनाया गया – 11 दिसम्बर 1997 🔹 भारत द्वारा हस्ताक्षर – 26 अगस्त 2002 🔹 आधिकारिक रूप से लागू – 16 फरवरी 2005 🎯 उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) के उत्सर्जन को कम करना। ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटना। ✨ प्रमुख तथ्य ✔️ यह United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC) के अंतर्गत बनाया गया समझौता है। ✔️ कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit) की अवधारणा को बढ़ावा दिया गया। ✔️ विकसित देशों (Developed Countries) के लिए उत्सर्जन घटाने के बाध्यकारी (Binding) लक्ष्य निर्धारित किए गए। ✔️ विकासशील देशों, जैसे भारत, पर बाध्यकारी लक्ष्य नहीं थे। 2️⃣ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol) 🔹 अपनाया गया – 16 सितम्बर 1987 🔹 लागू – 1 जनवरी 1989 🔹 भारत द्वारा हस्ताक्षर – 19 जून 1992 🎯 उद्देश्य ओजोन परत (Ozone Layer) का संरक्षण। ओजोन को नुकसान पहुँचाने वाले CFCs (Chlorofluorocarbons) एवं अन्य रसायनों के उत्पादन और उपयोग को चरणबद्ध रूप से समाप्त करना। ✨ प्रमुख तथ्य ✔️ ओजोन परत संरक्षण हेतु विश्व का सबसे सफल पर्यावरणीय समझौता माना जाता है। ✔️ इसके कारण ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के उपयोग में भारी कमी आई। ✔️ बाद में Kigali Amendment (2016) के माध्यम से HFCs को भी नियंत्रित करने का निर्णय लिया गया। 🎯 परीक्षा हेतु ट्रिक 🔹 क्योटो = Climate Change + Carbon Credit 🔹 मॉन्ट्रियल = Ozone Layer + CFCs 📌 One Liner Revision ✅ क्योटो प्रोटोकॉल (1997) → जलवायु परिवर्तन एवं ग्रीनहाउस गैसों में कमी। ✅ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) → ओजोन परत संरक्षण एवं CFCs का उन्मूलन। UPPCS / RO-ARO / UPSC / SSC हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण। 📚✍️
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