Abhijeet Srivastava
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India First, Contributing My Small Capacity to Build the Dream "New INDIA" ❤️🇮🇳
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Bengal without TMC 🔥👌👌
बंगाल में वोट चोरी ने नवरात्रि त्योहार में कैसा भव्य चमत्कार दिखाया है.... 👌🔥
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ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
शक्ति-साधना के महापर्व नवरात्रि की आप सभी सनातनी भाइयों बहनों को कोटि-कोटि शुभकामनाएं। 🙏
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अपराधबोध से ग्रसित RW का रोना फिर से शुरू हो गया...
नरेंद्र मोदी के नाम से एयरपोर्ट नहीं होना चाहिए..
क्यों नहीं होना चाहिए बे..??
नरेंद्र मोदी इस देश के सबसे लंबे समय तक के लिए निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं!
नरेंद्र मोदी ही वो नेता है जिन्होंने भव्य राम मंदिर का उद्घाटन किया!
नरेंद्र मोदी ही वो गर्वित हिन्दू हैं जो अपने कार्यकाल के दौरान अनेकों मंदिरों, तीर्थस्थलो का भव्य विकास कर रहे हैं!
नरेंद्र मोदी ही वो प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने कश्मीर से 370/35A समाप्त किया!
नरेंद्र मोदी ही वो प्रधानमंत्री है जिनके कार्यकाल में अनेकों दशकों से अटके प्रोजेक्ट पूरे हुए!
नरेंद्र मोदी ही वो प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने संपूर्ण भारत को रेल, रोड और हवाई यातायात से जोड़ा है!
नरेंद्र मोदी ही वो प्रधानमंत्री हैं जिनकी कूटनीति का लोहा पूरा विश्व मानता है!
नरेंद्र मोदी ही वो नेता है जिनकी विश्व में सर्वाधिक रेटिंग (मान्यता) है!
नरेंद्र मोदी ही वो नेता हैं जिसने अपना पूरा जीवन देश और देशवासियों को समर्पित कर दिया है!
गर्व है मुझे की नरेंद्र मोदी मेरे देश के प्रधानमंत्री हैं, गर्व है मुझे नरेंद्र मोदी जी पर, नरेंद्र मोदी न भूतो न भविष्यति! गर्व है मुझे अपने आप पर की मैं प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी का भक्त (अंधभक्त) हूं!
#TrustNaMo #ModiMatters
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- Elon Musk is against the Indian government and Mukesh Ambani over Starlink.
- The US has suspended an immigration program for employees of Cognizant, Infosys, and TCS.
- The opposition has started supporting Elon Musk and the USA.
- CJP is trying to create anarchy in the country.
- Foreign media and X accounts are pushing a fake narrative against India.
Dear nationalists, it’s time to stand with PM Narendra Modi, the government, our armed forces, and all our intelligence agencies 🚩🇮🇳
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"मोदी विरोध और शराब दोनों ही हानिकारक हैं"
एक बार एक सज्जन को एक महल के अंदर जाना था, महल के दरवाजे पर पहुंचे तो वहाँ एक वेश्या खड़ी थी और दरवाजे के बाहर एक शर्त लिखी थी कि वेश्या से संबंध बनाने पर ही दरवाजा खुलेगा...
सज्जन व्यक्ति ने इसे पाप समझा और आगे बढ़ गया...
आगे दूसरा दरवाजा था, जहाँ एक गाय बंधी थी और लिखा था, गाय को लात मारने पर ही दरवाजा खुलेगा....
गाय को लात मारना अधर्म था इसीलिए वो सज्जन यहां से भी लौट गया...
जिसके आगे तीसरा दरवाजा था जहाँ मांस रखा था.. उसकी शर्त थी कि मांस खाने के बाद ही प्रवेश मिलेगा... लेकिन उस सज्जन ने मांस को घृणा से देखा और चौथे दरवाजे की ओर बढ़ गया...
चौथा दरवाजे के पास शराब की एक बोतल रखी थी और लिखा था... पूरी बोतल पीने पर ही दरवाजा खुलेगा...
महल में जाना उसके लिए बहुत जरूरी था. इसीलिए, उसने सोचा कि पिछले शर्तों की तुलना में यह कम अधर्म है.. और उसने पूरी शराब पी ली...
लेकिन, शराब पीते ही उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई...
उसके बाद उसे नमकीन खाने की तलब हुई तो उसने मांस खा लिया.
कामवासना जागी तो उसने वेश्या से संबंध बना लिए.
और गुस्से में आकर उसने गाय को भी लात मार दी.
तथा, अंत में वह महल के अंदर चला गया....
_____
असल में "मोदी विरोध" शराब की वही बोतल है... शराब ने उस सज्जन आदमी से वे तीनों अपराध करवा दिए, जो वह जीवन भर कभी नहीं करना चाहता था...
जिसने भी ये शराब पी लिया फिर उसे, 500 साल बाद बना श्रीराम लला का भव्य मंदिर भी महत्वहीन लगने लगता है..
आतंकवाद और नक्सलवाद से मुक्ति भी छोटी बात लगने लगती है..
आर्टिकल 370 और 35A का निरस्तीकरण मजाक लगने लगता है..
और भारत की हर उपलब्धि उसके लिए महत्वहीन हो जाती है..
तथा, वो अपने देश के प्रधानमंत्री को ट्रंप के सामने झुका बताने में गर्व महसूस करने लगता है.
अपने देश की बढ़ती इकोनॉमी से उसे चिढ़ होने लगती है.
और, अंततः वो वामपंथ के रास्ते पर चलते हुए देश और धर्म विरोधी हो जाता है.
यही मोदी विरोधियों की सच्चाई है...
साभार:- Kumar Satish
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#25YearsofSeva
तमाशा करने वालों को क्या ख़बर,
मोदी ने...
कितने तूफानों को पार कर,
दिया जलाया है!
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मेरी बिटिया ने अपनी यूरोप यात्रा से लौट कर मुझे एक ऐसा किस्सा सुनाया जिसे सुनकर मैं देर तक सोचता रहा, और लगा कि ये सिर्फ एक किस्सा नहीं, हम सबके लिए एक आईना है।
वह एम्स्टर्डम में Costco स्टोर गई थी। बाहर हल्की ठंड थी, लोग जल्दी-जल्दी अंदर-बाहर आ-जा रहे थे।
गेट के पास एक छोटा बच्चा खड़ा था। मुश्किल से पाँच साल का होगा। हाथ में चिप्स के कुछ पैकेट और गले में एक छोटा-सा बोर्ड लटका था। बोर्ड पर टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा था - "स्काउट चैरिटी के लिए, सिर्फ $20 में।"
लोग उसके बगल से गुजर रहे थे। किसी को जल्दी थी, कोई फोन पर था, कोई देखकर भी अनदेखा कर रहा था।
लेकिन वो बच्चा... वो हार नहीं मान रहा था।
वो हर आने-जाने वाले के पास अपनी छोटी-छोटी टांगों से चलकर जाता, ऊपर देखता और बड़ी मासूमियत से पूछता, "क्या आप एक पैकेट खरीदेंगे?"
कोई खरीद लेता। कोई मुस्कुराकर कहता, "नहीं बेटा, थैंक यू।"
मैंने सोचा, इतना छोटा बच्चा, इतनी बार 'ना' सुनकर रो देगा, उदास हो जाएगा, अपनी टीचर के पीछे छिप जाएगा।
लेकिन नहीं।
वो हर 'ना' के बाद मुस्कुराता, हल्के से सिर हिलाता और अगले व्यक्ति की तरफ मुड़ जाता। उसके चेहरे पर न शर्म थी, न डर, न निराशा। सिर्फ एक अजीब-सा आत्मविश्वास था।
बिटिया से रहा नहीं गया। उसने एक पैकेट खरीद लिया। बच्चे की आँखें चमक उठीं। उसने उछलकर कहा, "थैंक यू सो मच!"
फिर बिटिया ने प्यार से पूछा, "तुम्हें और कितने पैकेट बेचने हैं? तुम यहाँ कब तक खड़े रहोगे?"
बच्चे ने जो जवाब दिया, वो बिटिया को अंदर तक हिला गया।
उसने कहा, "जब तक 100 लोग मुझे NO नहीं कह देते, तब तक!"
बिटिया हैरान रह गयी। उसने बगल में खड़ी टीचर की तरफ देखा। टीचर मुस्कुराईं और बोलीं,
"हमारा मकसद पैकेट बेचना नहीं है। हमारा मकसद है कि ये बच्चा इस उम्र में 'ना' सुनना सीखे। 'ना' को सुनकर उसे स्वीकार करना सीखे, और फिर भी अगले इंसान से पूछने की हिम्मत रखे।"
सुनकर बिटिया चुप हो गई।
मैं भी चुप हो गया।
हम अपने बच्चों को क्या सिखाते हैं?
खूब पढ़ो, फर्स्ट आओ, कॉम्पिटिशन जीतो, सिलेक्ट हो जाओ, सबसे आगे निकलो।
हम उन्हें जीतना सिखाते हैं। लेकिन हम उन्हें हारना नहीं सिखाते।
हम उन्हें सफलता का रास्ता दिखाते हैं, लेकिन असफलता से गुजरने की हिम्मत नहीं देते।
जबकि जिंदगी में सबसे ज्यादा जरूरत उसी हिम्मत की पड़ती है।
क्योंकि जिंदगी हमेशा 'हाँ' नहीं कहेगी।
कुछ एग्जाम छूट जाएंगे। कुछ इंटरव्यू क्लियर नहीं होंगे। कुछ बिजनेस फेल होंगे। कुछ रिश्ते टूटेंगे। कुछ सपने देर से पूरे होंगे।
उस दिन जो 'ना' मिलेगा, वो हमें तोड़ भी सकता है और बना भी सकता है। फर्क सिर्फ इतना होगा कि हमने बचपन में 'ना' से दोस्ती की है या दुश्मनी।
वो पाँच साल का बच्चा Costco के बाहर चिप्स नहीं बेच रहा था।
वो हिम्मत बेच रहा था। वो 'ना' इकट्ठा कर रहा था। वो रिजेक्शन को गले लगाना सीख रहा था। वो जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा की तैयारी कर रहा था - गिरकर उठने की परीक्षा।
सोचिए, अगर हमारा बच्चा 10वीं में फेल हो जाए तो हम क्या करते हैं? डांटते हैं, ताना मारते हैं, शर्मा जाते हैं।
अगर वो इंटरव्यू में रिजेक्ट हो जाए तो हम कहते हैं, "तुमसे नहीं होगा।"
हम अनजाने में उसे सिखा देते हैं कि 'ना' का मतलब है - तुम बेकार हो।
जबकि उस टीचर ने सिखाया कि 'ना' का मतलब है - अभी नहीं, फिर कोशिश करो।
दोस्तों, सफलता हमें खुशी देती है, लेकिन 'ना' को संभालना हमें जिंदगी देता है।
आज से अपने बच्चों से सिर्फ ये मत पूछिए, "बेटा, जीते या हारे? कितने मार्क्स आए?"
कभी-कभी ये भी पूछिए, "बेटा, आज कितनी बार 'ना' सुना? और फिर भी तुमने कोशिश की? मुझे तुम पर गर्व है।"
ऐसे बच्चे मत पालिए जो सिर्फ जीतने से खुश हों।
ऐसे बच्चे पालिए जो हारने से डरते न हों।
क्योंकि जीतने वाले को तालियां मिलती हैं, लेकिन हारकर उठने वाले को जिंदगी मिलती है।
उस नन्हे बच्चे को सलाम, जिसने 100 'ना' से हमें जिंदगी का सबसे बड़ा 'हाँ' सिखा दिया।
अगर ये कहानी आपके दिल को छू गई हो, तो इसे किसी ऐसे माता-पिता तक जरूर पहुंचाएं जो आज अपने बच्चे के रिजल्ट से परेशान है। शायद उन्हें भी ये याद आ जाए...
*कभी-कभी 100 ना एक हां से ज्यादा सिखा जाते हैं।*
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CJP कभी भी अभिजीत दीपके के बेडरूम में नहीं बना था।
CJP के पीछे की असली ताकत 'ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन' (Human Rights Foundation) है...
...और यह पूरा खेल ओस्लो फ्रीडम फोरम (Oslo Freedom Forum) में रचा गया था, जिसका आयोजन ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने किया था।
और अंदाजा लगाइए कि भारत से वहां कौन-कौन से बड़े प्रतिभागी (attendees) पहुंचे थे?
सौरभ दास और सुप्रिया शर्मा।
और वहां की प्रमुख वक्ताओं (featured speakers) में से एक थीं हेलेन स्वैनसन — वही पत्रकार जिन्होंने मोदी जी के ओस्लो दौरे के समय (18 से 20 मई के दौरान) उनके सामने हंगामा (heckling) किया था।
इसकी पटकथा काफी समय पहले ही तैयार कर ली गई थी।
और इस पूरे तंत्र (ecosystem) को सौरभ दास और ठाकुर फाउंडेशन (Thakur Foundation) के ज़रिए भारत में लाया गया।
ठाकुर फाउंडेशन ने सौरभ दास को शुरुआती स्टार्टअप फंड के तौर पर लगभग 11 लाख रुपये दिए थे।
उन्होंने एक किताब भी लिखी है — दरअसल वे एक किताब लिख रहे हैं जिसके लिए उन्हें अग्रिम राशि (advance) मिली है। ठीक वैसे ही जैसे न्यूट गिंगरिच (Newt Gingrich) ने तब किया था जब वे अमेरिका में 'फॉक्स न्यूज़' (Fox News) लाने की कोशिश कर रहे थे। सौरभ दास के लिए भी वही तरीका अपनाया जा रहा है।
तो, ये सारी चीजें बहुत पहले से ही तय थीं।
दीपके को 'ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन' और 'जॉर्ज सोरोस फाउंडेशन' द्वारा अमेरिका में पूरे एक साल तक ट्रेनिंग दी गई थी।
दूसरे साल उनके बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
अब एक भारी भरकम डोनेशन की बातें सामने आ रही हैं, ताकि वहां से उनकी डिग्री पक्की की जा सके।
सुप्रिया शर्मा 'ओस्लो फ्रीडम फोरम' में दूसरी प्रमुख वक्ता थीं। और उन्होंने उमर खालिद पर खुलकर बात की — कि कैसे भारत में अन्य धर्मों का उत्पीड़न हो रहा है और हिंदू लोग हिटलर और मुसोलिनी जैसे हैं।
यही उनकी सोच और विचारधारा थी, और उनके मुताबिक मोदी तानाशाह हैं...
हां, सुप्रिया शर्मा ने 'लव जिहाद' पर एक किताब भी सह-लिखी (co-authored) है और बताया है कि यह एक काल्पनिक (fictional) कहानी है।
वे भारत में भारी मात्रा में पैसा झोंक रहे हैं, इसीलिए FCRA इतना महत्वपूर्ण है और यही वजह है कि अन्य राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं।
अधिकांश आंदोलनों की शुरुआत वामपंथी (Left) विचारधाराओं से हुई है, जहाँ छात्रों का माइंडवॉश करके आंदोलन खड़े किए जाते हैं।
यह नेपाल में हुआ, बांग्लादेश में हुआ और बहुत पहले क्यूबा में भी ऐसा ही हुआ था।
इस देश की Gen Z और Gen Alpha से मेरी यही अपील है — सरकार से जितने चाहें सवाल पूछें, उनसे वे काम करवाएं जो आप चाहते हैं, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में।
लेकिन कृपया करके CJP, AAP, ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन और ओस्लो फोरम जैसी विचारधाराओं के बहकावे में न आएं।
वे भारत को अस्थिर कर देंगे और इसे वापस अंधकार युग (Dark Ages) में धकेल देंगे।
4 446
"कॉंग्रेस का दोगलापन"
कॉंग्रेस 2018 में:- वोटर लिस्ट में करोड़ों फर्जी/duplicate/dead वोटर हैं, इलेक्शन कमिशन को इन्हें हटाना चाहिए! 🧐
SIR में लगभग 13 करोड़ फर्जी/duplicate/मृत वोटर हटाये जाने के बाद....
कॉंग्रेस 2026 में:- 13 करोड़ 30 लाख वोटर हटा दिया, वोट चोरी कर ली, इन्हें वापस restore करो, ज्ञानेश कुमार देशद्रोही है, मोदी का एजेंट है... 😂
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कोई CA मित्र है क्या जो GST फाइलिंग में मेरी मदद कर दे... वैसे तो मुझे file करना आता है, पिछले महीने file भी कर चुका हूँ लेकिन मेरे कुछ questions हैं जिसका जवाब कोई CA बेहतर दे सकता है! कृपया कमेन्ट करें...
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🚨 Prasar Bharati is set to release a Request for Proposal (RFP) for the commercial rollout of Direct-to-Mobile (D2M) broadcasting.
You may soon be able to watch live TV on your phone without needing the internet or even a mobile network.
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क्या आप M2M/B2B Transaction का मतलब भी समझते हैं? जिन्हें इसकी समझ नहीं वे भी UPI MDR पर एक पक्षीय बकलोली कर रहे हैं!
ये बड़े amount के transaction होते हैं सम्भवतः 2000 के ऊपर और लाखों रुपये तक के होते हैं! मैं खुद भी बड़े B2B transactions करता हूं इसलिए जो स्थिति मैं देख रहा हूँ वो शायद आप लोग नहीं देख पा रहे!
व्यापरियों द्वारा QR हटाना या 2000 के ऊपर ऑनलाइन UPI payment न स्वीकार करना मूर्खतापूर्ण कार्य तो है ही लेकिन उससे भी ज्यादा मूर्खतापूर्ण मॉडल है कि हर बड़े transaction पर 0.4% या 300₹ MDR चार्ज करना और ये बोझ व्यापारी पर डालना और ये उम्मीद करना की इसका भार अंतिम उपयोगकर्ता पर नहीं पड़ेगा!
अब 15 अक्तूबर 2026 के बाद का एक परिदृश्य बताता हूं:-
मैं जाता हूँ wholesaler के पास अपने बिजनैस के लिए समान लेने... मैंने 50000 का समान लिया, 10000 कैश दिया और 40000 UPI से देने को कहा... wholesaler मुझसे कहेगा कि भाई ऑनलाइन payment पर 0.4% चार्ज लगेगा क्योंकि ये पैसा हम अपनी जेब से नहीं देंगे. इसलिए आप 40200₹ करो क्योंकि इसपर 18% GST भी लगेगा... नहीं तो कैश दो... अब कैश मेरे पास है नहीं... और 40000 के समान के बदले मैं 40200 क्यों दूँ?
अब आपको लगता होगा कि ये 200₹ ही तो हैं... जबकि इसी 200₹ में मैं अपने घर पहुंच सकता हूं! इसी 200₹ से मैं कुछ खा पी सकता हूं... इसी 200₹ को बचाने के लिए दिन रात 12-14 घंटे हर व्यापारी मेहनत करता है...
अब अगली बार मैं अधिक cash लेकर जाऊँगा खरीदारी करने... UPI कम करूंगा या नहीं करूंगा... अब चाहे दुकानदार UPI ले रहा हो या न ले रहा हो, चाहे उसने QR लगा रखा हो या हटा दिया हो...
अब ये 50000 के सामना की cost मेरे शॉप तक पहुंचते पहुंचते 51000 हो जाएगी! 800₹ ट्रांसपोर्ट & Travel expenses और 200₹ UPI MDR के...
इससे 2 बातें होंगी,
या तो मैं समान की कीमत बढ़ाकर MDR सहित अन्य expenses + प्रॉफिट निकालूँगा
या फिर अगर मैं पुरानी कीमत पर ही माल बेचता हूं तो मेरा नेट प्रॉफिट MDR की वजह से 200₹ कम होगा या नहीं होगा?
बाकी के expenses मान लेते हैं कि selling price में adjusted है...
B2B ऑनलाइन लेन-देन जब तक बहुत जरूरी नहीं होगा तब तक कोई करेगा ही नहीं... इससे बहुत सारे नुकसान हैं:-
1. चीजें महंगी होगी
2. कैश लेन-देन बढ़ेगा
3. सरकार के लिए ट्रांजेक्शन ट्रेस करना मुश्किल होगा
4. Untraceable कैश लेन-देन के कारण GST कलेक्शन पर प्रभाव पड़ सकता है
5. B2B turnover कम हो सकता है
6. अंतिम उपभोक्ता पर ही बोझ पड़ेगा
ये 0.4% MDR की मार wholesale business पर पड़ेगी, जो इसे retailer पर डालेगा और retailer अपने ग्राहक पर डालेगा! ये loop ऐसे ही चलता रहेगा और इसके चलते मोदी सरकार की छवि पर जो डेंट लगेगा उसकी भरपाई कैसे होगी? अभी UGC और SC/ST ऐक्ट के डेंट से ही उबर नहीं पा रही सरकार और पता नहीं क्यों एक और उड़ता तीर लेना है इन्हें.
ये 20000 करोड़ रुपये UPI लागत आप सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभार्थियों को हटाकर भी निकाल सकते हैं.
मुझे मोदी सरकार की चिंता है और मुझे जीवन भर मोदी सरकार चाहिए इसीलिए यह सब लिख रहा हूँ.
✍️ Abhijeet Srivastava
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1️⃣ रायताविंग की प्राथमिकता:-
सोशल मीडिया पर,
मोदी सवर्ण विरोधी है; मोदी ऐक्ट लाया, UGC लाया इसलिए हम मोदी को सबक सिखा कर रहेंगे; एक समोसा दो चाय नरेंद्र मोदी हाय हाय!
2️⃣ अर्बन नक्सल/दिमागी नक्सल/वामपंथ/कॉंग्रेस/विपक्ष की प्राथमिकता:-
सुप्रीम कोर्ट में,
वन्देमातरम के खिलाफ याचिका;
राष्ट्रगान राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े होने के खिलाफ याचिका;
वन्देमातरम नहीं गाएंगे, राष्ट्रगान में नहीं खड़े होंगे;
घुसपैठियों को बचाने और शरण देने के लिए याचिका;
राम मंदिर के खिलाफ याचिका;
CAA के खिलाफ याचिका;
NRC के खिलाफ याचिका;
SIR के खिलाफ याचिका;
FCRA के खिलाफ याचिका;
महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के खिलाफ याचिका;
370/35A की बहाली के लिए याचिका;
UAPA के खिलाफ याचिका;
PMLA में ED की शक्तियों के खिलाफ याचिका;
आतंकवादियों को छुड़ाने के लिए याचिका;
शर्जील इमाम, उमर खालिद जैसे देशद्रोही जिहादियों को बचाने के लिए याचिका;
NJAC के खिलाफ याचिका;
आधार ऐक्ट के खिलाफ याचिका;
नोट बंदी के खिलाफ याचिका;
GST के खिलाफ याचिका;
LG की शक्तियों के खिलाफ याचिका;
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ याचिका;
Electoral बॉन्ड के खिलाफ याचिका;
इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्ति के खिलाफ याचिका;
EWS reservation के खिलाफ याचिका;
आधार कार्ड-वोटर कार्ड linking के खिलाफ याचिका;
राफेल जेट के खिलाफ याचिका;
Pegasus surveillance के खिलाफ याचिका;
तीन तलाक को अपराध घोषित करने के खिलाफ याचिका;
PM care fund के खिलाफ याचिका;
Covid Lockdown के खिलाफ याचिका;
Covid Vaccine के खिलाफ याचिका;
अग्निपथ/अग्निवीर के खिलाफ याचिका;
नए IT ऐक्ट के खिलाफ याचिका;
देशद्रोह के कानून IPC 124A के खिलाफ याचिका;
Waqf Amendment Act के खिलाफ याचिका;
देशद्रोहियों/नक्सलियों की प्राथमिकताएं क्या है और तथाकथित राष्ट्रवादियों की प्राथमिकताएं क्या हैं...
लेकिन लेकिन... मोदी हटाओ सवर्ण बचाओ...
✍️ Abhijeet Srivastava
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पता नहीं कौन लोग हैं जो कह रहे हैं कि शेयर मार्केट ने 2 साल से कोई रिटर्न नहीं दिया है/निगेटिव रिटर्न दिया है!
जबकि ऐसा नहीं है; मार्केट ने दो साल में अच्छा खासा रिटर्न दिया है और अभी मार्च 2025 के लेवल 21800 के ऊपर ही है!
मार्केट ने 21800 से 26300+ तक का सफर तय किया है, कोई यह कैसे कह सकता है कि रिटर्न ही नहीं दिया!
इन दो वर्षों में मार्केट ने स्टॉक और सेक्टर स्पेसिफिक रिटर्न दिए हैं इस कारण हो सकता है आपका पोर्टफोलियो अभी घाटे में हो, लेकिन यह longterm में फायदे में ही आएगा!
मार्केट ने 2020 के बाद जो अभूतपूर्व तेजी दिखाई है ये उस तेजी का पाचन काल चल रहा है, और ये होना ही था.
मार्केट में तीन बाते होती है, uptrend, downtrend और sideways. 2020 से 2024 तक मार्केट uptrend में रही. अभी 2 साल से मार्केट sideways चल रही है. ये sideways कितना लंबा चलेगा कोई नहीं बता सकता. हमारे सामने एक रेंज बन चुकी है, और हमें तब तक इसी के बीच खेलना होगा. (21800-26300)
मार्केट मूड इंडेक्स extreme fear की ओर इशारा कर रहा है, इसका अर्थ है कि यह बढ़िया अवसर है मार्केट में निवेश करने का और अच्छा रिटर्न प्राप्त करने का. रिटर्न जरूर मिलेगा लेकिन इसकी गारंटी नहीं है कि कब मिलेगा.
मार्केट में उन stocks में पैसा लगाओ जो Fundamentally मजबूत हैं और अभी काफी ज्यादा 20-30% डिस्काउंट पर मिल रहे हैं. और चुप चाप बैठ जाओ!
LT
Reliance
BOB
SBI
TCS
LTIM
लोगों के लिए एकमात्र सलाह यही रहेगी कि मार्केट में वही पैसा लगाओ, उतना ही पैसा लगाओ जिसकी आपको कम से कम 3-5 साल तक जरूरत न पड़े!
#BazaarBasic
4 446
आखिर रंगे सियार को भीमराव अम्बेडकर से इतनी चिढ़ क्यों है और मोदी को अम्बेडकर से इतना प्रेम क्यों है? क्या मरने के बाद भी किसी व्यक्ती से बैर रखना उचित है?
मोदी के अम्बेडकर प्रेम के दो कारण हैं, एक तो राजनैतिक कारण है और दूसरा कारण सनातन धर्म की शिक्षा है!
इसका उत्तर हमें रामायण में भगवान श्रीराम से सुनने को मिलता है! जब रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम विभीषण से कहते हैं:-
मरणान्तानि वैराणि निर्वृत्तं नः प्रयोजनम्।
क्रियतामस्य संस्कारो ममाप्येष यथा तव॥
— वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड 6.109.25
अर्थात; “वैर मृत्यु के साथ समाप्त हो जाता है। हमारा उद्देश्य पूरा हो चुका है। अब इसका अंतिम संस्कार किया जाए। यह (रावण) तुम्हारा जैसा है, वैसा ही मेरा भी है।” यानी “अधर्म का विरोध करो, लेकिन व्यक्ति की मृत्यु के बाद वैर को अनंत मत बनाओ।”
माना अम्बेडकर ने अपने जीवनकाल में कुछ गलत निर्णय किए होंगे, माना उन्होंने अज्ञानतावश या क्रोध में अपने ही धर्म के देवी देवताओं को ठुकराया होगा, उनका अपमान किया होगा! लेकिन यह भी सत्य है कि वे आज दलित समाज के लिए भगवान समान हैं, दलित समाज उन्हें भी भगवान की तरह पूजता है!
अब उधर वाले हो या इधर वाले, जो इधर वाले अम्बेडकर को गाली देते हैं, और जो उधर वाले अज्ञानतावश अपने ही देवी देवताओं को गाली देते हैं ताकि एक दूसरे समाज को नीचा दिखा सके, दोनों ही गलत करते हैं!
मैं किसी एक वर्ग को दोष नहीं दूंगा, दोनों तरफ से जातिवाद की घृणा वाद विवाद क्रिया प्रतिक्रिया के रूप में हमारे समाज में फैलाई जा रही है!
कोई इस जातिवादी घृणा को कम करने की कोशिश करता नहीं दिखाई देता! मोदीजी ने एक प्रयास किया हिन्दू समाज को एक करने का तो आज मोदी ही दूसरे वर्ग की गालियां खा रहे हैं! उनके 10 साल पुराने वीडियो निकाल कर उसे एडिट करके उन्हें नीलमानव, भीमप्रेमी और न जाने क्या क्या कहा जा रहा है!
आपको क्या लगता है आपके ये सारे शब्द दूसरे वर्ग के कानों तक नहीं जाते होंगे? या उनके कानों में अमृत की तरह घुल रहे हैं? जी नहीं... आपके इन्हीं शब्दों के कारण ही किसी रावण का जन्म होता है!
मुझे अम्बेडकर से कोई विशेष प्रेम नहीं है लेकिन जिस तरह से रंगे सियार अम्बेडकर को अपशब्द कहते हैं या ट्रोल करते हैं वो मुझे किसी प्रकार उचित नहीं लगता; ऐसा करके आप हिन्दू समाज में जातिवाद की खाई को गहरा करने का काम ही कर रहे हो!
ये बातें दोनों तरफ के नफ़रत फैलाने वाले लोगों पर लागू होती है; आज सोशल मीडिया के कारण नफरती माहौल जंगल में आग की तरह फैलता है!
सामने वाला अगर हमारे देवी देवताओं को गाली देता है तो आप पलटकर अम्बेडकर को गरियाने लगते हैं!
देवी देवताओं को गाली देने का काम केवल राक्षस लोग ही करते हैं, त्रेता द्वापर में भी करते थे और आज भी करते हैं!
ऐसे असामाजिक तत्त्वों से निपटने के लिए संविधान में व्यवस्था दी गई है! अगर सामने वाला संवैधानिक शक्ति का उपयोग करता है तो आपको किसने रोका है ऐसा करने से? आप भी अपना एक संगठन बनाइये और नफरत फैलाने वाले तत्त्वों के खिलाफ संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कीजिए और सबक सिखाइए!
मोदी अम्बेडकर का नाम लें तो आप मोदी को गरियाने लगते हैं,
मोदी बुद्ध का नाम लें तो आप मोदी को गरियाने लगते हैं,
मोदी दलित शोषित वंचित पीड़ित का नाम लें तो आप मोदी को ट्रोल करने लगते हैं!
मोदी तो हिन्दू समाज को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ये रंगे सियार अम्बेडकर को अपशब्द कहकर हिन्दू समाज में जातिवाद की खाई को बढ़ाने का ही काम कर रहे हैं; क्योंकि ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती है!
✍️ Abhijeet Srivastava
4 446
"भारत की फॉल्ट लाइन - जातिवाद और इससे उत्पन्न व्यवस्था"
भारत की हिन्दू एकता की सबसे बड़ी फॉल्ट लाइन "जातिवाद और इससे उत्पन्न हुई आरक्षण और sc/st ऐक्ट" जैसी व्यवस्था हैं.
वर्तमान में यह दोनों ही मुद्दे गर्म है, हिन्दू समाज का एक वर्ग अत्यंत क्रोध में है और आरक्षण व राजीव गांधी ऐक्ट का पुरजोर विरोध कर रहा है!
या यूं कहें कि भारत की इस फॉल्ट लाइन को जानबूझकर छेड़ा जा रहा है! अब इसे कौन छेड़ रहा है, इससे किसको लाभ होगा ये समझना बहुत मुश्किल नहीं है! इससे सीधा लाभ देशद्रोही कांग्रेस और विपक्ष को होगा!
अब इसे समझने का प्रयास कीजिए...
कॉंग्रेस को जब जब लगा कि उसकी सत्ता को खतरा है, तब तब उसने देश में ऐसे ऐसे लैंडमाइन बिछाये! ये आरक्षण और राजीव गांधी ऐक्ट वही लैंडमाइन है जो भारत की फॉल्ट लाइन पर बिछायी गई है! इस लैंडमाइन पर पैर रखने वाले का निपटना तय है! और यही वो वजह है कि बीजेपी सत्ता में होकर भी इसको छूने से घबराती है! ऐसा नहीं है कि इन landmines को निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता है लेकिन अगर जल्दबाजी में कुछ निर्णय करने पड़े तो इसके भयंकर दुष्परिणाम देश को भुगतने पड़ सकते हैं! वैसे भयंकर दुष्परिणाम जो श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल का उदाहरण देते हुए आजकल राहुल गांधी और कॉंग्रेस द्वारा दिए जाते हैं!
1990 में काँग्रेस की सत्ता पर जब खतरा आया तो उसने SC/ST ऐक्ट का लैंडमाइन बिछाया! वैसे ही मध्यप्रदेश में 73% आरक्षण भी कॉंग्रेस ने ही 2019 में लागू किया था!
2019 में कॉंग्रेस ने मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण की तय संवैधानिक सीमा को 14% से बढ़ा कर 27% कर दिया! और सत्ता से चली गई लेकिन ये वर्तमान में BJP के गले की हड्डी बन गई, जिसपर न चाहते हुए भी BJP सरकार को कोर्ट में इसके बचाव में खड़े होना पड़ रहा है! हालांकि ये एक ऐसा असंवैधानिक निर्णय है जो सुप्रीम कोर्ट से रद्द होना ही है! यह बात BJP भी अच्छे से जानती है! लेकिन समाज में गलत संदेश न फैले इसलिए BJP को इसकी वकालत करनी पड़ रही है!
आरक्षण और SC/ST ऐक्ट वो Landmine है जिसे बीजेपी ने छुआ भी तो समाज में दरार पड़ना तय है, इसका फायदा उठा कर कॉंग्रेस हिंसक आंदोलन और फिर सत्ता तक पहुंचने के सपने हमेशा देखा करती है! यही 2018 में हुआ! यही 2026 में हो रहा है!
कॉंग्रेस आज भी मुसलमानों, ईसाइयों को आरक्षण, रोहित वेमुला ऐक्ट, प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण, साम्प्रदायिक हिंसा ऐक्ट, घुसपैठियों का documentation जैसे अन्य landmines को भारत की फॉल्ट लाइन पर बिछाने का प्रयास कर रही है!
आप आज देख लो, कर्नाटक में कॉंग्रेस क्या कर रही है! आप याद करो कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर में क्या किया था, पश्चिम बंगाल में क्या किया था, असम में क्या किया, नागालैंड में क्या किया है, मणिपुर में क्या किया है! आज भी हमें ये जो आग दिखाई दे रहीं है ये सब कांग्रेस और उसके ecosystem की लगाई हुई है. यही वो सारी landmines है जो कॉंग्रेस ने देशभर में बिछायी हुई है.
इन सभी landmines को निष्प्रभावी करने के लिए हमें मोदी/भाजपा सरकार के साथ मजबूती से खड़े रहना होगा, landmines को निष्प्रभावी करना आसान नहीं है, इसमें समय लगता है. मोदी सरकार 370/35A जैसी landmine को निष्प्रभावी कर चुकी है, बाकी landmines भी समय आने पर निष्प्रभावी की जाएंगी! लेकिन हमें धैर्य रखना होगा, उतावलापन हमें कॉंग्रेस के बिछाए जाल में फंसा देगा!
अब हमें भारत की फॉल्टलाइन पता है, कॉंग्रेस की बिछायी landmines के बारे में कुछ कुछ पता है इसलिए हमें ही अपने बुद्धि विवेक से निर्णय करना होगा कि हमें कॉंग्रेस के जाल में फंसना है या संगठित होकर उस जाल को लेकर उड़ जाना है!
✍️ Abhijeet Srivastava
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जब राज्य की बागडोर एक संत के हाथ होती है तो भव्य राम मंदिर भी बनता है और उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश भी बनता है.. 🔥
योगी जी we love you 🥰😍
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सुनो भाई... एक तो ऐसा कोई प्रामाणिक डाटा नहीं है जो यह बता सके कि कितने प्रतिशत GC/OBC/SC/ST हिन्दुओं ने भाजपा को वोट दिया है या देते हैं या देने की बाते कहीं हैं!
और सुशांत सिन्हा के जिस वीडियो को लेकर तुम लोग घमंड में इतना चौड़े हो रहे हो कि हम GC वाले ही BJP के असली वोटर हैं, हम ही वोट करते हैं बाकी जिनके लिए मोदी "नीलमानव" बने हैं, उन्होंने भाजपा को वोट ही नहीं दिया...
थम जा भाई... अभी तुम लोगों की अज्ञानता दूर किए देता हूं...
जिस लोकनीति CSDS के सर्वे का हवाला देकर आपको जातिगत वोटिंग % के आंकड़े बताये जाते हैं उसका 2024 लोकसभा चुनाव में सर्वे sample size कितना था, पता है? मात्र 19663.
बताओ 140 करोड़ के देश में लगभग 98 करोड़ मतदाताओं में से सर्वे बीस हजार लोगों का भी नहीं हुआ... अब आगे सुनो...
19663 में:-
GC - 5272 (26.8%)
OBC - 7716 (39.2%)
SC - 3323 (16.9%)
ST - 1594 (8.1%)
ये सब मिलाकर 91% sample होता है, मतलब कुल sample में से ये सर्वे वाले 26.8% GC वालों के पास जाएंगे, 39.2% OBC के पास जाएंगे और मात्र 16.9% SC के पास और 8.1% ST के पास जाएंगे और पूछेंगे की भाई किसको वोट करोगे? ये sample सर्वे अपने आप में ही फर्जी है. अगर आप इसे समग्र भारत की तस्वीर मानते हैं? तो आप बहुत बड़े चुटीए हैं!
इसलिए कृपया करके सोशल मीडिया पर जातिगत कुंठा को बढ़ावा न दें, इससे कुछ हासिल नहीं होने वाला आपको.
मोदी ने खुद को एक या दो बार OBC कहा होगा, वो भी वोट लेने के लिए एक राजनैतिक बयानबाजी से ज्यादा कुछ नहीं था; लेकिन आप लोग हर दिन सोशल मीडिया पर 100 बार खुद के GC/सवर्ण/SC/OBC होने का दंभ भर कर जातिगत घृणा को किसी न किसी प्रकार से बढ़ावा देने का काम ही कर रहे हैं!
गलत बोलने वाले लोग दोनों तरफ हैं लेकिन इससे समग्र समाज को गाली देना, हीन भावना रखना उचित नहीं है... जातिवाद मोदी ने नहीं, एक समाज के रूप में हमने ही फैला रखा है... कृपया करके ये सब तुरंत बंद कीजिए...
✍️ Abhijeet Srivastava
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मोदी को गाली दे रहे कुछ so called सवर्ण गाली देने के लिए भी पूरी Timeline में से selective चीजें उठाकर गाली देते हैं. जबकि मैं इन लोगों की तरह विरोध इसलिए नहीं करता क्योंकि मैं पूरी Timeline देखता हूं, उसको analyse करता हूं, उसके प्रभावों/दुष्प्रभावों के बारे में सोचता हूं तब जाकर कोई राय बनाता हूं और फिर उसे publicly रखता हूं!
मैंने सरकार की MDR नीति का खुलकर विरोध किया क्योंकि यह अव्यवहारिक माडल है, जिसका बोझ केवल व्यापरियों पर डाला गया है, आगे चलकर इसका असर बड़े UPI लेन-देन पर स्पष्ट दिखाई देने लगेगा! खैर...
लेकिन मैं so called राजीव गांधी ऐक्ट में मोदी द्वारा किए गए संशोधन के बारे में इसलिए कुछ नहीं कहता क्योंकि वो सत्ता में बैठे मोदी के लिए एक राजनैतिक मजबूरी ही थी!
पूरी Timeline कुछ इस प्रकार थी:-
2006 का केस,
2018 में निर्णय,
कॉंग्रेस का इसके खिलाफ दुष्प्रचार,
देशभर में हिंसक आंदोलन,
8 राज्यों में चुनाव,
2019 लोकसभा चुनाव,
मोदी सरकार का संशोधन.
ये पूरी time-line है... विरोध में तांडव करने वाले लोग पूरी time-line देखने के बजाय अंतिम बिंदु पकड़ कर आत्मघात करने पर अग्रसर है.. मोदी/भाजपा के विरुद्ध जाना आत्मघात करने जैसा ही है... क्योंकि इनके विरुद्ध जाकर जो लोग सत्ता में आयेंगे उन्होंने ही ये सारे कानून बनाए हैं, इसलिए ये लोग तो हमारी मांग मानने से रहे...
जबकि पूरी time-line देखने पर हमें मोदी/भाजपा की राजनैतिक मजबूरी जरूर दिखाई देती है...
अब चूँकि एक वर्ग इसे समझे बिना नीचता की हद से भी नीचे गिरकर आत्मघात करने पर उतारू है और ये वर्ग किसी भी प्रकार से संतुष्ट नहीं होना चाहता, फिर चाहे 500 वर्षों बाद भव्य राम मंदिर बन जाए या 70 वर्षों बाद 370/35A हट जाए या इस वर्ग के गरीबों को आरक्षण दे दिया जाए या अन्य कई दशकों पुराने मुद्दे हल हो जाएं. सब कुछ करने के बाद चुनाव में 240 पर लाकर खड़ा कर दिया जाएगा, भव्य राम मंदिर बनवाने के बाद कभी न मिटने वाला अयोध्या हराने का कलंक लगा दिया जाएगा. यही इस असंतुष्ट वर्ग की सबसे बड़ी कृतघ्नता है.
तो ऐसे में एक राजनैतिक दल के रूप में आप क्या करेंगे? इन्हें संतुष्ट करने पर अपना समय बर्बाद करेंगे या इसकी जगह आप अपना वोट बैंक बढ़ाने पर फोकस करेंगे? अब भाजपा/मोदी अपना समय बर्बाद करने की जगह अपने कार्यो, अपनी नीतियों, अपनी जन जन तक पहुंचने वाली कल्याणकारी योजनाओं से अपना वोट बैंक बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं तो इससे भी इस वर्ग के कुछ लोगों को बड़ी चिढ़ होती है.
तो भाई चिढ़ते रहो, विपक्ष वाले पिछले 25 साल से इस व्यक्ति से चिढ़ रहे हैं.. आप भी लाइन में खड़े हो जाओ, विपक्ष के षडयंत्रों में शामिल हो जाओ, आप भी किसी विदेशी toolkit का हिस्सा बन जाओ.. लेकिन याद रखना आएगा तो मोदी ही..
✍️ Abhijeet Srivastava
