Abhijeet Srivastava
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E20 पेट्रोल जब तक पर्याप्त नमी के संपर्क में नहीं आता है तब तक वो ठीक है. किसी भी पुरानी गाड़ी को इससे कोई नुकसान नहीं है, बस माइलेज में थोड़ी कमी देखने को मिल सकती है.
समस्या कहाँ है? ये जो आय दिन पेट्रोल पम्प के वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें bottle में पानी और पेट्रोल अलग अलग दिखता है वो पेट्रोल पंप की टंकी में नमी के कारण अलग हुआ है. देश में बहुत से ऐसे पेट्रोल पम्प हैं जो मानकों का पालन नहीं करते या पुराने हो चुके हैं लेकिन काम चल रहा है तो काम चलाया जा रहा है, दावे से कह सकता हूं कि केवल ऐसे पेट्रोल पंपों पर ही यह समस्या देखने को मिल रही होगी.
बोतल में पेट्रोल देने की मनाही है, और पेट्रोल सीधा गाड़ी की टंकी में जाता है इसलिए हमें यह पता नहीं लग पाता कि पेट्रोल शुद्ध है या नमी के कारण ethanol अलग हो चुका है.
इस संदेह को दूर करने के लिए सरकार को सभी पेट्रोल पंपों को यह निर्देश जारी करना चाहिए कि वे पेट्रोल पारदर्शी बोतल/बिकर में भरकर ग्राहक को दिखाएं उसके बाद गाड़ी में भरें या अगर ग्राहक को शंका है और वो यह मांग करता है तो उसकी शंका दूर करने के लिए ऐसा उपाय करें.
E20 पेट्रोल से गाड़ी खराब हो रही, या इंजन खराब हो रहे हैं ये कोरी बकवास है. रोज मैं 20-30 साल पुराने बाइक वाहनों को उसी E20 पेट्रोल पर चलते देखता हूं. मेरी खुद की गाड़ी 15 साल पुरानी है.
E20 से किसानों को फायदा है,
E20 से सरकार को फायदा है,
E20 से पर्यावरण को फायदा है,
E20 की प्राकृतिक दुश्मन सिर्फ नमी है, सरकार को इस दिशा में शोध करवाना चाहिए और इस कमी को दूर करना चाहिए.
या फिर वाहन निर्माता कंपनियों से ऐसी कोई विशेष किट बनवाए जो लागत में कम हो और पुरानी गाड़ियों को 100% ethanol पर चलने वाला बना दे. लेकिन ऐसा कर देंगे तो नए वाहन कैसे बिकेंगे?
अब एक सच्ची घटना सुनाता हूँ,
मेरे यहां एक पेट्रोल पम्प है, जो अब नया बनाया गया है. पहले जब वो पुराना था तो उसमें हर दिन बवाल मचा रहता था कि ये पेट्रोल पंप पेट्रोल में पानी मिला कर बेच रहा है. एक दो बार तो सील भी कर दिया गया था. उस पम्प पर पेट्रोल भरवाने के बाद मेरी गाड़ी से स्वयं आधा बोतल पेट्रोल और आधा बोतल पानी निकला था. असल में वो पानी नहीं था ethanol था. मतलब पेट्रोल पंप पर ही टैंकरों में नमी के कारण ethanol पेट्रोल से अलग हो जाता था. पेट्रोल पम्प पुराना था तो इस वजह से बरसात के मौसम में नमी किसी तरह टैंकर तक पहुंच जाती होगी. फिर उस पेट्रोल पम्प को नया बनाया गया, टैंकर बदले गए. अब उसी पंप पर सही पेट्रोल मिलता है.
#E20 #EthanolBlending #Ethanol #Fuel #Petrol
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भारत को खोखला करने के कितने प्रकार से विदेशी षडयंत्र रचे गए हैं ये उसकी मात्र एक झलक है. मोदी सरकार ऐसे हर षडयंत्रों और भारत के बीच चट्टान बनकर खड़ी है.
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राम मंदिर चढावा चोरी पर जहां एक तरफ जबरदस्त मीडिया ट्रायल चल रहा हैं जिसमें TRP के भूखे मीडिया गिद्ध फर्जी ख़बरें तक चला रहे हैं. तो दूसरी तरफ रामद्रोही कांग्रेसी, सपाई बाबर की औलादें भी राम मंदिर चढावा चोरी पर भौंक रहीं हैं.
मुझे समझ नहीं आता...
500 वर्षों तक मंदिर की लड़ाई लड़ी रामजादो ने
राम मंदिर के लिए अपना खून बहाया रामजादो ने
राम मंदिर के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए रामजादो ने
भव्य मंदिर निर्माण पर खुश भी रामजादे ही हुए थे
मंदिर रामजादो का
दान रामजादो का
चढावा रामजादो का
तो ये हरामजादे कांग्रेसी, सपाई बाबर की औलादें चढावा चोरी पर इतना क्यों भौंक रहे हैं? तुम लोगों को कोई अधिकार नहीं है. क्योंकि तुम बाबर की नाजायज औलादों ने तो अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण न हो सके इसके लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया था.
असल में इन हरामजादो को चोरी का दुःख नहीं है, ये तो बड़े प्रसन्न हैं कि इन्हें एक मौका मिल गया मोदी योगी को टार्गेट करने का. इन्हें लगता है कि ये इस मुद्दे का फायदा उठाकर सत्ता प्राप्त कर लेंगे लेकिन ऐसा करके ये साबित कर रहे हैं कि ये सब बाबर की नाजायज औलादें ही हैं.
मंदिर के दान में चोरी करने का महापाप करने वालों को उनके इस महापाप का दंड अवश्य मिलेगा, यहां भी और वहाँ भी.
✍️ Abhijeet Srivastava
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राम मंदिर में सुअरों का प्रवेश वर्जित होना चाहिए!
ये वो सुअर हैं जिन्होंने भव्य राम मंदिर निर्माण के मार्ग में हर सम्भव रोड़े डालने का कुप्रयास किया था.
ये वो सूअर हैं जिनकी पार्टी ने राम मंदिर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की फौज उतारी थी.
ये वो सूअर हैं जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन को कुचलने का हर सम्भव कुप्रयास किया था.
ये वो सूअर हैं जिन्होंने निर्दोष राम भक्त कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थी.
ये वो सूअर हैं जिन्होंने राम को काल्पनिक कहा था.
ये वो सूअर हैं जिन्होंने रामसेतु को तोड़ना चाहा था.
ये वो सूअर हैं जो समुदाय विशेष के तुष्टिकरण में वहाँ राम मंदिर की जगह स्कूल हॉस्पिटल बनाने की बक-ओदी किया करते थे.
ये वो सूअर है जिन्होंने सत्ता में होकर राम की नगरी अयोध्या को विकास से पूरी तरह वंचित रखा था.
ये वो सूअर हैं जिन्होंने सत्ता में होकर कई दशकों तक राम लला को फटे तिरपाल में रखा था.
आज ये धूर्त कह रहे हैं कि राम सबके हैं.. राम तुम जैसे रावण के नहीं हैं, राम तुम जैसे राक्षसों के नहीं हैं, राम तुम जैसे अधर्मी सुअरों के नहीं हैं.. तुम लोग घृणित हो, रामद्रोही हो..
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पिछले छह वर्ष में भारत (तथा अन्य राष्ट्रों) को चार गंभीर वैश्विक समस्याओं से जूझना पड़ा था और कुछ अभी भी जारी है।
2020 में दो वर्ष के लिए कोविड, फरवरी 2022 में रूस-उक्रैन युद्ध जो अभी भी जारी है, अप्रैल 2025 में अमेरिकी टैरिफ जिसका प्रभाव अभी भी अनिश्चित है, एवं फरवरी 2026 में खाड़ी युद्ध जो एक तरह से अभी समाप्त नहीं हुआ है।
इन सभी ने सप्लाई चेन ध्वस्त कर दी; रूस, उक्रैन एवं खाड़ी के देशो से आने वाला कच्चा तेल, गैस, रसायन, खाद एवं खाद्य तेल की आपूर्ति बाधित कर दी; मैन्युफैक्चर्ड गुड्स की कीमते बढ़ा दी; भारत का निर्यात मंहगा कर दिया है। साथ ही, नागरिक असुरक्षा की भावना को तीव्र किया है।
इन सबके बाद भी भारत में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं हुई, घरेलु कुकिंग गैस की उपलब्धता निर्बाध जारी रही और आज स्थिति यह है कि सरकार ने इनकी खरीद पर सभी नियंत्रण (जैसे कि घरेलु गैस के लिए 25 और 45 दिनों की सीमा) हटा दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने एजेंडा चलाया था कि भारत के निवासी ठंडा भोजन खा रहे है। कदाचित ही ऐसा परिवार हो जिसने ऐसे भोजन को झेला हो।
यहाँ तक कि पिछले चार माह में सरकार ने प्रति उज्जवला सिलिंडर पर 900 रुपये एवं अन्य घरेलु सिलिंडर पर 600 रुपये का घाटा उठाया, लेकिन मोर और लेस दाम नहीं बढ़ाया। एक भी रिटेल आउटलेट पर तेल खत्म नहीं हुआ। जिस भी परिवार को सिलेंडर चाहिए था, उसे मिला।
सरकार ने गैस एवं तेल की कीमत स्थिर रखने के लिए पर एक्साइज ड्यूटी कम कर दी जिससे लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू का नुक्सान हुआ। फिर भी सभी योजनाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण इत्यादि जारी है।
जो देश अपना 90% कच्चा तेल और आधे से ज़्यादा कुकिंग गैस खाड़ी देशों से मंगाता है, उसके बारे में आम तौर पर यही माना जाता था कि वहां पेट्रोल पंप पर लंबी लाइनें लगेंगी, रसोई में गैस खत्म हो जाएगी, रुपये की कीमत गिरेगी और डॉलर के लिए मारामारी मचेगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
जनवरी 2026 को रुपया 92 पर था, अब 94.5 पर है।
जीडीपी की तुलना में विदेशी उधार 21% से कम है (मनमोहन के समय 24% छूने वाला था)। महत्वपूर्ण यह है कि मार्च 2026 में मूलधन और ब्याज का भुगतान मौजूदा प्राप्तियों (आय) की तुलना में घटकर 5.8 प्रतिशत हो गया। पिछले वर्ष मार्च को यह 6.6 प्रतिशत था।
पिछले वित्तीय वर्ष में कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) 95 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। साथ ही, इम्पोर्ट एवं एक्सपोर्ट के मध्य अंतर (current account deficit) जीडीपी का केवल 0.6 प्रतिशत था और इस वित्तीय वर्ष में कम-ज्यादा यही रहने की आशा है।
विदेशी मुद्रा भंडार 672 बिलियन डॉलर से अधिक है।
मई 2025 की तुलना में इस वर्ष मई में मैन्युफैक्चरिंग में 5.5% की वृद्धि हुई, तथा बिजली और गैस की आपूर्ति में 9.9% की विशाल वृद्धि देखी गई है।
ध्यान दीजिये, राहुल 3 जून को दांवा कर रहा था कि भयंकर आर्थिक सुनामी आ रही है और नरेंद्र मोदी इसके बारे में न कुछ कर रहे हैं, न कर सकते हैं।
इसके विपरीत, मैन्युफैक्चरिंग में 5.5% तथा बिजली और गैस की आपूर्ति में 9.9% की विशाल वृद्धि हो गयी।
इस वर्ष अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.5 से 7 प्रतिशत होने की आशा है।
इतने संकट के बाद भी (नारा लगाया जाता है कि नेतृत्व कम्प्रोमाइज़्ड है) भारत का जल आतंकी क्षेत्र को नहीं जाने दिया जा रहा है।
दिल्ली दंगे के आरोपी, "चिकेन नेक" को काटने का सपना देखने वाले लोग पिछले 5 वर्ष से जेल में बंद है।
आतंकी क्षेत्र के कब्जे वाले कश्मीर में सेना को पत्थर मारा जा रहा है; आजादी के नारे लगाए जा रहे है।
बाई द वे, यूक्रेन में चल रही लड़ाई अब प्रथम विश्व युद्ध से भी ज़्यादा लंबी खिंच गई है।
- अमित सिंघल
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बंगाल में टीएमसी को गए लगभग दो महीने होने को हैं, बंगाल की जनता टीएमसी के आतंक से इतनी क्षुब्ध है कि टीएमसी नेताओं के प्रति जनता का क्रोध अभी तक शांत नहीं हुआ है. टीएमसी ने बंगाल के लोगों के साथ जितना बुरा बर्ताव किया है उसे याद करके किसी की भी रूह कांप जाएगी.
ये तो जनता का बड़प्पन है कि अपना क्रोध केवल अंडे फेंककर जाहिर कर रही है. अगर जनता को जरा सी भी छूट मिल जाती तो टीएमसी के गुंडों का वो हश्र करती कि इनकी पीढ़ियां याद करती कि निर्दोष जनता के साथ अत्याचार करने का क्या अंजाम भुगतना पड़ सकता है.
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मुंबई में मोहर्रम जुलूस में शामिल लोगों को पेन किलर के नाम पर जिंक फास्फाइड (चूहे मारने की दवा) के जहरीले कैप्सूल बांटने हुए मोहम्मद फैयाज निसार हुसैन को गिरफ्तार किया गया है।
मोहम्मद फैयाज सुन्नी है और मोहर्रम में शियाओं को मारना चाहता था। इसके पास से 14900 कैप्सूल मिले हैं, इसके अलावा उसने 30 हजार कैप्सूल और 50 KG जिंक फास्फाइड का ऑर्डर किया हुआ था।
मोहर्रम किसी त्योहार या खुशी के रूप में नहीं, बल्कि पैगंबर साहब के नवासे, हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की इराक के कर्बला में हुई शहादत की याद में 'गम और मातम' के रूप में मनाया जाता है। सुन्नी जमात इमाम हुसैन को नहीं मानती और शिया- सुन्नी की यह लड़ाई 1400 साल से चल रही है।
अरब देशों में भी चल रही लड़ाई मुख्यतः शिया- सुन्नी की लड़ाई है। ईरान शिया देश है जबकि अन्य अरब देश सुन्नी हैं, US तो लड़ाई का एक मोहरा है। सोचिए जब शिया- सुन्नी आपस में भाई नहीं हो सकते तो ये दोनों हिंदुओं के क्या भाई होंगे? हिंदू इन दोनों के लिए केवल चारा है।
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जब समाजवादी नेताजी ऐसी बातें करते हैं तब उनका कोर वोट बैंक (समुदाय विशेष) जानता है कि नेताजी यह केवल हिन्दू वोट काटने के लिए कह रहे हैं.
लेकिन अगर भाजपा का कोई नेता "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" बोलता है तो उसका कोर वोटर भड़क कर भाजपा के नेतृत्व को ही मौलाना घोषित कर देता है.
हिन्दुओं की यही राजनैतिक अपरिपक्वता ही हिन्दुत्व की कमजोरी है.
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2013 और 2026
एक ख़बर
एक ही पत्रकार
लेकिन दोनों बार अंदाज अलग
2013 में सिर्फ खबर देते थे।
2026 में एजेंडा बनाते हैं।
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बड़ी खबर!
NCERT ने पहली बार कक्षा 9 की किताब में 'आपातकाल'चैप्टर को शामिल किया।
चैप्टर में इंदिरा गांधी द्वारा देश पर थोपी गयी इमरजेंसी और जेपी आंदोलन का जिक्र किया गया है।
NCERT ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में पहली बार 1975-77 के आपातकाल को शामिल किया है।
आजादी के बाद भारतीय लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण और विवादित दौरों में से एक माने जाने वाले इस अध्याय को अब विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा।
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सभी अपने बच्चों को आग लगने पर बचाव की ट्रेनिंग दें ,आग लगने में सबसे हानिकारक धुंआ होता है धुंआ हमेशा फर्श से दो फीट ऊपर होता है इसलिए सबसे पहले फर्श पर लेट कर क्रॉलिंग से चलें और अविभावक जहाँ बच्चे जा रहे है वहाँ कोई स्मोक सेंसर तो नहीं लगा है जो धुंआ उठाने पर ऑटो लॉक 🔓 हो जाएगा और जान धुआं से जाती है आग से नहीं तो आग से डरने की जगह अगर पानी है तो अपना कपड़ा गीला कर चहरे और सीना ढक कर भाग कर आग से निकल जाए
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योगी जी ने नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बुलेट ट्रेन की ओर अग्रसर है और नेताजी को लगता है कि वे साइकिल से बुलेट ट्रेन को हरा देंगे! ज्यादा तेज साइकिल की अक्सर चेन उतर जाती है! 🤣
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अगली बार जब नीट होगी तब सीबीटी (Computer Based Test) से की जाएगी।
छात्रों से अपील है कि वे अगले साल सीबीटी के लिए तैयारी करें।
NCERT पर आधारित रहेंगे प्रश्न।
कठिन प्रश्नों के बजाए पाठ्यक्रम पर रहेगा जोर
मूल व्यवस्था भी बदली जाएगी।
आमूलचूल परिवर्तन किया जाएगा।
~ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
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36 साल बाद जब एक कश्मीरी हिन्दू महिला कश्मीर में अपने घर पहुंची तो उसके घर में लगे अखरोट के पेड़ से पूछने लगी, क्या मैं तुम्हें याद हूं ? 🥺
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Always Against:- कुछ लोगों के जीवन का मूल मंत्र बन गया है.
ये लोग एक तरफ कहते हैं कि 24 घंटे बिजली चाहिए! फिर दूसरी तरफ यही लोग सोलर प्लांट, न्यूक्लियर प्लांट, हाइड्रो प्रोजेक्ट इत्यादि के विरोध में दिन रात एक किये घूमते हैं.
कहते हैं AI पर ऐसा होना चाहिए वैसा होना चाहिए, फिर अगले दिन डाटा सेंटर, सेमी कंडक्टर प्लांट का विरोध करते हैं.
~ पीएम मोदी
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कांग्रेस के दौर में बिना किसी बड़े वैश्विक संकट के भी दाल, तेल, सब्ज़ी, गैस सबकी कीमतें आम आदमी की कमर तोड़ देती थीं और डबल डिजिट इन्फ्लेशन आम बात थी...आज दुनिया भर में ऊर्जा संकट है, फिर भी भारत में retail inflation काबू में है.. आम आदमी की जेब पर असर मापने वाला CPI Inflation अप्रैल में सिर्फ 3.48% और मई में 3.93% रहा जो बताता है कि भारत ने इस वैश्विक शॉक को कितने अच्छे से मैनेज किया..
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