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Abhijeet Srivastava

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India First, Contributing My Small Capacity to Build the Dream "New INDIA" ❤️🇮🇳

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UPI MDR - "मोदी सरकार का अव्यवहारिक मॉडल" मान लेते हैं पूरे UPI transaction में 4% में से 1% ऐसे लोग हैं जो बड़े व्यापारी है या प्रतिदिन बड़ी payment लेते और देते हैं! सरकार ने कहा कि चलो आप केवल 300₹ MDR देना! देखने में ये केवल 300₹ ही तो हैं? ये 300₹ एक दिन का, 30 दिन का 9000₹, 365 दिन का 109500₹ यानी लगभग 110000₹ ये 110000₹ साल का एक व्यापारी से केवल UPI लेन-देन पर लेना चाहते हैं, उसके बाद GST, Income Tax, Commercial Rent/Electricity/Water Supply etc etc compliances अलग से व्यापारी देता ही है! मान लीजिए देश भर में ऐसे 10 लाख बड़े व्यापारी हैं, जिनकी मासिक UPI Transaction 1 लाख के ऊपर होती होगी! ऐसे में यह calculation साल की 11 ट्रिलियन यानी 11 लाख करोड़ रुपये बैठती है! अब ये 11 लाख करोड़ रुपये सलाना MDR व्यापारी अपनी जेब से तो देने से रहा! इसका बोझ जनता पर ही पड़ेगा! इसीलिए मैं बार बार कह रहा हूं कि UPI MDR का प्रस्तावित मॉडल किसी भी प्रकार से व्यवहारिक नहीं है! आप व्यापरियों को बाध्य करोगे की ग्राहक से MDR का पैसा नहीं लें तो वो UPI लेन-देन ही बंद कर देंगे! इससे cashless economy पर बहुत बड़ा डेंट लगेगा! इसलिए UPI MDR के इस मॉडल को वापस लीजिए और सुझावों पर विचार कीजिए! एक सुझाव मैंने भी दिया है! UPI चार्ज केवल 4% व्यापारी से नहीं, 96% लोगों से भी लीजिए... 2000 तक फ्री; 2000 के ऊपर 0.1% चार्ज 20000 तक UPI पर 10₹ चार्ज कैपिंग 50000 तक UPI पर 25₹ चार्ज कैपिंग 100000 तक UPI पर 50₹ चार्ज कैपिंग 200000 और इससे ऊपर के UPI Transaction को को 100₹ तक फिक्स/कैपिंग कीजिए! और इसे 50:50 में split कीजिए! 50% ग्राहक देगा और 50% मर्चेंट देगा! ✍️ Abhijeet Srivastava #UPI #MDR #cashlesspayments Nirmala Sitharaman Narendra Modi Bharatiya Janata Party (BJP) PMO India

अक्सर लोग मुझे ज्ञान देते हैं कि "गलत को गलत बोलना चाहिए!" इसपर मेरे विचार:- "आपको जो गलत लगता है, जरूरी नहीं वो सबसे लिए गलत हो या मेरी सोच में भी गलत हो! क्योंकि गलती निकालने का आधार/मूल तत्व ही जब भ्रामक, झूठा, षडयंत्रकारी है तो वो गलत कहाँ रह गया? उसे तो जबरदस्ती गलत बनाया जा रहा है!" यही काम रंगे सियार ज्यादातर करते हैं! इसलिए सही क्या है, गलत क्या है इसपर मैं कोई राय बनाने से पहले मूल तत्व की जांच करता हूं उसके बाद राय बनाता हूं! फिर समर्थन/आलोचना करता हूं! उदाहरण के लिए UPI MDR का मूल तत्व एक गलत निर्णय है! इसलिए मेरी नजरों में यह गलत है! और मैं इसपर सरकार की constructive criticism कर रहा हूं! राजीव गांधी ऐक्ट में संशोधन का मूल तत्त्व राजनीतिक समीकरण, और सरकार की मजबूरी है! इसलिए इसके खिलाफ होते हुए भी मैं सरकार की आलोचना नहीं करता! सरकार की नीतियों/योजनाओं में बार-बार केवल SC/ST/OBC का स्पष्ट उल्लेख होता हैं, सामान्य वर्ग का कहीं नाम भी नहीं होता, मुझे भी यह भेदभाव बुरा लगता है! लेकिन इसके मूल तत्त्व में संविधान का आर्टिकल 15(4), 16(4) है जो भेदभाव को जन्म देता है! और संविधान में सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव करने वाले यह आर्टिकल बीजेपी ने नहीं जोड़े हैं! इसलिए मैं इस बात को लेकर कि मोदीजी बार बार अपने भाषणों में दलित शोषित वंचित का जिक्र करते है, मोदी/भाजपा विरोधी अभियान नहीं चलाता! हालांकि मैं भी चाहता हूं कि इसमें संशोधन हो और सामान्य वर्ग के साथ यह संवैधानिक भेदभाव समाप्त हो! UGC पर मैंने क्यों सरकार की आलोचना नहीं की? क्योंकि इसके मूल में भी सरकार की कोई गलती थी ही नहीं, इसका हौव्वा बनाया रंगे सियारों ने! Guideline की भाषा अस्पष्ट थी, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी! लेकिन इसे ऐक्ट/कानून कहकर लोगों को भड़काया गया! यही वो षड्यंत्र था जहां झूठ को सच दिखाने की पुरजोर कोशिश हुई और भाजपा समर्थकों, विशेषकर सामान्य वर्ग को खूब भड़काया गया! ✍️ Abhijeet Srivastava

मैं फिर से कह रहा हूं; UPI पर चार्ज लगाने का वर्तमान मॉडल 0.4% या 300₹ व्यवहारिक नहीं है! एक मर्चेंट/व्यापारी होने के नाते मैं इसे अच्छे से समझ सकता हूँ और सरकार को एक बेहतर सुझाव दे सकता हूँ! UPI को चलाने के लिए जो लगात लग रही है उसमें मैं ये नहीं कहता कि आप UPI फ्री कीजिए! आप बिल्कुल चार्ज लीजिए! लेकिन सबसे लीजिए! हर transaction पर 0.1% का चार्ज लीजिए! यानी 1000₹ पर 1₹ चार्ज! ये चार्ज केवल मर्चेंट के सर पर बोझ की तरह मत डालिए, इसे 50:50 split कीजिए! 50p ग्राहक देगा और 50p मर्चेंट देगा! ये चार्ज उसी समय काट लीजिए या मंथ एंड होने पर एक बिल की तरह काट लीजिए! जैसे क्रेडिट कार्ड का बिल हर महीने की 16 तरीख को बनता है और अगले महीने की 4 तरीख तक भुगतान करना होता है! ऐसा ही एक सिस्टम बना दीजिए! या इस तरह की कैपिंग कीजिए:- 2000 तक फ्री; 2000 के ऊपर 0.1% चार्ज 20000 तक UPI पर 10₹ चार्ज 50000 तक UPI पर 25₹ चार्ज 100000 तक UPI पर 50₹ चार्ज इसे 50:50 में split कीजिए! 50% ग्राहक देगा और 50% मर्चेंट देगा! मेरा ये सुझाव मॉडल, प्रस्तावित मॉडल से ज्यादा व्यवहारिक है! इसमें किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं है! किसी पर बोझ नहीं है, 1₹ चार्ज ग्राहक देगा तो 1₹ दुकानदार को भी देना होगा! ऐसा करने से भी लगभग 15-20 हजार करोड़ का रेवन्यू प्रतिमाह बनेगा जिसे UPI की लागत व UPI infrastructure पर खर्च किया जा सकता है! ✍️ Abhijeet Srivastava

प्रधानमंत्री मोदीजी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! 🎂🎉 आप दीर्घायु हो, स्वास्थ्य रहें, और यूँ ही देश की सेवा करते रहें. भगवान से मेरी यही प्रार्थना है, 2047 में विकसित भारत बने तब भी हमें आपका मार्गदर्शन मिलता रहे! 🙏 और हाँ मोदीजी, एक बात और कहनी है.... . . . . . . . . . . आप भारत को विकसित बनाने के मार्ग में आने वाली चुनौतियों से निपटो, बाकी हम रंगे सियार और उसके अंधनमाज़ी चूतियों से निपट लेंगे! 😂👌

UPI MDR पर सरकार के निर्णय के बचाव में मैं अनेक तथ्य रख सकता हूं जोकि सही भी होंगे लेकिन वास्तव में वे व्यवहारिक नहीं होंगे! सरकार का कहना है कि 96% UPI transaction MDR के दायरे से बाहर हैं! सरकार का कहना है कि प्रतिमाह 1 लाख तक या इससे कम UPI से payment प्राप्त करने वाले व्यापरियों से MDR नहीं लिया जाएगा! अगर हम यह मान लें कि 4% में से 1% व्यापारी ऐसे हैं जिनकी प्रतिमाह UPI प्राप्ति 1 लाख से अधिक है; तो अगस्त 2026 में हुए कुल transaction में 75000 के ऊपर राशि वाले 1% transaction कि संख्या के हिसाब से 300₹ MDR लेने पर लगभग 7500 करोड़ रुपये प्रतिमाह रेवन्यू बनेगा! और अगर यह संख्या 0.5% है तो भी सरकार प्रतिमाह 3750 करोड़ रुपये हम व्यापरियों से वसूलना चाहती है! (यह सिर्फ उदाहरण के लिए चुनी गई मान्यता है। वास्तविक संख्या इससे कम या ज्यादा हो सकती है।) इससे समस्या ग्राहक को नहीं है, B2B लेन-देन को है! अपना खुद का उदाहरण देकर समझाता हूं; UPI आने के बाद अब जब भी समान खरीदने जाता हूँ तो लगभग 10% कैश और 90% UPI के भरोसे घर से निकलता हूँ! अब मेरा मर्चेंट UPI प्राप्ति भले 1 लाख से कम हो लेकिन मैं जहां समान खरीदने जाऊँगा उसकी प्रतिमाह UPI प्राप्ति 1 लाख से अधिक ही होगी इसलिए वो 0.4% MDR या 300₹ MDR के दायरे में आएगा! अब जब मैं समान लूँगा और कहूँगा की UPI से payment करना है तो सामने वाला अब UPI लेने से हिचकिचाएगा, मना करेगा या फिर कहेगा कि भाई 300₹ या 0.4% एक्स्ट्रा payment करना यदि UPI से कर रहे हो तो! वो यह भार मेरे ऊपर डालेगा! मैं भी 300₹ या 0.4% एक्स्ट्रा देने से हिचकिचाऊँगा! अब आगे से कैश लेन-देन को प्राथमिकता दूंगा! या मैं भी 2000 के ऊपर UPI payment स्वीकार नहीं करूंगा! देखने में 300₹ या 0.4% MDR कोई बहुत बड़ी रकम भी नहीं लगती है लेकिन 2000 के ऊपर हर transaction पर 0.4% MDR लेने या 300₹ लेने की बजाय आप हर 500₹/1000₹ के transaction पर 0.5₹/1₹ MDR ले लेते, 1₹ देने में किसी व्यापारी को कोई दिक्कत नहीं होगी और आपका रेवन्यू भी बढ़ जाएगा जिसे UPI infrastructure पर खर्च किया जा सकता है! या आप इसे कैपिंग के साथ केवल व्यापारी पर नहीं पूरे UPI लेन-देन पर लागू कीजिए! प्रति 20000₹ transaction 10₹ से ज्यादा चार्ज नहीं लेंगे! 21000-50000 तक 25₹ चार्ज लगेगा! 100000₹ भेजने पर 50₹ चार्ज लगेगा! इस चार्ज का आधा हिस्सा UPI payment लेने वाला वहन करे और आधा हिस्सा UPI payment देने वाला वहन करे! अब आप चाहें तो 1 लाख तक UPI से payment प्राप्त करने वाले बिजनैस को इससे राहत दे दीजिए! ऐसा करने पर सरकार को कितना रेवन्यू प्राप्त होगा इसकी गणना सरकार करवा सकती है! मैं एक मोटा मोटा उदाहरण देने की कोशिश करता हूं:- अगस्त 2026 में कुल UPI transaction :- 2451 करोड़ अगस्त 2026 में UPI से कुल लेन-देन की राशि:- 29.82 लाख करोड़ इसे अगर 1000 से भाग दे तो यह होता है:- 29820 करोड़ 1₹ चार्ज अगर हर 1000₹ पर लगता है:- 29820₹ करोड़ प्रतिमाह अगर कुल transaction की संख्या में 20000₹ वाले transaction की संख्या 5% होगी तो यह:- 123 करोड़ होता है और इसे 10₹ से गुणा कर दें तो 1230 करोड़ प्रतिमाह रेवन्यू होता है! वर्तमान प्रस्तावित/लागू होने वाले UPI माडल से यह मॉडल ज्यादा बेहतर रहेगा! ✍️ Abhijeet Srivastava

Fact-check - "मुआवजा" रंगा सियार सवर्णों को भाजपा के खिलाफ भड़काने के लिए एक के बाद एक कुतर्क कर रहा है और केवल मूर्ख लोग ही उसके बहकावे में आ रहे हैं. एक उदाहरण देकर कहता है, मान लो दो लड़कियां कहीं जा रही है, और उनके साथ रेप हो जाता है, रेप की पुष्टि हो जाती है, चूंकि एक लड़की दलित समाज से है तो उसे तुरंत 8 लाख रूपये मुआवजा मिल जाता है जबकि दूसरी लड़की जो दलित नहीं है उसे कुछ नहीं मिलेगा... अब चूंकि लोगों को कानूनी जानकारी का अभाव रहता ही है और रंगे सियार जैसे लोग इसी कमी का फायदा उठाकर अपना एजेंडा चलाते हैं... अब चलिए इसके कुतर्क का Fact-check कर देता हूं:- पहली बात रेप की पुष्टि होने पर राजीव गांधी ऐक्ट के तहत पीड़िता को 8 लाख नहीं 5 लाख मिलते हैं वो भी 3 पार्ट में, 50% मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि होने पर, 25% charge-sheet कोर्ट में भेजे जाने पर और 25% lower court में trial समाप्त होने पर। यदि ऐसा जघन्य अपराध किसी अन्य वर्ग जैसे सवर्ण या ओबीसी समाज से आने वाली लड़की के साथ होता है तो पीड़िता को राज्य की Victim Compensation Scheme के अनुसार मुआवजा मिलता है, उत्तर प्रदेश में यह राशि 3 लाख है, राजस्थान में 7 लाख है! NALSA की scheme में राज्य अपनी व्यवस्था में इससे अधिक दे सकते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राज्य की व्यवस्था NALSA के न्यूनतम मानकों से कम नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा केंद्र की Model Compensation Scheme में rape के लिए ₹4–7 लाख और gang rape के लिए ₹5–10 लाख की सीमा दी गई थी।

एक कुतर्क जो अक्सर सवर्णों की तरफ से किया जाता है कि मोदी सरकार ने सवर्णों के लिए क्या किया? मैं पूछता हूं... क्या सवर्ण नहीं चाहते थे अयोध्या में भव्य राम मंदिर बने? क्या सवर्ण नहीं चाहते थे 370 & 35A हटे? क्या सवर्ण नहीं चाहते देश में UCC लागू हो? क्या सवर्णों को देश में विकास नहीं चाहिए था? क्या सवर्णों को एक मजबूत भारतीय सेना नहीं चाहिए? क्या सवर्णों को एक शक्तिशाली आत्मनिर्भर भारत नहीं चाहिए? क्या भारत की आर्थिक प्रगति देखकर सवर्णों को प्रसन्नता नहीं होती? क्या वंदेभारत ट्रेन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर चलती डबल स्टैक कंटेनर मालगाड़ी चलते देखकर सवर्णों को गर्व नहीं होता? क्या देश में कोने कोने तक विश्वस्तरीय हाईवे एक्स्प्रेसवे का लाभ सवर्णों को नहीं मिला? क्या आयकर में 12 लाख तक टैक्स राहत का सबसे बड़ा लाभार्थी वर्ग सवर्ण नहीं है? क्या सवर्णों का इलाज AIIMS में नहीं किया जाता? क्या सवर्ण मेट्रो, RRTS या आने वाली बुलेट ट्रेन के आरामदायक सफर का आनंद नहीं लेगा? EWS आरक्षण का लाभ गरीब तबके के सवर्णों को नहीं दिया गया? 2014 के पहले प्रतिदिन होने वाले आतंकी हमलों से क्या मोदीराज में सवर्णों को सुरक्षा नहीं मिली है? सबसे बड़ी बात क्या देश की अर्थिक प्रगति, विश्व में भारत का मान सम्मान, ऑपरेशन सिंदूर में भारत की ताकत, हर दिन और अधिक शक्तिशाली बनते भारत को देखकर क्या सवर्णों को गर्व महसूस नहीं होता? फिर क्यों यह बार बार पूछते हो कि सवर्णों को क्या मिला? सवर्णों को सुरक्षित देश मिला, इससे बढ़कर और क्या हो सकता है? बाकी कुंठित जातिवादी पहले भी कृतघ्न थे, आज भी है और आगे भी कृतघ्न ही रहेंगे फिर चाहे उनके लिए आप कुछ भी कर लीजिए. 😏 ✍️ Abhijeet Srivastava

एक दल समुदाय विशेष के तुष्टीकरण में हिन्दुओं को खत्म करने पर आमादा है, सत्ता प्राप्ति के लिए पाकिस्तान, जेहादियों, आतंकियों, विदेशी ताकतों किसी से भी हाथ मिला रहा है. जिसके कुशासन में देश में अनेकों आतंकी घटनाएं हुईं, बड़े बड़े घोटाले हुए, भ्रस्टाचार महंगाई तो चरम पर थे, भारत दुनिया के सामने लाचार बेबस और अर्थव्यवस्था Fragile Five में हुआ करती थी. जिसने वोट बैंक के तुष्टीकरण में राजीव गांधी ऐक्ट, वक्फ बोर्ड, अल्पसंख्यक मंत्रालय, पिछले दरवाजे से मुसलमानों को OBC में आरक्षण जैसे काले कानून बनाए. हिन्दुओं के family value को तोड़ने के लिए हिन्दू कोड बिल बनाया. और भी बहुत कुछ किया है, अगर इसके कुशासन पर लिखने लगूं तो एक मोटी किताब छप जाएगी. एक दूसरा दल केवल अपने वोट बैंक की चिंता करता है, और उसके नेता खुल्लमखुल्ला पब्लिक को धमकी देते हैं कि सबकी लिस्ट तैयार कर रहे हैं! इनके कार्यकर्ता तो हर दिन यह ख्वाब देखते हैं कि हमारी सरकार आने दो फिर बतायेंगे.. ये एक राजनैतिक दल द्वारा डायरेक्ट थ्रेट टू पब्लिक नहीं है क्या? एक और दल है जिसने सत्ता बचाने के लिए हिन्दुओं पर कई वर्षों तक अनेकों अत्याचार किए. फ़िलहाल राज्य में भाजपा के आने से उस राज्य का हिन्दू सुरक्षित हुआ. एक दल ऐसा है जिसने पाकिस्तान के साथ मिलकर कश्मीरी हिन्दुओं को कश्मीर छोड़ने पर विवश कर दिया था. एक ऐसा दल भी है जो हिन्दुओं को कीड़े मकौड़े और सनातन को डेंगू कहता है और उसे खत्म करने की बातें दोहराता है! इसके बाद एक दल ऐसा भी है जिसे हिन्दू समेत सर्व समाज की चिंता है, देश की चिंता है, भारत को आत्मनिर्भर और विकसित बनाना जिसका लक्ष्य है, भारत के दुश्मनों को सबक सिखाने की हिम्मत है, तमाम दशकों पुराने घावों को ऑपरेशन करके ठीक कर रहा है, जो राष्ट्रवाद और हिन्दुत्ववादी विचारधारा के पथ पर चल रहा है, जो सबका साथ सबका विकास के संकल्प के साथ काम कर रहा है. जिसके शासन में देश नई ऊँचाइयाँ छू रहा है और नागरिक निश्चिंत हैं, सुरक्षित महसूस कर रहा है. जिसने जनता की सुविधा के लिए हर क्षेत्र में अनेकों विकास कार्यो को पूरा किया है. जिसने केवल गरीबी हटाओ का नारा नहीं दिया बल्कि गरीबों वास्तव में गरीबी से बाहर निकाला है. लेकिन इस दल से राजनैतिक मजबूरी के कारण एक-दो गलतियां भी हुई हैं. वैसे तो कोई भी परफेक्ट नहीं होता, और एक राजनैतिक दल से perfection की उम्मीद करना ही बेवकूफ़ी है. क्योंकि राजनैतिक नफा नुकसान कुछ ऐसे निर्णय करवाता है जो कुछ लोगों के लिए अच्छे हो सकते हैं और कुछ लोगों के लिए खराब. सारे विकल्प आपके सामने है, अब आप लोग ही तय कीजिए कि चुनाव में आपको किस दल को चुनना है, किस नेता को अपने सर पर बिठाना है! किसे वोट देना है! ✍️ Abhijeet Srivastava

As per section 10A of the Payment and Settlement Systems Act, 2007 (51 of 2007), the Central Government prohibits banks and s
As per section 10A of the Payment and Settlement Systems Act, 2007 (51 of 2007), the Central Government prohibits banks and system providers from imposing, directly or indirectly, any charges on a person making or receiving payments using debit cards powered by RuPay and UPI transactions up to Rs 2,000: Ministry of Finance

केवल ये कह देने भर से कि भाजपा के हार जीत की चिंता हम क्यों करें? भाजपा करे... भाजपा के बाद जो आएगा उससे हमें क्या? चाहे कोई आए... यहीं पर रंगे सियार अजीत भारती पर एक संदेह पैदा होता है। ऐसी धूर्ततापूर्ण बातें एक वामपंथी ही कर सकता है, जिसे न राष्ट्र से मतलब है न हिन्दू/हिन्दुत्व से! समाज में जातिवादी जहर घोलकर हिन्दुओं की फॉल्टलाइन पर प्रहर करना ही एकमात्र उद्देश्य है! रंगा सियार एक यूट्यूबर है, सम्भवतः अब हर तरह के लोगों जान-पहचान भी होगी, उसको कुछ नहीं होगा, ज्यादा होगा तो दिलीप मंडल की तरह पाला बदलकर दरबारी बन जाएगा। पर आम हिन्दू? हिन्दुत्व के प्रति निष्ठावान हिन्दुओं की दुर्दशा का अनुमान लगाया जा सकता है?? क्या ये सोंचे बिना भाजपा को खदेड़ दिया जाना चाहिए? ये समझे बिना की भाजपा के बाद वालों की क्या मानसिकता है?? और यदि मुद्दे की हीं बात है तो प्राइवेट सेक्टर मे आरक्षण, ईसाई और मुसलमानों को आरक्षण और रोहित वेमुला एक्ट की बात करने वाले विपक्ष को ऐसे हीं इग्नोर कर दिया जाए?? जिसकी जितनी भागिदारी उतनी उसकी हिस्सेदारी का ताप हिन्दू समाज खासकर सवर्ण समाज झेल लेगा?? या फिर साम्प्रदायिक हिंसा जैसे हिन्दू विरोधी कानून का ताप झेल पाएगा?? मै फिर कह रहा हूं, मुद्दा कोई मुश्किल नहीं है, आप अपने अधिकार मांगिए, constructive criticism कीजिए, लेकिन किसी को मिले अधिकार छिनने की बात करेंगे तो आप अप्रासंगिक हो जाएंगे. SC/ST समाज के हिन्दुओं को जो मिला है उसे छीनने की मांग करने की जगह आप अपने सवर्ण समाज के लिए भी Atrocity Act जैसे कठोर कानून की मांग कीजिए! आप ईशनिंदा के विरुद्ध कठोर कानून की मांग कीजिए, आप मांग कीजिए कि कानून के दुरुपयोग, झूठे केस, झूठी गवाही पर कठोर कानून बने! आप सरकार से मांगिए कि जिस निर्दोष को कानून की कमी, झूठे आरोप, न्याय व्यवस्था की देरी के कारण जेल जैसी यातना सहन करनी पड़ती है उसके लिए 2 करोड़ की अर्थिक क्षतिपूर्ति की व्यवस्था भी बने! ✍️ Raunak Kumar, Abhijeet Srivastava

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ... निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा...🙏 आप सभी सनातनी मित्रों को गणेश चतुर्थी की बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ... विघ्नहर्ता श्री गणेश आप सभी के जीवन में सुख, शान्ति व समृद्धि लेकर आएँ...🙏

🚨Uniform Civil Code (UCC) would be implemented across all 21 NDA-ruled states before 2029. ~Union Home minister

Constructive Criticism - मोदी सरकार से अनुरोध जिन निर्दोष लोगों की जिंदगी गलत केस/आरोप, कानून के दुरुपयोग के कारण खराब होती है, जो लोग 10-20 साल उस अपराध का आरोपी बनकर जेल में गुजार देते हैं जो उसने किया ही नहीं होता है. इन वर्षों में वे न जाने कितने मानसिक और शारीरिक कष्ट को सहते हैं. फिर 10-20 साल बाद पता चलता है कि आरोपी तो निर्दोष था, उसे गलत उद्देश्य से फंसाया गया था या न्याय व्यस्था के मकड़जाल/लूपहोल के कारण इतने वर्षों तक अपराधी बना रहा, अपमानित होता रहा. ऐसे वास्तविक केस में आरोपी के लिए सरकार द्वारा कम से कम 2 करोड़ या सरकार को जो उचित लगे, मुआवजे का प्रावधान भी होना चाहिए! क्योंकि आप उसकी जिन्दगी का वो समय तो लौटा नहीं सकते जो उसने सिस्टम की नाकामी/लापरवाही के कारण जेल में बिताया है लेकिन एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए अर्थिक क्षतिपूर्ति तो कर ही सकते हैं!

गलत नीतियों पर अपनी सरकार का constructive criticism करो, समस्या पता है समाधान पर बात करो. धमकी देने से या गाली गलौज करने से कुछ हासिल नहीं होगा. राजीव गांधी ऐक्ट और ऐसे प्रत्येक कानून जिसका दुरुपयोग हो रहा है उसे रोकने के लिए मोदी सरकार को एक Prevention of Misuse of Law Act बनाना चाहिए जिसमें कानून का दुरुपयोग करने, झूठी शिकायत, झूठी गवाही के लिए कठोर दंड के प्रावधान किए जाएं. दूसरा ईशनिंदा पर भी एक कठोर कानून होना चाहिए! किसी भी धर्म या मज़हब के ईश्वर पर दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी करना दण्डनीय अपराध होना चाहिए. जिसमें अग्रिम ज़मानत भी नहीं हो! तीसरा यदि किसी विशेष कानून जैसे राजीव गांधी ऐक्ट के तहत किसी पीड़ित को मुआवजा दिया जा रहा है तो इसके लिए उसी समाज से दान या अपराधियों से अर्थिक दंड लेकर एक अलग फंड की व्यवस्था होनी चाहिए जिनके लिए विशेष कानून बनाया गया है. और गलत केस करने वालों से दोगुना मुआवजा वसूलने का प्रावधान भी होना चाहिए! ये होता है Constructive Criticism.

भारत में रहकर भाजपा की सत्ता रूपी वट वृक्ष की छांव में राजीव गांधी ऐक्ट या आरक्षण जैसे मुद्दों पर जिन हिन्दुओं का जातिवाद हिलोरे मार रहा है और उसी वृक्ष को काटने की धमकियां दी जा रहीं है वो कृपया बांग्लादेश में हिन्दुओं की स्थिति देख लें! 2024 में जिहादियों की हिंसक भीड़ ने बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्ता पलट दिया और उसके बाद शुरू हुआ हिन्दुओं का नरसंहार, कोतवाली के सामने खंबे से लटकाकर एक हिन्दू को जिंदा जलाने से पहले जिहादी भीड़ नहीं उसकी जाति नहीं पूछी, वो उनके लिए काफिर था बस इतना ही काफी था. स्वामी चिन्मय कृष्ण दास को फर्जी केस में फंसाकर जेल में डाल दिया गया, क्योंकि वो हिन्दुओं के खिलाफ हो रही जिहादी हिंसा का विरोध कर रहे थे! उनकी मां बिमार हुई, उनसे मिलने तक की अनुमती नहीं दी गई! अभी एक दो दिन पहले ही उनकी मां का देहांत हुआ तो मात्र कुछ घंटों के लिए उन्हें पेरोल पर छोड़ा गया था! हिन्दुओं की ऐसी दयनीय स्थिति देखकर बहुत पीड़ा होती है. ममता कुशासन में पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं की दुर्दशा का घाव तो अभी ताजा ही है, कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार और पलायन भी ज्यादा पुरानी बात नहीं है. इतना सब देखने के बाद भी यदि कोई हिन्दू भाजपा का विरोध करता है, भाजपा को सत्ता से हटाने की धमकी देकर उनकी गोद में बैठना चाहता है जो सत्ता में आने के बाद जेहादियों के ही तलवे चाटते हैं! हिन्दू समाज की यही आत्मघाती प्रवत्ती ही एक दिन समूचे भारत को चिन्मय दास की तरह बेबस बना देगी! ✍️ Abhijeet Srivastava

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2018 में 2019 में 2020 में 2021 में 2022 में 2023 में 2024 में और 2025 तक रंगे सियार को नहीं याद आया कि कोई राजीव गांधी ऐक्ट भी है जिसे मोदी ने फिर से जिवित कर दिया है. अचानक 2026 में इसे आरक्षण, मोदी ऐक्ट, भीजपा सब एक साथ याद आ रहा है. इस धूर्त की चालबाजी अब लोग धीरे धीरे समझने लगे हैं, बस इसके आंड चाटुकारों को छोड़कर! 😏 ये कॉंग्रेस की हिन्दुओं में फूट डालो और राज करो वाली पुरानी कुत्तनीति है जिसे अब एक बच्चा भी समझ सकता है. रंगे सियार की चालबाजी में फंसकर जो भोले लोग कह रहे हैं कि अब वे चुनाव में किसी को वोट नहीं देंगे क्योंकि सभी सवर्ण विरोधी है. ये वही उदासीनता का भाव है जिसको भाजपा वोटरों में भरने के लिए कॉंग्रेस ने इन धूर्त रंगे सियारों को मैदान में उतारा है. चुनावों में इस उदासीनता का फायदा सीधा कॉंग्रेस, स्पा और अन्य विपक्षी दलों को होगा. क्योंकि चुनाव में 100 में से 99 वोट नोटा को मिले या 99 लोग उदासीन होकर वोट भी न करें तो भी बचा 1 वोट पाने वाला विजेता रहेगा और यही कॉंग्रेस की चाल है.

कड़वा सत्य... भाजपा एक राष्ट्रवादी राजनैतिक पार्टी है! मोदी जी एक राष्ट्रवादी राजनेता है! देश के लिए कुछ अच्छा करना है तो सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ बने रहना आवश्यक है, तभी 370 जैसे ऐतिहासिक निर्णय हो सकते हैं! इसके लिए इन्हें देश के नफा नुकसान के साथ-साथ अपनी राजनैतिक पार्टी का नफा नुकसान भी देखना है! अब देश में वोटरों के कई वर्ग है, लेकिन सबसे कृतघ्न वोटर वर्ग सवर्ण है! ये वो कालिदास हैं जो उसी डाल को काटना चाहते हैं जिसकी छांव में दिन रात सोशल मीडिया पर इन्हें भौंकने की आजादी मिली है! यह वर्ग हर दिन किसी न किसी मुद्दे को लेकर सरकार से क्रोधित रहता है! सवर्णों की कृतघ्नता के कारण भाजपा ने इन्हें फ्लोटिंग वोट बैंक में डाल दिया है! क्योंकि नालबंद की सवर्ण कील युद्ध के मैदान में कब, किस बात पर धोखा दे देगी इसका अंदाजा है, क्योंकि ये वो वर्ग है जो आलू प्याज के दाम बढ़ने पर अटल जी को हटा देता है, यही वो वर्ग है जो भव्य राम मंदिर बनवाने के बाद अयोध्या हरा देता है, यही वो वर्ग है जो देश में इतना सब विकास करने के बाद 303 से 240 पर ले आता है! और इसीलिए सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा को अपना वोट प्रतिशत बढ़ाना होगा! अब भाजपा अगर दलित शोषित पीड़ित वंचित वोट बैंक को साध रही है तो इन जातिवादी सवर्णों को बहुत चुभ रहा है! आज अगर भाजपा की राजनीति में जातिवाद दिखाई दे रहा है तो इसका कारण भी सवर्णों की अहंकारी प्रवत्ती और मूर्खता ही है! आज इन सवर्णों को रंगा सियार अपना शुभचिंतक लग रहा है! कहता है हम 30% है अपनी अलग पार्टी बनाएंगे, अपनी सरकार बनाएंगे? अबे 30% में 10% तो वोट देने नहीं जाते, 10% कॉंग्रेस, समाजवादी विपक्ष के साथ है अब बचे 10% जो भाजपा के साथ थे, और मान लेते हैं कि तुम्हारी रंगी सियार छवि से आकर्षित होकर 9% सवर्ण भाजपा से नाराज हो गए क्योंकि मेरे जैसे 1% तो किसी भी परिस्थिति में भाजपा के साथ ही रहेंगे. अब 9% में तुम सरकार तो छोड़ो अपना एक विधायक नहीं बना सकते, सिवाय भावुक सवर्णों को चूतिया बनाकर चंदा इकट्ठा करके उसको डकारने के. लेकिन इस वर्ग में भी दो प्रकार के सवर्ण हैं- एक वो जो सत्ता (भाजपा) के साथ हैं या होने का दिखावा करते हैं और दूसरे वो जो विपक्षी दलो की गुलामी करते हैं! जो विपक्षी सवर्ण हैं उन्हें न तो आरक्षण से समस्या है, न UGC से और न ही राजीव गांधी ऐक्ट से. बल्कि इन्होंने तो 60 साल तक कॉंग्रेस के साथ मिलकर देश की लगभग सभी समस्याओं की डिलेवरी करवायी है! चाहे वो आरक्षण हो, राजीव गांधी ऐक्ट हो, इतिहास से छेड़छाड़ हो या JNU में लगने वाले आपत्तिजनक नारे हो, इन सबके केंद्र में आप एक सवर्ण को ही पाएंगे! मैं सवर्ण जरूर हूं लेकिन चूतिया नहीं हूं इसलिए वोट तो हर हाल में भाजपा को ही दूंगा! क्योंकि भाजपा मुझे व्यक्तिगत कुछ दे या न दे लेकिन मेरे देश को विकास, आर्थिक प्रगति, नई ऊंचाई अवश्य दे रही है! एक राष्ट्रवादी होने के नाते इतना ही मेरे लिए पर्याप्त है! ✍️ Abhijeet Srivastava

2018 के संशोधन पर बड़ा हल्ला हो रहा है लेकिन क्या किसी को पता है इसके बाद 2020 में भी सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय दिया था- राजीव गांधी ऐक्ट की वर्तमान स्थिति:- सुप्रीम कोर्ट का राजीव गांधी (sc/st) ऐक्ट पर फरवरी 2020 का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है:- केस:- पृथ्वी राज चौहान बनाम भारत संघ (2020) निर्णय:- यदि किसी व्यक्ती पर झूठा केस दर्ज होता है, और यदि पहली नजर में कोई अपराध नहीं बनता है तो धारा 18A के बावजूद अदालतें अग्रिम ज़मानत दे सकती हैं और हाईकोर्ट के पास BNS की धारा 528 के तहत FIR रद्द करने का पूरा अधिकार है. इसके लिए दो मुख्य कानूनी पहलुओं को देखा जाता है: सार्वजनिक स्थान (Public View): अपमान या जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किसी सार्वजनिक स्थान पर या जनता के सामने होना चाहिए। अगर कथित घटना घर के भीतर या बिना किसी बाहरी गवाह के हुई है, तो यह एक्ट लागू नहीं होता। जातिगत इरादा (Intent): आरोपी ने पीड़ित को केवल इसलिए निशाना बनाया हो क्योंकि वह अनुसूचित जाति या जनजाति से है. सामान्य झगड़े में अचानक हुई बहस को SC/ST एक्ट का रूप नहीं दिया जा सकता। झूठी शिकायत करने वाले पर कार्यवाही:- अगर कोर्ट में यह साबित हो जाता है कि FIR पूरी तरह से झूठी और फंसाने के इरादे से की गई थी, तो आरोपी बरी होने के बाद शिकायतकर्ता के खिलाफ BNS की धारा 248, 217, 229 के तहत कानूनी कार्रवाई कर सकता है. आरोपी शिकायतकर्ता के खिलाफ दीवानी (Civil) या आपराधिक (Criminal) मानहानि का मुकदमा दायर कर हर्जाने की मांग कर सकता है।

यह मामला Supreme Court में Criminal Appeal No. 416 of 2018 बना और 20 मार्च 2018 को Justice Adarsh Kumar Goel और Justice U.U. Lalit की Bench ने फैसला दिया। जिस टिप्पणी के कारण विवाद पैदा हुआ वो इस प्रकार थी: 1. Dr. Satish Bhise की टिप्पणियाँ: Gaikwad के अनुसार उनकी 2007–08 की ACR में यह टिप्पणियाँ की गई थीं कि: वह झूठी शिकायतें करने का आदी है (in the habit of making false complaints); वह पदोन्नति (promotion) के योग्य नहीं है; उसे अधिक और व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता है; वह क्षेत्रीय स्तर (regional level) पर काम करने के योग्य नहीं है। 2. Dr. Kishor Burade की टिप्पणी: सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणी यह थी कि: उसकी integrity और character अच्छे नहीं हैं / दोनों में कमी है। हिंदी में इसका अर्थ हुआ—“उसकी ईमानदारी (integrity) और चरित्र (character) अच्छे नहीं हैं।” हिन्दुओं को आपस में लड़वाने के लिए कॉंग्रेस ने ऐसे ऐसे बूबी ट्रैप बिछाए हैं जिनसे किसी तरह बचाकर मोदीजी देश को इस ऊंचाई तक लाए हैं. सत्ता से दूर कॉंग्रेस सत्ता पाने के लिए इतनी बेचैन है कि वो अब कुछ भी कर सकती है. राहुल गांधी के बेतुके बयानों से स्पष्ट होता है कि कॉंग्रेस दलितों-गैर दलितों के मन में जहर की खेती तो कर ही रही है. दलितों-गैर दलितों को आपस में लड़वा रही है. अगर कॉंग्रेस यह सोचती है कि अपने रंगे सियारों को एक्टिवेट करके वो भाजपा के समर्थकों और भाजपा के वोटबैंक में असंतोष पैदा करके चुनाव जीत लेगी तो वह कभी अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाएगी क्योंकि हम भाजपा/मोदी से चाहे जितना नाराज हो जाएं लेकिन वोट तो मोदी/भाजपा को ही देंगे. ✍️ Abhijeet Srivastava