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📚𝗠𝗞 Hindi Story ✍ 𝘽𝙊𝙊𝙆𝙎✘✘📚

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पूर्णिकांश - हरे जख्म भुला न दूं तुझको इसलिए मैं जख्मो को हरा रखता हूं। याद आये तुझको मेरी अपनी आह को जरा रखता हूं। दिल पर मे
पूर्णिकांश - हरे जख्म भुला न दूं तुझको इसलिए मैं जख्मो को हरा रखता हूं। याद आये तुझको मेरी अपनी आह को जरा रखता हूं। दिल पर मेरे खंजर चला देते तो जरा भी ग़म न होता। तू है बेवफा जख्म रहे ताजा अश्कों को खरा रखता हूँ। श्याम कुंवर भारती

#शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई
#शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई

*"श्री#कृष्ण भजन - श्री कृष्ण सरकार।** गोकुल में जगत के तारणहार आये है। श्री विष्णु के अवतार श्री कृष्ण सरकार आये है गोकुल मे
*"श्री#कृष्ण भजन - श्री कृष्ण सरकार।** गोकुल में जगत के तारणहार आये है। श्री विष्णु के अवतार श्री कृष्ण सरकार आये है गोकुल में जगत के .........। तीनो लोक के स्वामी कृष्ण अंतर्यामी है । लक्ष्मी पति कृष्ण बहु आयामी है। दुखियों के रक्षक जगत के पालनहार आये है । गोकुल में जगत के .......। मुरली मनोहर गोवर्धनधारी तुम कृष्ण मुरारी हो। संतन हितकारी तुम बांकेबिहारी राधिका संगवारी हो। बृज के लाला गोपियों के ग्वाला कंस के संहार आये है। गोकुल में जगत के .........। बृंदावन में गाय चराए गोपियों संग लीला रचाये। असुरो का संहार करे भक्तों के प्राण बचाये। श्याम सुंदर मुकुंद मोहन नंद के दुलार आये है। गोकुल में जगत के .........। कालिया नाग को नथने वाले दुष्टों को बधने वाले। इंद्र गरूर को चुरने वाले गोपियों वस्त्र चुराने वाले। पीताम्बर धारी मदन मुरारी जगत के उद्धार आये है। गोकुल में जगत के तारण हार आये है। गीतकार श्याम कुंवर भारती बोकारो,झारखंड माॅब.9955509286

पूर्णिका - लक्ष्मण रेखा प्रकृति की। आज की सोचो कल क्या होगा किसने देखा है। आज सुखद और सफल हो क्या हमने सोचा है। अगर आज सुधर ग
पूर्णिका - लक्ष्मण रेखा प्रकृति की। आज की सोचो कल क्या होगा किसने देखा है। आज सुखद और सफल हो क्या हमने सोचा है। अगर आज सुधर गया कल खुद संवर जाएगा। आने वाली सारी आपदाओं क्या हमने सिखा है। विकास जरूरी मगर प्रकृति दोहन कैसी मजबूरी। खुद सुधरे क्या खींची कोई हमने लक्ष्मण रेखा है। आ रहा है सागर का पानी हमारे घर के अंदर तक। डूब जाएंगे सारे गाँव शहर ये सब रब ने लिखा है। सलामत नही छोड़ा जमीन और जंगल को सबने रोक राह नदियों लकीर तबाही खुद हमने खींचा है। जब लोग मकां पशु न रहे क्या करेंगे विकाश का । चिताओं पे पका खाना स्वाद पाया हमने तीखा है। अब न सुधरे बचेंगे नहीं हम शैलाब आने वाला है। सबक लो नेपाल भारती ये सवाल हमने फेंका है। *"श्याम कुंवर भारती ** बोकारो,झारखंड

कॉस्मेटिक्स_इंडस्ट्रीज़.pdf92.99 MB

कुछ और नज़्में_गुलज़ार.pdf26.97 MB

काव्य_कानन_श्री_पंडित_लक्ष्मीधर_शास्त्री.pdf25.57 MB

कहानीकार.pdf27.91 MB

कवि काहिनी_बादल सरकार.pdf91.60 MB

कल_की_दुनिया_आर_खाड़िलकर.pdf193.33 MB

करोड़पति_खाकपति_नेमिशरण_मित्तल.pdf39.99 MB