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📚𝗠𝗞 Hindi Story ✍ 𝘽𝙊𝙊𝙆𝙎✘✘📚

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नन्ही सी पिंकी की आवाज सुनते ही श्रेया का दिल फिर से पिघलने लगा।  श्रेया को ऐसा लग रहा था जैसे पिंकी की आवाज उसके कानों तक नहीं बल्कि उसके दिल तक पहुंच रही थी । श्रेया उसी पल उठकर पिंकी के पास जाना चाहती थी । मगर तभी श्रेया को realise hua कि ऐसा करना ठीक नहीं होगा। श्रेया ने रिप्लाई करते हुए लिखा…" सॉरी can नॉट कम ।" कुछ ही सेकंड में फिर एक बार श्रेया के मोबाइल पर एक वॉइस नोट डिलीवर हुआ।  इस बार पिंकी ने कहा…." ओके टीचर आई विल pack some केक …एम ई पैटिंधी रेफ्रिजरेटर कल जब मैं आपसे मिलने आऊंगी तब आपके लिए केक लेकर आऊंगी ।" पिंकी का जवाब सुनते ही श्रेया ने थम्स अप का emoji भेज दिया। मैसेज भेजने के बाद श्रेया का दिल घर के कामों में नहीं लग रहा था । श्रेया ने फोन उठाकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट को चेक किया । अचानक ही नताशा की पोस्ट श्रेया की आंखों के सामने आई।  नताशा ने पिंकी के साथ खींचे हुए फोटो शेयर किए थे । जिसमें साफ नजर आ रहा था कि नताशा भी पिंकी और आकाश के साथ उसी रेस्टोरेंट में मौजूद थी। यह पोस्ट देख कर श्रेया का सर गुस्से से चकराने लगा। इस पोस्ट का मतलब साफ था । आकाश ने श्रेया को रेस्टोरेंट् सिर्फ इसलिए इनवाइट किया था ताकि वह श्रेया को यह दिखा सके कि वह अपनी फैमिली के साथ कितना खुश है। आकाश श्रेया को अपनी हैप्पी फैमिली  दिखा कर जलाना चाहता था। नताशा की पोस्ट देखने के बाद श्रेया ने जोर से अपना फोन बिस्तर पर फेंका और पीलो के नीचे अपना सर दबा कर लेट गई। अगले दिन स्कूल में श्रेया हमेशा की तरह बच्चों को रिसीव करने के लिए स्कूल के एंट्रेंस पर खड़ी थी।  हर टीचर की यह ड्यूटी थी कि वह बच्चों को सैफली क्लासरूम तक पहुंचाएं और एक डांस टीचर होने के नाते श्रेया को भी यह ड्यूटी सौंपी गई थी । श्रेया को गेट पर खड़ा देखते ही पिंकी और आर्यन दौड़कर श्रेया के पास आ गए । आकाश मुस्कुराते हुए श्रेया के पास आया । आकाश के हाथ में एक छोटा सा बॉक्स था । बॉक्स श्रेया को ऑफर करते हुए आकाश ने कहा …"इसमें केक है आपके लिए." आकाश की मुस्कुराहट देखकर श्रेया की आंखें गुस्से से लाल होने लगी थी । श्रेया गेट पर बाकी बच्चों के सामने कोई तमाशा नहीं खड़ा करना चाहती थी । अपने इमोशंस पर कंट्रोल करते हुए श्रेया ने अपनी नजरें झुका ली और आकाश से कहा …"थैंक्स मिस्टर गुलेरिया मुझे स्वीट्स पसंद नहीं है।" श्रेया ने यह बात बड़ी रूडली कही थी। इससे पहले कि आकाश श्रेया से उसके गुस्से की वजह पूछता । श्रेया दोनों बच्चों को लेकर स्कूल के अंदर चली गई । आर्यन और पिंकी को अपने क्लासरूम तक छोड़ने के बाद श्रेया दोबारा एंट्रेंस पर बाकी बच्चों को लेने चली गई । जब श्रेया main गेट पर पहुंची तब उसने देखा कि आकाश अभी भी वहीं खड़ा था। श्रेया को गेट पर देखते ही आकाश तेजी से चलकर श्रेया के पास आया और पूछने लगा ."क्या हुआ है तुम्हें?  कल शाम तक तो सब कुछ ठीक था।  हमने चैटिंग भी की…. अब अचानक आज सुबह क्या हो गया है तुम्हें ?तुम्हारी आंखें इतनी सूज गई है…. तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना? " श्रेया ने गुस्से से आकाश की ओर देखकर कहा…" मेरी तबीयत की चिंता आपको करने की कोई जरूरत नहीं है मिस्टर गुलेरिया." श्रेया के मुंह से यह बात सुनकर आकाश ने अपनी आवाज ऊंची करते हुए पूछा …."अब बताओ भी श्रेया आखिर बात क्या है। " श्रेया ने अपनी जेब से अपना फोन निकाल कर आकाश को वह फोटोग्राफ्स दिखाएं जो नताशा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की थी।."

जैसे ही नताशा पिंकी का हाथ पकड़कर उसे अंदर ले जाने लगी पिंकी ने अपने शरीर की पूरी ताकत लगाकर नताशा को रोकने की कोशिश की मगर नन्हीं सी पिंकी के शरीर में इतनी ताकत नहीं थी कि वह नताशा को रोक पाए । मगर पिंकी की झिझक आकाश ने नोटिस कर ली थी । इससे पहले कि नताशा पिंकी को बंगले के अंदर ले जाती…. आकाश ने नताशा को रोकते हुए कहा …"नहीं मुझे लगता है कि हमें अब चलना चाहिए…." नताशा अच्छी तरह जानती थी कि आकाश ने एक बार जो कह दिया उस फैसले से वह कभी पलट नहीं सकता था। इसलिए  अरगुमेंट ना करते हुए नताशा ने आकाश से कहा…." जरा 1 मिनट रुकना मैं अपनी बच्ची के लिए एक गिफ्ट लाई हूं…." यह कहने के बाद नताशा ने दरवाजे के पीछे रखा एक गिफ्ट बॉक्स उठाया और नन्ही सी पिंकी के सामने रख दिया। आकाश और पिंकी के सामने ही नताशा ने वह गिफ्ट बॉक्स खोला और अंदर से एक टॉय कार निकालकर पिंकी को दी । नताशा ने पिंकी से कहा …"देखो तुम्हारे मम्मा ने तुम्हारे लिए बर्थडे प्रेजेंट पहले से ला कर रखी थी।" टॉय कार को देखकर पिंकी मन ही मन सोचने लगी कि नताशा इतना भी नहीं जानती थी कि पिंकी को कार्स के साथ खेलना पसंद नहीं था । मगर कार को अपने हाथ में पकड़ कर एक बहुत ही ओबेडिएंट बच्ची की तरह पिंकी ने नताशा से थैंक्यू कहा। नताशा ने अपनी जेब से अपना फोन निकाला और नन्हीसी पिंकी के साथ अपनी सेल्फी खींची। सेल्फी में नताशा घुटनों के बल बैठी थी और नताशा की ठीक बगल में प्यारी सी पिंकी खड़ी थी। सेल्फी में आकाश का चेहरा नहीं नजर आ रहा था। बस आकाश का आधा शरीर नताशा और पिंकी के पीछे नजर आ रहा था।  इसके बाद आकाश ने फिर से पिंकी को अपने हाथों में उठा लिया और नताशा से कहा. " ठीक है अब हमें चलना चाहिए …" इससे पहले कि नताशा आकाश को रोकने की कोशिश करती आकाश तेजी से बंगले की सीढ़ियां उतरकर अपनी कार में बैठ गया । मित्तल हाउस से निकलने के बाद आकाश पिंकी को लेकर पिंकी के फेवरेट रेस्टोरेंट्स में चला गया । पिंकी को खाने पीने का ज्यादा शौक नहीं था । मगर इस खास रेस्टोरेंट में आना पिंकी को बेहद पसंद था।  रेस्टोरेंट की सजावट बिल्कुल किसी फेयरी टेल की तरह की गई थी । जहां वेट्रेस परियों के costume में खाना serve करती थी । यह पूरी जगह बच्चों से भरी हुई रहती थी। खासकर छोटी उम्र की लड़कियां यहां आना बहुत पसंद करती थी। रेस्टोरेंट के अंदर जाते ही पिंकी के चेहरे पर स्माइल आ गई । वह चारों ओर परियों के ड्रेस में घूम रही waitress को देखकर काफी खुश हो गई।  पिंकी के चेहरे पर स्माइल देख कर आकाश भी काफी इमोशनल हो गया। अपने इमोशंस में डूबे आकाश और पिंकी यह नहीं जानते थे की मित्तल हाउस से निकलने के बाद नताशा अपनी कार में पीछे पीछे उन्हें फॉलो कर रही थी। रेस्टोरेंट में जब आकाश और पिंकी एक टेबल पर बैठे तो चुपके से नताशा ने ठीक उनके पीछे खड़े रहकर अपनी एक सेल्फी खींच ली । सेल्फी में देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो तीनो ही साथ में रेस्टोरेंट में पिंकी का बर्थडे मनाने पहुंचे थे । फोटो खींचने के बाद नताशा चुपके से रेस्टोरेंट्स से बाहर निकल गई। रेस्टोरेंट में परी के ड्रेस में एक वेट्रेस पिंकी के पास आई ….और वाइट और पिंक कलर से बार्बी डॉल के आकार में बनी 1 केक उसने पिंकी के सामने रखी। आकाश ने यह केक रेस्टोरेंट में पहले से कॉल करके प्रीऑर्डर कर रखी थी ….पूरे रेस्टोरेंट में हैप्पी बर्थडे टू पिंकी का गाना बजने लगा । यह सब कुछ देख कर पिंकी की आंखें चमकने लगी । केक काटने के बाद पिंकी ने केक का पहला पीस आकाश के मुंह में रखा मगर इसके ठीक बाद पिंकी ने आकाश से पूछा …"इतनी बड़ी केक हम दोनों मिलकर तो फिनिश नहीं कर पाएंगे." पिंकी की बात सुनते ही आकाश ने अपनी जेब से फोन निकालकर केक का फोटो श्रेया को भेज दिया फोटो के नीचे आकाश ने मैसेज लिखा था हम दोनों । पिंकी का बर्थडे सेलिब्रेट करने रेस्टोरेंट आए हैं हम ….दोनों मिलकर यह केक पूरी नहीं कर पाएंगे…. क्या तुम हमें join करना चाहोगी ….जब श्रेया ने यह मैसेज पढ़ा तब श्रेया यह सोच में पड़ गई कि आखिर इतने इंपॉर्टेंट दिन भी नताशा उनके साथ नहीं थी इसका क्या मतलब हो सकता था…. क्या आकाश और नताशा के बीच सब कुछ ठीक नहीं है…. क्या आकाश श्रेया को अपनी जिंदगी में वापस लाना चाहता था ? ….इन सब ख्यालों को अपने दिल से निकालते हुए श्रेया ने रिप्लाई किया…" नहीं मैं नहीं आ सकती…" तभी कुछ ही सेकंड में आकाश के नंबर से श्रेया को एक वॉइस नोट आया।  श्रेया जिस मूड में थी वह आकाश की आवाज बिल्कुल नहीं सुनना चाहती थी । मगर कुछ सेकंड तक अपने आप को रोकने के बाद श्रेया ने उस वॉइस नोट का प्ले बटन दबा दिया। वॉइस नोट प्ले होते ही नन्हीं सी पिंकी की आवाज श्रेया के कानों पर पड़ी।  पिंकी अपनी पत्नी और मीठी आवाज में कह रही थी …."श्रेया टीचर द केक इज वेरी डिलीशियस…. नोट as डिलीशियस as यू मेड ….बट आई थिंग यू विल लाइक इट…"

Ep 321 - पल में बदलते रिश्ते नन्ही सी पिंकी ने अपने मन में हिम्मत इकट्ठा करके जैसे ही आकाश को कुछ कहने की कोशिश की .आकाश के फोन की स्पीकर से नताशा की आवाज पिंकी के कानों पर पड़ी.  नताशा बिल्कुल इनोसेंट आवाज में पिंकी को रिक्वेस्ट करने लगी …."मेरी बच्ची मैं तुम्हारी मम्मा बोल रही हूं…. आज तुम्हारा बर्थडे है हर साल तुम्हारा बर्थडे मैंने बड़े ही प्यार से सेलिब्रेट किया है ….आज पहली बार तुम अपनी मम्मा से दूर हो मगर मम्मा तुम्हें बहुत मिस कर रही है।  क्या तुम आज के दिन मम्मा से नहीं मिलोगी ?" नताशा की ऐसी आवाज सुनकर नन्हीसी पिंकी का दिल पिघल गया । पिंकी ने अपनी नजरें झुका ते हुए धीमी आवाज में फोन पर जवाब देते हुए कहा …."हां " पिंकी की हां सुनते ही नताशा ने अपनी आवाज ऊंची करते हुए आकाश से कहा …"देखा तुमने आकाश मेरी बच्ची भी मुझे मिस कर रही है .प्लीज आज के दिन मां बेटी को अलग मत करो…. तुमने जो कहा है मैंने सब कुछ माना है…. तुमने मुझसे कहा कि गुजरिया हाउस छोड़कर चली जाओ…. मैं चली गई…. तुमने मुझसे कहा कि मैं पिंकी से दूर रहूं …तो मैंने अपने दिल पर पत्थर रखकर पिंकी से मिलने की अपने मन की सारी इच्छाओं को दबा कर रखा ….एक मां के लिए अपनी छोटी सी बच्ची से दूर रहना कितना मुश्किल होता है यह तुम कभी नहीं समझ पाओगे मगर आज मेरी बच्ची का बर्थडे है ….प्लीज आज के दिन मुझे पिंकी से मिल लेने दो …." जब आकाश ने देखा कि पिंकी भी नताशा से मिलना चाहती थी। तब आकाश का दिल बैठ गया । आकाश नहीं चाहता था कि वह बर्थडे वाले दिन नन्ही सी बच्ची का दिल तोड़े इसलिए आकाश ने फोन पर नताशा से कहा …."ठीक है तुम पिंकी से मिल सकती हो." आकाश की यह बात सुनते ही नताशा की आवाज में तेजी आ गई । उसकी आवाज से वह इमोशंस हट गई जो अभी-अभी सुनाई दे रही थी । नताशा ने आकाश से कहा …."ठीक है… मैं अभी गुलेरिया हाउस आती हूं फिर हम तीनों मिलकर पिंकी का बर्थडे सेलिब्रेट करेंगे ….मैंने सुना है कि तुमने अपनी बहन को भी गुलेरिया हाउस बुला लिया है ….मैं उससे भी मिलना चाहती हूं। " इससे पहले कि नताशा आगे कोई और बात कहती ….आकाश ने नताशा से कहा…." नहीं गुलेरिया हाउस आने की कोई जरूरत नहीं है…. मैं पिंकी को लेकर तुम्हारे पास आ रहा हूं ." यह कहते हुए आकाश ने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया । आकाश बिल्कुल नहीं चाहता था कि नताशा का साया भी पिंकी पर पड़े । जिस दिन आकाश ने नताशा को घर से निकाला था आकाश ने तय कर लिया था कि वह आइंदा कभी भी नताशा को पिंकी से मिलने नहीं देगा । मगर आज पिंकी का बर्थडे था वह अपनी छोटी सी बच्ची का दिल दुखाना नहीं चाहता था । इसलिए आकाश ने कार को गुलेरिया हाउस पहुंचने से पहले ही मोड़ लिया। नताशा अपने पापा के घर मित्तल हाउस में रहती थी। मित्तल हाउस गुलेरिया हाउस से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर था। मित्तल हाउस गुलेरिया हाउस जितना बड़ा और शानदार नहीं था मगर आम मकानों के मुकाबले मित्तल हाउस काफी बड़ा था। जैसे ही आकाश की कार मित्तल हाउस पहुंची गेट पर खड़े सिक्योरिटी गार्ड ने सैल्यूट करके आकाश का स्वागत किया । आकाश कार से उतरकर नन्ही सी पिंकी को लेकर दरवाजे पर खड़ा हो गया। आकाश अभी भी एक गहरी सोच में था । उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे पिंकी और नताशा को मिलने देना चाहिए या नहीं।  मगर कुछ ही सेकंड में आकाश के डोर बेल बजाने से पहले ही नताशा ने घर का दरवाजा खोल दिया । आकाश और पिंकी को अपने सामने देखकर तुरंत नताशा अपने घुटनों के बल बैठ कर पिंकी को हग करने लगी। पिंकी ने अपने दोनों हाथ नीचे ही रखे थे। मगर नताशा ने पिंकी को कस के पकड़ लिया था । पिंकी आज यह देखकर सरप्राइस थी कि आज से पहले कभी भी नताशा ने पिंकी को इस तरह हग नहीं किया था। पिंकी यह भी सोच रही थी कि जब श्रेया टीचर ने पिंकी के सर पर प्यार से हाथ घुमाया था तब पिंकी के अंदर काफी इमोशंस जाग गए थे । मगर नताशा के हग करने पर भी पिंकी के अंदर वह इमोशंस नहीं जाग रहे थे । कितना फर्क था नताशा और श्रेया के स्पर्श में। यह बात 6 साल की पिंकी भी अच्छी तरह जानती थी। नताशा ने पिंकी का हाथ पकड़कर कहा …."अंदर आओ पिंकी ….नानी मां तुमसे मिलना चाहती है ।" नानी मां का नाम सुनते ही पिंकी के पांव जमीन में ही जम गए। पिंकी को अपनी नानी याने की संध्या मित्तल बिल्कुल पसंद नहीं थी। संध्या मित्तल हमेशा ही पिंकी को अकेले में यह कहा करती थी कि ….अगर पिंकी लड़का होती तो आज पिंकी के मां-बाप शादीशुदा होते और एक साथ खुशी-खुशी जिंदगी बिता रहे होते।  मगर क्योंकि पिंकी एक लड़की थी इसलिए वह ना ही अपनी मां को खुश रख पा रही थी और ना ही अपने पापा को ….

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दूसरे_के_पैर_श्रीकान्त_वर्मा.pdf24.32 MB

ठण्ड - श्रीकांत वर्मा.pdf22.01 MB

कहानी संग्रह

अंतराल_और_अन्य_कहानियां_कमलाकांत_त्रिपाठी.pdf15.11 MB

पाहीघर_कमलाकांत_त्रिपाठी.pdf41.10 MB

कड़ी_में_कोयला।_पांडे_बेचन_शर्मा_उग्र.pdf5.57 MB

फागुन_के_दिन_चार।_पांडे_बेचन_शर्मा_उग्र.pdf14.87 MB

जब_सारा_आलम_सोता_है।_पांडे_बेचन_शर्मा_उग्र.pdf1.58 MB

माधव_महाराज_महान।_पांडे_बेचन_शर्मा_उग्र.pdf1.98 MB

शराबी।_पांडे_बेचन_शर्मा_उग्र.pdf3.55 MB

सुबह होने तक कामतानाथ.pdf17.74 MB

सिकंदर_हार_गया_अमृतलाल_नागर.pdf18.16 MB

निमंत्रण_तस्लीमा_नसरीन.pdf30.40 MB

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Practice Makes Perfect (When in Rome #2) by Sarah Adams.pdf2.66 MB