en
Feedback
DR NARAYAN DUTT SHRIMALI

DR NARAYAN DUTT SHRIMALI

Open in Telegram
1 734
Subscribers
No data24 hours
+37 days
-730 days
Posts Archive
राम ! राम !! राम !!! राम !!!! संसार का वियोग नित्य है, परमात्मा का योग नित्य है । संसार नदी की तरह निरंतर बह रहा है और परमात्मा शीला की तरह निरंतर अचल हैं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या ५६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

।।श्रीहरि:।।💐 सब कुछ वासुदेव ही है। जो भी मनमें आ जाय, *तरह-तरहकी बातें मनमें आ जायँ तो उनको भगवत्स्वरूप समझकर 'भगवते नमः' कह दे।* 🌟 *सत्संग के अमृत-कण* पृष्ठ १४७ गीता प्रकाशन *परम श्रद्धेय स्वामीजी श्री रामसुखदास जी महाराज* नारायण! नारायण!नारायण! नारायण!

NMSV FEB 25.pdf33.01 MB

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *यह बड़े आश्चर्य की बात है कि परमात्मा की दी हुई चीज तो अच्छी लगती है, पर परमात्मा स्वयं अच्छे नहीं लगते ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या ५२* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

*🍁🍁 स्वामी श्रीशरणानन्दजी महाराज* प्राण-शक्ति का व्यय हो जाना और इच्छाओं का शेष रह जाना ही मृत्यु है! *जीवन में ही मृत्यु का अनुभव करने के लिए साधक को प्राणों के रहते हुए ही इच्छाओं का अन्त करना होगा!* इच्छाओं का अन्त होते ही देहाभिमान गल जाता है; फिर सभी अवस्थाओं से अतीत, जो सभी अवस्थाओं का प्रकाशक है, उस स्वयं प्रकाश नित्य-जीवन से अभिन्‍नता हो जाती है!  

jan 2025 full mag compress-1.pdf14.85 MB

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! कामना न रखने से वस्तु आपकी गज करेगी । *कामना, ममता, आसक्ति न रखने से नया प्रारब्ध बन जाता है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या ४५* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

NMSV DEC. 24 (1).pdf11.16 MB

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! " यह" कहलाने वाली चीज सेवा के लिए है- ऐसा मान लोगे तो उद्धार हो जाएगा । परंतु "यह" कहलाने वाली चीज परमात्म प्राप्ति में सहायक है - ऐसा मानोगे तो तत्व प्राप्ति में देरी हो जाएगी । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या ४०* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

IMG_4768

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *चेला बनने पर ही बात बताएं - यह सांप्रदायिक चीज हो सकती है । पर महात्माओं की यह रीति नहीं है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या ३७* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! भाव शब्द से भी अधिक व्यापक है । भाव त्रिलोकी तक पहुंचता है । इसलिए सबके हित का भाव रखें - यह बड़ा भारी पुण्य है । भावों को शुद्ध बनाए रखना बड़ी तपस्या है - (गीता १७/१६) । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या ३३* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

NMSV NOV. 24.pdf11.23 MB

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *हमारा फिर जन्म होगा - ऐसे अपने पुनर्जन्म को निमंत्रण मत देना ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या ३३* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॥ शरीर अपना नहीं दीखे तो कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग-तीनों सुगम हो जायँगे। *इतने वर्ष सत्संग करके भी शरीरको संसारका और अपनेको भगवान् का नहीं माना तो क्या किया !* परमश्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज' *नये रास्ते, नयी दिशाएँ'* पुस्तकसे 🙏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! भीतर में कोई आशा न रखना सत्संग है । आशा रखना असत् का संग है । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या ३२* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! संसार हमारे में गुण अधिक मानता है और अवगुण कम । अतः लोग दूसरे को जल्दी ज्ञानी मान लेते हैं । पर वास्तव में वह ज्ञानी है या अज्ञानी - इसका पता नहीं लगता । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २९* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! जैसे प्यास और जल, भूख और अन्न एक चीज है, ऐसे ही परमात्मा की भूख और परमात्मा एक चीज है । अन्न, जल सब जगह नहीं मिलते, पर परमात्मा सब जगह हैं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २७* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! परमात्मा मैं - पन से भी नजदीक हैं । मैं - पन आपसे दूर है । मैं - पन के साथ आप निरंतर नहीं रह सकते । सुषुप्ति में मैं- पन नहीं रहता । परंतु परमात्मा के साथ आप निरंतर रहते हैं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २८* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! सांसारिक सुख क्यों नहीं टिकता ? क्योंकि वह आपका है ही नहीं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏