uz
Feedback

Firibgarlarga uchmang! Telemetrio bunday kanallarni topadi va belgilaydi 👉 Belgini ko‘rmoqchi bo‘lsangiz, obuna bo‘ling 👈

DR NARAYAN DUTT SHRIMALI

DR NARAYAN DUTT SHRIMALI

Kanalga Telegram’da o‘tish
1 740
Obunachilar
Ma'lumot yo'q24 soatlar
+27 kun
-230 kun
Postlar arxiv
Document from Chandan

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *जो सच्चे हृदय से परमात्मा में लग जाता है, उसके द्वारा दुनिया का भी बड़ा हित होता है और अपना भी ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! शरीर और शरीरी को अलग-अलग जानें तो बहुत लाभ होगा। हमारे साथ शरीर आदि कुछ भी नहीं है - इस प्रकार अपने अकेलेपन का अनुभव करें। भजन स्वयं से होता है, शरीर से नहीं l *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! सेवा करने में पहला नंबर घर वालों का है । परंतु आज घर वालों की सेवा न करके बाहर जाकर दूसरों की सेवा करते हैं , क्योंकि बाहर मान आदर मिलता है । यह वास्तव में सेवा नहीं है । ऐसा करने वाले "स्वयं सेवक" हैं अर्थात् अपनी ही सेवा करने वाले हैं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *दूसरे को भगवान् में लगाने के समान कोई पुण्य नहीं है। दूसरे को भोजन दोगे तो उसे पुनः भूख लग जाएगी, पर भगवान् में लगा दोगे तो अनंत जन्मों की भूख मिट जाएगी ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! गया समय फिर मिलेगा नहीं, पर जो समय हाथ में है, उसे अच्छे - से - अच्छे काम में लगाओ । जब तक थोड़ी भी रस्सी हाथ में है, कुएं से जल निकाल सकते हैं, पर रस्सी हाथ से निकल गई तो ? *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४५* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *परमात्मा की प्राप्ति केवल लगन से होती है, उसमें क्रिया और प्रारब्ध (भाग्य) की जरूरत नहीं है । कारण यह है कि परमात्मा नित्यप्राप्त है । नित्यप्राप्त की प्राप्ति में उद्योग काम नहीं करता ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४५* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! आजकल प्राय: सीखी हुई बात मानते हैं, अनुभव की तरफ ख्याल नहीं करते । अंत:करण की शुद्धि को मैं बहुत आवश्यक मानता हूं । परंतु तत्वज्ञान क्या करण के द्वारा होता है ? यह मेरा प्रश्न है । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४५* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *भोजन करते समय नींद नहीं आती, पर भजन करते समय नींद आती है तो आपने भजन को आवश्यक नहीं समझा । यदि भजन में रुचि तेज हो तो अन्य कारणों के होते हुए भी नींद नहीं आती ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४४* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *भगवान् का होकर नाम लेने का जो माहात्म्य है, उतना केवल नाम लेने का नहीं । भगवान् का होकर नाम लेने का विशेष माहात्म्य है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४४* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

✨शुभ दीपावली 🪔✨ आपका जीवन खुशियों, सफलता और समृद्धि से जगमगाता रहे!

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *अनंत ब्रह्मांडो में अनंत वस्तुएं हैं, पर कोई भी वस्तु हमारी और हमारे लिए नहीं है । वे ब्रह्मांड जिनके रोम रोम में स्थित हैं, वे परमात्मा ही हमारे हैं ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४१* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *गुरु की प्रसन्नता से जो विद्या आती है, वह अपने उद्योग से नहीं आती । गुरु की प्रसन्नता से विद्या फलीभूत होती है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १३९* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *अगर मरने से डर लगता है तो हमने मनुष्य जन्म में करने योग्य काम नहीं किया है । यदि मनुष्य जन्म में करने योग्य काम कर लें तो मृत्यु से डर नहीं लगेगा ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १३९* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

Document from Chandan

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *संसार की प्राप्ति में तो इच्छा, क्रिया और प्रारब्ध - तीनों होने चाहिए, पर भगवान् की प्राप्ति में केवल इच्छा होनी चाहिए* । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १२८* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *जिसका मन कहीं लगता नहीं, मन में अशांति रहती है, वे ही "काम" के वशीभूत होते हैं । भजन करने वाले, भगवान् में लगे हुए, वैराग्यवान पुरुष "काम" में नहीं लगते ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १२७* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *धर्म पालन में कष्ट सहना पड़ता है । सुख - आराम चाहें तो धर्म का पालन कैसे होगा ? भूख सहन नहीं कर सकें तो एकादशी व्रत कैसे होगा ? मनुष्य का उद्देश्य अपना कल्याण करने का है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १२६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! परमात्मा अद्वितीय हैं, अतः उनकी अभिलाषा भी अद्वितीय होनी चाहिए । इसका उपाय है - हरदम नाम जप करो और बार-बार प्रार्थना करो कि हे नाथ मैं आपको भूलूं नहीं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १२५* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! रामायण में भक्त और भगवान् - दोनों मिल गए हैं । यह भक्त की वाणी है और भगवान् की लीला ! *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १२५* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏