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ये है आमिर सरफराज। 2013 में आईएसआई के इशारे पर पाकिस्तान में कैद भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी थी।
पाकिस्तान के लाहौर में अंडरवर्ल्ड डॉन आमिर सरफराज को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
1 या 2 नहीं 21 गोली चली। उसने जो किया उसका परिणाम उसे भुगतना पड़ा।
13 साल के इंतजार के बाद सरबजीत की बहन को इंसाफ मिला।
#अज्ञात हमलावरों ने पाकिस्तान में तहलका मचा दिया है... वास्तव में, आपको एक विदेशी राष्ट्र में हत्याओं के लिए गुप्त सेवा की आवश्यकता नहीं है।
पाकिस्तानियों का एक महत्वपूर्ण वर्ग इतना गरीब है कि पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। आपको बस इतना करना है कि काम करने के लिए सही व्यक्ति की पहचान करनी है....
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१०. धर्म मनुष्य को ईश्वर से सीधा सम्बन्ध जोड़कर मनुष्य को स्वतंत्र और आत्म स्वालंबी बनाता हैं क्यूंकि वह ईश्वर और मनुष्य के बीच में किसी भी मध्यस्थ या एजेंट की आवश्यकता नहीं बताता। परन्तु मज़हब मनुष्य को परतंत्र और दूसरों पर आश्रित बनाता हैं क्यूंकि वह मज़हब के प्रवर्तक की सिफारिश के बिना मुक्ति का मिलना नहीं मानता।
११. धर्म दूसरों के हितों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक देना सिखाता है जबकि मज़हब अपने हित के लिए अन्य मनुष्यों और पशुयों की प्राण हरने के लिए हिंसा रुपी क़ुरबानी का सन्देश देता हैं।
१२. धर्म मनुष्य को सभी प्राणी मात्र से प्रेम करना सिखाता है जबकि मज़हब मनुष्य को प्राणियों का माँसाहार और दूसरे मज़हब वालों से द्वेष सिखाता हैं।
१३. धर्म मनुष्य जाति को मनुष्यत्व के नाते से एक प्रकार के सार्वजानिक आचारों और विचारों द्वारा एक केंद्र पर केन्द्रित करके भेदभाव और विरोध को मिटाता हैं तथा एकता का पाठ पढ़ाता हैं। परन्तु मज़हब अपने भिन्न भिन्न मंतव्यों और कर्तव्यों के कारण अपने पृथक पृथक जत्थे बनाकर भेदभाव और विरोध को बढ़ाते और एकता को मिटाते हैं।
१४. धर्म एक मात्र ईश्वर की पूजा बतलाता है जबकि मज़हब ईश्वर से भिन्न मत प्रवर्तक/गुरु/मनुष्य आदि की पूजा बतलाकर अन्धविश्वास फैलाते हैं।
धर्म और मज़हब के अंतर को ठीक प्रकार से समझ लेने पर मनुष्य अपने चिंतन मनन से आसानी से यह स्वीकार करके के श्रेष्ठ कल्याणकारी कार्यों को करने में पुरुषार्थ करना धर्म कहलाता हैं इसलिए उसके पालन में सभी का कल्याण हैं।
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धर्म और मजहब में अंतर क्या है?
#डॉ_विवेक_आर्य
एक मित्र आज एक सुन्दर प्रश्न पूछा की धर्म और सम्प्रदाय (मज़हब) में क्या अंतर हैं। यह प्रश्न मुझे अत्यंत प्रिय हैं क्यूंकि आज संसार में जितनी भी अशांति, हत्या,अत्याचार, आतंकवाद, अन्धविश्वास, दरिद्रता, अत्याचार आदि जो भी कुछ हो रहा हैं उसका मूल कारण धर्म के नाम पर सम्प्रदाय, मज़हब या मत-मतान्तर को पोषित करना हैं। धर्म और मज़हब में भेद को समझने से हम अपने इस धर्म की आवश्यकता को समझ सकते हैं।
धर्म और मजहब में अंतर क्या है?
प्राय:अपने आपको प्रगतिशील कहने वाले लोग धर्म और मज़हब को एक ही समझते है।
मज़हब अथवा मत-मतान्तर अथवा पंथ के अनेक अर्थ है जैसे वह रास्ता जी स्वर्ग और ईश्वर प्राप्ति का है और जोकि मज़हब के प्रवर्तक ने बताया है। अनेक जगहों पर ईमान अर्थात विश्वास के अर्थों में भी आता है।
१. धर्म और मज़हब समान अर्थ नहीं है और न ही धर्म ईमान या विश्वास का प्राय: है।
२. धर्म क्रियात्मक वस्तु है मज़हब विश्वासात्मक वस्तु है।
३. धर्म मनुष्य के स्वाभाव के अनुकूल अथवा मानवी प्रकृति का होने के कारण स्वाभाविक है और उसका आधार ईश्वरीय अथवा सृष्टि नियम है। परन्तु मज़हब मनुष्य कृत होने से अप्राकृतिक अथवा अस्वाभाविक हैं। मज़हबों का अनेक व भिन्न भिन्न होना तथा परस्पर विरोधी होना उनके मनुष्य कृत अथवा बनावती होने का प्रमाण हैं।
४. धर्म के जो लक्षण मनु महाराज ने बतलाये हैं वह सभी मानव जाति के लिए एक समान है और कोई भी सभ्य मनुष्य उसका विरोधी नहीं हो सकता। मज़हब अनेक हैं और केवल उसी मज़हब को मानने वालों द्वारा ही स्वीकार होते हैं। इसलिए वह सार्वजानिक और सार्वभौमिक नहीं हैं। कुछ बातें सभी मजहबों में धर्म के अंश के रूप में हैं इसलिए उन मजहबों का कुछ मान बना हुआ हैं।
५. धर्म सदाचार रूप हैं अत: धर्मात्मा होने के लिये सदाचारी होना अनिवार्य हैं। परन्तु मज़हबी अथवा पंथी होने के लिए सदाचारी होना अनिवार्य नहीं हैं। अर्थात जिस तरह तरह धर्म के साथ सदाचार का नित्य सम्बन्ध हैं उस तरह मजहब के साथ सदाचार का कोई सम्बन्ध नहीं हैं। क्यूंकि किसी भी मज़हब का अनुनायी न होने पर भी कोई भी व्यक्ति धर्मात्मा (सदाचारी) बन सकता हैं।
परन्तु आचार सम्पन्न होने पर भी कोई भी मनुष्य उस वक्त तक मज़हबी अथवा पन्थाई नहीं बन सकता जब तक उस मज़हब के मंतव्यों पर ईमान अथवा विश्वास नहीं लाता। जैसे की कोई कितना ही सच्चा ईश्वर उपासक और उच्च कोटि का सदाचारी क्यूँ न हो वह जब तक हज़रात ईसा और बाइबिल अथवा हजरत मोहम्मद और कुरान शरीफ पर ईमान नहीं लाता तब तक ईसाई अथवा मुस्लमान नहीं बन सकता।
६. धर्म ही मनुष्य को मनुष्य बनाता हैं अथवा धर्म अर्थात धार्मिक गुणों और कर्मों के धारण करने से ही मनुष्य मनुष्यत्व को प्राप्त करके मनुष्य कहलाने का अधिकारी बनता हैं। दूसरे शब्दों में धर्म और मनुष्यत्व पर्याय हैं। क्यूंकि धर्म को धारण करना ही मनुष्यत्व हैं। कहा भी गया हैं-
खाना,पीना,सोना,संतान उत्पन्न करना जैसे कर्म मनुष्यों और पशुयों के एक समान हैं। केवल धर्म ही मनुष्यों में विशेष हैं जोकि मनुष्य को मनुष्य बनाता हैं। धर्म से हीन मनुष्य पशु के समान हैं। परन्तु मज़हब मनुष्य को केवल पन्थाई या मज़हबी और अन्धविश्वासी बनाता हैं। दूसरे शब्दों में मज़हब अथवा पंथ पर ईमान लेन से मनुष्य उस मज़हब का अनुनायी अथवा ईसाई अथवा मुस्लमान बनता हैं नाकि सदाचारी या धर्मात्मा बनता हैं।
७. धर्म मनुष्य को ईश्वर से सीधा सम्बन्ध जोड़ता हैं और मोक्ष प्राप्ति निमित धर्मात्मा अथवा सदाचारी बनना अनिवार्य बतलाता हैं परन्तु मज़हब मुक्ति के लिए व्यक्ति को पन्थाई अथवा मज़हबी बनना अनिवार्य बतलाता हैं। और मुक्ति के लिए सदाचार से ज्यादा आवश्यक उस मज़हब की मान्यताओं का पालन बतलाता हैं।
जैसे अल्लाह और मुहम्मद साहिब को उनके अंतिम पैगम्बर मानने वाले जन्नत जायेगे चाहे वे कितने भी व्यभिचारी अथवा पापी हो जबकि गैर मुसलमान चाहे कितना भी धर्मात्मा अथवा सदाचारी क्यूँ न हो वह दोज़ख अर्थात नर्क की आग में अवश्य जलेगा क्यूंकि वह कुरान के ईश्वर अल्लाह और रसूल पर अपना विश्वासनहीं लाया हैं।
८. धर्म में बाहर के चिन्हों का कोई स्थान नहीं हैं क्यूंकि धर्म लिंगात्मक नहीं हैं -न लिंगम धर्मकारणं
अर्थात लिंग (बाहरी चिन्ह) धर्म का कारण नहीं हैं।
परन्तु मज़हब के लिए बाहरी चिन्हों का रखना अनिवार्य हैं जैसे एक मुस्लमान के लिए जालीदार टोपी और दाड़ी रखना अनिवार्य हैं।
९. धर्म मनुष्य को पुरुषार्थी बनाता हैं क्यूंकि वह ज्ञानपूर्वक सत्य आचरण से ही अभ्युदय और मोक्ष प्राप्ति की शिक्षा देता हैं परन्तु मज़हब मनुष्य को आलस्य का पाठ सिखाता हैं क्यूंकि मज़हब के मंतव्यों मात्र को मानने भर से ही मुक्ति का होना उसमें सिखाया जाता हैं।
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जाट | राजपूत | ब्राह्मण बनिया | अगर सरकारी नौकरी में नहीं हैं या बिजनेस बहुत बड़ा नहीं है तो इनकी शादियों के लाले पड़ रहे हैं |
हमारे इलाके में दर्जनों बनिया समाज के लड़के हैं जिनकी संपत्ति करोड़ों में है पर हालात और परिस्थिति ऐसी हो गई हैं कि शादी के लिए लड़की नहीं मिल रही हैं |
जबकि मजहबी अगर रिक्शा भी चल रहा है तो आज तक हमको ऐसा मजहबी नहीं दिखा जिसकी शादी या पांच सात बच्चे ना हों |
असल में इन समाजों में नौकरी वाला लड़का तलाशने वाला भयंकर माइंड सेट अब पूरे धर्म के सिस्टम को करप्ट कर दे रहा है | और खुद इन समाजों के परिवारों के वंशों को समाप्त कर रहा है |
और यही माइंड सेट अब इन समाजों के लड़कों और लड़कियों के दिमाग में सेट हो गया है - जिसके लड़के के दिमाग में गांव से बाहर जा कर नौकरी लगाने की ललक रहती है |
और लड़की के दिमाग में अभी से यह प्वाइंट घुसा हुआ है कि मेरे लिए तो मेरे घर वाले सरकारी नौकर देखेंगे जिसके बाद मेरी जिंदगी सही ही चलनी है |
सबसे बड़ा प्वाइंट यह है कि लड़की चाहे गरीब घर की ही क्यों ना हो पर उसके दिमाग में अपना शादीशुदा जीवन बिना संघर्षों और समस्याओं वाला ही चलता है |
अगर इन समाजों ने यह माइंड सेट नहीं बदला तो परिणाम यह होगा कि धीरे धीरे परिवार समाप्त हो जाएंगे और बच्चे कुचे परिवार ऐसे होंगे जैसे चिड़िया घर के शेर और भालू |
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चित्र में जो दिख रहा है,
ये बलूचिस्तान के लोरलाई
इलाके की एक दुकान है,
जो पिछले 73 साल से बंद है।
ये दुकान एक बलूची की थी जिसे
एक हिन्दू किराये पर चलाता था।
73 साल पहले विभाजन के समय
उसे रातों-रात वहां से भागना पड़ा,
जाते-जाते उसने बलूच मालिक को
दुकान की चाबी देते हुए कहा कि
आप ये दुकान किसी को मत देना
मैं जल्द लौटूंगा।
वो तो लौटा नहीं,लेकिन बलूची ने
मरने से पहले अपने बच्चों से वायदा
लिया कि उस हिन्दू का इंतजार करना
और तब तक इस दुकान का ताला मत
खोलना।।
बलूची के बच्चे भी वचन के पक्के निकले,
कभी दुकान की चौखट पर कदम नहीं रखा
और आज तक ये दुकान अपने हिन्दू मालिक
का इंतजार कर रही है।
4 साल की छोटी सी बच्ची ब्रम्स बलोच
को पाकिस्तानी फौजियों द्वारा घायल कर
देने के बाद से आज जिस तरह का आंदोलन
बलूचिस्तान में खड़ा हुआ है और बलूचियों के
रोष के आगे पाकिस्तानी फौजियों को टैंक में
बैठकर भागने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं उससे
उम्मीद जगती है कि इस दुकान का इंतजार भी
ख़त्म होगा।
The HINDU Nationalist Organization world wide★●
जयश्रीराम💐
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मुसलमानों के घरों में बे जुबान जानवर भी प्रेम की उम्मीद नहीं रखता मुझे समझ नहीं आता इतनी पढ़ी लिखी हिन्दू लड़कियों क्यू मुसलमानों के जूठा प्रेम के चक्कर पड़ती है
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क्या दफ़न और दाह-संस्कार पर जमीन, संसाधन और सार्वजनिक नीति के स्तर पर खुली बहस होनी चाहिए?
दिल्ली में कब्रिस्तानों और श्मशान घाटों को लेकर जो आंकड़े और तर्क सामने रखे जाते हैं, क्या वे भविष्य की शहरी योजना और भूमि प्रबंधन से जुड़े बड़े सवाल खड़े करते हैं?
आपकी राय क्या है? अपनी बात कमेंट में लिखिए।
#Delhi #BurialVsCremation #UrbanPlanning #LandUse #PublicPolicy
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"ट्रांसजेंडर जेहाद" अब जेहादी हिजड़े भी गजवा ए हिंद
"हम ग़ज़वा-ए-हिंद करेंगे..!"हिंदू ट्रांसजेंडर शुभांगी शिंदे पर धर्म बदलकर मुस्लिम बनीं ट्रांसजेंडर सलमा, सोनाली, रागिनी, स्वाति और उनके साथियों ने मांस काटने वाले ब्लेड (चापर) से हमला किया। हमले के दौरान वे चिल्ला रही थीं: "700 सालों से यह हमारा निज़ामी इलाका रहा है। सलमा की मदद से हम हर हिंदू ट्रांसजेंडर का धर्म बदलवाएंगे और ग़ज़वा-ए-हिंद लाएंगे।"
यदि हिंदू आज भी सोचते है कि सब एक जैसे नहीं होते तो वो महान मूर्ख है, उनके चाहे आदमी हों या औरत, लड़के हो लड़की, जवाब हों या बूढ़े, अनपढ़ हों या पढ़े लिखे , नेता हों या अभिनेता यहां तक के हिंजड़े भी है तो उनका भी काम जेहाद ही है.. सबका सपना एक ही है... "गजवा ए हिंद" । अब भी समय है हिंदुओं जाग जाओ हिंदुओं और इस जेहादी मानसिकता का पूरी तरह बहिष्कार करो अन्यथा तुम्हारा अस्तित्व अधिक समय तक नहीं बचेगा..
साभार
https://x.com/i/status/2065338550984622227
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नागपुर में एयरफोर्स अफसर की पत्नी का वीडियो आंखें खोलने वाला है। अयाज और अमीन शेख ने इस्लामी आयतें पढ़कर फूंकते हुए बलात्कार किया। हिंदू महिलाएं क्यों इस जाल में आसानी से फंस जाती हैं?
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Wife of an Armed Force was drugged, gang-raped, filmed by Ayyaz Taj Madare and Ameen Shaikh on the pretext of land deal in Nagpur.
Blackmailed, extorted lakhs, forced to drink Halal liquid, chant Islamic verses, converted by Hazrat Maulana in Chhindwara, MP, "nikah" to Ayyaz and forced to eat Gau-mans!
Two arrested, Maulana absconding. Husband filed FIR.
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भाजपा को वंदे मातरम क्यों पसंद है और विरोधी पार्टियां इससे नफ़रत क्यों करती हैं ?
वंदे मातरम एक अनोखा और दमदार गाना है जो पुराने भारत और आज के भारत के बीच एक ज़रूरी कड़ी का काम करता है। यह पुराने भारत की समृद्ध सभ्यता की विरासत को आज के संवैधानिक गणराज्य से जोड़ने वाले पुल का काम करता है।
BJP एक राइट-विंग कंज़र्वेटिव पार्टी है जो हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा से बनी है। यह भारत को एक पुरानी सभ्यता के तौर पर देखती है जो लगातार ऐतिहासिक सफ़र के ज़रिए स्वाभाविक रूप से एक मॉडर्न संवैधानिक देश में बदल गई है, इसलिए वे चाहते हैं कि यह पुल बना रहे।
इसके उलट, कांग्रेस और ज़्यादातर दूसरी विरोधी पार्टियां लेफ्ट-विंग संगठन हैं। उनकी विचारधारा मॉडर्न पश्चिमी लिबरल सोच से बहुत ज़्यादा ली गई है, जिसकी जड़ें कार्ल मार्क्स और ऐसे ही विचारकों से जुड़ी हैं। उनके लिए, कोई भी पुरानी चीज़ ज़ुल्म का पर्याय है। उनका मानना है कि भारत का जन्म 1947 में हुआ था और इसलिए, वे आज के भारत को उसकी पुरानी सभ्यता की जड़ों से जोड़ने वाली हर कड़ी को तोड़ना चाहते हैं।
विचारधारा में यह बुनियादी अंतर ही वंदे मातरम पर उनकी अलग-अलग राय का मुख्य कारण है।
वाया तरुण
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क्या संविधान सभा में ऐसे सदस्य भी थे जो पहले मुस्लिम लीग से जुड़े थे? क्या विभाजन के बाद भी कुछ नेताओं ने भारत में रहकर संविधान निर्माण में भूमिका निभाई?
#IndianHistory #Constitution #ConstituentAssembly #PartitionOfIndia #HistoryFacts
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संगीत या धर्मांतरण का जरिया?" — पाकिस्तानी गायक ने खुद ये बोल है , कि मैने कई धर्मांतरण कराए है।
इनका काम बस जिहाद करना है।
ये जहाँ भी रहे इनका काम बस इतना है , कि कैसे हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराए ज्यादा से ज्यादा और अपनी तादात बढ़ाए।
याद रखिये --
धर्म बचाना है तो पहले संस्कृति बचाइए,
संस्कृति बचानी है तो जागरूकता बढ़ाइए।
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