360 Degrees
News Views and Analysis Our Youtube Channel - https://youtube.com/@360degreesNVA Channel Owner FB profile - https://www.facebook.com/manishsharma4u?mibextid=ZbWKwL Twitter - https://twitter.com/360Degreesnva?t=dgTt_r-GthjyH_4-U5lEuA&s=09
إظهار المزيد📈 نظرة تحليلية على قناة تيليجرام 360 Degrees
تُعد قناة 360 Degrees (@threesixtydegrees) في القطاع اللغوي الهندية لاعباً نشطاً. يضم المجتمع حالياً 16 673 مشتركاً، محتلاً المرتبة 12 997 في فئة الأخبار والوسائط والمرتبة 24 724 في منطقة الهند.
📊 مؤشرات الجمهور والحراك
منذ تأسيسه في невідомо، حقق المشروع نمواً سريعاً وجمع 16 673 مشتركاً.
بحسب آخر البيانات بتاريخ 26 أغسطس, 2026، تحافظ القناة على نشاط مستقر. خلال آخر 30 يوماً تغيّر عدد الأعضاء بمقدار -37، وفي آخر 24 ساعة بمقدار 6، مع بقاء الوصول العام مرتفعاً.
- حالة التحقق: غير موثّقة
- معدل التفاعل (ER): يبلغ متوسط تفاعل الجمهور 15.56%. وخلال أول 24 ساعة من النشر يحصد المحتوى عادةً 12.51% من ردود الفعل نسبةً إلى إجمالي المشتركين.
- وصول المنشورات: يحصل كل منشور على متوسط 2 594 مشاهدة. وخلال اليوم الأول يجمع عادةً 2 085 مشاهدة.
- التفاعلات والاستجابة: يتفاعل الجمهور بانتظام؛ متوسط التفاعلات لكل منشور يبلغ 151.
- الاهتمامات الموضوعية: يركز المحتوى على مواضيع رئيسية مثل भारत, चुनाव, बात, बंगाल, लोग.
📝 الوصف وسياسة المحتوى
يصف المؤلف القناة بأنها مساحة للتعبير عن الآراء الذاتية:
“News Views and Analysis
Our Youtube Channel - https://youtube.com/@360degreesNVA
Channel Owner FB profile - https://www.facebook.com/manishsharma4u?mibextid=ZbWKwL
Twitter - https://twitter.com/360Degreesnva?t=dgTt_r-GthjyH_4-U5lEuA&s=09”
بفضل وتيرة التحديث المرتفعة (أحدث البيانات بتاريخ 27 أغسطس, 2026) تحافظ القناة على حداثتها ومستوى وصول مرتفع. وتُظهر التحليلات تفاعلاً نشطاً من الجمهور، ما يجعلها نقطة تأثير مهمة ضمن فئة الأخبار والوسائط.
جاري تحميل البيانات...
| التاريخ | نمو المشتركين | الإشارات | القنوات | |
| 27 أغسطس | +10 | |||
| 26 أغسطس | +11 | |||
| 25 أغسطس | +10 | |||
| 24 أغسطس | 0 | |||
| 23 أغسطس | +4 | |||
| 22 أغسطس | +1 | |||
| 21 أغسطس | +5 | |||
| 20 أغسطس | +8 | |||
| 19 أغسطس | +11 | |||
| 18 أغسطس | +15 | |||
| 17 أغسطس | +8 | |||
| 16 أغسطس | +3 | |||
| 15 أغسطس | +6 | |||
| 14 أغسطس | +2 | |||
| 13 أغسطس | +5 | |||
| 12 أغسطس | 0 | |||
| 11 أغسطس | +4 | |||
| 10 أغسطس | +7 | |||
| 09 أغسطس | +1 | |||
| 08 أغسطس | +3 | |||
| 07 أغسطس | +15 | |||
| 06 أغسطس | +7 | |||
| 05 أغسطس | 0 | |||
| 04 أغسطس | +3 | |||
| 03 أغسطس | 0 | |||
| 02 أغسطس | +7 | |||
| 01 أغسطس | +6 |
| 2 | यह Post अजीत भारती Fanboys के लिए.
यहाँ इन स्वामी जी ने ऐसा क्या कह दिया.. जो अजीत भारती उन्हें अपशब्द कह रहा है?
यह वही अजीत भारती है ना.. जिसने गायत्री मंत्र के 'प्रचोदयात' शब्द की एक असभ्य शब्द से तुलना की थी.
आप भूल जाएंगे... हम नहीं भूलेंगे 🙏🙏 | 938 |
| 3 | JP Nadda —
Following the movement that took place at Jantar Mantar on 21 August, cordial discussions were held, as per the pre-determined schedule, with Shri Harsh Dubey, Shri Ran Bahadur Singh Chauhan, and Shri Mrityunjay Pathak, members of the team. In this connection, we will meet again soon. | 1 102 |
| 4 | आजकल बहुत चतुराई से कुछ लोगों द्वारा ये अफवाह फैलाया जा रहा है कि मोदी द्वारा SC/ST ACT में 22 से बढ़ा कर टोटल 47 धारा कर दी गई...
जिससे साफ पता चलता है कि मोदी... सवर्ण विरोधी है.
लेकिन, जब आप उनसे पूछो कि भाई कौन सी नई धारा बढ़ा दी जरा उसकी भी जानकारी दो तो लोग आंय-बांय बोलने लगते हैं.
इसका कारण ये है कि वे लोग सोरोस के दल्लों का पोस्ट पढ़ कर आये होते हैं जिस कारण उन्हें डिटेल जानकारी नहीं होती है..!
पहली बात तो है कि मोदी ने SC/ST AC में कोई सजा की धारा नहीं बढ़ाई कि पहले जिसके लिए 5 साल की सजा थी अब उसको 12 साल कर दिया गया है..
बल्कि, मोदी सरकार ने इसमें अपराधों को अलग-अलग कर डिटेल में बता दिया है जिससे अपराधों की संख्या बढ़ गई है.
साथ ही इससे ये सुनिश्चित हुआ है कि कोई सिर्फ अपराध बोल कर किसी पर ये एक्ट न लगा दे बल्कि उसे निश्चित तौर पर बताना होगा कि क्या अपराध हुआ है.
उन 47 अपराधों की सूची इस प्रकार है..
1 जातिसूचक शब्दों से सार्वजनिक रूप से अपमानित करना
2. SC/ST व्यक्ति को सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार करना
3. जबरन सिर मुंडवाना या कालिख पोतना
चप्पल/जूते की माला पहनाना
4. मल-मूत्र खिलाना या अपमानजनक कृत्य करना
5. जमीन/खेती पर अवैध कब्जा करना
6. सिंचाई जल या वन अधिकारों से वंचित करना
7. सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश से रोकना
8. धार्मिक/सामाजिक जुलूस में भाग लेने से रोकना
9. मतदान करने या चुनाव लड़ने से रोकना
10. बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर करना
11. SC/ST महिला की लज्जा भंग करना
12. यौन शोषण/छेड़छाड़
13. सामूहिक दंड देना
14. घर जलाना या संपत्ति नष्ट करना
15. झूठे मुकदमे में फँसाना
16. SC/ST व्यक्ति को गाँव/घर छोड़ने को मजबूर करना
17. शिक्षा संस्थान में भेदभाव
18. अस्पताल/स्वास्थ्य सुविधा से वंचित करना
19. शव दफनाने/दाह संस्कार से रोकना
20. सार्वजनिक जलस्रोत से पानी लेने से रोकना
21. पेशे/रोजगार करने से रोकना
22. सामाजिक कार्यक्रम में प्रवेश से रोकना
23. पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज करने से इनकार
24. जानबूझकर झूठी गवाही देकर फँसाना
25. जमीन के दस्तावेज में धोखाधड़ी
26. SC/ST व्यक्ति की आर्थिक गतिविधि बाधित करना
27. घर तोड़ना/कब्जा करना
28. भीड़ बनाकर हमला करना
29. सामाजिक मीडिया या लिखित रूप में जातिगत अपमान
30. SC/ST महिला का यौन उत्पीड़न (विशेष प्रावधान)
31. पंचायत/स्थानीय निकाय में अधिकार से वंचित करना
32. मजदूरी देने से इनकार
33. धमकी देकर समझौता करने को मजबूर करना
34. सामूहिक रूप से सामाजिक बहिष्कार लागू करना
35. दलित/आदिवासी बस्ती में आगजनी
परंपरागत आजीविका छीनना
36. SC/ST व्यक्ति को अमानवीय दंड देना
37. आर्थिक लेन-देन में जाति आधार पर भेदभाव
38. वन उपज एकत्र करने से रोकना
39. विकास योजनाओं का लाभ रोकना
40. आवास योजना से वंचित करना
41. स्कूल में अलग बैठाना
42. सार्वजनिक वितरण प्रणाली से वंचित करना
43. श्मशान/कब्रिस्तान उपयोग से रोकना
44. SC/ST व्यक्ति को बेइज्जत करने हेतु साजिश करना
45. अपराध करने का प्रयास या उकसाना
और, दो याद नहीं आ रहा है.
तो, आप जाति और धर्म का भेद भूल कर बस एक सेकेंड के लिए सोचकर बताओ कि ऊपर उल्लेखित अपराध क्या किसी भी सभ्य समाज में जस्टिफ़ाईड हैं ?
और, अगर मोदी को छोड़कर आपको ही प्रधानमंत्री बना दिया जाए तो आप इसमें कौन से अपराध को इस सूची से बाहर निकालना चाहेंगे और क्यों ?
यार, कुछ तो लॉजिकल बात करो ताकि लोग आपका भी समर्थन कर सकें.
जय महाकाल...!!! | 1 617 |
| 5 | हर फ़ौजी इस सम्मान का अधिकारी है.... और जनता को जहाँ मौका लगे... फौजियों को ऐसे ही सम्मानित करना चाहिए 🙏🙏 | 1 619 |
| 6 | कितना ज़हर है इन लोगों में..... और इस ज़हर को पैदा करने और फैलाने वाली कांग्रेस ही है. | 1 634 |
| 7 | चीन एक तरफ दावा कर रहा है कि वह अपने प्रत्येक वाटर रिजर्वायर और मौसम संबंधी परिवर्तन का रियल टाइम मॉनिटरिंग करता है और चीन परस्त पत्रकार इसे जोरशोर से प्रसारित भी कर रहे हैं पर इस बात पर कोई जवाब नहीं है कि ग्लेसियर में टूटन के बाद भी बचाव के लिए ठीक ठाक समय था बावजूद इसके वह नेपाल समेत अपने कब्ज़े में रखे तिब्बत के लोगों को अलर्ट क्यों नहीं कर पाए?
आज के समय में TV, मोबाइल, फोन, रेडियो सब तरह की सुविधा है मैसेजिंग के लिए, पर किसी के पास कोई संदेश नहीं पहुचा। | 1 709 |
| 8 | लो आ गया PDA का फुल फॉर्म🤣
P: पहली बार 2017 हारे
D:- दूसरी बार 2022 हारे
A:- अबकी बार 2027 भी हारेंगे😄😄😄😄 | 1 805 |
| 9 | क्या इस समय इस्लामाबाद के विदेश मंत्रालय का वेलनेस चेक कर लेना चाहिए? क्योंकि लगता है कि पाकिस्तान का पिछले 70 सालों से चल रहा पसंदीदा कूटनीतिक तमाशा अब आधिकारिक तौर पर बंद होने वाला है।
पूरे 70 सालों से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय रणनीति लगभग एक जैसी रही है। महंगे टिश्यू पेपर खरीदो, संयुक्त राष्ट्र में जाकर रोओ और पश्चिमी देशों से बार-बार गुहार लगाओ कि जम्मू-कश्मीर को "विवादित इलाका" कहा जाए।
लेकिन अब अमेरिका के भारत में नवनियुक्त राजदूत सर्जियो गोर सीधे श्रीनगर पहुंच गए। उन्होंने वहां की चहल-पहल वाली सड़कों को देखा, कैमरों के सामने बात की और साफ शब्दों में कह दिया, "जम्मू-कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।" न कोई हिचकिचाहट, न कोई घुमा-फिराकर बात।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। राजदूत ने सिर्फ भारत की स्थिति को स्वीकार नहीं किया, बल्कि पाकिस्तान के सालों पुराने डर फैलाने वाले नैरेटिव को भी बड़ा झटका दे दिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में हुए बड़े सुधार की तारीफ की और कहा कि अमेरिका वहां जाने वाले अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी को कम सख्त करने पर विचार कर रहा है।
अब सोचिए, यह कितना बड़ा बदलाव है। सालों से पश्चिमी देशों के ट्रैवल मैप्स पर कश्मीर को ऐसे दिखाया जाता था जैसे वहां जाना मतलब किसी सक्रिय ज्वालामुखी के पास छुट्टियां मनाने जाना हो। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि अमेरिका अपने नागरिकों के लिए कश्मीर घूमने का रास्ता आसान करने की सोच रहा है। यानी अमेरिकी पर्यटक आएं, डल झील में शिकारा चलाएं, केसर खरीदें, इंस्टाग्राम पर फोटो डालें और कश्मीरी वाज़वान का मजा लें।
और कहीं न कहीं पाकिस्तान में वह शख्स जरूर दीवार की तरफ देख रहा होगा, जिसने पिछले पांच साल सिर्फ गुस्से से भरे प्रेस रिलीज लिखने में निकाल दिए कि कश्मीर कितना खतरनाक है। अब बेचारा सोच रहा होगा कि उसकी नौकरी ही चली गई।
लेकिन एक बात बिल्कुल साफ है। भारत को यह बताने के लिए अमेरिका या किसी दूसरे देश की मंजूरी की जरूरत नहीं है कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है। यह कोई विदेशी देश की मेहरबानी से तय होने वाली बात नहीं है।
और वैसे भी अमेरिका की बातों पर आंख बंद करके भरोसा करना थोड़ा मुश्किल है। विदेश नीति में अमेरिका को अपना रुख बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। आज आपकी तारीफ करेगा और अगर कल हवा का रुख बदल गया तो सुबह तक पूरा बयान ही बदल सकता है।
तो सवाल है कि अमेरिका ने अभी पाकिस्तान के पुराने कश्मीर वाले प्लेबुक को पेपर श्रेडर में क्यों डाल दिया? जवाब बहुत सीधा है, पैसा और अर्थव्यवस्था।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सिर्फ खूबसूरत नजारे नहीं देखे जाते, जीडीपी भी देखी जाती है।
आज भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक बड़ी आर्थिक ताकत है, तेजी से बढ़ता हुआ मैन्युफैक्चरिंग हब है और एशिया में अमेरिका के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। वहीं पाकिस्तान की हालत ऐसी है कि उसकी सबसे बड़ी आर्थिक उपलब्धियों में से एक बार फिर आईएमएफ के दरवाजे पर जाकर मदद मांगना है, ताकि देश की बत्ती जलती रहे।
इसलिए पाकिस्तान का पुराना कश्मीर वाला नैरेटिव अब पहले जैसा असरदार नहीं दिख रहा। जम्मू-कश्मीर पर्यटन के लिए खुला है, कारोबार के लिए खुला है और दुनिया भी वहां बदलते हालात को देख रही है।
लेकिन इस बदलाव का असली श्रेय किसी अमेरिकी बयान को नहीं जाता। इसका श्रेय भारत सरकार के काम और भारतीय सेना की मेहनत को जाता है। इन्हीं की कोशिशों से एक समय बेहद अस्थिर माने जाने वाले इलाके में सुरक्षा और सामान्य स्थिति वापस लाने में बड़ी कामयाबी मिली है।
लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि अब हमें आराम से बैठ जाना चाहिए। सीमा पार बैठा हमारा पड़ोसी अभी भी दिन-रात घाटी और देश के दूसरे हिस्सों में अशांति फैलाने के मौके तलाश सकता है। सेना अपना काम पूरी मजबूती से कर रही है, लेकिन सुरक्षा की यह ढाल तभी मजबूत रहेगी जब हर जिम्मेदार नागरिक भी सतर्क, जागरूक और एकजुट रहेगा।
तो कुल मिलाकर, पाकिस्तान का 70 साल पुराना कश्मीर वाला डिप्लोमैटिक शो अब दर्शकों के बिना रह गया है। डोरियां काट दी गई हैं, मंच खाली है और दुनिया शायद आगे बढ़ चुकी है। | 1 961 |
| 10 | नेपाल के लिए प्रार्थनाएं 🙏🙏
भगवान इस त्रासदी से भारत को बचाये रखे 🙏🙏 | 2 255 |
| 11 | 🇮🇳 INDIA TESTS ITS INDIGENOUS COMBAT PARACHUTE AT 22,000 FEET
DRDO has successfully tested its Military Combat Parachute System (MCPS) at one of the world’s highest-altitude drop zones in Ladakh at 22,000 feet and –15°C. 🇮🇳🪂
A major step towards Aatmanirbharta in defence, strengthening India’s capability for specialised high-altitude military operations. | 2 280 |
| 12 | India rushes 10 tonnes of HADR assistance, essential medicines to flood impacted Nepal. | 2 249 |
| 13 | भगवान रक्षा करे सबकी | 2 373 |
| 14 | India, Russia Free Trade Agreement is in its final stages of preparation, says Russia's First Deputy PM Denis Manturov | 2 343 |
| 15 | *मनुस्मृति से अधिक फेमिनिज्म और कहीं नहीं है। फ़िलहाल इस इकोसिस्टम के लिए तो लगता है फेमिनिज्म सिर्फ़ अश्लीलता और अंग-प्रदर्शन तथा पिता, भ्राता और पति से उन्मुक्त रहना ही है।*
🌹
(सुभाष चन्द्र)
“मैं वंशज श्री राम का”
26/08/2026
@followers | 2 413 |
| 16 | मनुस्मृति पर ये लेख मुझे
Whatsapp पर मिला है,
राहुल विंची के मुंह पर
यह एक थप्पड़ है -
🏵️*= मनुस्मृति =* 🏵️
जब मुद्दाविहीन हो जाओ तो मनुस्मृति को गाली दे दो, जब स्वयं को आधुनिक व बुद्धिजीवी दिखाना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो और जब वोक दिखना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो।
मनुस्मृति कहती है कि कन्या का अविवाहित रह जाना बेहतर है, लेकिन उसका विवाह किसी गुणहीन पुरुष से नहीं किया जाना चाहिए। नारी-सशक्तिकरण के लिए इससे बेहतर समझ रखते हैं आप? मनुस्मृति कहती है कि शारीरिक परिपक्वता के बाद निर्धारित अवधि तक प्रतीक्षा करने के बाद ही लड़की का विवाह हो, उस समय के हिसाब से 17 वर्ष तक। बाल-विवाह के विरुद्ध इससे बेहतर कोई प्रमाण है आपके पास?
मनुस्मृति कहती है - *विन्देत सदृशं पतिम्।* कन्या अपने योग्य पति का स्वयं वरण करे। यदि अभिभावक विवाह नहीं कराते और कन्या स्वयं पति चुन ले, तो न कन्या किसी पाप या अपराध की भागी होती है, और न वह पुरुष जिसे वह चुनती है। स्वेच्छा और कंसेंट को इससे बेहतर परिभाषित कर सकते हैं आप?
*पुत्रेण दुहिता समा।*
पुत्री पुत्र के समान है। स्त्री-पुरुष समानता के लिए मनुस्मृति से बेहतर कुछ ला सकते हैं आप? क़ुरान या बाइबिल लेकर आइए, देख लीजिए। स्वयं डॉ आंबेडकर ने बुढ़ापे में मनुस्मृति का लोहा माना है, उत्तराधिकार वाले विषय को लेकर। मनुस्मृति माता की निजी संपत्ति को अलग से मान्यता देती है और उसे अविवाहित पुत्री का भाग बताती है। परिवार में महिलाओं को सशक्त रखने के लिए इससे बेहतर कोई व्यवस्था अबतक लेकर आए आप?
बल, दबाव या जबरन नियंत्रण से स्त्रियों को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। विश्वसनीय पुरुष भी उन्हें क़ैद नहीं रख सकते। *आत्मानमात्मना यास्तु रक्षेयुस्ताः सुरक्षिताः।* मतलब, जो स्त्री अपने विवेक से अपनी रक्षा करती है, वही सुरक्षित है। बाहरी निगरानी से ऊपर विवेक को रखा गया है। स्त्रियों को विवेकी माना गया है। इससे अधिक सम्मान देते हैं आप? आपने तो अपनी बहन तक को चुनावी राजनीति में खुद के 2 दशक बाद उतारा।
*धन के देखभाल एवं प्रबंधन के लिए मनुस्मृति ने स्त्रियों पर विश्वास जताया है। राजा को मनुस्मृति आदेश देती है कि ऐसी स्त्रियों की रक्षा करे जिनके पति बाहर हैं, जिनका परिवार प्रभावशाली नहीं है, जो बीमार हैं या जिनके पति या पुत्र नहीं हैं। अगर कोई संबंधी भी किसी स्त्री की संपत्ति हड़पता है तो उसे चोर मानकर दंड देने को कहा है। इससे अधिक परवाह है आपको स्त्रियों की?*
पति को आदेश है कि बाहर जाने से पहले पत्नी की आजीविका की व्यवस्था करके जाए। अब ये मत कहिएगा कि पत्नी ख़ुद नहीं कर सकती क्या। *जीवेच्छिल्पैर गर्हितः।* आगे ये भी लिखा है कि पति न करे तो स्त्री ख़ुद सम्मानजनक कार्यों के जरिए कमाए। आत्मनिर्भरता के लिए इससे बेहतर नियम बना लेंगे आप?
*तस्मात्साधारणो धर्मः श्रुतौ पत्न्या सहोदितः।* धार्मिक कार्य पति-पत्नी साथ मिलकर करें। पत्नी के बिना कोई अनुष्ठान पूरा नहीं होता है। हमारे यहाँ पत्नी को बेगम नहीं, अर्धांगिनी कहा गया है। यहीं से निकला है, *आधी आबादी*। पूरे पचास प्रतिशत - उतना ही, जितना पुरुष का हिस्सा। पचास-पचास। इससे अधिक सटीक तरीके से बराबरी का संदेश दे सकते हैं आप? *अन्योन्यस्य।* एक-दूसरे के प्रति। वैवाहिक जीवन में भी दोनों की जिम्मेदारियां हैं। मनुस्मृति कहती है कि न स्त्री और न ही पुरुष वैवाहिक मर्यादा का उल्लंघन करे। इसमें क्या जोड़ देंगे आप क्रांतिकारी कहलाने के लिए? कुछ बाक़ी है क्या? मनुस्मृति कहती है कि नियम दोनों पर हैं।
*मनुस्मृति ने स्त्री को महाभागाः (सौभाग्य शालिनी और सौभाग्य लाने वाली) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को पूजार्हाः (सम्मान की अधिकारी) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को गृह दीप्तयः (घर को प्रकाशित और प्रसन्न रखने वाली) कहा। परिवार के सुख का आधार कहा। गृहस्थ-जीवन का प्रत्यक्ष आधार कहा।*
अब जिसने परिवार नामक संस्था को ख़त्म करने का लक्ष्य ले रखा हो, उसे ये सब बुरा लगेगा ही। वो पूछेगा कि स्त्री परिवार के सुख के लिए तिनका भी क्यों हिलाए। वो ये नहीं पूछेगा कि मनुस्मृति ने पुरुष को भी स्त्री के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठाने को क्यों कहा है।
*यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते…* रटा-रटाया है, इसीलिए इसे नहीं गिनाया। सबको पता है। इसी प्रसंग में ये भी लिखा है कि जिस घर में स्त्री दुखी रहती है वह परिवार शीघ्र नष्ट होता है। यानी, परिवार की स्थिति का पैमाना यह तय कर दिया गया है कि उसमें महिलाओं को प्रसन्न रखा जा रहा है या नहीं।
लेकिन नहीं, गाली तो केवल मनुस्मृति को ही पड़ेगी। कुरान और बाइबिल का नाम नहीं लिया जाएगा। राहुल गांधी आज *स्त्रीवादी* बने हैं, काश मनुस्मृति पढ़ लिया होता कम से कम। पढ़ा तो हमने भी नहीं है, इसलिए जो कहा जाता है मान लेते हैं। सफाई देने लगते हैं कि ये उस समय की व्यवस्था थी। | 2 376 |
| 17 | Why not be sensitive and respectful before planning ?
Today in the age of social media people are aware and they will share their opinion .
Stop targetting Hindu festivals .
We do not need your ads to make purchases | 2 217 |
| 18 | आज यह खबर चल रही है....सुप्रीम कोर्ट के जज प्रसन्ना वराले ने यह टिप्पणी की... कि नासिक कुम्भ मेले पर जितना खर्च हुआ, उसका 0.1% भी शिक्षा पर खर्च होता तो 125 स्कूलों को बंद होने से बचाया जा सकता था.
जज ने कहा कि सरकार ने 32,000-34,000 करोड़ रूपए नासिक कुम्भ मेले के लिए allocate किये हैं... और इस पैसे को शिक्षा पर खर्च किया जा सकता था.
यहाँ समस्या यह है.... चाहे कोई सुप्रीम कोर्ट का जज बन जाए.. लेकिन यह कोई गारंटी नहीं कि उसमे Common Sense होगा..... और जज वराले ने यह साबित भी किया है.
सबसे पहली बात... सरकार ने 2027 के नासिक कुम्भ के लिए ₹34,732 करोड़ allocate किये हैं.
लेकिन इस रकम में करीब 85% यानी ₹29,500 करोड़ स्थायी विकास कार्यों पर खर्च हो रहे हैं...—सड़क, पुल, पानी, सफाई और दूसरी सुविधाएँ बनाई जा रही हैं.... जो नासिक के नागरिकों के लिए स्थाई structure हैं.... बननी ही थी... आज नहीं तो कल.
यह सब बनाने में कितने हजारों या लाखों लोगों को रोजगार मिला होगा?? कितने लाखों लोगों की जिंदगी सरल होने वाली है??
मैं बताता हूँ.
लगभग ढाई लाख लोगों को direct या indirect काम मिला है या मिलने वाला है..... 30,000 से ज्यादा लोकल लोगों को कुम्भ मेला सम्बंधित Training दी जा रही हैं.... जिससे वह मेले या ऐसे बड़े आयोजनों में काम कर सकें... और अपना काम धंधा कर सकें.
अगर केवल कुम्भ मेले पर ही खर्च देखा जाए, तो वह 4,500 करोड़ है.
अब लोग कहेंगे कि एक मेले पर 4,500 करोड़ क्यों खर्च किये जा रहे हैं? इतने में अस्पताल बन जाते, स्कूल खुल जाते.
ऐसे लोगों को सामान्य आर्थिक चक्र के बारे में पढ़ना चाहिए.
कुंभ के दौरान अनुमानित आर्थिक गतिविधि: लगभग ₹27,000 करोड़
श्रद्धालुओं द्वारा सीधे खर्च का अनुमान: ₹8,500–11,000 करोड़
यानी.... मात्र 4500 करोड़ खर्च करके सरकार ने एक आर्थिक गतिविधियों का चक्र चला दिया..... जिससे लगभग 38,000 करोड़ रूपए नासिक में खर्च होंगे... circulate होंगे, या कह सकते हैं कि इतने की आर्थिक गतिविधि होगी.
क्या यह आर्थिक गतिविधि होगी.... अगर कुम्भ ना हुआ हो?
बिलकुल नहीं.
नासिक में ऐसा कोई काम नहीं होता.. जिससे मात्र 3-4 दिनों में 38-40 हजार करोड़ की आर्थिक गतिविधि हो जाए.
अब इस आर्थिक गतिविधि से Direct और Indirect टैक्स भी generate होगा... जो अंततः सरकार की ही जेब में जाएगा.... और जितना invest किया है.. उससे कहीं ज्यादा होगा.
मैं तो कहता हूँ... जो टैक्स से generate होगा पैसा.. उसका 1% पैसा सरकार AI के उपयोग करने में लगाए और Legal इंफ्रास्ट्रक्चर बनाये.... ताकि इन निकम्मे जजों से छुटकारा मिले.. और हजारों लाखों cases का निबटारा हो.
इन सबसे से जो पैसा बचेगा... उससे जी भर के स्कूल खोलो, अस्पताल खोलो.... या कुछ भी करो..... करते ही हो.
भारत में हिन्दू त्यौहारो या धार्मिक कार्यक्रमों से ज्यादा Revenue Generating कोई activity है ही नहीं. इन अनपढ़ अधकचरे जजों को यह दिखता नहीं. | 2 240 |
| 19 | Detailed Post Below | 2 099 |
| 20 | कितनी गज़ब की बात है कि कलतक नरेंद्र मोदी को कुर्सी से हटाने की बात देश की विपक्षी पार्टियों के साथ एक खास मजहब और कुछ खास जातियों के लोग करते थे...
लेकिन, अब देश का हिंदू , सवर्ण भी मोदी को हटाने की बात कर रहा है.
असल में यहाँ किसी को देश से कोई मतलब नहीं है ..
किसी को धर्म से कोई मतलब नहीं है.
सिर्फ, सभी को अपना-अपना हित दिखाई दे रहा है इसीलिए लोगों को वही बात सुहाती है.
आप खुद ही देख लो न...
मोदी ने देश को प्रगति की राह पर आगे बढ़ाया, किसी को कोई मतलब नही.
मोदी ने 500 वर्षों बाद अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनवाया..
किसी को कोई मतलब नहीं.
मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई...
किसी को कोई मतलब नहीं.
मोदी सरकार ने कोरोना जैसी महामारी के दौरान देश को संभाला...
किसी को कोई मतलब नहीं.
मोदी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की...
किसी को कोई मतलब नहीं.
मोदी ने पाकिस्तान के सामने भारत की ताकत का एहसास कराया...
किसी को कोई मतलब नहीं.
मोदी सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर बढ़ने के अवसर दिए...
किसी को कोई मतलब नहीं.
गरीबों को पक्के मकान दिए...
किसी को कोई मतलब नहीं.
देश के हर वर्ग को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का काम किया...
किसी को कोई मतलब नहीं.
आतंकवादी घटनाओं पर लगाम लगी...
किसी को कोई मतलब नहीं.
देश तोड़ने की बातें करने वालों पर कार्रवाई हुई...
किसी को कोई मतलब नहीं.
हमारे सैनिकों की सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई की क्षमता मजबूत हुई...
किसी को कोई मतलब नहीं.
सीमाओं की सुरक्षा मजबूत हुई और घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई हुई...
किसी को कोई मतलब नहीं.
पड़ोसी देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से जुड़े नागरिकता संबंधी मुद्दों पर भी सरकार ने नीतिगत कदम उठाए...
किसी को कोई मतलब नहीं.
सच यही है कि हम हिन्दुओं का कुछ भी नहीं हो सकता...
क्योंकि, हमारा ये स्वभाव है कि भाजपा राज में किसी न किसी मुद्दे को लेकर फूफा बन जायेंगे फिर विपक्षी राज में दो कौड़ी के बन जाना मंजूर होगा.
बाजपेई जी की सरकार भी तो इसी तरह के टुच्चे मुद्दों पर गिर ही गई थी न.
खैर,
जाको प्रभु दारुण दुःख देही
ताको मति पहले हर लेही.
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