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SAYRI AND MUSIC

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।।अरसे बीत गए तेरे इश्क़ में लिखते लिखते।। ।। दो लफ्ज़ तू कभी मेरे सब्र पर ही लिख दे।।

“अब तु परदेस में ना याद कर अपने मकान को। अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा।”

हम लिखने वालों के हिस्से में.. सिर्फ कहानियाँ ही हाथ आती हैं.. लोग नहीं..!!

जो माँगते हैं दुआएँ लंबी उम्र-ए-दराज़ की.. उन्हें समझाओ कि जीना कोई मज़ाक़ नहीं है..!!

तुम्हारे ख़्वाब सँवर जाएँ तो बेहतर होगा.. अपना क्या हैँ 'मर जाएँ तो बेहतर होगा..!!

अब तो कुछ भी नहीं रहा दिल में... पहले अफ़सोस भी था.. हैरत भी थी...

"कर लेती हूँ बर्दाश्त हर दर्द इसी आस के साथ.. लोग कहते है की खुदा नूर भी बरसाता है ... आज़माइशों के बाद"

कुछ इसलिये भी ख्वाइशो को मार देती हूँ..... बापू कहते है घर की जिम्मेदारी है तुझ पर.........

सहारे ढूढ़ने की आदत नही मेरी मैं अकेली ही पूरी महफ़िल के बराबर हूं

भूख से मर जाते हैं लेकिन जमीर नहीं बेचते.. हम गांव के हैं साहब यकीन नही बेचते.. गामा आले❤️

रुक जरा, कुछ पल मुझे यूँ ही जी लेने दे ऐ जिंदगी, बड़ी मुद्दतसे मुझे कोई इतना चाहने वाला मिला है.!

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ना जाने किस हुनर को शायरी कहते है लोग , हम तो वो लिखते है , जो कह न सके उससे..!!

इस कदर बेबस नहीं ज़िन्दगी, कोशिश जीने की तो करो यारों, बह जाएँगे ग़म सारे आँसू बन कर, कोशिश इन्हें पीने की तो करो यारों.....

देखे होंगे तुमने आसमान में सितारें कई मैंने तो खिड़की पर चाँद खड़े देखा हैं•••

दिल था अकेला ग़म थे हज़ारों, अकेले को मिलकर हज़ारों ने लूटा.....

Hi

Hiii

Hii

बात सिर्फ इतनी सी थी--- कि मेरी कलम से लिखी हर ख़ामोशी "ठाकुर" को भी औरों की तरह महज़ शायरी लगी ।।💔