ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜
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Архів дописів
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होने को आसमान हूं मैं ,
मगर घर नहीं हूं , वो बैठ मेरे पास , अपने दिल की बात क्यूं बतायेगा ,
किसी और दुनिया का बाशिंदा है वो ,
मुझपे सितारे क्यूं सजायेगा 🥲❤️🩹
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I turned all this yearning into poetry ,
Only to realise that poetry itself has turned me into a yearner. ❤️
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ये सर्द रातें , रूखी फ़िज़ाएं और अनजान शहर में तन्हा शख्शियत ,
तेरी बाहों का घर होता करीब तो हम भी सुकून से सोते... ❤️🫠
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ख़्वाब ही ख़्वाब कब तलक देखूं ,
काश ! तुझे भी एक झलक देखूं
एक ही ख्वाहिश है इस धड़कते दिल की ,
कभी बैठूं तेरे साथ और फलक देखूं ❤️
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यूं हंस हंस के मैं उसे
किस्मत वाला बताती हूं ,
और सबके लिए लिखती हूं ,
तुझे खुद सुनाती हूं 😁🙈
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मुझे नफ़रत तुमसे नफ़रत ना हो पाने से है,
बिना समझे, समझाने वाले इस ज़माने से है
तुम्हें हैरत है, देख कर, मोहब्बत मेरी आंखों में
यहां देखो, तुम्हारा हाथ किसी के हाथ में देख, मेरा दिल धड़कन गंवाने पे है
खैर ! इश्क़ है सो है, ये ना दुनिया को बताने से है
मुझे नफ़रत तुमसे नहीं ,
तुमसे नफ़रत ना हो पाने से है ... ❤️
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कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया ,
बात निकली तो हर बात पे रोना आया,
हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको ,
क्या हुआ , ये आज किस बात पे रोना आया
किस लिए जीते हैं हम , किसके लिए जीते हैं ,
बरहा ऐसे सवालात पे रोना आया ,
कौन रोता है किसी और की खातिर ए दोस्त !
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया... ❤️
~ साहिर लुधियानवी ✍
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वक़्त कम मिला साथ वक़्त बिताने को ,
शिकायतें काफ़ी रही ज़माने को ,
इस ज़िंदगी की सारी दुआएं यही है ,
एक जन्म मिले तुमसे मुक्कमल इश्क़ फरमाने को... ❤️
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10 अक्टूबर का खास दिन ,
कहीं ना कहीं चित्रा मिल रही होगी अपने सुदीप से ,
कहीं खत्म हो रहा होगा साल भर का इंतज़ार ,
कहीं तो सुनाई जा रही होगी ज़िंदगी की दास्तान ,
कहीं बयां हो रहा होगा, बिन कहा प्यार ,
10 अक्टूबर का ये खास दिन ,
मैं , एक किताब , और चित्रा और सुदीप का संसार ❤️
#Octoberjunctionday
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ज़मीं की हक़ीक़त है आसपास मेरे ,
एक तुम ख्वाहिशों भरा आकाश हो ,
सब छुटी हुई चीज़ें खैर है मुझे ,
एक तुम काश हो... ❤️
