ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜
رفتن به کانال در Telegram
1 151
مشترکین
+224 ساعت
+57 روز
+1030 روز
آرشیو پست ها
1 151
होने को आसमान हूं मैं ,
मगर घर नहीं हूं , वो बैठ मेरे पास , अपने दिल की बात क्यूं बतायेगा ,
किसी और दुनिया का बाशिंदा है वो ,
मुझपे सितारे क्यूं सजायेगा 🥲❤️🩹
1 151
I turned all this yearning into poetry ,
Only to realise that poetry itself has turned me into a yearner. ❤️
1 151
ये सर्द रातें , रूखी फ़िज़ाएं और अनजान शहर में तन्हा शख्शियत ,
तेरी बाहों का घर होता करीब तो हम भी सुकून से सोते... ❤️🫠
1 151
ख़्वाब ही ख़्वाब कब तलक देखूं ,
काश ! तुझे भी एक झलक देखूं
एक ही ख्वाहिश है इस धड़कते दिल की ,
कभी बैठूं तेरे साथ और फलक देखूं ❤️
1 151
यूं हंस हंस के मैं उसे
किस्मत वाला बताती हूं ,
और सबके लिए लिखती हूं ,
तुझे खुद सुनाती हूं 😁🙈
1 151
मुझे नफ़रत तुमसे नफ़रत ना हो पाने से है,
बिना समझे, समझाने वाले इस ज़माने से है
तुम्हें हैरत है, देख कर, मोहब्बत मेरी आंखों में
यहां देखो, तुम्हारा हाथ किसी के हाथ में देख, मेरा दिल धड़कन गंवाने पे है
खैर ! इश्क़ है सो है, ये ना दुनिया को बताने से है
मुझे नफ़रत तुमसे नहीं ,
तुमसे नफ़रत ना हो पाने से है ... ❤️
1 151
कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया ,
बात निकली तो हर बात पे रोना आया,
हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको ,
क्या हुआ , ये आज किस बात पे रोना आया
किस लिए जीते हैं हम , किसके लिए जीते हैं ,
बरहा ऐसे सवालात पे रोना आया ,
कौन रोता है किसी और की खातिर ए दोस्त !
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया... ❤️
~ साहिर लुधियानवी ✍
1 151
वक़्त कम मिला साथ वक़्त बिताने को ,
शिकायतें काफ़ी रही ज़माने को ,
इस ज़िंदगी की सारी दुआएं यही है ,
एक जन्म मिले तुमसे मुक्कमल इश्क़ फरमाने को... ❤️
1 151
10 अक्टूबर का खास दिन ,
कहीं ना कहीं चित्रा मिल रही होगी अपने सुदीप से ,
कहीं खत्म हो रहा होगा साल भर का इंतज़ार ,
कहीं तो सुनाई जा रही होगी ज़िंदगी की दास्तान ,
कहीं बयां हो रहा होगा, बिन कहा प्यार ,
10 अक्टूबर का ये खास दिन ,
मैं , एक किताब , और चित्रा और सुदीप का संसार ❤️
#Octoberjunctionday
1 151
ज़मीं की हक़ीक़त है आसपास मेरे ,
एक तुम ख्वाहिशों भरा आकाश हो ,
सब छुटी हुई चीज़ें खैर है मुझे ,
एक तुम काश हो... ❤️
