uk
Feedback
Hindu Dharma सनातन हिन्दू धर्म शास्त्र वेद पुराण ज्योतिष वास्तु हिन्दुत्व तंत्र मंत्र Jyotish Hindutva Astrology Vaastu

Hindu Dharma सनातन हिन्दू धर्म शास्त्र वेद पुराण ज्योतिष वास्तु हिन्दुत्व तंत्र मंत्र Jyotish Hindutva Astrology Vaastu

Відкрити в Telegram

हिन्दू धर्म से सम्बंधित पुस्तकें। ज्योतिष, वास्तु, धर्म सम्बंधित प्रश्न कर सकते हैं @havishya1 पर ☀️ 𝐘𝐨𝐮𝐓𝐮𝐛𝐞  @YugSamvad ☀️ 𝐈𝐧𝐬𝐭𝐚𝐠𝐫𝐚𝐦 @YugSamvad ☀️ 𝐓𝐞𝐥𝐞𝐠𝐫𝐚𝐦 @HinduDharmaGroup   

Показати більше
1 065
Підписники
+124 години
-17 днів
-930 день
Архів дописів
https://youtu.be/sw5UNkU6nkk शत नमन माधव चरण में शत नमन माधव चरण में ॥॥ आपकी पीयूष वाणी, शब्द को भी धन्य करती आपकी आत्मीयता थ
https://youtu.be/sw5UNkU6nkk शत नमन माधव चरण में शत नमन माधव चरण में ॥॥ आपकी पीयूष वाणी, शब्द को भी धन्य करती आपकी आत्मीयता थी, युगल नयनों से बरसती और वह निश्छल हंसी जो, गूँज उठती थी गगन में ॥१॥ ज्ञान में तो आप ऋषिवर, दीखते थे आद्यशंकर और भोला भाव शिशु सा, खेलता मुख पर निरन्तर दीन दुखियों के लिये थी, द्रवित करुणाधार मन में ॥२॥ दु:ख सुख निन्दा प्रशंसा, आप को सब एक ही थे दिव्य गीता ज्ञान से युत, आप तो स्थितप्रज्ञ ही थे भरत भू के पुत्र उत्तम, आप थे युगपुरुष जन में ॥३॥ सिन्धु सा गम्भीर मानस, थाह कब पाई किसी ने आ गया सम्पर्क में जो, धन्यता पाई उसी ने आप योगेश्वर नये थे, छल भरे कुरुक्षेत्र रण में ॥४॥ मेरु गिरि सा मन अडिग था, आपने पाया महात्मन त्याग कैसा आप का वह, तेज साहस शील पावन मात्र दर्शन भस्म कर दे, घोर षडरिपु एक क्षण में ॥५॥ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परमपूजनीय श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर "श्रीगुरुजी" की पुण्यतिथि पर शत शत नमन🌺

https://youtu.be/sw5UNkU6nkk शत नमन माधव चरण में शत नमन माधव चरण में ॥॥ आपकी पीयूष वाणी, शब्द को भी धन्य करती आपकी आत्मीयता थ
https://youtu.be/sw5UNkU6nkk शत नमन माधव चरण में शत नमन माधव चरण में ॥॥ आपकी पीयूष वाणी, शब्द को भी धन्य करती आपकी आत्मीयता थी, युगल नयनों से बरसती और वह निश्छल हंसी जो, गूँज उठती थी गगन में ॥१॥ ज्ञान में तो आप ऋषिवर, दीखते थे आद्यशंकर और भोला भाव शिशु सा, खेलता मुख पर निरन्तर दीन दुखियों के लिये थी, द्रवित करुणाधार मन में ॥२॥ दु:ख सुख निन्दा प्रशंसा, आप को सब एक ही थे दिव्य गीता ज्ञान से युत, आप तो स्थितप्रज्ञ ही थे भरत भू के पुत्र उत्तम, आप थे युगपुरुष जन में ॥३॥ सिन्धु सा गम्भीर मानस, थाह कब पाई किसी ने आ गया सम्पर्क में जो, धन्यता पाई उसी ने आप योगेश्वर नये थे, छल भरे कुरुक्षेत्र रण में ॥४॥ मेरु गिरि सा मन अडिग था, आपने पाया महात्मन त्याग कैसा आप का वह, तेज साहस शील पावन मात्र दर्शन भस्म कर दे, घोर षडरिपु एक क्षण में ॥५॥ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परमपूजनीय श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर "श्रीगुरुजी" की पुण्यतिथि पर शत शत नमन🌺

निःस्वार्थता अधिक लाभदायक है, परन्तु लोगों में उसका अभ्यास करने का धैर्य नहीं है। ― श्री स्वामी विवेकानंद

AMS_आनंदज्ञानमयूख_चतुर्थ_संस्करण_NET_73CODE_पारम्परिकसंस्कृतविषय.pdf21.81 MB