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UJJWAL IAS AYODHYA®™

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📈 Аналитический обзор Telegram-канала UJJWAL IAS AYODHYA®™

Канал UJJWAL IAS AYODHYA®™ (@ujjawaliasayodhya) языкового сегмента Хинди является активным участником. Сейчас сообщество объединяет 21 757 подписчиков, занимая 9 249 место в категории Образование и 18 712 место в регионе Индия.

📊 Показатели аудитории и динамика

С момента создания невідомо проект демонстрирует стремительный рост, собрав аудиторию из 21 757 подписчиков.

Согласно последним данным от 26 октября, 2026, канал показывает стабильную активность. За последние 30 дней изменение числа участников составило 965, а за последние 24 часа — 25, при этом общий охват остаётся высоким.

  • Статус верификации: Не верифицирован
  • Уровень вовлечённости (ER): Средний показатель вовлечённости аудитории составляет 27.20%. В первые 24 часа после публикации контент обычно набирает 20.40% реакций от общего числа подписчиков.
  • Охват публикаций: В среднем каждый пост получает 5 917 просмотров. В течение первых суток публикация набирает 4 439 просмотров.
  • Реакции и взаимодействия: Аудитория активно поддерживает контент: среднее количество реакций на один пост — 10.
  • Тематические интересы: Контент сосредоточен на ключевых темах, таких как टेस्ट, सफलता, मेहनत, तैयारी, सीरीज.

📝 Описание и контентная политика

Автор описывает ресурс как площадку для выражения субъективного мнения:
“Ujjwal IAS official Telegram channel. Youtube- https://www.youtube.com/@UJJAWALIASAYODHYA App- https://play.google.com/store/apps/details?id=com.cbbzwd.oggulz”

Благодаря высокой частоте обновлений (последние данные получены 27 октября, 2026) канал поддерживает актуальность и высокий уровень охвата публикаций. Аналитика показывает, что аудитория активно взаимодействует с контентом, что делает его важной точкой влияния в категории Образование.

21 757
Подписчики
+2524 часа
+1697 дней
+96530 дней
Архив постов
🔳 *उत्सर्जन तन्त्र –* ▪️ *फेफड़ा* – इससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन श्वसन क्रिया के द्वारा होता है। ▪️ लहसुन प्याज और कुछ मसाले के वाष्पशील घटकों का भी उत्सर्जन होता है। ▪️ *यकृत* – इससे अमोनिया को यूरिया में परिवर्तित करता है। ▪️एमिनो अम्ल के नाइट्रोजनी पदार्थों का उत्सर्जन करता है। ▪️ *वृक्क( किडनी)–* यह स्तनधारियों में एक जोड़ी पाया जाता है। ▪️यह लगभग 10 लाख वृक्क नलिकाओं( नेफ्रॉन) से मिलकर बना होता है। ▪️नेफ्रांस , वृक्को की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। ▪️इसका कार्य मूत्र निर्माण एवं परासरण नियंत्रण( जल एवं खनिज का नियंत्रण) है। ▪️मूत्र का निर्माण वृक्क नलिकाओं में ही होता है। ▪️मूत्र में लगभग 95% जल ,2% अनावश्यक लवण , 2.3 % यूरिया , यूरिक अम्ल आदि पाए जाते है। ▪️मूत्र का pH मान 6 होता है। ▪️वृक्क की पथरी कैल्सियम ऑक्जेलेट की बनी होती है।

▪️ *प्लाज्मा* – यह निर्जीव तरल भाग है। ▪️इसके माध्यम से रासायनिक पदार्थों का संवहन होता है। ▪️ *रुधिर कणिकाएँ–* ▪️1. *लाल रुधिर कणिकाएँ (इरिथ्रोसाइट्स):* ये कणिकाएँ ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाने का काम करती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन को बांधता है, ▪️ *(2) श्वेत रुधिर कणिकाएँ (ल्यूकोसाइट्स):* ये कणिकाएँ संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। वे हानिकारक जीवाणुओं और मृत कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। ▪️( *3) प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट्स):* ये रुधिर के थक्का बनाने में मदद करते हैं, जिससे रक्तस्राव बंद हो जाता है। ▪️प्लाज्मा की कुल मात्रा कुल रुधिर का 55% होती है। ▪️एक सामान्य मनुष्य में हीमोग्लोबिन की मात्रा 15 ग्राम प्रति 100ml रुधिर होता है। ▪️शरीर में रुधिर का निर्माण लाल अस्थि मज्जा में होता है। ▪️लाल रुधिर कणिका का जीवन का लगभग 120 दिन होता है। 🔳 *रक्त समूह –* ▪️ *खोज* – कार्ल लैंडस्टीनर ▪️ *एंटीजन 2 प्रकार के होते है–* A और B ▪️ *एंटीबॉडी 2 प्रकार के होते है–* a और b ▪️ *रक्त समूह 4 प्रकार के होते है–* A, B ,AB और O ▪️ *AB रक्तसमूह को सर्वग्राही कहते है* । ▪️ *O रक्त समूह को सर्वदाता कहते है* ।

▪️हृदय के बाएं भाग में शुद्ध रक्त तथा दाहिने भाग में अशुद्ध रक्त बहता है। ▪️हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली वाहिनी को कोरोनरी धमनी कहते है। ▪️ *लसिका* – यह हल्का पीला द्रव्य होता है। ▪️इसमें मात्र श्वेत रूधिराणु पाए जाते हैं। ▪️ इसका बहाव केवल अंगों से हृदय की ओर होता है। ▪️ इसका कार्य लिंफोसाइट्स का निर्माण करना होता है। ▪️ इसमें उपस्थित लिंफोसाइट्स हानिकारक जीवाणुओं से शरीर की रक्षा करता है। ▪️ यह घाव भरने में सहायक होती है ▪️ *रुधिर* – यह एक तरल संयोजी ऊतक होता है। ▪️यह क्षारीय प्रकृति का होता है, इसका PH मान 7.4 है। ▪️वयस्क मनुष्य में लगभग 5 से 7 लीटर रुधिर होता है। ▪️ रुधिर के दो भाग होते हैं: प्लाज्मा और रक्तकणिका

🔳 *परिसंचरण तंत्र–* ▪️रक्त परिसंचरण की खोज विलियम हार्वे ने की। ▪️ *हृदय* – यह रक्त परिसंचरण का केंद्रीय भाग है। ▪️यह चार कोष्ठों का बना होता है– दायां अलिंद, बाया अलिंद, दायां निलय, एवं बायां निलय ▪️यह एक मिनिट में 72 बार धड़कता है। ▪️एक धड़कन में 70 मिली. रक्त पंप करता है। ▪️सामान्य मनुष्य का रक्त दाब 120/ 80 mm. Hg होता है। ▪रक्तदाब मापने के लिए स्फाइगमोमैनोमीटर का प्रयोग करते है। ▪️शरीर में अत्यधिक अम्लीयत हृदयगति को बढ़ाती है, जबकि अत्यधिक छारीयता हृदय गति को अनियमित करती है। ▪️ *शिरा* – शरीर से हृदय की ओर रक्त ले जाती है। ▪️इसमें अशुद्ध रक्त अर्थात कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त होता है। ▪️पल्मोनरी शिरा में शुद्ध रक्त होता है । ▪️ *धमनी* – हृदय से शरीर की ओर रक्त ले जाती हैं। ▪️ इसमें शुद्ध रक्त अर्थात ऑक्सीजन युक्त रक्त होता है। ▪️ पलमोनरी धमनी में अशुद्ध रक्त होता है।

🔳 *यकृत –* ▪️यह मनुष्य के शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। ▪️यह ग्लूकोज की अधिक मात्रा को ग्लाइकोजन में परिवर्तित करती है। ▪️यकृत में फाइब्रिनोजेन प्रोटीन का निर्माण होता है जो विटामिन K के साथ रुधिर का थक्का जमने में सहायक होता है। ▪️प्रोटीन की अधिक मात्रा को कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तित करता है। ▪️हिपैरिन प्रोटीन का निर्माण करता है। ▪️यह पित्त का संश्लेषण करती है। ▪️पित्त पित्ताशय में एकत्र रहता है। ▪️पित्त भोजन में आए हुए जीवाणुओं को नष्ट करता है। ▪️पित्तरस वसा का इमल्सीकरण करता है। ▪️ *अग्नाशय* – मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि। ▪️यह अंतस्रावी एवं बहिस्रावी दोनों प्रकार की ग्रंथि है। ▪️इसमें कार्बोहाइड्रेट वसा एवं प्रोटीन को पचाने वाले एंजाइम पाए जाते हैं। ▪️अग्नाशयी रस को पूर्ण पाचक रस कहा जाता है। ▪️ *इन्सुलिन* – *खोज* – बैटिंग एवं बेस्ट ने ▪️ यह ग्लूकोस से ग्लाइकोजन के निर्माण की क्रिया को नियंत्रित करता है। ▪️ इसकी कमी से मधुमेह नामक रोग होता है। ▪️ इसकी अधिकता से हाइपोगलासिमिया नामक रोग होता है।

▪️ *आमाशय* – इसके पाइलोरिक ग्रंथियां से जठर रस का श्रावण होता है। ▪️जठर रस में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पाया जाता है। ▪️यह भोजन को अम्लीय बना देता है, तथा भोजन पर लार के प्रभाव को समाप्त कर देता है। ▪️जठर रस में पेप्सिन एवं रेनिन नामक एंजाइम होते हैं । ▪️पेप्सिन प्रोटीन का पाचन करके पेप्टोंस में परिवर्तित कर देता है। ▪️रेनिंग दुग्ध के पाचन में सहायक होता है। ▪️ *छोटी आंत –* ग्रहणी में ट्रिप्सिन एंजाइम प्रोटीन को प्रोटिओसेज एवं पेप्टोज में तोड़ता है। ▪️एमाइलेज–यह काईम की मंड ,ग्लाइकोजन एवं अन्य पॉलिसैकेराइड्स को माल्टोज ,लैक्टोज और सुक्रोज नामक डाइसैकेराइड शर्करा में तोड़ता है। ▪️ *लाइपेज* – यह एमलसिफाइड वसा का ग्लिसरीन एवं फैटी एसिड में परिवर्तन करता है। ▪️आंत्रीय रस क्षारीय होता है ,तथा एक स्वस्थ मनुष्य में प्रतिदिन 2 लीटर आंत्रीय रस स्रावित होता है। ▪️ छोटी आंत में भोजन की पाचन क्रिया पूर्ण होती है एवं बचे हुए भोजन का अवशोषण होता है। ▪️अवशोषण के पश्चात बड़ी आत मल इकट्ठा होता है तथा गुदाद्वार से बाहर निकलता है।

🔳 *मानव शरीर पाचन तंत्र–* ▪️मनुष्य के आहार नाल की लंबाई 8 से 10 मीटर तक होती है। ▪️ छोटी आत की लंबाई लगभग 6 मीटर होती है। ▪️ *दांत* – मनुष्य के दोनों जबड़े में 16-16 अर्थात कुल 32 दांत होते हैं। ▪️2 कृंतक, 1 रदनक, 2 अग्रचवर्णक, 3 चवर्णक ▪️दांत की ऊपरी परत कैल्शियम फास्फेट एवं कैल्शियम कार्बोनेट की बनी होती है। ▪️इनैमल सबसे कठोर पदार्थ होता है। ▪️ *जीभ* – यह एक मांसल पेशी है। ▪️इसका आगे का भाग मीठा, पीछे का भाग तीखा, एवं दोनों बगल के भाग खट्टे का अनुभव करते है। ▪️ *लार ग्रंथियां* – तीन जोड़ी पाई जाती है। ▪️लार में 99% जल और 1 % एंजाइम , प्रोटीन , एवं लवण होता है। ▪️टायलिन एवं लाइसोजाइम एंजाइम पाए जाते है । ▪️ इनका कार्य भोजन का पाचन एवं जीवाणु रहित करने का होता है।

🔳 *कुछ फल तथा उनके खाने योग्य भाग–* ▪️अनार – बीजों के रसदार वाह्य चोल ▪️आम – मध्य फल भित्ति ▪️अमरूद – फल भित्ति ▪️सेब – मांसल पुष्पासन ▪️नासपती – मांसल पुष्पासन ▪️मक्का – भ्रूण तथा भ्रूणपोष ▪️गेहूं – भ्रूण तथा भ्रूणपोष ▪️काजू – पुष्पवृत एवं बीजपत्र ▪️नींबू – अतः फलभित्ति के रसदार रोम ▪️अंगूर – फलभित्ति ▪️टमाटर – फलभित्ति ▪️केला – मध्य एवं अतःफलभित्ति ▪️मुंगफली – भ्रूण ▪️कटहल – परीदलपुंज व बीज ▪️ इमली –मध्य फल भित्ति ▪️ सिंघाड़ा – बीज

🔳 *जड़ –* ▪️ये पौधों के अवरोही भाग है। ▪️ *मूसला जड़* – अंकुरण के समय मूलांकुर बढ़कर प्राथमिक जड़ का निर्माण करती है, इससे अनेक द्वितीयक एवं तृतीयक जड़ निकलते हैं। ▪️ *अपस्थानिक जड़ –* पौधों के मूलांकुर के अतिरिक्त, अन्य किसी भी भाग से निकलने वाली जड़। ▪️ *झकड़ा जड़ –* इन जड़ों से कुछ पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण होता है। ▪️गाजर ,मूली, शलजम जड़ों के रूपांतरण हैं, इनमें जड़ भोजन संग्रहण का कार्य करती है। ▪️ *तना –* यह सूर्य के प्रकाश की ओर विकसित होता है। ▪️आलू ,अदरक, हल्दी, लहसुन तथा प्याज रूपांतरित तना है। ▪️ *पत्ती* – यह प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा भोजन बनाती हैं। ▪️कुछ पौधों की पत्तियां कांटों में रूपांतरित हो जाती हैं जैसे– नागफनी ▪️ *पुष्प* – यह पौधों का जनन अंग होता है। ▪️पुमंग नर जननांग है और जायांग मादा जननांग। ▪️पुमंग में एक से अधिक पुंकेसर होते हैं। ▪️ *फल* –परिपक्व अंडाशय को फल कहते हैं।

🔳 *एक बीजपत्री पौधों के कुल से संबंधित पौधे –* ▪️ *आर्किडेसी* – आर्किड, हेबीनेरिया, वेडा ▪️ *लिलीएसी* – लहसुन, प्याज, एलोवेरा ▪️ *एरीकेसी* – सुपारी , नारियल, खजूर , ताड़ ▪ *पोएसी* – गेहूं, मक्का, चावल, ज्वार, बाजरा, गन्ना, बांस ▪️ *द्विबीजपत्री पौधों से संबंधित कुल तथा प्रमुख पौधे–* ▪️ *क्रूसिफेरी* – सरसों, मूली शलजम ▪️ *मालवेसी* – भिंडी, गुड़हल, कपास, पटसन ▪️ *लेगुमीनोसी* – शीशम, बबुल, अशोक, गुलमोहर, छुईमुई, मेथी , सनई , इमली, सभी दलहन। ▪️ *एस्ट्रेसिए* – सूरजमुखी, भ्रीगराज , गेंदा, कुसुम, कुश, आदि। ▪️ *कुकरबिटिसी* – कद्दू, खीरा , तरबूज, खरबूज, टिंडा, परवल, करेला, ककड़ी, तुरई ▪️ *रोजासी* – सेब, बादाम, नासपती, स्ट्रॉबेरी ▪️ *रूटीसी* – नींबू , संतरा, मुसंबी, बेल

🔳 *प्रमुख पादप हार्मोन –* ▪️ *ऑक्सिन* – यह खोजा गया प्रथम पादप हार्मोन था। ▪️ यह पौधे के ऊपरी भाग में पाया जाता है। ▪️ इससे पौधों की वृद्धि होती है। ▪️ *जिब्रेलिन* – यह पौधों को लंबा करने में सहायक होता है। ▪️ यह बीजों को अंकुरण के लिए प्रेरित करता है। ▪️ *साइटोकायनिन* – यह कोशिका विभाजन और विकास में मदद करता है। ▪️यह प्रोटीन एवं RNA के निर्माण में सहायक है ▪️ *एब्सिसिक एसिड* – यह एक वृद्धि रोधी हार्मोन है। ▪️यह बीजों को सुप्ता अवस्था में रखने में सहायक होता है। ▪️ *एथलीन* – यह गैसीय अवस्था में पाया जाने वाला एकमात्र हार्मोन है। ▪️ यह फलों को पकाने तथा पुष्पों की संख्या में वृद्धि में सहायक होता है। ▪️इसे फूल खिलाने वाला हार्मोन कहते हैं ।

▪️ *पौधे नाइट्रेट के रूप में नाइट्रोजन लेते हैं* ,नाइट्रोजन का नाइट्रेट्स में परिवर्तन जीवाणुओं द्वारा होता है। ▪️एजोटोबेक्टर, क्लॉडीस्ट्रेडियम आदि जीवाणु पृथ्वी पर मिट्टी में स्थित वायु के नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। ▪️एनाबीना और नॉस्टॉक आदि सायनोबैक्टीरिया वायुमंडल नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। ▪️नायट्रोसोकोकस एवं नाइट्रोसोमोनस जीवाणु अमोनिया को नाइट्राइट में बदलते हैं। ▪️ जीवाणुओं का उपयोग चर्म शोधन तथा रेशे की रेटिंग में भी होता है। ▪️ब्रायोफाइटा भ्रूण बनाने वाले पादप समूह का एक सरल व आद्य समूह है। ▪️इसे वनस्पति जगत का एंफीबिया वर्ग भी कहा जाता है। ▪️आवृतबीजी पौधों में बीज फल के अंदर होते हैं। ▪️आवृतबीजी पौधों के जड़, तना ,पत्ती, फल फूल सभी पूर्ण विकसित होते हैं। ▪️अनावृतबीजी पौधों में अंडाशय का पूर्णता अभाव होता है। ▪️एकबीज पत्री पौधों में एक बीज पत्र पाया जाता है। ▪️द्विबीजपत्री पौधों में दो बीज पत्र पाया जाता है ।

🔳 *विषाणु –* ▪️ *खोज* – 1892 ईस्वी में इवानोवश्की द्वारा। ▪️यह केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ▪️इन्हें सजीव एवं निर्जीवों के बीच की कड़ी कहा जाता है। ▪️ यह कोशिका के बाहर निष्क्रिय रूप में होते हैं तथा जीवित कोशिका में पहुंचते ही सक्रिय हो जाते हैं। ▪️ इनकी रासायनिक संरचना में न्यूक्लिक अम्ल का एक केंद्रीय कोड होता है, जो एक प्रोटीन आवरण से ढका होता है । ▪️ *पादप विषाणु–* इनमें RNA होता है, परंतु कभी कभी DNA पाया जाता। ▪️ *जंतु विषाणु–* इनमें DNA होता है, कभी कभी RNA भी होता है। ▪️ *कवक* – इसका अध्ययन *माइकोलॉजी* कहलाता है। ▪️यह क्लोरोफिल रहित संकेंद्रीय संवहन ऊतक रहित थाइलोफाइट है। ▪️इनकी कोशिका भित्ति सैलूलोज से बनी होती है। ▪️ *जीवाणु –* इनका अध्ययन *बैक्टीरियोलॉजी* कहलाता है। ▪️इनकी *खोज* 1683 ईस्वी में *ल्यूवेनहॉक* ने किया। इन्हें जीवाणु विज्ञान का पिता कहा जाता है। ▪️ *रॉबर्ट कोच ने कालरा* तथा *क्षय रोग* के जीवाणुओं की खोज की। ▪️ *लुई पाश्चर ने रेबीज* के टीके की खोज की।

🔳 *वनस्पति विज्ञान –* ▪️ *जनक* – थ्रियोफ्रेस्टस ▪️पौधों में कोशिका भित्ति पाई जाती है, जंतुओं में कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती। ▪️पौधे क्लोरोफिल की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा अपना भोजन तैयार करते हैं,इसलिए पौधों को स्वपोषी कहते हैं। ▪️ऐसे पौधे जिनमें बीज तथा पुष्प नहीं पाए जाते हैं क्रिप्टोगेम्स कहते हैं। ▪️ *शैवाल* – इसका अध्ययन *फ़ाइकोलॉजी* कहलाता है। ▪️ये क्लोरोफिल युक्त, संवहन उत्तक रहित स्वपोषी होते हैं। ▪️शैवाल का उपयोग भोजन के रूप में( अल्वा , सारगासम, एलेरिया, लेमिनेरिया) ,औषधीय बनाने में ( क्लोरला),खाद बनाने में(एनाबीना, नॉस्तोक),आयोडीन बनाने (लिमिनोरिया) में किया जाता है। 🔳 *पौधों में तत्वों की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग–* ▪️धान का खैरा रोग – जस्ता की कमी ▪️चुकंदर का हार्ट रॉट – बोरान की कमी ▪️नींबू में डाईबैंक रोग – तांबा की कमी ▪️नींबू में लिटिल लीफ रोग – जस्ता ( जिंक) की कमी ▪️फूलगोभी में ब्राउनिंग रोग – बोरान की कमी ▪️सेब में आंतरिक काग – बोरान की कमी ▪️पत्तागोभी में व्हिपटेल रोग – मालीब्लेडनम की कमी

▪️ *DNA अणु की डबलकुंडली त्रिविम प्रतिरूप* वाटसन एवं क्रिक ने वर्ष 1953 में प्रस्तुत किया। ▪️कोशिकाओं में DNA अनुवांशिक पदार्थ होता है। ▪️ *DNA की खोज* फेड्रिक मिंसर ने 1869 ईस्वी में की। ▪️DNA सभी अनुवांशिक क्रियाओं का संचालन करता है, और प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है। ▪️ जीन DNA से बने होते है। ▪️ *मानव में कुल 23 जोड़ी, अर्थात 46 गुणसूत्र होते है।* ▪️ *22 जोड़ी गुणसूत्र को ऑटोसोम्स* कहते है, ये एक समान होते है। ▪️ *23वा जोड़ी गुणसूत्र स्त्री और पुरुष में समान नहीं होते है, इन्हें हिट्रोसमस कहते है।* ▪️डॉली नमक भेड़ का क्लोन विश्व में किसी स्तनधारी जीव का प्रथम क्लोन था। ▪️पौधों के जड़ तना एवं पत्ती द्वारा जनन कायिक प्रवर्धन कहलाता है। ▪️स्टेम सेल में शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता होती है। ▪️डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग शिशु का पितृत्व स्थापित करने, मानसिक रोगों की पहचान, पशुओं की वंशावली स्थापित करने में किया जाता है। ▪️ गोल्डन राइस जैव प्रौद्योगिकी की उपलब्धि है इसके जन्मदाता प्रोफेसर इंगो पैट्रिक्स एवं डॉक्टर पीटर बियर है।

🔳 *जैव विकास–* ▪️जैव विकास का पहला सिद्धांत फ्रांसीसी जीव वैज्ञानिक डी लैमार्क ने 1809 में अपनी पुस्तक फिलासफी जूलॉजी में प्रकाशित किया। ▪️जीवो के शरीर में जो भी परिवर्तन होता है उन्हें उपार्जित लक्षण कहते हैं। यह वंशानुगत होता है। ▪️ जैव विकास परिकल्पना का दूसरा सिद्धांत 1831 में डार्विन ने दिया था । ▪️डार्विनवाद को प्राकृतिक वरर्णवाद भी कहते हैं। ▪️ह्यूगो डी ब्रिज द्वारा उत्परिवर्तनवाद का सिद्धांत प्रस्तुत किया गया। ▪️सभी जीव जंतुओं में उत्परिवर्तन का प्राकृतिक गुण होता है। ▪️ *आनुवांशिकी –* ▪️ ग्रेगर जॉन मेंडल को आनुवंशिकी का पिता कहा जाता है। ▪️विलियम बैटसन ने वर्ष 1905 में सर्वप्रथम जेनेटिक्स का नाम का उपयोग किया। ▪️जीन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जोहांसन ने किया। ▪️1888 ईस्वी में सर्वप्रथम डब्लू वालडेयर ने गुणसूत्र नामक शब्द का प्रयोग किया। ▪️गुणसूत्र सभी अनुवांशिक गुण को निर्धारित व संचारित करता है। प्रत्येक जीन में गुणसूत्र की संख्या निश्चित होती है। ▪️DNA पॉलिमरेज नामक एंजाइम से डीएनए का संश्लेषण होता है ,इसकी खोज कार्नबर्ग ने की।

▪️ *गाल्जीकाय* – *खोज* – कैमिलो गाल्जी द्वारा। ▪️यह जीवाणु एवं नीले हरे शैवालों में अनुपस्थित होता है। ▪️यह कोशिका भित्ति एवं लाइसोसोम का निर्माण करता है। ▪️इसे कोशिका का ट्रैफिक पुलिस कहा जाता है। ▪️ *लाइसोसोम* – *खोज* – डी डुवे द्वारा। ▪️इसे आत्महत्या की थैली कहा जाता है। ▪️इसका कार्य वाह्य पदार्थ का पाचन करना है। ▪️ *सेंट्रोसोम* – *खोज* – एडुआर्ड वान बेनेडेन द्वारा। ▪️ यह केवल जंतु कोशिका में पाया जाता है। ▪️ यह कोशिका विभाजन में भाग लेता है। ▪️ *लवक* – *खोज* – हेकल द्वारा। ▪️यह प्रायः पादप कोशिकाओं में पाया जाता है। ▪️हरित लवक में क्लोरोफिल नामक हरे रंग का वर्णक पाया जाता है। ▪️हरित लवक को कोशिका का रसोई घर कहते हैं। ▪️ *केंद्रक* –केंद्रक के चार भाग होते हैं –केंद्रककला ,केंद्रकद्रव्य, केंद्रिका एवं क्रोमेटीनधागे ▪️ *केंद्रीका की खोज* फोंटना ने की। ▪️ क्रोमेटिन एक न्यूक्लियोप्रोटीन है जो न्यूक्लिक अम्ल एवं छारिया प्रोटीन के मिश्रण से बना होता है। ▪️ *न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार का होता है–* DNA एवं RNA

🔳 *कोशिका के मुख्य भाग–* ▪️ *कोशिका झिल्ली* – यह एक अर्धपारगम्य झिल्ली होती है। ▪️यह कोशिका की निश्चित आकृति बनाए रखती है। ▪️यह लिपिड की बनी होती है। ▪️इसमें प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। ▪️ *कोशिका भित्ति* –यह केवल पादप कोशिकाओं में पाई जाती है। ▪️यह सैलूलोज की बनी होती है। ▪️जीवाणुओं की कोशिका भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन की बनी होती है। ▪️माइट्रोकंडिया–इसकी खोज अल्टमैन ने 1886 ईस्वी में की। ▪️यह कोशिका का श्वसन स्थल है। ▪️सी बेंडा ने सर्वप्रथम माइट्रोकंडिया नाम दिया। ▪️इसे पावरहाउस ऑफ द सेल कहा जाता है। ▪️ इसे यूकैरियोटिक कोशिकाओं के भीतर प्रोकैरियोटिक कोशिकाएं माना जाता है। ▪️ *राइबोसोम–* ▪️सर्वप्रथम जॉर्ज पैलेड ने इसे देखा। ▪️इसे प्रोटीन की फैक्ट्री कहा जाता है।

🔳 *कोशिका–* ▪️कोशिका *2 प्रकार* की होती है– ▪️ *प्रोकैरियोटिक* –हिस्टोन प्रोटीन नहीं होता। ▪️ केंद्रक अविकसित होता है। ▪️राइबोसोम 70S प्रकार का होता है। ▪️श्वसन प्लाज्मा झिल्ली द्वारा होता है। ▪️कोशिका विभाजन अर्ध सूत्री प्रकार का होता है। ▪️माइट्रोकंडिया अनुपस्थित होता है। ▪️डीएनए एकल सूत्र के रूप में उपस्थित होता है। ▪️ *यूकैरियोटिक कोशिका–* ▪️डीएनए के साथ हिस्टोन प्रोटीन लगे होते हैं। ▪️ केंद्रक पूर्ण विकसित होता है। ▪️माइट्रोकंडिया उपस्थित होता है । ▪️राइबोसोम 80S प्रकार का होता है। ▪️ डीएनए पूर्ण विकसित एवं दोहरे सूत्र के रूप में होता है।

🔳 *कोशिका विज्ञान–* ▪️इसका अध्ययन *साइंटोलॉजी* के अंतर्गत किया जाता है। ▪️कोशिका शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम *रॉबर्ट हुक* नामक वैज्ञानिक द्वारा किया गया। ▪️ *जीवद्रव्य* – इसका नामकरण पुरकिंजे द्वारा 1839 ईस्वी में किया गया। ▪️जीव की सारी जैविक क्रियाएं इसी के द्वारा होती है। ▪️ *कोशिका द्रव्य* – यह केंद्रक और कोशिका झिल्ली के बीच रहता है। यह केंद्रक को चारों तरफ से घेरे रहता है। ▪️ *केन्द्रक* –इसकी खोज *रॉबर्ट ब्राऊन* ने किया था। ▪️यह कोशिका द्रव्य में स्थित जीवद्रव्य का एक विशेष भाग है। ▪️जीव द्रव्य का लगभग 80% भाग जल है। ▪️जीवद्रव्य में कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों का अनुपात 19 : 81 है। ▪️ *जीव द्रव्य 99% भाग –* ऑक्सीजन, कार्बन, हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन से मिलकर बना होता है। ▪️ *कोशिका* – जीवन की सबसे छोटी कार्यात्मक एवं संरचनात्मक इकाई है। ▪️ कोशिका शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने 1665 ईस्वी में किया था। ▪️ *सबसे लंबी कोशिका तंत्रिका तंत्र* की कोशिका है। ▪️ *सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग के अंडे की कोशिका* है।