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UJJWAL IAS AYODHYA®™

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📈 تحلیل کانال تلگرام UJJWAL IAS AYODHYA®™

کانال UJJWAL IAS AYODHYA®™ (@ujjawaliasayodhya) در بخش زبانی هندی بازیگری فعال است. در حال حاضر جامعه شامل 21 757 مشترک است و جایگاه 9 249 را در دسته آموزش و رتبه 18 712 را در منطقه الهند دارد.

📊 شاخص‌های مخاطب و پویایی

از زمان ایجاد در невідомо، پروژه رشد سریعی داشته و 21 757 مشترک جذب کرده است.

بر اساس آخرین داده‌ها در تاریخ 26 اکتبر, 2026، کانال فعالیت پایداری دارد. در ۳۰ روز گذشته تغییر اعضا برابر 965 و در ۲۴ ساعت گذشته برابر 25 بوده و همچنان دسترسی گسترده‌ای حفظ شده است.

  • وضعیت تأیید: تأیید نشده
  • نرخ تعامل (ER): میانگین تعامل مخاطب 27.20% است و در ۲۴ ساعت نخست پس از انتشار، محتوا معمولاً 20.40% واکنش نسبت به کل مشترکان کسب می‌کند.
  • دسترسی پست‌ها: هر پست به طور میانگین 5 917 بازدید دریافت می‌کند. در اولین روز معمولاً 4 439 بازدید جمع‌آوری می‌شود.
  • واکنش‌ها و تعامل: مخاطبان به‌طور فعال حمایت می‌کنند؛ میانگین واکنش به هر پست 10 است.
  • علایق موضوعی: محتوا بر موضوعات کلیدی مانند टेस्ट, सफलता, मेहनत, तैयारी, सीरीज تمرکز دارد.

📝 توضیح و سیاست محتوایی

نویسنده این فضا را محل بیان دیدگاه‌های شخصی توصیف می‌کند:
“Ujjwal IAS official Telegram channel. Youtube- https://www.youtube.com/@UJJAWALIASAYODHYA App- https://play.google.com/store/apps/details?id=com.cbbzwd.oggulz”

به لطف به‌روزرسانی‌های پرتکرار (آخرین داده در تاریخ 27 اکتبر, 2026)، کانال همواره به‌روز و دارای دسترسی بالاست. تحلیل‌ها نشان می‌دهد مخاطبان به‌طور فعال با محتوا تعامل دارند و آن را به نقطه اثرگذاری مهم در دسته آموزش تبدیل کرده‌اند.

21 757
مشترکین
+2524 ساعت
+1697 روز
+96530 روز
آرشیو پست ها
🔳 *उत्सर्जन तन्त्र –* ▪️ *फेफड़ा* – इससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन श्वसन क्रिया के द्वारा होता है। ▪️ लहसुन प्याज और कुछ मसाले के वाष्पशील घटकों का भी उत्सर्जन होता है। ▪️ *यकृत* – इससे अमोनिया को यूरिया में परिवर्तित करता है। ▪️एमिनो अम्ल के नाइट्रोजनी पदार्थों का उत्सर्जन करता है। ▪️ *वृक्क( किडनी)–* यह स्तनधारियों में एक जोड़ी पाया जाता है। ▪️यह लगभग 10 लाख वृक्क नलिकाओं( नेफ्रॉन) से मिलकर बना होता है। ▪️नेफ्रांस , वृक्को की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। ▪️इसका कार्य मूत्र निर्माण एवं परासरण नियंत्रण( जल एवं खनिज का नियंत्रण) है। ▪️मूत्र का निर्माण वृक्क नलिकाओं में ही होता है। ▪️मूत्र में लगभग 95% जल ,2% अनावश्यक लवण , 2.3 % यूरिया , यूरिक अम्ल आदि पाए जाते है। ▪️मूत्र का pH मान 6 होता है। ▪️वृक्क की पथरी कैल्सियम ऑक्जेलेट की बनी होती है।

▪️ *प्लाज्मा* – यह निर्जीव तरल भाग है। ▪️इसके माध्यम से रासायनिक पदार्थों का संवहन होता है। ▪️ *रुधिर कणिकाएँ–* ▪️1. *लाल रुधिर कणिकाएँ (इरिथ्रोसाइट्स):* ये कणिकाएँ ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाने का काम करती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन को बांधता है, ▪️ *(2) श्वेत रुधिर कणिकाएँ (ल्यूकोसाइट्स):* ये कणिकाएँ संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। वे हानिकारक जीवाणुओं और मृत कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। ▪️( *3) प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट्स):* ये रुधिर के थक्का बनाने में मदद करते हैं, जिससे रक्तस्राव बंद हो जाता है। ▪️प्लाज्मा की कुल मात्रा कुल रुधिर का 55% होती है। ▪️एक सामान्य मनुष्य में हीमोग्लोबिन की मात्रा 15 ग्राम प्रति 100ml रुधिर होता है। ▪️शरीर में रुधिर का निर्माण लाल अस्थि मज्जा में होता है। ▪️लाल रुधिर कणिका का जीवन का लगभग 120 दिन होता है। 🔳 *रक्त समूह –* ▪️ *खोज* – कार्ल लैंडस्टीनर ▪️ *एंटीजन 2 प्रकार के होते है–* A और B ▪️ *एंटीबॉडी 2 प्रकार के होते है–* a और b ▪️ *रक्त समूह 4 प्रकार के होते है–* A, B ,AB और O ▪️ *AB रक्तसमूह को सर्वग्राही कहते है* । ▪️ *O रक्त समूह को सर्वदाता कहते है* ।

▪️हृदय के बाएं भाग में शुद्ध रक्त तथा दाहिने भाग में अशुद्ध रक्त बहता है। ▪️हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली वाहिनी को कोरोनरी धमनी कहते है। ▪️ *लसिका* – यह हल्का पीला द्रव्य होता है। ▪️इसमें मात्र श्वेत रूधिराणु पाए जाते हैं। ▪️ इसका बहाव केवल अंगों से हृदय की ओर होता है। ▪️ इसका कार्य लिंफोसाइट्स का निर्माण करना होता है। ▪️ इसमें उपस्थित लिंफोसाइट्स हानिकारक जीवाणुओं से शरीर की रक्षा करता है। ▪️ यह घाव भरने में सहायक होती है ▪️ *रुधिर* – यह एक तरल संयोजी ऊतक होता है। ▪️यह क्षारीय प्रकृति का होता है, इसका PH मान 7.4 है। ▪️वयस्क मनुष्य में लगभग 5 से 7 लीटर रुधिर होता है। ▪️ रुधिर के दो भाग होते हैं: प्लाज्मा और रक्तकणिका

🔳 *परिसंचरण तंत्र–* ▪️रक्त परिसंचरण की खोज विलियम हार्वे ने की। ▪️ *हृदय* – यह रक्त परिसंचरण का केंद्रीय भाग है। ▪️यह चार कोष्ठों का बना होता है– दायां अलिंद, बाया अलिंद, दायां निलय, एवं बायां निलय ▪️यह एक मिनिट में 72 बार धड़कता है। ▪️एक धड़कन में 70 मिली. रक्त पंप करता है। ▪️सामान्य मनुष्य का रक्त दाब 120/ 80 mm. Hg होता है। ▪रक्तदाब मापने के लिए स्फाइगमोमैनोमीटर का प्रयोग करते है। ▪️शरीर में अत्यधिक अम्लीयत हृदयगति को बढ़ाती है, जबकि अत्यधिक छारीयता हृदय गति को अनियमित करती है। ▪️ *शिरा* – शरीर से हृदय की ओर रक्त ले जाती है। ▪️इसमें अशुद्ध रक्त अर्थात कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त होता है। ▪️पल्मोनरी शिरा में शुद्ध रक्त होता है । ▪️ *धमनी* – हृदय से शरीर की ओर रक्त ले जाती हैं। ▪️ इसमें शुद्ध रक्त अर्थात ऑक्सीजन युक्त रक्त होता है। ▪️ पलमोनरी धमनी में अशुद्ध रक्त होता है।

🔳 *यकृत –* ▪️यह मनुष्य के शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। ▪️यह ग्लूकोज की अधिक मात्रा को ग्लाइकोजन में परिवर्तित करती है। ▪️यकृत में फाइब्रिनोजेन प्रोटीन का निर्माण होता है जो विटामिन K के साथ रुधिर का थक्का जमने में सहायक होता है। ▪️प्रोटीन की अधिक मात्रा को कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तित करता है। ▪️हिपैरिन प्रोटीन का निर्माण करता है। ▪️यह पित्त का संश्लेषण करती है। ▪️पित्त पित्ताशय में एकत्र रहता है। ▪️पित्त भोजन में आए हुए जीवाणुओं को नष्ट करता है। ▪️पित्तरस वसा का इमल्सीकरण करता है। ▪️ *अग्नाशय* – मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि। ▪️यह अंतस्रावी एवं बहिस्रावी दोनों प्रकार की ग्रंथि है। ▪️इसमें कार्बोहाइड्रेट वसा एवं प्रोटीन को पचाने वाले एंजाइम पाए जाते हैं। ▪️अग्नाशयी रस को पूर्ण पाचक रस कहा जाता है। ▪️ *इन्सुलिन* – *खोज* – बैटिंग एवं बेस्ट ने ▪️ यह ग्लूकोस से ग्लाइकोजन के निर्माण की क्रिया को नियंत्रित करता है। ▪️ इसकी कमी से मधुमेह नामक रोग होता है। ▪️ इसकी अधिकता से हाइपोगलासिमिया नामक रोग होता है।

▪️ *आमाशय* – इसके पाइलोरिक ग्रंथियां से जठर रस का श्रावण होता है। ▪️जठर रस में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पाया जाता है। ▪️यह भोजन को अम्लीय बना देता है, तथा भोजन पर लार के प्रभाव को समाप्त कर देता है। ▪️जठर रस में पेप्सिन एवं रेनिन नामक एंजाइम होते हैं । ▪️पेप्सिन प्रोटीन का पाचन करके पेप्टोंस में परिवर्तित कर देता है। ▪️रेनिंग दुग्ध के पाचन में सहायक होता है। ▪️ *छोटी आंत –* ग्रहणी में ट्रिप्सिन एंजाइम प्रोटीन को प्रोटिओसेज एवं पेप्टोज में तोड़ता है। ▪️एमाइलेज–यह काईम की मंड ,ग्लाइकोजन एवं अन्य पॉलिसैकेराइड्स को माल्टोज ,लैक्टोज और सुक्रोज नामक डाइसैकेराइड शर्करा में तोड़ता है। ▪️ *लाइपेज* – यह एमलसिफाइड वसा का ग्लिसरीन एवं फैटी एसिड में परिवर्तन करता है। ▪️आंत्रीय रस क्षारीय होता है ,तथा एक स्वस्थ मनुष्य में प्रतिदिन 2 लीटर आंत्रीय रस स्रावित होता है। ▪️ छोटी आंत में भोजन की पाचन क्रिया पूर्ण होती है एवं बचे हुए भोजन का अवशोषण होता है। ▪️अवशोषण के पश्चात बड़ी आत मल इकट्ठा होता है तथा गुदाद्वार से बाहर निकलता है।

🔳 *मानव शरीर पाचन तंत्र–* ▪️मनुष्य के आहार नाल की लंबाई 8 से 10 मीटर तक होती है। ▪️ छोटी आत की लंबाई लगभग 6 मीटर होती है। ▪️ *दांत* – मनुष्य के दोनों जबड़े में 16-16 अर्थात कुल 32 दांत होते हैं। ▪️2 कृंतक, 1 रदनक, 2 अग्रचवर्णक, 3 चवर्णक ▪️दांत की ऊपरी परत कैल्शियम फास्फेट एवं कैल्शियम कार्बोनेट की बनी होती है। ▪️इनैमल सबसे कठोर पदार्थ होता है। ▪️ *जीभ* – यह एक मांसल पेशी है। ▪️इसका आगे का भाग मीठा, पीछे का भाग तीखा, एवं दोनों बगल के भाग खट्टे का अनुभव करते है। ▪️ *लार ग्रंथियां* – तीन जोड़ी पाई जाती है। ▪️लार में 99% जल और 1 % एंजाइम , प्रोटीन , एवं लवण होता है। ▪️टायलिन एवं लाइसोजाइम एंजाइम पाए जाते है । ▪️ इनका कार्य भोजन का पाचन एवं जीवाणु रहित करने का होता है।

🔳 *कुछ फल तथा उनके खाने योग्य भाग–* ▪️अनार – बीजों के रसदार वाह्य चोल ▪️आम – मध्य फल भित्ति ▪️अमरूद – फल भित्ति ▪️सेब – मांसल पुष्पासन ▪️नासपती – मांसल पुष्पासन ▪️मक्का – भ्रूण तथा भ्रूणपोष ▪️गेहूं – भ्रूण तथा भ्रूणपोष ▪️काजू – पुष्पवृत एवं बीजपत्र ▪️नींबू – अतः फलभित्ति के रसदार रोम ▪️अंगूर – फलभित्ति ▪️टमाटर – फलभित्ति ▪️केला – मध्य एवं अतःफलभित्ति ▪️मुंगफली – भ्रूण ▪️कटहल – परीदलपुंज व बीज ▪️ इमली –मध्य फल भित्ति ▪️ सिंघाड़ा – बीज

🔳 *जड़ –* ▪️ये पौधों के अवरोही भाग है। ▪️ *मूसला जड़* – अंकुरण के समय मूलांकुर बढ़कर प्राथमिक जड़ का निर्माण करती है, इससे अनेक द्वितीयक एवं तृतीयक जड़ निकलते हैं। ▪️ *अपस्थानिक जड़ –* पौधों के मूलांकुर के अतिरिक्त, अन्य किसी भी भाग से निकलने वाली जड़। ▪️ *झकड़ा जड़ –* इन जड़ों से कुछ पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण होता है। ▪️गाजर ,मूली, शलजम जड़ों के रूपांतरण हैं, इनमें जड़ भोजन संग्रहण का कार्य करती है। ▪️ *तना –* यह सूर्य के प्रकाश की ओर विकसित होता है। ▪️आलू ,अदरक, हल्दी, लहसुन तथा प्याज रूपांतरित तना है। ▪️ *पत्ती* – यह प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा भोजन बनाती हैं। ▪️कुछ पौधों की पत्तियां कांटों में रूपांतरित हो जाती हैं जैसे– नागफनी ▪️ *पुष्प* – यह पौधों का जनन अंग होता है। ▪️पुमंग नर जननांग है और जायांग मादा जननांग। ▪️पुमंग में एक से अधिक पुंकेसर होते हैं। ▪️ *फल* –परिपक्व अंडाशय को फल कहते हैं।

🔳 *एक बीजपत्री पौधों के कुल से संबंधित पौधे –* ▪️ *आर्किडेसी* – आर्किड, हेबीनेरिया, वेडा ▪️ *लिलीएसी* – लहसुन, प्याज, एलोवेरा ▪️ *एरीकेसी* – सुपारी , नारियल, खजूर , ताड़ ▪ *पोएसी* – गेहूं, मक्का, चावल, ज्वार, बाजरा, गन्ना, बांस ▪️ *द्विबीजपत्री पौधों से संबंधित कुल तथा प्रमुख पौधे–* ▪️ *क्रूसिफेरी* – सरसों, मूली शलजम ▪️ *मालवेसी* – भिंडी, गुड़हल, कपास, पटसन ▪️ *लेगुमीनोसी* – शीशम, बबुल, अशोक, गुलमोहर, छुईमुई, मेथी , सनई , इमली, सभी दलहन। ▪️ *एस्ट्रेसिए* – सूरजमुखी, भ्रीगराज , गेंदा, कुसुम, कुश, आदि। ▪️ *कुकरबिटिसी* – कद्दू, खीरा , तरबूज, खरबूज, टिंडा, परवल, करेला, ककड़ी, तुरई ▪️ *रोजासी* – सेब, बादाम, नासपती, स्ट्रॉबेरी ▪️ *रूटीसी* – नींबू , संतरा, मुसंबी, बेल

🔳 *प्रमुख पादप हार्मोन –* ▪️ *ऑक्सिन* – यह खोजा गया प्रथम पादप हार्मोन था। ▪️ यह पौधे के ऊपरी भाग में पाया जाता है। ▪️ इससे पौधों की वृद्धि होती है। ▪️ *जिब्रेलिन* – यह पौधों को लंबा करने में सहायक होता है। ▪️ यह बीजों को अंकुरण के लिए प्रेरित करता है। ▪️ *साइटोकायनिन* – यह कोशिका विभाजन और विकास में मदद करता है। ▪️यह प्रोटीन एवं RNA के निर्माण में सहायक है ▪️ *एब्सिसिक एसिड* – यह एक वृद्धि रोधी हार्मोन है। ▪️यह बीजों को सुप्ता अवस्था में रखने में सहायक होता है। ▪️ *एथलीन* – यह गैसीय अवस्था में पाया जाने वाला एकमात्र हार्मोन है। ▪️ यह फलों को पकाने तथा पुष्पों की संख्या में वृद्धि में सहायक होता है। ▪️इसे फूल खिलाने वाला हार्मोन कहते हैं ।

▪️ *पौधे नाइट्रेट के रूप में नाइट्रोजन लेते हैं* ,नाइट्रोजन का नाइट्रेट्स में परिवर्तन जीवाणुओं द्वारा होता है। ▪️एजोटोबेक्टर, क्लॉडीस्ट्रेडियम आदि जीवाणु पृथ्वी पर मिट्टी में स्थित वायु के नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। ▪️एनाबीना और नॉस्टॉक आदि सायनोबैक्टीरिया वायुमंडल नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। ▪️नायट्रोसोकोकस एवं नाइट्रोसोमोनस जीवाणु अमोनिया को नाइट्राइट में बदलते हैं। ▪️ जीवाणुओं का उपयोग चर्म शोधन तथा रेशे की रेटिंग में भी होता है। ▪️ब्रायोफाइटा भ्रूण बनाने वाले पादप समूह का एक सरल व आद्य समूह है। ▪️इसे वनस्पति जगत का एंफीबिया वर्ग भी कहा जाता है। ▪️आवृतबीजी पौधों में बीज फल के अंदर होते हैं। ▪️आवृतबीजी पौधों के जड़, तना ,पत्ती, फल फूल सभी पूर्ण विकसित होते हैं। ▪️अनावृतबीजी पौधों में अंडाशय का पूर्णता अभाव होता है। ▪️एकबीज पत्री पौधों में एक बीज पत्र पाया जाता है। ▪️द्विबीजपत्री पौधों में दो बीज पत्र पाया जाता है ।

🔳 *विषाणु –* ▪️ *खोज* – 1892 ईस्वी में इवानोवश्की द्वारा। ▪️यह केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ▪️इन्हें सजीव एवं निर्जीवों के बीच की कड़ी कहा जाता है। ▪️ यह कोशिका के बाहर निष्क्रिय रूप में होते हैं तथा जीवित कोशिका में पहुंचते ही सक्रिय हो जाते हैं। ▪️ इनकी रासायनिक संरचना में न्यूक्लिक अम्ल का एक केंद्रीय कोड होता है, जो एक प्रोटीन आवरण से ढका होता है । ▪️ *पादप विषाणु–* इनमें RNA होता है, परंतु कभी कभी DNA पाया जाता। ▪️ *जंतु विषाणु–* इनमें DNA होता है, कभी कभी RNA भी होता है। ▪️ *कवक* – इसका अध्ययन *माइकोलॉजी* कहलाता है। ▪️यह क्लोरोफिल रहित संकेंद्रीय संवहन ऊतक रहित थाइलोफाइट है। ▪️इनकी कोशिका भित्ति सैलूलोज से बनी होती है। ▪️ *जीवाणु –* इनका अध्ययन *बैक्टीरियोलॉजी* कहलाता है। ▪️इनकी *खोज* 1683 ईस्वी में *ल्यूवेनहॉक* ने किया। इन्हें जीवाणु विज्ञान का पिता कहा जाता है। ▪️ *रॉबर्ट कोच ने कालरा* तथा *क्षय रोग* के जीवाणुओं की खोज की। ▪️ *लुई पाश्चर ने रेबीज* के टीके की खोज की।

🔳 *वनस्पति विज्ञान –* ▪️ *जनक* – थ्रियोफ्रेस्टस ▪️पौधों में कोशिका भित्ति पाई जाती है, जंतुओं में कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती। ▪️पौधे क्लोरोफिल की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा अपना भोजन तैयार करते हैं,इसलिए पौधों को स्वपोषी कहते हैं। ▪️ऐसे पौधे जिनमें बीज तथा पुष्प नहीं पाए जाते हैं क्रिप्टोगेम्स कहते हैं। ▪️ *शैवाल* – इसका अध्ययन *फ़ाइकोलॉजी* कहलाता है। ▪️ये क्लोरोफिल युक्त, संवहन उत्तक रहित स्वपोषी होते हैं। ▪️शैवाल का उपयोग भोजन के रूप में( अल्वा , सारगासम, एलेरिया, लेमिनेरिया) ,औषधीय बनाने में ( क्लोरला),खाद बनाने में(एनाबीना, नॉस्तोक),आयोडीन बनाने (लिमिनोरिया) में किया जाता है। 🔳 *पौधों में तत्वों की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग–* ▪️धान का खैरा रोग – जस्ता की कमी ▪️चुकंदर का हार्ट रॉट – बोरान की कमी ▪️नींबू में डाईबैंक रोग – तांबा की कमी ▪️नींबू में लिटिल लीफ रोग – जस्ता ( जिंक) की कमी ▪️फूलगोभी में ब्राउनिंग रोग – बोरान की कमी ▪️सेब में आंतरिक काग – बोरान की कमी ▪️पत्तागोभी में व्हिपटेल रोग – मालीब्लेडनम की कमी

▪️ *DNA अणु की डबलकुंडली त्रिविम प्रतिरूप* वाटसन एवं क्रिक ने वर्ष 1953 में प्रस्तुत किया। ▪️कोशिकाओं में DNA अनुवांशिक पदार्थ होता है। ▪️ *DNA की खोज* फेड्रिक मिंसर ने 1869 ईस्वी में की। ▪️DNA सभी अनुवांशिक क्रियाओं का संचालन करता है, और प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है। ▪️ जीन DNA से बने होते है। ▪️ *मानव में कुल 23 जोड़ी, अर्थात 46 गुणसूत्र होते है।* ▪️ *22 जोड़ी गुणसूत्र को ऑटोसोम्स* कहते है, ये एक समान होते है। ▪️ *23वा जोड़ी गुणसूत्र स्त्री और पुरुष में समान नहीं होते है, इन्हें हिट्रोसमस कहते है।* ▪️डॉली नमक भेड़ का क्लोन विश्व में किसी स्तनधारी जीव का प्रथम क्लोन था। ▪️पौधों के जड़ तना एवं पत्ती द्वारा जनन कायिक प्रवर्धन कहलाता है। ▪️स्टेम सेल में शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता होती है। ▪️डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग शिशु का पितृत्व स्थापित करने, मानसिक रोगों की पहचान, पशुओं की वंशावली स्थापित करने में किया जाता है। ▪️ गोल्डन राइस जैव प्रौद्योगिकी की उपलब्धि है इसके जन्मदाता प्रोफेसर इंगो पैट्रिक्स एवं डॉक्टर पीटर बियर है।

🔳 *जैव विकास–* ▪️जैव विकास का पहला सिद्धांत फ्रांसीसी जीव वैज्ञानिक डी लैमार्क ने 1809 में अपनी पुस्तक फिलासफी जूलॉजी में प्रकाशित किया। ▪️जीवो के शरीर में जो भी परिवर्तन होता है उन्हें उपार्जित लक्षण कहते हैं। यह वंशानुगत होता है। ▪️ जैव विकास परिकल्पना का दूसरा सिद्धांत 1831 में डार्विन ने दिया था । ▪️डार्विनवाद को प्राकृतिक वरर्णवाद भी कहते हैं। ▪️ह्यूगो डी ब्रिज द्वारा उत्परिवर्तनवाद का सिद्धांत प्रस्तुत किया गया। ▪️सभी जीव जंतुओं में उत्परिवर्तन का प्राकृतिक गुण होता है। ▪️ *आनुवांशिकी –* ▪️ ग्रेगर जॉन मेंडल को आनुवंशिकी का पिता कहा जाता है। ▪️विलियम बैटसन ने वर्ष 1905 में सर्वप्रथम जेनेटिक्स का नाम का उपयोग किया। ▪️जीन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जोहांसन ने किया। ▪️1888 ईस्वी में सर्वप्रथम डब्लू वालडेयर ने गुणसूत्र नामक शब्द का प्रयोग किया। ▪️गुणसूत्र सभी अनुवांशिक गुण को निर्धारित व संचारित करता है। प्रत्येक जीन में गुणसूत्र की संख्या निश्चित होती है। ▪️DNA पॉलिमरेज नामक एंजाइम से डीएनए का संश्लेषण होता है ,इसकी खोज कार्नबर्ग ने की।

▪️ *गाल्जीकाय* – *खोज* – कैमिलो गाल्जी द्वारा। ▪️यह जीवाणु एवं नीले हरे शैवालों में अनुपस्थित होता है। ▪️यह कोशिका भित्ति एवं लाइसोसोम का निर्माण करता है। ▪️इसे कोशिका का ट्रैफिक पुलिस कहा जाता है। ▪️ *लाइसोसोम* – *खोज* – डी डुवे द्वारा। ▪️इसे आत्महत्या की थैली कहा जाता है। ▪️इसका कार्य वाह्य पदार्थ का पाचन करना है। ▪️ *सेंट्रोसोम* – *खोज* – एडुआर्ड वान बेनेडेन द्वारा। ▪️ यह केवल जंतु कोशिका में पाया जाता है। ▪️ यह कोशिका विभाजन में भाग लेता है। ▪️ *लवक* – *खोज* – हेकल द्वारा। ▪️यह प्रायः पादप कोशिकाओं में पाया जाता है। ▪️हरित लवक में क्लोरोफिल नामक हरे रंग का वर्णक पाया जाता है। ▪️हरित लवक को कोशिका का रसोई घर कहते हैं। ▪️ *केंद्रक* –केंद्रक के चार भाग होते हैं –केंद्रककला ,केंद्रकद्रव्य, केंद्रिका एवं क्रोमेटीनधागे ▪️ *केंद्रीका की खोज* फोंटना ने की। ▪️ क्रोमेटिन एक न्यूक्लियोप्रोटीन है जो न्यूक्लिक अम्ल एवं छारिया प्रोटीन के मिश्रण से बना होता है। ▪️ *न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार का होता है–* DNA एवं RNA

🔳 *कोशिका के मुख्य भाग–* ▪️ *कोशिका झिल्ली* – यह एक अर्धपारगम्य झिल्ली होती है। ▪️यह कोशिका की निश्चित आकृति बनाए रखती है। ▪️यह लिपिड की बनी होती है। ▪️इसमें प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। ▪️ *कोशिका भित्ति* –यह केवल पादप कोशिकाओं में पाई जाती है। ▪️यह सैलूलोज की बनी होती है। ▪️जीवाणुओं की कोशिका भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन की बनी होती है। ▪️माइट्रोकंडिया–इसकी खोज अल्टमैन ने 1886 ईस्वी में की। ▪️यह कोशिका का श्वसन स्थल है। ▪️सी बेंडा ने सर्वप्रथम माइट्रोकंडिया नाम दिया। ▪️इसे पावरहाउस ऑफ द सेल कहा जाता है। ▪️ इसे यूकैरियोटिक कोशिकाओं के भीतर प्रोकैरियोटिक कोशिकाएं माना जाता है। ▪️ *राइबोसोम–* ▪️सर्वप्रथम जॉर्ज पैलेड ने इसे देखा। ▪️इसे प्रोटीन की फैक्ट्री कहा जाता है।

🔳 *कोशिका–* ▪️कोशिका *2 प्रकार* की होती है– ▪️ *प्रोकैरियोटिक* –हिस्टोन प्रोटीन नहीं होता। ▪️ केंद्रक अविकसित होता है। ▪️राइबोसोम 70S प्रकार का होता है। ▪️श्वसन प्लाज्मा झिल्ली द्वारा होता है। ▪️कोशिका विभाजन अर्ध सूत्री प्रकार का होता है। ▪️माइट्रोकंडिया अनुपस्थित होता है। ▪️डीएनए एकल सूत्र के रूप में उपस्थित होता है। ▪️ *यूकैरियोटिक कोशिका–* ▪️डीएनए के साथ हिस्टोन प्रोटीन लगे होते हैं। ▪️ केंद्रक पूर्ण विकसित होता है। ▪️माइट्रोकंडिया उपस्थित होता है । ▪️राइबोसोम 80S प्रकार का होता है। ▪️ डीएनए पूर्ण विकसित एवं दोहरे सूत्र के रूप में होता है।

🔳 *कोशिका विज्ञान–* ▪️इसका अध्ययन *साइंटोलॉजी* के अंतर्गत किया जाता है। ▪️कोशिका शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम *रॉबर्ट हुक* नामक वैज्ञानिक द्वारा किया गया। ▪️ *जीवद्रव्य* – इसका नामकरण पुरकिंजे द्वारा 1839 ईस्वी में किया गया। ▪️जीव की सारी जैविक क्रियाएं इसी के द्वारा होती है। ▪️ *कोशिका द्रव्य* – यह केंद्रक और कोशिका झिल्ली के बीच रहता है। यह केंद्रक को चारों तरफ से घेरे रहता है। ▪️ *केन्द्रक* –इसकी खोज *रॉबर्ट ब्राऊन* ने किया था। ▪️यह कोशिका द्रव्य में स्थित जीवद्रव्य का एक विशेष भाग है। ▪️जीव द्रव्य का लगभग 80% भाग जल है। ▪️जीवद्रव्य में कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों का अनुपात 19 : 81 है। ▪️ *जीव द्रव्य 99% भाग –* ऑक्सीजन, कार्बन, हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन से मिलकर बना होता है। ▪️ *कोशिका* – जीवन की सबसे छोटी कार्यात्मक एवं संरचनात्मक इकाई है। ▪️ कोशिका शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने 1665 ईस्वी में किया था। ▪️ *सबसे लंबी कोशिका तंत्रिका तंत्र* की कोशिका है। ▪️ *सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग के अंडे की कोशिका* है।