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📊 受众指标与增长动态
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- 帖子覆盖: 每篇帖子平均可获得 5 917 次浏览,首日通常累积 4 439 次浏览。
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📝 描述与内容策略
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🔳 *उत्सर्जन तन्त्र –*
▪️ *फेफड़ा* – इससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन श्वसन क्रिया के द्वारा होता है।
▪️ लहसुन प्याज और कुछ मसाले के वाष्पशील घटकों का भी उत्सर्जन होता है।
▪️ *यकृत* – इससे अमोनिया को यूरिया में परिवर्तित करता है।
▪️एमिनो अम्ल के नाइट्रोजनी पदार्थों का उत्सर्जन करता है।
▪️ *वृक्क( किडनी)–* यह स्तनधारियों में एक जोड़ी पाया जाता है।
▪️यह लगभग 10 लाख वृक्क नलिकाओं( नेफ्रॉन) से मिलकर बना होता है।
▪️नेफ्रांस , वृक्को की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है।
▪️इसका कार्य मूत्र निर्माण एवं परासरण नियंत्रण( जल एवं खनिज का नियंत्रण) है।
▪️मूत्र का निर्माण वृक्क नलिकाओं में ही होता है।
▪️मूत्र में लगभग 95% जल ,2% अनावश्यक लवण , 2.3 % यूरिया , यूरिक अम्ल आदि पाए जाते है।
▪️मूत्र का pH मान 6 होता है।
▪️वृक्क की पथरी कैल्सियम ऑक्जेलेट की बनी होती है।
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▪️ *प्लाज्मा* – यह निर्जीव तरल भाग है।
▪️इसके माध्यम से रासायनिक पदार्थों का संवहन होता है।
▪️ *रुधिर कणिकाएँ–*
▪️1. *लाल रुधिर कणिकाएँ (इरिथ्रोसाइट्स):*
ये कणिकाएँ ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाने का काम करती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन को बांधता है,
▪️ *(2) श्वेत रुधिर कणिकाएँ (ल्यूकोसाइट्स):*
ये कणिकाएँ संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। वे हानिकारक जीवाणुओं और मृत कोशिकाओं को नष्ट करते हैं।
▪️( *3) प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट्स):*
ये रुधिर के थक्का बनाने में मदद करते हैं, जिससे रक्तस्राव बंद हो जाता है।
▪️प्लाज्मा की कुल मात्रा कुल रुधिर का 55% होती है।
▪️एक सामान्य मनुष्य में हीमोग्लोबिन की मात्रा 15 ग्राम प्रति 100ml रुधिर होता है।
▪️शरीर में रुधिर का निर्माण लाल अस्थि मज्जा में होता है।
▪️लाल रुधिर कणिका का जीवन का लगभग 120 दिन होता है।
🔳 *रक्त समूह –*
▪️ *खोज* – कार्ल लैंडस्टीनर
▪️ *एंटीजन 2 प्रकार के होते है–* A और B
▪️ *एंटीबॉडी 2 प्रकार के होते है–* a और b
▪️ *रक्त समूह 4 प्रकार के होते है–* A, B ,AB और O
▪️ *AB रक्तसमूह को सर्वग्राही कहते है* ।
▪️ *O रक्त समूह को सर्वदाता कहते है* ।
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▪️हृदय के बाएं भाग में शुद्ध रक्त तथा दाहिने भाग में अशुद्ध रक्त बहता है।
▪️हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली वाहिनी को कोरोनरी धमनी कहते है।
▪️ *लसिका* – यह हल्का पीला द्रव्य होता है।
▪️इसमें मात्र श्वेत रूधिराणु पाए जाते हैं।
▪️ इसका बहाव केवल अंगों से हृदय की ओर होता है।
▪️ इसका कार्य लिंफोसाइट्स का निर्माण करना होता है।
▪️ इसमें उपस्थित लिंफोसाइट्स हानिकारक जीवाणुओं से शरीर की रक्षा करता है।
▪️ यह घाव भरने में सहायक होती है
▪️ *रुधिर* – यह एक तरल संयोजी ऊतक होता है।
▪️यह क्षारीय प्रकृति का होता है, इसका PH मान 7.4 है।
▪️वयस्क मनुष्य में लगभग 5 से 7 लीटर रुधिर होता है।
▪️ रुधिर के दो भाग होते हैं: प्लाज्मा और रक्तकणिका
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🔳 *परिसंचरण तंत्र–*
▪️रक्त परिसंचरण की खोज विलियम हार्वे ने की।
▪️ *हृदय* – यह रक्त परिसंचरण का केंद्रीय भाग है।
▪️यह चार कोष्ठों का बना होता है– दायां अलिंद, बाया अलिंद, दायां निलय, एवं बायां निलय
▪️यह एक मिनिट में 72 बार धड़कता है।
▪️एक धड़कन में 70 मिली. रक्त पंप करता है।
▪️सामान्य मनुष्य का रक्त दाब 120/ 80 mm. Hg होता है।
▪रक्तदाब मापने के लिए स्फाइगमोमैनोमीटर का प्रयोग करते है।
▪️शरीर में अत्यधिक अम्लीयत हृदयगति को बढ़ाती है, जबकि अत्यधिक छारीयता हृदय गति को अनियमित करती है।
▪️ *शिरा* – शरीर से हृदय की ओर रक्त ले जाती है।
▪️इसमें अशुद्ध रक्त अर्थात कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त होता है।
▪️पल्मोनरी शिरा में शुद्ध रक्त होता है ।
▪️ *धमनी* – हृदय से शरीर की ओर रक्त ले जाती हैं।
▪️ इसमें शुद्ध रक्त अर्थात ऑक्सीजन युक्त रक्त होता है।
▪️ पलमोनरी धमनी में अशुद्ध रक्त होता है।
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🔳 *यकृत –*
▪️यह मनुष्य के शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है।
▪️यह ग्लूकोज की अधिक मात्रा को ग्लाइकोजन में परिवर्तित करती है।
▪️यकृत में फाइब्रिनोजेन प्रोटीन का निर्माण होता है जो विटामिन K के साथ रुधिर का थक्का जमने में सहायक होता है।
▪️प्रोटीन की अधिक मात्रा को कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तित करता है।
▪️हिपैरिन प्रोटीन का निर्माण करता है।
▪️यह पित्त का संश्लेषण करती है।
▪️पित्त पित्ताशय में एकत्र रहता है।
▪️पित्त भोजन में आए हुए जीवाणुओं को नष्ट करता है।
▪️पित्तरस वसा का इमल्सीकरण करता है।
▪️ *अग्नाशय* – मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि।
▪️यह अंतस्रावी एवं बहिस्रावी दोनों प्रकार की ग्रंथि है।
▪️इसमें कार्बोहाइड्रेट वसा एवं प्रोटीन को पचाने वाले एंजाइम पाए जाते हैं।
▪️अग्नाशयी रस को पूर्ण पाचक रस कहा जाता है।
▪️ *इन्सुलिन* – *खोज* – बैटिंग एवं बेस्ट ने
▪️ यह ग्लूकोस से ग्लाइकोजन के निर्माण की क्रिया को नियंत्रित करता है।
▪️ इसकी कमी से मधुमेह नामक रोग होता है।
▪️ इसकी अधिकता से हाइपोगलासिमिया नामक रोग होता है।
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▪️ *आमाशय* – इसके पाइलोरिक ग्रंथियां से जठर रस का श्रावण होता है।
▪️जठर रस में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पाया जाता है।
▪️यह भोजन को अम्लीय बना देता है, तथा भोजन पर लार के प्रभाव को समाप्त कर देता है।
▪️जठर रस में पेप्सिन एवं रेनिन नामक एंजाइम होते हैं ।
▪️पेप्सिन प्रोटीन का पाचन करके पेप्टोंस में परिवर्तित कर देता है।
▪️रेनिंग दुग्ध के पाचन में सहायक होता है।
▪️ *छोटी आंत –* ग्रहणी में ट्रिप्सिन एंजाइम प्रोटीन को प्रोटिओसेज एवं पेप्टोज में तोड़ता है।
▪️एमाइलेज–यह काईम की मंड ,ग्लाइकोजन एवं अन्य पॉलिसैकेराइड्स को माल्टोज ,लैक्टोज और सुक्रोज नामक डाइसैकेराइड शर्करा में तोड़ता है।
▪️ *लाइपेज* – यह एमलसिफाइड वसा का ग्लिसरीन एवं फैटी एसिड में परिवर्तन करता है।
▪️आंत्रीय रस क्षारीय होता है ,तथा एक स्वस्थ मनुष्य में प्रतिदिन 2 लीटर आंत्रीय रस स्रावित होता है।
▪️ छोटी आंत में भोजन की पाचन क्रिया पूर्ण होती है एवं बचे हुए भोजन का अवशोषण होता है।
▪️अवशोषण के पश्चात बड़ी आत मल इकट्ठा होता है तथा गुदाद्वार से बाहर निकलता है।
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🔳 *मानव शरीर पाचन तंत्र–*
▪️मनुष्य के आहार नाल की लंबाई 8 से 10 मीटर तक होती है।
▪️ छोटी आत की लंबाई लगभग 6 मीटर होती है।
▪️ *दांत* – मनुष्य के दोनों जबड़े में 16-16 अर्थात कुल 32 दांत होते हैं।
▪️2 कृंतक, 1 रदनक, 2 अग्रचवर्णक, 3 चवर्णक
▪️दांत की ऊपरी परत कैल्शियम फास्फेट एवं कैल्शियम कार्बोनेट की बनी होती है।
▪️इनैमल सबसे कठोर पदार्थ होता है।
▪️ *जीभ* – यह एक मांसल पेशी है।
▪️इसका आगे का भाग मीठा, पीछे का भाग तीखा, एवं दोनों बगल के भाग खट्टे का अनुभव करते है।
▪️ *लार ग्रंथियां* – तीन जोड़ी पाई जाती है।
▪️लार में 99% जल और 1 % एंजाइम , प्रोटीन , एवं लवण होता है।
▪️टायलिन एवं लाइसोजाइम एंजाइम पाए जाते है ।
▪️ इनका कार्य भोजन का पाचन एवं जीवाणु रहित करने का होता है।
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🔳 *कुछ फल तथा उनके खाने योग्य भाग–*
▪️अनार – बीजों के रसदार वाह्य चोल
▪️आम – मध्य फल भित्ति
▪️अमरूद – फल भित्ति
▪️सेब – मांसल पुष्पासन
▪️नासपती – मांसल पुष्पासन
▪️मक्का – भ्रूण तथा भ्रूणपोष
▪️गेहूं – भ्रूण तथा भ्रूणपोष
▪️काजू – पुष्पवृत एवं बीजपत्र
▪️नींबू – अतः फलभित्ति के रसदार रोम
▪️अंगूर – फलभित्ति
▪️टमाटर – फलभित्ति
▪️केला – मध्य एवं अतःफलभित्ति
▪️मुंगफली – भ्रूण
▪️कटहल – परीदलपुंज व बीज
▪️ इमली –मध्य फल भित्ति
▪️ सिंघाड़ा – बीज
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🔳 *जड़ –*
▪️ये पौधों के अवरोही भाग है।
▪️ *मूसला जड़* – अंकुरण के समय मूलांकुर बढ़कर प्राथमिक जड़ का निर्माण करती है, इससे अनेक द्वितीयक एवं तृतीयक जड़ निकलते हैं।
▪️ *अपस्थानिक जड़ –* पौधों के मूलांकुर के अतिरिक्त, अन्य किसी भी भाग से निकलने वाली जड़।
▪️ *झकड़ा जड़ –* इन जड़ों से कुछ पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण होता है।
▪️गाजर ,मूली, शलजम जड़ों के रूपांतरण हैं, इनमें जड़ भोजन संग्रहण का कार्य करती है।
▪️ *तना –* यह सूर्य के प्रकाश की ओर विकसित होता है।
▪️आलू ,अदरक, हल्दी, लहसुन तथा प्याज रूपांतरित तना है।
▪️ *पत्ती* – यह प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा भोजन बनाती हैं।
▪️कुछ पौधों की पत्तियां कांटों में रूपांतरित हो जाती हैं जैसे– नागफनी
▪️ *पुष्प* – यह पौधों का जनन अंग होता है।
▪️पुमंग नर जननांग है और जायांग मादा जननांग।
▪️पुमंग में एक से अधिक पुंकेसर होते हैं।
▪️ *फल* –परिपक्व अंडाशय को फल कहते हैं।
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🔳 *एक बीजपत्री पौधों के कुल से संबंधित पौधे –*
▪️ *आर्किडेसी* – आर्किड, हेबीनेरिया, वेडा
▪️ *लिलीएसी* – लहसुन, प्याज, एलोवेरा
▪️ *एरीकेसी* – सुपारी , नारियल, खजूर , ताड़
▪ *पोएसी* – गेहूं, मक्का, चावल, ज्वार, बाजरा, गन्ना, बांस
▪️ *द्विबीजपत्री पौधों से संबंधित कुल तथा प्रमुख पौधे–*
▪️ *क्रूसिफेरी* – सरसों, मूली शलजम
▪️ *मालवेसी* – भिंडी, गुड़हल, कपास, पटसन
▪️ *लेगुमीनोसी* – शीशम, बबुल, अशोक, गुलमोहर, छुईमुई, मेथी , सनई , इमली, सभी दलहन।
▪️ *एस्ट्रेसिए* – सूरजमुखी, भ्रीगराज , गेंदा, कुसुम, कुश, आदि।
▪️ *कुकरबिटिसी* – कद्दू, खीरा , तरबूज, खरबूज, टिंडा, परवल, करेला, ककड़ी, तुरई
▪️ *रोजासी* – सेब, बादाम, नासपती, स्ट्रॉबेरी
▪️ *रूटीसी* – नींबू , संतरा, मुसंबी, बेल
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🔳 *प्रमुख पादप हार्मोन –*
▪️ *ऑक्सिन* – यह खोजा गया प्रथम पादप हार्मोन था।
▪️ यह पौधे के ऊपरी भाग में पाया जाता है।
▪️ इससे पौधों की वृद्धि होती है।
▪️ *जिब्रेलिन* – यह पौधों को लंबा करने में सहायक होता है।
▪️ यह बीजों को अंकुरण के लिए प्रेरित करता है।
▪️ *साइटोकायनिन* – यह कोशिका विभाजन और विकास में मदद करता है।
▪️यह प्रोटीन एवं RNA के निर्माण में सहायक है
▪️ *एब्सिसिक एसिड* – यह एक वृद्धि रोधी हार्मोन है।
▪️यह बीजों को सुप्ता अवस्था में रखने में सहायक होता है।
▪️ *एथलीन* – यह गैसीय अवस्था में पाया जाने वाला एकमात्र हार्मोन है।
▪️ यह फलों को पकाने तथा पुष्पों की संख्या में वृद्धि में सहायक होता है।
▪️इसे फूल खिलाने वाला हार्मोन कहते हैं ।
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▪️ *पौधे नाइट्रेट के रूप में नाइट्रोजन लेते हैं* ,नाइट्रोजन का नाइट्रेट्स में परिवर्तन जीवाणुओं द्वारा होता है।
▪️एजोटोबेक्टर, क्लॉडीस्ट्रेडियम आदि जीवाणु पृथ्वी पर मिट्टी में स्थित वायु के नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं।
▪️एनाबीना और नॉस्टॉक आदि सायनोबैक्टीरिया वायुमंडल नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं।
▪️नायट्रोसोकोकस एवं नाइट्रोसोमोनस जीवाणु अमोनिया को नाइट्राइट में बदलते हैं।
▪️ जीवाणुओं का उपयोग चर्म शोधन तथा रेशे की रेटिंग में भी होता है।
▪️ब्रायोफाइटा भ्रूण बनाने वाले पादप समूह का एक सरल व आद्य समूह है।
▪️इसे वनस्पति जगत का एंफीबिया वर्ग भी कहा जाता है।
▪️आवृतबीजी पौधों में बीज फल के अंदर होते हैं।
▪️आवृतबीजी पौधों के जड़, तना ,पत्ती, फल फूल सभी पूर्ण विकसित होते हैं।
▪️अनावृतबीजी पौधों में अंडाशय का पूर्णता अभाव होता है।
▪️एकबीज पत्री पौधों में एक बीज पत्र पाया जाता है।
▪️द्विबीजपत्री पौधों में दो बीज पत्र पाया जाता है ।
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🔳 *विषाणु –*
▪️ *खोज* – 1892 ईस्वी में इवानोवश्की द्वारा।
▪️यह केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं।
▪️इन्हें सजीव एवं निर्जीवों के बीच की कड़ी कहा जाता है।
▪️ यह कोशिका के बाहर निष्क्रिय रूप में होते हैं तथा जीवित कोशिका में पहुंचते ही सक्रिय हो जाते हैं।
▪️ इनकी रासायनिक संरचना में न्यूक्लिक अम्ल का एक केंद्रीय कोड होता है, जो एक प्रोटीन आवरण से ढका होता है ।
▪️ *पादप विषाणु–* इनमें RNA होता है, परंतु कभी कभी DNA पाया जाता।
▪️ *जंतु विषाणु–* इनमें DNA होता है, कभी कभी RNA भी होता है।
▪️ *कवक* – इसका अध्ययन *माइकोलॉजी* कहलाता है।
▪️यह क्लोरोफिल रहित संकेंद्रीय संवहन ऊतक रहित थाइलोफाइट है।
▪️इनकी कोशिका भित्ति सैलूलोज से बनी होती है।
▪️ *जीवाणु –* इनका अध्ययन *बैक्टीरियोलॉजी* कहलाता है।
▪️इनकी *खोज* 1683 ईस्वी में *ल्यूवेनहॉक* ने किया। इन्हें जीवाणु विज्ञान का पिता कहा जाता है।
▪️ *रॉबर्ट कोच ने कालरा* तथा *क्षय रोग* के जीवाणुओं की खोज की।
▪️ *लुई पाश्चर ने रेबीज* के टीके की खोज की।
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🔳 *वनस्पति विज्ञान –*
▪️ *जनक* – थ्रियोफ्रेस्टस
▪️पौधों में कोशिका भित्ति पाई जाती है, जंतुओं में कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती।
▪️पौधे क्लोरोफिल की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा अपना भोजन तैयार करते हैं,इसलिए पौधों को स्वपोषी कहते हैं।
▪️ऐसे पौधे जिनमें बीज तथा पुष्प नहीं पाए जाते हैं क्रिप्टोगेम्स कहते हैं।
▪️ *शैवाल* – इसका अध्ययन *फ़ाइकोलॉजी* कहलाता है।
▪️ये क्लोरोफिल युक्त, संवहन उत्तक रहित स्वपोषी होते हैं।
▪️शैवाल का उपयोग भोजन के रूप में( अल्वा , सारगासम, एलेरिया, लेमिनेरिया) ,औषधीय बनाने में ( क्लोरला),खाद बनाने में(एनाबीना, नॉस्तोक),आयोडीन बनाने (लिमिनोरिया) में किया जाता है।
🔳 *पौधों में तत्वों की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग–*
▪️धान का खैरा रोग – जस्ता की कमी
▪️चुकंदर का हार्ट रॉट – बोरान की कमी
▪️नींबू में डाईबैंक रोग – तांबा की कमी
▪️नींबू में लिटिल लीफ रोग – जस्ता ( जिंक) की कमी
▪️फूलगोभी में ब्राउनिंग रोग – बोरान की कमी
▪️सेब में आंतरिक काग – बोरान की कमी
▪️पत्तागोभी में व्हिपटेल रोग – मालीब्लेडनम की कमी
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▪️ *DNA अणु की डबलकुंडली त्रिविम प्रतिरूप* वाटसन एवं क्रिक ने वर्ष 1953 में प्रस्तुत किया।
▪️कोशिकाओं में DNA अनुवांशिक पदार्थ होता है।
▪️ *DNA की खोज* फेड्रिक मिंसर ने 1869 ईस्वी में की।
▪️DNA सभी अनुवांशिक क्रियाओं का संचालन करता है, और प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है।
▪️ जीन DNA से बने होते है।
▪️ *मानव में कुल 23 जोड़ी, अर्थात 46 गुणसूत्र होते है।*
▪️ *22 जोड़ी गुणसूत्र को ऑटोसोम्स* कहते है, ये एक समान होते है।
▪️ *23वा जोड़ी गुणसूत्र स्त्री और पुरुष में समान नहीं होते है, इन्हें हिट्रोसमस कहते है।*
▪️डॉली नमक भेड़ का क्लोन विश्व में किसी स्तनधारी जीव का प्रथम क्लोन था।
▪️पौधों के जड़ तना एवं पत्ती द्वारा जनन कायिक प्रवर्धन कहलाता है।
▪️स्टेम सेल में शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता होती है।
▪️डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग शिशु का पितृत्व स्थापित करने, मानसिक रोगों की पहचान, पशुओं की वंशावली स्थापित करने में किया जाता है।
▪️ गोल्डन राइस जैव प्रौद्योगिकी की उपलब्धि है इसके जन्मदाता प्रोफेसर इंगो पैट्रिक्स एवं डॉक्टर पीटर बियर है।
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🔳 *जैव विकास–*
▪️जैव विकास का पहला सिद्धांत फ्रांसीसी जीव वैज्ञानिक डी लैमार्क ने 1809 में अपनी पुस्तक फिलासफी जूलॉजी में प्रकाशित किया।
▪️जीवो के शरीर में जो भी परिवर्तन होता है उन्हें उपार्जित लक्षण कहते हैं। यह वंशानुगत होता है।
▪️ जैव विकास परिकल्पना का दूसरा सिद्धांत 1831 में डार्विन ने दिया था ।
▪️डार्विनवाद को प्राकृतिक वरर्णवाद भी कहते हैं।
▪️ह्यूगो डी ब्रिज द्वारा उत्परिवर्तनवाद का सिद्धांत प्रस्तुत किया गया।
▪️सभी जीव जंतुओं में उत्परिवर्तन का प्राकृतिक गुण होता है।
▪️ *आनुवांशिकी –*
▪️ ग्रेगर जॉन मेंडल को आनुवंशिकी का पिता कहा जाता है।
▪️विलियम बैटसन ने वर्ष 1905 में सर्वप्रथम जेनेटिक्स का नाम का उपयोग किया।
▪️जीन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जोहांसन ने किया।
▪️1888 ईस्वी में सर्वप्रथम डब्लू वालडेयर ने गुणसूत्र नामक शब्द का प्रयोग किया।
▪️गुणसूत्र सभी अनुवांशिक गुण को निर्धारित व संचारित करता है। प्रत्येक जीन में गुणसूत्र की संख्या निश्चित होती है।
▪️DNA पॉलिमरेज नामक एंजाइम से डीएनए का संश्लेषण होता है ,इसकी खोज कार्नबर्ग ने की।
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▪️ *गाल्जीकाय* – *खोज* – कैमिलो गाल्जी द्वारा।
▪️यह जीवाणु एवं नीले हरे शैवालों में अनुपस्थित होता है।
▪️यह कोशिका भित्ति एवं लाइसोसोम का निर्माण करता है।
▪️इसे कोशिका का ट्रैफिक पुलिस कहा जाता है।
▪️ *लाइसोसोम* – *खोज* – डी डुवे द्वारा।
▪️इसे आत्महत्या की थैली कहा जाता है।
▪️इसका कार्य वाह्य पदार्थ का पाचन करना है।
▪️ *सेंट्रोसोम* – *खोज* – एडुआर्ड वान बेनेडेन द्वारा।
▪️ यह केवल जंतु कोशिका में पाया जाता है।
▪️ यह कोशिका विभाजन में भाग लेता है।
▪️ *लवक* – *खोज* – हेकल द्वारा।
▪️यह प्रायः पादप कोशिकाओं में पाया जाता है।
▪️हरित लवक में क्लोरोफिल नामक हरे रंग का वर्णक पाया जाता है।
▪️हरित लवक को कोशिका का रसोई घर कहते हैं।
▪️ *केंद्रक* –केंद्रक के चार भाग होते हैं –केंद्रककला ,केंद्रकद्रव्य, केंद्रिका एवं क्रोमेटीनधागे
▪️ *केंद्रीका की खोज* फोंटना ने की।
▪️ क्रोमेटिन एक न्यूक्लियोप्रोटीन है जो न्यूक्लिक अम्ल एवं छारिया प्रोटीन के मिश्रण से बना होता है।
▪️ *न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार का होता है–* DNA एवं RNA
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🔳 *कोशिका के मुख्य भाग–*
▪️ *कोशिका झिल्ली* – यह एक अर्धपारगम्य झिल्ली होती है।
▪️यह कोशिका की निश्चित आकृति बनाए रखती है।
▪️यह लिपिड की बनी होती है।
▪️इसमें प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है।
▪️ *कोशिका भित्ति* –यह केवल पादप कोशिकाओं में पाई जाती है।
▪️यह सैलूलोज की बनी होती है।
▪️जीवाणुओं की कोशिका भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन की बनी होती है।
▪️माइट्रोकंडिया–इसकी खोज अल्टमैन ने 1886 ईस्वी में की।
▪️यह कोशिका का श्वसन स्थल है।
▪️सी बेंडा ने सर्वप्रथम माइट्रोकंडिया नाम दिया।
▪️इसे पावरहाउस ऑफ द सेल कहा जाता है।
▪️ इसे यूकैरियोटिक कोशिकाओं के भीतर प्रोकैरियोटिक कोशिकाएं माना जाता है।
▪️ *राइबोसोम–*
▪️सर्वप्रथम जॉर्ज पैलेड ने इसे देखा।
▪️इसे प्रोटीन की फैक्ट्री कहा जाता है।
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🔳 *कोशिका–*
▪️कोशिका *2 प्रकार* की होती है–
▪️ *प्रोकैरियोटिक* –हिस्टोन प्रोटीन नहीं होता।
▪️ केंद्रक अविकसित होता है।
▪️राइबोसोम 70S प्रकार का होता है।
▪️श्वसन प्लाज्मा झिल्ली द्वारा होता है।
▪️कोशिका विभाजन अर्ध सूत्री प्रकार का होता है।
▪️माइट्रोकंडिया अनुपस्थित होता है।
▪️डीएनए एकल सूत्र के रूप में उपस्थित होता है।
▪️ *यूकैरियोटिक कोशिका–*
▪️डीएनए के साथ हिस्टोन प्रोटीन लगे होते हैं।
▪️ केंद्रक पूर्ण विकसित होता है।
▪️माइट्रोकंडिया उपस्थित होता है ।
▪️राइबोसोम 80S प्रकार का होता है।
▪️ डीएनए पूर्ण विकसित एवं दोहरे सूत्र के रूप में होता है।
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🔳 *कोशिका विज्ञान–*
▪️इसका अध्ययन *साइंटोलॉजी* के अंतर्गत किया जाता है।
▪️कोशिका शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम *रॉबर्ट हुक* नामक वैज्ञानिक द्वारा किया गया।
▪️ *जीवद्रव्य* – इसका नामकरण पुरकिंजे द्वारा 1839 ईस्वी में किया गया।
▪️जीव की सारी जैविक क्रियाएं इसी के द्वारा होती है।
▪️ *कोशिका द्रव्य* – यह केंद्रक और कोशिका झिल्ली के बीच रहता है। यह केंद्रक को चारों तरफ से घेरे रहता है।
▪️ *केन्द्रक* –इसकी खोज *रॉबर्ट ब्राऊन* ने किया था।
▪️यह कोशिका द्रव्य में स्थित जीवद्रव्य का एक विशेष भाग है।
▪️जीव द्रव्य का लगभग 80% भाग जल है।
▪️जीवद्रव्य में कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों का अनुपात 19 : 81 है।
▪️ *जीव द्रव्य 99% भाग –* ऑक्सीजन, कार्बन, हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन से मिलकर बना होता है।
▪️ *कोशिका* – जीवन की सबसे छोटी कार्यात्मक एवं संरचनात्मक इकाई है।
▪️ कोशिका शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने 1665 ईस्वी में किया था।
▪️ *सबसे लंबी कोशिका तंत्रिका तंत्र* की कोशिका है।
▪️ *सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग के अंडे की कोशिका* है।
