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Abhijeet Srivastava

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India First, Contributing My Small Capacity to Build the Dream "New INDIA" ❤️🇮🇳

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आंदोलनजीवियों की 12 साल से सारी भूख हड़ताल, धरनेबाजी केवल प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, गृह मंत्री, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के इर्द-गिर्द ही घूम रही है. क्या इन्होंने कुछ ऐसा किया है जिससे समाज को या देश को कोई नुकसान हुआ है? नहीं! क्या भ्रस्टाचार/पेपर लीक इत्यादि समस्याएं सामने आने के बाद सरकार के लेवल पर इन्होंने कार्यवाही नहीं की? की है! क्या इन्होंने समस्याओं को सुलझाने और उनके समाधान के लिए कानूनों नियमों में जरूरी सुधार नहीं किए? किए हैं! अब पेपर लीक के मुद्दे को ही ले लीजिए... NEET या अन्य जो भी पेपर लीक हुए है क्या उसे केंद्र सरकार ने करवाया है? नहीं. क्या केंद्र सरकार का कोई नेता/मंत्री प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल दिखाई दिया है? नहीं. रायताबाजों, धरनेबाजों को आखिर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों चाहिए? क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पेपर लीक की समस्या का समाधान हो जाएगा? क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो जाएगा? नहीं. शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार करने के लिए ही मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति बनाई है. इस नीति को लागू करने के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना भी जरूरी है. जो बनाए जा रहे हैं. नीचे कुछ आंकड़े हैं: 2014 के पहले → 2026 में IIT: 16 → 23 IIIT: 4 → 26 IIM: 13 → 21 AIIMS: 7 → 22 केंद्रीय विश्वविद्यालय: 40 → 56 मेडिकल कॉलेज: 387 → 823 MBBS सीटें: 51,348 → 1,36,939 PG मेडिकल सीटें: 31,185 → 81,000+ ITI: 9,977 → 14,682 केंद्रीय विद्यालय: 1,094 → 1,290 (142 प्रस्तावित) दीक्षा, स्वयं, PM eVidya जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं, NCERT पाठ्यक्रमों में आवश्यक बदलाव भी किए जा रहे हैं. ये तो मोदी सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यो का ब्यौरा है. अब मुख्य मुद्दे पेपर लीक पर आते हैं:- क्या पेपर लीक का असली कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान है या शिक्षा माफिया, खुद पेपर ख़रीदने वाले सैंकड़ो छात्र/अभिभावक, बड़े कोचिंग संस्थान/बड़े शिक्षक हैं? पेपर लीक को रोकने के लिए उसका digitalization करना जरूरी है जोकि किया ही जा रहा है, अगले वर्ष NEET की परीक्षा ऑनलाइन होगी. लेकिन क्या इससे भी 100% पेपर लीक रुक जाएंगे? नहीं. सरकार ने दूबारा NEET परीक्षा आयोजित करवायी, दुबारा पेपर लीक रोकने के लिए सरकार ने दो हफ्तों के लिए टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगा दिया, वायुसेना को exams सेंटर तक पेपर पहुंचाने की जिम्मेदारी दी. परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई और 11 लाख से अधिक NEET परीक्षार्थी सफल हुए. असफल लोग ही आंदोलन कर रहे हैं, वो किसी के हित के लिए नहीं बल्कि अपना राजनैतिक करियर बनाने और उसे सेट करने के लिए. अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे देंगे तो यह उनके पोर्टफोलियो में एक उपलब्धी की तरह जुड़ जाएगा. पूरा प्रोटेस्ट आम आदमी पार्टी द्वारा प्रायोजित है. प्रोटेस्ट के मुख्य कर्ता धर्ता आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं. ये सब जेल में बंद आतंकवादियों जेहादियों के हिमायती हैं. इनके मंच पर क्या पेपर लीक से पीड़ित कोई छात्र दिखाई दिया? कितने छात्रों की समस्याएं सुनी गई? कितने छात्रों को मंच दिया इन्होंने? सारे मोदी सरकार विरोधी विपक्षी नेता जरूर मंच पर दिखाई देते रहे. क्या ये लोग वास्तव में छात्र हित की लड़ाई लड़ रहे हैं या छात्रों की आड़ में अपना राजनैतिक अस्तित्व बचाने की? ✍️ Abhijeet Srivastava

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यहां तो वीडियो ही लीक हो गई. 🤣 पेपर लीक पर आवाज उठा रहे राहुल बाबा की खुफिया पर्सनल लाइफ की वीडियो लीक हो गई है. भाई साब...
यहां तो वीडियो ही लीक हो गई. 🤣 पेपर लीक पर आवाज उठा रहे राहुल बाबा की खुफिया पर्सनल लाइफ की वीडियो लीक हो गई है. भाई साब... राहुल गांधी अपने बीबी बच्चों के साथ पिकनिक मनाते हुए एक वीडियो में दिखाई दे रहे हैं... मोस्ट eligible bachelor भी शादी शुदा निकला... अब उन कन्याओं का क्या होगा जो रागा में अपना क्रश, पति, फ्यूचर इत्यादि देखती है... 😂
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Organic Crowd तो JCB की खुदाई देखने भी आ जाती है मित्र. 😂
Organic Crowd तो JCB की खुदाई देखने भी आ जाती है मित्र. 😂
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KGMU Lucknow में B negative blood की जरूरत है. यदि आपका कोई जानने वाले का B- ब्लड ग्रुप है तो कृपया कमेन्ट करें. 🙏
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CJP Protestor: Modi is a dictator!! Me : Why ? CJP Protestor: A Scientist like Sonam Wangchuk is on hunger strike and Govt is silent!! Me : He is an Engineer not scientist!! CJP Protestor : We have seen 3 idiots which was based on his life!! Me : The movie was a fiction and not real!! CJP Protestor : How can you Say this? Me : In the Movie,Wangdu had 400 Patents, how many does Sonam has? CJP Protestor : hmmmm...Let me google.. It says 0!! Me : In the movie, Wangdu was poor and son of a servant!! Google about Sonam's family.. CJP Protestor : It says, His father was an MLA and Minister of congress!! Me : Now tell me, Was the movie real? CJP Protestor : Wait, I need to stand in the queue to get my Bread Pakoda!! I will answer you Later Andhbhakt!!🤣🤣🤣🤦‍♂️
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बॉर्डर के पास से हटाएं जाएंगे मस्जिद और मदरसे। बॉर्डर के पास मस्जिद-मदरसों पर कार्रवाई रोकने से किया इनकार, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित कई मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के खिलाफ एक्शन पर रोक लगाने से मना कर दिया, कोर्ट ने सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला सुनाया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित कई मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने से सोमवार (13 जुलाई) को इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया, जो प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई के संबंध में अपनी सिफारिश देगी।
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अबे अब ये किसने किया... 🤣🤣🤣 घी खाया करो वांगचुक.... ft. सौरव द्विवेदी 😄😄
अबे अब ये किसने किया... 🤣🤣🤣 घी खाया करो वांगचुक.... ft. सौरव द्विवेदी 😄😄
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सोनम वांगचुक के लिये एक साथ लगातार ईमोशनल पोस्ट सामने आ रही है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ने उन्हें धोखा दिया। कोई भी उनको जूस पिलाने नहीं गया। यह बात अलग है की वह अनशन के नाम पर केवल अन्नत्याग करके बैठै हैं और लगातार गर्मागर्म सूप पी रहे हैं। हालाँकि ब्रेड पकौङा खाने का दावा करते हुए एक विडिओ भी आया था जिसमें वह तकिए के पीछे कुछ खा रहे थे। पर मैं सोनम को इतना भी अनैतिक नहीं मान सकता, पर वह सूप खूलेआम ले रहे हैं। वैसे नाॅनवेज सूप ठीक से बनाया जाये तो वह फैट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन तीनों की पूर्ती कर देता है, इसीलिए सोनम इतने टनाटन दिखाई पङ रहे हैं। पर फिर भी व्यक्ति की अपनी जिंदगी है, कौन एक ही जगह पङे पङे दिन बिताना चाहता है, वह भी सोनम जैसा क्रिएटिव व्यक्ति। राहुल गांधी तीन सप्ताह से गायब हैं, उनका दूर दूर तक कोई पता ठिकाना नही है। अरविंद केजरीवाल पंजाब में अलग अलग साजिश रचने में व्यस्त हैं, ऐसे में सोनम वांगचुक यदि अपने व्यक्तिगत प्रयास से ईमोशनल माहौल बनाकर की वह तो देश के लिये जान देने के लिए तैयार हैं, पर देश को ही इनकी कदर नहीं है, अपना अनशन समाप्त करते हैं तो यह उनके लिये ठीक रहेगा। वैसे सोनम वांगचुक जान देने वाले नहीं बल्कि अपने राजनीति के लिये जान लेने वाले व्यक्ति हैं। लद्दाख में उनका कारनामा देश देख चुका है जब उन्होंने सारा लाज शर्म छोङकर कहा था की कल को चीन हमला करेगा तो हम उसे रोकेंगे नहीं। सोनम वांगचुक चीन के एजेंडे को बढाना तो चाहते थे लेकिन एक्सपोज बहुत जल्द हो गये। इसलिए उनके अनशन से किसी को कोई फर्क नहीं पङने वाला। दिल्ली में बारिश भी शुरु हो गयी है अतः वहां बैठकर अब बीमार पङने का कोई मतलब नहीं बनता। एक दो दिन ईमोशनल अत्याचार करने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी यदि प्रतिनिधिमंडल बनाकर सोनम की नौटंकी समाप्त कर दे, तो यहीं सबसे सम्मानजनक रास्ता होगा।
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खूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं, साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं. पब्लिक सब जानती है, सब समझती है. ~ पीएम मोदी
खूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं, साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं. पब्लिक सब जानती है, सब समझती है. ~ पीएम मोदी
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मोदीजी ने बहुत पहले ही साफ शब्दों में स्पष्ट कर दिया था कि आंदोलनजीवी जमात के लिए उनके मन में कोई दया नहीं है. आंदोलनजीवी परज
मोदीजी ने बहुत पहले ही साफ शब्दों में स्पष्ट कर दिया था कि आंदोलनजीवी जमात के लिए उनके मन में कोई दया नहीं है. आंदोलनजीवी परजीवी भी होते हैं. अब कोई इसे सोनम वांगचुक से नहीं जोड़ेगा... 😄🤣
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UPA सरकार के समय वर्ष 2010 में Australia ने भारत को Uranium की देने से इनकार कर दिया था। लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी जी के Australia दौरे के दौरान Uranium आपूर्ति को लेकर भारत और Australia के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब Australia भारत को Uranium की आपूर्ति करेगा।
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Great Initiative: Critical Minral From Recycle 👌 Not just recycling. Not just recovery. A bigger shift is underway for India
Great Initiative: Critical Minral From Recycle 👌 Not just recycling. Not just recovery. A bigger shift is underway for India’s Critical Minerals future. 🇮🇳 #ModiMatters
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मैंने बताया कि पिछले 2-3 साल से E20 पेट्रोल मिल रहा है, मैंने अपने बाइक में E20 fuel के बाद avg का अनुभव भी साझा किया, तो रायतावीरों ने मुझे अंधभक्त, आईटी सेल और न जाने क्या क्या कहना शुरू कर दिया. भेड़चाल में लगे इन लोगों को Fact-check से कोई लेना-देना नहीं है. असली सवाल तो ये है कि जब 2-3 साल से E20 पेट्रोल देशभर में मिल रहा है तो अब तक किसी की गाड़ी में कोई दिक्कत क्यों नहीं आई? अचानक 2026 में सबकी गाड़ियां E20 की वजह से खराब होने लगी, माइलेज ड्रॉप होने लगा. कहीं ये मोदी सरकार विरोधियों का नया प्रोपेगेंडा तो नहीं है? भारत में E20 पेट्रोल चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया था। 6 फरवरी 2023: E20 पेट्रोल की शुरुआत 11 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 84 पेट्रोल पंपों पर की गई। अप्रैल 2023 से मार्च 2025: धीरे-धीरे अधिक पेट्रोल पंपों पर E20 उपलब्ध कराया गया। 1 अप्रैल 2025: E20 को पूरे देश में मानक (standard) पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया और E10 की जगह E20 ने ले ली। 1 अप्रैल 2026: सरकार ने E20 पेट्रोल के लिए न्यूनतम 95 RON (ऑक्टेन रेटिंग) अनिवार्य कर दी, ताकि ईंधन की गुणवत्ता एक समान रहे। फिर ये रायतावीर एक और कुतर्क करते हैं कि गडकरी E20 पर इतना क्यों बोलते हैं? नितिन गडकरी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मंत्री हैं, पेट्रोलियम मंत्री नहीं। फिर भी वे E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) पर अक्सर बोलते हैं, इसके कई कारण है: 1. वाहनों की जिम्मेदारी उनके मंत्रालय की है। E20 ईंधन का इस्तेमाल गाड़ियों में होना है। यह सुनिश्चित करना कि नए वाहन E20 के अनुकूल (E20-compatible) हों, सड़क परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी है। इसलिए वाहन निर्माताओं के साथ इस विषय पर गडकरी की भूमिका रहती है। 2. E20 एक बहु-मंत्रालयी कार्यक्रम है। इसमें कई मंत्रालय शामिल हैं: पेट्रोलियम मंत्रालय – एथेनॉल मिश्रण और ईंधन आपूर्ति। सड़क परिवहन मंत्रालय – E20-अनुकूल वाहन। कृषि मंत्रालय – एथेनॉल के लिए फीडस्टॉक (गन्ना, मक्का आदि)। खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय – खाद्यान्न नीति से जुड़े पहलू. इसलिए कई मंत्री इस विषय पर सार्वजनिक रूप से बोलते हैं। 3. गडकरी लंबे समय से वैकल्पिक ईंधनों के समर्थक रहे हैं। वे वर्षों से एथेनॉल, बायो-CNG, ग्रीन हाइड्रोजन, फ्लेक्स-फ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। इसलिए इस विषय पर उनके बयान अधिक दिखाई देते हैं। 4. नीति का प्रचार भी एक कारण है। सरकार चाहती है कि लोग E20 और वैकल्पिक ईंधनों के बारे में जागरूक हों। गडकरी सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस विषय पर अक्सर बोलते हैं। इसलिए, नीतिगत निर्णय लेने और एथेनॉल की खरीद-फरोख्त का मुख्य दायित्व पेट्रोलियम मंत्रालय का है, लेकिन E20 पर वाहन, सड़क परिवहन और वैकल्पिक ईंधन के संदर्भ में बोलना सड़क परिवहन मंत्री की भूमिका के दायरे में आता है। Ethanol से गडकरी के बेटों की कम्पनी को फायदे वाली बात ऊंट के मुह में जीरे जितनी है.
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एक और प्रोपेगेंडा:- सरकार समान्य पेट्रोल (100% पेट्रोल) 167₹ लीटर बेच रही है! Fact :- वो समान्य पेट्रोल नहीं है. वो प्रीमियम पेट्रोल है. जो मुख्य रूप से हाई-एंड सुपरबाइक्स और महंगी स्पोर्ट्स कारों के लिए होता है जो बेहतरीन परफॉरमेंस (Pick-up) के लिए डिज़ाइन की जाती हैं। आम गाड़ियों के लिए इसका इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है।
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आप सब ने ऑपेरशन सिंदूर के दौरान डेमो तो देख ही लिया होगा। धमाके आतंकियों के अड्डे पर हो रहे थे और गूंज पूरी दुनिया में सुनाई
आप सब ने ऑपेरशन सिंदूर के दौरान डेमो तो देख ही लिया होगा। धमाके आतंकियों के अड्डे पर हो रहे थे और गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रहा था। आतंकियों के अड्डे पर प्रहार से आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ। : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया में
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घर में अगर चोरी होती है तो हम चोर को दोष देते हैं, घर को नहीं। इसलिए राम में जिसने चोरी किया उसे सजा दिया जाए, राम मंदिर को ब
घर में अगर चोरी होती है तो हम चोर को दोष देते हैं, घर को नहीं। इसलिए राम में जिसने चोरी किया उसे सजा दिया जाए, राम मंदिर को बदनाम न किया जाए। चोर हर जगह होते हैं, इससे मंदिर की गरिमा या पवित्रता कम नहीं होती। जिस मंदिर की स्थापना में 500 साल लगे हों, उसकी मर्यादा कुछ लोगों की हरकतों से प्रभावित नहीं हो सकती। : अनुपम खेर, बॉलीवुड, अभिनेता
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35 साल में एक बात तो साफ समझ आ गई कि... देश चलाना और देश के लिए नीति बनाना सबसे मुश्किल काम है. क्योंकि, कोई भी नीति करोड़ों लोगों पर एक साथ प्रभाव डालती है... और, करोड़ों लोगों को कभी एक जैसा फायदा नहीं हो सकता. जैसे कि, नीति में अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग का समर्थन करेंगे तो नुक्कड़ वाला दुकानदार उसी दिन आपके खिलाफ पोस्टर लेकर खड़ा हो जाएगा. अगर आप कहेंगे कि "मैं शाकाहारी हूं" तो दूसरा बोलेगा "मांसाहार मेरी आजादी है". आप चिल्लाएंगे "बुलडोजर जस्टिस चाहिए" तो जब कल वही बुलडोजर आपके मोहल्ले में चला गया तो आप ही सबसे पहले "तानाशाही" बोलेंगे. आप एनकाउंटर को सही बताएंगे तो फिर भरत तिवारी जैसी घटना होगी ही होगी. आप फ्रीबीज को गाली देंगे... पर, उसी फ्रीबीज के दम पर कजरी दो बार दिल्ली जीत गया. अब, आप कहेंगे "आरक्षण खत्म करो".. लेकिन, फिर अफवाह उड़ी कि अगर "400 पार आएगा तो आरक्षण जाएगा" और यूपी में आपने ही भाजपा को सपा से नीचे पहुंचा दिया. और, दोगलापन सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता. बल्कि, आप पेट्रोल में 10%-20% इथेनॉल मिक्स पर आग बबूला हैं कि हमारी "गाड़ी खराब हो जाएगी, माइलेज गिर गया". पर, खाने के हर प्लेट में आर्टिफीसियल रंग, आर्टिफीसियल फ्लेवर खा रहे हैं... वो भी बिना जरूरत के. जो लोग आपके खाने में केमिकल मिलाकर करोड़ कमा रहे हैं, वही लोग आज पेट्रोल में इथेनॉल के खिलाफ बैनर लेकर खड़े हैं. तब आप नहीं पूछते "भैया, एथनॉल को जाने दो क्योंकि गाड़ी फिर नई आ जायेगी लेकिन हमारे खाने में ये जहर क्यों ?" गाड़ी के पेट में 10-20% इथेनॉल नहीं जाना चाहिए लेकिन अपने पेट में रोज आर्टिफीसियल सब कुछ ठूंस लेंगे. यही है Conflict of Interest. इसी वजह से समाज में "Best Option" पर कभी एक राय नहीं बनती. इतिहास देख लो न... GST आया तो - "व्यापार खत्म हो जाएगा" स्वदेशी कोविड वैक्सीन आई - "लोग हार्ट अटैक से मर रहे हैं". अग्निवीर आया - "सेना बर्बाद हो जाएगी" जबकि ड्रोन और AI का युद्ध आ चुका है. गरीब महिलाओं को सीधे पैसे मिले तो - "ये वोट की रिश्वत है". नतीजा ???? 10 साल में शिशु मृत्यु दर गिरी, करोड़ों महिलाएं काम पर निकलीं, भीषण गरीबी खत्म हुई. मुसीबत तो ये है कि हार्डवेयर वाला आपको अटूट बोल के एक ताला बेचेगा. दूसरे को उसी ताले को तोड़ने का क्रॉस बार बेचेगा. और, दोनों से पैसा कमाएगा. कल आप कतर पर इसलिए भड़क गए थे क्योंकि उसने नूपुर दीदी के बयान पर उसने कुछ कहा था. अब आज सरकार कह रही है कि इथेनॉल बढ़ाएंगे ताकि खाड़ी पर तेल के लिए निर्भरता कम हो जिससे कि भविष्य में हमें उन चूतियों से कुछ न सुनना पड़े.. साथ ही प्रदूषण घटे और किसान को पैसा मिले. अगले खाड़ी युद्ध में भारत के टैंक बिना तेल के न रुकें.. क्लाइमेट से लड़ाई हो. तो, आप फिर सड़क पर कि: "इथेनॉल बंद करो". आप ही कहते थे न कि "अगला आतंकी हमला होगा ही, कब होगा ये सवाल है". "दुश्मन का इलाका उड़ा दो, चाहे पेट्रोल 500 का हो जाए". और, जब सरकार 500 वाला दिन न आए इसके लिए 10 साल पहले से तैयारी करती है, तो आप ही हाय-तौबा मचाने लगते हो. आखिरी और सबसे जरूरी सवाल: देश में रोज करोड़ों गाड़ियां चल रही हैं. अगर इथेनॉल से माइलेज इतना गिर रहा है, इंजन इतना खराब हो रहा है, तो पेट्रोल की खपत डबल हो जानी चाहिए थी. हर सर्विस सेंटर खराब गाड़ियों से भर जाना चाहिए था. हर चौराहे पर गाड़ियां बंद हो जानी चाहिए थीं. क्या हुआ ऐसा ??? नहीं न ??? इसीलिए, कहता हूँ कि नीति बनाना सबसे मुश्किल काम है क्योंकि हर कोई अपने फायदे का चश्मा पहनकर देश देखता है. जय महाकाल...!!! सतीश कुमार
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E20 से जिसकी गाड़ी सच मे खराब हुई है वो जाकर गडकरी जी को बताओ, मंत्री जी पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं. बस शर्त है कि गाड
E20 से जिसकी गाड़ी सच मे खराब हुई है वो जाकर गडकरी जी को बताओ, मंत्री जी पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं. बस शर्त है कि गाड़ी E20 के कारण खराब होनी चाहिए... बात तो सही कह रहे हैं गडकरी जी.... 22 लाख करोड़ का टेन्डर तेल कम्पनियां निकालती हैं, अगर पेट्रोल डीज़ल import नहीं होगा, भारत आत्मनिर्भर बनेगा और अगर हम ethanol methanol bio cng hydrogen export करने लगेंगे तो उनका दुकान बंद हो जाएगा. इसलिए ethanol के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है.
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लेकिन यदि ऐसा नहीं है …. यदि उसमें केवल इतिहास का एक टुकड़ा दिखाया गया है और बाकी हिस्से को जानबूझकर अंधेरे में छोड़ दिया गया है …. यदि कुछ पीड़ितों के आँसू कैमरे के योग्य हैं और कुछ पीड़ितों के आँसू कहानी के बाहर रख दिए गए हैं …. यदि इतिहास को पूरा नहीं, बल्कि सुविधानुसार प्रस्तुत किया गया है …. तो फिर वह इतिहास नहीं, बल्कि एक बाज़ारू नौटंकी है जो साल में हज़ारों आती हैं और चली जाती हैं ! यदि किसी कहानी में कुछ पीड़ितों को नाम मिल जाए और कुछ पीड़ितों को जगह भी न मिले …. यदि कुछ चीखें सुनाई जाएँ और कुछ चीखों को संपादन में काट दिया जाए …. यदि कुछ कब्रों पर कैमरा रुक जाए और कुछ कब्रों के ऊपर से कैमरा बिना देखे निकल जाए …. तो बताइए …. वह वेब सीरीज़ सच दिखा रही है …. या केवल अपनी पसंद का सच ?? उस विषय पर आपके विचार अवश्य बताइयेगा ! आपका अपना …. #पारुल_सहगल_साथी 😊 #Satluj #punjab #webseries
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मित्रों …. कभी ऐसा हुआ है कि आपके पिताजी को यह “हुकुम” दिया गया हो कि वे अपनी चोटी काट कर पगड़ी बांधें और दाढ़ी बढ़ायें वरना उन्हें सोध दिया जाएगा (माथे पर गोली मार दी जाएगी) केवल इसलिए कि वे हिंदू हैं ?? कभी आपको स्कूल में बाधित किया गया कि हिंदी की पुस्तकें जला दो और केवल पंजाबी पढ़ों ?? कभी ऐसा हुआ कि कई साल तक शाम को अंधेरा होते ही आपको अपने घर की लाइट्स बंद करके डर के साये में सोना पड़ा हो और घर के दरवाजे पर किसी की दस्तक होते ही आपका पूरा परिवार सहम जाता हो ?? आपको यह सब जानना चाहिए …. आजकल एक वेबसीरीज़ “सतलुज” की काफ़ी चर्चा चल रही है …. बताया जा रहा है कि सतलुज नाम की इस वेब सीरीज में पंजाब के सन् 1980 से लेकर 1995 तक के हालात के बारे में सच्चे तथ्यों को दिखाया गया है ! अब सरकार ने इसे बैन कर दिया है जिसे लेकर बहुत से लोग सरकार की निंदा कर रहे हैं …. सोशल मीडिया पर इस प्रकार की पोस्टों की बाढ़ आई हुई है कि सरकार ने सच का गला घोंट दिया, सरकार तानाशाही कर रही है वगैरा वगैरा ! हालांकि ये सब विरोध करने वालों में अधिकतर लोग वो हैं जो कभी पंजाब गए ही नहीं …. ना ही 1980 से लेकर 1995 तक उनके पिताजी कभी पंजाब गए थे ! इन लोगों ने पंजाब केवल फ़िल्मों में देखा है. इनका मानना है कि पंजाब का हर निवासी सुबह नाश्ते में छोले-भटूरे खाता है और रात में डिनर सरसों के साग और मक्की की रोटी का करता है और सारा दिन बस “बल्ले-बल्ले ! याहूँ याहूँ” करते हुए भांगड़ा करता रहता है ! लेकिन इतिहास केवल गीतों और खेतों से नहीं बनता …. इतिहास उन चीखों से भी बनता है जो किसी कैमरे में रिकॉर्ड नहीं हुईं ! यदि वास्तव में यह वेब सीरीज़ 1980 से 1995 के पंजाब की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करती है, तो फिर कुछ प्रश्न पूछना अनुचित नहीं होना चाहिए ! क्या इस सीरीज़ में वह दृश्य दिखाया गया है जब 6 मार्च 1986 कपूरथला में आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 13 हिंदू नागरिक मारे गए और कई घायल हुए ?? क्या इस सिरीज़ में दिखाया गया है कि 25 जुलाई 1986 को मुक्तसर में बस रोककर यात्रियों की पहचान की गई और 14 हिंदू तथा 1 सिख यात्री की हत्या कर दी गई ?? क्या इस सिरीज़ में वह दृश्य भी है जिसमें 30 नवंबर 1986 को होशियारपुर में बस से हिंदू यात्रियों को अलग कर 24 लोगों की हत्या की गई ?? इस सीरीज़ में वह दृश्य तो अवश्य होगा ना जिसमें 7 जुलाई 1987 लालरू में बस रोककर हिंदू यात्रियों को अलग किया गया और 34 लोगों की हत्या कर दी गई ?? यह तो उस दौर के सबसे चर्चित नरसंहारों में से एक था ! यह दृश्य तो सीरीज़ में पक्का होगा ना ?? अच्छा यह दृश्य तो अवश्य दिखाया गया होगा ना जिसमें 15 जून 1991 को लुधियाना के पास दो ट्रेनों पर हमला करके आतंकवादियों ने यात्रियों पर गोलीबारी की जिसमें लगभग 80 लोगों की मृत्यु हुई, जिनमें अधिकांश हिंदू यात्री थे ?? या फिर वह दृश्य दिखाया गया हो जिसमें 26 दिसंबर 1991 एक अन्य ट्रेन यात्रियों को निशाना बनाया गया 1991 में ऐसे रेल हमलों में कुल लगभग 125 लोगों की मृत्यु हुई थी !! सीरीज़ में यह तो अवश्य दिखाया गया होगा ना कि उस दौर में पंजाब में रहने वाले हर “मोन्ने” के लिए यह “हुकुम” था कि दाढ़ी बढ़ा कर रखनी है, दुकानों के बोर्ड, स्कूटरों के नंबर प्लेट्स सब कुछ पंजाबी में होना चाहिए ?? इस हुकुम की अवहेलना करने वाले को सरेआम सड़क पर “सोध” दिया जाता था ! यह सब दिखाया गया है ना सीरीज़ में ?? क्या इस सीरीज़ में यह दिखाया गया है कि कैसे अख़बार बाँटने वाले हॉकरों को अख़बार बाँटने पर मार दिया जाता था , कैसे शिव भक्त जंगम भिक्षुओं को ख़त्म कर दिया गया था, कैसे शाम का अँधेरा होते ही एक अघोषित कर्फ्यू लग जाता था, कैसे रात में “काले कच्छे वाले गिरोह” पूरे पूरे परिवारों का सफाया कर देते थे, कैसे पंजाब पुलिस के DIG अटवाल की गोलियों से छलनी लाश कई घंटे तक भरे बाज़ार में सड़क पर पड़ी रही और पुलिस तक उसके पास जाने से डरती रही, कैसे पुलिस की मुखबिरी के नाम पर हिन्दुओं के साथ व्यक्तिगत रंजिशें, उनकी संपत्ति पर क़ब्ज़ा, उनकी बहू-बेटियों को ….. और लिखूँ ?? लिखते लिखते उँगलियाँ थक जायेंगी लेकिन उस दौर का सच पूरा नहीं बताया जा सकेगा ! यह तो दिखाया ही गया होगा ना कि शाम को अंधेरा होने के बाद पुलिसकर्मी भी पुलिस थाने के दरवाजे बंद करके अंदर से ताला लगा लिया करते थे ?? अगर इस सीरीज़ में यह सब दिखाया गया है तो मैं स्वयं सरकार को हज़ारों लानतें भेजता हूँ कि उसने कोरा सच दिखाने वाली इतनी सटीक वेबसीरीज़ को बैन कर दिया !!
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