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Abhijeet Srivastava

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UPA सरकार के समय वर्ष 2010 में Australia ने भारत को Uranium की देने से इनकार कर दिया था। लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी जी के Australia दौरे के दौरान Uranium आपूर्ति को लेकर भारत और Australia के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब Australia भारत को Uranium की आपूर्ति करेगा।

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Great Initiative: Critical Minral From Recycle 👌 Not just recycling. Not just recovery. A bigger shift is underway for India
Great Initiative: Critical Minral From Recycle 👌 Not just recycling. Not just recovery. A bigger shift is underway for India’s Critical Minerals future. 🇮🇳 #ModiMatters
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मैंने बताया कि पिछले 2-3 साल से E20 पेट्रोल मिल रहा है, मैंने अपने बाइक में E20 fuel के बाद avg का अनुभव भी साझा किया, तो रायतावीरों ने मुझे अंधभक्त, आईटी सेल और न जाने क्या क्या कहना शुरू कर दिया. भेड़चाल में लगे इन लोगों को Fact-check से कोई लेना-देना नहीं है. असली सवाल तो ये है कि जब 2-3 साल से E20 पेट्रोल देशभर में मिल रहा है तो अब तक किसी की गाड़ी में कोई दिक्कत क्यों नहीं आई? अचानक 2026 में सबकी गाड़ियां E20 की वजह से खराब होने लगी, माइलेज ड्रॉप होने लगा. कहीं ये मोदी सरकार विरोधियों का नया प्रोपेगेंडा तो नहीं है? भारत में E20 पेट्रोल चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया था। 6 फरवरी 2023: E20 पेट्रोल की शुरुआत 11 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 84 पेट्रोल पंपों पर की गई। अप्रैल 2023 से मार्च 2025: धीरे-धीरे अधिक पेट्रोल पंपों पर E20 उपलब्ध कराया गया। 1 अप्रैल 2025: E20 को पूरे देश में मानक (standard) पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया और E10 की जगह E20 ने ले ली। 1 अप्रैल 2026: सरकार ने E20 पेट्रोल के लिए न्यूनतम 95 RON (ऑक्टेन रेटिंग) अनिवार्य कर दी, ताकि ईंधन की गुणवत्ता एक समान रहे। फिर ये रायतावीर एक और कुतर्क करते हैं कि गडकरी E20 पर इतना क्यों बोलते हैं? नितिन गडकरी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मंत्री हैं, पेट्रोलियम मंत्री नहीं। फिर भी वे E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) पर अक्सर बोलते हैं, इसके कई कारण है: 1. वाहनों की जिम्मेदारी उनके मंत्रालय की है। E20 ईंधन का इस्तेमाल गाड़ियों में होना है। यह सुनिश्चित करना कि नए वाहन E20 के अनुकूल (E20-compatible) हों, सड़क परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी है। इसलिए वाहन निर्माताओं के साथ इस विषय पर गडकरी की भूमिका रहती है। 2. E20 एक बहु-मंत्रालयी कार्यक्रम है। इसमें कई मंत्रालय शामिल हैं: पेट्रोलियम मंत्रालय – एथेनॉल मिश्रण और ईंधन आपूर्ति। सड़क परिवहन मंत्रालय – E20-अनुकूल वाहन। कृषि मंत्रालय – एथेनॉल के लिए फीडस्टॉक (गन्ना, मक्का आदि)। खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय – खाद्यान्न नीति से जुड़े पहलू. इसलिए कई मंत्री इस विषय पर सार्वजनिक रूप से बोलते हैं। 3. गडकरी लंबे समय से वैकल्पिक ईंधनों के समर्थक रहे हैं। वे वर्षों से एथेनॉल, बायो-CNG, ग्रीन हाइड्रोजन, फ्लेक्स-फ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। इसलिए इस विषय पर उनके बयान अधिक दिखाई देते हैं। 4. नीति का प्रचार भी एक कारण है। सरकार चाहती है कि लोग E20 और वैकल्पिक ईंधनों के बारे में जागरूक हों। गडकरी सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस विषय पर अक्सर बोलते हैं। इसलिए, नीतिगत निर्णय लेने और एथेनॉल की खरीद-फरोख्त का मुख्य दायित्व पेट्रोलियम मंत्रालय का है, लेकिन E20 पर वाहन, सड़क परिवहन और वैकल्पिक ईंधन के संदर्भ में बोलना सड़क परिवहन मंत्री की भूमिका के दायरे में आता है। Ethanol से गडकरी के बेटों की कम्पनी को फायदे वाली बात ऊंट के मुह में जीरे जितनी है.
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एक और प्रोपेगेंडा:- सरकार समान्य पेट्रोल (100% पेट्रोल) 167₹ लीटर बेच रही है! Fact :- वो समान्य पेट्रोल नहीं है. वो प्रीमियम पेट्रोल है. जो मुख्य रूप से हाई-एंड सुपरबाइक्स और महंगी स्पोर्ट्स कारों के लिए होता है जो बेहतरीन परफॉरमेंस (Pick-up) के लिए डिज़ाइन की जाती हैं। आम गाड़ियों के लिए इसका इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है।
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आप सब ने ऑपेरशन सिंदूर के दौरान डेमो तो देख ही लिया होगा। धमाके आतंकियों के अड्डे पर हो रहे थे और गूंज पूरी दुनिया में सुनाई
आप सब ने ऑपेरशन सिंदूर के दौरान डेमो तो देख ही लिया होगा। धमाके आतंकियों के अड्डे पर हो रहे थे और गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रहा था। आतंकियों के अड्डे पर प्रहार से आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ। : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया में
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घर में अगर चोरी होती है तो हम चोर को दोष देते हैं, घर को नहीं। इसलिए राम में जिसने चोरी किया उसे सजा दिया जाए, राम मंदिर को ब
घर में अगर चोरी होती है तो हम चोर को दोष देते हैं, घर को नहीं। इसलिए राम में जिसने चोरी किया उसे सजा दिया जाए, राम मंदिर को बदनाम न किया जाए। चोर हर जगह होते हैं, इससे मंदिर की गरिमा या पवित्रता कम नहीं होती। जिस मंदिर की स्थापना में 500 साल लगे हों, उसकी मर्यादा कुछ लोगों की हरकतों से प्रभावित नहीं हो सकती। : अनुपम खेर, बॉलीवुड, अभिनेता
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35 साल में एक बात तो साफ समझ आ गई कि... देश चलाना और देश के लिए नीति बनाना सबसे मुश्किल काम है. क्योंकि, कोई भी नीति करोड़ों लोगों पर एक साथ प्रभाव डालती है... और, करोड़ों लोगों को कभी एक जैसा फायदा नहीं हो सकता. जैसे कि, नीति में अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग का समर्थन करेंगे तो नुक्कड़ वाला दुकानदार उसी दिन आपके खिलाफ पोस्टर लेकर खड़ा हो जाएगा. अगर आप कहेंगे कि "मैं शाकाहारी हूं" तो दूसरा बोलेगा "मांसाहार मेरी आजादी है". आप चिल्लाएंगे "बुलडोजर जस्टिस चाहिए" तो जब कल वही बुलडोजर आपके मोहल्ले में चला गया तो आप ही सबसे पहले "तानाशाही" बोलेंगे. आप एनकाउंटर को सही बताएंगे तो फिर भरत तिवारी जैसी घटना होगी ही होगी. आप फ्रीबीज को गाली देंगे... पर, उसी फ्रीबीज के दम पर कजरी दो बार दिल्ली जीत गया. अब, आप कहेंगे "आरक्षण खत्म करो".. लेकिन, फिर अफवाह उड़ी कि अगर "400 पार आएगा तो आरक्षण जाएगा" और यूपी में आपने ही भाजपा को सपा से नीचे पहुंचा दिया. और, दोगलापन सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता. बल्कि, आप पेट्रोल में 10%-20% इथेनॉल मिक्स पर आग बबूला हैं कि हमारी "गाड़ी खराब हो जाएगी, माइलेज गिर गया". पर, खाने के हर प्लेट में आर्टिफीसियल रंग, आर्टिफीसियल फ्लेवर खा रहे हैं... वो भी बिना जरूरत के. जो लोग आपके खाने में केमिकल मिलाकर करोड़ कमा रहे हैं, वही लोग आज पेट्रोल में इथेनॉल के खिलाफ बैनर लेकर खड़े हैं. तब आप नहीं पूछते "भैया, एथनॉल को जाने दो क्योंकि गाड़ी फिर नई आ जायेगी लेकिन हमारे खाने में ये जहर क्यों ?" गाड़ी के पेट में 10-20% इथेनॉल नहीं जाना चाहिए लेकिन अपने पेट में रोज आर्टिफीसियल सब कुछ ठूंस लेंगे. यही है Conflict of Interest. इसी वजह से समाज में "Best Option" पर कभी एक राय नहीं बनती. इतिहास देख लो न... GST आया तो - "व्यापार खत्म हो जाएगा" स्वदेशी कोविड वैक्सीन आई - "लोग हार्ट अटैक से मर रहे हैं". अग्निवीर आया - "सेना बर्बाद हो जाएगी" जबकि ड्रोन और AI का युद्ध आ चुका है. गरीब महिलाओं को सीधे पैसे मिले तो - "ये वोट की रिश्वत है". नतीजा ???? 10 साल में शिशु मृत्यु दर गिरी, करोड़ों महिलाएं काम पर निकलीं, भीषण गरीबी खत्म हुई. मुसीबत तो ये है कि हार्डवेयर वाला आपको अटूट बोल के एक ताला बेचेगा. दूसरे को उसी ताले को तोड़ने का क्रॉस बार बेचेगा. और, दोनों से पैसा कमाएगा. कल आप कतर पर इसलिए भड़क गए थे क्योंकि उसने नूपुर दीदी के बयान पर उसने कुछ कहा था. अब आज सरकार कह रही है कि इथेनॉल बढ़ाएंगे ताकि खाड़ी पर तेल के लिए निर्भरता कम हो जिससे कि भविष्य में हमें उन चूतियों से कुछ न सुनना पड़े.. साथ ही प्रदूषण घटे और किसान को पैसा मिले. अगले खाड़ी युद्ध में भारत के टैंक बिना तेल के न रुकें.. क्लाइमेट से लड़ाई हो. तो, आप फिर सड़क पर कि: "इथेनॉल बंद करो". आप ही कहते थे न कि "अगला आतंकी हमला होगा ही, कब होगा ये सवाल है". "दुश्मन का इलाका उड़ा दो, चाहे पेट्रोल 500 का हो जाए". और, जब सरकार 500 वाला दिन न आए इसके लिए 10 साल पहले से तैयारी करती है, तो आप ही हाय-तौबा मचाने लगते हो. आखिरी और सबसे जरूरी सवाल: देश में रोज करोड़ों गाड़ियां चल रही हैं. अगर इथेनॉल से माइलेज इतना गिर रहा है, इंजन इतना खराब हो रहा है, तो पेट्रोल की खपत डबल हो जानी चाहिए थी. हर सर्विस सेंटर खराब गाड़ियों से भर जाना चाहिए था. हर चौराहे पर गाड़ियां बंद हो जानी चाहिए थीं. क्या हुआ ऐसा ??? नहीं न ??? इसीलिए, कहता हूँ कि नीति बनाना सबसे मुश्किल काम है क्योंकि हर कोई अपने फायदे का चश्मा पहनकर देश देखता है. जय महाकाल...!!! सतीश कुमार
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E20 से जिसकी गाड़ी सच मे खराब हुई है वो जाकर गडकरी जी को बताओ, मंत्री जी पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं. बस शर्त है कि गाड
E20 से जिसकी गाड़ी सच मे खराब हुई है वो जाकर गडकरी जी को बताओ, मंत्री जी पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं. बस शर्त है कि गाड़ी E20 के कारण खराब होनी चाहिए... बात तो सही कह रहे हैं गडकरी जी.... 22 लाख करोड़ का टेन्डर तेल कम्पनियां निकालती हैं, अगर पेट्रोल डीज़ल import नहीं होगा, भारत आत्मनिर्भर बनेगा और अगर हम ethanol methanol bio cng hydrogen export करने लगेंगे तो उनका दुकान बंद हो जाएगा. इसलिए ethanol के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है.
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लेकिन यदि ऐसा नहीं है …. यदि उसमें केवल इतिहास का एक टुकड़ा दिखाया गया है और बाकी हिस्से को जानबूझकर अंधेरे में छोड़ दिया गया है …. यदि कुछ पीड़ितों के आँसू कैमरे के योग्य हैं और कुछ पीड़ितों के आँसू कहानी के बाहर रख दिए गए हैं …. यदि इतिहास को पूरा नहीं, बल्कि सुविधानुसार प्रस्तुत किया गया है …. तो फिर वह इतिहास नहीं, बल्कि एक बाज़ारू नौटंकी है जो साल में हज़ारों आती हैं और चली जाती हैं ! यदि किसी कहानी में कुछ पीड़ितों को नाम मिल जाए और कुछ पीड़ितों को जगह भी न मिले …. यदि कुछ चीखें सुनाई जाएँ और कुछ चीखों को संपादन में काट दिया जाए …. यदि कुछ कब्रों पर कैमरा रुक जाए और कुछ कब्रों के ऊपर से कैमरा बिना देखे निकल जाए …. तो बताइए …. वह वेब सीरीज़ सच दिखा रही है …. या केवल अपनी पसंद का सच ?? उस विषय पर आपके विचार अवश्य बताइयेगा ! आपका अपना …. #पारुल_सहगल_साथी 😊 #Satluj #punjab #webseries
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मित्रों …. कभी ऐसा हुआ है कि आपके पिताजी को यह “हुकुम” दिया गया हो कि वे अपनी चोटी काट कर पगड़ी बांधें और दाढ़ी बढ़ायें वरना उन्हें सोध दिया जाएगा (माथे पर गोली मार दी जाएगी) केवल इसलिए कि वे हिंदू हैं ?? कभी आपको स्कूल में बाधित किया गया कि हिंदी की पुस्तकें जला दो और केवल पंजाबी पढ़ों ?? कभी ऐसा हुआ कि कई साल तक शाम को अंधेरा होते ही आपको अपने घर की लाइट्स बंद करके डर के साये में सोना पड़ा हो और घर के दरवाजे पर किसी की दस्तक होते ही आपका पूरा परिवार सहम जाता हो ?? आपको यह सब जानना चाहिए …. आजकल एक वेबसीरीज़ “सतलुज” की काफ़ी चर्चा चल रही है …. बताया जा रहा है कि सतलुज नाम की इस वेब सीरीज में पंजाब के सन् 1980 से लेकर 1995 तक के हालात के बारे में सच्चे तथ्यों को दिखाया गया है ! अब सरकार ने इसे बैन कर दिया है जिसे लेकर बहुत से लोग सरकार की निंदा कर रहे हैं …. सोशल मीडिया पर इस प्रकार की पोस्टों की बाढ़ आई हुई है कि सरकार ने सच का गला घोंट दिया, सरकार तानाशाही कर रही है वगैरा वगैरा ! हालांकि ये सब विरोध करने वालों में अधिकतर लोग वो हैं जो कभी पंजाब गए ही नहीं …. ना ही 1980 से लेकर 1995 तक उनके पिताजी कभी पंजाब गए थे ! इन लोगों ने पंजाब केवल फ़िल्मों में देखा है. इनका मानना है कि पंजाब का हर निवासी सुबह नाश्ते में छोले-भटूरे खाता है और रात में डिनर सरसों के साग और मक्की की रोटी का करता है और सारा दिन बस “बल्ले-बल्ले ! याहूँ याहूँ” करते हुए भांगड़ा करता रहता है ! लेकिन इतिहास केवल गीतों और खेतों से नहीं बनता …. इतिहास उन चीखों से भी बनता है जो किसी कैमरे में रिकॉर्ड नहीं हुईं ! यदि वास्तव में यह वेब सीरीज़ 1980 से 1995 के पंजाब की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करती है, तो फिर कुछ प्रश्न पूछना अनुचित नहीं होना चाहिए ! क्या इस सीरीज़ में वह दृश्य दिखाया गया है जब 6 मार्च 1986 कपूरथला में आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 13 हिंदू नागरिक मारे गए और कई घायल हुए ?? क्या इस सिरीज़ में दिखाया गया है कि 25 जुलाई 1986 को मुक्तसर में बस रोककर यात्रियों की पहचान की गई और 14 हिंदू तथा 1 सिख यात्री की हत्या कर दी गई ?? क्या इस सिरीज़ में वह दृश्य भी है जिसमें 30 नवंबर 1986 को होशियारपुर में बस से हिंदू यात्रियों को अलग कर 24 लोगों की हत्या की गई ?? इस सीरीज़ में वह दृश्य तो अवश्य होगा ना जिसमें 7 जुलाई 1987 लालरू में बस रोककर हिंदू यात्रियों को अलग किया गया और 34 लोगों की हत्या कर दी गई ?? यह तो उस दौर के सबसे चर्चित नरसंहारों में से एक था ! यह दृश्य तो सीरीज़ में पक्का होगा ना ?? अच्छा यह दृश्य तो अवश्य दिखाया गया होगा ना जिसमें 15 जून 1991 को लुधियाना के पास दो ट्रेनों पर हमला करके आतंकवादियों ने यात्रियों पर गोलीबारी की जिसमें लगभग 80 लोगों की मृत्यु हुई, जिनमें अधिकांश हिंदू यात्री थे ?? या फिर वह दृश्य दिखाया गया हो जिसमें 26 दिसंबर 1991 एक अन्य ट्रेन यात्रियों को निशाना बनाया गया 1991 में ऐसे रेल हमलों में कुल लगभग 125 लोगों की मृत्यु हुई थी !! सीरीज़ में यह तो अवश्य दिखाया गया होगा ना कि उस दौर में पंजाब में रहने वाले हर “मोन्ने” के लिए यह “हुकुम” था कि दाढ़ी बढ़ा कर रखनी है, दुकानों के बोर्ड, स्कूटरों के नंबर प्लेट्स सब कुछ पंजाबी में होना चाहिए ?? इस हुकुम की अवहेलना करने वाले को सरेआम सड़क पर “सोध” दिया जाता था ! यह सब दिखाया गया है ना सीरीज़ में ?? क्या इस सीरीज़ में यह दिखाया गया है कि कैसे अख़बार बाँटने वाले हॉकरों को अख़बार बाँटने पर मार दिया जाता था , कैसे शिव भक्त जंगम भिक्षुओं को ख़त्म कर दिया गया था, कैसे शाम का अँधेरा होते ही एक अघोषित कर्फ्यू लग जाता था, कैसे रात में “काले कच्छे वाले गिरोह” पूरे पूरे परिवारों का सफाया कर देते थे, कैसे पंजाब पुलिस के DIG अटवाल की गोलियों से छलनी लाश कई घंटे तक भरे बाज़ार में सड़क पर पड़ी रही और पुलिस तक उसके पास जाने से डरती रही, कैसे पुलिस की मुखबिरी के नाम पर हिन्दुओं के साथ व्यक्तिगत रंजिशें, उनकी संपत्ति पर क़ब्ज़ा, उनकी बहू-बेटियों को ….. और लिखूँ ?? लिखते लिखते उँगलियाँ थक जायेंगी लेकिन उस दौर का सच पूरा नहीं बताया जा सकेगा ! यह तो दिखाया ही गया होगा ना कि शाम को अंधेरा होने के बाद पुलिसकर्मी भी पुलिस थाने के दरवाजे बंद करके अंदर से ताला लगा लिया करते थे ?? अगर इस सीरीज़ में यह सब दिखाया गया है तो मैं स्वयं सरकार को हज़ारों लानतें भेजता हूँ कि उसने कोरा सच दिखाने वाली इतनी सटीक वेबसीरीज़ को बैन कर दिया !!
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E20 पेट्रोल जब तक पर्याप्त नमी के संपर्क में नहीं आता है तब तक वो ठीक है. किसी भी पुरानी गाड़ी को इससे कोई नुकसान नहीं है, बस माइलेज में थोड़ी कमी देखने को मिल सकती है. समस्या कहाँ है? ये जो आय दिन पेट्रोल पम्प के वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें bottle में पानी और पेट्रोल अलग अलग दिखता है वो पेट्रोल पंप की टंकी में नमी के कारण अलग हुआ है. देश में बहुत से ऐसे पेट्रोल पम्प हैं जो मानकों का पालन नहीं करते या पुराने हो चुके हैं लेकिन काम चल रहा है तो काम चलाया जा रहा है, दावे से कह सकता हूं कि केवल ऐसे पेट्रोल पंपों पर ही यह समस्या देखने को मिल रही होगी. बोतल में पेट्रोल देने की मनाही है, और पेट्रोल सीधा गाड़ी की टंकी में जाता है इसलिए हमें यह पता नहीं लग पाता कि पेट्रोल शुद्ध है या नमी के कारण ethanol अलग हो चुका है. इस संदेह को दूर करने के लिए सरकार को सभी पेट्रोल पंपों को यह निर्देश जारी करना चाहिए कि वे पेट्रोल पारदर्शी बोतल/बिकर में भरकर ग्राहक को दिखाएं उसके बाद गाड़ी में भरें या अगर ग्राहक को शंका है और वो यह मांग करता है तो उसकी शंका दूर करने के लिए ऐसा उपाय करें. E20 पेट्रोल से गाड़ी खराब हो रही, या इंजन खराब हो रहे हैं ये कोरी बकवास है. रोज मैं 20-30 साल पुराने बाइक वाहनों को उसी E20 पेट्रोल पर चलते देखता हूं. मेरी खुद की गाड़ी 15 साल पुरानी है. E20 से किसानों को फायदा है, E20 से सरकार को फायदा है, E20 से पर्यावरण को फायदा है, E20 की प्राकृतिक दुश्मन सिर्फ नमी है, सरकार को इस दिशा में शोध करवाना चाहिए और इस कमी को दूर करना चाहिए. या फिर वाहन निर्माता कंपनियों से ऐसी कोई विशेष किट बनवाए जो लागत में कम हो और पुरानी गाड़ियों को 100% ethanol पर चलने वाला बना दे. लेकिन ऐसा कर देंगे तो नए वाहन कैसे बिकेंगे? अब एक सच्ची घटना सुनाता हूँ, मेरे यहां एक पेट्रोल पम्प है, जो अब नया बनाया गया है. पहले जब वो पुराना था तो उसमें हर दिन बवाल मचा रहता था कि ये पेट्रोल पंप पेट्रोल में पानी मिला कर बेच रहा है. एक दो बार तो सील भी कर दिया गया था. उस पम्प पर पेट्रोल भरवाने के बाद मेरी गाड़ी से स्वयं आधा बोतल पेट्रोल और आधा बोतल पानी निकला था. असल में वो पानी नहीं था ethanol था. मतलब पेट्रोल पंप पर ही टैंकरों में नमी के कारण ethanol पेट्रोल से अलग हो जाता था. पेट्रोल पम्प पुराना था तो इस वजह से बरसात के मौसम में नमी किसी तरह टैंकर तक पहुंच जाती होगी. फिर उस पेट्रोल पम्प को नया बनाया गया, टैंकर बदले गए. अब उसी पंप पर सही पेट्रोल मिलता है. #E20 #EthanolBlending #Ethanol #Fuel #Petrol
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भारत को खोखला करने के कितने प्रकार से विदेशी षडयंत्र रचे गए हैं ये उसकी मात्र एक झलक है. मोदी सरकार ऐसे हर षडयंत्रों और भारत
भारत को खोखला करने के कितने प्रकार से विदेशी षडयंत्र रचे गए हैं ये उसकी मात्र एक झलक है. मोदी सरकार ऐसे हर षडयंत्रों और भारत के बीच चट्टान बनकर खड़ी है.
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राम मंदिर चढावा चोरी पर जहां एक तरफ जबरदस्त मीडिया ट्रायल चल रहा हैं जिसमें TRP के भूखे मीडिया गिद्ध फर्जी ख़बरें तक चला रहे हैं. तो दूसरी तरफ रामद्रोही कांग्रेसी, सपाई बाबर की औलादें भी राम मंदिर चढावा चोरी पर भौंक रहीं हैं. मुझे समझ नहीं आता... 500 वर्षों तक मंदिर की लड़ाई लड़ी रामजादो ने राम मंदिर के लिए अपना खून बहाया रामजादो ने राम मंदिर के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए रामजादो ने भव्य मंदिर निर्माण पर खुश भी रामजादे ही हुए थे मंदिर रामजादो का दान रामजादो का चढावा रामजादो का तो ये हरामजादे कांग्रेसी, सपाई बाबर की औलादें चढावा चोरी पर इतना क्यों भौंक रहे हैं? तुम लोगों को कोई अधिकार नहीं है. क्योंकि तुम बाबर की नाजायज औलादों ने तो अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण न हो सके इसके लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया था. असल में इन हरामजादो को चोरी का दुःख नहीं है, ये तो बड़े प्रसन्न हैं कि इन्हें एक मौका मिल गया मोदी योगी को टार्गेट करने का. इन्हें लगता है कि ये इस मुद्दे का फायदा उठाकर सत्ता प्राप्त कर लेंगे लेकिन ऐसा करके ये साबित कर रहे हैं कि ये सब बाबर की नाजायज औलादें ही हैं. मंदिर के दान में चोरी करने का महापाप करने वालों को उनके इस महापाप का दंड अवश्य मिलेगा, यहां भी और वहाँ भी. ✍️ Abhijeet Srivastava
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राम मंदिर में सुअरों का प्रवेश वर्जित होना चाहिए! ये वो सुअर हैं जिन्होंने भव्य राम मंदिर निर्माण के मार्ग में हर सम्भव रोड़े डालने का कुप्रयास किया था. ये वो सूअर हैं जिनकी पार्टी ने राम मंदिर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की फौज उतारी थी. ये वो सूअर हैं जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन को कुचलने का हर सम्भव कुप्रयास किया था. ये वो सूअर हैं जिन्होंने निर्दोष राम भक्त कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थी. ये वो सूअर हैं जिन्होंने राम को काल्पनिक कहा था. ये वो सूअर हैं जिन्होंने रामसेतु को तोड़ना चाहा था. ये वो सूअर हैं जो समुदाय विशेष के तुष्टिकरण में वहाँ राम मंदिर की जगह स्कूल हॉस्पिटल बनाने की बक-ओदी किया करते थे. ये वो सूअर है जिन्होंने सत्ता में होकर राम की नगरी अयोध्या को विकास से पूरी तरह वंचित रखा था. ये वो सूअर हैं जिन्होंने सत्ता में होकर कई दशकों तक राम लला को फटे तिरपाल में रखा था. आज ये धूर्त कह रहे हैं कि राम सबके हैं.. राम तुम जैसे रावण के नहीं हैं, राम तुम जैसे राक्षसों के नहीं हैं, राम तुम जैसे अधर्मी सुअरों के नहीं हैं.. तुम लोग घृणित हो, रामद्रोही हो..
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पिछले छह वर्ष में भारत (तथा अन्य राष्ट्रों) को चार गंभीर वैश्विक समस्याओं से जूझना पड़ा था और कुछ अभी भी जारी है। 2020 में दो वर्ष के लिए कोविड, फरवरी 2022 में रूस-उक्रैन युद्ध जो अभी भी जारी है, अप्रैल 2025 में अमेरिकी टैरिफ जिसका प्रभाव अभी भी अनिश्चित है, एवं फरवरी 2026 में खाड़ी युद्ध जो एक तरह से अभी समाप्त नहीं हुआ है। इन सभी ने सप्लाई चेन ध्वस्त कर दी; रूस, उक्रैन एवं खाड़ी के देशो से आने वाला कच्चा तेल, गैस, रसायन, खाद एवं खाद्य तेल की आपूर्ति बाधित कर दी; मैन्युफैक्चर्ड गुड्स की कीमते बढ़ा दी; भारत का निर्यात मंहगा कर दिया है। साथ ही, नागरिक असुरक्षा की भावना को तीव्र किया है। इन सबके बाद भी भारत में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं हुई, घरेलु कुकिंग गैस की उपलब्धता निर्बाध जारी रही और आज स्थिति यह है कि सरकार ने इनकी खरीद पर सभी नियंत्रण (जैसे कि घरेलु गैस के लिए 25 और 45 दिनों की सीमा) हटा दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने एजेंडा चलाया था कि भारत के निवासी ठंडा भोजन खा रहे है। कदाचित ही ऐसा परिवार हो जिसने ऐसे भोजन को झेला हो। यहाँ तक कि पिछले चार माह में सरकार ने प्रति उज्जवला सिलिंडर पर 900 रुपये एवं अन्य घरेलु सिलिंडर पर 600 रुपये का घाटा उठाया, लेकिन मोर और लेस दाम नहीं बढ़ाया। एक भी रिटेल आउटलेट पर तेल खत्म नहीं हुआ। जिस भी परिवार को सिलेंडर चाहिए था, उसे मिला। सरकार ने गैस एवं तेल की कीमत स्थिर रखने के लिए पर एक्साइज ड्यूटी कम कर दी जिससे लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू का नुक्सान हुआ। फिर भी सभी योजनाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण इत्यादि जारी है। जो देश अपना 90% कच्चा तेल और आधे से ज़्यादा कुकिंग गैस खाड़ी देशों से मंगाता है, उसके बारे में आम तौर पर यही माना जाता था कि वहां पेट्रोल पंप पर लंबी लाइनें लगेंगी, रसोई में गैस खत्म हो जाएगी, रुपये की कीमत गिरेगी और डॉलर के लिए मारामारी मचेगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। जनवरी 2026 को रुपया 92 पर था, अब 94.5 पर है। जीडीपी की तुलना में विदेशी उधार 21% से कम है (मनमोहन के समय 24% छूने वाला था)। महत्वपूर्ण यह है कि मार्च 2026 में मूलधन और ब्याज का भुगतान मौजूदा प्राप्तियों (आय) की तुलना में घटकर 5.8 प्रतिशत हो गया। पिछले वर्ष मार्च को यह 6.6 प्रतिशत था। पिछले वित्तीय वर्ष में कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) 95 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। साथ ही, इम्पोर्ट एवं एक्सपोर्ट के मध्य अंतर (current account deficit) जीडीपी का केवल 0.6 प्रतिशत था और इस वित्तीय वर्ष में कम-ज्यादा यही रहने की आशा है। विदेशी मुद्रा भंडार 672 बिलियन डॉलर से अधिक है। मई 2025 की तुलना में इस वर्ष मई में मैन्युफैक्चरिंग में 5.5% की वृद्धि हुई, तथा बिजली और गैस की आपूर्ति में 9.9% की विशाल वृद्धि देखी गई है। ध्यान दीजिये, राहुल 3 जून को दांवा कर रहा था कि भयंकर आर्थिक सुनामी आ रही है और नरेंद्र मोदी इसके बारे में न कुछ कर रहे हैं, न कर सकते हैं। इसके विपरीत, मैन्युफैक्चरिंग में 5.5% तथा बिजली और गैस की आपूर्ति में 9.9% की विशाल वृद्धि हो गयी। इस वर्ष अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.5 से 7 प्रतिशत होने की आशा है। इतने संकट के बाद भी (नारा लगाया जाता है कि नेतृत्व कम्प्रोमाइज़्ड है) भारत का जल आतंकी क्षेत्र को नहीं जाने दिया जा रहा है। दिल्ली दंगे के आरोपी, "चिकेन नेक" को काटने का सपना देखने वाले लोग पिछले 5 वर्ष से जेल में बंद है। आतंकी क्षेत्र के कब्जे वाले कश्मीर में सेना को पत्थर मारा जा रहा है; आजादी के नारे लगाए जा रहे है। बाई द वे, यूक्रेन में चल रही लड़ाई अब प्रथम विश्व युद्ध से भी ज़्यादा लंबी खिंच गई है। - अमित सिंघल
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बंगाल में टीएमसी को गए लगभग दो महीने होने को हैं, बंगाल की जनता टीएमसी के आतंक से इतनी क्षुब्ध है कि टीएमसी नेताओं के प्रति जनता का क्रोध अभी तक शांत नहीं हुआ है. टीएमसी ने बंगाल के लोगों के साथ जितना बुरा बर्ताव किया है उसे याद करके किसी की भी रूह कांप जाएगी. ये तो जनता का बड़प्पन है कि अपना क्रोध केवल अंडे फेंककर जाहिर कर रही है. अगर जनता को जरा सी भी छूट मिल जाती तो टीएमसी के गुंडों का वो हश्र करती कि इनकी पीढ़ियां याद करती कि निर्दोष जनता के साथ अत्याचार करने का क्या अंजाम भुगतना पड़ सकता है.
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मुंबई में मोहर्रम जुलूस में शामिल लोगों को पेन किलर के नाम पर जिंक फास्फाइड (चूहे मारने की दवा) के जहरीले कैप्सूल बांटने हुए मोहम्मद फैयाज निसार हुसैन को गिरफ्तार किया गया है। मोहम्मद फैयाज सुन्नी है और मोहर्रम में शियाओं को मारना चाहता था। इसके पास से 14900 कैप्सूल मिले हैं, इसके अलावा उसने 30 हजार कैप्सूल और 50 KG जिंक फास्फाइड का ऑर्डर किया हुआ था। मोहर्रम किसी त्योहार या खुशी के रूप में नहीं, बल्कि पैगंबर साहब के नवासे, हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की इराक के कर्बला में हुई शहादत की याद में 'गम और मातम' के रूप में मनाया जाता है। सुन्नी जमात इमाम हुसैन को नहीं मानती और शिया- सुन्नी की यह लड़ाई 1400 साल से चल रही है। अरब देशों में भी चल रही लड़ाई मुख्यतः शिया- सुन्नी की लड़ाई है। ईरान शिया देश है जबकि अन्य अरब देश सुन्नी हैं, US तो लड़ाई का एक मोहरा है। सोचिए जब शिया- सुन्नी आपस में भाई नहीं हो सकते तो ये दोनों हिंदुओं के क्या भाई होंगे? हिंदू इन दोनों के लिए केवल चारा है।
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जब समाजवादी नेताजी ऐसी बातें करते हैं तब उनका कोर वोट बैंक (समुदाय विशेष) जानता है कि नेताजी यह केवल हिन्दू वोट काटने के लिए
जब समाजवादी नेताजी ऐसी बातें करते हैं तब उनका कोर वोट बैंक (समुदाय विशेष) जानता है कि नेताजी यह केवल हिन्दू वोट काटने के लिए कह रहे हैं. लेकिन अगर भाजपा का कोई नेता "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" बोलता है तो उसका कोर वोटर भड़क कर भाजपा के नेतृत्व को ही मौलाना घोषित कर देता है. हिन्दुओं की यही राजनैतिक अपरिपक्वता ही हिन्दुत्व की कमजोरी है.
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