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Abhijeet Srivastava

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As per section 10A of the Payment and Settlement Systems Act, 2007 (51 of 2007), the Central Government prohibits banks and s
As per section 10A of the Payment and Settlement Systems Act, 2007 (51 of 2007), the Central Government prohibits banks and system providers from imposing, directly or indirectly, any charges on a person making or receiving payments using debit cards powered by RuPay and UPI transactions up to Rs 2,000: Ministry of Finance

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केवल ये कह देने भर से कि भाजपा के हार जीत की चिंता हम क्यों करें? भाजपा करे... भाजपा के बाद जो आएगा उससे हमें क्या? चाहे कोई आए... यहीं पर रंगे सियार अजीत भारती पर एक संदेह पैदा होता है। ऐसी धूर्ततापूर्ण बातें एक वामपंथी ही कर सकता है, जिसे न राष्ट्र से मतलब है न हिन्दू/हिन्दुत्व से! समाज में जातिवादी जहर घोलकर हिन्दुओं की फॉल्टलाइन पर प्रहर करना ही एकमात्र उद्देश्य है! रंगा सियार एक यूट्यूबर है, सम्भवतः अब हर तरह के लोगों जान-पहचान भी होगी, उसको कुछ नहीं होगा, ज्यादा होगा तो दिलीप मंडल की तरह पाला बदलकर दरबारी बन जाएगा। पर आम हिन्दू? हिन्दुत्व के प्रति निष्ठावान हिन्दुओं की दुर्दशा का अनुमान लगाया जा सकता है?? क्या ये सोंचे बिना भाजपा को खदेड़ दिया जाना चाहिए? ये समझे बिना की भाजपा के बाद वालों की क्या मानसिकता है?? और यदि मुद्दे की हीं बात है तो प्राइवेट सेक्टर मे आरक्षण, ईसाई और मुसलमानों को आरक्षण और रोहित वेमुला एक्ट की बात करने वाले विपक्ष को ऐसे हीं इग्नोर कर दिया जाए?? जिसकी जितनी भागिदारी उतनी उसकी हिस्सेदारी का ताप हिन्दू समाज खासकर सवर्ण समाज झेल लेगा?? या फिर साम्प्रदायिक हिंसा जैसे हिन्दू विरोधी कानून का ताप झेल पाएगा?? मै फिर कह रहा हूं, मुद्दा कोई मुश्किल नहीं है, आप अपने अधिकार मांगिए, constructive criticism कीजिए, लेकिन किसी को मिले अधिकार छिनने की बात करेंगे तो आप अप्रासंगिक हो जाएंगे. SC/ST समाज के हिन्दुओं को जो मिला है उसे छीनने की मांग करने की जगह आप अपने सवर्ण समाज के लिए भी Atrocity Act जैसे कठोर कानून की मांग कीजिए! आप ईशनिंदा के विरुद्ध कठोर कानून की मांग कीजिए, आप मांग कीजिए कि कानून के दुरुपयोग, झूठे केस, झूठी गवाही पर कठोर कानून बने! आप सरकार से मांगिए कि जिस निर्दोष को कानून की कमी, झूठे आरोप, न्याय व्यवस्था की देरी के कारण जेल जैसी यातना सहन करनी पड़ती है उसके लिए 2 करोड़ की अर्थिक क्षतिपूर्ति की व्यवस्था भी बने! ✍️ Raunak Kumar, Abhijeet Srivastava
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वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ... निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा...🙏 आप सभी सनातनी मित्रों को गणेश चतुर्थी की बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ... विघ्नहर्ता श्री गणेश आप सभी के जीवन में सुख, शान्ति व समृद्धि लेकर आएँ...🙏
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🚨Uniform Civil Code (UCC) would be implemented across all 21 NDA-ruled states before 2029. ~Union Home minister
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Constructive Criticism - मोदी सरकार से अनुरोध जिन निर्दोष लोगों की जिंदगी गलत केस/आरोप, कानून के दुरुपयोग के कारण खराब होती है, जो लोग 10-20 साल उस अपराध का आरोपी बनकर जेल में गुजार देते हैं जो उसने किया ही नहीं होता है. इन वर्षों में वे न जाने कितने मानसिक और शारीरिक कष्ट को सहते हैं. फिर 10-20 साल बाद पता चलता है कि आरोपी तो निर्दोष था, उसे गलत उद्देश्य से फंसाया गया था या न्याय व्यस्था के मकड़जाल/लूपहोल के कारण इतने वर्षों तक अपराधी बना रहा, अपमानित होता रहा. ऐसे वास्तविक केस में आरोपी के लिए सरकार द्वारा कम से कम 2 करोड़ या सरकार को जो उचित लगे, मुआवजे का प्रावधान भी होना चाहिए! क्योंकि आप उसकी जिन्दगी का वो समय तो लौटा नहीं सकते जो उसने सिस्टम की नाकामी/लापरवाही के कारण जेल में बिताया है लेकिन एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए अर्थिक क्षतिपूर्ति तो कर ही सकते हैं!
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गलत नीतियों पर अपनी सरकार का constructive criticism करो, समस्या पता है समाधान पर बात करो. धमकी देने से या गाली गलौज करने से कुछ हासिल नहीं होगा. राजीव गांधी ऐक्ट और ऐसे प्रत्येक कानून जिसका दुरुपयोग हो रहा है उसे रोकने के लिए मोदी सरकार को एक Prevention of Misuse of Law Act बनाना चाहिए जिसमें कानून का दुरुपयोग करने, झूठी शिकायत, झूठी गवाही के लिए कठोर दंड के प्रावधान किए जाएं. दूसरा ईशनिंदा पर भी एक कठोर कानून होना चाहिए! किसी भी धर्म या मज़हब के ईश्वर पर दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी करना दण्डनीय अपराध होना चाहिए. जिसमें अग्रिम ज़मानत भी नहीं हो! तीसरा यदि किसी विशेष कानून जैसे राजीव गांधी ऐक्ट के तहत किसी पीड़ित को मुआवजा दिया जा रहा है तो इसके लिए उसी समाज से दान या अपराधियों से अर्थिक दंड लेकर एक अलग फंड की व्यवस्था होनी चाहिए जिनके लिए विशेष कानून बनाया गया है. और गलत केस करने वालों से दोगुना मुआवजा वसूलने का प्रावधान भी होना चाहिए! ये होता है Constructive Criticism.
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भारत में रहकर भाजपा की सत्ता रूपी वट वृक्ष की छांव में राजीव गांधी ऐक्ट या आरक्षण जैसे मुद्दों पर जिन हिन्दुओं का जातिवाद हिलोरे मार रहा है और उसी वृक्ष को काटने की धमकियां दी जा रहीं है वो कृपया बांग्लादेश में हिन्दुओं की स्थिति देख लें! 2024 में जिहादियों की हिंसक भीड़ ने बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्ता पलट दिया और उसके बाद शुरू हुआ हिन्दुओं का नरसंहार, कोतवाली के सामने खंबे से लटकाकर एक हिन्दू को जिंदा जलाने से पहले जिहादी भीड़ नहीं उसकी जाति नहीं पूछी, वो उनके लिए काफिर था बस इतना ही काफी था. स्वामी चिन्मय कृष्ण दास को फर्जी केस में फंसाकर जेल में डाल दिया गया, क्योंकि वो हिन्दुओं के खिलाफ हो रही जिहादी हिंसा का विरोध कर रहे थे! उनकी मां बिमार हुई, उनसे मिलने तक की अनुमती नहीं दी गई! अभी एक दो दिन पहले ही उनकी मां का देहांत हुआ तो मात्र कुछ घंटों के लिए उन्हें पेरोल पर छोड़ा गया था! हिन्दुओं की ऐसी दयनीय स्थिति देखकर बहुत पीड़ा होती है. ममता कुशासन में पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं की दुर्दशा का घाव तो अभी ताजा ही है, कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार और पलायन भी ज्यादा पुरानी बात नहीं है. इतना सब देखने के बाद भी यदि कोई हिन्दू भाजपा का विरोध करता है, भाजपा को सत्ता से हटाने की धमकी देकर उनकी गोद में बैठना चाहता है जो सत्ता में आने के बाद जेहादियों के ही तलवे चाटते हैं! हिन्दू समाज की यही आत्मघाती प्रवत्ती ही एक दिन समूचे भारत को चिन्मय दास की तरह बेबस बना देगी! ✍️ Abhijeet Srivastava
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2018 में 2019 में 2020 में 2021 में 2022 में 2023 में 2024 में और 2025 तक रंगे सियार को नहीं याद आया कि कोई राजीव गांधी ऐक्ट भी है जिसे मोदी ने फिर से जिवित कर दिया है. अचानक 2026 में इसे आरक्षण, मोदी ऐक्ट, भीजपा सब एक साथ याद आ रहा है. इस धूर्त की चालबाजी अब लोग धीरे धीरे समझने लगे हैं, बस इसके आंड चाटुकारों को छोड़कर! 😏 ये कॉंग्रेस की हिन्दुओं में फूट डालो और राज करो वाली पुरानी कुत्तनीति है जिसे अब एक बच्चा भी समझ सकता है. रंगे सियार की चालबाजी में फंसकर जो भोले लोग कह रहे हैं कि अब वे चुनाव में किसी को वोट नहीं देंगे क्योंकि सभी सवर्ण विरोधी है. ये वही उदासीनता का भाव है जिसको भाजपा वोटरों में भरने के लिए कॉंग्रेस ने इन धूर्त रंगे सियारों को मैदान में उतारा है. चुनावों में इस उदासीनता का फायदा सीधा कॉंग्रेस, स्पा और अन्य विपक्षी दलों को होगा. क्योंकि चुनाव में 100 में से 99 वोट नोटा को मिले या 99 लोग उदासीन होकर वोट भी न करें तो भी बचा 1 वोट पाने वाला विजेता रहेगा और यही कॉंग्रेस की चाल है.
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कड़वा सत्य... भाजपा एक राष्ट्रवादी राजनैतिक पार्टी है! मोदी जी एक राष्ट्रवादी राजनेता है! देश के लिए कुछ अच्छा करना है तो सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ बने रहना आवश्यक है, तभी 370 जैसे ऐतिहासिक निर्णय हो सकते हैं! इसके लिए इन्हें देश के नफा नुकसान के साथ-साथ अपनी राजनैतिक पार्टी का नफा नुकसान भी देखना है! अब देश में वोटरों के कई वर्ग है, लेकिन सबसे कृतघ्न वोटर वर्ग सवर्ण है! ये वो कालिदास हैं जो उसी डाल को काटना चाहते हैं जिसकी छांव में दिन रात सोशल मीडिया पर इन्हें भौंकने की आजादी मिली है! यह वर्ग हर दिन किसी न किसी मुद्दे को लेकर सरकार से क्रोधित रहता है! सवर्णों की कृतघ्नता के कारण भाजपा ने इन्हें फ्लोटिंग वोट बैंक में डाल दिया है! क्योंकि नालबंद की सवर्ण कील युद्ध के मैदान में कब, किस बात पर धोखा दे देगी इसका अंदाजा है, क्योंकि ये वो वर्ग है जो आलू प्याज के दाम बढ़ने पर अटल जी को हटा देता है, यही वो वर्ग है जो भव्य राम मंदिर बनवाने के बाद अयोध्या हरा देता है, यही वो वर्ग है जो देश में इतना सब विकास करने के बाद 303 से 240 पर ले आता है! और इसीलिए सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा को अपना वोट प्रतिशत बढ़ाना होगा! अब भाजपा अगर दलित शोषित पीड़ित वंचित वोट बैंक को साध रही है तो इन जातिवादी सवर्णों को बहुत चुभ रहा है! आज अगर भाजपा की राजनीति में जातिवाद दिखाई दे रहा है तो इसका कारण भी सवर्णों की अहंकारी प्रवत्ती और मूर्खता ही है! आज इन सवर्णों को रंगा सियार अपना शुभचिंतक लग रहा है! कहता है हम 30% है अपनी अलग पार्टी बनाएंगे, अपनी सरकार बनाएंगे? अबे 30% में 10% तो वोट देने नहीं जाते, 10% कॉंग्रेस, समाजवादी विपक्ष के साथ है अब बचे 10% जो भाजपा के साथ थे, और मान लेते हैं कि तुम्हारी रंगी सियार छवि से आकर्षित होकर 9% सवर्ण भाजपा से नाराज हो गए क्योंकि मेरे जैसे 1% तो किसी भी परिस्थिति में भाजपा के साथ ही रहेंगे. अब 9% में तुम सरकार तो छोड़ो अपना एक विधायक नहीं बना सकते, सिवाय भावुक सवर्णों को चूतिया बनाकर चंदा इकट्ठा करके उसको डकारने के. लेकिन इस वर्ग में भी दो प्रकार के सवर्ण हैं- एक वो जो सत्ता (भाजपा) के साथ हैं या होने का दिखावा करते हैं और दूसरे वो जो विपक्षी दलो की गुलामी करते हैं! जो विपक्षी सवर्ण हैं उन्हें न तो आरक्षण से समस्या है, न UGC से और न ही राजीव गांधी ऐक्ट से. बल्कि इन्होंने तो 60 साल तक कॉंग्रेस के साथ मिलकर देश की लगभग सभी समस्याओं की डिलेवरी करवायी है! चाहे वो आरक्षण हो, राजीव गांधी ऐक्ट हो, इतिहास से छेड़छाड़ हो या JNU में लगने वाले आपत्तिजनक नारे हो, इन सबके केंद्र में आप एक सवर्ण को ही पाएंगे! मैं सवर्ण जरूर हूं लेकिन चूतिया नहीं हूं इसलिए वोट तो हर हाल में भाजपा को ही दूंगा! क्योंकि भाजपा मुझे व्यक्तिगत कुछ दे या न दे लेकिन मेरे देश को विकास, आर्थिक प्रगति, नई ऊंचाई अवश्य दे रही है! एक राष्ट्रवादी होने के नाते इतना ही मेरे लिए पर्याप्त है! ✍️ Abhijeet Srivastava
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2018 के संशोधन पर बड़ा हल्ला हो रहा है लेकिन क्या किसी को पता है इसके बाद 2020 में भी सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय दिया था- राजीव गांधी ऐक्ट की वर्तमान स्थिति:- सुप्रीम कोर्ट का राजीव गांधी (sc/st) ऐक्ट पर फरवरी 2020 का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है:- केस:- पृथ्वी राज चौहान बनाम भारत संघ (2020) निर्णय:- यदि किसी व्यक्ती पर झूठा केस दर्ज होता है, और यदि पहली नजर में कोई अपराध नहीं बनता है तो धारा 18A के बावजूद अदालतें अग्रिम ज़मानत दे सकती हैं और हाईकोर्ट के पास BNS की धारा 528 के तहत FIR रद्द करने का पूरा अधिकार है. इसके लिए दो मुख्य कानूनी पहलुओं को देखा जाता है: सार्वजनिक स्थान (Public View): अपमान या जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किसी सार्वजनिक स्थान पर या जनता के सामने होना चाहिए। अगर कथित घटना घर के भीतर या बिना किसी बाहरी गवाह के हुई है, तो यह एक्ट लागू नहीं होता। जातिगत इरादा (Intent): आरोपी ने पीड़ित को केवल इसलिए निशाना बनाया हो क्योंकि वह अनुसूचित जाति या जनजाति से है. सामान्य झगड़े में अचानक हुई बहस को SC/ST एक्ट का रूप नहीं दिया जा सकता। झूठी शिकायत करने वाले पर कार्यवाही:- अगर कोर्ट में यह साबित हो जाता है कि FIR पूरी तरह से झूठी और फंसाने के इरादे से की गई थी, तो आरोपी बरी होने के बाद शिकायतकर्ता के खिलाफ BNS की धारा 248, 217, 229 के तहत कानूनी कार्रवाई कर सकता है. आरोपी शिकायतकर्ता के खिलाफ दीवानी (Civil) या आपराधिक (Criminal) मानहानि का मुकदमा दायर कर हर्जाने की मांग कर सकता है।
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यह मामला Supreme Court में Criminal Appeal No. 416 of 2018 बना और 20 मार्च 2018 को Justice Adarsh Kumar Goel और Justice U.U. Lalit की Bench ने फैसला दिया। जिस टिप्पणी के कारण विवाद पैदा हुआ वो इस प्रकार थी: 1. Dr. Satish Bhise की टिप्पणियाँ: Gaikwad के अनुसार उनकी 2007–08 की ACR में यह टिप्पणियाँ की गई थीं कि: वह झूठी शिकायतें करने का आदी है (in the habit of making false complaints); वह पदोन्नति (promotion) के योग्य नहीं है; उसे अधिक और व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता है; वह क्षेत्रीय स्तर (regional level) पर काम करने के योग्य नहीं है। 2. Dr. Kishor Burade की टिप्पणी: सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणी यह थी कि: उसकी integrity और character अच्छे नहीं हैं / दोनों में कमी है। हिंदी में इसका अर्थ हुआ—“उसकी ईमानदारी (integrity) और चरित्र (character) अच्छे नहीं हैं।” हिन्दुओं को आपस में लड़वाने के लिए कॉंग्रेस ने ऐसे ऐसे बूबी ट्रैप बिछाए हैं जिनसे किसी तरह बचाकर मोदीजी देश को इस ऊंचाई तक लाए हैं. सत्ता से दूर कॉंग्रेस सत्ता पाने के लिए इतनी बेचैन है कि वो अब कुछ भी कर सकती है. राहुल गांधी के बेतुके बयानों से स्पष्ट होता है कि कॉंग्रेस दलितों-गैर दलितों के मन में जहर की खेती तो कर ही रही है. दलितों-गैर दलितों को आपस में लड़वा रही है. अगर कॉंग्रेस यह सोचती है कि अपने रंगे सियारों को एक्टिवेट करके वो भाजपा के समर्थकों और भाजपा के वोटबैंक में असंतोष पैदा करके चुनाव जीत लेगी तो वह कभी अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाएगी क्योंकि हम भाजपा/मोदी से चाहे जितना नाराज हो जाएं लेकिन वोट तो मोदी/भाजपा को ही देंगे. ✍️ Abhijeet Srivastava
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आज 9/11 है और बहुत कम लोग जानते हैं कि ओसामा बिन लादेन से पहले एक 9/11 कॉंग्रेस पार्टी अंजाम दे चुकी है. आज ही के दिन 1989 में राजीव गांधी यह भयानक कानून SC/ST Act लेकर आए थे और यह राजीव ऐक्ट वोट बैंक की राजनीति के कारण तब से अब तक चला आ रहा है. वोटबैंक की राजनीति का यह विभस्त कानून कई निर्दोषों को अपना शिकार बना चुका है, आगे न जाने कितनों को बनाएगा. मैं इस भयानक राजीव ऐक्ट का किसी भी प्रकार से समर्थक नहीं हूं, हाँ मैं मोदी सरकार का समर्थक जरूर हूं और मोदी सरकार की मजबूरी समझता हूं. साथ ही यह आशा भी करता हूं कि मोदी सरकार इस राजीव गांधी ऐक्ट और ऐसे हर कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून बनाएगी. क्योंकि आज हम देख रहे हैं कि Atrocity केवल दलित के साथ ही नहीं समान्य वर्ग व पिछड़ों के साथ भी होती है. मोदी सरकार के लिए यह राजीव ऐक्ट गले की हड्डी बन चुका है जिसे न निगल सकते हैं न उगल सकते हैं. 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस भयानक ऐक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक निर्णय दिया था लेकिन यह निर्णय एक ऐसे समय आया था जब 8 राज्यों में चुनाव थे. कहते है न कि सरकार भले ही भाजपा की हो लेकिन सिस्टम तो उनका ही है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को विपक्ष ने यह कहकर दुष्प्रचार करना शुरू कर दिया की मोदी सरकार ने SC/ST ऐक्ट को कमजोर कर दिया, दलितों के कुंडल कवच छीन लिए और देशभर में प्रदर्शन और दंगे शुरू हो गए. कई राज्यों में प्रदर्शन हुए और कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। सड़क और रेल यातायात बाधित हुआ, पुलिस से झड़पें हुईं तथा आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएँ हुईं। शुरुआती रिपोर्टों में कई मौतों की खबर आई और बाद के संकलनों में कुल लगभग 14 मौतों का उल्लेख मिलता है। चुनाव का समय था और मोदी सरकार के लिए हिंसक प्रदर्शन को तत्काल रोकना जरूरी था, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले को रिव्यू करने को कहा लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल कुछ करने से मना कर दिया, अब सरकार के पास केवल एक ही रास्ता था संसद से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटना. ऐसा करके सरकार हिंसक प्रदर्शन तो रोक सकती थी लेकिन अपने कोर वोटबैंक (सवर्णों) को नाराज़ कर देती. और ऐसा हुआ भी. भाजपा सरकार चुनाव में 3 राज्य हार गई. इसका सीधा फायदा कॉंग्रेस को हुआ. अब आइए जानते हैं कि SC/ST ऐक्ट पर 2018 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की उत्पत्ति कहाँ से हुई? मामले के शिकायतकर्ता Bhaskar Karbhari Gaikwad महाराष्ट्र के Government College of Pharmacy, Karad में Store Keeper थे। उनके वरिष्ठ अधिकारियों Dr. Satish Bhise (Principal) और Dr. Kishor Burade (Professor) ने उनकी Annual Confidential Report में उनकी ईमानदारी और चरित्र पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी। 4 जनवरी 2006 को पहली शिकायत/FIR दर्ज हुई. Gaikwad ने इन दोनों अधिकारियों के विरुद्ध SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत Karad Police Station में शिकायत/FIR कराई। यानी मूल मामला Dr. Subhash Mahajan के खिलाफ नहीं था। पहली शिकायत Bhise और Burade के खिलाफ थी। जांच अधिकारी ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सामग्री होने की बात कही। लेकिन वे Class-I सरकारी अधिकारी थे, इसलिए CrPC की धारा 197 के तहत prosecution के लिए sanction की आवश्यकता का प्रश्न आया। 21 दिसंबर 2010 को Investigating Officer ने sanction के लिए मामला तत्कालीन Director of Technical Education, Dr. Subhash Kashinath Mahajan के पास भेजा। Dr. Mahajan ने 20 जनवरी 2011 को prosecution की sanction देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों अधिकारियों के विरुद्ध “C-Summary Report” दाखिल की गई। यहीं से आगे का विवाद पैदा हुआ। फिर शिकायतकर्ता ने Mahajan के खिलाफ ही मामला कर दिया, Gaikwad का आरोप था कि Dr. Mahajan को sanction देने/न देने का अधिकार नहीं था, क्योंकि दोनों अधिकारी Class-I अधिकारी थे और sanction देने का अधिकार State Government का था। इसलिए उन्होंने आरोप लगाया कि Mahajan ने जानबूझकर दोनों अधिकारियों को बचाने के लिए sanction नहीं दिया और इस तरह कानून का उल्लंघन किया। लगभग 5 साल बाद, Gaikwad ने 28 मार्च 2016 को Karad City Police Station में Dr. Subhash Mahajan के खिलाफ नई FIR दर्ज कराई। इस FIR में SC/ST Act की धाराओं 3(1)(ix), 3(2)(vi), 3(2)(vii) तथा IPC की धाराओं 182, 192, 193, 203 और 219 read with 34 लगाए गए. यही वह FIR थी जिसे Dr. Mahajan ने High Court में चुनौती दी। Dr. Mahajan ने Bombay High Court से कार्यवाही रद्द करने की मांग की, लेकिन 5 मई 2017 को High Court ने उनकी application खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने Supreme Court का दरवाजा खटखटाया।
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"नालबंद, राजा और एक कील" चलिए आज आपको एक कहानी सुनाता हूँ, बहुत समय पहले की बात है, राजा की सेना में घुसपैठ कर चुके दुश्मनों ने राजा के नालबंद को यह कहकर कि "अरे तुम राजा के घोड़े की नाल लगाते हो, जिसपर चढकर राजा युद्ध लड़ने जाते हैं और फिर भी वे तुम्हें जानते पहचानते तक नहीं हैं. राजा की नजरों में तुम्हारी कोई औकात नहीं है." भड़काना शुरू कर दिया! वैसे तो नालबंद एक बहुत मामूली आदमी होता है! लेकिन नालबंद के मन में यह बात बैठ गई और वह भी सोचने लगा कि ये बात तो सही कह रहा है. अगर मैं न होता तो राजा युद्ध ही न जीत पाता. अब राजा को सबक सिखाना पड़ेगा. अगर राजा युद्ध में हार गया तो मुझ मामूली आदमी को क्या ही फर्क़ पड़ेगा. फिर एक दिन राजा अपने राज्य की रक्षा के लिए युद्ध पर जा रहा था। उसकी सेना तैयार थी और राजा अपने घोड़े पर सवार होकर निकलने वाला था। युद्ध में जाते समय राजा के घोड़े की एक नाल ढीली हो गई। उसे ठीक करने के लिए नालबंद को बुलाया गया। नालबंद ने घोड़े की नाल देखी और नई नाल लगा दी. लेकिन उसने 4 कीलों की जगह तीन कीलें ही लगाई. उसने सोचा एक मामूली सी कील से क्या ही हो जाएगा. उसने तीन कीलों से नाल लगा दी. राजा युद्ध के लिए निकल पड़ा। कुछ दूर जाने के बाद घोड़ा दौड़ते समय नाल खो बैठा। अब पीछे नहीं हट सकते थे तो राजा तेजी से आगे बढ़ता रहा. युद्धभूमि में पहुँचने पर एक पैर में नाल न होने के कारण वह घोड़ा लंगड़ाने लगा। युद्ध के दौरान अचानक घोड़े का पैर कमजोर पड़ गया और राजा घोड़े से गिर पड़ा, जिसके कारण वह पकड़ा गया और पराजित हुआ. राजा की हार के बाद उसकी सेना भी बिखर गई और अंततः पूरा राज्य हाथ से चला गया। इस पूरी कहानी को एक कहावत के रूप में इस तरह कहा गया है कि; एक कील के अभाव में नाल खो गई। नाल के अभाव में घोड़ा खो गया। घोड़े के अभाव में सवार खो गया। सवार के अभाव में युद्ध हार गए। युद्ध हारने के कारण राज्य खो गया। और यह सब सिर्फ एक छोटी-सी नाल की कील के अभाव में हुआ। अब वर्तमान परिदृश्य में राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व के खिलाफ जो घोषित युद्ध चल रहा है उसमें; वो राजा मोदी है. नालबंद मोदी के वोटर/समर्थक हैं. नालबंद को भड़काने वाले रंगे सियार हैं. और एक कील जो कम थी वो सवर्ण हो सकते हैं. आपको लगता होगा कि मोदी हार गया तो क्या ही हो जाएगा? उपरोक्त कहानी की तरह ही देश बिखर जाएगा सब बर्बाद हो जाएगा! क्योंकि हम ही वो कील हैं जो राजा को युद्ध तो नहीं जिता सकते लेकिन उसकी हार का कारण जरूर बन सकते हैं! ये कहना या सोचना कि मोदी/भाजपा सरकार के जाने के बाद हमें कुछ नहीं होगा तो ये हमारी सबसे बड़ी मूर्खता होगी! हमने अतीत देखा है, हमने वो कॉंग्रेस और समाजवाद का वो बुरा दौर देखा है जहां गुंडागर्दी, दहशतगर्दी, आतंकवादी नक्सलवादी घटनाएं, लूट चोरी डकैती अपहरण हत्या ये सब चरम पर थी. फिर भी अगर इससे हम सबक नहीं लेते तो ये हमारी सबसे बड़ी और शायद अंतिम भूल होगी. ✍️ Abhijeet Srivastava
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मोदी ने SC/ST Act में अपराधों की संख्या बढ़ा कर 47 कर दी! वो अपराध कौन से हैं? 1. जातिसूचक शब्दों से सार्वजनिक रूप से अपमानित करना 2. SC/ST व्यक्ति को सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार करना 3. जबरन सिर मुंडवाना या कालिख पोतना 4. चप्पल/जूते की माला पहनाना 5. मल-मूत्र खिलाना या अपमानजनक कृत्य करना 6. जमीन/खेती पर अवैध कब्जा करना 7. सिंचाई जल या वन अधिकारों से वंचित करना 8. सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश से रोकना 9. धार्मिक/सामाजिक जुलूस में भाग लेने से रोकना 10. मतदान करने या चुनाव लड़ने से रोकना 11. बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर करना 12. SC/ST महिला की लज्जा भंग करना 13. यौन शोषण/छेड़छाड़ 14. सामूहिक दंड देना 15. घर जलाना या संपत्ति नष्ट करना 16. झूठे मुकदमे में फँसाना 17. SC/ST व्यक्ति को गाँव/घर छोड़ने को मजबूर करना 18. शिक्षा संस्थान में भेदभाव 19. अस्पताल/स्वास्थ्य सुविधा से वंचित करना 20. शव दफनाने/दाह संस्कार से रोकना 21. सार्वजनिक जलस्रोत से पानी लेने से रोकना 22. पेशे/रोजगार करने से रोकना 23. सामाजिक कार्यक्रम में प्रवेश से रोकना 24. पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज करने से इनकार 25. जानबूझकर झूठी गवाही देकर फँसाना 26. जमीन के दस्तावेज में धोखाधड़ी 27. SC/ST व्यक्ति की आर्थिक गतिविधि बाधित करना 28. घर तोड़ना/कब्जा करना 29. भीड़ बनाकर हमला करना 30. सामाजिक मीडिया या लिखित रूप में जातिगत अपमान 31. SC/ST महिला का यौन उत्पीड़न (विशेष प्रावधान) 32. पंचायत/स्थानीय निकाय में अधिकार से वंचित करना 33. मजदूरी देने से इनकार 34. धमकी देकर समझौता करने को मजबूर करना 35. सामूहिक रूप से सामाजिक बहिष्कार लागू करना 36. दलित/आदिवासी बस्ती में आगजनी 37. परंपरागत आजीविका छीनना 38. SC/ST व्यक्ति को अमानवीय दंड देना 39. आर्थिक लेन-देन में जाति आधार पर भेदभाव 40. वन उपज एकत्र करने से रोकना 41. विकास योजनाओं का लाभ रोकना 42. आवास योजना से वंचित करना 43. स्कूल में अलग बैठाना 44. सार्वजनिक वितरण प्रणाली से वंचित करना 45. श्मशान/कब्रिस्तान उपयोग से रोकना 46. SC/ST व्यक्ति को बेइज्जत करने हेतु साजिश करना 47. अपराध करने का प्रयास या उकसाना इन घृणित कृत्यों (अपराध) को कौन सा सभ्य समाज Justify करेगा? ✍️ Abhijeet Srivastava
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9/11 एक 9/11 के बारे में हम सब जानते हैं जिसे ओसामा बिन लादेन ने अंजाम दिया था. पर क्या आप जानते हैं? एक 9/11 राजीव गांधी ने भी अंजाम दिया था, जिसका दंश आज भी देश का एक वर्ग, एक समाज भुगत रहा है! वो था भयंकर पक्षपाती SC/ST Act जिसे राजीव गांधी ने 11 सितंबर 1989 को लागू किया था. इस ऐक्ट में बिना जांच तुरंत गिरफ्तारी, कोई जमानत नहीं जैसे घनघोर प्रावधान थे. ये ऐक्ट जिसपर लगा समझो वो गया. ये हिन्दुओं में फूट डालने का बूबी ट्रैप था, उस समय राम मंदिर आंदोलन अपने जोरो पर था, हर समाज और हर वर्ग के लोगों ने इस आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था. तब राम विरोधी कॉंग्रेस को यह अंदाजा हो चुका था कि वो अगला चुनाव नहीं जीतने वाली, इसलिए अपना दलित वोट बैंक बचाने के लिए कॉंग्रेस ने इस 9/11 को अंजाम दिया था. अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए राहुल गांधी भी हिन्दुओं में फूट डालने के लिए दलित दलित का राग अलापा करते हैं. तरह तरह के ग्लास वाले कुतर्क किया करते हैं. एक बूबी ट्रैप कॉंग्रेस ने 2013 में फिर लगाया, जब उसको लगा कि अगला चुनाव वो नहीं जीतने वाली तो उसने NOTA का विकल्प चुनावों में वोट काटने के लिए लाया. कॉंग्रेस का मानना था कि जो लोग उसे वोट करते हैं वो तो उसे वोट करेंगे ही बस नोटा का विकल्प देकर हमें भाजपा का वोट काटना है. लेकिन उसे यह पता नहीं था कि नरेंद्र मोदी की सुनामी सारे षडयंत्र बहा ले जाएगी और कॉंग्रेस को सत्ता से इस कदर बेदखल करेगी कि 2026 तक कॉंग्रेस सत्ता पाने के लिए जल बिन मछली की तरह तड़पती रहेगी. आज 2026 में भी इसी योजना पर कॉंग्रेस काम करती दिख रही है, इसलिए रंगे सियारों द्वारा आरक्षण, SC/ST act जैसे मुद्दों को हवा देकर भाजपा के वोटर में असंतोष पैदा कर रही है. क्योंकि कॉंग्रेस अच्छे से जानती है कि भाजपा से नाराज उसका वोट बैंक भाजपा के अलावा कोई और विकल्प चुनेगा तो वो NOTA ही होगा, इस प्रकार भाजपा का वोट कटेगा और मुख्य विपक्षी दल यानी कॉंग्रेस को बड़ा लाभ होगा! 2018 में भी इस मुद्दे को हवा दी गई, ऐसे समय जब 8 राज्यों में चुनाव थे और 3 राज्यों में चुनाव भाजपा हार गई. अब एक बार फिर से इसे हवा दी जा रही है इस हवाबाजी की टाईमलाइन संदेह पैदा करती है जब 2027 में 7 राज्यों में चुनाव हैं, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात मुख्य हैं जहां भाजपा सत्ता में है! न तो मैं आरक्षण का बहुत बड़ा समर्थक हूं और न ही इस भयावह राजीव गांधी ऐक्ट (SC/ST act) का, लेकिन इन मुद्दों को ऐसे समय उछाला जाना, इसे Modi Act कहना अपने आप में ही मुद्दे की पवित्रता पर संदेह उत्पन्न करता है! अब बात उठती है कि फिर कॉंग्रेस और बीजेपी में क्या अन्तर रह गया? अब भी बहुत बड़ा अंतर है... जो अन्तर धूर्तता और मजबूरी में होता है... कॉंग्रेस ने जो किया वो उसकी धूर्तता थी... बीजेपी ने जो किया वो उसकी मजबूरी थी... हालाकि फिर भी मैं इसे सही नहीं मानता लेकिन वोट बीजेपी को ही दूंगा... साथ ही मोदी सरकार को एक सुझाव भी दूंगा कि EWS आरक्षण की तरह SC/ST ऐक्ट में Gen और OBC को शामिल करके इसका भी दायरा बढ़ा दे. फिर सभी के पास यह विशेष कानून होगा. फिर कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ती या समाज पर आपत्तिजनक टीका टिप्पणी करने से पहले पचास बार सोचेगा! ✍️ Abhijeet Srivastava
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"वामपंथी ब्रेनवाश" SC/ST Act अब Modi Act हो चुका है, और रंगे सियारों ने यह नामकरण किया है! आश्चर्य की बात तो यह है कि हमारे कई सारे मोदी समर्थक राष्ट्रवादी मित्रो को भी यही शब्दावली इस्तेमाल करते देख रहा हूँ! SC/ST Act अब Modi Act हो गया है भले ही यह खतरनाक कानून 1989 में राजीव गांधी की सरकार ने बनाया हो! क्या मोदी सरकार ने इसमें कुछ अलग बदलाव किया जो 2018 से पहले 1989 से चले आ रहे SC/ST act में नहीं था? नहीं. तो फिर इसे Modi Act क्यों कहा जा रहा है? इस ब्रेनवाश के पीछे क्या मंशा है? 👉 20 मार्च 2018 को क्या हुआ था? सुप्रीम कोर्ट के Dr. Subhash Kashinath Mahajan v. State of Maharashtra फैसले में कुछ सुरक्षा उपाय लगाए गए: 1. सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी से पहले appointing authority की approval; 2. गैर-सरकारी व्यक्ति की गिरफ्तारी से पहले SSP की approval; 3. SC/ST Act के आरोप की FIR से पहले DSP द्वारा preliminary enquiry; 4. और अगर prima facie मामला नहीं बनता या शिकायत prima facie mala fide है, तो anticipatory bail संभव हो सकती है। 👉 20 मार्च 2018 के पहले क्या कानून था? 1. Anticipatory Bail पर रोक थी 2. FIR के लिए कोई विशेष preliminary enquiry अनिवार्य नहीं थी 3. गिरफ्तारी के लिए पहले से किसी अधिकारी की अनुमति वाली शर्त नहीं थी 👉 2018 के संशोधन के बाद क्या कानून बना? 1. Section 18A जोड़ा गया। 2. SC/ST Act के मामले में FIR दर्ज करने से पहले preliminary enquiry आवश्यक नहीं रखी गई। 3. गिरफ्तारी के लिए किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं रखी गई। 4. Act के मामलों में anticipatory bail पर रोक वाली व्यवस्था को फिर स्पष्ट किया गया। यानी मोदी सरकार ने SC/ST Act को कमजोर/मजबूत नहीं किया; बस पहले की तरह ही कर दिया जैसा राजीव गांधी ने बनाया था! उसके बाद 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 संशोधन की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी इसपर मोहर लगा दी! अब मेरा प्रश्न इसे Modi Act कहने वाले उन लोगों से है, इस कानून में मोदी ने क्या नया खतरनाक खंड/उप खंड जोड़ दिया जो पहले से इसमें नहीं था? इसे राजीव Act क्यों नहीं कहा जा रहा? आखिरकार इस खतरनाक Act के जन्मदाता वही तो हैं! यही कॉंग्रेस एक और खतरनाक Act लाने का प्रयास कर चुकी है, साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण Act. जो इसी भाजपा के कारण सांसद से पारित नहीं हो सका था. वर्ना आज जो अवर्ण और सवर्ण बन मोदी/भाजपा को गरियाते घूम रहे हैं वो अपने घर से निकल नहीं सकते थे, खुलकर अपने त्योहार नहीं मना सकते थे, क्योंकि ये ऐक्ट हिन्दुओं को ही हिंसक और दंगाई बताने वाला कानून था. रही बात इसमें मुआवजे की व्यवस्था की तो यह भी 1995 से चली आ रही है, तब भी भाजपा सरकार नहीं थी! हाँ मोदी सरकार ने मुआवजे की राशि को बढ़ाया जरूर है! बाकी कहते हैं विनाश काले विपरित बुद्धि, जिनकी बुद्धि फिर चुकी है और जो धूर्त रंगे सियार हैं केवल वही इसे Modi Act कहकर भाजपा हटाओ अभियान चला रहे हैं, ताकि फिर से उसी कॉंग्रेस को सत्ता तक पहुंचाया जा सके जिसने यह खतरनाक कानून बनाया है! ✍️ Abhijeet Srivastava
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एक आदमी उस राजनैतिक दल का सर्वोच्च नेता है जो न जाने कितने अथक प्रयासों, राजनैतिक आंदोलन, उतार चढावा, षडयंत्रों से लड़ कर आज प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचा है. उसने भाजपा को संपूर्ण भारत में स्थापित किया है. सिर्फ पिछले 25 वर्षों से वो सत्ता सम्भाल रहा है. उससे पहले वो भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में भाजपा के लिए कई वर्षों तक कॉंग्रेस के कुशासन के खिलाफ लड़ता रहा, वो राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए लड़ा, उसने हिन्दुत्व के लिए भी लड़ाइयां लड़ी! उसपर उसकी मां पर उसकी पत्नी को लेकर और उसके अस्तित्व पर न जाने कब से उसके राजनैतिक विरोधियों ने कितने ही गंदे कीचड़ उछाले! इतना ही नहीं सत्ता का दुरुपयोग करके उसे फर्जी केस में फंसने के कई प्रयास कॉंग्रेस ने किए! लेकिन इन सब षडयंत्रों से लड़ते हुए वो व्यक्ती आज इस देश का प्रधानमंत्री है! अब मेरा सवाल उन राष्ट्रवादी भाइयों से है, उन भाजपा कार्यकर्ताओं से है, उन भाजपा पदाधिकारियों से है, उन हिन्दूवादीयों से है जो इन दिनों किसी रंगे सियार की टुच्ची, गाली गलौज वाली भाषा पर वाह वाह कर रहे हैं, रंगे सियार के षडयंत्रों में फंसकर उसकी ही भाषा बोल रहे हैं! इससे किसको लाभ होगा? अगर आपके बच्चों को प्रधानमंत्री मोदी या रंगे सियार में से किसी एक से प्रेरणा लेनी होगी तो आप किससे प्रेरणा लेने को कहेंगे? ये यूट्यूब और सोशल मीडिया पर आए दिन trolling और गाली गलौज करने वालों ने कभी उस व्यक्ती के नाखून बराबर भी संघर्ष नहीं किया होगा! राजनैतिक अपरिपक्वता से ग्रसित व्यक्ती न तो समाज का भला कर सकता है न देश का! रंगे सियार ऐसे ही अपरिपक्व धूर्त हैं जो जानबूझकर आपको एक ऐसे व्यक्ती के खिलाफ भड़का रहे हैं जिसने इस देश के लिए, हिन्दू समाज के लिए बहुत कुछ किया है और लगातार कर रहे हैं! ✍️ Abhijeet Srivastava
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2014 में नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव वाराणसी और वडोदरा—दोनों जगह से लड़ा था। वाराणसी में उन्हें 56.37% वोट मिले थे, जबकि वडोदरा में उन्हें 72.75% वोट मिले—एक ऐसा जनादेश, जो बताता था कि वडोदरा ने मोदी जी को कितने बड़े विश्वास के साथ अपना माना था। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने वाराणसी को अपनी संसदीय सीट बनाए रखने का फैसला किया और वडोदरा छोड़ दिया। सीट तो छोड़ दी, पर रिश्ता नहीं छोड़ा। आज इतने वर्षों बाद भी यह रिश्ता उसी तरह दिखाई देता है। आज प्रधानमंत्री मोदी ने वडोदरा में ₹35,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास किया। सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है Dedicated Freight Corridor का पूरा होना। मुंबई के JNPT से दादरी तक जाने वाले Western DFC के तीन महत्वपूर्ण सेक्शन आज राष्ट्र को समर्पित हुए। इसके साथ पूर्वी और पश्चिमी—मिलाकर 2,800 किलोमीटर से अधिक का Dedicated Freight Corridor नेटवर्क पूरा हो गया। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की logistics transformation के लिए एक बड़ा milestone बताया है। और इस कहानी का एक दिलचस्प अध्याय भी है। DFC की परिकल्पना और स्वीकृति 2006 में मनमोहन सिंह सरकार के समय हुई थी। अक्टूबर 2006 में Western Dedicated Freight Corridor का foundation stone भी रखा गया था। लेकिन 2014 तक जमीन पर एक किलोमीटर भी track नहीं बिछा था। 2014 के बाद उसी परियोजना को गति मिली। 2026 में वही सपना 2,800 किलोमीटर के operational freight network में बदल गया। आज वडोदरा से नई freight services शुरू हुईं, नई passenger train को हरी झंडी मिली, लगभग ₹9,700 करोड़ के तीन railway expansion projects और करीब ₹1,780 करोड़ के highway projects की आधारशिला रखी गई। इसके अलावा करीब ₹2,600 करोड़ के civic और infrastructure projects भी शुरू हुए जिसमें कडाना डैम पर एक फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी शामिल है। और वडोदरा के लिए शायद सबसे भावनात्मक परियोजनाओं में से एक—विश्वामित्री नदी का revival, flood management और redevelopment. ₹1,200 करोड़ की इस योजना का उद्देश्य वर्षों से शहर के लिए समस्या बनी बाढ़ के खतरे को कम करना और नदी का पुनर्विकास करना है। मोदी ने वडोदरा की सीट छोड़ी थी। लेकिन वडोदरा को नहीं छोड़ा। आज के ₹35,000 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट उसी रिश्ते का सबसे बड़ा प्रमाण हैं। वडोदरा ने 2014 में मोदी पर भरोसा किया था। मोदी आज भी उस भरोसे का जवाब विकास से दे रहे हैं।
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